RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

सोचो ज़रा हट के

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“यह कैसी आस्तिकता” !!!

Posted On: 26 Jul, 2012 में

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जब मैंने अपने लेख दबंग दरोगा राजकमल शर्मा में एक सनकी ब्लागर का जिक्र किया था तो शायद उस बात को ज्यादातर साथियों ने पसंद नहीं किया था ….. लेकिन बाद में हमारे उस दोस्त की सनक रूपी मर्ज उतना ही बढ़ती गई जितना की उसका इलाज हुआ जिसके परिणामस्वरूप पहले उनकी एक पोस्ट पर बैन  लगा और अंत में जब उन्होंने अपनी सनक जागरण के फीडबैक पर जाहिर की तो उनको अपनी औकात से बाहर जाकर नियम और कायदे के विरुद्ध अनुचित तरीके से आचरण के कारण तथा कानून को अपने हाथ में लेने के कारण बाहर का रास्ता दिखा दिया गया …..

उनकी ही कैटिगिरी के एक और हमारे साथी है दिनेश कुमार जी आस्तिक …… यह भी  उस बहिष्कृत सनकी ब्लागर की तरह ही बर्ताव करते है लेकिन यह उनका थोडा सा सुधरा हुआ रूप है इसलिए खुद ही गर्व से इस बात को मानते है की यह “सनकी” है और इनके लेख “विवादित” होते है …..

इन्होने अपनी एक प्रतिकिर्या में यहाँ तक कह दिया की :-

“मैं भी कृष्ण को महान मानता हूँ
किन्तु उनके कुछ कृत्य मानवीय दृष्टि से क्षम्य नही ं हैं।
हो सकता है कि मेरे विचारों से कोई सहमत न हो किन्तु मैं तार्किक कारणों से अपने
विचारों पर अटल हूँ।

भगवान को कोई ना माने और उनके  अस्तित्व को सिरे से ही नकार दे इसमें ना तो मुझको कोई आपति है और ना की किसी दूसरे को होनी चाहिए ….. लेकिन असली समस्या तब पैदा होती है जब कोई सनकी भगवान के चरित्र और उनके कार्यों पर ऊँगली उठाये ….. मैंने अपने खुद के ब्लॉग पर और बाद में इनके खुद के ब्लॉग पर जाकर भी इनसे उपर्लिखित प्रतिकिर्या के बारे में जानना चाहा की हमे योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण जी के उन कार्यों के बारे में “तर्क सहित” विस्तार से बतलाया जाये जोकि इनकी दृष्टि में अक्षम्य है….. हो सकता है की इनके गरिमापूर्ण उच्च  विचार जान कर हम भी इनके रंग में रंग कर , इनकी तरह भगवान के अस्तित्व को नकारने लग जाए ……

इनके इस  तरह के विचारों को जानने के बाद ही मैंने कह दिया था की जहाँ पर गुरु और  भगवान का अपमान होता हो , वहां  पर जाना घोर पाप की श्रेणी में आता है ….. मैं जानता  हूँ की कमेन्ट हम सभी की बहुत भारी  भरकम कमजोरी बन चुकी है ….. हमारी इसी कमजोरी का फायदा उठा कर कुछ ब्लागर अपने मनमाने और अन्यायपूर्ण विचार हम पर थोपते रहते है …… जब हम महज एक अदद कमेन्ट की एवज में अपनी आत्मा की आवाज और जमीर को दबा सकते है तो हम किस मुंह से भ्रष्ट और रिश्वतखोर नेताओ  और अफसरशाही की आलोचना करते है …..

यहाँ पर हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार जागरण जंक्शन ने दिया है लेकिन उसकी आड़ लेकर कोई हमारी धार्मिक भावनाओं तथा आस्था से खिलवाड़ करने का अधिकारी नहीं बन जाता …..  किसी भी लेखक से अगर उसके लेख और प्रतिकिर्या में व्यक्त व्यक्तिगत विचारों की बाबत कोई  सवाल पाठक द्वारा पूछा जाता है + संदेह प्रकट किया जात है तो उसका उत्तर देना तथा पाठक को पूर्णरूपेण संतुष्ट करवाना लेखकीय धर्म की श्रेणी में आता है …..

मैं उम्मीद करता हूँ की सम्बन्धित ब्लागर भाई टालमटोल की बजाय अपने पक्ष को हम सभी के सामने रखेंगे या फिर अपने अविवेकपूर्ण आचरण तथा धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने के लिए सभी से सावर्जनिक रूप से क्षमा मांगेंगे और आप सभी से भी अपील करता हूँ की कमेन्ट का मोह त्याग कर चीजों को उनके सही परिपेक्ष्य में देखने की कोशिश किया कीजिये …… अपनी कलम की आवाज की आज़ादी को हर हाल में कायम रखिये ….. इसी में हम सबका और इस मंच का भला है + उन्नति है …..

