RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

सोचो ज़रा हट के

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Rajkamal Sharma


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“”कांतिलाल गोडबोले – फ्राम किशनगंज ”

Posted On: 14 Sep, 2011  
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“करिश्मा कुदरत का”

Posted On: 8 Sep, 2011  
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“अधूरी – मोहब्बत”

Posted On: 5 Sep, 2011  
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“अनीता पाल’ – ‘राजकुमारी एक खलनायिका”

Posted On: 3 Sep, 2011  
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नया राजकमल शर्मा “गधा”

Posted On: 29 Aug, 2011  
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“नज़र –निगाह –देखना” – “नमक- ऐ – शायरी”

Posted On: 20 Jul, 2011  
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“प्रधानमंत्री की साफ़- सफाई -भाग दो”

Posted On: 16 Jul, 2011  
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“बचना ऐ हसीनो ! लो मैं आ गया”

Posted On: 13 Jul, 2011  
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“प्रिय अबोध बालक जी की माता जी का देहांत”

Posted On: 10 Jul, 2011  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

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आदरणीय अजय जी ..... सादर प्रणाम ! अगर लेख के मूल विषय और इसमें लिखित सभी बातों ने आपको मानसिक आघात पहुंचाया है तो उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ ..... लेकिन आपसे यह गुजारिश करना चाहता हूँ की मेरी कुछेक जिज्ञासाओं को शांत करे :- *अपने पिछले आंदोलन में बाबा जी ने पुलिस के कहने पर भी +समय देने पर भी पनी गिरफ्तारी स्वेच्छा से क्यों नहीं दी ?...... जब अनशन +धरना +भूख हड़ताल + रोष प्रदर्शन करने के लिए मैदान में कूद ही पड़े थे तो पहले से ही इस संभावना पर भी विचार कर लेना चाहिय था की गिरफ्तारी भी देनी पड़ सकती है ..... *जिस नेता +स्वामी जी को जनता की अगुवाई करनी चाहिए थी वोह तो खुद ही उसका आश्रय लेने में क्यों जुटे थे ..... *अगर बाबा जी को उस रात भगवान ना करे की कुछ हर्ज मर्ज हो जाती तो क्या आप सिर्फ ब्लॉग लिखने तक ही सिमित रहते ?.... उसकी बजाय कुछ करते नहीं ?..... जब ऐसी बात है तो सरकार को क्या पड़ी थी की बाबा जी पर लाखों लोगों की भीड़ के सामने बाबा जी का टिकट कटवाया जाता और अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली जाती .... *अपने कायराना +स्त्रियोचित आचरण को न्याओचित ठहराने के लिए एक स्वामी +योग गुरु का झूठ बोलना और गलतबयानी करना किस लिहाज से जायज है ?..... *सारा देश जानना चाहता है की अपार जन समर्थन साथ में होने के बावजूद भी बाबा जी ने अपने कदमों को पीछे क्यों खीच लिया है ?..... *क्या यह जन आंदोलन करने वाले कार्यकर्ताओं के साथ विश्वासघात नहीं है +छल नहीं है +उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं है?...... *आखिरकार किस दबाव में +सौदेबाजी के तहत + ब्लैकमेलिंग के चलते बाबा जी ने अगले आम चुनावों से पहले निष्क्रिय होने की ठान ली है +घोषणा की है ?..... अगर आपके पास मेरे उपरोक्त सवालों के जवाब है तो किरपा करके मेरे मन को शांति प्रदान करने की किर्पालता जरूर कीजियेगा ..... आपके सवाल और शंकाए जान कर ज्ञान में बढोतरी हुई आगे भी इसी प्रकार से मार्गदर्शन करते रहिएगा आपका हार्दिक आभारी हूँ

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

राजकमल जी, नमस्कार   क्षमा कीजिये,आप जैसे लेखक द्वारा इस स्तरहीन व्यंग और विरोधाभासी विचार से दुःख ही होता है। किसी की हँसी उड़ाना बहुत सरल है।अन्ना जी या रामदेव जी ने जो कर दिया है या जो कर रहे हैं यदि उसका एक प्रतिशत भी करने वाला उनकी हँसी उड़ाये तो कुछ बात है।अन्ना जी या रामदेव जी ने  अपनी पहचान नेक काम के द्वारा बनाई है,उनका जो प्रभाव समाज में है वो प्रत्यक्ष दिखा, और उनके समर्थन में अपार जनसमूह ने जिस उच्चकोटि के अनुशासन का परिचय दिया तनिक उस बारे में भी सोच लेते।रामदेव जी ने जो अपार धन सम्पदा अर्जित की है वो कोई कृपा बरसाने या अन्धविश्वास फैलाकर नहीं की है।सरकार से सीधी लड़ाई करने वाले के बाबा और अन्ना टीम के पीछे सरकार हाथ धोकर पड़ी है। यदि इन लोगों की कमी पकड़ मे आती तो सरकारी मशीन इन्हे पीस ही डालती।अन्ना,रामदेव,केजरीवाल, किरनबेदी आदि जो संघर्ष कर रहे है उसमे कितना उनका निजी स्वार्थ है और कितना जनसाधारण का!    अन्ना को गलत दवा दे कर शक्तिहीन किया गया। रामदेव को स्त्री भेष धारण करना पड़ा आपको बहुत हँसी आयी, किन्तु क्या हम आप अपने हाथों मे चूड़ियां पहन पांव मे मेंहदी रचाये थे जो घर में पड़े रहे? लाठी चार्ज में किसी की धोती खुल गयी होगी तो भी आपको हँसी ही आयी होगी दुःख-दया या क्रोध नहीं। यदि आप जैसे लोग ऐसे लोगों की हँसी उड़ाएगें तो सच में कोई साधारण व्यक्ति  हमारी मदद नहीं करना चाहेगा किन्तु मसीहों की बात न करें। मसीहा को आपके व्यंग या किसी की प्रशंसा से कोई फर्क नहीं पड़ता।        विरोधाभास ये कि हमे ये लड़ाई खुद लड़नी हागी,खुद संगठित भी करना होगा,जनता को जागरूक होना होगा, किन्तु आप तो जो लोग जागरूक कर रहे हैं उन्ही मे दोष और व्यंग-विषय ढूढ़ रहे हैं। संगठित कौन करे, बिना नेता (अगुआ) के कौन संगठन,कौन लड़ाई? देश में आपकी दृष्टि में अन्ना से बेहतर कौन नेता है?रामदेव जैसे प्रभावशाली और देश के विषय में इतना संघर्ष करने वाले कितने और लोग हैं?    एक रसोइया को राष्ट्रपति बना दिया जाता है जो कार्यकाल समाप्त होने पर राष्ट्रपति भवन से दस ट्रक  सामान उठा ले जाती है।एक राजनैतिक कलाकार को जो मंत्री रहते हुए असफल व भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा  हो को राष्ट्रपति बना कर संविधान का नाम लेकर उनपर आरोप लगाने को अपराध बता कर जनसाधारण का मुहँ बन्द कर दिया जाता है और हम लोग........अपने ही लोगों की हँसी उड़ा रहे हैं!!!!!!!!!!      कमियां किसमे नहीं होती? स्वयं मुझे रामदेव जी की विपक्षी राजनैतिक दलों को अपने आन्दोलन से जोड़ने की नीति बुरी लगी। भ्रष्टाचार या काला धन के मुद्दे पर वर्तमान कोई भी राजनैतिक दल गम्भीर नहीं है अन्यथा इतनी बड़ी लड़ाई नहीं लड़नी पड़ती।फिर भी रामदेव जी की हँसी तो नहीं उड़ा सकते।     मेरी भी सभी से एक प्रार्थना है कि देश,समाज के हित के लिये जो लोग संघर्ष कर रहे हैं उनका  उत्साह वर्धन करिये, उनका सहयोग करिये, कम से कम उनका मान मर्दन तो न करें। हमें अपना दर्शन बघारने के, लेखन कौशल दिखाने के अनेक अवसर मिलेंगे। लेकिन ऐसा अवसर बार-बार नहीं आता कि अन्ना या बाबा जैसा प्रभावशाली व्यक्ति हमारी आपकी आवाज उठाये और हमारी लड़ाई लड़े। आन्दोलन हर दिन या हर वर्ष नही होते।ऐसे आन्दोलन का हिस्सा बनने का अवसर कभी कभी ही आता है। धन,जन,लेखन जैसे भी हो अपना योगदान करिये....  समर शेष है , नहीं पाप का भागी केवल व्याध ; जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध |

के द्वारा: ajaykumarsingh ajaykumarsingh

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

अन्ना जी और बाबा जी चाह कर भी हमारी कोई मदद नहीं कर पायेंगे ….. अपनी लड़ाई अब हमको खुद ही लड़नी होगी और उसके लिए खुद को संगठित भी करना होगा ….. इसके लिए देश की ज्यादातर असंतुष्ट जनता का जागरूक होना अति आवश्यक है आँखे तरस रही थीं इस सी सी टी वी फूटेज को ये ट्रांसमीटर की आवाज हमारे दरोगा जी ही कैच कर सकते थे ..अंत में आप के सार को ही हम भी पकड़ लेते हैं शायद कोई बात बने सच में सरकार अब बड़ी हिम्मत वाली हो गयी है आप जैसे लोग जब से कांग्रेसी ....ह हा ...बहुत आनंद दाई रहा ये सफ़र ...ये सब सच में परीक्षा में पास होते रहेंगे चाहे कुछ न आता हो ..क्योंकि उनकी माता वो .... जय श्री राधे ...मंजिल जब तक मिलती नहीं राहों की तलाश होती रहती है भाई जी ....संसार छे चाले छे भ्रमर ५

के द्वारा:

के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat

आदरणीय गुरुदेव ,..सादर प्रणाम आपकी तीसरी आँख के क्या कहने ,.सब पर्दाफाश कर दिया ,..इस बार संभवतः कैमरे के आगे काली फिल्म कुछ ज्यादा चढ़ गयी है ,.....आपका आकलन सत्य से परे भी नहीं है ,..अन्नाजी को गलत दवा देने की बात पिछले साल बाबाजी ने कही थी ,..मूरखों ने भी डाक्टर को इनाम मिलने की मिठाई खिलाई थी ,..तब अन्नाजी ने ही इसका विरोध किया था ,..शेष क्या लिखूं ?....आपका आकलन निराधार भी नहीं है ,..अंततः हमें यही करना होगा ,..राष्ट्र पर खतरा है ,.सभी राष्ट्रभक्तों का एकजुट होना जरूरी है ,...कोई किसी की मदद नहीं करता है ,..वो नियति होती है जो करती या करवाती है ,.... बाबाजी की देशसेवा , समर्पण और साहस को प्रणाम करता हूँ ,..अन्नाजी को नमन है .....कारवां बढ़ता जाएगा ,..एक दिन मंजिल जरूर मिलेगी ...सादर आभार सहित वन्देमातरम

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

जय श्री श्याम राज कमल जी /बात तो आपकी सही हें अपनी लड़ाई जनता को खुद ही लडनी हें / कोई काले धन को लेकर रो रहा हें तो लोकपाल को / इन मुद्दों को उठाने वालों को देशी व् विदेशी सहयता मिल रही हें / करोड़ों दान में मिल रहें हें / सब धन को लेकर विचलित हें / पर मेरे जेसी आम जनता आम आदमी बस यही कहता हें - गौ धन गज धन बाजी धन और रतन धन खान , जब आवे संतोष धन सब धूरि समान / बाबा को शायद पता हें - माया महाठगिनी हम जानी , तिरगुन फांस लिए कर डोले बोले मधुरि वाणी / बाबा जी के पास भी देशी विदेशी माया हें ऐसा सूना हें / लोकपाल टीम के पास भी माल की कमी नहीं वो भी विदेशी माल पर हाथ साफ़ कर रहें हें ऐसी मीडिया में खबरें हें / जिसका खाओ उसका गाओ की तर्ज पर ये मुद्दे उठाते हें / जनता के महगाई , बेरोजगारी , शिक्षा . चिकित्सा की समस्या से इनका क्या सरोकार / जनता के समस्या को जनता को ही उठाना होगा / बाबा हो या कोई और सब इस्तेमाल करो और फेंकों की नीति पर चल स्वार्थ सिध्धि में लगें हें

के द्वारा: satish3840 satish3840

परम आदरणीय, आपके अयक्ष प्रश्न के अनेक उत्तर दिये हैं। वह भी हिन्दी में। यदि आपकी समझ में न आयें तो इसमें उन उत्तरों का दोष नहीं है। उत्तर इतने हैं कि प्रश्न अस्तित्वहीन हो जायगा। चूँकि आपकी प्रश्न की मंशा दूषित है, अतः उत्तर समझ पाना मुश्किल है। हाँ मेरे द्वारा  पूर्व में आपसे पूँछे गये कई प्रश्न अनुत्तरित हैं। और संभवतः आपकी मानसिकता की  वजह से अनुत्तरित ही रहेंगे। मैंने आपके प्रश्न के संबंध में भी प्रश्न पूछे थे। वह अनुत्तरित क्यों हैं यह भी एक प्रश्न है। आपका प्रश्न नास्तिकता  का घोतक है। प्रथम आस्तिक बनिये। आपको अपने प्रश्नों में ही उत्तर नजर आ जायगा। यह कैसी आस्तिकता जो नास्तिकता से भरी हो। आपके मिॆथ्या आरोप आपकी नास्तिकता का प्रमाण हैं। 

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

आदरणीय गुरुदेव, सादर अभिवादन! सर्वप्रथम आपके इस आलेख को दैनिक जागरण में छपने के लिए बधाई! मैंने काफी पहले इस लेख को पढ़ा था, अपनी प्रतिक्रिया न देखकर हैरान हूँ! इधर अपने घर के नेटवर्क, और तेलेफोने लाइन की गडबडी से परेशान हूँ! कभी कभी कई घंटे लग जाते हैं और नेटवर्क से सम्बन्ध नहीं बना पाता हूँ. टेलीफोन लाइन की गड़बड़ी मुख्य कारण है बीएसएनएल की सेवा भावना तो आप भी समझते ही होंगे. लगभग रोज ही शिकायत करता हूँ ... रोज ही क्लोज भी हो जाता है समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है! "आपके उपयुक्त जवाब का समर्थन करता हूँ! पर आप भी जानते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच जब भी मैच हुआ है .. संबंधों पर कोई खास असर नहीं पड़ा है! वैसे खेलें, मनोरंजन करें, जनता कम से कम उन समयों में ज्वलंत मामले से दूर रहेगी ! आभार और आदर सहित!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: D33P D33P

आदरणीय राहुल भाई ..... सादर अभिवादन हम पर इट क्रिकेट -ड्रिंक क्रिकेट -स्लीप क्रिकेट की सोच थोपी गई जोकि अब हम पर हावी होने के बाद सवार हो चुकी है ..... खेलो का बजट नाममात्र होता है ..... सिर्फ ओलम्पिक के वक्त ही हमको दूसरे खेल याद आते है ..... खिलाडियों को सुविधा -खानपान -प्रोत्साहन -आर्थिक सहायता तथा प्रयोजक मिलते नहीं है और हम उम्मीद करते है की हमारे अनुभवहीन फिस्सडी खिलाड़ी पदकों का ढेर लगा दे ..... हमारी नीयत तथा नीतिया ठीक नहीं है तो फिर रिजल्ट भी गलत ही आयेंगे न ..... हमारा राष्ट्रिय खेल हाकी आज कहाँ पहुँच गया है देख कर ही शर्म आती है -हाकी में राजनीति बहुत ही ज्याद है -इसी तरह ही के हालात बाकी के खेलो में भी है .... खेल महकमों के प्रमुख खेलो से जुड़े हुए व्यक्ति को ही बनाया जाना चाहिए बजाय किसी राजनेता के ..... अगर बुनियादी सुधार नहीं किये जाते है तो परिणाम और हालात पूर्ववत ही रहेंगे आपके अनमोल विचारों के लिए हार्दिक शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय भ्रमर जी ..... सादर प्रणाम ! आप तो ज्ञानी है शायद महा ज्ञानी भी !!! –हा हा हा हा हा हा इसलिए इस बात कों भली भांति जानते ही होंगे की सभी रिश्ते नाते और व्यवहार स्वार्थ+अपना स्व हित साधने तक ही सही +प्रिय और जरूरी होते है ......आजकल के जमाने में किसी से कुछ आशा करना +बदले में कुछ चाहना व्यर्थ है .... आपकी चिंता बिलकुल जायज है हमारे प्रशाशन और तंत्र में काली भेड़े भी है ..... जिनकी नीयत में खोट के चलते पकिस्तान से मैच देखें आये हुए अधिकाँश दर्शक गुम हो जाते है .....इस समस्या का इलाज तो सरकार कों गम्भीरता से खोजना ही चाहिए .... आपकी देशभक्त सोच कों सलाम यूँ ही हँसते रहिये मुस्कराते रहिये और खुशियों कों बांटते रहिये दिल की सभी तहों से शुक्रिये सहित जय श्री कृष्ण

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय सतीश जी ..... सादर अभिवादन ! हमे कुछ बाते ध्यान में रखनी होगी :- *आज दो की बजाय विश्व में सिर्फ एक ही महा शक्ति है –अमेरि़का *भारत में उस समय के दम घोटू माहौल की बजाय वैश्वीकरण की बदौलत उपजा हुआ खुला माहौल है *भारत और पाक परमाणु शक्ति सम्पन्न देश बन चुके है जिनमे की सपने में भी सीधे युद्ध की सम्भावना ना के बराबर है *इंदिरा जी ने कोका कोला कों उसके घर में वापिस पहुंचा दिया था +बंगलादेश के मामले में सिर्फ अपने मन और विवेक की मानी थी आज किस नेता में इतना साहस और विवेक है ? इसलिए हमारे आज के नेता कभी हाँ तो कभी ना की नीति पर चलते हुए दुश्मन देश कों कभी ब्लैकमेल करते हुए तथा कभी उसका समर्थन करते हुए अपने अविवेकपूर्ण फैसलों देश की जनता कों यूँ ही मुर्ख बनाते रहेंगे सादर आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय राजीव जी .... सादर अभिवादन ! हम जनता जनार्दन के चिंता करने से आखिर होगा ही क्या ? हम तो कठपुतलिया है , जैसा हुक्मरान हमको नचाते है –हम बस वैसा ही नाचते है ..... हमारी अपनी कोई पसंद और नापसंद नहीं है ..... कारगिल युद्ध के लिए जिम्मेदार मुशर्रफ कों जब हमारी तब की (अटल जी +आडवाणी जी की )सरकार रेड कारपेट पर स्वागत करते हुए मुर्ग मुसल्लम की लजीज दावतो से देश की जनता कों इस भरम में डालती है की अब तो बस कश्मीर समस्या का हाल निकला की निकला .... तब हमारे मीडिया की बदौलत हम सभी भेड़चाल चलते हुए उन न पुरे हो सकने वाले सपनो कों देखने में जुट जाते है और यथा राजा तथा प्रजा वाली उक्ति कों चरितार्थ करने में लग जाते है ..... आपका बहुत -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

प्रिय शशिभूषण जी .... सप्रेम नमस्कारम ! क्षमायाचना सहित कहना चाहूँगा की हम उलटी तरफ क्यों चलते है ? पकिस्तान के साथ बस सेवा और रेल सेवा निरंतर चालू है , जबकि उनके द्वारा आम नागरिको के भेष में आंतकी भी आसानी से आ सकते है ..... जब सरकार के उन फैसलों पर हमे कोई ऐतराज़ नहीं है तो फिर खेल संबंधो की बहाली पर ही क्यों .... खेलों की बजाय उसके साथ हर तरह के व्यापार पर प्रतिबन्ध की मांग क्यों नहीं की जाती ?...... अगर रिश्ते समाप्त करने है तो पूरी तरह से हो नाकि आधे अधूरे ..... क्रिकेट कों जब जी चाहा खेल लिया जब मन में आया बन्द कर दिया ..... उनके क्रिकेट बोर्ड की आर्थिक रूप से कमजोरी से क्या उस नापाक देश के मजबूत इरादों में कोई कमी आ सकती है , कभी नहीं ..... जबकि हम व्यापार द्वारा उसकी आर्थिकता कों मजबूती प्रदान करते चले जा रहे है .... हार्दिक धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

पूज्यनीय कुशवाहा जी ..... सादर प्रणाम ! आपका कहना शत प्रतिशत ठीक है ..... भारत में इतनी कुव्वत नहीं की अपनी शर्ते मनवा सके +कुछ सोदेबाज़ी कर सके .... इसलिए पूरी संभावना तो यही बनती है की बिना किसी शर्त के खेल सम्बन्धों कों बहाल किया गया है .....अगर सरबजीत की फांसी कों ही रुकवा लिया जाता तो भी कुछ तसल्ली की बात होती ..... आपने भोलू की शादी की सम्भावनाओं के बारे में बताया है जान कर मन हर्षित हुआ ..... आपका स्वास्थ्य अब कैसा है पता दीजियेगा आपकी सक्रियता और साहित्य के प्रति आपका समर्पण सच में ही प्रेरणादायक है ..... मैं आपसे यही गुजारिश करना चाहता हूँ की यहाँ पर हम सभी स्वार्थी है .... आप इतने लंबे कमेंट्स की बजाय सिर्फ दो शब्द आशीर्वाद के ही कह दिया करे तो भी काफी है हमारे लिए ..... इससे जो समय बचेगा उसमे आप कोई किताब वगैरह लिख सकते है ...... आपका जितना भी आभार प्रकट किया जाए कम ही होगा ..... श्रदा सहित नमन

