RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

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“बाबा रामदेव जी के आन्दोलन की राजकमलिया सी.सी.टी.वी. फुटेज” !!!

Posted On: 20 Aug, 2012 में

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योगगुरु बाबा रामदेव 9 अगस्त को दिल्ली में होने वाले आंदोलन के लिए की गई और की जाने वाली तैयारियों का जायजा ले रहे थे ….. उन्होंने एक स्वयसेवक को कहा की इस बार मंच को ज्यादा ऊँचा मत बनवाना , पिछली बार कूदने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी ….. और हाँ दो जोड़े सलवार कमीज और दो एक साड़ी भी साथ में याद से रख लेना ….. एक भक्त ने श्रद्धा और समर्पण के भाव से कहा की गुरु जी अगर आप की इजाजत हो तो कल्लू हज्जाम को भी साथ में रख लिया जाए , पिछली बार आप मुई दाड़ी के कारण ही तो पकडे गए थे ….. बाबा जी ने प्रसन्न मुख से आशीर्वाद सहित आज्ञा प्रदान कर उसको क्रतार्थ किया ……

एअरपोर्ट पर पहुँच कर बाबा जी को इस बात की घोर निराशा हुई की मंत्रियो के समूह की तो बात ही छोड़ दी जाए कोई जिम्मेदार अधिकारी भी आगवानी करने नहीं आया था ….

दिल्ली पहुँच कर अनशन के पहले ही दिन वहाँ पर लगे शहीदों के पोस्टर में बाल कृष्ण जी को भी साथ देख कर मीडिया + दर्शकों तथा मौके की ताक में बैठी सत्ताधारी पार्टी को बाबा जी पर गरियाने का बिन मांगे मौका कुछ इस तरह मिल गया जैसे की बिल्ली के भाग्य से छींका टूटना ….. चंद घंटो के बाद ही आनन फानन में उस तरह के पोस्टरों को उतार कर +समेट कर रख दिया गया ….. मंच से एक भी शब्द बोले बिना सिर्फ पोस्टरों के सहारे बाल कृष्ण जी पर सारा फोकस करने की रणनीति कुछ इस तरह से उलटी पड़ गई की पहला ही दाँव उल्टा पड़ जाने से बाबा जी की शतरंज का पहला मोहरा पिट जाने के कारण ऐसा अपशकुन हुआ की बाद की सारी बाज़ी ही तहस नहस हो गई ……

इस शुरूआती चूक से बौखलाए बाबा जी अपने हरेक अगले कदम को उठाने से पहले लाख बार सोचने विचारने लगे ….. जब अनशन और धरने के पहले पांच दिनों तक सरकार ने कोई पाजिटिव रिस्पांस नहीं दिखलाया तो बाबा जी को बहुत ही गुस्सा आया जो की स्वाभाविक भी था ….. अब छठे दिन बाबा जी ने अपने भक्तो और समर्थकों को संसद को घेरने के लिए कूच करने का आवाहन करते हुए संसद भवन का रुख किया ….. लेकिन बाबा जी से डरी हुई सरकार और दिल्ली की पुलिस को बाबा जी को उनके हजारों समर्थकों समेत रास्ते में आये हुए  स्टेडियम को ही जेल में बदलना पड़ गया ….. अब बाबा जी को अपनी जीत की कुछ -२ महक आने लग गई थी ….. लेकिन बाबा जी इस बात को भूल गए थे की दशकों से राजनीती में अपने पाँव और पुत्र तथा पोतों को जमाए  हुए घाघ राजनीतिज्ञों की पैन्तरेबाजियो का मुकाबला करना उनके बस की बात नहीं है, फिर चाहे उनके साथ कोई भी क्यों न हो …..

लगभग एक  घन्टे के बाद बाबा जी की कलाई घडी में फिट ट्रांसमीटर में से बीप -२ की आवाज आने लगी….. बाबा जी ने अपने समर्थकों से अगली रणनीति के उपर मन्थन करने के वास्ते कुछ देर के लिए एकांतवास की इजाजत मांगी …. एकान्त में पहुंचकर बाबा जी ने अपनी कलाई घड़ी का रिसीवर मुंह और कान के बीच में लगाया तो उधर से दो  केन्द्रीय मंत्रीयों की आपसी बातचीत करने का स्वर उनके कानो  टकराया ….. तभी उधर से कहा गया की बाबा जी आपसे कुछेक गोपनीय बातचीत करनी है, कोई आपके आस पास तो नहीं है क्योंकि बुजुर्गो ने फरमाया है की दीवारों के भी कान होते है …. बाबा जी ने कहा की आप बिलकुल निश्चिंत रहिये यहाँ पर कोई दिवार तो है ही नहीं , हाँ चारों तरफ तम्बू जरूर है ….. हाँ लेकिन राजकमल का क्या किया जाए उसके पास ना जाने किस तरह से सारी खबरे पहुँच जाती है ….. मंत्री ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा की इसका कोई हल तो हमारे सरदार जी और मैडम के पास भी नहीं है , आपसे जो कहा जाए उसको जरा ध्यान से कान लगा कर सुनियेगा …..