राजकमल शर्मा

“यह कैसी आस्तिकता” !!!

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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 30, 2012

aadarniy राज कमल जी, सादर अभिवादन ये क्या हो रहा है. ये क्यों हो रहा है देश की जरूरत क्या नफरत के बीज क्यों बो रहा है काटना किसे है काट किसे रहा है ज्ञान दीप ज्योति जले कटे तम जो फैला न रहे कोई भूखा ऐसा प्रेम यग्य हो न पड़े सूखा व्यर्र्थ के विवाद में कोन समय खो रहा है नव भारत का निर्माण करें

ANAND PRAVIN के द्वारा
July 29, 2012

आदरणीय गुरुजनों को सादर प्रणाम अनायास टकराओं से नीरसता आती है ………..हमें विवादों को छोड़ देना चाहिए दिनेश सर को मैंने भी पढ़ा है ……..उनका आशय या मंशा गलत नहीं होती हाँ विचारों में टकराव हो सकता है इसलिए गुरुदेव से अनुरोध है की मंच के बहुत ही पुराने सदस्य होने के नाते इन जैसे विवादों से न सिर्फ बचे बल्कि सभी को बचाएं …………. सकारात्मक पहल अत्यंत आवश्यक है अन्यथा यह मंच भी फेसबुक की तरह ही दिखने लगेगा

pritish1 के द्वारा
July 29, 2012

समय आपसी मतभेद का नहीं है…….यह वो समय है जब हमें एक होना है……….सरकार को अनशन से अंतिम चेतावनी………….9 अगस्त दिल्ली चलो ऐतिहासिक निर्णायक आन्दोलन……..! जय हिंद जय भारत……!

akraktale के द्वारा
July 29, 2012

आदरणीय राजकमल जी सादर नमस्कार, पिछले कुछ समय से जब कुछ नए ब्लोगर्स मंच पर आये और उन्होंने हर बात पर अपनी विरोधी विचारधारा में तर्क प्रस्तुत करना शुरू किया तब से ही लगाने लगा था की जागरण को इस मंच पर एक और केटेगरी “बहस” की जोड़ देना चाहिए ताकि ऐसे विषय जिन पर बहस होने की संभावना है वह उस श्रेणी में डाले जाएँ. जिससे की यहाँ पर बार बार इस तरह की समस्या से दो चार ना होना पड़े. और सभी अपनी बात स्वतन्त्रता से कह सकें.

mparveen के द्वारा
July 28, 2012

राजकमल जी नमस्कार, ऐसे मंच पर विचारो का टकराव तो ठीक है लेकिन व्यक्तिगत टकराव न ही हो तो सही है ! हम सब अपने विचार प्रकट करते हैं कोई उससे सहमत होता है कोई असहमत ! हम चाहे किसी भगवान् को माने या ना माने लेकिन किसी भी इष्ट देव के विरुद्ध कुछ अपमानजनक न ही कहे तो ठीक है क्यूंकि इससे किसी की भावनाओ को ठेस पहुँचती है और हम किसी को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं लिखते ये हमें अवस्य ध्यान में रखना चाहिए …. धन्यवाद ….

santosh kumar के द्वारा
July 27, 2012

आदरणीय गुरुदेव ,..सादर प्रणाम दोहरे शतक की बहुत बहुत बधाई ,.सादर

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 27, 2012

    प्रिय संतोष जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! मेरी दिली तमन्ना थी की इस संख्या पर कोई धार्मिक पोस्ट होती , लेकिन सिर्फ चाहने भर से कहीं कुछ होता है क्या ?…. खैर अगली बार सही आपकी मुबारकबाद के लिए तहेदिल से आभारी हूँ

shashibhushan1959 के द्वारा
July 27, 2012

आदरणीय बॉस, जय हिंद ! हमलोग अपने विचार यहाँ रखते जरुर हैं पर हम न नेता हैं, न पीर-औलिया हैं, न प्रख्यात समाज सुधारक हैं ! हमलोगों का दायरा और प्रभाव सीमा बहुत सिमित है ! न दिनेश जी के कहने से लोग बदल जायेंगे, न मेरे या आपके कहने से ! हाँ, अतर्कपूर्ण या संवेदनशील धार्मिक भावनाओं को ठेस पंहुचाने वाली बात कहने से भरसक बचना चाहिए ! रिश्तों की डोर बहुत संवेदशील होती है ! जिनके प्रति हमारे रोम-रोम में श्रद्धा और आदर का भाव भरा हो, चाहे वह ईश्वर हों, माता हों, पिता हों, बहन हो, या अन्य जो कोई भी हो,उनकी अवहेलना हम सहन नहीं कर पाते ! आदरणीय दिनेश जी को या किसी को भी ऐसी बातों से बचना चाहिए ! क्षमा प्रार्थना सहित ! सादर !