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय मनोरंजन ठाकुर जी .... सादर अभिवादन ! इसमें पैसे का रोल उतना नहीं है जितना की हमको नजर आता है .... हम पकिस्तान के साथ व्यापार करके उसकी आर्थिकता कों मजबूती प्रदान कर ही रहे है निरन्तर ..... जब देश आर्थिक रूप से कुछ हद तक अगर मजबूत हो तो उसका एक खेल विभाग अगर कंगला भी हो तो कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है ..... यह अलग बात है की अब उसका क्रिकेट बोर्ड भी मालामाल हो जाएगा ..... आप इस बात कों क्यों भूलते है की अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने विश्व कप के पकिस्तान में ना हो सकने वाले मैचों के लिया उसको पूरा भुगतान किया था .....किसी तीसरे दूसरे देश में जाकर भी पाकिस्तान क्रिकेट थोडा बहुत खेल ही रहा है .... लेकिन सबसे ज्यादा रंज उनको आई.पी.एल . तथा भारत के साथ मैच न खेल सकने से था जोकि अब दूर होने वाला है ..... हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय निशा जी ..... सादर प्रणाम ! पाकिस्तान कुत्ते की टेढ़ी पूंछ की भाँती है ..... मेरा ऐसा मानना है की जब यह फँसा हुआ होता है तो आपकी हरेक बात मानेगा लेकिन आपकी गिरफ्त से आजाद होते ही अपने असली रंग में तुरंत आ जाएगा ..... इसकी फितरत कुछ ऐसी है की इसको गर्म तवे पर बिठा कर अगर इससे कुछ वायदा लिया जाए तब भी बाद में यह उससे पूरी तरह से मुकर सकता है ...... इसलिए इसके सुधरने की आशा करना सपने देखने के समान है ..... अब यह जैसा भी हमारा (अलग हुआ बाजू 1947 में ) पड़ोसी है ,इसको तो हम क्या भगवान भी नहीं बदल सकते ,इसलिए सावधानीपूर्वक जितने भी कम से कम सम्बन्ध बनाने जरूरी हो उतने ही इससे बनाए जाने चाहिए .... लेकिन फिर कहूँगा की खेल इस सबसे अछूते ही रहने चाहिए ..... हार्दिक धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

राजकमल जी,सादर नमस्कार,देश का सबसे महत्वपूर्ण काम क्रिकेट खेलना है,मेरा अपार अनुभव यह साबित करने के लिए मेहनत भी नहीं करेगा क्यूंकि सब यह जानते हैं.जीवन का लक्ष्य क्रिकेट में डूब जाना है,गरीब आदमी त्रस्त है क्यूंकि उसके पास टीवी नहीं है,न ही वो पेट भर सकता है जो चैन से बैठ कर क्रिकेट देखे,अमीर आदमी चैन से पेट भरकर आराम करता है तो क्रिकेट देखता है,युवा पीढ़ी का पढने में मन नहीं लगता,सोचता है क्रिकेट खेल के अमीर बन जाएगा,१० दुश्मन को गोली मार दो,कोई नहीं पहचानेगा,एक शतक मार दो,इंडिया दीवाना हो जायेगा,ऐसे में क्रिकेट से महत्वपूर्ण कोई काम निकल आये देश में तो बता दीजिये.मैं तो कहता हूँ कि क्रिकेट वाले ज्यादा भाव खाते हो तो कुश्ती या मुक्केबाजी की भारत-पाक श्रंखला होनी चाहिए,लेकिन दोनों देश की सरकारों को पोपुलारिटी चाहिए न,तो अब बताइए क्रिकेट से बड़ा कोई ब्रांड है क्या?

के द्वारा: rahulpriyadarshi rahulpriyadarshi

आज के ताज़ा समाचार भारत ने पाकिस्तानी नागरिको और वहा की कम्पनियों को अपने देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने की अनुमति दे दी है ! केंद्र सरकार ये यह फैसला पाकिस्तान से व्यापारिक सम्बन्ध बदने के लिए लिया है अब पाकिस्तानी नागरिक और वहां पंजीकृत कम्पनियाँ भारत में परमाणु उर्जा ,रक्षा और अन्तरिक्ष के क्षेत्र को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रो में निवेश कर सकेंगे और यहाँ निवेश भी सरकारी रूट के जरिये हो सकेगा ! पता नहीं भारत सरकार अपने दुश्मन के साथ ऐसा वर्ताव कर क्या साबित करना चाहती है ? विदेशी निवेश की उम्मीद पाकिस्तान जैसे देश से कर रही है किसी पूंजीवादी देश से ऐसी उम्मीद करती तो कुछ बात होती .......दुश्मनों को अपने देश में घुसने का न्योता खुले आम दे रही है !क्या पाकिस्तान अपनी घात की आदत से बाज आएगा?

के द्वारा: D33P D33P

बिना राजनीति के तो आज सांस लेना भी दूभर है तो खेल क्या है बच्चा पैदा होते ही राजनीति किस के ब्लाक में या किस थाणे में किस देश में किसको वोट करेगा वोट के टाइम तो सब अपने मरने पर उसकी सीमा में ....अमेरिका की कूटनीत और दूरदर्शिता बहुत आगे की रहती है और दबाव बहुत कारगर अब बेचारे भूखे प्यासे न माने तो खाएं क्या ?? हमारे देशभक्त जवानों को सिर्फ तीन चीजें ही उतेजित और रोमांचित करती है – कैट और करीना सरीखी हीरोइने + प्रियजनों के भेजे हुए सन्देश और भारत पाक के बीच क्रिकेट मैच में भारत की जीत ….. भारत पाक के बीच मैच में जीतने पर उनको ऐसा महसूस होता है की जैसे उनकी तरफ से भारत के ग्यारह महायोद्धा जंग को जीत रहे है ….. बहुत सुन्दर उनको ये सब खुशियाँ मुबारक हो गुरुदेव हम तो सब सहते ही रहेंगे बस चली ट्रेन चली फिर क्रिकेट का टिकेट मिलेगा खेल शुरू आधे वहीं से गायब ....चाले छे संसार छे ..........हंसी व्यंग्य के तडके के साथ हिट मूवी ये भी भ्रमर ५

के द्वारा:

आदरणीय जवाहर लाल जी ...... सादर अभिवादन ! आप खुद ही सोचिये और बतलाइये की इसमें विवाद आखिरकार है कहाँ ? और क्यों कर पैदा हुआ ? मुझको आस्तिक जी की एक प्रतिकिर्या पर आपति थी मैंने उसकी बाबत इनसे पहले अपने ब्लॉग पर +फिर खुद इनके ब्लॉग पर तथा बाद में हार कर बाद में दूसरों के ब्लॉग पर भी पूछा लेकिन इनको ना तो कोई शर्म है और ना ही किसी जिम्मेवारी का एहसास , अगर यह पहली बार ही मेरे ब्लॉग पर मेरे संदेहों का निवारण कर देते तो इस लेख को लिखने की नौबत ही क्यों आती ..... और सबसे ज्यादा दुखद बात तो यही है की अभी तक इन्होने मेरे प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया है ..... जब विवादित प्रतिकिर्या इन्होने ही की है तो उसको तर्क की कसौटी पर सही साबित करने की जिम्मेवारी भी इनकी ही बनती है ..... उसकी बजाय यह कह रहे है की अगर उत्तर जानना है तो मेरे लेखो को पढ़े ..... यह कैसा बेशर्मी भरा गैर जिम्मेदाराना बयान है ..... इनके लेख भी इन्होने खुद ही लिखे है और वोह विवादित प्रतिकिर्या भी इन्होने खुद ही की है .... हमारे पास इतनी मगजमारी का समय ही कहाँ है की इनके विवादित सभी लेख पढ़े और उसमे उत्तर ढूंढे ..... उसकी बजाय यह खुद ही अपना स्पष्टिकरण क्यों नहीं दे देते एक लेख के द्वारा ,अपनी पोजिशन को साफ़ रखने के लिए ..... किसी भी ब्लागर की भगवान के प्रति अविवेकपूर्ण प्रतिकिर्या के बारे में जानना और विरोध प्रकट करना हमारा मौलिक अधिकार है और उसके द्वारा उत्तर देना नीतिगत और नैतिकता रूपी बाध्यता भी ..... लेकिन यह तो तभी होगा अगर यह अपने फर्ज को समझे और उचित आचरण करे अपने धर्म और भगवान के खिलाफ अनुचित सुनने वाला अधार्मिक है और ऐसी प्रतिकिर्या करने वाला धार्मिक , इस नई परिभाषा से भी रूबरू होने का सुअवसर मिल ही गया आस्तिक जी की बदौलत ..... अप इसी से अंदाजा लगा सकते है की इनकी सोच और विचार कितने दूषित है .... और विवाद तो ना कोई था और ना ही है बस इनके द्वारा विवादित प्रतिकिर्या पर इनके विचार विस्तृत रूप से जानने की इच्छा है ..... जो बात आपने कही है की जो ब्लागर चुपचाप देख रहे है , उनके बारे में क्या कहा जाए , जो सच को सच नहीं कह सकते , अपने प्रभु के खिलाफ कुछ भी सुन सकते है , वोह भी सिर्फ इसलिए की उनको उक्त व्यक्ति द्वारा अपने लेखो पर प्रतिकिर्या मिलती है .... ऐसे बेगैरत +सोई हुई आत्मा वाले+प्रतिकिर्या के एवज में अपनी आवाज बेचने वाले साथियो की मुझको कोई परवाह न पहले थी और न ही अब है .... मुझको तो दुःख हो रहा है की इनके लिए मैंने क्यों इतनी लड़ाइयां लड़ी , और जीती भी ..... खैर जैसी जिसकी सोच और ज़मीर –उसमे मैं और आप तथा दूसरा कोई कुछ क्या कर सकता है .... आपकी नेक सलाह के लिए हार्दिक आभारी हूँ आपका

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरनीय गुरुदेव, दिनेश जी, सादर अभिवादन! मैं भी शशिभूषण जी के विचारों से सहमत हूँ. विवाद को बढ़ने से मंच की शालीनता बाधित होती है. हम सभी अपने अपने विचार प्रकट करते हैं ... और लोग अन्य माध्यमों से करते हैं ... इसमें किसी को कोई बाध्यता तो नहीं है न कि हम आपके विचरों से सहमत ही हो जाएँ .... आप सभी काफी कुछ अध्ययन कर कुछ लेखन सामग्री एकत्रित करते हैं अगर आपको उचित लगे तो प्रतिक्रिया दीजिये नहीं तो चुप रहिये! मंच को शालीन और समरस रहने दीजिये ऐसे भी बहुत सारे लोग अब नाता तोड़ने लगे हैं या चुप चाप देख रहे हैं .... दिनेश जी से आग्रह करूंगा कि वे धर्म या भगवान के बारे में जितना लिखना था लिख चुके हैं .... अगर बाकी लोगों को धर्म में या भगवान् में आस्था है तो उन्हें रहने दीजिये! विचार थोपना तो फिर वही अधिनायकवादी मानसिकता हो गयी न! आप सबसे मेरा सादर निवेदन है कि आपसी मतभेद समाप्त कर सकारात्मक लेखन में लग जाएँ! आभार सहित!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय दीप्ती बहिन ..... सादर अभिवादन ! आपने बिलकुल ठीक कहा है देवताओं के श्राप में भी कोई भला ही छुपा हुआ होता है जैसे *विश्वकर्मा जी को मिला श्राप नल और नील के जन्म का कारण बना *माता अंजना जी को मिला श्राप उनके अगले जन्म में हनुमान जी की माता बनने में सहायक हुआ *ऋषियों द्वारा रावण की दिए गए श्राप के कारण ही माता सीता जी का जन्म हुआ *ब्रहस्पति जी के पुत्र को मिले श्राप के कारण संजीवनी बूटी का पुनर्जन्म हुआ *माता कैकेई जी द्वारा अनुचित वरदानों के कारण ही प्रभु श्री राम अपने जीवन के असली उद्देश्य को पूरा कर सके ..... हमे भगवान की आलोचना करने का वोह भी इस मंच पर कोई अधिकार नहीं है और ना ही होना चाहिए .... अगर आस्तिक जी को अपनी कही हुई बात से मानसिक पीड़ा पहुँचती है तो इसका तो सीधा सा यही मतलब निकलता है की इन्होने आज तक कुप्रचार ही किया है इस मंच पर ..... सोचिये की इनका खुद का एक विचार ही इनको जब इतना दुःख दे सकता है तो आज तक जो इन्होने इस मंच पर कहा है उससे इनको कितना दुःख पहुंचेगा ..... इनको अपनी कही हुई बात से खुद को पहुँचने वाले तथाकथित दुःख का तो ध्यान है लेकिन इनकी खुद की कही बातो से दूसरों को कितना दुःख पहुँचता होगा इसकी तरफ से यह बिलकुल ही बेपरवाह है –आप मेरी किसी भी ब्लागर को कही हुई +मेरे किसी भी लेख में वर्णित किसी भी बात को उठा कर मुझसे कुछ भी पूछ लीजिए , मैं उसके लिए शर्मशार नहीं बल्कि गर्वित होऊंगा और आपके सभी संदेहों का समुचित समाधान भी करूँगा ..... क्योंकि मैंने जो भी कहा है और लिखा है सोच समझ कर विवेकपूर्ण ही लिखा है ..... कालिया और राजिंदर रतुरी तथा संदीप दिवेदी के नाम से एक ही आई.पी. एड्रेस से मेरे दारोगा वाले लेख पर कमेन्ट किये गए थे जिनका की कम्प्युटर के माहिर दोस्त से मैंने पता लगवाया था .... अलीन अलीन जी के जाने का कारण भी आस्तिक जी ही है ….. इन दोनों ने अपनी अजीब मानसिकता के कारण ना केवल साथी ब्लागरों को बल्कि जागरण जंक्शन को भी बार बार संकट में डाला है ….. वोह आस्तिक जी की अविवेकपूर्ण प्रतिकिर्या ही थी जिसका की अलीन जी ने फीडबैक पर जागरण की तरफ से खुद ही जवाब दे दिया था जिसके कारण उनको इस मंच पर से निष्काषित होना पड़ा जिसका की मुझे भी बहुत दुख है ….. जब विवादित प्रतिकिर्या इन्होने ही की है तो उसको तर्क की कसौटी पर सही साबित करने की जिम्मेवारी भी इनकी ही बनती है ….. उसकी बजाय यह कह रहे है की अगर उत्तर जानना है तो मेरे लेखो को पढ़े ….. यह कैसा बेशर्मी भरा गैर जिम्मेदाराना बयान है ….. इनके लेख भी इन्होने खुद ही लिखे है और वोह विवादित प्रतिकिर्या भी इन्होने खुद ही की है …. हमारे पास इतनी मगजमारी का समय ही कहाँ है की इनके विवादित सभी लेख पढ़े और उसमे उत्तर ढूंढे ….. उसकी बजाय यह खुद ही अपना स्पष्टिकरण क्यों नहीं दे देते एक लेख के द्वारा ,अपनी पोजिशन को साफ़ रखने के लिए आपके उच्च और सुलझे हुए विचार जान कर हार्दिक खुशी हुई ..... आभार सहित (अगर आस्तिक जी सही है तो इनको खुद एक लेख लिख कर भगवान श्रीकृष्ण जी के बारे में अपने विचार रख कर अपना पक्ष रखना चाहिए ताकि हमे अपने प्रश्नों का उत्तर मिल जाए

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

प्रिय शशिभूषण जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! आपने सही कहा है अपने इष्टदेव और आराध्य देव को अपशब्द कहने वाले को इज्जत मान देना उसको सहना खुद की नजर में दोषी बनना और अपनी अंतरात्मा के सामने अपराधी बनने के समान है ..... अगर यह बात मामूली है तो दिनेश जी अपनी प्रतिकिर्या मुस्लिम पैगम्बरों के खिलाफ करके उसका अंजाम देख ले इनको अपनी गलती का तुरंत पता चल जायेगा क्योंकि हिन्दू जिन बातो को सहन कर जाते है मुसलमान भाई उनका मुंहतोड़ जवाब देते है ..... हकीकत तो यह है की इनके 13 JULY को पोस्ट लेख :हम ऐसे खुदा को क्यों माने पर आदरणीय निशा जी के कमेन्ट से सहमती जतलाने पर ही इन्होने अपना विवेक खो कर मेरे लेख “अंडर अचीवर” प्रधानमंत्री – अयोग्यता का प्रमाण या गरिमा के साथ खिलवाड़ -राजकमल प्रोडक्शन” पर बेसिर पैर के तमाम प्रश्न कर डाले थे जिनका की मैंने तर्कपूर्ण आदर सहित उत्तर दे दिया था जबकि यह उन उत्तरों को जानने और प्रश्न करने का हक भी नहीं रखते है ..... उसके तीन कारण है *पहला तो यह की मेरा वोह लेख जागरण द्वारा टॉप ब्लॉग में शामिल किया गया था और उस लेख पर सिर्फ अकेले इनकी ही आलोचनात्मक प्रतिकिर्या प्राप्त हुई थी जिसका की मैंने शालीनता से जवाब भी दे दिया था इसका मतलब की यह जागरण की बोद्धिकता पर संदेह कर रहे है *दूसरे यह जब खुद से पूछे गए प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहते तो किस नैतिकता के तहत यह दूसरों से बेसिरपैर के अनगनित प्रश्न पूछने बैठ जाते है ..... इससे साबित हो जाता है की यह वास्तव में ही किसी मानसिक रोग से ग्रस्त है , लेकिन उसका खामियाजा हम क्यों भुगते ?.... *तीसरे यह मेरे कांग्रेस समर्थक होने के कारण अपन कांग्रेस विरोध प्रकट करने के लिए मेरे ब्लॉग पर अपनी दूषित मानसिकता लेकर जब जी चाहे अर्नगर्ल आरोप लगाने चले आ जाते है शुरुआत में आदरणीय कह कर इनको दूसरे के मुंह पर तमाचा मारने का जैसे अधिकार ही मिल जाता है और इनको माफीनामा भी ..... हार्दिक आभार सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

प्रिय संतोष भाई ..... सप्रेम नमस्कारम ! अलीन जी ने कभी भी किसी ब्लागर का इस मंच से जाना गंवारा नहीं किया था .... इसलिए उनके चले जाने का मुझको भी दुःख है ..... अपना आखिरी आलेख उन्होंने फोल्ली वाईस मैन के खाते से लिखा था .... उस पर मैंने उनको जो सलाह दी थी उसको उन्होंने डिलीट कर दिया था .... जागरण द्वारा उनको सावर्जनिक रूप से अपनी गलती के लिए माफीनामे वाला ब्लॉग लिखने पर ही उनकी वापसी संभव है ..... अलीन जी के जाने का कारण भी आस्तिक जी ही है ..... इन दोनों ने अपनी अजीब मानसिकता के कारण ना केवल साथी ब्लागरों को बल्कि जागरण जंक्शन को भी बार बार संकट में डाला है ..... वोह आस्तिक जी की अविवेकपूर्ण प्रतिकिर्या ही थी जिसका की अलीन जी ने फीडबैक पर जागरण की तरफ से खुद ही जवाब दे दिया था जिसके कारण उनको इस मंच पर से निष्काषित होना पड़ा जिसका की मुझे भी बहुत दुख है ..... आप भी मेल करके देखिये , क्या पता आपकी बात को मान ले हकीकत तो यह है की इनके 13 JULY को पोस्ट लेख :हम ऐसे खुदा को क्यों माने पर आदरणीय निशा जी के कमेन्ट से सहमती जतलाने पर ही इन्होने अपना विवेक खो कर मेरे लेख “अंडर अचीवर” प्रधानमंत्री – अयोग्यता का प्रमाण या गरिमा के साथ खिलवाड़ -राजकमल प्रोडक्शन” पर बेसिर पैर के तमाम प्रश्न कर डाले थे जिनका की मैंने तर्कपूर्ण आदर सहित उत्तर दिया था जबकि उन उत्तरों को जानने और प्रश्न करने का यह कोई हक भी नहीं रखते है ..... उसके तीन कारण है *पहला तो यह की मेरा वोह लेख जागरण द्वारा टॉप ब्लॉग में शामिल किया गया था और उस लेख पर सिर्फ इनकी ही आलोचनात्मक प्रतिकिर्या प्राप्त हुई थी जिसका की मैंने शालीनता से जवाब भी दे दिया था इसका मतलब की यह जागरण की बोद्धिकता पर संदेह कर रहे है *दूसरे यह जब खुद से पूछे गए प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहते तो किस नैतिकता के तहत दूसरों से बेसिरपैर के अनगनित प्रश्न पूछने बैठ जाते है ..... इससे साबित हो जाता है की यह वाकई में ही मानसिक रोग से ग्रस्त है *तीसरे यह मेरे कांग्रेस समर्थक होने के कारण अपन कांग्रेस विरोध प्रकट करने के लिए मेरे ब्लॉग पर अपनी दूषित मानसिकता लेकर जब जी चाहे अर्नगर्ल आरोप लगाने चले आ जाते है धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय बॉस, जय हिंद ! हमलोग अपने विचार यहाँ रखते जरुर हैं पर हम न नेता हैं, न पीर-औलिया हैं, न प्रख्यात समाज सुधारक हैं ! हमलोगों का दायरा और प्रभाव सीमा बहुत सिमित है ! न दिनेश जी के कहने से लोग बदल जायेंगे, न मेरे या आपके कहने से ! हाँ, अतर्कपूर्ण या संवेदनशील धार्मिक भावनाओं को ठेस पंहुचाने वाली बात कहने से भरसक बचना चाहिए ! रिश्तों की डोर बहुत संवेदशील होती है ! जिनके प्रति हमारे रोम-रोम में श्रद्धा और आदर का भाव भरा हो, चाहे वह ईश्वर हों, माता हों, पिता हों, बहन हो, या अन्य जो कोई भी हो,उनकी अवहेलना हम सहन नहीं कर पाते ! आदरणीय दिनेश जी को या किसी को भी ऐसी बातों से बचना चाहिए ! क्षमा प्रार्थना सहित ! सादर !

