RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

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"पाकिस्तान के साथ क्रिकेट – आखिर क्यों है इतनी जल्दबाजी"?-राजकमल प्रोडक्शन

Posted On: 3 Aug, 2012 में

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हाल ही में हमारी सरकार द्वारा हरी झण्डी मिलने के बाद बी.सी.सी.आई  ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के दौरे को अपनी चिरप्रतीक्षित मंजूरी प्रदान कर के वहां के क्रिकेट बोर्ड को निहाल करके मालामाल करने की तैयारी शुरू कर दी है …. इस ऐलान रूपी फैसले के बेवक्त सामने आने से सभी देशवासियों को बहुत ही हैरानी हुई है क्योंकि इस तरह की किसी भी पहल की उम्मीद हमको सपने में भी नहीं थी ….. अब सरकार तो सरकार है और हम ठहरी जनता लाचार , इसलिए सिवाय सब कुछ अपनी आँखों के सामने होते हुए देखने के और कर भी क्या सकते है ….. यह तो शुक्र है जागरण जंक्शन ने कुछेक ब्लागरो को इस विषय पर लिखने का सुनहरा अवसर प्रदान कर दिया और हम भी बैठ गए अपने मन की भड़ास को निकालने के लिए …..

25 july के समाचारपत्र में अमेरिका की प्रतिकिर्या को पढ़ा की हम क्रिकेट के बारे में कुछ ज्यादा तो नहीं जानते है लेकिन भारत और पाक के बीच  क्रिकेट की कूटनीति का समर्थन करते है ….. एक कहावत सुनी थी की चोर की दाड़ी में तिनका लेकिन यहाँ तो चोर (अमेरिका ) की दाड़ी में पूरे  का पूरा शहतीर ही नजर आ रहा है ….. यह अलग बात है की कोई इसको माने या ना माने या फिर देख कर भी अनदेखा कर दे ……

हालाँकि अमेरिका खुद  ही अतीत में ओलम्पिक खेलों का बहिष्कार कर चूका है लेकिन अपने  दीर्घकालीन सामरिक हितों के तहत आज यह अंदरखाते भारत और पाकिस्तान के बीच  क्रिकेट सम्बन्धों की बहाली का दबाव सफलतापूर्वक बना चूका है ….. विगत में भी जब कभी अमेरिका और रूस तथा दूसरे किसी भी देश ने ओलम्पिक खेलो का बहिष्कार चाहे किसी भी कारण से किया हो मैंने उसको उचित नहीं माना है …. क्योंकि एक खिलाड़ी का खेल जीवन आखिरकार होता ही कितना है ? , उस पर भी अगर उसके कैरियर का अधिकाँश हिस्सा कूटनीति और राजनीति की भेंट चढ़ जाए तो वोह सौने पर सुहागा वाली बात होगी ….. खेलो में राजनीति और खेलो पर राजनीति कभी भी होनी ही नहीं चाहिए…..

हमारी सरकारों ने जो काम नहीं करने चाहिए थे उनको तो वोह करती रही है लेकिन जो काम उनको करने चाहिए थे उनमें उन्होंने राजनीति घुसेड़ दी है ….. पाकिस्तान से हमारा हर तरह का व्यापार लगातार हो रहा है …. उसके साथ सदभावना एक्सप्रेस गाड़ी तथा रेलगाड़ी से आपसी सम्बन्धों को मजबूत किया जा रहा है ….. लेकिन पिछले कुछेक सालो से उसके साथ क्रिकेट सम्बन्ध हमको किसी भी कीमत पर गंवारा नहीं थे …. अगर पकिस्तान पर आर्थिक दबाव ही बनाना एक मात्र उद्देश्य है तो उसके साथ सभी प्रकार की व्यापारिक गतिविधियो को विराम दे देना चाहिए ….

चाहिए तो यह था की पाकिस्तान पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए हम क्रिकेट की बजाय उसके साथ अपने सभी तरह के व्यापारिक सम्बन्ध खत्म करते ….. लेकिन हम तो इसी बात पर मरे जा रहे थे की पाकिस्तान ने हमको मोस्ट फेवरेट नेशन वाले व्यापारिक सांझीदार का दर्ज़ा क्यों नहीं दिया ? ….. हमारी सारी तवज्जों इसी बात पर थी और हम पकिस्तान से वोह खिताब किसी भी प्रकार से ले ले   , भले ही हमको मुम्बई हमलों तथा संसद पर हुए हमलों  में शामिल रहे  मोस्ट वांटेड आंतकवादियो के बारे में पाकिस्तान ने ठेंगा दिखा दिया हो , लेकिन पकिस्तान से मोस्ट फेवरेट व्यापारिक नेशन का तमगा पाकर हमारा सिर  पूरे  विश्व में गर्व से ऊँचा तो  हो ही गया है …..

विगत में  कारगिल युद्ध के दौरान  हमने पकिस्तान से  आने वाली (कम मिठास वाली ) चीनी का अग्रिम भुगतान कर  दिया था और यह हजारों सालों के विश्व इतिहास की राजनीति में पहला मौका था की दो युद्धरत देशो में व्यापारिक कारणों से कोई भुगतान हुआ हो ….. लेकिन हमने यह मिसाल कायम की भले ही उस रकम से पकिस्तान ने हथियार खरीद कर कारगिल युद्ध में हमारे हजारों वीर जवानों को मौत की नींद सुला दिया लेकिन पकिस्तान से हमारा व्यापारिक सम्बन्ध तो हर हाल में बना ही रहा …..