    dineshaastik के द्वारा
    July 27, 2012

    आदरणीय शशि भूषण जी, सादर नमस्कार। आदरणीय राजकमल जी की भावनाओं का तो मुझे ज्ञात नहीं है, अपितु उनकी सोच  निश्चित ही अधार्मिक है। उनकी मंशा पूर्णतः धर्म के विरुद्ध एवं ईश्वरीय व्यवस्था के विपरीत है।

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 27, 2012

    प्रिय शशिभूषण जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! आपने सही कहा है अपने इष्टदेव और आराध्य देव को अपशब्द कहने वाले को इज्जत मान देना उसको सहना खुद की नजर में दोषी बनना और अपनी अंतरात्मा के सामने अपराधी बनने के समान है ….. अगर यह बात मामूली है तो दिनेश जी अपनी प्रतिकिर्या मुस्लिम पैगम्बरों के खिलाफ करके उसका अंजाम देख ले इनको अपनी गलती का तुरंत पता चल जायेगा क्योंकि हिन्दू जिन बातो को सहन कर जाते है मुसलमान भाई उनका मुंहतोड़ जवाब देते है ….. हकीकत तो यह है की इनके 13 JULY को पोस्ट लेख :हम ऐसे खुदा को क्यों माने पर आदरणीय निशा जी के कमेन्ट से सहमती जतलाने पर ही इन्होने अपना विवेक खो कर मेरे लेख “अंडर अचीवर” प्रधानमंत्री – अयोग्यता का प्रमाण या गरिमा के साथ खिलवाड़ -राजकमल प्रोडक्शन” पर बेसिर पैर के तमाम प्रश्न कर डाले थे जिनका की मैंने तर्कपूर्ण आदर सहित उत्तर दे दिया था जबकि यह उन उत्तरों को जानने और प्रश्न करने का हक भी नहीं रखते है ….. उसके तीन कारण है *पहला तो यह की मेरा वोह लेख जागरण द्वारा टॉप ब्लॉग में शामिल किया गया था और उस लेख पर सिर्फ अकेले इनकी ही आलोचनात्मक प्रतिकिर्या प्राप्त हुई थी जिसका की मैंने शालीनता से जवाब भी दे दिया था इसका मतलब की यह जागरण की बोद्धिकता पर संदेह कर रहे है *दूसरे यह जब खुद से पूछे गए प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहते तो किस नैतिकता के तहत यह दूसरों से बेसिरपैर के अनगनित प्रश्न पूछने बैठ जाते है ….. इससे साबित हो जाता है की यह वास्तव में ही किसी मानसिक रोग से ग्रस्त है , लेकिन उसका खामियाजा हम क्यों भुगते ?…. *तीसरे यह मेरे कांग्रेस समर्थक होने के कारण अपन कांग्रेस विरोध प्रकट करने के लिए मेरे ब्लॉग पर अपनी दूषित मानसिकता लेकर जब जी चाहे अर्नगर्ल आरोप लगाने चले आ जाते है शुरुआत में आदरणीय कह कर इनको दूसरे के मुंह पर तमाचा मारने का जैसे अधिकार ही मिल जाता है और इनको माफीनामा भी ….. हार्दिक आभार सहित

    jlsingh के द्वारा
    July 28, 2012

    आदरनीय गुरुदेव, दिनेश जी, सादर अभिवादन! मैं भी शशिभूषण जी के विचारों से सहमत हूँ. विवाद को बढ़ने से मंच की शालीनता बाधित होती है. हम सभी अपने अपने विचार प्रकट करते हैं … और लोग अन्य माध्यमों से करते हैं … इसमें किसी को कोई बाध्यता तो नहीं है न कि हम आपके विचरों से सहमत ही हो जाएँ …. आप सभी काफी कुछ अध्ययन कर कुछ लेखन सामग्री एकत्रित करते हैं अगर आपको उचित लगे तो प्रतिक्रिया दीजिये नहीं तो चुप रहिये! मंच को शालीन और समरस रहने दीजिये ऐसे भी बहुत सारे लोग अब नाता तोड़ने लगे हैं या चुप चाप देख रहे हैं …. दिनेश जी से आग्रह करूंगा कि वे धर्म या भगवान के बारे में जितना लिखना था लिख चुके हैं …. अगर बाकी लोगों को धर्म में या भगवान् में आस्था है तो उन्हें रहने दीजिये! विचार थोपना तो फिर वही अधिनायकवादी मानसिकता हो गयी न! आप सबसे मेरा सादर निवेदन है कि आपसी मतभेद समाप्त कर सकारात्मक लेखन में लग जाएँ! आभार सहित!