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

आदरणीय दीप्ति जी यह वो राजकमल जी नहीं हैं जो आप समझ रहीं हैं। यह कोई फर्जी आई डी बनाकर मंच पर आतंक फैलाने वाले राजकमल जी  के बहुरूपियें हैं। यह कभी बम्ब बोल के नाम से लिखते हैं, कभी काले के, कभी बोल बम्ब के, और न जाने कितने नामों से। मैने कभी किसी ब्लॉगर के ब्लॉग पर किसी संदर्भ में कोई प्रतिक्रिया दी होगी। यह फर्जी राजकमल जी उस प्रतिक्रिया को कहीं से ढ़ढ कर लाये हैं केवल मुझे मानसिक रूप से प्रताडित करने के लिये और यह साबित करने के लिये वह एक बड़े सनकी हैं, जिसके पीछे पड़ जाते हैं उसे मंच से बेदखल करके ही रहते हैं। चूंकि मेंरी सत्य में आस्था है  और मैं सत्य के पथ से नहीं डिगूँगा। यह फर्जी राजकमल जी जिन प्रश्नों का उत्तर खोज रहें हैं वह मेरी कई पोस्टों में उपलब्ध है। इनका पूछने का जो ढ़ंग है वह त्रुटि पूर्ण है। 

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

सो रहे हैं आप सचमुच, जाइये अब जाग। काँग्रेसी सोच को प्रिय दीजियेगा त्याग।। आलोचना होती नहीं क्यों आपको बरदारस्त? आलोचना जबसे थी कि पाया नहीं अनुराग। मुख्य धारा से स्वयं से जोड़िये श्रीमान, करिये प्रज्वलित हृदय में क्राँति की इक आग। ग्रुप बनाकर आप अपनी चाहते पहचान, मंच पर विद्वेषता का क्यों लगाते दाग? आप जो कह दें वही सच, क्यों रहे हैं मान? इस तरह की सोच का कर दीजिये परित्याग।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आपको शोभा नहीं देती, आप जो यह कर रहे हरकत। शांत है जो जागरण जंक्शन, आप क्यों फैला रहे दहशत? आप पीछे उसके पड़ते हैं, आपसे होता न जो सहमत। आप अधिनायक हैं इन्द्रा से, लोकशाही चाहते बंधक। सोच दिग्गी की तरह लगती, आपको उनकी तरह फुरसत। आपको चमचा गिरी भाती, सोनिया सी आपको आदत। आपको तारीफ बस भाती, तारीफ मदिरा से हुये उन्मत। करनी कथनी में हैं नेहरू से, बात को इस हो गंई मुद्दत। औकात औरों की बताते हैं, और को सनकी करें घोषित। आपकी मैं सोच का निन्दक, आपकी लेकिन करूँ इज्जत। एक प्रतिक्रिया के ये खातिर बस, आपने कितनी करी मेहनत? हाथ में ले प्रेम का प्याला, किन्तु दिल में क्यों भरी नफरत? मैं विरोधी सोच का केवल, किन्तु झूठी आपकी तोहमत।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आपकी तो नियत न लगती है ठीक मुझे, अपनी ये सोच में सुधार जरा लाइये। ऐसी सोच से क्या मिलता है लाभ आपको ये, जरा मुस्कराके आप मुझको बताइये? काँग्रेसी सोच तो गुलामी का प्रतीक लगे, काँग्रेसी सोच को न यहाँ बगराइये। चलता है मंच अभी फिलहाल शांति से ये, ऐसी टिप्पणियों से नहीं, दूषित बनाइये। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आज तो विस्मित हुआ दिनेश, नहीं पाते क्यों निंदा झेल? स्वयं की निन्दा से बेहाल, खेलने लगते कोई खेल। चाहते हैं अपना अधिपत्य, आपकी ही हो बस तारीफ। स्वयं की पीड़ा का बस ज्ञान, ओर को देते हो तकलीफ। हृदय, मन, बुद्धि को कर शांत, स्वयं की विस्तृत करिये सोच। संकुचित अब तक रहे विचार, आपको क्या इसका अपसोस? आप उससे बस रिश्ता जोड़, आपका जो करता गुणगान। आपका मन जो आप विचार, आप उसको सच लेते मान। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आपके विचार मेरी समझ से परे मित्र, आपको समझना तो मुझे टेढ़ी खीर लगे। आपका विचित्र रूप देख विस्मित में, आप मुझे पहिले सो तो बड़े गंभीर लगे? आपके आलेख की ये मैंने क्या आलोचना की, आपको वो शब्द मेरे, ऐसे कैसे तीर लगे। ################################ ऊर्जा से भरे हुये, आप राजकमल जी, आप उसका तो व्यय, अपव्यय करते हैं। लगते हो आप जैसे मुझे राजकमल जी, वैसी राह पर क्यों आप नहीं चलते हैं? फूलों की तो खान आप, नाम राजकमल है, मुख से मगर क्यों, कंटकों को झरते हैं? ############################ झूठी ये तारीफ अभी तक आई न मुझको, मगर आपको झूठी ही तारीफ है भाती। एक वर्ष हो गये मंच पर मुझको लेकिन, मेरी और आपकी पटरी मेल न खाती। भ्रष्टाचार मुझे लगता झूठी तारीफें, कैसे झूठी तारीफें करना हैं आती? ###################### मुझको अपनी भाषा लगती बहुत अधिक प्रिय, मगर आपकी भाषा काँटों सी चुभती है। मैंने भाषा को मर्यादित करना सीखा, अगर आपकी भाषा आमर्यादित लगती।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

आदरणीय अशोक जी ..... सादर अभिवादन ! जो मेरे मित्र है मैं उनका आदर करता हूँ और उनकी किसी भी बात से अगर इत्तेफाक नहीं रखता तो उसकी वजह से अपने मन में कोई दूसरी किस्म का भाव नहीं लाता .... अगर आपको मेरे शब्दों से कष्ट पहुंचा है तो क्षमाप्रार्थी हूँ ..... लेकिन आपने जो उसी ब्लॉग पर ही जवाब देने की बात कही है उसके उत्तर में कहना चाहता हूँ की समय भाव के कारण मैंने खुद पहली बार आदरणीय निशा जी के कमेन्ट से सहमती जतलाई थी तो दूसरी बार आदरणीय विनीता जी के उत्तर का सहारा लिया था ..... बिजली के कटों के कारण अपने खुद के ब्लॉग को भी काफी दिनों के बाद अपडेट करने का अवसर मिल पाता है ..... ऐसे में मैंने सोचा की इतने दिनों के बाद शायद उस ब्लॉग पर आप ना जाए तो आपको मेरे विचारों की बाबत किस प्रकार जानकारी मिल पाती इस लिए यहाँ पर लिखा था ..... हरेक आदमी की अपनी सोच होती है अपना दृष्टिकोण होता है सभी के विचार एक समान हो भी नहीं सकते आप अपने अमूल्य विचारों से आगे भी मार्गदर्शन देते रहिएगा हार्दिक आभार सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

पप्रीतिश जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! सबसे पहले तो आपके इस भ्रम को दूर करना चाहूँगा की मैं कोई बुद्दिजीवी हूँ .... कुछेक लेख लिखने मात्र से कोई बुद्धिजीवी नहीं हो जाता ..... अगर आपको असल में ही किसी बुद्धिजीवी के दर्शन करने है तो मेरे गुरुदेव पूज्यनीय श्री आर.एन.शाही जी + डाक्टर अदिति कैलाश +आदरणीय निशा जी के दर्शन और दीदार कीजिये आपकी मंशा पूरी होगी .... अगर आपको मेरे कांग्रेसी होने से कोई दुःख पहुंचा है तो उसमे मैं कुछ भी नहीं कर सकता हूँ क्योंकि यह दुःख आपको तब तक रहेगा जब तक किसी क्रांतिकारी नयी पार्टी का अभ्युदय नहीं हो जाएगा .... जिस दिन से वोटों की राजनीति बंद हो जायेगी देश की जनसंख्या में भी कमी आ जायेगी और देश की समस्याओं में भी भरी कमी आ जायेगी क्योंकि आज की डेट में देश हित में सोचने वाला एक भी नेता नही बचा है ..... हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

सबसे पहली बात मैं भारत में आज जितनी पार्टियाँ हैं मैं उनमे से किसी पार्टी का समर्थक नहीं हूँ.....क्यूंकि देश में उपस्थित सभी पार्टियों ने देश को लुटा है और कांग्रेस उनकी जननी और उनमे प्रमुख है.....हमारी आजादी की नीव ही लुट से रखी गयी.......और वो नीव कांग्रेस ने रखी थी....नेहरु ने रखी थी.....और अब वो लुट परंपरा बन गयी है......मैंने अपने पहले के कमेन्ट में कांग्रेस की छोटी सी लूट से आपको अवगत कराया.....यह तो एक उदहारण मात्र है........यदि मैं कांग्रेस की लूट के विषय में लिखना आरम्भ करूँ तो jagranjunction या लेखन का कोई भी मंच कम पड़ जायेगा......... मैंने व्यवस्था परिवर्तन के विषय में कहा था सत्ता परिवर्तन के विषय में नहीं........आज सत्ता में वर्त्तमान उपस्थित कोई भी पार्टी आ जाये देश का कुछ भला नहीं होगा........क्यूंकि लूटना नेताओं की नियति बन गयी है.....और परिणाम अत्यंत प्रलयंकारी है...........हो सकता है आप ऐसे भारत से अपरिचित हों जहाँ भूख है तनाव है भय है.....नहीं है तो भोजन....नहीं है तो सुरक्षा....... नहीं है तो अवसर......किन्तु मैं उसी भारत से हूँ......जहाँ 80 % लोग आज भी भूखे सोते हैं........वर्त्तमान देश में उपस्थित सभी काले अंग्रेजों एवं उनके सेवकों का अंत निकट है.......एक भयावह अंत.......! जय हिंद जय भारत......!

के द्वारा: pritish1 pritish1

priy अजय कुमार जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! आपकी दाद देना चाहूँगा की आपने कितनी मेहनत की है अपनी दूसरी प्रतिकिर्या के लिए मैं आपके प्रयास की कद्र करता हूँ .... आपमें हास्य की बिमारी के कीटाणु न केवल मोजूद है बल्कि उन्होंने आपको अपनी गिरफ्त में पूरी तरह से जकड़ कर रखा हुआ है और वोह हर प्रकार से आप पर हावी -प्रभावी है ..... हम कर्नाटक में देख रहे है की किस प्रकार येद्दुरिप्पा जी अनुशासित भाजपा हाईकमान को नित अपने इशारों पर नचा रहे है .... इस लिहाज से देखा जाए तो एक औरत द्वारा इतने तिकडमबाज +मक्कार पुरुषों को संभालना एक सराहनीय कदम ही माना जाना चाहिए ..... पार्टी चाहे कांग्रेस हो या फिर कोई और नेता सभी के छंटे हुए मुश्टंडे ही होते है ज्यादातर ..... मैं उस आशा में जी रहा हूँ की अपने आखिरी साल में मूक मनमोहन सिंह जी कुछ साहसिक फैसले लेंगे तथा अपनी वर्तमान छवि से किसी हद तक छुटकारा पा ही लेंगे और एक आम आदमी की जिंदगी में कुछ तो राहत के पल आयेंगे ..... हार्दिक आभार सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

,राजकमल जी ,सादर प्रणाम|mere गुरू जी [पाठक सर ] कहतें हैं - "शेक्सपियर के जितने दुखांत (ट्रेजेडी ) नाटक हैं , उनका कारण यही है कि उनके हीरोज़ में कोई /कुछ गुण इतने ज्यादा हो गये कि दोष होकर दुखांत के कारण बने" : हैमलेट उसका उन्नत नमूना है ,जो इतना अधिक चिंतन शील , विवेकी ,न्याय प्रिय है कि कुछ निर्णय ही नहीं ले पाता और इस कारण उसके माता ,चचा /राजा , मंत्री ,प्रेमिका ,दोस्त और वह स्वयं मारा जाता है ...... ''टू बी और नॉट टू बी '' उसकी समस्या है . हमारे पी-एम् श्री मनमोहन जी ( जानकर सिंह नहीं जोड़ा है ) भी उसी श्रेणी में आ गये हैं - इनके गुण यों हैं ; १-मौन (देश कीसमस्याओं पर ); २ - धैर्य (मंहगाई और भ्रष्टाचार पर ); ३- स्वामिभक्ति ( सोनिया जी के प्रति ); ४ - क्षमाशीलता (अपने भ्रष्ट मंत्रियों और अपराधियों के प्रति )५- प्रेम (अपने पद और कुर्सी के प्रति , जो उन्हें राजनैतिक योग्यता से नहीं , यस-मैन होने की दास प्रवृत्ति की अभियोग्यता से मिली है ) * मारलोव के डाक्टर फास्ट्स के इस उक्ति के साथ ..... '' उसने (डा ० फास्ट्स ) दुनियां में सब कुछ पाकर आखिर क्या किया , जिसने अपनी आत्मा ही बेंच दी '' One of Western culture's most enduring myths recounts a learned German doctor's sale of his soul to the devil in exchange for knowledge and power. Elizabethan playwright Christopher Marlowe transformed the Faust legend into the English language's first epic tragedy, a vivid drama that abounds in psychological insights and poetic grandeur.

के द्वारा: ajaykr ajaykr

आपने अपने लेख से क्या बताना चाहा है यह तो नहीं कह सकता.........किन्तु इतना अवश्य कह सकता हूँ कांग्रेस कभी भारतीयों के हित की लिए नहीं बनायीं गयी थी.....यह तो अंग्रेजों ने बनायीं थी इसलिए ताकि यदि भारतीय आजाद हो भी जायें तो सदैव उनकी बनायीं गयी पार्टी उन्हें गुलाम रखे.......और दुर्भाग्यपूर्ण रूप से ऐसा ही हुआ.....और हम कांग्रेस के गुलाम हैं.......अँगरेज़ तो चले गए किन्तु अपने काले अंग्रेजी सेवकों को देश लुटने का कार्य दे दिया......और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु से इस लीला का आरम्भ हुआ......जवाहर लाल नेहरु ने 1952 में संसद में कहा एक पंच वार्षिक योजना लागू हो गई तो सारी ग़रीबी मिट जायेगी । तो 1952 में पहले पंच वार्षिक योजना बनाई गई । लेकिन 5 साल बाद देखा गया कि ग़रीबी उलटा और बढ़ गई । 1957 मे फ़िर बोला एक और पंच वार्षिक योजना बन गई तो ग़रीबी खत्म । 1963 आ गया ग़रीबी नहीं मिटी । फ़िर पंच वार्षिक योजना बनाई फ़िर ग़रीबी नहीं मिटी । फ़िर 1968 मे बनाई फ़िर 1972 में ऐसे करते करते aaj 2007 तक कुल 11 पंच वर्षिक योजनाये बन चुकी है । गरीबी मिटना तो दूर उल्टा गीरबों की सख्या 84 करोड़ 30 लाख हो गयी ! लेकिन क्या आप जानते हैं ??? कि अगर ये खानदानी लूटेरे एक भी पंच वर्षिक योजना ना बनाते । और 110 लाख करोड ग़रीबो को नकद ही बांट दिया होता तो एक एक गरीब को 1 लाख 50 हजार मिल जाते और सारी ग़रीबी खत्म हो जाती । इतनी बढ़ी रकम होती 110 लाख कारोड़ । कैलकूलेटर पर आप इसे लिख नहीं सकते । कैलकूलेटर पर 12 अंक आते है । 110 लाख कारोड में 16 अंक होते हैं । 110 लाख करोड़ आपके और मेरे tax का पैसा था । जो ग़रीबो पर तो लगा नहीं । लेकिन सोनिया गांधी विश्व की चौथी अमीर बन गयी । और एक बात इस साल 2012 में फिर गरीबी दूर करने के लिए 12 वी पंच वार्षिक योजना बनाई गई है और इसके लिए वर्ल्ड बैंक से फिर कर्ज लिया है !और 7 लाख करोड़ फिर गरीबी दूर करने के लिए खर्च किया जाएगा !! अब आप बताए गरीबी दूर होगी या खानदानी लूटेरे और अमीर होंगे ?????? आवश्यकता है व्यवस्था परिवर्तन की..........परिवर्तन अवश्य होगा......जय हिंद जय भारत....! प्रीतीश

के द्वारा: pritish1 pritish1

आदरणीय राजकमल जी सादर, मैंने अपनी गलतियों पर माफ़ी मांगने से कभी परहेज नहीं किया है किन्तु निष्पक्ष बोलने से भी समझौता नहीं किया है.आप यदि कहते हैं की परमाणु समझौते पर प्रधानमन्त्री के निर्णय की तारीफ़ की जानी चाहिए तो अवश्य करता यदि यह समझौता विदेशी दबाव में नही किया गया होता. देश में खाद्यान सड रहा है किन्तु मंत्रियों के स्वार्थ के कारण उच्चतम न्यायालय की बातों और हकीकत से मुंह फेरकर उसे गरीबों में बांटने से मना कर दिया. देश में त्राहि त्राहि है और हमेशा राज्यों को पेट्रोल पर कर कम करने की सलाह दी गयी, कभी केंद्र द्वारा कोई कटौती नहीं की गयी. देश महंगाई की मार से परेशान रहा और प्रधान मंत्रीजी सरकार बचाने में ही लगे रहे. और यही शर्मनाक बात खुद उन्होंने स्वीकार की है की गठ्बंदन बनाए रखने की मजबूरी है. अभी हाल में ही लगातार सिर्फ एक ही प्रदेश को बड़ी आर्थिक सहायता सिर्फ राजनैतिक उद्देश्य से दी गयी. शिक्षा जिसे कहा जाता है हर बच्चे का अधिकार है आज पुरे देश में बच्चों को पढ़ाना एक ३२ रुपये रोज कमाने वाले से पूछिये. अब किस बात पर प्रधानमन्त्री जी की तारीफ़ करूँ? दूसरा अफ़सोस है मुझे की आपने दिव्या बहनजी के ब्लॉग पर की गयी बात को यहाँ पर उठाया है. ये मुझे निष्पक्ष ब्लोगिंग के मंच पर ब्लेकमेल करने के सामान लगता है. आप उसी ब्लॉग पर मुझसे प्रश्न पूछते की मैंने क्यों उसे लम्बा भाषण बताया है. क्योंकि उबाऊ तो आपने उसे कह दिया है लम्बे भाषण उबाऊ हों जरूरी नहीं. फिर भी उस आलेख में एक बार भी उस लड़की की नादानी को फटकार नहीं लगाई गयी है. हम सिर्फ ये कहें की दिन में भी लड़कियां सुरक्षित नहीं है तो क्या इसका मतलब ये समझा जाए की रात में लड़कियों को बेहिचक घुमने का लाइसेंस मिल गया. क्या ये समझदारी भरा कदम नहीं होता की रात में उसकी सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम उसका परिवार करता. कपड़ों का इंतजाम करने की बजाय हम किस नंगे व्यक्ति के बारे में यह कहें की वह रोज रोज नंगा ही घूमता है कहना क्या उचित है? मै बहुत ही आवश्यक हो तभी किसी आलेख पर दुबारा उपस्थिति दर्ज कराता हूँ मुझे आज आवश्यक लगा इसलिए मै पुनः उपस्थित हुआ. आपको यदि मेरी यह उपस्थिति नागवार लगी हो तो मै क्षमा प्रार्थी हूँ.