आपसे एक बात की तस्दीक करानी है कि आपके अमुक देश में फला -२ नम्बर के बैंक खाते है ?…. और क्या उनमे इतनी -२ रकमें मोजूद  है ? ….. बाबा जी सिर  से लेकर पाँव तक कांपते हुए लड़खड़ाती हुई जुबान से बोले कि आपको इन सभी बातों कि जानकारी आखिरकार मिली कहाँ से ….. मंत्री जी बोले कि सरकार के हाथ कानून से भी ज्यादा लम्बे हुआ करते है , बस हमने अपनी पकड़ में आये हुए आपके उतराधिकारी बालकृष्ण जी के कान को जरा सा उमेठा कि सारी जानकारियां हमारे सामने थी …. यह तो आप भी चाहेंगे कि  आपके राज हमेशा राज़ ही रहे इसीलिए दोनों पक्षों कि जरूरतों के मद्देनजर हम आपसे एक सौदा करना चाहते है कि आप अपने इस आंदोलन को समाप्त करके वापिस हरिद्वार को प्रस्थान कर जाए …..

बाबा जी कुछ राहत कि सांस लेते हुए बोले कि वोह सब तो ठीक है लेकिन इतना तो बता दीजिए कि मैं अपने समर्थकों के सामने कौन सा मुख लेकर उनसे कौन सा बहाना बनाऊ कि बिना कोई ना नुकर + किन्तु परन्तु किये हुए वोह मेरी बात को मान ले …..  मंत्री जी ने तुरंत महामहिम प्रणव दा को हाट लाइन पे जा पकड़ा और झट से सारे  हालात से अवगत करवाते हुए किसी सम्मानजनक बहाने को सुझाने के लिए प्रार्थना की  ….. प्रणव जी बाबा जी से बोले की क्या सोच कर दिल्ली में आये थे आप ? …. यही ना कि सरदार (मनमोहन सिंह ) बहुत खुश होगा , शाबाशी देते हुए काले धन को वापिस लाएगा ….. सरकार का संकटमोचक महामहिम बन गया है तो सरकार को सस्ते में ही घेर लोगे क्या ….. जब तक हम सभी कांग्रेसियो के सिर पर आशीर्वाद दे रही सोनिया मैडम जी हमारी माता है , हर परीक्षा में पास होंगे हम चाहे कुछ भी हमको नहीं आता है ….. फिर मन्त्रीओ  से बोले कि क्या आपने इस बारे में मैडम से  इजाजत ले ली है ?….. भले ही मैं इस पद  पर पहुँच गया हूँ लेकिन उनकी मर्जी के बिना बाबा जी को कोई भी सलाह नहीं दे सकता ….. मैडम की सहमती और उनसे सलाह के बाद प्रणव दा ने बाबा जी को कुछ यूँ बतलाया की आप सरकार तथा उसके मुखिया को जी भर कर कौसते हुए पहले अपने समर्थकों में अपार जोश को भरिये फिर उसके बाद यह कहते हुए अपने आंदोलन को वापिस ले लीजिए की सरकार तो गूंगी और बहरी है इसके कानों पर कभी भी जूं नहीं रेग सकती है …… इसी के साथ साथ मैडम ने इस बात का पक्का आश्वासन भी माँगा है की आप अगले चुनाव से पहले ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाएंगे जिससे की सरकार की किसी भी किस्म की परेशानी हो ….. अगर ऐसा कुछ हुआ तो सरकार से पहले आप खुद परेशानी में पड़ जायोगे ….. बाबा जी ने सभी शर्तों को मानते हुए कहा की एक शर्त मेरी तरफ से भी है की आप यहाँ पर आये हुए मेरे सभी समर्थकों के भोजन और जलपान की व्यवस्था जरूर करवा दीजिए ….. प्रणव दा बोले की स्वामी जी कालेधन को वापिस लाने की आपकी अविवेकपूर्ण मांग के लिए आपकी यही सजा है की यहाँ पर आये हुए इन सभी के लिए आपको  अपने सफेद-धन से ही कोई इन्तजाम करना होगा ….. जय हिंद !!!

वापसी में जाते हुए बाबा जी बाल कृष्ण जी को जेल में मिलने के लिए गए ….. बाल कृष्ण जी बोले- गुरु जी प्रणाम ! बाबा जी बोले की प्रणाम गया तेल लेने , तुझको हमने अपने सभी कामो का राजदार बनाया +नम्बर दो की कुर्सी प्रदान की +फर्श से अर्श तक पहुंचाया …. और तुम अपनी जुबान को जरा सी लगाम भी नहीं दे सके, अपने इस कारनामे से तुमने हमको अर्श से फर्श तक है पहुंचाया ….. अब बाल कृष्ण जी को भी थोड़ा सा गुस्सा आया और वोह बाबा जी से बोले की बगल की कोठरी में सात खून की सजा काट रहा एक खूंखार अपराधी है जिसने की पुलिस की सभी अमानवीय यातनाएं सह कर भी अपना मुंह नहीं खोला है , आप उसको ही अपना उतराधिकारी बना लीजिए …… बाबा जी बोले की अच्छा -२ ज्यादा तमतमाने की जरूरत नहीं है एक तो गलती करता है उपर से जुबान भी लड़ाता है ….. मेरी उपर बात हो गई है अब तुमको किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानी नहीं होगी …..