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 28, 2012

    अपने धर्म और भगवान के खिलाफ अनुचित सुनने वाला अधार्मिक है और ऐसी प्रतिकिर्या करने वाला धार्मिक , चलो अच्छा हुआ की आज इस नई परिभाषा से भी रूबरू होने का सुअवसर मिल ही गया आस्तिक जी की बदौलत

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 28, 2012

    आदरणीय जवाहर लाल जी …… सादर अभिवादन ! आप खुद ही सोचिये और बतलाइये की इसमें विवाद आखिरकार है कहाँ ? और क्यों कर पैदा हुआ ? मुझको आस्तिक जी की एक प्रतिकिर्या पर आपति थी मैंने उसकी बाबत इनसे पहले अपने ब्लॉग पर +फिर खुद इनके ब्लॉग पर तथा बाद में हार कर बाद में दूसरों के ब्लॉग पर भी पूछा लेकिन इनको ना तो कोई शर्म है और ना ही किसी जिम्मेवारी का एहसास , अगर यह पहली बार ही मेरे ब्लॉग पर मेरे संदेहों का निवारण कर देते तो इस लेख को लिखने की नौबत ही क्यों आती ….. और सबसे ज्यादा दुखद बात तो यही है की अभी तक इन्होने मेरे प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया है ….. जब विवादित प्रतिकिर्या इन्होने ही की है तो उसको तर्क की कसौटी पर सही साबित करने की जिम्मेवारी भी इनकी ही बनती है ….. उसकी बजाय यह कह रहे है की अगर उत्तर जानना है तो मेरे लेखो को पढ़े ….. यह कैसा बेशर्मी भरा गैर जिम्मेदाराना बयान है ….. इनके लेख भी इन्होने खुद ही लिखे है और वोह विवादित प्रतिकिर्या भी इन्होने खुद ही की है …. हमारे पास इतनी मगजमारी का समय ही कहाँ है की इनके विवादित सभी लेख पढ़े और उसमे उत्तर ढूंढे ….. उसकी बजाय यह खुद ही अपना स्पष्टिकरण क्यों नहीं दे देते एक लेख के द्वारा ,अपनी पोजिशन को साफ़ रखने के लिए ….. किसी भी ब्लागर की भगवान के प्रति अविवेकपूर्ण प्रतिकिर्या के बारे में जानना और विरोध प्रकट करना हमारा मौलिक अधिकार है और उसके द्वारा उत्तर देना नीतिगत और नैतिकता रूपी बाध्यता भी ….. लेकिन यह तो तभी होगा अगर यह अपने फर्ज को समझे और उचित आचरण करे अपने धर्म और भगवान के खिलाफ अनुचित सुनने वाला अधार्मिक है और ऐसी प्रतिकिर्या करने वाला धार्मिक , इस नई परिभाषा से भी रूबरू होने का सुअवसर मिल ही गया आस्तिक जी की बदौलत ….. अप इसी से अंदाजा लगा सकते है की इनकी सोच और विचार कितने दूषित है …. और विवाद तो ना कोई था और ना ही है बस इनके द्वारा विवादित प्रतिकिर्या पर इनके विचार विस्तृत रूप से जानने की इच्छा है ….. जो बात आपने कही है की जो ब्लागर चुपचाप देख रहे है , उनके बारे में क्या कहा जाए , जो सच को सच नहीं कह सकते , अपने प्रभु के खिलाफ कुछ भी सुन सकते है , वोह भी सिर्फ इसलिए की उनको उक्त व्यक्ति द्वारा अपने लेखो पर प्रतिकिर्या मिलती है …. ऐसे बेगैरत +सोई हुई आत्मा वाले+प्रतिकिर्या के एवज में अपनी आवाज बेचने वाले साथियो की मुझको कोई परवाह न पहले थी और न ही अब है …. मुझको तो दुःख हो रहा है की इनके लिए मैंने क्यों इतनी लड़ाइयां लड़ी , और जीती भी ….. खैर जैसी जिसकी सोच और ज़मीर –उसमे मैं और आप तथा दूसरा कोई कुछ क्या कर सकता है …. आपकी नेक सलाह के लिए हार्दिक आभारी हूँ आपका