के द्वारा: akraktale akraktale

आदरणीय राजकमल जी, अटल जी की याददास्त कमजोर थी। यह सभी जागरूक भारतीयों को मीडिया द्वारा ज्ञात हो गया था, किन्तु वह मदिरा का सेवन करते थे। मैं इससे अनभिज्ञ था। किन्तु मैं मदिरा का सेवन कुकृत्य की श्रेणी में नहीं रखता। हाँ अति मदिरा पान दोष पूर्ण हैं। मैं अटल जी के जीवन से बचपन से ही प्रभावित था। ग्वालियर से माधव राव सिन्धिया से हारने के बाद उन्होंने पूरे देश का  भ्रमण किया था। इसी समय छत्तीसगढ़ के कोण्डागाँव कस्बे में उनसे मात्र 15 मिनिट की मुलाकात हुई थी। उस मुलाकात में हमें उनके  व्यक्तित्व में आम भारतीय का दर्द मुखर हो रहा था। उन्हे अपने  का गम नहीं था। उनके कार्यक्रम में वहाँ रुकने का प्रोग्राम नहीं था लेकिन जैसे ही उन्हें ज्ञात हुआ कि कुछ युवक आगे उन्हें रोकने के  लिये खड़े हैं उन्हें अपनी सुरक्षा की परवाह किये बिना, सुरक्षा अधिकारियों के मना करने पर भी लघु शंका का बहाना बनाकर अपनी कार रुकवा ली थी। और 15 मिनिट का समय हम लोंगों के साथ व्यतीत किया।  शायद आपको मेरा यह कहना अच्छा न लगे कि लाल  बहादुर  शास्त्री के बाद अटल जी ही महान प्रधानमंत्री रहे हैं। गाँधी खानदान तो इनके आसपास भी नहीं आते। एक निष्पक्ष देशवासी के विचारों का सदा समर्थन है किन्तु अंधी आस्था  के वशीभूत होकर लिखे गये आलेखों का मैं पक्षधर नहीं हूँ। मैं व्यक्ति  का नहीं विचारों का विरोधी हूँ। कृपया मेरी प्रतिक्रिया को  व्यक्तिगत न लिया करें।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

प्रिय खुशबूदार चन्दन जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! हरेक आदमी का अपना नजरिया + दृष्टिकोण और व्यक्तिगत विचार तथा भावनाए होती है ..... एक आधा भरे हुए गिलास को एक ही वक्त एक आदमी आधा खाली गिलास तो दूसरा आधा भरा हुआ गिलास कहता है .... कहते है की किसी बुरे से बुरे व्यक्ति में भी अगर आप चाहो तो कोई ना कोई अच्छाई खीज ही सकते हो ..... आखिर कुछ तो बात है मनमोहन सिंह में की पूरे विश्व के नेता उनका लोहा मानते है + उनसे मार्गदर्शन रूपी सलाह लेते है ..... हमे फखर है की हमारे पास दुनिया को राह दिखाने और बतलाने वाला एक नेता है .... लेकिन साथ के साथ इस बात का मलाल भी है की अपनी भूमिका को जिस तरह से वोह निभा सकते थे , निभा नहीं पाए .... पता नहीं फिर मौका मिले या ना मिले इसलिए देश के लिए जो भी वोह कर सकते है , उनके द्वारा किया जाना चाहिए .... आपक बहुत -२ शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय दीप्ती जी .... सादर अभिवादन ! मैडम सोनिया गाँधी का काम पूरे कुनबे को एकजुट रखने का है और मनमोहन सिंह जी का काम गठबन्धन की सरकार को चलाने का है .... कांग्रेसियो को इकटठा रखने के बारे में कोई कुछ भी कह सकता है लेकिन पूरे यू.पी.ऐ . में तो बहुत से दलों के नेता है उनको भी तो एक सूत्र में पिरोकर रखने का असम्भव श्रम साध्य काम कर दिखलाया है .... सरकार को उसके घटक दल ही सही तरीके से उचित रफ्तार से काम करने नहीं दे रहे .... मरहूम अर्जुन सिंह से कांग्रेसी होते हुए भी आखिरी दिनों में भीतरघात किया यानि की सरकार और पार्टी के अन्दर तथा बाहर दोनों तरफ ही देश की बजाय स्वहित देखने वाले नेताओं की कोई कमी नहीं है .... भगवान इस देश तथा इसके देशवासियो का भला करे हार्दिक आभार सहित राजकमल भ्राताश्री

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय अशोक जी ..... सादर अभिवादन ! माफ़ी चाहूँगा की आजकल आप कुछ “महकी महकी” सी बाते कर रहे है ..... पहले आपने दिव्या बहिन के लेख को लंबा और उबाऊ भाषण कहा था ..... एक पुरुष और नारी की सोच + भावनाओं +जज्बातों में जमीन आसमान का फर्क होता है ..... आदमी जिस बात को ऊपरी तौर पर लेता है नारी उसको बहुत ही शिद्दत से महसूस भी कर सकती है इसलिए उसका आवेश में आना + आक्रोशित होना उचित है क्योंकि बिगड़ रही समाजिक व्यवस्था तथा गिरते हुए मूल्यों में वोह खुद को भी दिनोदिन असुरक्षित पाती है ..... आपसे करबद्ध प्रार्थना है की आप एक तरफ जागरण द्वारा इसी विषय पर लिखे हुए लेख को रखते हुए उसके दूसरी तरफ मेरे लेख को रखते हुए इसको दुबारा से पढ़ेंगे तो बहुत सी बाते शीशे की तरह से साफ़ हो जायेंगी ..... अगर मनमोहन सिंह जी कोई सही काम करते है तो उनकी तारिम करने में हिचकिचाहट कैसी ..... लगीं अगर वोह कुछ गलत की तो बात ही जाने दीजिए “कुछ करे ही नहीं” तो फिर उनकी आलोचना करने में कोई परहेज भी नहीं होना चाहिए ..... आपका दिल से आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय दिनेश जी .... सादर अभिवादन ! जन भावनाओं का ख्याल और ध्यान करते हुए मैंने पूरी सच्चाई को नहीं बतलाया था .... उस रिपोर्ट में अटल जी द्वारा मदिरा सेवन की बात के साथ कमजोर यादाश्त तथा निर्णय लेने में अक्षमता वगैरह काफी इल्जाम लगाए गए थे .... मेरे मन में तो यही शंका हुई थी की कहीं इसको अडवाणी जी के ग्रुप ने तो नहीं छपवाया क्योंकि उस रिपोर्ट का सीधा फायदा उनको ही हुआ था .... इसी तरह इस बार भी इस रिपोर्ट का सीधा फायदा राहुल गाँधी को होने वाला है इसलिए शंका तो इस बार भी होती है ..... लेकिन यह राजनीति के पेंच है इनको हम और आप जैसी साधारण जनता कहाँ समझ सकती है ..... और रही बात लोह पुरुष की तो मेरी नजर में और सभी की नजरो में वोह एकमात्र सिर्फ और सिर्फ एक ही है –सरदार वल्लभभाई पटेल जी ..... इस लेख में आडवाणी जी के लिए इस शब्द को व्यंग्य रूप में इस्तेमाल किया गया है ..... क्योंकि उन्होंने इस पदवी के लायक कोई काम नहीं किया था यह उपाधि तो उनको कुछ पिट्ठू मीडियाकर्मियों द्वारा प्रदान की गई थी .... आपसे दो प्रार्थनाओं को करता हूँ पहली तो यह की जागरण द्वारा इसी विषय पर लिखे गए लेख को पढ़िए और दूसरा मेरे इस लेख को यह सोच कर पढ़िए की इसको एक निष्पक्ष देशवासी द्वारा मजाक उड़ाने के लिए लिखा है ..... फिर शायद इसका असली मतलब समझ में आ जाएगा ..... (आप बहुत अच्छे है और आप बहुत ही अच्छा लिखते है – इस तरह की प्रतिकिर्याओ को तो मैं भी पसन्द नहीं करता हूँ ....) आपका बहुत -२ आभारी हूँ

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

मान्यवर मैं व्यक्तिगत आस्था से ग्रसित व्यक्ति नहीं हूँ। मैं महात्मा बुद्ध के इस विचार में विश्वास करता हूं कि किसी बात या विचार का इसलिये समर्थन मत करो कि वह हमारे धर्म ग्रन्थ या हमारे प्रिय या पूज्य गुरु ने कही है, बल्कि स्वयं मनन चिन्तन करो, यदि आप वह तार्किक दृष्टि से सही एवं युक्ति संगत निकलती है तो उसे स्वीकार करों अयन्था नहीं। मैं वर्तमान में न तो किसी पार्टी से जुड़ा हूँ और न वाद से, जिसे मेरा विवेक तर्क की कसौटी पर खारा पाता है, मै उसीका समर्थन करता हूँ। चाहे वह विचार मेरी सोच के ही विपरीत क्यों न हो। आप मुझे जिस श्रेणी के लेखको में रखना चाह रहे हैं, मैं उस श्रेणी में कदापि नहीं आता। कृपया मुझे किसी श्रेणी में रखकर मेरे साथ अन्याय न कीजिये। जहाँ तक ईश्वर का प्रश्न है मैं उसे बहुत मानता हूँ, लेकिन बुद्धि से, हृदय से नहीं। क्योंकि हृदय में न तो विचार होते हैं न बुद्धि। हृदय में आस्था होती है जो अज्ञान से उत्पन्न होती है। ईश्वर एक है, अजन्मा है, निराकार है, सत्य है और हममें निवास करता है। श्रीकृष्ण, राम,  ईसा, मुहम्मद साहब, गुरु नानक देव, महात्मा बुद्ध, महावीर स्वामी  आदि ईश्वर नहीं, अपितु महापुरुष थे। खैर यह अलग विषय है। मैं इन सभी के गुणों का सम्मान करता हूँ। और मेरा मानना है कि  हमें व्यक्ति के गुणों या अवगुणों को समर्थन या विरोध करना चाहिये न कि व्यक्ति का। यहाँ मंच पर बहुत से लोग व्यक्ति को देखकर प्रतिक्रिया देते हैं। आलेख को पढ़कर नहीं। असत्य बातों का सहजता से समर्थन कर देते हैं। मैं ऐसा नहीं कर पाता। मैं अपने वास्तविक जीवन में भी ऐसा ही करता हूँ, अतः अपनों के कोप का भाजन बन जाता हूँ, क्योंकि किसी को अपनी या अपने विचारों की आलोचना पसंद नहीं है चाहे उनका वह विचार पूर्णतः मिथ्या ही क्यों न हो? शायद यहाँ आपके कोप का भाजन भी इसलिये बनना पड़ रहा हूँ। किन्तु मैंने पूर्व में ही सच कहने के लिये क्षमा माँग ली थी। लेकिन आपने मेरी उस माँग को काँग्रेसी सोच होने के कारण स्वीकार नहीं किया। आशा है आप कालान्तर में मुझे आवश्यक ही क्षमा प्रदान करेंगे और मुझे इसी तरह समालोचना करने का अधिकार प्रदान करेंगे।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

आदरणीय मीनू जी ..... सादर प्रणाम ! विषय वाली आपकी समस्या किसी हद तक मैं हल किये देता हूँ .... यहाँ पर जागरण द्वारा हरेक सप्ताह एक मुद्दा दिया जाता है और इत्तेफाक से मेरा यह लेख भी उसी कैटिगिरी में आता है ..... यह सच है की गंभीरता से देखने वाले पाठकों को इसमें कुछेक बाते अटपटी लग सकती है वोह भी तब जबकि मैंने खुद ही इस राज का फाश कर दिया है की मैं कांग्रेसी हूँ – हा हा हा हा हा लेकिन अगर पाठक इसको व्यंग्य (मजाक ) में देखेंगे तो कुछ अलग ही बात नजर आएगी .... लेकिन आपकी बात भी सही है की लेखक अपने दृष्टिकोण और नजरिये से हरेक बात को देखता है और प्रस्तुत करता है .... मैं खुद भी एक आम + मध्यमवर्गीय प्राणी हूँ इसलिए मुझ पर भी हरेक उस बात का अंतर पड़ता है जिससे की दूसरे भी प्रभावित होते है एक और महत्वपूर्ण बात फिर से बतलाना चाहूँगा विषय के बारे में ..... अप जब बड़ी ही शिद्दत से लिखने के बारे में सोचने लग जायेगी और वोह सोच आप पर सवार हो जायेगी तब विषय खुदबखुद ही आपके सामने प्रकट होकर हो जाएगा ..... उम्मीद करता हूँ की इस बार भी आप किसी निराले विषय को लेकर ही हाजिर होंगी ..... शुभकामनाये और आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

दिनेश जी ..... सादर अभिवादन ! सबसे पहले तो किरण बेदी वाली त्रुटि बतलाने के लिए आभार ..... मैंने आपकी तरह से अपनी कोई व्यक्तिगत मान्यता नहीं बनाई है और ना ही गढ़ी है ..... यह सारे का सारा लेख सच्चाई पर आधारित है जिसकी तरफ से आप अगर आँखे बन्द भी कर ले तो वोह बदल नहीं जायेगी ...... आपने इस लेख में भारी भरकमपन खोजने की कोशिश की लेकिन इसमें हल्का फुल्का पन है , मैं उस तरीके से लिखता भी नहीं हूँ .... क्योंकि उस तरीके से लिखने वाले लेखकों की यहाँ पर भरमार है ..... आपने इस लेख को एक अलग ही मानसिकता से देखने की कोशिश की है इसलिए इसमें आपका कोई कसूर भी नहीं है ..... {किसी के ब्लॉग पर “भगवान श्री कृष्ण जी” के बारे में आपके उल जलूल विचार पढ़े थे इसीलिए मैंने कहा था की जहाँ पर भगवान और गुरु का आदर नहीं होता है मैं वहां पर नहीं जाता ..... यहाँ पर नहीं तो आपके अपने ब्लॉग पर ही सही मैं भगवान श्री कृष्ण जी के बारे में आपके पवित्र विचार जानना चाहता हूँ } अजहरूदीन +जडेजा और कपिल देव पर इक्कठे ही इलज़ाम लगे थे .... अजहरूदीन ने नरसिम्हा राव की वी.डी.आर.एस. स्कीम में अपनी ब्लैक मनी डिक्लेयर करके उसको व्हाईट में बादल डाला था भले ही वोह आज कांग्रेस में शामिल हो लेकिन यह अटल सच्चाई है और रहेगी .....

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

राजकमल जी नमस्कार ! ये लेख आपकी पिछली पोस्ट " मैं कांग्रेसी हूँ " का ही सिक्वल लग रहा है ! आपने आखिर में आकर लिखा है की हम पाकिस्तान के खिलाफ खड़े होने वाले को ही बढ़िया प्रधानमंत्री मानते आये हैं ! मैं आपसे कुछ पूछना चाहता हूँ - आपको शायद ये पता होगा की सुप्रीम कोर्ट ने 2G के लायसेंस बेचने पर रोक लगा राखी है और हमारे देश में निवेश की दर पिछले सात वर्षों में सबसे कम है ! किसकी वज़ह से ? पहले हिंदुस्तान केवल रिश्वत के लिए बदनाम था और अब घोटालों के लिए ! यानी इसका प्रभाव सीधे सीधे विदेशी निवेश पर पड़ेगा यानी की नोकारियों पर और आगे की बात ये की लोगों के पेट पर ! ये क्यों हुआ , कैसे हुआ ? आप केवल एक परमाणु करार के मुद्दे पर मनमोहन सिंह को सफल होने का तमगा दिए जा रहे हैं ! मेरा एक सुझाव है , अगर भारत से जनसँख्या कम करनी है तो मनमोहन सिंह या सोनिया गाँधी या राहुल गाँधी को प्रधानमन्त्री बना देना चाहिए क्योंकि सारा पैसा येही लोग लूट ले जायेंगे और जनता भूखों मरने लगेगी ! बस जनसँख्या अपने आप कम होने लगेगी !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

राजकमल जी नमस्कार आपके पुरे आलेख को पुरी तनमयता के साथ पढने के बाद मुझे फिर एकबार भरोसा हो गया कि एक लेखक की कलम में बङी ताकत होती है,वो अपने शब्दों से धारा को कोई भी रुख दे सकता है,बुरे को अच्छा,अच्छे को बुरा साबित कर सकता है अब कल ही की बात बताती हुं बहुत दिनों से कुछ पोस्ट नहीं किया पतिदेव से किसी सार्थक विषय के लिए सलाह मांगी तो उनका कहना था तुम्हारे लिए तो एक शब्द मिलना काफी है,उसे खींचतान कर बङा कर देने में तो तुम्हे महारथ हासिल है,जैसा तुम अभी तक अपने लेखों में करती आ रही हो,बात भी सच है,हम तस्वीर का वही रूख पेश करते है जो हम देखना चाहते है.....,वैसे भी गलत क्या है सबके दृष्टिकोण अलग अलग ही होते है,मैं बस यही कहुंगी कि आपने जिस पक्ष के लिए लिखा है उसके साथ पुरा न्याय किया है,बहुत ही अच्छा लिखा है

के द्वारा: minujha minujha

नीचे की प्रतिक्रिया का शेष भाग... आदरणीय राजकमल जी, मैं अनभिज्ञ हूँ कि किसी विदेशी पत्रिका ने  अटल जी की कोई ऐसी आलोचना की थी कि आम भारतीय उससे  सहमत रहा हो। आज जो विदेशी पत्रिका ने मनमोहन जी की जो  आलोचना की है वह भारतियों की सोच का आधार बनाकर की है। यह प्रमाणिक सच्चाई भी है। अटल जी ने आडवानी जी को उपप्रधान मंत्री केवल व्यक्तिगत मित्रता वश एवं भविष्य के लिये अपना उत्तराधिकारी बनाने के लिये ही बनाया था। आडवानी जी थोथे लौह पुरुष हैं। आप ही बताइये उन्होंने ऐसा कौन सा लौह पुरुष वाला काम कर दिया। केवल पाकिस्तान जाकर जिन्ना के तारीफ में कसीदे पढे। हाँ, अपने  गृह मंत्री काल में प्लेन में फँसे यात्रियों को छुड़ाने के एवज में पाकिस्तान  के खूँखार आतंकवादी को छुड़ाने के अलावा। क्या आप इसे लौह पुरुष की उपाधि के योग्य कत्य समझते हो? आपने व्यंग तो अच्छा किया है, लेकिन आपके आलेख का मुझे तो यही  उद्देश्य दिखता है कि काँग्रेस के कुकृत्यों को व्यंग और तर्क के द्वारा सही साबित करना है। हो सकता आपका उद्देश्य ऐसा न हो। शब्दों के चयन के कारण ऐसा हो गया हो। फिर भी आज की परिस्थिति के आधार पर काँग्रेस एवं मनमोहन जी की तारीफ में कसीदे पढ़ना किसी लौह पुरुष के कृत्य से कम नहीं है। अतः  मैं लाल कृष्ण जी को तो नहीं, राजकमल जी को आवश्य ही लौहपुरुष  घोषित करता हूँ। आपने बहुत ही साहसिक काम किया है।  आपका आभार......

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

आदरणीय राजकमल जी सादर नमस्कार, सही कहा है आपने जब कोई विदेशी पत्रिका हमारी तारीफ़ करती है तो हम खुश हो जाते हैं और जब बुराई करती है तो फिर हम उस दखलंदाजी कहते हैं. टाइम पत्रिका द्वारा इसके पहले एक बार मनमोहन जी की तारीफ़ भी की गयी थी तब किसी ने कुछ नहीं कहा था. आपने मनमोहन जी की वफादारी की जो तारीफ़ की है उससे लगता है देश के हर नागरिक को उनसे वफादारी का सबक लेने की जरूरत है. यह तो काल बदल गया है वरना तो वे उस कुर्सी पर देवी जी की आयातित चरण पादुका रखकर रोज उसकी पूजा करते. इस बात ने यह तो सिद्ध कर ही दिया है की देश चलाने के लिए एक अर्थशास्त्री की नहीं देश की जमीन से जुड़े व्यक्ति की आवश्यकता होती है. जिस व्यक्ति ने देश की जनता के हालात को जाना ही ना हो जो कभी उनके बीच गया ही ना हो ऐसे व्यक्ति को देश की बागडोर सौंप देने के परिणाम स्वरुप आज महान अर्थशास्त्री और देश दोनों की छवि धूमिल हुई है. आपके धारदार व्यंग के लिए हार्दिक बधाई.

के द्वारा: akraktale akraktale

पूरे देश के विकास की बजाय अपनी पार्टी की सत्ता वाले प्रदेशो के विकास की तरफ ही ध्यान दिया जाता है .हमे किसी छोटे से महकमे में कोई साधारण सी पोस्ट मिल जाए तो हम पद देने वाले के अनुग्रहित हो जाते है उसकी चापलूसी करते है, खाने पीने को बंदरिया और डंडे खाने को रीछ”….. प्रिय राज भाई बड़ी ही विचारणीय मुद्दे उठाये आप ने ,,, व्यंग्य ,, हास्य सब से परिपूर्ण रहा अब जंग छेड़ें या कोई और बस चलवा दें और आना जाना सुचारू हो जाए जो भी हो विजय हमारी करा दें इन को समझाइए तो इनकी भी बल्ले बल्ले ...जब हर तरफ धुवां निकलेगा तो गुबार उड़ जाएगा सब के मन की विदेश से देश तक ...बहुत दिन से हम सब लिख रहे हैं इनको इतना काबिल भी मन-मोहन भी फिर भी इस कान से सुन उस से उड़ क्यों जा रहा है ..खैर आप ने तो दल की बात की ही ...जय हो राज कमल कांग्रेसी भाई की ...दल से ऊपर उठना इतना .. भ्रमर ५ .