इसके बाद बाबा जी लोगों को गलत अगुआई देने के अपने अपराध बोध को धोने के लिए अपनी आत्मा को पाक साफ़ करने के लिए गंगा जी में डूबकी लगाने के लिए चले गए …..

राजकमल शर्मा

(जिस प्रकार स्वर्गीय जय प्रकाश नारायण जी को जेल में ही असाध्य रोग का शिकार बना दिया गया था उसी की तर्ज पर पिछले साल अनशन के बाद इलाज करने के नाम पर अन्ना हजारे जी को कुछ इस प्रकार की दवाएं दी गई की जिनके सेवन से अब वोह किसी भी प्रकार के अनशन करने के लायक ही नहीं रह गए है ….. और बाबा रामदेव जी का भी उचित और कारगर इलाज सरकार ने कर दिया है ….. इसलिए मेरी सभी से यह प्रार्थना है की कब तक आप किसी मसीहा और रहनुमा को अपनी अगवाई के लिए बुलाते रहेंगे ?….. अन्ना जी और बाबा जी चाह कर भी हमारी कोई मदद नहीं कर पायेंगे ….. अपनी लड़ाई अब हमको खुद ही लड़नी होगी और उसके लिए खुद को संगठित भी करना होगा ….. इसके लिए देश की ज्यादातर असंतुष्ट जनता का जागरूक होना अति आवश्यक है …..)

(बाबा रामदेव जी के आन्दोलन की  राजकमलिया सी.सी.टी.वी. फुटेज !!! )

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43 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jack के द्वारा
August 30, 2012

राजकमल जी मेरी कुछ खुद की लिखी पोस्टों में से एक आपके कमेंट का इंतजार कर रही है http://jack.jagranjunction.com/2012/08/29/%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A1%E0%A4%95/

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
August 28, 2012

आदरणीय राजकमल जी,लम्बे अरसे के बाद आपसे मुखातिब हूँ,इसलिए क्षमा चाहता हूँ कि आपके पिछले कई आलेख नहीं पढ़ पाया.आपकी चिरपरिचित लेखन शैली की झलक फिर दिखाई दी है.यह जरूरी नहीं कि सभी आलेख गंभीरतापूर्ण ही हों.यदि ऐसा होता तो हमें हरिशंकर परसाई व शरद जोशी जैसे लेखकों के चुटीले और धारदार व्यंग्य लेखन पढ़ने को नहीं मिलते.कुछ आलोचनाओं को पढ़ने के बाद भी यही कहना चाहता हूँ कि आप जैसे लिखते हैं,वैसे ही लिखते रहें.

R K KHURANA के द्वारा
August 26, 2012

प्रिय राज जी, बहुत सुंदर फुटेज दी है आपने ! बधाई और आशीर्वाद ! आपने सत्य कहा है के जो भी ईमानदारी से सरकार के रस्ते में आता है उसे किसी ने किसी बहाने नाकारा कर दिया जाता है ! राम कृष्ण खुराना

nishamittal के द्वारा
August 23, 2012

आपकी अंतिम पंक्तियों से सहमत हूँ राजकमल जी.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 23, 2012

    आदरणीय निशा जी ….. सादर प्रणाम ! आपने जिन लाइनों को पसंद किया है शायद उन्ही के कारण ही यह लेख फीचर्ड की श्रेणी भी आ सका हो ….. आपके उत्साहवर्धन के लिए दिल से आभारी हूँ