Santosh Kumar के द्वारा
July 26, 2012

आदरणीय गुरुदेव ,.सादर प्रणाम विवाद व्यक्ति को पहचान जरूर देते हैं ,…श्री दिनेश जी सभी धर्मों की बुराइओं को दूर करना चाहते हैं ,.इस प्रयास में आलोचना ज्यादा हो जाती है ,..मैंने भगवान् श्री कृष्ण जी के विषय में उनके विचार नहीं पढ़े हैं फिर भी यदि आलोचना की है तो संतुष्ट करना उनकी जिम्मेदारी भी है ,..अनिल भाई के विषय में यही कहूँगा की वो अच्छे इंसान हैं ,.. मंच पर किसी गलती के लिए उनका निष्कासन गलत है ,..वो अच्छे लेखक हैं,.. चाहूँगा की उनका निष्कासन समाप्त हो और वो नियमित और संयमित रूप से लिखते रहें ,.कलम की आजादी को हर हाल में कायम रखना चाहिए ,….सादर आभार सहित

    dineshaastik के द्वारा
    July 27, 2012

    आदरणीय संतोष जी, सादर नमस्कार, आपके विचारों से सहमत हूँ, लेकिन आदरणीय राजकमल जी का तरीका गलत है और उद्देश्य भी अनैतिक। मैंने इसके इससे पहिले के आलेखों की आलोचना की थी। उसी का आक्रोश निकालने के लिये यह इस तरह की चालें चल रहें है। इनका पिछला आलेख जो काँग्रेस से समर्थन में लिखा गया था, पूर्णतः अतार्किक था। कृपया आप भी पढ़े और निर्णय करें कि क्या मैं जो कह रहा हूँ वह सत्य है या नहीं। यदि आपको लगे कि मैं गलत हूँ तो आप जो सजा कहेंगे, मैं स्वीकृत करूँगा।

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 27, 2012

    प्रिय संतोष भाई ….. सप्रेम नमस्कारम ! अलीन जी ने कभी भी किसी ब्लागर का इस मंच से जाना गंवारा नहीं किया था …. इसलिए उनके चले जाने का मुझको भी दुःख है ….. अपना आखिरी आलेख उन्होंने फोल्ली वाईस मैन के खाते से लिखा था …. उस पर मैंने उनको जो सलाह दी थी उसको उन्होंने डिलीट कर दिया था …. जागरण द्वारा उनको सावर्जनिक रूप से अपनी गलती के लिए माफीनामे वाला ब्लॉग लिखने पर ही उनकी वापसी संभव है ….. अलीन जी के जाने का कारण भी आस्तिक जी ही है ….. इन दोनों ने अपनी अजीब मानसिकता के कारण ना केवल साथी ब्लागरों को बल्कि जागरण जंक्शन को भी बार बार संकट में डाला है ….. वोह आस्तिक जी की अविवेकपूर्ण प्रतिकिर्या ही थी जिसका की अलीन जी ने फीडबैक पर जागरण की तरफ से खुद ही जवाब दे दिया था जिसके कारण उनको इस मंच पर से निष्काषित होना पड़ा जिसका की मुझे भी बहुत दुख है ….. आप भी मेल करके देखिये , क्या पता आपकी बात को मान ले हकीकत तो यह है की इनके 13 JULY को पोस्ट लेख :हम ऐसे खुदा को क्यों माने पर आदरणीय निशा जी के कमेन्ट से सहमती जतलाने पर ही इन्होने अपना विवेक खो कर मेरे लेख “अंडर अचीवर” प्रधानमंत्री – अयोग्यता का प्रमाण या गरिमा के साथ खिलवाड़ -राजकमल प्रोडक्शन” पर बेसिर पैर के तमाम प्रश्न कर डाले थे जिनका की मैंने तर्कपूर्ण आदर सहित उत्तर दिया था जबकि उन उत्तरों को जानने और प्रश्न करने का यह कोई हक भी नहीं रखते है ….. उसके तीन कारण है *पहला तो यह की मेरा वोह लेख जागरण द्वारा टॉप ब्लॉग में शामिल किया गया था और उस लेख पर सिर्फ इनकी ही आलोचनात्मक प्रतिकिर्या प्राप्त हुई थी जिसका की मैंने शालीनता से जवाब भी दे दिया था इसका मतलब की यह जागरण की बोद्धिकता पर संदेह कर रहे है *दूसरे यह जब खुद से पूछे गए प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहते तो किस नैतिकता के तहत दूसरों से बेसिरपैर के अनगनित प्रश्न पूछने बैठ जाते है ….. इससे साबित हो जाता है की यह वाकई में ही मानसिक रोग से ग्रस्त है *तीसरे यह मेरे कांग्रेस समर्थक होने के कारण अपन कांग्रेस विरोध प्रकट करने के लिए मेरे ब्लॉग पर अपनी दूषित मानसिकता लेकर जब जी चाहे अर्नगर्ल आरोप लगाने चले आ जाते है धन्यवाद