के द्वारा:

कपिल देव जैसे आदमी महानाय कीस तरह बनते हैं वो एक घटा बताकर बताता हु । साल बराबर याद नही नाईन्टी की घटना है । मुम्बई की फुटपाथ पर मैं जा रहा था । सिग्नल पर एक बडी गाडी रुकी हुई देखी । उन में जिंस पहने हुए चार पांच युवा लडके बैठे हैं ईतना ही मैने नोट किया, चेहरे पर ध्यान नही दिया था और आगे बढ गया । वो गाडी फिर मेरे पास आकर रुकी और एक आदमी उतर रहा है ईतना ही नोट किया, क्यों की मैं तो चल रहा था । करीब १५ सेकंड चलने पर मोड आया । मोड के सामने फुटपाथ नही थोडी खूली जगह थी । वहां १००-१५० आदमी खडे थे । मैं नजदिक गया तो मुझे देखकर कपिल कपिक चिल्लाने लगे । मैंने पिछे देखा ये सोच कर की मैं तो कपिल नही हुं ये कपिल कीसे कह रहे हैं । मुझे पूरा पिछे देखने की जरूरत नही पडी कपिल बिलकुल मेरे साथ ही चलने लगे थे । उसे देखने में मैं स्लो हो गया वो आगे बढ गये । मोड पर मुडते ही एक खेल के सामान की दुकान थी उसमें चले गये । मैं बाहर रह गया । उन का ही प्रताप था की पूलिसवाले ने जीन्दगी में मुझे पहली और आखरी बार साहब कहा । साहब, आप अंदर जाईए, बाहर मत खडे रहीए । मुझे कहना पडा मैं उन के साथ नही हुं मैं तो स्टेशन जा रहा हुं । वो सिर्फ हंसा । थोडी देर मै उस के पास ही खडा रहा । दुसरे आदमी को तो लाठी दिखा कर दुकान के पास से भगा रहा था । मैं आराम से अपने हिसाब से निकल गया । हालां की उस समय आतंकियों का खतरा नही था पर आज भी वो महानायक बोडीगार्ड नही रखते होन्गे । जनता के प्यार पर भरोसा करते होन्गे । जनता का प्यार ही होता है की फॅन की टोली ईकट्ठी हो जाती है ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

राजकमल जी , हम दिमागी रूप से अक्ल विहीन लोग है ,जो सुन लिया उसे मान लिया , भ्रस्ताचार इससे पहले की सरकारों के शासन में भी हुआ , हमे इसे एक उपलब्धि के रूप में लेना होगा की मनमोहन जी के कार्यकाल में उन पर सही रूप में कारवाई और नाम उजागर हुआ , हमे इसे उपलब्धि के रूप में लेना चाहिय , जब अन्ना टीम ने एक सामाजिक असुंतलन पैदा कर रखा था तो मनमोहन जी ने किसी भी इमरजेंसी की संभावना को समाप्त कर बड़े शांत रूप में राजनेतिक कुशलता से शांत किया ! अभी पुर विश्व में वैश्विक मंदी है ,इस तरह आप भारतीय अर्थव्यवस्था की कमजोरी का जिम्मा भी मनमोहन जी पर थोप नहीं सकते पर उनमे निहित कुछ खामियों से इनकार नहीं किया जा सकता , अगर वो अंडर अचीवर” प्रधानमंत्री है तो आप पुरे विश्व में एक नेता नहीं ढूंढ़ सकते जो अचीवर” हो सायद मुझे इन व्यक्तव्यों से कोई कांग्रेसी भी मान बैठे पर मेरा ये निजी आकलन है

के द्वारा: Chandan rai Chandan rai

अगर मनमोहन सिंह जी कमजोर है, तो इस बात की शिकायत उनकी पत्नी को करनी चाहिए …. किसी विदेशी को यह बात कहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है! गुरुदेव को प्रणाम! आपने बड़े दूर की बात कह दी वह भी इस उम्र में .... विदेशी तो यह कह ही नहीं सकते क्योंकि आज भी उनकी चाल (चलने की गति) कम तेज नहीं है! थोड़ी सी प्रतिक्रिया मैं भी दे लूं- हमारी आदत हो गयी है विदेशियों से अपनी प्रशंशा सुनाने की ! चाहे वो ह्वेनसांग हो या फाहियान कोई जर्मन लेखक हो या या आर्यन! हमारे धर्मग्रंथों को, विद्वानों को जब विदेश से सम्मान मिलता है तब हम उन्हें आदर की द्रष्टि से देखते हैं ... पर हमसबको मिलजुलकर कुछ करने की जरूरत है ताकि हम खुद कह सकें कि हमने इस 'उपलब्धि' (केवल मिसाईल ही नहीं) को हासिल किया है. अब आपके आलेख आने लगे हैं और उम्मीद जगने लगी है!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय राजकमल जी, सादर नमस्कार। यह प्रतिक्रिया आपसे क्षमा माँगते हुये व्यक्त कर रहा हूँ। और आपके आलेख से बड़ी होने के कारण  किस्तों में व्यक्त करूँगा। आपने अपने आलेख को बहुत ही कुतार्किक ढ़ंग से कुतर्कों द्वारा, तर्क संगत बनाने का कुतार्किक  प्रयास किया है।  हम आपस में कितना ही लड़ते झगड़ते रहें किन्तु बाहरी आक्रमण के समय हमें हो जाना चाहिये। चाहे वह आक्रमण सैन्य हो या वाक्य। जबकि आपका मानना है कि यह उनका  विदेशियों का जन्म सिद्ध अधिकार है। आप किसी चीनी, अमेरिकी या पाकिस्तानी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की आलोचना करके देखिये। उनका पूरा देश शब्द वाणों की ऐसी बरषा करेगा कि आपको कहीं सिर छिपाने को भी जगह नहीं मिलेगी। यदि मन्नू भाई की कोई विदेशी तारीफ करता तो वह पूर्णता सूनियोजित होती है। आज की परिस्थिति यदि कोई मन्नू भाई की तारीफ करता है तो या तो वह अज्ञानी है या सोनिया रँग में रँगा हुआ कोई सियार। मैं कपिलदेव को महान अलराउण्डर किसी विदेशी पत्रिका के कहने पर नहीं मानता। बल्कि उनके द्वारा तीसरे विश्वकप में जिम्मबाबे के खिलाफ खेली गई पारी की वजह से मानता हूँ। किसी विदेशी पत्रिका ने उन्हें महानतम आलराउण्डर माना यह मुझे पहली बार ज्ञात हुआ है। कपिल जी मैच फिक्स में शामिल होने के बाद भी आलराउण्डर बने रहेंगे। जहाँ तक अभिताभ  बच्चन के महा नायक का सवाल है मैं उन्हें महानायक की श्रेणी में नहीं रखता। इसके कई कारण हैं। प्रथम उनका राजनीति में प्रवेश, दूसरा वोफोर्स काण्ड में हाथ होना, तीसरा अमर जी जैसे मित्र होना, तीसरा विज्ञानपन में उत्तर प्रदेश के संबंध में झूठा प्रचार करना। वोफोर्स काण्ड में अपना नाम हटवाने के लिये अमर सिंह के माध्यम से चन्द्रशेखर जी द्वारा अपना नाम हटवाना आदि। किरण वेदी ने समय से पहिले रिटायर्मेंट शीला जी की नितियों की वजह से लिया था। उन्हें रिटारमेंट दिया नहीं गया था। दिल्ली का पुलिस विभाग उनके जूनियर के सुपुर्द कर दिया गया। एक तरह से यह उनकी  सीनियरटी एवं ईमानदारी का अपमान था। अतः उन्होंने रिचाचरमेंट ले लिया था। शेष कल............

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

प्रिय संतोष जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! आप अपने एंटीवायरस को हमेशा अपडेट करके रखियेगा और पूरे सिस्टम को स्केन भी करते रहिएगा इसके इलावा डिस्क क्लीन अप द्वारा फ़ालतू की फैले भी साफ़ करते रहे ..... control + alt +delete तीनों बटन को एक साथ दबाने पर जब टास्क मैनेजेर नजर आएगा तो आप जान सकेंगे की कितने प्रोग्राम और फाइलें सक्रिय है ..... इनमे से गैर जरूरी को निष्क्रिय क्र दे तो भी स्पीड बढ़ाने में मदद मिलेगी .... ************************************************************************************************************* मेरे विचार एक सीमित चक्कर (दायरे ) में रहते है शायद मेरी जीवन शैली के कारण लेकिन यह देख कर खुशी होती है की मेरे बहुत से साथी खुले दिल और दिमाग से विचारों को सुन्दरतम विस्तार दे रहे है .... जब जीवन की दिशा बदलेगी + दशा बदलेगी तो सोच का नजरिया भी बदल ही जाएगा खुदबखुद ही ..... तब तक इसी तरह झेलना पड़ेगा मुझको - हा हा हा हा हा हार्दिक आभार सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

कमल शर्मा जी जय श्री राधे / जय श्री राम में आपको एक कांग्रेसी होने के नाते कहने से परहेज करूंगा / कल आप मुझे आम आदमी न समझ भाजपा का आदमी न समझने की भूल न कर लें / आप पोस्ट पर टिप्पणी देते हें पर जब उस लिक पर क्लिक करते हें तो आपका ब्लॉग खाली अता हें / सो हाल चाल जान्ने के लिए बड़ी ही मुशिकिल हें / आप यूं पी ए-२ के पार्ट हें अतः बड़ी खुशी हुई आपने अपनी सच्ची बात कह दी पर शर्मा जी कोई भी व्यक्ति किसी भी विचार धारा को मान सकता हें इसमें टकराव की क्या बात / विचार बदलते रहते हें कभी कोई कांग्रेसी हें तो सता परिवर्तन के लिए वो भाजपा या सपा या बसपा या सवतंत्र विचारधारा वाला हो सकता हें / आप कोई भी हो पर मंच पर हम आपको एक सम्मानित ब्लोगर ही मानते हें / आपके विचार अच्छे लगे

के द्वारा: satish3840 satish3840

आदरणीय दीप्ती बहिन ...... सादर अभिवादन ! मैं मानता हूँ और आपकी बातों से सहमति भी रखता हूँ की यहाँ पर किसी को भी किसी दूसरे की किसी भी धर्म और राजनितिक पार्टी के प्रति आस्था और झुकाव से कोई लेना देना और परेशानी नहीं होनी चाहिए .... वैसे तो इस लेख में ही अपना पक्ष पूरी तरह से मैंने रखने की कोशिश की है ...... फिर भी जो कुछ रह गया था नीचे आदरणीय विनीता जी को विस्तार से इस बाबत बताने की कोशिश की है ..... इस मंच का महौल कुछ इस तरह का है की मुझको अभी भी आशा नहीं है की मुझको पूरी तरह से पहले की तरह से स्वीकार किया जाएगा ..... लेकिन इस बात की परवाह ना करते हुए जो कदम मैंने उठाया है उससे मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूँ ..... वैसे इस बात से हौंसला तो मिला है की कम से कम आपको इस तरह की बातों से कोई फर्क नही है पड़ने वाला - हा हा हा हा हा धन्यवाद सहित आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

दिव्या बहिन ..... सादर अभिवादन ! आपकी प्रतिकिर्या शायद नीचे दीप्ती बहिन को मेरे हलके फुल्के प्रश्नों रूपी जवाब के असर में लिखी गई लगती है .... हमारा आपसी रिश्ता उतार चढ़ाव भरा रहा है .... इसलिए बहुत सोच समझ कर कैलकुलेटेड प्रतिकिर्या लिखी थी मैंने .... लेकिन आपकी बात कुछ दूसरी और सबसे अलग है इसलिए इस बात से वैसे तो कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए लेकिन फिर भी अगर आपने बतला ही दिया है तो मैं भी आपसे अपने बचपन की एक बात सांझा करना चाहता हूँ ..... मुझको शुरू में कांग्रेस की पकिस्तान के प्रति ढुलमुल नीति तथा अडवानी जी और अटल जी की दो टुक बाते अच्छी लगती थी ..... लेकिन फिर बाद में बहुत देर बाद समझ आया की उसमे भी एक समझदारी थी.... जब तक भारत ने दूसरा परमाणु परीक्षण नहीं किया था पकिस्तान के भी हाथ बंधे हुए थे , लेकिन भारत द्वारा बिना सोचे समझे अति उत्साह में उस कदम को उठाने के बाद पाकिस्तान को परमाणु परीक्षण का बहाना और मौका मिल गया ..... नतीजा आज उसको हमारा पहले जितना डर नहीं रह गया है .... एक पागल और सिरफिरे तथा बेलगाम और अनियंत्रित पड़ोसी के हाथ में ऐसा खतरनाक हथियार लग चूका है की जिसका इस्तेमाल उसके वहां पनप रहे आंतकवादी भी अपनी पहुँच बना कर , कर सकते है .... शायद विधि का यही विधान हो .... क्योंकि नास्त्रेदमस की किताब में यही संकेत है की दुनिया के लिए विनाशकारी युद्ध पकिस्तान से ही शुरू होगा ..... बाकी आपने जो देश के हालत के बारे में बात की है उनमे सुधार होना और कमी आना बहुत ही मुश्किल है ..... क्योंकि अब गठबंधन की राजनीति का जमाना है ..... एक सांझीदार आगे बढ़ेगा तो बाकी के उसकी टांग पकड़ कर पीछे खीचेंगे ..... ऐसे हालात में पहले जैसी तरक्की नामुमकिन है ..... फिर भी मन के किसी कोने में आशा का दीपक तो जलता ही है और रहेगा भी ..... ढेरों आभार सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

मेरी इतनी अपील है की सिर्फ विरोध के लिए विरोध करने की बजाय सही को सही और गलत को गलत कहने की परम्परा का पालन किया जान चाहिए जोकि हम लेखकों का धर्म के साथ साथ फ़र्ज़ भी है …. नियम नीति तो सब यही कहती है बंधू हम भी इसी के साथ खड़े हैं लेकिन जब पार्टी व्हिप जारी करती है और ये समझाया जाता है की हमारी पार्टी से ऊपर कोई व्यक्ति या व्यक्तित्व नहीं है तो ..? हर पार्टी को नेता को दलगत भावना से उठ सच्चाई और अच्छाई से अपनी पार्टी को ऊपर ले जाना होगा लोग मूरख होते भी अब कुछ जागने लगे हैं और कांग्रेस को इस के लिए चुकाना भी पड़ रहा है समझिए की जमीनी रूप से काम करें विकास करें भ्रष्टाचार को रोकने में पुरजोर सहायता दें ,,, आभार जय श्री राधे भ्रमर ५

के द्वारा:

सादर अभिवादन राजकमल जी ,विदेश प्रवास के कारण जागरण जंक्शन पर कुछ सक्रियता कम थी !वैसे ,अपने ब्लॉग पर बुलाने के लिए कुछ भी विवादित लिखना जरुरी नहीं है हम तो बिन बुलाये मेहमान है!वैसे जिस दिन साहित्यकारों का बंटवारा होना शुरू हो जायेगा उस दिन वो साहित्यकार नहीं नेता बन जायेंगे जिन्हें आम जनता दिल से कम ही पसंद करती है !वैसे आप आप की पोस्ट को पढने के लिए आपको खोजना थोडा मुश्किल होता है .नाम से आपकी जीरो पोस्ट ही दिखती है !बड़ी मुश्किल से आप होम पेज पर नज़र आये और हम भी आ धमके आपके पेज पर ! वैसे नारिया समझदार होती है ये बात आपको आज ही क्यों पता चली ये तो सर्वविदित बात है !घर पर भाभी जी से भी पूछ कर देखिएगा ! अगर कुछ ज्यादा कह दिया हो तो क्षमा की हक़दार तो मै हमेशा से ही हूँ !क्षमा मांगूगी नहीं वो तो आप खुद ही दे देंगे D33P

के द्वारा: D33P D33P

आदरणीय पुनीता जी ..... सादर अभिवादन ! आदरणीय जवाहर लाल जी .... सादर अभिवादन ! प्रिय मित्र अनिल जी .... सप्रेम नमस्कारम ! अगर मैंने नौटंकी करनी होती ती इसी बात को अपने लेख के अन्त में कहता .... यहाँ पर आप सभी से उतना स्नेह और आदर मिला जिसके की मैं खुद को काबिल भी नहीं समझता हूँ .... मेरी नौकरी अब कुछ ही दिनों की मेहमान है शायद .... नेट के कनेक्शन की एक महीने के लिए एक्सटेंशन मिल पाई है लेकिन कम्प्यूटर के इस्तेमाल के बारे में अभी भी सिथति सपष्ट नहीं है ..... पिछले दिनों ही फेसबुक पर पूज्यनीय कुशवाहा जी का सन्देश पढ़ा और जाना की किस तरह इतनी तकलीफ में भी वोह ब्लागिंग कर रहे है .... बस उन्ही से प्रेरणा लेकर इस मंच पर दुबारा से लौटा हूँ ..... देखता हूँ की भगवान और कब तक आप सभी के सानिध्य में रखता है क्योंकि होई है वोही जो राम रची रखा आप सभी के स्नेह से अभिभूत हूँ और अपनी जिम्मेवारियो का एहसास भी है ..... आप सभी का दिल से आभारी हूँ

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

पूज्यनीय कुशवाहा जी ..... साक्षात दण्डवत बारम्बार प्रणाम ! देख कर हैरानी होती है की किस तरह से आप अपना अमूल्य समय इतने कष्टों को सहते हुए इस मंच को तथा साहित्य संगम को प्रदान कर रहे है ..... आज फेसबुक पर पिछले दिनों प्राप्त आपका एक सन्देश पढ़ा सच में ही आत्मग्लानि हो रही है की एक तरफ तो आप इतनी ज्यादा बीमारियों का सामना हौंसले से करते हुए आप हमको अपना स्नेह देने में किसी प्रकार की चूक नहीं करते है और दूसरी तरफ हम है की .... भगवान से यही प्रार्थना है की वोह आपको शीघ्रतम उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे और पहले की भांति फिर से सेहतमंद कर दे और तंदरुस्ती प्रदान करे ..... अपना ख्याल रखियेगा और दवा तथा खाना समय पर लेते रहिएगा .... आपका आभार प्रकट करने के काबिल नहीं हूँ शुभकामनाओं सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

प्रिय योगी जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! मैं भीड़ भड़क्के से सदैव दूर ही रहना पसंद करता हूँ ..... मेरे पास कांग्रेस पार्टी की सदस्यता नहीं है ..... बस मेरा मन शुरुआत से ही इसको अपना मोखिक समर्थन देता आया है ..... आपने ठीक कहा है की जिनको सत्ता मिली हुई होती है वोही इसका दुरूपयोग करते है और नाजायज तरीके से अपनी आने वाली पुश्तों का घर भरते रहते है और देश की जनता भूखों मरती रहती है .... दुःख तो इसी बात का है की किसी हद तक कम्युनिस्ट पार्टिया ही इसका अपवाद है , वरना तो सभी एक ही थैली के चट्ठे – बट्ठे है ..... मैंने आज तक सिवाय तिरंगे के और किसी को मान नहीं दिया .... विश्व विजयी तिरंगा हमारा प्राणों से भी है यह हमको प्यारा आयो मिल कर इसके चरणों में अपने शीश को झुकाए पता नहीं कहाँ पर इस कविता को पढ़ा था कभी ..... आपकी सुलझी हुई प्रतिकिर्या पढ़ कर बहुत ही अच्छा लगा ढेरों धन्यवाद सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

प्रिय सचिन भाई ..... सप्रेम नमस्कारम ! मेरा नैट का जीवन उधार की जिन्दगी जीते हुए एक्सटेंशन पर लम्बी लम्बी साँसे ले रहा है ..... सोचा की पता नहीं कितने दिन और बाकी बचे है , लगे हाथ अपने बारे में साथियों को कुछ बताता ही चलूँ ..... अब जनता का मोह कुछ भंग हो जाएगा तो कल को इतना दुःख नहीं होगा किसी को .... मैं खुद हैरान होता हूँ की किस जमीर के लोग है जोकि इस भारत माता की पावन मिटटी में जन्म लेकर , यहाँ का खाते – पीते हुए और सांस लेते हुए इस देश के खिलाफ देशद्रोही कार्यों में लिप्त रहते है .... दसवी क्लास में एक पैराग्राफ आज तलक याद है जिसमे लिखा हुआ था की “हमे भारत की एकता और अखंडता में यकीन रखना चाहिए ..... हमे यह नहीं देखना चाहिए की भारत ने हमारे लिए क्या किया है , बल्कि उसकी बजाय हमे यह सोचना होगा की हम भारतवर्ष के लिए क्या कर सकते है”..... इस मंच पर तो इस बात की इतनी महत्ता होनी ही नहीं चाहिए की कौन किस पार्टी से सम्बंधित है ..... यहाँ पर तो हम सभी कलम के लिखारी है यही हमारी जाति है और यही हमारी पहचान है ..... हार्दिक आभार सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय चातक जी ..... सादर अभिवादन ! आज की डेट में भारतीय कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों पर ही फाइव स्टार कल्चर हावी हो चूका है .... जिसको भी मौका मिलता है वोह अपनी छाप छोड़ ही जाता है .... वोह दिन हवा हुए जब दोनों पार्टियों में जमीन आसमान का फर्क है , फिलहाल तो इनमे शायद ही उन्नीस- बीस का फर्क हो ..... मेरा यह मानना है की आप जैसा बेहद जहीन इंसान इस तरह का लेख तो क्या बल्कि उस पर आई हुई सभी प्रतिकिर्याओ तक को भी पढ़ डालता है ..... अगर आपने वाकई में ही इसको पढ़ा है तो इसमें लिखी हुई कई बाते आपने पहले भी पढ़ रखी होंगी जिनको की मैंने आपके ही कहने पर अपने लिखे लेख “दीवार” में लिखा था ..... आप क्या हैं इस बात को मेरे समेत सभी काफी पहले से ही जानते है , असल बात तो मेरे खुद से सम्बन्धित थी जिसको बताना मैंने जरूरी समझा ..... मैं सदस्यता वाला वालंटियर नहीं बल्कि मोखिक रूप से समर्थन देने वालों में से हूँ .... झूठे मान से मन भर चूका है अब तो अपनी असलियत बता कर दूसरों की सच्चाई जानने का मन हो रहा था इसलिए यह सारी कवायद की ..... जैसा मैंने सोचा था बिलकुल वैसा तो नहीं फिर भी कुछ कुछ बल्कि काफी हद तक आशानुरूप तो हो ही रहा है ..... अपने चेहरे से मुखौटा उतारे बिना यह सारी जानकारी मिलनी असंभव थी .... अभी तो शुरुआत है आगे और भी परते खुलेंगी तथाकथित बुद्धिजीवियो की .... आपका हार्दिक आभार और स्वागत