ajaykumarsingh के द्वारा
August 22, 2012

राजकमल जी, नमस्कार   क्षमा कीजिये,आप जैसे लेखक द्वारा इस स्तरहीन व्यंग और विरोधाभासी विचार से दुःख ही होता है। किसी की हँसी उड़ाना बहुत सरल है।अन्ना जी या रामदेव जी ने जो कर दिया है या जो कर रहे हैं यदि उसका एक प्रतिशत भी करने वाला उनकी हँसी उड़ाये तो कुछ बात है।अन्ना जी या रामदेव जी ने  अपनी पहचान नेक काम के द्वारा बनाई है,उनका जो प्रभाव समाज में है वो प्रत्यक्ष दिखा, और उनके समर्थन में अपार जनसमूह ने जिस उच्चकोटि के अनुशासन का परिचय दिया तनिक उस बारे में भी सोच लेते।रामदेव जी ने जो अपार धन सम्पदा अर्जित की है वो कोई कृपा बरसाने या अन्धविश्वास फैलाकर नहीं की है।सरकार से सीधी लड़ाई करने वाले के बाबा और अन्ना टीम के पीछे सरकार हाथ धोकर पड़ी है। यदि इन लोगों की कमी पकड़ मे आती तो सरकारी मशीन इन्हे पीस ही डालती।अन्ना,रामदेव,केजरीवाल, किरनबेदी आदि जो संघर्ष कर रहे है उसमे कितना उनका निजी स्वार्थ है और कितना जनसाधारण का!    अन्ना को गलत दवा दे कर शक्तिहीन किया गया। रामदेव को स्त्री भेष धारण करना पड़ा आपको बहुत हँसी आयी, किन्तु क्या हम आप अपने हाथों मे चूड़ियां पहन पांव मे मेंहदी रचाये थे जो घर में पड़े रहे? लाठी चार्ज में किसी की धोती खुल गयी होगी तो भी आपको हँसी ही आयी होगी दुःख-दया या क्रोध नहीं। यदि आप जैसे लोग ऐसे लोगों की हँसी उड़ाएगें तो सच में कोई साधारण व्यक्ति  हमारी मदद नहीं करना चाहेगा किन्तु मसीहों की बात न करें। मसीहा को आपके व्यंग या किसी की प्रशंसा से कोई फर्क नहीं पड़ता।        विरोधाभास ये कि हमे ये लड़ाई खुद लड़नी हागी,खुद संगठित भी करना होगा,जनता को जागरूक होना होगा, किन्तु आप तो जो लोग जागरूक कर रहे हैं उन्ही मे दोष और व्यंग-विषय ढूढ़ रहे हैं। संगठित कौन करे, बिना नेता (अगुआ) के कौन संगठन,कौन लड़ाई? देश में आपकी दृष्टि में अन्ना से बेहतर कौन नेता है?रामदेव जैसे प्रभावशाली और देश के विषय में इतना संघर्ष करने वाले कितने और लोग हैं?    एक रसोइया को राष्ट्रपति बना दिया जाता है जो कार्यकाल समाप्त होने पर राष्ट्रपति भवन से दस ट्रक  सामान उठा ले जाती है।एक राजनैतिक कलाकार को जो मंत्री रहते हुए असफल व भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा  हो को राष्ट्रपति बना कर संविधान का नाम लेकर उनपर आरोप लगाने को अपराध बता कर जनसाधारण का मुहँ बन्द कर दिया जाता है और हम लोग……..अपने ही लोगों की हँसी उड़ा रहे हैं!!!!!!!!!!      कमियां किसमे नहीं होती? स्वयं मुझे रामदेव जी की विपक्षी राजनैतिक दलों को अपने आन्दोलन से जोड़ने की नीति बुरी लगी। भ्रष्टाचार या काला धन के मुद्दे पर वर्तमान कोई भी राजनैतिक दल गम्भीर नहीं है अन्यथा इतनी बड़ी लड़ाई नहीं लड़नी पड़ती।फिर भी रामदेव जी की हँसी तो नहीं उड़ा सकते।     मेरी भी सभी से एक प्रार्थना है कि देश,समाज के हित के लिये जो लोग संघर्ष कर रहे हैं उनका  उत्साह वर्धन करिये, उनका सहयोग करिये, कम से कम उनका मान मर्दन तो न करें। हमें अपना दर्शन बघारने के, लेखन कौशल दिखाने के अनेक अवसर मिलेंगे। लेकिन ऐसा अवसर बार-बार नहीं आता कि अन्ना या बाबा जैसा प्रभावशाली व्यक्ति हमारी आपकी आवाज उठाये और हमारी लड़ाई लड़े। आन्दोलन हर दिन या हर वर्ष नही होते।ऐसे आन्दोलन का हिस्सा बनने का अवसर कभी कभी ही आता है। धन,जन,लेखन जैसे भी हो अपना योगदान करिये….  समर शेष है , नहीं पाप का भागी केवल व्याध ; जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध |

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 23, 2012

    आदरणीय अजय जी ….. सादर प्रणाम ! अगर लेख के मूल विषय और इसमें लिखित सभी बातों ने आपको मानसिक आघात पहुंचाया है तो उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ ….. लेकिन आपसे यह गुजारिश करना चाहता हूँ की मेरी कुछेक जिज्ञासाओं को शांत करे :- *अपने पिछले आंदोलन में बाबा जी ने पुलिस के कहने पर भी +समय देने पर भी पनी गिरफ्तारी स्वेच्छा से क्यों नहीं दी ?…… जब अनशन +धरना +भूख हड़ताल + रोष प्रदर्शन करने के लिए मैदान में कूद ही पड़े थे तो पहले से ही इस संभावना पर भी विचार कर लेना चाहिय था की गिरफ्तारी भी देनी पड़ सकती है ….. *जिस नेता +स्वामी जी को जनता की अगुवाई करनी चाहिए थी वोह तो खुद ही उसका आश्रय लेने में क्यों जुटे थे ….. *अगर बाबा जी को उस रात भगवान ना करे की कुछ हर्ज मर्ज हो जाती तो क्या आप सिर्फ ब्लॉग लिखने तक ही सिमित रहते ?…. उसकी बजाय कुछ करते नहीं ?….. जब ऐसी बात है तो सरकार को क्या पड़ी थी की बाबा जी पर लाखों लोगों की भीड़ के सामने बाबा जी का टिकट कटवाया जाता और अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली जाती …. *अपने कायराना +स्त्रियोचित आचरण को न्याओचित ठहराने के लिए एक स्वामी +योग गुरु का झूठ बोलना और गलतबयानी करना किस लिहाज से जायज है ?….. *सारा देश जानना चाहता है की अपार जन समर्थन साथ में होने के बावजूद भी बाबा जी ने अपने कदमों को पीछे क्यों खीच लिया है ?….. *क्या यह जन आंदोलन करने वाले कार्यकर्ताओं के साथ विश्वासघात नहीं है +छल नहीं है +उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं है?…… *आखिरकार किस दबाव में +सौदेबाजी के तहत + ब्लैकमेलिंग के चलते बाबा जी ने अगले आम चुनावों से पहले निष्क्रिय होने की ठान ली है +घोषणा की है ?….. अगर आपके पास मेरे उपरोक्त सवालों के जवाब है तो किरपा करके मेरे मन को शांति प्रदान करने की किर्पालता जरूर कीजियेगा ….. आपके सवाल और शंकाए जान कर ज्ञान में बढोतरी हुई आगे भी इसी प्रकार से मार्गदर्शन करते रहिएगा आपका हार्दिक आभारी हूँ