D33P के द्वारा
July 26, 2012

नमस्कार जी आपके विचार उत्तम है ……विचार व्यक्त करने का अधिकार हमारे पास है, पर हमारे पास इसकी मर्यादा की सीमा भी होनी चाहिए ! किसी की प्रतिक्रिया हमें हौसला देती है पर जहा तक किसी बात का विरोध हो तो तर्क सम्मत होना जरुरी है !छल देवताओ ने भी किये जिनके उदाहरण हमे इतिहास में मिल जायेंगे पर वो सर्व भलाई के लिए किये गए ………. अभी लिखने लगी तो लिखती चली जाउंगी पर ऑफिस जाना है !आपका आभार मेरी रचना ” सिर्फ एक शब्द ” अभी तक आपकी प्रतिक्रिया के इंतज़ार में है

    dineshaastik के द्वारा
    July 27, 2012

    आदरणीय दीप्ति जी यह वो राजकमल जी नहीं हैं जो आप समझ रहीं हैं। यह कोई फर्जी आई डी बनाकर मंच पर आतंक फैलाने वाले राजकमल जी  के बहुरूपियें हैं। यह कभी बम्ब बोल के नाम से लिखते हैं, कभी काले के, कभी बोल बम्ब के, और न जाने कितने नामों से। मैने कभी किसी ब्लॉगर के ब्लॉग पर किसी संदर्भ में कोई प्रतिक्रिया दी होगी। यह फर्जी राजकमल जी उस प्रतिक्रिया को कहीं से ढ़ढ कर लाये हैं केवल मुझे मानसिक रूप से प्रताडित करने के लिये और यह साबित करने के लिये वह एक बड़े सनकी हैं, जिसके पीछे पड़ जाते हैं उसे मंच से बेदखल करके ही रहते हैं। चूंकि मेंरी सत्य में आस्था है  और मैं सत्य के पथ से नहीं डिगूँगा। यह फर्जी राजकमल जी जिन प्रश्नों का उत्तर खोज रहें हैं वह मेरी कई पोस्टों में उपलब्ध है। इनका पूछने का जो ढ़ंग है वह त्रुटि पूर्ण है। 

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 27, 2012

    आदरणीय दीप्ती बहिन ….. सादर अभिवादन ! आपने बिलकुल ठीक कहा है देवताओं के श्राप में भी कोई भला ही छुपा हुआ होता है जैसे *विश्वकर्मा जी को मिला श्राप नल और नील के जन्म का कारण बना *माता अंजना जी को मिला श्राप उनके अगले जन्म में हनुमान जी की माता बनने में सहायक हुआ *ऋषियों द्वारा रावण की दिए गए श्राप के कारण ही माता सीता जी का जन्म हुआ *ब्रहस्पति जी के पुत्र को मिले श्राप के कारण संजीवनी बूटी का पुनर्जन्म हुआ *माता कैकेई जी द्वारा अनुचित वरदानों के कारण ही प्रभु श्री राम अपने जीवन के असली उद्देश्य को पूरा कर सके ….. हमे भगवान की आलोचना करने का वोह भी इस मंच पर कोई अधिकार नहीं है और ना ही होना चाहिए …. अगर आस्तिक जी को अपनी कही हुई बात से मानसिक पीड़ा पहुँचती है तो इसका तो सीधा सा यही मतलब निकलता है की इन्होने आज तक कुप्रचार ही किया है इस मंच पर ….. सोचिये की इनका खुद का एक विचार ही इनको जब इतना दुःख दे सकता है तो आज तक जो इन्होने इस मंच पर कहा है उससे इनको कितना दुःख पहुंचेगा ….. इनको अपनी कही हुई बात से खुद को पहुँचने वाले तथाकथित दुःख का तो ध्यान है लेकिन इनकी खुद की कही बातो से दूसरों को कितना दुःख पहुँचता होगा इसकी तरफ से यह बिलकुल ही बेपरवाह है –आप मेरी किसी भी ब्लागर को कही हुई +मेरे किसी भी लेख में वर्णित किसी भी बात को उठा कर मुझसे कुछ भी पूछ लीजिए , मैं उसके लिए शर्मशार नहीं बल्कि गर्वित होऊंगा और आपके सभी संदेहों का समुचित समाधान भी करूँगा ….. क्योंकि मैंने जो भी कहा है और लिखा है सोच समझ कर विवेकपूर्ण ही लिखा है ….. कालिया और राजिंदर रतुरी तथा संदीप दिवेदी के नाम से एक ही आई.पी. एड्रेस से मेरे दारोगा वाले लेख पर कमेन्ट किये गए थे जिनका की कम्प्युटर के माहिर दोस्त से मैंने पता लगवाया था …. अलीन अलीन जी के जाने का कारण भी आस्तिक जी ही है ….. इन दोनों ने अपनी अजीब मानसिकता के कारण ना केवल साथी ब्लागरों को बल्कि जागरण जंक्शन को भी बार बार संकट में डाला है ….. वोह आस्तिक जी की अविवेकपूर्ण प्रतिकिर्या ही थी जिसका की अलीन जी ने फीडबैक पर जागरण की तरफ से खुद ही जवाब दे दिया था जिसके कारण उनको इस मंच पर से निष्काषित होना पड़ा जिसका की मुझे भी बहुत दुख है ….. जब विवादित प्रतिकिर्या इन्होने ही की है तो उसको तर्क की कसौटी पर सही साबित करने की जिम्मेवारी भी इनकी ही बनती है ….. उसकी बजाय यह कह रहे है की अगर उत्तर जानना है तो मेरे लेखो को पढ़े ….. यह कैसा बेशर्मी भरा गैर जिम्मेदाराना बयान है ….. इनके लेख भी इन्होने खुद ही लिखे है और वोह विवादित प्रतिकिर्या भी इन्होने खुद ही की है …. हमारे पास इतनी मगजमारी का समय ही कहाँ है की इनके विवादित सभी लेख पढ़े और उसमे उत्तर ढूंढे ….. उसकी बजाय यह खुद ही अपना स्पष्टिकरण क्यों नहीं दे देते एक लेख के द्वारा ,अपनी पोजिशन को साफ़ रखने के लिए आपके उच्च और सुलझे हुए विचार जान कर हार्दिक खुशी हुई ….. आभार सहित (अगर आस्तिक जी सही है तो इनको खुद एक लेख लिख कर भगवान श्रीकृष्ण जी के बारे में अपने विचार रख कर अपना पक्ष रखना चाहिए ताकि हमे अपने प्रश्नों का उत्तर मिल जाए