किसी भी देश की खेल गतिविधियों पर प्रतिबन्ध लगाने की बजाय उसके साथ हर तरह के व्यापारिक सम्बन्धों पर रोकथाम लगाई  जानी चाहिए ….. क्योंकि खेलो पर प्रतिबंध लगाने से सरकार पर उस तरह का दबाव नहीं बन पाता है जैसी की हम अपेक्षा करते है ,  यह हमने पहले भी दक्षिण अफ्रीका की अश्वेत सरकार के समय में  क्रिकेट पर प्रतिबन्ध लगा कर देख ही लिया है ….. खेलो पर प्रतिबन्ध लगाने से हम खेल जगत की प्रतिभाओं से वंचित हो जाते है ….. आज हम सभी जानते है की दक्षिण अफ़्रीकी खिलाड़ी कितने समर्थ और प्रतिभावान है …..क्रिकेट के खेल को दिए जा सकने वाले उनके न जाने कितने ही योगदानों  को हमने व्यर्थ में ही गँवा दिया था ……

क्रिकेट के खेल को कुलीन भद्रजनों का खेल भी कहा जाता है क्योंकि पहले पहल इस महंगे खेल को सिर्फ  राजे रजवाड़े ही खेला करते थे ….. लेकिन अब तो यह ( खासकर पाकिस्तान के मामले में )  सट्टेबाजों का खेल बन चूका है ….. पिछले  विश्व कप में जब इनके कोच को इनकी असलियत मालूम हुई तो उनका काम तमाम कर / करवा  दिया गया ….. पकिस्तान के बारे में एक चुटकुला प्रचलित है की वहां की समाचार उद्घोषिका क्रिकेट के बारे में कहती है की अब आप कल होने वाले मैच के परिणाम के बारे में सुनिए ….. यहाँ तक तो ठीक है लेकिन जब भारत और पकिस्तान के बीच के मैचों की बात आती है तो हमे यह देख कर  हैरान हो जाना  पड़ता है की पिछली कई सीरीजों  के मैचों के नतीजे बराबरी पर छूटे  है ….. ऐसा लगता है की जैसे यह दोनों तरफ की सरकारों की तरफ से फिक्स होते रहे हो ….. इस बार की होने वाली सीरीज का नतीजा भी अगर बराबरी पर छूटे तो इसमें हमे कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए ….. इससे दोनों तरफ की जनता को खासकर पकिस्तान की उग्र जनता को शांत और संतुष्ट करने में बहुत मदद मिलती है ….. और दोनों तरफ का मीडिया ना तुम जीते ना हम हारे नामक तराने गाता रहता है तथा खुद को और भोली भाली जनता को भी भ्रमित करता रहता है ……

अन्त  में यही कहना चाहूँगा की सरहद पर पहरा दे रहे हमारे देशभक्त जवानों को सिर्फ तीन  चीजें ही उतेजित  और रोमांचित करती है कैट और करीना सरीखी हीरोइने + प्रियजनों के भेजे  हुए सन्देश और भारत पाक के बीच क्रिकेट मैच में भारत की जीत  ….. भारत पाक के बीच मैच में जीतने  पर उनको ऐसा महसूस होता है की जैसे उनकी तरफ से भारत के ग्यारह महायोद्धा जंग को जीत  रहे है …..

तो आइए सभी मिल कर तैयार हो जाइये अंकल सैम (अमेरिका) की घुड़की पर चालू हुई , दोनों देशो की सरकारों द्वारा प्रयोजित इस बहुप्रतीक्षित होने वाली क्रिकेट की सीरीज के बराबरी पर छूटने वाले मैचों के महा तमाशे के मूक दर्शक (तमाशबीन) बनने के लिए और हमारे जाबांज सैनिकों को रोमांच की एक नई  दुनिया में ले जाने के लिए …..

राजकमल शर्मा

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53 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Chandan rai के द्वारा
August 16, 2012

राजकमल जी , मंच पर कम से कम पाठन नीरसता को आपने इस फुटेज से छूमंतर कर दिया ! शायद अब तक का पढ़ा सर्वश्रेष्ठ बेहतरीन लेख ! & I mean it Pls unlock comment option for your latest article

ajaykr के द्वारा
August 11, 2012

शर्मा जी ,प्रणाम ऑउम्दा लेख |

D33P के द्वारा
August 5, 2012

प्रणाम राजकमल जी …………आपके ब्लॉग “राजकमल इन बिग बॉस एस बिग बॉस” पर जब कमेन्ट पोस्ट करना चाह तो ये लिखा हुआ आया -Sorry, comments are closed for this item.

jack के द्वारा
August 4, 2012

राजकमल जी आपके लिए सुपरस्पेशल पोस्ट सिर्फ आपके लिए … jack.jagranjunction.com/2012/08/04/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%b0%e0%a5%80-friendship-day-special-2-sms-shayari-in-hindi/

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    प्रिय जैक भाई ….. सप्रेम नमस्कारम ! “वोह खुद को जैक और हमको जिल कहते है बिना एंग्री किये हुए ही जस्ट चिल कहते है” आपकी इस पेशकारी को जरूर देखना चाहता हूँ मैं भी की आपने इसमें क्या -२ उंडेल दिया है ….. हार्दिक आभार सहित

vinitashukla के द्वारा
August 3, 2012

खेलों से लेकर विश्व के राजनैतिक परिदृश्य में, अपनी दादागिरी चलाने की अमेरिका की पुरानी आदत है. किन्तु हमारे राजनेताओं को पकिस्तान व उसके ‘आका’ अमेरिका को इतनी तवज्जो देने से अवश्य बचना चाहिए. पाकिस्तान सरीखे शत्रु से किसी भी प्रकार का वास्ता रखना गलत है; भले ही वह आपसी खेल- संबंधों में ही क्यों न हो. एक सार्थक सामयिक रचना पर बधाई.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    आदरणीय विनीता जी ….. सादर अभिवादन आपकी चिंताओं के बारे में मैंने इस लेख में जवाब देने की कोशिश की है ….. अगर बन्द ही करना है तो पाकिस्तान के साथ व्यापार को बन्द करना चाहिए ना की खेलो पर राजनीति तथा ब्लैकमेलिंग करनी चाहिए ….. आपके समर्थन के लिए तहेदिल से आभारी हूँ