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय मीनू जी ..... सादर प्रणाम ! इस स्वीकारोक्ति में एक सन्देश दूसरों के लिए भी है की वोह भी मेरा अनुसरण करे .... आपकी ही तरह मैं भी दूसरे नेताओं को भी पसंद करता हूँ जिनमे की ज्योति बासु सबसे उपर आते है ..... काश मार्क्सवादी पार्टी से वोह ऐतहासिक भूल ना हुई होती तो देश को आज़ादी के बाद शास्त्री जी के बाद एक और काबिल प्रधानमंत्री मिल गया होता ..... मैं अक्सर ही सोचता की जब भी किसी ब्लागर से आमना सामना होगा तो उसको मेरी असलियत जानकार शायद धक्का लगेगा ..... इसलिए इस बात को गैरजरूरी होते हुए भी बताना उचित समझा ..... बाकि देश का विकास जो भी करेगा जनता उसको ही चाहेगी ..... वैसे मैं नहीं समझता हूँ की आज की तारीख में देश के और देश की जनता के लिए सोचने वाला कोई राजनेता हमारी किस्मत में लिखा है ..... आपके समर्थन के लिए तहे दिल से आभारी हूँ

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा: allrounder allrounder

भावार्थ और पंक्ति का उद्गमस्थल आप नहीं जानते हैं, यह मैं नहीं मानता. पर मेरा भावार्थ यही है कि आप जैसे भी हैं, जिस पार्टी से भी सम्बन्ध रखते हैं, या न रखते हैं ... आपका मुझसे गुरु-शिष्य का रिश्ता है और रहेगा. आप इस मंच को छोड़ने का ख्याल भी दिल में न लायें. हाँ आपके आलेख में इधर हास्य व्यंग्य में 'हास्य' का अभाव दिख रहा है, जिसके हम सब मुरीद हैं...... पहले बहुत सारे लोग आपको प्रतिक्रिया देने से पहले अपनी हंसी को शांत कर लेते थे, तब प्रतिक्रिया लिखते थे. गुरुवर समय का अभाव अगर है, तो कोई बात नहीं पर अलविदा ... भाव भीनी विदाई ... न बाबा न ! आपने अपने अथक प्रयास से शाही जी को वापस बुला लिया और अब आप अलविदा कहने लगे .... नहीं सर !.... आपकी औकात बताने लगूँ यह मुझमे सामर्थ्य कहाँ ???? आप गुरु थे,गुरु हैं और गुरु रहेंगे. बीच बीच में भूचाल या सुनामी आती है. फिर सब कुछ सामान्य हो जाता है यही तो जिन्दगी है महोदय ... यह सब मुझे आपको बताना पड़ेगा? सड़क पर चलते हैं तो कहीं सड़क बहुत अच्छी मिलती है, तो कही हिच्खोले देने वाले गड्ढे भी तो रहते ही हैं न!...... इसलिए आपकी वंदना करता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि आप यथासंभव मंच से सम्बन्ध बनाये रक्खें! आभार सहित - जवाहर.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: PRADEEP KUSHWAHA PRADEEP KUSHWAHA

पूज्यनीय गुरुदेव शाही जी ...... सादर प्रणाम ! आपका स्पष्टीकरण इस बात की तरफ साफ -२ इशारा कर रहा है की अभी भी आपकी तरफ से कुछ संशय बाकि है मेरे लाख चाहने पर भी आज तक आपने नहीं बतलाया है की आपकी उस प्रतिकिर्या में आखिरकार था क्या ?..... इसे मात्र सयोंग ही कहा जाना चाहिए की मेरा वोह लेख आपकी उस प्रतिकिर्या के पोस्ट होने के आसपास ही आया .... क्लास मैं जिन दिनों में लिया करता था उन दिनों में तो पसीना भी गुलाब था – किसी का भी लिहाज और प्रवाह नहीं होती थी ..... लेकिन आज के समय में सभी कुछ बदला हुआ है ..... अब ना तो पसीने में वोह खुशबू ही रही और ना ही वोह बेफिक्री वाला आलम तथा मस्त मौला अंदाज़ ..... हार्दिक आभार सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय पुनीता जी ...... सादर अभिवादन ! विचारों में भिन्नता भी गौण हो जाती है जब देश पर मर मिटने और कुछ कर गुजरने की बात होती है ..... कारगिल युद्ध के समय इस बात को बड़ी ही शिद्दत से हम सभी ने महसूस भी किया था ..... आखिरकार कुछ तो कामन बात होनी ही चाहिए जोकि पूरे देश के नागरिको को एक सूत्र में पिरो सके ..... स्कूल में जब हमको एक टापिक दिया जाता है की “अगर मैं देश का प्रधानमंत्री होता तो क्या क्या करता” उस पर लिखते समय दिल +दिमाग कल्पनाओं का जो खाका खींचते है उससे ही किसी की भी देश भक्ति और कुछ कर गुजरने का ज़ज्बा तथा आशाओं और सपनो का सुन्दर संसार उभर कर सामने आ पाता है ..... ऐसी कोई प्रतियोगिता अगर इस मंच पर भी करवाई जाये तो क्या बात हो ..... प्रतिकिर्या के लिए आपका बहुत -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय विनीता जी ..... सादर अभिवादन ! इस लेख को पोस्ट करने से पहले कई रातों को मैंने बहुतेरा सोचा ..... आपकी ही तरह मेरे मन में यह भी ख्याल आये थे की क्या जनता का मेरी किसी पार्टी के प्रति धर्म के समान आस्था को जानने से कोई फर्क पड़ने वाला है .... वैसे तो आपने इस लेख को पढ़ ही लिया होगा , फिर भी अपनी नज़र से इस लेख में उठाये गए कुछेक संदेशो को आपसे सांझा करना चाहूँगा :- *जागरण को इस बात की सलाह और सन्देश देने की कोशिश की गई है की इस मंच पर सिर्फ कांग्रेस के विरोध की ही बाते की जाती है , उनमे संतुलन आना चाहिए ..... *इस मंच पर मैंने साथियों को अपनी भाजपा और संघ के प्रति आस्था तथा झुकाव को गर्व से स्वीकारते हुए सुना है , लेकिन मेरे से पहले आज तक मेरे सिवाय मैंने किसी के भी मुख से ऐसी बात नहीं सुनी .... *जब हम यह कहते है तथा मानते है की सभी नेता भ्रष्ट है तो फिर किसी पार्टी से जुड़े होने में ना तो कोई गर्व होना चाहिए और ना ही कोई हीनता तथा अपराधबोध ..... क्योंकि जिनको मौका मिला है वोह लूट रहे है और बाकी के अपनी बारी के इंतज़ार में है की कब उनको मौका मिले और वोह अपनी आने वाली पुश्तों के भविष्य को सुरक्षित करे .... *जब मैं बाकी के साथियों के उनके दूसरी पार्टियो के प्रति झुकाव को जानता हूँ तथा उनसे मित्रवत व्यवहार करता हूँ तो उनको भी मेरे बारे में इस बात को जानने देने का हक + मौका मैं देना चाहता हूँ की आखिरकार मेरा किस पार्टी के प्रति झुकाव है और सबसे बड़ी बात इसके बाद उनके द्वारा अपने प्रति व्यवहार तथा भाषा शैली का भी आंकलन करके उनकी असलियत को जानना असल मकसद है इससे झूठे दोस्तों की असलियत मेरे सामने आ सकेगी और यह बात भी साफ़ हो जायेगी की जब लीडर “अन्दरखाते” एक है तो उनकी अलग -२ पार्टी को मानने वाले आपस में किस हद तक “बाहर से” एक है ...... इससे सबसे महत्वपूर्ण यह जानकारी मिलेगी की जब आम जनता लीडरों से धोखा खा कर आपस में लड़ती है तो यहाँ के तथाकथित बुद्दीजीवी इस बारे में किस प्रकार का आचरण प्रदर्शित करते है ...... बाकी आप खुद ही यह बताएंगी की आपने क्या जाना और समझा है इस लेख से ?..... आपके प्रश्नों को जान कर हार्दिक प्रसन्नता हुई इसीलिए उनके उत्तर देकर मुझे मानसिक संतुष्टि तथा सकूँ मिला ..... आपका तहेदिल से शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

प्रिय संतोष जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! आपकी बातों और सलाह से ऐसा लग रहा है की आपने इस लेख को पूरा पढ़ा नहीं है शायद .... अगर पढ़ा होता तो आप इस तरह से नहीं कहते ...... मैंने इस मंच पर लेखक के विचारों+ विषयवस्तु की बजाय उसके स्तर + प्रवाह + शैली विकास को बढ़ावा दिया है ..... मैं बाबा रामदेव की बजाय सिर्फ अन्ना हजारे जी का समर्थक हूँ ..... बाबा रामदेव ने प्रकाश सिंह बादल + मुलायम सिंह का समर्थन हांसिल किया है .... लीडर कोई भी हो भ्रष्टाचार में कोई भी किसी से कम नहीं है ..... अगर उनका उद्देश्य एक भ्रष्टाचारी को जड़ से उखाड़ कर उसकी जगह पर किसी दूसरे भ्रष्टाचारी को स्थापित करना है तो मैं नहीं समझता की उनका रास्ता ठीक है ..... कांग्रेस पार्टी के विकल्प के रूप में मेरे सामने सिर्फ और सिर्फ अन्ना हजारे जी ही है ..... लेकिन सत्ता हांसिल करने से पहले ही दोनों महानुभावों के खुद के और उनकी टीमों के अहम और महत्वाकांक्षाए उन पर हावी हो गई है ..... जब सत्ता की चाह किसी को भी नहीं है तो फिर मिल कर लड़ाई लड़ने और उसके श्रेय दूसरे को देने वाला जिगर इनके पास क्यों नहीं है ?..... http://rajkamal.jagranjunction.com/2010/12/12/%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A1-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9B/ आपका बहुत बहुत आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय अलका जी ..... सादर प्रणाम ! एक कहावत है की बकरे की जान गई और खाने वाले को स्वाद नहीं आया ..... लेकिन आज आपको स्वाद तो मिला लेकिन मुझे उसके लिए बहुत भारी कीमत भी चुकानी पड़ी है ..... जब मेरे पक्ष वाले रिश्तेदारों और गली मोहल्ले वालों ने यह सलाह दी की मुझे अपनी शादी के बाद ही उनको छोड़ना चाहिए तो मैंने इस बात की भी परवाह नहीं की ..... जब साबित ही हो गया की अमुक व्यक्ति हमारा दुश्मन है फिर चाहे वोह कोई भी क्यों ना हो , उसका परित्याग करने में कैसी हिचकिचाहट और किस बात की देरी ?.... मुझे खुशी है की मेरी सच्चाई भी आपको लज्जत दे गई ..... अगली बार आपको कल्पना के सहारे कुछ हंसाने की कोशिश करूँगा ..... क्योंकि सच्चाई की हांडी बार बार नहीं चढ़ती , मेरे लिए काम तो आखिरकार उसी ने आना है हर बार की ही तरह – हा हा हा हा हा हा हार्दिक आभार सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

सरिता बहिन ..... सादर अभिवादन ! उस बहिन का नाम खुद बताना नहीं चाहता , लेकिन उनकी सलाह मिले हुए कई महीने हो चुकने के बाद काफी सोच विचार के बाद अब यह कदम उठाया है ..... अपराध बोध वाली कोई बात नहीं है , बल्कि इस मंच का माहौल ही कुछ इस तरह का बनता चला गया है की आज तक किसी को मैंने सीना ठोक कर यह कहते नहीं सुना है की हाँ मैं कांग्रेस पार्टी का समर्थक हूँ ..... इसीलिए मैंने आज यह पहल की है ताकि बाकी के लोग भी सामने आये .... क्योंकि कांग्रेस पार्टी का समर्थक होना कोई अपराध नहीं है ..... आजके जो हालात है उनमे जो भी पार्टी सत्ता में आएगी उसके नेता गण अपने काले कारनामों से अपनी पार्टी की छवि को भारी आघात पहुंचाएंगे और अपने समर्थकों तथा पार्टी के शुभचिन्तको को शर्मशार करते रहेंगे ..... जिन रहस्यों की तलाश में आप लगी हुई है उनका खुलासा उपर आदरणीय विनीता जी को दिए गए जवाब में करने की कोशिश की है मैंने प्रतिकिर्या के लिए हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

बार्डर पर एक सैनिक देश के दुश्मनों से लड़ाई लड़ता है लेकिन मैंने तो अपने खुद के घर में अपने परिवार से जंग लड़ी है ….. इसलिए मैं खुद को एक क्रांतिकारी + देशभक्त और जाबांज सैनिक मानता हूँ ….अरे आप ही नहीं गुरुदेव हम सब भी जांबाज मानते है आप को ..कांग्रेसी ही सही लेकिन जनता की सोचिये तो रूप मत बदलो अंतर तो बदलिए बड़ी अपेक्षाएं है हे कांग्रेसी भाई आप से .......... .क्या आप मुझको भी एक देशद्रोही ही मानेंगे ? कदापि नहीं काल चक्र तो चलता ही रहता है कौन जाने कल क्या हो जाए उस के लिए पूरा इतिहास क्या झूंठला दिया जाएगा नहीं जनाब ....जो सामने आता रहेगा निर्णय होता रहेगा खुले दिल से राज उगलने के लिए बधाई शुभ कामनाएं ..लेकिन इतने दिन कांग्रेसियों के खिलाफ पटाखे चलते रहे कैसे सुने आप यहाँ ??? जय श्री राधे भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5 surendra shukla bhramar5

आदरणीय गुरुदेव ,..सादर प्रणाम सच्चाई हमेशा कड़वी नहीं होती है ,..आप कांग्रेसी हैं यह अच्छी बात है ,.हिन्दुस्तान में बहुत लोग कांग्रेस के समर्थक हैं ,..कांग्रेस में महान नेता भी रहे हैं,.. लेकिन इस सच्चाई से कोई इनकार नहीं कर सकता कि इस पार्टी ने बहुतेरी बुराइओं को जन्म दिया है और एक व्यक्ति/खानदान की छाया में अपने सभी उसूलों (शायद होंगे भी ) को मिटटी में मिलाया ,..अब इसका मिटना ही देश के हित में है .. कांग्रेस का समर्थक होना कोई गुनाह नहीं है ,.लेकिन सच्चाई और बुराई जानने+समझने +महसूस करने के बाद उसका साथ देना वाकई गुनाह होगा ,.. औरों के साथ ही नहीं बल्कि खुद के साथ भी,..अब समय आ गया है कि आप खुद को कांग्रेसी मानना छोडकर सच्चाई ही स्वीकार करें और सच्चाई यह है कि आप एक देशभक्त हैं ,..और हमेशा रहेंगे ,...सादर आभार सहित (इंटरनेट की रफ़्तार तेज करने का कोई उपाय हो तो कृपया bataiye )

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

सादर प्रणाम! "ऐसे साथियों से मैं खुद पूछना चाहता हूँ की कल को अगर मेरा सगा भाई देश द्रोही बन जाए (वैसे कल को अगर वोह बन जाए तो मुझको कोई हैरानी नहीं होगी – बस उसको एक अवसर मिलने भर की देर है ) तो क्या आप मुझको भी एक देशद्रोही ही मानेंगे ?….." अब तो लोग जान ही गए हैं कि आप का और मेरा 36 का आकड़ा हैं..............औरों का तो पता नहीं .........पर मैं तो जरुर मानूंगा नहीं, मानता हूँ...........क्योंकि देशभक्ति के संचें में ढला जाय तो पता चलेगा कि ९९.९९९९ % भृत्य देश द्रोही हैं औइर निश्चय ही उसमे से........... आप और मैं भी हूँ............. आपको नहीं लगता कि इस धरती पर जाति, क्षेत्रवाद, राष्ट्रवाद और आतंकवाद जैसे वाद बहुत हो चुके................क्यों न कुछ नया किया जाय .....नयापन विचारों में, नयापन लड़ने और झगड़ने में, नयापन...............बस नयापन..........

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

के द्वारा: narayani narayani

आदरणीय जवाहर लाल जी ..... सादर अभिवादन ! अगर पति और पत्नी दोनों में से कोई एक मांगलिक हो तो दोनों में से किसी एक की असमय ही अकाल म्रत्यु होने की प्रबल सम्भावना रहती है .... हमारे मोहल्ले में तो लड़का लड़की का घूँघट उठाने से पहले ही भाग गया था , इतने प्रबल ग्रह थे लड़की के .... लेकिन जब बाद में उसकी शादी (तलाक के बाद- पुलिस वालों की सहानभूति भी लड़की पक्ष की बजाय लड़के से थी , उसके हाल के कारण ) किसी दूसरी साधारण लड़की से करवाई गई तो आज तक सभी कुछ ठीक थक चल रहा है ..... एक दूसरी घटना :- पहले जुबां पर शादिया होती थी ..... मेरी भुआ जी की शादी मांगलिक लड़के से करनी पड़ गई थी ..... दो बच्चों के ज़न्म के बाद एक दिन रात को उसको यमदूत उपर ले गए किसी और के भरम में , वहां यह भी पता चला की दो दिन के बाद पास के गाँव में इसी नाम के किसी दूसरे आदमी को लेकर आना है .... यह बात उन्होंने कसम देकर अपने एक सहयोगी को ही बतलाई थी जिसने की उनकी म्रत्यु के बाद इस रहस्य को उजागर किया था ..... इसलिए हमारे खानदान में उसके बाद किसी भी मांगलिक की शादी साधारण से नहीं हुई .... आपको तहे दिल से शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय राजीव जी ..... सादर अभिवादन ! जिस तन लागे वोह ही जाने गैर क्या नये प्रीत पराई पहले जुबां पर शादिया होती थी ..... मेरी भुआ जी की शादी मांगलिक लड़के से करनी पड़ गई थी ..... दो बच्चों के ज़न्म के बाद एक दिन रात को उसको यमदूत उपर ले गए किसी और के भरम में , वहां यह भी पता चला की दो दिन के बाद पास के गाँव में इसी नाम के किसी दूसरे आदमी को लेकर आना है .... यह बात उन्होंने कसम देकर अपने एक सहयोगी को ही बतलाई थी जिसने की उनकी म्रत्यु के बाद इस रहस्य को उजागर किया था ..... इसलिए हमारे खानदान में उसके बाद किसी भी मांगलिक की शादी साधारण से नहीं हुई .... इस्मत चुगताई जी को पढ़े हुए एक मुद्दत हो गई है , उनका मैं बहुत बड़ा फैन हूँ ..... लेकिन खुशवंत सिंह को मैं आज तक लगातार पढ़ रहा हूँ .... स्वर्गीय कन्हैया लाल कपूर और पंजाब केसरी के लेखक स्वर्गीय सरदार सिंह पागल आदि का शायद सम्मिलित असर हो मेरे लेखन में ...... आपको ढेरो धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

प्रिय राजकमल जी , आपके इस आलेख पर मैंने भी कमेंट्स भेजे थे पर वो दिखाई नहीं दिए,ये कंप्यूटर मियां मेरे साथ बहुत हेरा फेरी करते रहते हैं.खेर उम्र की तो क्या कहें आपको पता ही होगा की विश्व की सब से छोटी माँ केवल ५ वर्ष की थी,सोचिये तो ज़रा उस मासूम बछि पर क्या गुजरी होगी जो स्वयं ही गोद में उठाने लायक थी.और जो आजकल बछो को दिखाया जाता है मीडिया में वो तो बच्चों को समय से पहले ही परिक्व बना रहा है,पर केवल दैहिक स्टार पर ही मानसिक परिपक्वता तो अभी आई नहीं होती.khair मेरे vichar में ladke लडकिय और परिवार जब मानसिक और शारीरिक,एवं सामाजिक तौर पर तैयार हों.सर्कार कुछ भी नहीं कर पाती जब उस की नाक के नीचे बाल विवाह होते हैं .ताले चोर डाकुओं के लिए नहीं होते.