dineshaastik के द्वारा
July 26, 2012

सो रहे हैं आप सचमुच, जाइये अब जाग। काँग्रेसी सोच को प्रिय दीजियेगा त्याग।। आलोचना होती नहीं क्यों आपको बरदारस्त? आलोचना जबसे थी कि पाया नहीं अनुराग। मुख्य धारा से स्वयं से जोड़िये श्रीमान, करिये प्रज्वलित हृदय में क्राँति की इक आग। ग्रुप बनाकर आप अपनी चाहते पहचान, मंच पर विद्वेषता का क्यों लगाते दाग? आप जो कह दें वही सच, क्यों रहे हैं मान? इस तरह की सोच का कर दीजिये परित्याग।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आपको शोभा नहीं देती, आप जो यह कर रहे हरकत। शांत है जो जागरण जंक्शन, आप क्यों फैला रहे दहशत? आप पीछे उसके पड़ते हैं, आपसे होता न जो सहमत। आप अधिनायक हैं इन्द्रा से, लोकशाही चाहते बंधक। सोच दिग्गी की तरह लगती, आपको उनकी तरह फुरसत। आपको चमचा गिरी भाती, सोनिया सी आपको आदत। आपको तारीफ बस भाती, तारीफ मदिरा से हुये उन्मत। करनी कथनी में हैं नेहरू से, बात को इस हो गंई मुद्दत। औकात औरों की बताते हैं, और को सनकी करें घोषित। आपकी मैं सोच का निन्दक, आपकी लेकिन करूँ इज्जत। एक प्रतिक्रिया के ये खातिर बस, आपने कितनी करी मेहनत? हाथ में ले प्रेम का प्याला, किन्तु दिल में क्यों भरी नफरत? मैं विरोधी सोच का केवल, किन्तु झूठी आपकी तोहमत।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आपकी तो नियत न लगती है ठीक मुझे, अपनी ये सोच में सुधार जरा लाइये। ऐसी सोच से क्या मिलता है लाभ आपको ये, जरा मुस्कराके आप मुझको बताइये? काँग्रेसी सोच तो गुलामी का प्रतीक लगे, काँग्रेसी सोच को न यहाँ बगराइये। चलता है मंच अभी फिलहाल शांति से ये, ऐसी टिप्पणियों से नहीं, दूषित बनाइये। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आज तो विस्मित हुआ दिनेश, नहीं पाते क्यों निंदा झेल? स्वयं की निन्दा से बेहाल, खेलने लगते कोई खेल। चाहते हैं अपना अधिपत्य, आपकी ही हो बस तारीफ। स्वयं की पीड़ा का बस ज्ञान, ओर को देते हो तकलीफ। हृदय, मन, बुद्धि को कर शांत, स्वयं की विस्तृत करिये सोच। संकुचित अब तक रहे विचार, आपको क्या इसका अपसोस? आप उससे बस रिश्ता जोड़, आपका जो करता गुणगान। आपका मन जो आप विचार, आप उसको सच लेते मान। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आपके विचार मेरी समझ से परे मित्र, आपको समझना तो मुझे टेढ़ी खीर लगे। आपका विचित्र रूप देख विस्मित में, आप मुझे पहिले सो तो बड़े गंभीर लगे? आपके आलेख की ये मैंने क्या आलोचना की, आपको वो शब्द मेरे, ऐसे कैसे तीर लगे। ################################ ऊर्जा से भरे हुये, आप राजकमल जी, आप उसका तो व्यय, अपव्यय करते हैं। लगते हो आप जैसे मुझे राजकमल जी, वैसी राह पर क्यों आप नहीं चलते हैं? फूलों की तो खान आप, नाम राजकमल है, मुख से मगर क्यों, कंटकों को झरते हैं? ############################ झूठी ये तारीफ अभी तक आई न मुझको, मगर आपको झूठी ही तारीफ है भाती। एक वर्ष हो गये मंच पर मुझको लेकिन, मेरी और आपकी पटरी मेल न खाती। भ्रष्टाचार मुझे लगता झूठी तारीफें, कैसे झूठी तारीफें करना हैं आती? ###################### मुझको अपनी भाषा लगती बहुत अधिक प्रिय, मगर आपकी भाषा काँटों सी चुभती है। मैंने भाषा को मर्यादित करना सीखा, अगर आपकी भाषा आमर्यादित लगती।