Mohinder Kumar के द्वारा
August 3, 2012

राजकमल जी, यदि एक नागरिक की तरह सोचा जाये (चाहे वो पाकिस्तान का हो या फ़िर हिन्दुस्तान का) हर कोई कला और खेल के क्षेत्र में भागीदारी का समर्थन करेगा. एक आम आदमी को राजनीति के दांवपेच और धर्म के ठेकेदारों के हथकंडे नहीं आते ना ही वो इनसे कोई वास्ता रखना चाहता है. यदि आम नागरिक भी राजनेताओं और धर्म के ठेकेदारों की तरह सोचने लग जायेगा तो शायद ये बीच की खाई कभी भी पट नहीं पायेगी. यह मेरी व्यक्तिगत राय है इसे अन्यथा न लें और पूर्वत स्नेह बनाये रखियेगा.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    आदरणीय मोहिन्दर जी …… सादर अभिवादन यह आम जनता की त्रासदी है की वोह चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पाती ….. जो कुछ भी फैसले राजनेताओं द्वारा लिए ले लिए जाते है उनको वोह सिर्फ लागू होता हुआ देखने के इलावा कर भी क्या सकती है ….. वैसे भी हमारे देश में चुनाव से पहले नेताओं के बीच सभी मुद्दों पर स्वस्थ बहस तथा विचारों का आदान प्रदान नहीं होता है और हम नेताओं के विचारों से अनजान ही रहते है ….. इसलिए वोह कब क्या फैसला ले ले यह हमे उसी समय ही पता चलता है जब की वोह सामने आ जाता है ….. आपके बेबाक विचारों के लिए आपका दिल से आभार

yogi sarswat के द्वारा
August 3, 2012

एक बात मन में आती है आपका लेखन पढने के बाद ! हमने आज तक पढ़ा और सुना है की गाँधी जी कहते थे की अगर कोई एक गाल पर तमाचा जड़ दे तो दूसरा गाल भी कर दो की भैया इसे काहे छोड़ दिया , यहाँ भी मारो ! हमने दूसरा गाल ही नहीं अपना सब कुछ उसके सामने रख दिया है और अपना पिछोंडा भी ! ले पाकिस्तान , जितना मार सकता है मार ! मैं फिर भी तुझे कुछ नही कहूँगा ! यहाँ तो हम गाँधी के आदर्श ही अपना रहे हैं बल्कि उनके आदर्शों से भी आगे जा रहे हैं ! मन का मोहन कहीं नोबल पुरस्कार के फेर में तो नहीं ?

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    प्रिय योगी जी ….. सादर अभिवादन अब किसी भी हालत में दोनों परमाणु शक्ति सम्पन्न देशो में आमने सामने आर पार की लड़ाई नहीं हो सकती है ….. जब हम लड़ ही नहीं सकते है तो क्यों ना कुछ सार्थक ही कर लिया जाए …. लेकिन इस मामले में देशवासियों की चिंताओं का ध्यान तो रखना ही चाहिए ….. मेरा मानना है की पहले कसाब को फांसी अगर दे दी जाती तो बाद में आपसी सोहार्द बढ़ाने के लिए कुछ भी किया जाता जनता उसका समर्थन ही करती ….. हार्दिक शुक्रिया

rahulpriyadarshi के द्वारा
August 3, 2012

राजकमल जी,सादर नमस्कार,देश का सबसे महत्वपूर्ण काम क्रिकेट खेलना है,मेरा अपार अनुभव यह साबित करने के लिए मेहनत भी नहीं करेगा क्यूंकि सब यह जानते हैं.जीवन का लक्ष्य क्रिकेट में डूब जाना है,गरीब आदमी त्रस्त है क्यूंकि उसके पास टीवी नहीं है,न ही वो पेट भर सकता है जो चैन से बैठ कर क्रिकेट देखे,अमीर आदमी चैन से पेट भरकर आराम करता है तो क्रिकेट देखता है,युवा पीढ़ी का पढने में मन नहीं लगता,सोचता है क्रिकेट खेल के अमीर बन जाएगा,१० दुश्मन को गोली मार दो,कोई नहीं पहचानेगा,एक शतक मार दो,इंडिया दीवाना हो जायेगा,ऐसे में क्रिकेट से महत्वपूर्ण कोई काम निकल आये देश में तो बता दीजिये.मैं तो कहता हूँ कि क्रिकेट वाले ज्यादा भाव खाते हो तो कुश्ती या मुक्केबाजी की भारत-पाक श्रंखला होनी चाहिए,लेकिन दोनों देश की सरकारों को पोपुलारिटी चाहिए न,तो अब बताइए क्रिकेट से बड़ा कोई ब्रांड है क्या?