rekhafbd के द्वारा
August 22, 2012

आदरणीय राजकमल जी , अन्ना जी और बाबा जी चाह कर भी हमारी कोई मदद नहीं कर पायेंगे ….. अपनी लड़ाई अब हमको खुद ही लड़नी होगी और उसके लिए खुद को संगठित भी करना होगा ….. इसके लिए देश की ज्यादातर असंतुष्ट जनता का जागरूक होना अति आवश्यक है|बहुत बढ़िया राजकमलिया सी.सी.टी.वी. फुटेज” पर हार्दिक बधाई

    rajkamal के द्वारा
    August 23, 2012

    आदरणीय रेखा जी …. सादर प्रणाम ! आपने लेख को पसंद किया और इसके सन्देश को सराहा जान कर अच्छा लगा …. प्रतिकिर्या के लिए हार्दिक आभार

yogi sarswat के द्वारा
August 22, 2012

अन्ना जी और बाबा जी चाह कर भी हमारी कोई मदद नहीं कर पायेंगे ….. अपनी लड़ाई अब हमको खुद ही लड़नी होगी और उसके लिए खुद को संगठित भी करना होगा ….. इसके लिए देश की ज्यादातर असंतुष्ट जनता का जागरूक होना अति आवश्यक है श्री राजकमल जी नमस्कार ! आपके प्रोडक्शन हॉउस से जो भी रचना निकलती है बड़ी मस्त और सार्थक निकलती है ! आप तो जागरण जंक्शन के राज श्री प्रोडक्शन हो गए हैं ! साब आप लिखते हैं की हमें संगठित होना होगा , सही बात ! संगठित होकर चलने के लिए एक नेता , एक लीडर चाहिए होता है अगुवाई करने के लिए , फिर वाही झमेला ! वो भी बाबा या अन्ना जी के तरह सरकार के कुचक्रों का फल भुगतेगा !

    rajkamal के द्वारा
    August 23, 2012

    आदरणीय योगी जी …. सादर प्रणाम ! अब तो अगर बाबा जी और अन्ना हजारे जी अपने अहम त्याग करके इकट्ठे लड़ाई करे तो ही शायद कुछ परिवर्तन हो सके ….. उद्देश्य सिर्फ कांग्रेस की बजाय सभी दलों में बैठे हुए दागी नेताओं को निशाना बनाना होना चाहिए …. फिर भले ही उसके बाद हमे एक नया खून +नया जोश लिए हुए एक नवीन जमात पर ही भरौसा क्यों ना करना पड़े …. प्रतिकिर्या के लिए आभारी हूँ

Chandan rai के द्वारा
August 22, 2012

राजकमल जी , एक बेहतरीन हास्य और गंभीर आह्वान के लिए मेरा हार्दिक अभिनन्दन स्वीकार करे ! आपका जबाब नहीं !

    rajkamal के द्वारा
    August 23, 2012

    आदरणीय खुशबूदार चन्दन जी …. सादर प्रणाम ! लेख को पसंद करने के लिए ही नहीं बल्कि इस पर ब्लाक कमेंट्स खोलने में आपके योगदान के लिए भी आपका हार्दिक शुक्रगुजार हूँ ….. समय की बेहद कमी के कारण ही उस कदम को उठाना पद था लेकिन फिर प्रिय साथियो को पेश आ रही दिक्कतों के मद्देनजर अपने फैसले को बदलना पड़ा था ….. आखिरकार हमारे सभी के बीच आपसी सम्वाद का यही तो एक जरिया है ….. आपकी शुभकामनाओं के लिए दिल से आभारी हूँ

Ramesh Bajpai के द्वारा
August 22, 2012

प्रिय श्री राज जी ” अपनी लड़ाई अब हमको खुद ही लड़नी होगी और उसके लिए खुद को संगठित भी करना होगा ….. इसके लिए देश की ज्यादातर असंतुष्ट जनता का जागरूक होना अति आवश्यक है …..)” अपने चिर परिचित अंदाज में आपने सुन्दर सन्देश दिया है | जन जागरण के ये सुन्दर भाव इतने निराले अंदाज में पेश करना आपकी लेखनी का कमाल है | बहुत बहुत बधाई ,शुभकामनाये ,आशीर्वाद |

    rajkamal के द्वारा
    August 23, 2012

    आदरणीय वाजपेई जी …. सादर प्रणाम ! आपकी दुआए तथा आशीर्वाद अनमोल है ….. इन्ही के कारण ही सबके मन में आपके लिए बेहद सन्मान है …. आप जब भी अपने मुंह से कोई भी बात निकालते है वोह हमेशा ही आशीर्वचनो और दुआओं तथा शुभकामनाओं से ही लबरेज हुआ करती है …. हम सभी मिल कर भी आपका आभार प्रकट नही कर सकते है ….. दिल की गहराईयों से बहुत -२ आभार