के द्वारा: jyotsnasingh jyotsnasingh

प्रिय भरोदिया जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! हमारे समाज में कभी किसी समय शुरुआत में ऐसी अनैतिक व्यवस्था रही होगी अज्ञानता वश लेकिन बाद में इस भूल को सुधार लिया गया ..... लेकिन आपकी कही हुई बात अप्सराओं पर लागू होती है ..... जब अर्जुन ने अपने पूर्वजों से संसर्ग कर चुकी अप्सरा का प्रणय निवेदन ठुकरा दिया था तो उसने उसको एक साल के लिए किन्नर बन जाने का श्राप दे दिया था ..... और रही बात नाबालिग बच्चियों की तो उनके बारे में परिवार और समाज तथा सरकार सभी को ही सोचना तथा करना चाहिए ..... लेकिन जो बड़े हो गए है उनमे तो अपना भला बुरा सोचने की खुद ही क्षमता आ गई है .... लेकिन केवल इसी बात को सोच कर उनको उनके हाल पर छोड़ा नहीं जा सकता ..... बाकि सरकार कानून बनाती है तो वोह कितने लागू होते है और किस तरह से होते है इस बात को आप और मैं तथा बाकी के सभी लोग भली भांति जानते है ..... अगर इस तरह के कानून बनाने है तो फिर फारेन कंट्री की तरह से सुविधाए भी दी जाए जहाँ पर की किसी बच्चे द्वारा फोन का एक बटन दबाने पर ही पुलिस तुरंत हाजिर हो जाती है और उसके माता पिता तक को उनकी औकात में ले आती है ..... आपका हार्दिक शुक्रिया

के द्वारा:

आदरणीय अशोक जी ..... सादर अभिवादन ! कम से कम इस मामले में तो मैं आपका हितैषी बिलकुल भी नहीं हूँ ..... मैं कभी भी नहीं चाहूँगा की आपकी इस तरह की दुकानदारी सफल हो – हा हा हा हा हा हा टी.वी. और बीवी में अक्सर ही बहुत सी समानताये बतलाई जाती रही है ..... लेकिन इनमे एक निर्जीव है तो दूसरी सजीव , इसी कारण महिलाओं से यह अपेक्षा रखी जाती है की वोह अपना खुद का रिमोट या तो खुद के हाथ में रखे या फिर अपने भाई + पिता और पति के हाथ में ही रहने दे .... भूल कर भी किसी पराये पुरुष के हाथों में कठपुतली की तरह ना खेले और ना ही अपना इस्तेमाल होने दे ..... आपसे गुजारिश है की किसी दूसरे धन्धे के बारे में सोचिये..... दिली आभार सहित

के द्वारा:

पूज्यनीय गुरुदेव शाही जी ..... सादर प्रणाम ! जिन अबलाओं का शोषण हो चूका है और जो सबलाये अपना शोषण खुद ही करवा चुकी है या फिर करवाने को आतुर है , यहाँ पर मैंने सिर्फ उन्ही महान नारियों के बारे में ही कहना चाहा है ..... सरेआम तो ऐसी बाते फिल्मों में ही होती है लेकिन असल जिन्दगी में आपसी सहमति + जोर ज़बरदस्ती पर्दे के पीछे ही होती है ..... इसलिए किसी को कोई सलाह देना + सुरक्षा की बात करना बेहद ही रिस्की काम है ..... शोषण का शिकार होने जा रही सभी ऐसी नारियो को भगवान मेरे जैसा पति दे यदि वोह भी संभव नहीं तो फिर उनको सद्बुद्धि दे तथा उनकी छठी इंद्री को इतना बलशाली कर दे की वोह पुरुषों की नापाक निगाह और इरादों को जान सके + पहचान सके , लेकिन मेरे बारे में हमेशा ही धोखा खा जाए...... इस मंच पर आपकी क़र्ज़ की दूसरी किस्त मिल गई है उसके लिए भी आपका डबल आभार लेकिन पहली किस्त पर प्राप्त प्रतिकिर्याओ का जवाब ना दे पाने का आपने संगीन जुर्म कर लिया है किरपा करके उसका प्रायश्चित समय रहते जरूर कर लीजियेगा .... आपका बहुत -२ धन्यवाद और आभार

के द्वारा:

पूज्यनीय कुशवाहा जी ..... सादर प्रणाम ! यकीनन आज की तारीख में मुझको भी चश्मे का सहारा लेना ही पड़ जाता , लेकिन पिछले छह महीने से जबसे मैंने आँखों में नवरत्न + डाबर तेल की दो बुँदे उंगलियों के पौर से सुबह शाम लगानी शुरू की है मुझको बहुत ही आराम और सकूँ प्राप्त हुआ है ..... अगर आप पिछले सप्ताह का जागरण सम्पादकीय विभाग का सर्वश्रेष्ठ ब्लागर (पांचो में एक ) देखंगे और जागरण जंक्शन के फॉर्म के इस सप्ताह के विषय को देखेंगे तो पायेंगे की दोनों ही सन्नी लियोन पर आधारित है ..... लेकिन मैंने तो सन्नी लियोन पर आधारित लेख काफी महीने पहले लिखा था , इसलिए मैं बाज़ार के हिसाब से नहीं बल्कि वक्त से पहले का लिखता हूँ – हा हा हा हा हा हा आपका आशीर्वाद रूपी स्नेह पाकर मन हर्षित हुआ हार्दिक आभार

के द्वारा:

प्रिय योगी सारस्वत जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! आपके बाद आदरणीय चातक जी ने भी इसी तरह की आशंका प्रकट की है तो इससे यह जाहिर हो रहा है की जरूर मैं अपनी बात कहने + पक्ष रखने में पूरी तरह से सफल नहीं रहा हूँ ..... मैं इस बारे में आपसे सिर्फ इतनी ही इल्तजा करनी चाहता हूँ की जिन नारियों का शोषण हुआ है फिर भले ही उसके लिए वोह खुद या फिर कोई पुरुष ही क्यों ना जिम्मेवार रहा हो , सिर्फ उन्ही के बारे में इस लेख में जिक्र किया गया है .... जो एक आम+खास भारतीय पतिव्रता नारी की तरह अपनी जिन्दगी गुजार देती है , उन सभी नारियो से इस लेख का कोई भी लेना देना नहीं है ..... और सबसे बड़ी बात तो यही है की औरत की सफलता और असफलता की बजाय उसके शारीरिक शोषण पर ही पूरा ध्यान दिया गया है ...... आपका तहे दिल से शुक्रिया राजकमल शर्मा सारस्वत ब्राह्मण

के द्वारा:

के द्वारा:

आदरणीय सतीश जी ...... सादर प्रणाम ! आजकल सलाह तो हर कोई बिन मांगे दे देता है लेकिन पति के रूप में अपना नाम देना बहुत ही रिस्की काम है ..... यह कितनी बड़ी विडंबना है की मैं दिल से चाहता हूँ की पूरे भारतवर्ष में एक भी नारी (इस प्रकार की ) अपनी मांग में मेरे नाम का सिंदूर और तन पे ओढ़नी ना पहने ...... लेकिन मेरे चाहने या ना चाहने से क्या होता है ..... “होश आता है उनको सब कुछ लुट जाने के बाद जुड़ता नहीं है कांच एक बार टूटने के बाद गर खुद का ही रख ले बहकने वाली नारिया ध्यान फिर काहे को करने पड़े मुझ को ऐसे उलटे सीधे काम” मेरी सेल चाहे ज्यादा हो लेकिन स्वीकार्यता कम है – और उसके लिए तो बालो में सफ़ेद लटो के आने तक इंतज़ार करना ही होगा मुझको -हा हा हा हा हा आपका तहेदिल से शुक्रिया

के द्वारा:

आदरणीय ज्योत्सना सिंह जी ..... सादर अभिवादन ! मैंने अपने इस लेख में सिर्फ महिलायों के शोषण के मुद्दे को उठाया है उसका शोषण करने वाला तो हर हाल में पुरुष होता ही है हाँ यह अलग बात है की ज्यादातर जगह पर उसकी मर्जी + मज़बूरी और लाचारी होती है तो बहुत ही कम जगह पर बिना उसकी मर्जी के उसकी + बलात उसका शोषण किया जाता है .... आज के वक्त में औरत को घर की चारदीवारी के भीतर पर्दे में कोई भी शक्ति रोक कर नहीं रख सकती है .... जिस हिसाब से परीक्षाओं में लड़को के मुकाबले लड़किया बाज़ी मार ले जाती है (कई बार तो सौ में से इक्यासी ) आने वाले वक्त में हरेक आफिस में इनका ही बोलबाला होने वाला है ..... अपनी सुरक्षा और आन बाण शान के लिए इनको खुद ही सजग रहना होगा ..... आपका तहे दिल से शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय दिनेश जी ..... सादर अभिवादन ! (इस बार आपके ब्लॉग पर मेरी प्रतिकिर्या पोस्ट नहीं हो पाई ) मुझमे और दूसरों में क्या अंतर है यह मुझको आज तक पता नहीं चल पाया ..... मैंने तो एक बार अपने किसी परिचित से इसी देवदासी प्रथा और देवी येल्लमा के बारे में कुछ कहने की गुस्ताखी की थी , लेकिन उसके बाद मुझको जो अनुभव हुए उनके कारण मुझको नाक रगड़ कर माफ़ी मांगनी पड़ी ..... मैंने भी इस बारे में किताबों में कम और अखबारों में ज्यादा पड़ा है ..... इसलिए इस बारे में कुछ भी कहने में मैं लाचार हूँ ...... हाँ आपकी इस बात से सहमति रखता हूँ की महिलाओं की वर्तमान दुर्दशा के लिए सीधे और असिधे रूप में हम सभी ही कम या फिर ज्यादा जिम्मेवार है ..... प्रतिकिर्या के लिए हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

वैसे तो आज की आधुनिकाएं स्वयं बाहुबली हैं, और कोई पुरुष उन्हें क्या सुरक्षा प्रदान करेगा, कोई चाहे तो अपनी सुरक्षा के लिये खुद इनकी सेवाएं हायर कर सकता है । बशर्ते कि वे सेवा बेचने के लिये इच्छुक हों । आप शायद पुराने समय की जीवित महिलाओं की चर्चा कर रहे हैं, या फ़िर उनकी, जिन्हें अपने रूढ़िवादी संस्कारों की जकड़न में क़ैदकर आत्मविश्वास के मामले में खुद हमने ही कमज़ोर बना कर रखा है । कम से कम आधुनिकाएं तो हमारे बारे में कुछ ऐसे ही विचार रखती प्रतीत होती हैं । आगे आप सक्षम हैं भाई साहब, चाहें तो जींस ब्रांड की किसी महिला के समक्ष सुरक्षा का प्रस्ताव रखकर मेरी बात के सत्यापन की जाँच कर सकते हैं । धन्यवाद ।

के द्वारा:

राज कमलभाई नमस्ते भूखे को कच्चे पक्के से क्या लेना देना---कुदरत का नियम तो ईस से भी क्रुर है । कुदरत ने नर और मादा बना के छोड दिया, ना कोइ बहन, ना भाई, ना मां, ना बाप । उसमें रिश्ते नाते, उमर या समय का कोइ बंधन नही, सिर्फ ईच्छा ही महत्व की है । आदमी ने देखा ईस का परिणाम घातक है । एक मादा के लिए नरों में लडाई होती है । आदमी ने अपनी बुध्धि के कारण कुदरत के नियम को नियंत्रित किया और लग्नप्रथा की खोज की । एक नर के लिए एक मादा, एक आदमी के लिए एक स्त्री । यही एक रास्ता बचा था आदमी के पास जीस से मानव समुदाई सुख-शान्ति से रह सके । वेस्ट तो चल पडा है कुदरत ही और और चाहता है ईस्ट भी ऐसा ही करें । लेकिन ईस्ट है जो अपने सामाजीक ढांचे को तोडना नही चाहता । ईस्ट की लालची सरकारों को खरीदा जाता है ईसे तोडने के लिए । तलाक को आसान बनाने का कानून एक द्रष्टांत है हमारे सामने । ईस्ट के बुध्धिजीवीयों को भी भरमाया जाता है । ईस का सबूत है की ईन दिनों भारत के रीवाजों को लेकर कुछ लेख भावुकता पूर्ण तरिके से जेजे में चिपकाये गये हैं । बेटी सिर्फ भारत में ही पराई होती है ? दुसरे देश घरमें ही ब्याहते हैं ? सिर्फ भारतिय रिवाजों को नीचा दिखाने की चाल है - जो कोइ समजना नही चाहता, भावना में बह जाता है । सरकार की बात करें तो उन का अलग एजेन्डा है । तरह तरह की वोट बैंक की तरह नारी समुदाय भी एक अच्छा वोट बैंक बन सकता है । ईस के लिए दिखाना पडता है की हम आप के तारणहार है । सरकार के अनुसार कहें तो १८ के अंदर की लडकी को ही संरक्षण की जरूरत है । १८ के बाद नही, चाहे जो करना हो उस के साथ करलो । १८ के अंदर के लडके से कोइ ३० साल की औरत अपना काम निकाल ले तो कोइ तकलीफ नही । लडकों को संरक्षण की जरूरत नही है । -

के द्वारा: bharodiya bharodiya

आदरणीय महिमा श्री बहिन जी ..... सादर अभिवादन ! ज्यादातर बिन्दुओ को छूने की मैंने कोशिश की होगी लेकिन सभी तक पहुँच कभी भी नहीं बना सकता हूँ .... वैसे इसी प्रयास में इसमें कुछेक गलतिया भी हो गई है जैसे की लिव इन रिलेशनशिप वाली बात जैसी .... उसका इस लेख के मूल मुद्दे से कोई ताल्लुक नहीं है .... खैर आदमी गलतियों से ही सीखता है .... अगर किसी मुद्दे को जागरण ने चर्चा के लायक समझ कर उस पर बहस तथा सभी के विचार आमंत्रित किये है तो वोह विषय तो खुदबखुद ही विचारणीय हो ही जाता है ..... इस विषय पर अगर एक महिला अगर कुछ लिखती है तो उसको ज्यादा साहसिक कदम मना जाता है और माना जाना भी चाहिए , जैसे की तमन्ना जी ने किया है .... हार्दिक आभार सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

प्रिय संतोष जी ..... स्प्रेम नमस्कारम ! इस लेख की शुरुआत में जिस लड़की की बात हुई है उससे मेरी शादी की बात उसके जीजा ने चलाई थी लेकिन मैं दुविधा में पड़ गया था .... पहले सोचा की शादी के बाद उसका अपने घर पर आना बन्द कर दूँगा लेकिन फिर सोचा की कहे को इस झंझट में पड़ा जाए ..... इसलिए इनकार कर दिया था और अब वोह छह महीने के बच्चे की माँ है और अपने पति के साथ खुश है .... इसी सच्चाई तथा कुछेक और बातों के कारण आपको यह लेख कुछ अलग हटके लगा हो सकता है ..... लड़के बेशर्म तथा ढीठ होते है जबकि लड़किया शर्मीली और संकोची ..... शायद इसी कारण सजा में अंतर रहा हो .... लेडिज फर्स्ट का नियम ऐसे ही तो नहीं ना बन गया था .... लड़कियों के भावी भविष्य को ध्यान में रख कर अगर उनको कुछ छूट दी जाती है तो ऐसे फैसले लेने वाले समझदार लोगों की दाद देनी चाहिए हमको ..... बाकि आप खुद समझदार है .... आपका हार्दिक धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

अनिल जी ..... नमस्कारम ! मुझे आपके प्रिय आनन्द प्रवीण जी के प्रति अभद्र शब्दावली वाले कमेन्ट से बहुत ही ठेस पहुंची थी जिसमे की आपने यहाँ तक कह दिया था की अगर तुम मेरे सामने होते तो चांटा रसीद कर देता ..... आपकी इस बात को इस मंच का एक भी ब्लागर अगर सही कह दे तो मैं आपको माफ करने को तैयार हूँ .... लेकिन उससे लिए आपको प्रिय आनन्द प्रवीण जी से क्षमा मांगनी होगी फिर मैं आपके उन बेहूदा कमेंट्स को भूलने की कोशिश कर सकता हूँ जोकि आप मेरे ब्लॉग पर समय समय पर करते रहे है ..... मुझे बहुत ही दुःख से कहना पड़ रहा है की अगर आप खुद में सुधार नहीं लाना चाहते तो मैं आपको भविष्य में अपने ब्लॉग पर नहीं देखना चाहूँगा धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

मेरे सभी प्यारे -२ अबोध बालको के आदरणीय दादा फुरुदेव जी के श्री चरणों में प्रणाम ! आपकी आशंका बिलकुल जायज है .... अगर ऐसी बात है तो मैं महेश भात जी के लेख पर अपने इस लेख का लिंक जरूर देना चाहूँगा क्योंकि अपुन भी बहुत ही कुत्ती और मस्त मस्त आइटम है ..... फिर जो होगा देखा जाएगा ..... वैसे मैंने उनकी फोटो वाला ब्लॉग एक बार देखा था लेकिन मन के अन्दर डेरा जमाए बैठे दरोगा जोकि हमेशा हर किसी पर नाहक ही शक करता रहता है के कारण उसको नजरंदाज करके गुजर गया की ह्प्गा कोई टपोरी + बेवड़ा , अपुन को क्या लेना देना ..... प्यारी पूजा के पापा के पास कहाँ इतना वक्त की वोह यहाँ पर ब्लॉग लिखे ...... वैसे कहीं उनके डर से ही तो जागरण ने इसको फीचर्ड करने से अपने हाथ और पाँव पीछे खीच लिए ?..... हार्दिक आभार इस अनमोल जानकारी प्रदान कराने + याद दिलाने के लिए (वैसे अपने मेकअपमैन आंटी नम्बर वन बनाने में माहिर है –बोल्ड एंड ब्यूटीफुल )

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

प्रिय खुशबूदार चन्दन जी ...... सप्रेम नमस्कारम ! आजकल ज्यादातर कमीशन पर ही काम हो रहे है सौदे पक्के हो रहे है ..... ऐसा लगता है की इस देश में नागरिक कम और दलाल ज्यादा हो गए है ..... आपमें अगर काबलियत है तो भी उसको अवसर प्रदान करने के लिए कुछ अलग हटके करना होता है ..... हर किसी में इतनी सहनशीलता और हिम्मत नहीं होती और सबसे बढ़कर भाग्य ..... वैसे मेरी नजर में तो एक ही रास्ता है की अपने खुद के गीतों को शुरुआत में किसी दूसरे नामवर गीतकार के नाम से ओने पौने दामो में बेच दिया जाए ..... लेकिन यह भी तब हो सकता है जब अपनी अंतरात्मा को मार दिया जाए ..... कुछ भी हो आपके गीत सुन कर हम झूम तो सकेंगे ही ..... इतना ही काफी होगा हम सभी के लिए ..... अग्रिम शुभकामनाये

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

मुझको महेश जी माफ करना गलती म्हारे से हो गई आइन्दा से फिर कभी ऐसा नहीं होगा ..वोह फोन मैंने दरअसल अपनी बेटी पूजा को लगाया था ….. अपने इसी ट्रिक से मैंने बहुत सी हिरोइनों को पटाया + छकाया है वैसे भी हमारे भारत में यह कहावत मशहूर है की “एक वैश्या की भी इज्जत होती है”…..बेबी ! यह तुम क्या ज़ुल्म करने जा रही हो ….. यह युरोप नहीं है बल्कि हमारा भारत है …… यहाँ पर तुम्हे आखिरकार अपने जिस्म पर कोई न कोई कपड़ा तो पहनना ही पड़ेगा .. अरे भाई अच्छा हुआ आप ने लिया ही आनंद काटा नहीं चुटकी ..ये शमा यूं ही बंधा रहे ..ये बालीवुड हालीवुड से यों ही आगे बढ़ने की तमन्ना रखे ये गुल खिलाता रहे लोग सोचते रहें और आप तीनों ही नहीं हम सब चुटकियाँ ले रसीली जलेबियों का यों ही लुत्फ़ उठाते रहें .. सुन्दर गुरुदेव ..जमाना बड़ा फास्ट है भ्रमर ५

के द्वारा:

मान गए भाई साहब. कमाल का नालेज रखते हैं फिल्म इंडस्ट्री का. दादा साहब फाल्के से लेकर लियोन तक आपके दिमाग में नियोन साइन की तरह चमकते दिखाई देते हैं. हमें तो अपनी पकड़ पर अब हीनता का सा बोध होने लगा है. भई वाह, ऐसा ही व्यक्तित्व बिग बॉस का रोल अदा कर सकता है. हमारे जैसे फिसड्डी यहाँ पानी नहीं भरेंगे, तो फिर करेंगे क्या ? वह ज़माने फाख्ता हुए जब आर.के. स्टूडियो के बाहर चप्पल चटकाने वाले छोकरों में से कोई सुपर स्टार भी बन जाया करता था. बॉस, प्लीज़ एक बार मुझे भी दर्शन का मौक़ा अवश्य देना अपनी लियोन का. कहो तो शूटिंग के समय चाय वाला छोकरा बनकर भी अन्दर घुसने को तैयार हूँ. लेकिन नहीं, छोकरा कहाँ से बन पाऊँगा ? कोई भी माई का लाल मेक-अप अब अपन की असलियत नहीं छुपा पाएगा. तो फिर ऐसा करो ना बॉस, अपनी रीयलिटी वाली शूटिंग या लाइव वाले में ही अपना चांस फिट कर दो न . छोकरा न सही, भगवा पहन कर स्वामी अग्निवेश बन जाने की तो गारंटी तक दे सकता है अपुन. हाँ, एइच ठीक रहेंगा. स्वामी अन्दर, भगवा बाहर. भगवे के ऊपर आगे पीछे ही बिकिनी भी गिरने का....क्या ! क्या मस्त-मस्त आइडिया आ रहेला है गुरु . सच्ची, अब तो अपनी भी लिफ्ट कराइच दे ना बाप ! पण एक बात बताना मांगता बॉस. तेरा ये जो ब्लॉग है ना ? कहीं इधर कू हिट-लिस्ट में तो नहीं आने का ? तुमेरे कू मालूम तो होएंगा इच कि अपना जो महेश दादू है ना, इदर भाई लोगुन का गेस्ट राइटर होता. पेज के ऊपर इनकी तिजोरी से फोटू चुराकर लगा लिया, ये तो डबल पंगा होता न बॉस. कुछ गड़बड़ होएंगा, तो बताने का. तबतक अपुन भागता है.... खातून की खिदमत में, सलाम अपुन का. ताने दीने तन्दाना ... तन्दाना तन्दाना ...