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    आदरणीय राहुल भाई ….. सादर अभिवादन हम पर इट क्रिकेट -ड्रिंक क्रिकेट -स्लीप क्रिकेट की सोच थोपी गई जोकि अब हम पर हावी होने के बाद सवार हो चुकी है ….. खेलो का बजट नाममात्र होता है ….. सिर्फ ओलम्पिक के वक्त ही हमको दूसरे खेल याद आते है ….. खिलाडियों को सुविधा -खानपान -प्रोत्साहन -आर्थिक सहायता तथा प्रयोजक मिलते नहीं है और हम उम्मीद करते है की हमारे अनुभवहीन फिस्सडी खिलाड़ी पदकों का ढेर लगा दे ….. हमारी नीयत तथा नीतिया ठीक नहीं है तो फिर रिजल्ट भी गलत ही आयेंगे न ….. हमारा राष्ट्रिय खेल हाकी आज कहाँ पहुँच गया है देख कर ही शर्म आती है -हाकी में राजनीति बहुत ही ज्याद है -इसी तरह ही के हालात बाकी के खेलो में भी है …. खेल महकमों के प्रमुख खेलो से जुड़े हुए व्यक्ति को ही बनाया जाना चाहिए बजाय किसी राजनेता के ….. अगर बुनियादी सुधार नहीं किये जाते है तो परिणाम और हालात पूर्ववत ही रहेंगे आपके अनमोल विचारों के लिए हार्दिक शुक्रिया

ANAND PRAVIN के द्वारा
August 2, 2012

आदरणीय गुरुदेव, सादर प्रणाम खेल को राजनीति में मिश्रित करना हमेसा से गलत रहा है राजनीति भी तो खेल ही बन गई है

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    प्रिय आनंद परवीन जी ….. सप्रेम नमस्कारम आपका कहना बिलकुल सही है जब तक खेल से जुड़े हुए महकमों के प्रमुख घाघ राजनीतिक व्यक्ति बने रहेंगे तब तक हालात ऐसे ही बने रहेंगे राजनीति चाहे खेल बन गई है लेकिन उसमे कठपुलती की तरह नाच नाचती हुई कठपुतलियों की बजाय ब्लैकमेलिंग तथा सौदेबाजी करने वाले धुरन्दर मोजूद है हार्दिक शुक्रिया (मैं भी आपके विचारों से सहमती रखता हूँ )

D33P के द्वारा
August 2, 2012

आज के ताज़ा समाचार भारत ने पाकिस्तानी नागरिको और वहा की कम्पनियों को अपने देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने की अनुमति दे दी है ! केंद्र सरकार ये यह फैसला पाकिस्तान से व्यापारिक सम्बन्ध बदने के लिए लिया है अब पाकिस्तानी नागरिक और वहां पंजीकृत कम्पनियाँ भारत में परमाणु उर्जा ,रक्षा और अन्तरिक्ष के क्षेत्र को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रो में निवेश कर सकेंगे और यहाँ निवेश भी सरकारी रूट के जरिये हो सकेगा ! पता नहीं भारत सरकार अपने दुश्मन के साथ ऐसा वर्ताव कर क्या साबित करना चाहती है ? विदेशी निवेश की उम्मीद पाकिस्तान जैसे देश से कर रही है किसी पूंजीवादी देश से ऐसी उम्मीद करती तो कुछ बात होती …….दुश्मनों को अपने देश में घुसने का न्योता खुले आम दे रही है !क्या पाकिस्तान अपनी घात की आदत से बाज आएगा?

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    आदरणीय दीप्ती बहिन ….. सादर अभिवादन हो सकता है की जब भारत ने पाकिस्तान से मोस्ट फेवरेट नेशन वाले व्यापारिक सांझीदार का रुतबा हासिल किया था उसी समय अंदरखाते इन सभी बातो पर सहमती बन गई हो इसलिए पाकिस्तान का कंगलापन हमारी आँखों में लेकिन सरकार तो अपने वायदे निभाने में लगी हुई है अपने हित साधने में लगी हुई है आपके द्वारा इस जानकारी को प्रदान करने के लिए आपका हार्दिक आभार

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
August 2, 2012

श्रद्धेय राजकमल शर्मा जी, सादर वन्दे !!…………आप तो पोल खोलने में महा माहिर हैं , आखिर यहाँ भी आप ने पोल खोल ही दी ! जहां तक इन राजनीतिज्ञों की बात है तो इनके सम्बन्ध लिखना या बोलना तो दूर सोंचना भी पाप जैसा लगने लगा है , ये क्या हैं ? ये शिखंडी हैं, ये कोठों के अगोरिये हैं या फिर चमचों ( अमरीका, पाकिस्तान आदि देशों ) के चमचे ? पता नहीं ! यह स्तरीय आलेख खेलों के प्रति आप की गहरी रूचि को दर्शाता है ! पुनर्प्रनाम !!

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    आदरणीय आचार्य जी ….. सादर प्रणाम ! आप तो खुद ही आचार्य है इसलिए जरूरत से ज्यादा मान आपसे पाना अच्छा नहीं लगता ….. हमे उम्मीद करनी चाहिए की पूज्यनीय अन्ना हजारे जी के कारण राजनीतिज्ञों के प्रति हमारी सोच बदलेगी तथा हमारे अनुभव बेहतर होंगे ….. आपके नमस्कार को कबूल करते हुए आपको प्रणाम करता हूँ हार्दिक आभार सहित

vasudev tripathi के द्वारा
August 2, 2012

राजकमल जी., क्रिकेट संबंधों को बहाल करने का मनमोहन सरकार का निर्णय बहुत सूझबूझ और राष्ट्र भावना से भरा हुआ निर्णय है.., अमेरिका इस्राएल पर आतंकी हमला होता है तो वे तुरंत आतंकी देश पर हमला करके उसके छक्के छुड़ा देता है.. भारत तो ठहरा गाँधी का देश.. हमला कर नहीं सकता… इसलिए पूर्ण विचार विमर्श के बाद निर्णय लिया गया कि कम से कम क्रिकेट खेलकर पाकिस्तान के सहबाग सचिन से एक-दो छक्के छुड़बा दिए जाएँ ताकि लोग बाद में हँसे न मनमोहन पर..!!