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
August 21, 2012

आदरणीय राजकमल शर्मा जी , सादर प्रणाम !…….. अत्युत्तम !………अनुपम ! आप की तरह यह आलेख भी बिलकुल आईने की तरह साफ और सुस्पष्ट ! पुनर्पुनार्प्रनाम !

    rajkamal के द्वारा
    August 23, 2012

    आदरणीय आचार्य जी …. सादर प्रणाम ! आपको यह लेख पसंद आया जान कर मन को प्रसन्नता हुई ….. बेशक यह सब कुछ कल्पना +कयास ही है …. लेकिन हमको उम्मीद करनी चाहिए की बाबा जी आंदोलन को वापिस लेने के कुछ ठोस +उचित कारण देश की जनता को जरूर बतलायेंगे ….. और आगे अन्ना हजारे जी के साथ मिलकर ही अपनी भावी रणनीति बनाएंगे ….. ढेरों आभार सहित बारम्बार प्रणाम !!!

D33P के द्वारा
August 21, 2012

राजकमल जी सादर नमस्कार ,बहुत बढ़िया फुटेज है आपकी ,काबिले तारीफ ……भोग से योग का रास्ता तो कठिन है ही ,योग से भोग का रास्ता उससे भी कठिन है ,शायद ये बाबा रामदेव को अहसास हो गया होगा .और अंतिम सन्देश को नमन … अपनी लड़ाई अब हमको खुद ही लड़नी होगी और उसके लिए खुद को संगठित भी करना होगा ….. इसके लिए देश की ज्यादातर असंतुष्ट जनता का जागरूक होना अति आवश्यक है …..)

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 21, 2012

    आदरणीय दीप्ती जी ….प्रणाम बाबा जी और अन्ना जी राजनीतिक पैन्तरेबाजिया तथा चालों से अनजान है आजकल की राजनीति पैसे और शोहरत के लिए ज्वाइन की जाती है पता नहीं कब देश को कोई त्यागी नेता स्वर्गीय शाश्त्री जी जैसा ,इल पायेगा तहेदिल से आभार जय श्री राम

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
August 21, 2012

अन्ना जी और बाबा जी चाह कर भी हमारी कोई मदद नहीं कर पायेंगे ….. अपनी लड़ाई अब हमको खुद ही लड़नी होगी और उसके लिए खुद को संगठित भी करना होगा ….. इसके लिए देश की ज्यादातर असंतुष्ट जनता का जागरूक होना अति आवश्यक है आँखे तरस रही थीं इस सी सी टी वी फूटेज को ये ट्रांसमीटर की आवाज हमारे दरोगा जी ही कैच कर सकते थे ..अंत में आप के सार को ही हम भी पकड़ लेते हैं शायद कोई बात बने सच में सरकार अब बड़ी हिम्मत वाली हो गयी है आप जैसे लोग जब से कांग्रेसी ….ह हा …बहुत आनंद दाई रहा ये सफ़र …ये सब सच में परीक्षा में पास होते रहेंगे चाहे कुछ न आता हो ..क्योंकि उनकी माता वो …. जय श्री राधे …मंजिल जब तक मिलती नहीं राहों की तलाश होती रहती है भाई जी ….संसार छे चाले छे भ्रमर ५

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 21, 2012

    आदरणीय भ्रमर जी …. सादर प्रणाम मन में बस इतनी सी जिज्ञासा थी की स्वामी जी ने अपना बिना किसी ठोस कारण के वापिस कैसे और क्यों ले लिया बस इसी कारण ही यह सारी कल्पना कर डाली आपको पसंद आई आपका कुछ मनोरंजन हुआ जान कर हर्ष हुआ और सुखद अनुभूति भी दिल से आभार जय श्री राम

vinitashukla के द्वारा
August 21, 2012

“इसलिए मेरी सभी से यह प्रार्थना है की कब तक आप किसी मसीहा और रहनुमा को अपनी अगवाई के लिए बुलाते रहेंगे ?….. अन्ना जी और बाबा जी चाह कर भी हमारी कोई मदद नहीं कर पायेंगे ….. अपनी लड़ाई अब हमको खुद ही लड़नी होगी और उसके लिए खुद को संगठित भी करना होगा” इस बार व्यंग्य की तीखी फुहारों के साथ साथ, यह बहुत गहरी और पते की बात कह गये आप. बधाई और साधुवाद.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 21, 2012

    आदरणीय विनीता जी …. सादर प्रणाम आज हमारे देश की जनता को अगुवाई करने वाला एक अदद नेता/नेत्री चाहिए जनता तो पीछे लग कर चलने के लिए तैयार बैठी है देखिये कब यह खोज पूरी होती है हमारे देश की संस्कृति तथा माहौल किसी भी किस्म की क्रान्ति को होने नहीं दे सकता है कभी भी मंगल पांडे का समय बिलकुल अलग तथा और था बस उसी तरह की ही एक चिंगारी की जरूरत होगी हार्दिक शुक्रिया जय श्री राम

jagojagobharat के द्वारा
August 20, 2012

सुन्दर आलेख

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 21, 2012

    आदरणीय महोदय जी …. सादर प्रणाम मोहब्बत को दो लफ्जों की जिंदगानी कहा गया है या है मोहब्बत या है रवानी आपके इन दो शब्दों ने बहुत कुछ कह दिया है उत्साहवर्धन के लिए दिली शुक्रिया जय श्री राम

alkargupta1 के द्वारा
August 18, 2012

राजकमल जी , अपने ही अनोखे अंदाज़ में बहुत ही अच्छी सी.सी.टी.वी. फुटेज दी हैं…. बहुत बढ़िया…