    vishnu के द्वारा
    July 26, 2012

    वाह भाई दिनेश जी तुमने क्या कविता बनाई यह कांग्रेस्सियो को राष नहीं आई I क्योकि ये भ्रस्ताचार के जनक है और ये राजकमल जी को भनक है अब बात समघ मे आई

    dineshaastik के द्वारा
    July 27, 2012

    आदरणीय विष्णु जी, मेरे विचारों का समर्थन करने के लिये हृदय से आभार….

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 27, 2012

    आस्तिक जी मेरा यक्ष प्रश्न अभी भी अनुतरित ही है की *भगवान श्री कृष्ण जी के कौन -२ से कार्य आपकी नजर में मानवता के खिलाफ है ? *आपके अटल तार्किक कारण क्या है ? अपनी जिम्मेवारी को समझते हुए अपना ब्लागर धर्म निभाइए आप यह समझ लीजिए की मैं (अन्ना ) राजकमल हजारे हूँ और आप कांग्रेसनीत सरकार तथा विष्णु जी सरीखे आपके कुमति धारी दोस्त अंदरखाते सांठगांठ करने वाले विपक्ष तथा मेरे यक्ष प्रश्न “जन लोकपाल” ….. जिस प्रकार सरकार की विश्सनीयता जन लोकपाल को लागू किये बिना बहाल नहीं हो सकती ठीक उसी प्रकार आप मेरे प्रश्नों का उत्तर दिए बिना सुर्खरू नहीं हो सकते है ……

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 27, 2012

    मिस्टर आपको सबसे पहले तो आपको अपना नाम बदल लेना चाहिए क्योंकि आप इस नाम को रखने के लायक नहीं है भगवान श्री कृष्ण जी की आलोचना करने वाले का समर्थक विष्णु नाम रखने का अधिकारी नहीं हो सकता ….. कल को अगर शरद पवार भी आपको कोई कविता रूपी झुनझुना /लोलीपोप पकड़ा दे तो आप उसको बजाते/चूसते हुए महंगाई पर उनको कोसने की बजाय उनका गुणगान करते रहना ….

    dineshaastik के द्वारा
    July 28, 2012

    आदरणीय राजकमल जी, अभी तो आपकी पार्टी की सरकार है, संसद से कोई ऐसा अध्यादेश या फतवा जारी करवा दीजिये की कोई भी काँग्रेस विरोधी काँग्रेसी नेता के नाम पर अपना या  अपने बच्चे का नाम नहीं रख सकता। यदि नाम रखना भी तो तो हाई कमान या आपसे  अनुमति ले। और उसके एवज में रायल्टी दे।

    vishnu के द्वारा
    July 28, 2012

    राजकमल जी अगर आप कांग्रेस्सी है तो अन्ना के नाम को बदनाम नहीं करो सत्य बोलने मे क्या डर है


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