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    आदरणीय वासुदेव जी …. सादर अभिवादन ! भारत और पाकिस्तान में अतीत में चाहे आमने सामने के कई युद्ध हुए हो लेकिन अब क्यूंकि यह दोनों ही परमाणु शक्ति सम्पन्न है तो अब किसी भी युद्ध की बात बेमानी +बेमतलब की और बेकार है ….. सिर्फ आप अकेले ही है जिन्होंने क्रिकेट के असली आनंद का आभास करवाया है मैच होने से पहले ही , हम सभी की यही कामना और शुभकामनाये रहेंगी की भारतीय खिलाड़ी अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन करे जोकि वोह हमेशा ही पकिस्तान के खिलाफ करने की पुरजोर कोशिश करते भी है …. आपका बहुत -२ आभार

अजय कुमार झा के द्वारा
August 1, 2012

भारत पाक का क्रिकेट मैच करा के दोस्ती कराने को वो हो रहे थे तैयार , बिना बम धमाके हाय देश का एक भी न बीते रे त्यौहार , न बीते रे त्यौहार तोहरी थू थू रे सरकार , अबू और कसाब को पालते रहो न यार

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    अजय कुमार जी ….. सादर अभिवादन ! आप जैसे बुद्धिजीवी की चिंता बिलकुल जायज है और उठाये गए सवाल तथा प्रकट की गई चिंताए भी ….. आपकी बातो से सहमत हूँ लेकिन सरकार कों अपने “व्यापक दीर्घकालीन हितों” के तहत जो उचित लगता है वोह तो वोही करती है ….. आप और मैं जनता जनार्दन अपनी चिंता ही प्रकट कर सकते है ….. हार्दिक आभार

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
August 1, 2012

बिना राजनीति के तो आज सांस लेना भी दूभर है तो खेल क्या है बच्चा पैदा होते ही राजनीति किस के ब्लाक में या किस थाणे में किस देश में किसको वोट करेगा वोट के टाइम तो सब अपने मरने पर उसकी सीमा में ….अमेरिका की कूटनीत और दूरदर्शिता बहुत आगे की रहती है और दबाव बहुत कारगर अब बेचारे भूखे प्यासे न माने तो खाएं क्या ?? हमारे देशभक्त जवानों को सिर्फ तीन चीजें ही उतेजित और रोमांचित करती है – कैट और करीना सरीखी हीरोइने + प्रियजनों के भेजे हुए सन्देश और भारत पाक के बीच क्रिकेट मैच में भारत की जीत ….. भारत पाक के बीच मैच में जीतने पर उनको ऐसा महसूस होता है की जैसे उनकी तरफ से भारत के ग्यारह महायोद्धा जंग को जीत रहे है ….. बहुत सुन्दर उनको ये सब खुशियाँ मुबारक हो गुरुदेव हम तो सब सहते ही रहेंगे बस चली ट्रेन चली फिर क्रिकेट का टिकेट मिलेगा खेल शुरू आधे वहीं से गायब ….चाले छे संसार छे ……….हंसी व्यंग्य के तडके के साथ हिट मूवी ये भी भ्रमर ५

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    आदरणीय भ्रमर जी ….. सादर प्रणाम ! आप तो ज्ञानी है शायद महा ज्ञानी भी !!! –हा हा हा हा हा हा इसलिए इस बात कों भली भांति जानते ही होंगे की सभी रिश्ते नाते और व्यवहार स्वार्थ+अपना स्व हित साधने तक ही सही +प्रिय और जरूरी होते है ……आजकल के जमाने में किसी से कुछ आशा करना +बदले में कुछ चाहना व्यर्थ है …. आपकी चिंता बिलकुल जायज है हमारे प्रशाशन और तंत्र में काली भेड़े भी है ….. जिनकी नीयत में खोट के चलते पकिस्तान से मैच देखें आये हुए अधिकाँश दर्शक गुम हो जाते है …..इस समस्या का इलाज तो सरकार कों गम्भीरता से खोजना ही चाहिए …. आपकी देशभक्त सोच कों सलाम यूँ ही हँसते रहिये मुस्कराते रहिये और खुशियों कों बांटते रहिये दिल की सभी तहों से शुक्रिये सहित जय श्री कृष्ण

phoolsingh के द्वारा
August 1, 2012

बेहतरीन लेख………सर, ……………..फूल सिंह

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    प्रिय फूल सिंह जी …. सप्रेम नमस्कार ! लेख कों पसंद करने और अपना कीमती समय देने के लिए आपका हार्दिक शुक्रिया

R K KHURANA के द्वारा
August 1, 2012

प्रिय राज जी, पाकिस्तान हमेशा ही भारत के साथ धोखा करता आया है ! उस पर विश्वाश करना बेवकूफी है ! खेल भावना से खेलना तो अच्छी बात है लेकिन पाकिस्तान का विश्वाश नहीं किया जा सकता ! अच्छा लेख ! बधाई राम कृष्ण खुराना