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 21, 2012

    आदरणीय अलका जी …. सादर प्रणाम अंदाज़ तो कुछ नहीं बस सोच जिधर को मोड़ती गई उधर को ही मौड काटता चला गया आपको पसंद आया जान कर मन को असीम प्रसन्नता हुई दिल से हार्दिक आभार जय श्री राम

manoranjanthakur के द्वारा
August 18, 2012

अथ श्री राजकमल कथा समापतम सानदार राजकमलिया सी.सी.टी.वी. फुटेज”

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 21, 2012

    आदरणीय ठाकुर साहिब …. सादर प्रणाम शुक्र है की आपने कथा -भाग एक नहीं कहा -हा हा हा हा हा हा आपकी तारीफ के लिए तथा रचना को पसंद करने के लिए आपका आभारी हूँ जय श्री राम

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
August 18, 2012

अपनी लड़ाई अब हमको खुद ही लड़नी होगी और उसके लिए खुद को संगठित भी करना होगा ….. इसके लिए देश की ज्यादातर असंतुष्ट जनता का जागरूक होना अति आदरणीय राजकमल जी, सादर अभिवादन बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति सबसे प्यारा सन्देश अब भी न खुलें आंखे भुगतेगा सारा देश मेरे साथ साथ भोलू की बधाई स्वीकार करें.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 21, 2012

    पूज्यनीय कुशवाहा जी ….. सादर प्रणाम भोलू से तो अब लड्डू ही स्वीकार होंगे उसके इलावा और कुछ भी मंजूर नहीं देश की जनता के साथ यह समस्या है की यह एक अदद नेता चाहती है जोकि आदर्श तथा त्यागी हो अब तो भगवान से ही प्रार्थना करनी होगी की कम से कम एक नेता तो इस किस्म का भेज दे भारत में जोकि जनता की आशाओं को पूरा कर सके और उसकी अपेक्षाओं पर पूरा उतरते हुए उसके देखे गए सपनो को साकार कर सके आपका बहुत -२ आभारी हूँ जय श्री राम

Syeds के द्वारा
August 18, 2012

आदरणीय भाई साहब, आज बहुत दिनों बाद मंच पर आ सका और दौड़ता हुआ आपके ब्लॉग पर आ गया…और यकीन मानिये आना सफल रहा… खूबसूरत राजकमलीय लेख..और बेहद ख़ास हैं आखिर की कुछ पंक्तियाँ… ढेरो बधाइयां स्वीकार करें… http://syeds.jagranjunction.com

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 21, 2012

    आदरणीय सईद जी ….. सादर प्रणाम यह आपके द्वारा समय समय पर दिया गया प्रोत्साहन और समर्थन ही है जिसने आज मुझे यहाँ तक पहुंचाने में बहुत मदद की है ….. आपका और प्रिय जवाहर जी तथा अबोध जी का कर्जदार हूँ आपका बहुत -२ आभार जय श्री राम

Santosh Kumar के द्वारा
August 17, 2012

आदरणीय गुरुदेव ,..सादर प्रणाम आपकी तीसरी आँख के क्या कहने ,.सब पर्दाफाश कर दिया ,..इस बार संभवतः कैमरे के आगे काली फिल्म कुछ ज्यादा चढ़ गयी है ,…..आपका आकलन सत्य से परे भी नहीं है ,..अन्नाजी को गलत दवा देने की बात पिछले साल बाबाजी ने कही थी ,..मूरखों ने भी डाक्टर को इनाम मिलने की मिठाई खिलाई थी ,..तब अन्नाजी ने ही इसका विरोध किया था ,..शेष क्या लिखूं ?….आपका आकलन निराधार भी नहीं है ,..अंततः हमें यही करना होगा ,..राष्ट्र पर खतरा है ,.सभी राष्ट्रभक्तों का एकजुट होना जरूरी है ,…कोई किसी की मदद नहीं करता है ,..वो नियति होती है जो करती या करवाती है ,…. बाबाजी की देशसेवा , समर्पण और साहस को प्रणाम करता हूँ ,..अन्नाजी को नमन है …..कारवां बढ़ता जाएगा ,..एक दिन मंजिल जरूर मिलेगी …सादर आभार सहित वन्देमातरम