के द्वारा: आर.एन. शाही आर.एन. शाही

आदरणीय  राजकमल  जी जिसे हम  भाग्य का नाम  देते हैं, वास्तव में वे परिस्थितियाँ होती हैं। भाग्य का सृजन हमने अपनी कमजोरी एवं कमियों को छिपाने के लिये किया है। मेरा मानना है कि किसी के आशीर्वाद  एवं श्राप से कुछ  नहीं  होता। जो भी होता है परिस्थितयों और हमारे कार्यों के कारण। जिनकी तरफ  आपने इंगित  किया है, उनकी भाषा शैली का मैं भी समर्थन नहीं कर सकता। विचार अच्छे हैं उद्देश्य उच्चस्तरीय हैं, व्यक्तित्व भी अच्छा है योग्यता भी है किन्तु भाषा शैली सही  नहीं है। मुझे विश्वास है कि परिस्थितियाँ उनकी सोच  बदल  देंगीं। लेकिन भाग्य, यह तो होता ही नहीं है। 

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

गुरुदेव को सादर प्रणाम, क्या कहूँ गुरुदेव आपकी यह लेख को पढ़ मुझे मार्च याद आ गया जब इसी "फीचर्ड" ब्लॉग के चक्कर में परम आदरणीय शाही सर और वाहिद सर जैसे लोगों को मंच छोड़ना परा था और फिर वही आलाप आपकी साड़ी बाते अपनी जगह पर ना सिर्फ सही है बल्कि वास्तव में उनपर अम्ल भी किया जाना चाहिए किन्तु जे जे से मुझे न कभी सकारात्मक उम्मीद रही थी न रहेगी ...........बस कांग्रेस की सरकार की तरह इनका मंच भी इनके नियमो पर चलता रहेगा ............वो तो हमारा आपसी प्रेम ही है जो सार्थकता देता है नहीं तो जहाँ फीडबैक का जवाब पांच दिनों में आता हो और ज्यादातर बार तो आता ही न हो वहां रचना फीचर्ड क्या ख़ाक होगा........पड़ेंगे तब तो समझ सकेंगे की कौन होने लायक है और कौन नहीं ............फिर भी आपकी बातो का पूर्ण समर्थन ...........फल तो काहुंगा ही चाहे जो भी हो

के द्वारा: ANAND PRAVIN ANAND PRAVIN

आदरणीय योगी जी ..... सादर अभिवादन ! आपने तो मुझको धोबी का कुत्ता बना दिया है अनजाने में अनचाहे ही ..... आपने डान फिल्म देखी है तो उसमे डुप्लिकेट डान का गुंडों के साथ जेल में बन्द करने वाला सीन भी जरूर देखा होगा ...... पुलिस उसको असली डान समझती है और उसके साथी उसको नकली डान – हा हा हा हा हा हा भाई साहिब ! जागरण हम सभी का सांझा मंच है ..... इस पर हम सभी का एक समान हक है और हमको एक समान ही सुविधाए यहाँ पर मिला करती है ..... मेरे और जागरण के बीच में सिर्फ एक बार ही बात हुई है वोह भी कमेन्ट की समस्या को लेकर ..... लेकिन जब उन्होंने मेरा फोन नम्बर डिलीट नहीं किया तो मजबूरन मुझको अपना वोह नम्बर बन्द करवाना पड़ा ..... बस इतनी ही हमारे “बीच की” बात है- हा हा हा हा हा हा अगर आपको मेरा सुझाव इतना पसंद आया है तो अगले लेख में इससे भी ज्यादा कारगर एक और सुझाव ( टिप्स ) रखने वाला हूँ ..... शुभकामनाओं सहित हार्दिक आभार जय श्री कृष्ण जी ) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

के द्वारा:

आदरणीय वासुदेव त्रिपाठी जी ..... सादर अभिवादन ! आपकी यह बात किसी हद तक सही हो सकती है क्योंकि जहाँ पर बाकि के ब्लागर्स इस देश +दुनिया और समाज से जुड़े हुए मुद्दों को अपने लेखन का विषय बनाते हुए उन पर अपनी कलम चलाते है इस आह्वान और कामना के साथ की इससे कुछ ना कुछ बदलाव जरूर आएगा ...... वहीँ इसके विपरीत मेरी सोच यह है की आप बाहर के बारे में बाद में सोचियेगा पहले यहाँ के बारे में तो कुछ सोचिये और कीजिये क्योंकि कम से कम यहाँ पर तो हमारे प्रयासों से कुछ ना कुछ बदलाव आ ही सकते है .... मैं वहां पर क्या और क्यों कुछ प्रयास करूँ जहाँ कुछ भी सुधार की मुझको कोई भी उम्मीद नहीं है ...... इसकी बजाय मैं इस मंच से जुड़ी हुई व्यवस्थाओं के बारे में +उनमे सुधार के बारे में अपनी कलम का इस्तेमाल करने में खुद को ज्यादा सहज महसूस करता हूँ क्योंकि आप सभी के द्वारा दिए गए सहयोग के कारण अगर तुरंत नहीं तो देर सबेर कुछ ना कुछ सकारात्मक बदलाव सामने आ ही जाता है और जिसका सबसे बड़ा कारण है जागरण के रुख में अड़ियलपन की बजाय लचकीलापन ..... आपसे मिल कर अच्छा लगा ...... आप इसी तरह अपना लेखन जारी रखिये ..... हार्दिक शुभकामनाओं सहित आभारी हूँ आपका जय श्री कृष्ण जी ) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

के द्वारा:

आदरणीय दिनेश जी ..... सादर अभिवादन ! बात तो एक ही होती है लेकिन सभी का उसको देखने का अपना -२ अलग नजरिया होता है ...... जैसे की मेरे पिछले लेख में मैंने यही कहा था की बिड़ला के पूर्वजों को सिर्फ सही वक्त और महूर्त पर उन सच्चे साधू महाराज का सिर्फ आशीर्वाद ही मिला था ...... बाकि की मेहनत तो उन्होंने खुद ही की थी ..... और जहाँ तक सिर्फ विचारों का ही विरोध करने की बात है तो उसके बारे में अर्ज करना चाहूँगा की हरेक आदमी को भगवान ने दिमाग नाम की शय दी है ..... अब यह उसकी समझ +संस्कारों और विवेक पर निर्भर करता है की वोह उसको किस तरह से इस्तेमाल करता है ..... एक आदमी रामायण की कथा कहता है तो उसको शहर में भी लोग नहीं पूछते ..... लेकिन किसी दूसरे को उसी रामायण की कथा सुनाने के लिए विदेशों से बुलावे आते है ..... इसलिए किस्मत के कारण भी परिश्रम का पूरा फल नहीं मिलता है ..... एक व्यक्ति के विचार +नजरिया और शब्द ही उसको नफरत के काबिल तथा पूज्य बनाते है ...... हमे यह तो देखना ही होगा की किसी निष्क्र्तम विचार और उच्च स्तरीय विचार के जनक और धारी कौन महानुभाव है क्योंकि उनके आचरण और कार्य व्यवहार के कारण ही कोई निंदा और यश का भागी बनता है ...... बस मेरी तुच्छ बुद्धि यही तक ही काम करती है क्योंकि मैं एक साधारण प्रष्ठभूमि वाला साधारण सा प्राणी हूँ ...... आपके द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आपका हार्दिक शुक्रिया (लेकिन हम किसी को माफ भी तो तभी कर पायेंगे जब उसके विचारों में बदलाव आये + वोह पश्चाताप भी करे और अपनी भूल भी स्वीकार चाहे ना करे लेकिन कम से कम आगे कुछ ऐसा या फिर वैसा ना करें का वचन तो दे ) {आप तंदरुस्त रहे यही मेरी कामना है – जय श्री कृष्ण जी ) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

के द्वारा:

आदरणीय राजकमल जी, आपकी रचनाएँ बहुधा जागरण रणभूमि के ही किसी बिंदु पर होती हैं.., या ऐसा कह लीजिये कि जब कभी २०-२५ दिन महीने भर में मेरा कभी इधर आना होता है तब कुछ ऐसा संयोग बनता है कि आप ऐसे ही किसी बिंदु पर क्रांति कर रहे होते हैं... चूंकि मैं फीचर्ड या टॉप बेस्ट पर अधिक माथापच्ची नहीं करता और न ही यहाँ कुछ नए नए दार्शनिकों विचारकों को ही तबज्जो देता हूँ, क्योंकि अवसाद, कुंठा अथवा मजनुइया प्रेम में चोट जैसे कई कारण होते हैं जो लोगों को दार्शनिक बना देते हैं फिर इन्टरनेट पर सभी खुशवंत सिंह बन जाते हैं| अतः इस रणभूमि में मैं उपस्थित होने से बचता रहता हूँ ... किन्तु पिछले कुछ लेखों से आपकी jj मंच के लिए निष्ठां और मुक्त सक्रियता मुझे वास्तव में अच्छी लगी..!! व्यवस्था बनाये रखने के लिए गंभीर होना आवश्यक है इसे jj को भी समझना होगा यदि policy जैसी व्यवस्था की ही है तो..!! जहाँ तक टॉप बेस्ट का खेल है मैं समझता हूँ उनकी अपनी policies होंगी उसी अनुसार निर्णय लिया जाता होगा उसमे किसी लेखक को हताश निराश नहीं होना चाहिए... प्रत्येक लेखक की अपनी लेखन शैली, दिशा व मौलिकता होती उसकी श्रेष्ठता हीनता टॉप बेस्ट से निर्धारित नहीं होती..!! किसी की नीतियों के अनुसार अपनी मौलिकता को बदलना भी उचित नहीं है.. लेखक का सम्बन्ध पाठक से प्रथम है| फीचर्ड के बिषय पर jj टीम को अवश्य कुछ विचार करना चाहिए क्योंकि इसी से लेख को सामने आने का मौका मिलता है.. जिसे हम exposure कह सकते हैं.! आप समय समय पर आवाज बुलंद करते रहते हैं इसके लिए धन्यवाद अन्यथा हमारे जैसे लोग तो कभी कभार आते हैं घूम फिर कर चले जाते हैं... वैसे टॉप बेस्ट को मानक मैंने कभी बनाया नहीं और आप जैसे लोगों की उपस्थिति के कारण मुझे कभी कोई समस्या हुई नहीं.. भविष्य में होगी तो फिर worldpress या अपने डोमेन पर चले जायेंगे... यहाँ आकर readership कम ही हुई है... हिंदी का एक मंच है... एक साथ कई लेखक लिखते हैं इस लिए जुड़ा हूँ!! साभार!! :)

के द्वारा: vasudev tripathi vasudev tripathi

आदरणीय दिनेश जी ..... सादर अभिवादन ! एक आम आदमी वास्तव में ही आम आदमी होता है ..... सच में ही भगवान के चरणों की धुल के समान , इसलिए उसकी तुलना या समानता उस जगदीश्वर से किसी भी कीमत पर किसी भी तरह नहीं की जा सकती है ..... मैं अच्छा जोकि बहुत कम ही सोचता और करता हूँ तो उसके फल के बारे में पता ही नहीं चल पाता ..... लेकिन अगर कुछ भी बुरा (अक्सर ही ) सोचो या फिर कर दिया जाए तो उसका फल तुरंत मिल जाता है कम से मुझे तो यकीनन ही ..... मैंने पड़ोस की एक लड़की को उसकी माँ के कहने के बावजूद अपने साथ स्कूटर पर बिठा कर गर्दन की मोच निकलवाने से मना किया तो अगले दिन मेरी खुद की गर्दन में मोच आ चुकी थी- “ना करो भला हो तो हो जाए बुरा” –हा हा हा हा हा आपके समर्थन के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil:

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय निशा जी ..... सादर प्रणाम ! आपकी उस सलाह को मैंने भी देखा और पढ़ा था .... और बाद में सोचने पर यही कारण समझ आया था की कम पाठकों तक पहुँच होने के कारण ही उन दिनों में फीचर्ड ब्लाग्स को ज्यादा समय की सुविधा प्रदान की है ...... इस बात को खुद पर टैस्ट भी किया ..... सच में ही मन में कुछ इस तरह से विचार आ रहे थे की जागरण ने तो अपनी तरफ से पूरा बल्कि हद से जयादा साथ दिया लेकिन अगर पाठक आनलाइन ही ना हो तो वोह बेचारा भी क्या करे ...... हमारे लिए यह अपना किसी भी रचना को दो दिन से ज्यादा फीचर्ड करने का रिकार्ड रूपी नियम भी तोड़ता रहता है हमारे ही भले के लिए ..... आपके समर्थन रूपी आशीर्वाद के लिए हार्दिक आभार :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil:

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय गुरुदेव शाही जी ..... सादर प्रणाम ! बेशक यह समस्या जागरण की है लेकिन जब तक हम उनको बतलायेंगे नहीं रो रोकर तब तक दूध नहीं है मिलने वाला ..... वैसे भी इसको (suffer ) झेल भी हम ही रहे है ….. और कहने से आज तक उन्होंने खुद को बदला ही आखिर कितना है ..... लेकिन हमे समय समय पर अपनी आवाज उनके कानो तक पहुंचाते रहना है ...... देर सबेर जो भी मिलता चला जाए उसको समेटते रहना है ...... हम मजबूर+बेबस सही लेकिन गूंगे भी नहीं है ..... बाकि पहरेदार का काम होता है “जागते रहो का रट्टा लगाना” आपकी इस अनमोल सलाह पर अमल करते हुए जागरण को खुद में और अपने मोजुदा ढ़ांचे में अहम बदलाव रूपी फेरबदल करना ही चाहिए ...... हार्दिक आभार सहित :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil:

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय अशोक जी ..... सादर अभिवादन ! सच में ही इतने दिनों के बाद रचना फीचर्ड हो जाने की दिल को उतनी खुशी नहीं मिलती जितनी की सही समय पर हो जाने पर मिलती ..... पता नहीं यह क्या कैमिकल लोचा है की जब रचना फीचर्ड होने की मेल मिलती है तो उस समय वोह काफी पायदान नीचे भी फिसल चुकी होती है ..... चाहे उस मेल के आने के कुछेक देर पहले ही होम पेज क्यों ना खोला हो लेकिन ससुरी नजर मेल के आने के बाद ही आती है ..... आज तक कभी भी अपनी फीचर्ड रचना को पहले पायदान पर देखें का सोभाग्य नहीं प्राप्त हो सका है ..... आपने अपना समर्थन दिया उसके लिए आपका बहुत -२ आभारी हूँ (नीचे आदरणीय प्रियांका जी को दिया गया जवाब जरूर पढ़ लीजियेगा ) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil:

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय प्रिया सिंह जी ...... सादर अभिवादन ! कुछ बाते अपनी समझ से भी करनी पड़ती है यह जरूरी नहीं की जो बात डाक्टर कहे बिलकुल वैसा ही करना चाहिए ...... रिन साबुन में केमिकल कुछ ज्यादा ही तेज होते है और उसकी बजाय व्हील और निरमा साबुन में यह काफी कम मात्रा में होते है ..... और सबसे बड़ी बात – उसके बाद फिर से कैटरिना के रिकमेंडिड साबुन से दुबारा भी तो नहाना होता है ..... मुझे याद आ रहा है की मुझसे मेरे एक जानकार ने पक्के रंग यह कहते हुए मंगवाए की मेरे एक दोस्त की नई -२ शादी हुई है अपनी भाभी को रंग लगाना है ..... आज मुझे अपने उस रंग लाकर देने वाले कार्य पर बेहद अफ़सोस हो रहा है .... शरारत किसी की और सजा किसी और को ..... अपने विचार सांझा करने और अपना समर्थन देने के लिए आपका बहुत -२ आभारी हूँ :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil:

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

सब समय के खेल होते हैं मान्यवर भाई साहब ! आप बेकार पतले हुए जा रहे हैं. अरे तब गिने चुने लोग थे, फीचर्ड ब्लॉग भी तो कभी कभी चार-चार दिन लटके रहते थे ! आज यहीं नहीं सर्वत्र स्थिति बदल चुकी है. उस समय तक फेसबुक पर क्षेत्रीय भाषाओं का देखा जाना दुर्लभ था, और आज देखिये, वहां भी हिन्दी छा चुकी है. हिन्दी अपना पाँव पसारती जा रही है, जैसा की खुद हम भी चाहते थे. युवाओं में पहले हिन्दी टाइपिंग के माध्यम से अभिव्यक्ति की रूचि नगण्य थी, अब स्थिति बदल चुकी है. उनके अन्दर की प्रतिभाएं खिल रही हैं, यह हिन्दी के विकास के लिए परम संतोष का विषय है. लेखकों की बाढ़ आएगी तो फीचर्ड ब्लॉग की संख्या भी बढ़ेगी. सबको मौक़ा देना है. इसलिए थोड़ी रेलमपेल और धक्कमपेल दोनों मंज़र देखने को मिल रहे हैं. जागरण को अब पद्धति और कार्यप्रणाली में तकनीकी रूप से व्यापक परिवर्तन करते हुए ऎसी व्यवस्था बनानी चाहिए, की किसीको अखरे भी नहीं, और सबको उचित तवज्जो का एहसास भी होता रहे. यह उनके लिए एक चुनौती है, हमारी समस्या नहीं है. धन्यवाद.

के द्वारा: आर.एन. शाही आर.एन. शाही

आदरणीय शाही जी ..... सादर प्रणाम ! मुझको पता था की आप अपने असर रसूख का मेरे हक में इस्तेमाल करते हुए मेरी सिफारिश जरूर करेंगे इसीलिए मैंने पहले ही अग्रिम रूप से आपके ब्लॉग पर आपका धन्यवाद कर दिया था ..... आप पहले साथी है जिन्होंने मेरी अपील पर ध्यान देते हुए अपना संस्मरण सांझा किया है ..... सच मे ऐसे ही साधू सच्चे होते है समाज के सच्चे हितेशी ..... ऐसे सभी संतो के श्री चरणों में श्रद्धा सहित बारम्बार नमन आप पर भी सपरिवार उन साधू महाराज की मेहर बरसे इसी कामना के साथ धन्यवाद सहित हार्दिक आभार :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-? :-x :-) :-? :-x :-) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-P :-? :-x :-) :evil: ;-) :-D :-o :-( :-D :evil: ;-) :-D :mrgreen: :-? :-x :-) : :roll: :oops: :-D :-o :-( :-? :-x :-):-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

के द्वारा:

प्रिय योगी जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! आपकी जानकारी के लिए बताना चाहूँगा की वोह मोदी घराने से जुड़ा हुआ किस्सा है ..... उनके पूर्वजों ने अपनी एक गड़वी (शायद चांदी की ) किसी साहूकार के पास गिरवी रख छोड़ी थी .... उस परिवार को मुंहमागी रकम देने का प्रस्ताव भी किया गया ..... लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इनकार कर दिया की “होगे तुम भारत के चुनिन्दा धन्ना सेठो में से एक ..... लेकिन वोह गड़वी , तुम्हारी गिरवी खानदानी आन , हमारे पास इस बात की निशानी के रूप में हमेशा ही रहेगी की तुम्हारे पूर्वज अपनी तंगहाली के कारण उसको छुड़ा नहीं पाए ..... आपकी जानकारी की भी दाद देनी पड़ेगी आप पर भी सपरिवार उन सधुमाहराज की मेहर बरसे इसी कामना के साथ धन्यवाद सहित :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-? :-x :-) :-? :-x :-) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-P :-? :-x :-) :evil: ;-) :-D :-o :-( :-D

के द्वारा:

आदरणीय jj , नमस्कार आज सुबह से आलेख “अन्ध्रेरे के आधार पर विकास करता झारखण्ड ” जिसने आपने featured ” में डाला हुआ है जिसे सुश्री खुसबू जी ने अपने विचार कह के पोस्ट किया हुआ है … वो पूरा का पूरा आलेख टाइप (चोरी ) किया हुआ है प्रथम पैर को छोड़ के … सीर्फ आकड़ा होता तो मैं आपके संज्ञान में नहीं लाती क्योंकि इस तरह के आलेख के लिए आकडे कहीं न कहीं से उठाने होते है . पर चुकी महोदया ने पूरा आलेख ही चोरी का टाइप कर दिया है और संदर्भ भी नहीं दिया है … तो सवाल उठाना स्वाभविक है / आपके जानकारी के लिए बता दू इस आलेख की लेखिका अनुपमा जी है .. जो मर्ज कुछ , दवा कुछ ” के नाम से “तहलका ” के अंक 31may2012 में प्रकाशित है पेज 40-41 में .. चूँकि आप ने सुबह से इसे फीचर किया हुआ है और कल को आप इस