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    आदरणीय चाचा जी ….. सादर प्रणाम ! हमारे पाक दामन पड़ौसी पाकिस्तान से भरौसे पर खरा उतरने की उम्मीद करना उससे धोखा खाने से पहले ही खुद कों खुद ही धोखा देने के समान है और खेल भावना का तो किसी भी पाकिस्तानी खिलाड़ी में होना कुदरत का करिश्मा +अजूबा ही कहा जाना चाहिए …. लेकिन हम इस मामले में कुछ कर भी क्या सकते है सिवाय सब कुछ होता हुआ देखते रहने के ….. चाहे अपने देश में हो या फिर किसी तीसरे देश में ही क्यों न हो लेकिन खेल तो हर हाल में जारी रहने ही चाहिए –अगर दबाव की राजनीति ही करनी है तो व्यापार पर रोक लगानी चाहिए आपके अमूल्य विचारों के लिए आपका हार्दिक आभार

yamunapathak के द्वारा
August 1, 2012

राज कमल जी इस ब्लॉग में क्रिकेट और व्यापार संबंधों की तुलनात्मक टिप्पणी बहुत ही स्पष्ट रही है.पाक उद्घोषिका पर टिप्पणी सुन्दर व्यंग है. बेहतरीन लेख

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    ******************************************************* आदरणीय यमुना जी ….. सादर अभिवादन ! आप तो हमेशा ही उत्तम लिखने वाली एक उत्कृष्ट लेखिका है और जानती है की संतुलन बनाना तलवार की धार पर चलने के समान कितना मुश्किल काम होता है ….. इस लेख से आपका कुछ मनोरंजन भी हो सका जान कर खुशी हुई …. आपके समर्थन और लेख कों पसंद करने के लिए तहेदिल से शुक्रिया ….

Ramesh Bajpai के द्वारा
August 1, 2012

” प्रियजनों के भेजे हुए सन्देश और भारत पाक के बीच क्रिकेट मैच में भारत की जीत …..” प्रिय श्री राज जी भारत की विजय हर लम्हा बहुत सुकून भरा होता है | रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाओ सहित |

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    आदरणीय वाजपेयी जी …. सादर प्रणाम ! जीत किसी भी खेल में मिले वोह आनंददायी तो होती ही है ….. हमारे फौजी जवान अगर कुछेक पल खुशी के भारत की पकिस्तान पर क्रिकेट में जीत में तलाशते है +महसूस करते है तो यह उनकी अपनी मानसिकता है …… आपको भी “रक्षा के बन्धन” की हार्दिक शुभकामनाये हार्दिक आभार सहित

satish3840 के द्वारा
July 31, 2012

राज कमल जी जय श्री कृष्ण / आपकी बात सही हें कि देश के हितों को ताक पर रख कर क्यों किरकेट खेला जाए / सरकार को पकिस्तान के सवभाव को ध्यान में रखना चाहिए / और एक नीति बनाकर देश हित में काम करना चाहिए जेसे कभी इदिरा जी करती थी /

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    आदरणीय सतीश जी ….. सादर अभिवादन ! हमे कुछ बाते ध्यान में रखनी होगी :- *आज दो की बजाय विश्व में सिर्फ एक ही महा शक्ति है –अमेरि़का *भारत में उस समय के दम घोटू माहौल की बजाय वैश्वीकरण की बदौलत उपजा हुआ खुला माहौल है *भारत और पाक परमाणु शक्ति सम्पन्न देश बन चुके है जिनमे की सपने में भी सीधे युद्ध की सम्भावना ना के बराबर है *इंदिरा जी ने कोका कोला कों उसके घर में वापिस पहुंचा दिया था +बंगलादेश के मामले में सिर्फ अपने मन और विवेक की मानी थी आज किस नेता में इतना साहस और विवेक है ? इसलिए हमारे आज के नेता कभी हाँ तो कभी ना की नीति पर चलते हुए दुश्मन देश कों कभी ब्लैकमेल करते हुए तथा कभी उसका समर्थन करते हुए अपने अविवेकपूर्ण फैसलों देश की जनता कों यूँ ही मुर्ख बनाते रहेंगे सादर आभार

Rajesh Dubey के द्वारा
July 31, 2012

अमेरिकी दबाव में क्रिकेट का खेल चिंतनीय हैं. हमारी समीक्षा जो कहे वही करनी चाहिए.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    आदरणीय राजीव जी …. सादर अभिवादन ! हम जनता जनार्दन के चिंता करने से आखिर होगा ही क्या ? हम तो कठपुतलिया है , जैसा हुक्मरान हमको नचाते है –हम बस वैसा ही नाचते है ….. हमारी अपनी कोई पसंद और नापसंद नहीं है ….. कारगिल युद्ध के लिए जिम्मेदार मुशर्रफ कों जब हमारी तब की (अटल जी +आडवाणी जी की )सरकार रेड कारपेट पर स्वागत करते हुए मुर्ग मुसल्लम की लजीज दावतो से देश की जनता कों इस भरम में डालती है की अब तो बस कश्मीर समस्या का हाल निकला की निकला …. तब हमारे मीडिया की बदौलत हम सभी भेड़चाल चलते हुए उन न पुरे हो सकने वाले सपनो कों देखने में जुट जाते है और यथा राजा तथा प्रजा वाली उक्ति कों चरितार्थ करने में लग जाते है ….. आपका बहुत -२ आभार

shashibhushan1959 के द्वारा
July 31, 2012

आदरणीय बॉस ! जय हिंद ! पाकिस्तान जैसे कृतघ्न, मौकापरस्त और आतंकी देश से किसी भी तरह का कोई सम्बन्ध नहीं रखना चाहिए ! सादर !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    प्रिय शशिभूषण जी …. सप्रेम नमस्कारम ! क्षमायाचना सहित कहना चाहूँगा की हम उलटी तरफ क्यों चलते है ? पकिस्तान के साथ बस सेवा और रेल सेवा निरंतर चालू है , जबकि उनके द्वारा आम नागरिको के भेष में आंतकी भी आसानी से आ सकते है ….. जब सरकार के उन फैसलों पर हमे कोई ऐतराज़ नहीं है तो फिर खेल संबंधो की बहाली पर ही क्यों …. खेलों की बजाय उसके साथ हर तरह के व्यापार पर प्रतिबन्ध की मांग क्यों नहीं की जाती ?…… अगर रिश्ते समाप्त करने है तो पूरी तरह से हो नाकि आधे अधूरे ….. क्रिकेट कों जब जी चाहा खेल लिया जब मन में आया बन्द कर दिया ….. उनके क्रिकेट बोर्ड की आर्थिक रूप से कमजोरी से क्या उस नापाक देश के मजबूत इरादों में कोई कमी आ सकती है , कभी नहीं ….. जबकि हम व्यापार द्वारा उसकी आर्थिकता कों मजबूती प्रदान करते चले जा रहे है …. हार्दिक धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
July 31, 2012