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 21, 2012

    आदरणीय संतोष जी ….. सादर प्रणाम आपसे गुजारिश है की आप यही समझियेगा और मानियेगा की आपने इस लेख को पढ़ा ही नहीं आप उसी प्रकार से लिखते रहे पहले ही की तरह से आपका बहुत -२ शुक्रगुजार हूँ जय श्री राम

    santosh kumar के द्वारा
    August 24, 2012

    आदरणीय गुरुदेव ,.सादर प्रणाम आपकी गुजारिश किसी भी कीमत पर क़ुबूल नहीं हो सकती क्योंकि जो हो चुका है उससे इनकार किया ही नहीं जा सकता है ,..माना और समझा वही जाता है जो किया जाता है ,..मूरख अपना काम करते रहेंगे संभवतः कभी उनकी अकल का पर्दा खुल जाय …आपके लेख के सार से असहमत नहीं हुआ जा सकता है ,..कैमरे पर काली फिल्म ज्यादा होने पर भी आप असहमत नहीं होंगे ऐसा मेरा विश्वास है ..सादर आभार सहित सीताराम सीताराम …

vikramjitsingh के द्वारा
August 17, 2012

आदरणीय राजकमल जी…..सादर….. बहुत अच्छा व्यंग कर लेते है आप…….लेकिन सार तो ये…… ”अपनी लड़ाई अब खुद ही लड़नी पड़ेगी…..कोई मसीहा नहीं आएगा…..जनता को जागरूक होना ही पड़ेगा……” बढ़िया आलेख…….

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 21, 2012

    आदरणीय विक्रम जी ….. सादर प्रणाम आप इस मंच पर पूर्ण स्वस्थ होकर फिर से सक्रिय है जान कर प्रसन्नता हुई सबसे बड़ा दुःख तो इसी बात का है की जनता खुद संगठित नहीं हो सकती इसको इक्कठा करने वाला एक नेता चाहिए और उस नेता में यह इतने गुण चाहती है जोकि नामुमकिन है इसलिए भारत देश का तो भगवान ही मालिक है आपका हार्दिक आभार जय श्री राम

satish3840 के द्वारा
August 16, 2012

जय श्री श्याम राज कमल जी /बात तो आपकी सही हें अपनी लड़ाई जनता को खुद ही लडनी हें / कोई काले धन को लेकर रो रहा हें तो लोकपाल को / इन मुद्दों को उठाने वालों को देशी व् विदेशी सहयता मिल रही हें / करोड़ों दान में मिल रहें हें / सब धन को लेकर विचलित हें / पर मेरे जेसी आम जनता आम आदमी बस यही कहता हें – गौ धन गज धन बाजी धन और रतन धन खान , जब आवे संतोष धन सब धूरि समान / बाबा को शायद पता हें – माया महाठगिनी हम जानी , तिरगुन फांस लिए कर डोले बोले मधुरि वाणी / बाबा जी के पास भी देशी विदेशी माया हें ऐसा सूना हें / लोकपाल टीम के पास भी माल की कमी नहीं वो भी विदेशी माल पर हाथ साफ़ कर रहें हें ऐसी मीडिया में खबरें हें / जिसका खाओ उसका गाओ की तर्ज पर ये मुद्दे उठाते हें / जनता के महगाई , बेरोजगारी , शिक्षा . चिकित्सा की समस्या से इनका क्या सरोकार / जनता के समस्या को जनता को ही उठाना होगा / बाबा हो या कोई और सब इस्तेमाल करो और फेंकों की नीति पर चल स्वार्थ सिध्धि में लगें हें

    jlsingh के द्वारा
    August 17, 2012

    आदरणीय गुरुदेव, सादर अभिवादन! कल तो आपने कोमेंट ब्लोक्ड कर के रक्खा था, अभी सतीश की प्रतिक्रिया देखकर फिर कोशिश करता हूँ! आप इसीलिये कई दिनों से गायब थे दरअसल ख़ुफ़िया कैमरा और टेप लेकर बाबा के पीछे पड़े हुए थे. बात कुछ कुछ सही लगती है …. बालकृष्ण की जमानत मंजूर हो जाती है और बाबा की दुकान में खाद्य सामग्री पर छापेमारी होती है … वो भी निर्दोष करार कर दिए जायेंगे, क्योंकि अब उन्होंने उपवास न करने का वादा जो कर चुके हैं …. अजीब दास्ताँ है ये, कहाँ शुरू कहाँ ख़तम! ये मंजिले हैं कौन सी, पहुंचे कहाँ पे हम! प्रणाम पुनश्च !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 21, 2012

    आदरणीय सतीश जी ….प्रणाम अन्ना जी और उनकी टीम के बारे में यकीं है की वोह साफ़ सुथरे है और बाबा जी पर सिर्फ दोष ही लगे है साबित नहीं हुए है आपकी बाकी बातों से पूरी तरह से सहमती है पता नहीं भारत देश की जनता के भाग्य में कोई योग्य नेता लिखा भी है की नहीं हार्दिक आभार जय श्री राम

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 21, 2012

    आदरणीय जवाहर लाल जी ….. सादर प्रणाम कमेन्ट बंद इसलिए किये थे क्योंकि मैं खुद के तथा दूसरों के ब्लॉग पर उत्तर नहीं दे सकता था किसी का भी कमेन्ट मुझको अपनी आत्मा पर बोझ लगता है आचार्य बालकृष्ण जी की जमानत बेशक मंजूर हो चुकी है लेकिन सरकार बाबा जी को भी घेरे में लेने के प्रयास कर रही है इसलिए आने वाला भविष्य ही बतलायेगा की क्या होगा उसी के आधार पर ही यह साबित होगा की किस प्रकार की सौदेबाजी तथा ब्लैकमेलिंग हुई थी ….. आपका कर्जदार हार्दिक आभार सहित जय श्री राम


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