इसे जरूर पढ़े तथा अपनी प्रतिक्रिया दें- http://ausafmalik01.jagranjunction.com/?p=453किस राम राज्य की आशंका करते हैं हम

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    मेरे यक्ष प्रश्नों का जवाब अभी तक भी मुझको नहीं मिला है आपसे …. बिना उनको लिए हुए मेरे सामने मत आइयेगा दुबारा ….

    dineshaastik के द्वारा
    August 7, 2012

    परम आदरणीय, आपके अयक्ष प्रश्न के अनेक उत्तर दिये हैं। वह भी हिन्दी में। यदि आपकी समझ में न आयें तो इसमें उन उत्तरों का दोष नहीं है। उत्तर इतने हैं कि प्रश्न अस्तित्वहीन हो जायगा। चूँकि आपकी प्रश्न की मंशा दूषित है, अतः उत्तर समझ पाना मुश्किल है। हाँ मेरे द्वारा  पूर्व में आपसे पूँछे गये कई प्रश्न अनुत्तरित हैं। और संभवतः आपकी मानसिकता की  वजह से अनुत्तरित ही रहेंगे। मैंने आपके प्रश्न के संबंध में भी प्रश्न पूछे थे। वह अनुत्तरित क्यों हैं यह भी एक प्रश्न है। आपका प्रश्न नास्तिकता  का घोतक है। प्रथम आस्तिक बनिये। आपको अपने प्रश्नों में ही उत्तर नजर आ जायगा। यह कैसी आस्तिकता जो नास्तिकता से भरी हो। आपके मिॆथ्या आरोप आपकी नास्तिकता का प्रमाण हैं। 

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 30, 2012

aadarniy raaj kamal jii, saadar abhivaadan हर सौदा लाभ के लिए किया जाता है. अब किसे लाभ पहुँचता है, जग जाहिर है. लेख हेतु बधाई. शायद भोलू का रिश्ता अब हो जाए,

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    पूज्यनीय कुशवाहा जी ….. सादर प्रणाम ! आपका कहना शत प्रतिशत ठीक है ….. भारत में इतनी कुव्वत नहीं की अपनी शर्ते मनवा सके +कुछ सोदेबाज़ी कर सके …. इसलिए पूरी संभावना तो यही बनती है की बिना किसी शर्त के खेल सम्बन्धों कों बहाल किया गया है …..अगर सरबजीत की फांसी कों ही रुकवा लिया जाता तो भी कुछ तसल्ली की बात होती ….. आपने भोलू की शादी की सम्भावनाओं के बारे में बताया है जान कर मन हर्षित हुआ ….. आपका स्वास्थ्य अब कैसा है पता दीजियेगा आपकी सक्रियता और साहित्य के प्रति आपका समर्पण सच में ही प्रेरणादायक है ….. मैं आपसे यही गुजारिश करना चाहता हूँ की यहाँ पर हम सभी स्वार्थी है …. आप इतने लंबे कमेंट्स की बजाय सिर्फ दो शब्द आशीर्वाद के ही कह दिया करे तो भी काफी है हमारे लिए ….. इससे जो समय बचेगा उसमे आप कोई किताब वगैरह लिख सकते है …… आपका जितना भी आभार प्रकट किया जाए कम ही होगा ….. श्रदा सहित नमन

Chandan rai के द्वारा
July 30, 2012

राजकमल जी , खेलों से ज्यादा उदार तो हम अपने राजनैतिक और आतंकी मुद्दों पर है , खेल न होने देने से कोई फ़ायदा या नुक्सान नहीं दिखता ! हमे पहले अपना पक्ष राजनैतिक और आतंकी मुद्दों पर कडा रुख अपनाने की है ! खेल को इन मुद्दों से जोड़ना उचित नहीं ! या यूँ कह लीजिये की हम हमेशा भटके ही रहते है अपने नियमन के साथ , आपके इस लेख का स्तर बेहद उम्दा है , राजनीती से सम्बंधित होकर भी लेख कंही भी नीरसता का बोध नहीं कराता

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    प्रिय खुशबूदार चन्दन जी ….. सादर अभिवादन ! अगर खेलों कों दुबारा शुरू ही करना था ,भले ही दबाव में ही सही ….. तो इनको बन्द करके वाहवाही लेने की जरूरत क्या थी ….. कसाब जैसे आंतकियो कों फांसी देकर पहले कुछ “कटुता” तो कायम की जाती ,फिर बाद में आपसी सदभावना कायम करने के लिए चाहे कितना ही क्रिकेट खेल लिया जाता , तब हमको आपति की बजाय खुशी ही होती ….. आपको यह लेख रोचक लगा तो इसका श्रेय आपके नजरिये कों जाता है…. लेख कों पसंद करके उत्साह बढाने के लिए तहेदिल से शुक्रिया

manoranjanthakur के द्वारा
July 30, 2012

बहुत ही टिपिकल विषय पर सही टिप्पणी ये सोच व कलम का कमाल है पाक के साथ सम्बन्ध के पीछे सिर्फ पैसा है बढ़िया बहुत बधाई

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    आदरणीय मनोरंजन ठाकुर जी …. सादर अभिवादन ! इसमें पैसे का रोल उतना नहीं है जितना की हमको नजर आता है …. हम पकिस्तान के साथ व्यापार करके उसकी आर्थिकता कों मजबूती प्रदान कर ही रहे है निरन्तर ….. जब देश आर्थिक रूप से कुछ हद तक अगर मजबूत हो तो उसका एक खेल विभाग अगर कंगला भी हो तो कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है ….. यह अलग बात है की अब उसका क्रिकेट बोर्ड भी मालामाल हो जाएगा ….. आप इस बात कों क्यों भूलते है की अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने विश्व कप के पकिस्तान में ना हो सकने वाले मैचों के लिया उसको पूरा भुगतान किया था …..किसी तीसरे दूसरे देश में जाकर भी पाकिस्तान क्रिकेट थोडा बहुत खेल ही रहा है …. लेकिन सबसे ज्यादा रंज उनको आई.पी.एल . तथा भारत के साथ मैच न खेल सकने से था जोकि अब दूर होने वाला है ….. हार्दिक आभार

nishamittal के द्वारा
July 30, 2012

क्रिकेट राजनीति पर जानकारी दी आपने .व्यक्तिगत रूप से पाकिस्तान के सुधरने तक किसी भी प्रकार के सम्बन्धों के पक्ष में मैं नहीं हूँ,इस विषय में अपने सम्बन्धित लेख में लिख चुकी हूँ.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    आदरणीय निशा जी ….. सादर प्रणाम ! पाकिस्तान कुत्ते की टेढ़ी पूंछ की भाँती है ….. मेरा ऐसा मानना है की जब यह फँसा हुआ होता है तो आपकी हरेक बात मानेगा लेकिन आपकी गिरफ्त से आजाद होते ही अपने असली रंग में तुरंत आ जाएगा ….. इसकी फितरत कुछ ऐसी है की इसको गर्म तवे पर बिठा कर अगर इससे कुछ वायदा लिया जाए तब भी बाद में यह उससे पूरी तरह से मुकर सकता है …… इसलिए इसके सुधरने की आशा करना सपने देखने के समान है ….. अब यह जैसा भी हमारा (अलग हुआ बाजू 1947 में ) पड़ोसी है ,इसको तो हम क्या भगवान भी नहीं बदल सकते ,इसलिए सावधानीपूर्वक जितने भी कम से कम सम्बन्ध बनाने जरूरी हो उतने ही इससे बनाए जाने चाहिए …. लेकिन फिर कहूँगा की खेल इस सबसे अछूते ही रहने चाहिए ….. हार्दिक धन्यवाद

akraktale के द्वारा
July 30, 2012

आदरणीय राजकमल जी सादर नमस्कार, आपके विचारों से पूर्ण सहमति है कि खेलों को राजनीति से ना जोड़ो. यदि राजनीति ही करनी है तो पहले कसाब को फांसी दो, फिर आपसी संबंधो पर चर्चा करो. खेलों का विरोध तो झूठी वाह वाही है. मगर आर्थिक गुलाम और अंग्रेजी का गुलाम देश कभी गुलामी कि मानसिकता से ऊबर ही नहीं पाया. गुपचुप अंग्रेजी आदेश आता है और हमारे देश के कर्णधार काम में व्यस्त हो जाते हैं और सही कहा आपने हम तमाशबीन.साधुवाद.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    August 5, 2012

    आदरणीय अशोक जी ….. सादर अभिवादन ! ओलम्पिक की खेल भावना तो यही कहती है की दो युद्ध रत देशो में भी खेल होने चाहिए …. लेकिन इसका यह मतलब नहीं की राजनीती में भी हम खेल भावना कों शामिल कर ले …. जहाँ पर कठोर निर्णय लेने चाहिए , लिए जाने चाहिए ….. कसाब जैसे आंतकियो कों फांसी देकर पहले कुछ कटुता तो कायम की जाती ,फिर बाद में सदभावना कायम करने के लिए चाहे कितना ही क्रिकेट खेल लिया जाता , तब हमको आपति की बजाय खुशी ही होती ….. आपके सुलझे विचारों के लिए धन्यवाद

    jlsingh के द्वारा
    August 7, 2012

    आदरणीय गुरुदेव, सादर अभिवादन! सर्वप्रथम आपके इस आलेख को दैनिक जागरण में छपने के लिए बधाई! मैंने काफी पहले इस लेख को पढ़ा था, अपनी प्रतिक्रिया न देखकर हैरान हूँ! इधर अपने घर के नेटवर्क, और तेलेफोने लाइन की गडबडी से परेशान हूँ! कभी कभी कई घंटे लग जाते हैं और नेटवर्क से सम्बन्ध नहीं बना पाता हूँ. टेलीफोन लाइन की गड़बड़ी मुख्य कारण है बीएसएनएल की सेवा भावना तो आप भी समझते ही होंगे. लगभग रोज ही शिकायत करता हूँ … रोज ही क्लोज भी हो जाता है समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है! “आपके उपयुक्त जवाब का समर्थन करता हूँ! पर आप भी जानते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच जब भी मैच हुआ है .. संबंधों पर कोई खास असर नहीं पड़ा है! वैसे खेलें, मनोरंजन करें, जनता कम से कम उन समयों में ज्वलंत मामले से दूर रहेगी ! आभार और आदर सहित!


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