RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

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"राजकमल शर्मा -कांग्रेसी"

Posted On: 4 Jul, 2012 Others में

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मेरे स्नेही दोस्तों और साथियों …… नमस्कारम + सादर अभिवादन और प्रणाम !

मेरे सभी दोस्त हमेशा ही मुझसे किसी धमाकेदार पोस्ट रूपी धमाके की उम्मीद करते रहे है और मैंने आप में से अधिकाँश की अपेक्षाओं को पूरा भी किया है ….. यहाँ पर बहुत सी  शेन वार्न रूपी ऐसी जनता जनार्दन भी है जिनके सपनो में सचिन तेंदुलकर की तरह से छक्के लगाकर मैंने उनकी रातों की नींद तथा दिन का चैन छीना है …. लेकिन आज मैं किसी और के बारे में नहीं बल्कि खुद के बारे में एक धमाकेदार रहस्योद्घाटन करने जा रहा हूँ की मैं एक जन्मजात कांग्रेसी हूँ और मरते दम तक रहूँगा भी ….

हमके सभी के प्रिय जागरण जंक्शन का जन्म कांग्रेस के शासनकाल में ही हुआ और बदकिस्मती से पिछले कुछेक सालो में  हद से ज्यादा महंगाई डायन विकराल रूप में बढ़ी और इसके साथ साथ बेहिसाब रकमों के एक से बढ़कर एक भारी भरकम घौटाले भी लगातार हुए तथा आम आदमी के जीवन की दुश्वारियां अचानक ही आशातीत रूप से कई गुणा बढ़ गई ….

एक अखबार और उसका समूह लोकतंत्र का चौथा सतम्भ होने के कारण हमेशा ही निष्पक्ष भूमिका निभाते हुए एक मजबूत विपक्ष समान भूमिका अदा करता है ….. जागरण की इसी निष्पक्षता के कारण उसको सरकार विरोधी समझने की भूल करते हुए यहाँ का माहौल कुछ इस तरह का बना दिया गया है की मेरी तरह हरेक कांग्रेसी को खुद के बारे में खुलासा करना फांसी पर चढ़ने के बराबर लगता है ….

मैंने इस मंच पर हरेक दिन अपनी परीक्षा दी है और अपने व्यवहार तथा  आचरण से इस बात को साबित किया है की एक कांग्रेसी सह्रदय + सबकी सुनने वाला + सबको आदर मान  देने वाला + खुली सोच वाला तथा सभी की साथ लेकर चलने वाला भी हो सकता है ….. वैसे तो मैंने हमेशा ही राजनीति पर लिखी हुई रचनाओं से खुद को दूर ही रखा है ….. लेकिन कुछेक ब्लागर ऐसे भी है जिनके लेखों पर अगर मैं आलोचनात्मक प्रतिकिर्या कर देता तो वोह उत्साहहीन होकर शायद आज इतनी प्रवीणता से नहीं लिख पाते ….. इसलिए मैंने अपने खुद के व्यक्तिगत विचारों और भावनाओं को प्रकट करने की बजाय दबाते हुए इस मंच के ऐसे लेखकों को  हर संभव सहयोग अपनी तरफ से देने की कोशिश की जोकि उनके विकास में तथा उनको और आगे बढ़ने में सहायक सिद्ध हो सकता था ….. क्योंकि उनमे से एकाध तो ऐसे भी है जोकि किसी और विषय पर लिख तो सकते है लेकिन लिखना ही नहीं चाहते ….

मैं आप सभी के बारे में जानता था इसलिए मेरा आपके साथ किया गया व्यवहार किसी कसौटी का मोहताज नहीं है , लेकिन अब जबकि आप मेरे बारे में जान गए है तो यह आपके लिए परीक्षा की घड़ी है …. मुझको आज ऐसा महसूस हो रहा है जैसे की मैं इस दुनिया का पहला व्यक्ति होऊं जिसने की आज धरती के सूर्य के गिर्ध घूमने की सच्चाई ब्यान की हो और वोह अपनी सजा का इंतज़ार और सामना दिदादिलेरी से करने जा रहा हो ….

सच्चाई के रास्ते पर चलने के लिए  मैंने तो अपना परिवार तक भी छोड़ दिया है …..  मेरे घर की घड़ियों में पकिस्तान के समयानुसार आधे घंटे का फर्क हमेशा ही बना रहता है ….. अब तो गली मोहल्ले वालों ने भी इस बाबत पूछना छोड़ दिया है ….. जब भी भारत+पाकिस्तान के बीच में क्रिकेट का मैच होता तो मैं उनको परखने के लिए “पाकिस्तानी मुसलमान …. वगैरह -२ ?” कहता ….. मेरी माँ और मेरे भाई तथा बहिन मुझसे केवल इसी बात के कारण कम से कम पन्द्रह –बीस दिनों तक बात नहीं करते ….. और अपनी आपसी बातचीत में यह सपष्ट इशारे किया करते की मुझको अपने इस गुनाह की माफ़ी मांग लेनी चाहिए अगर मुझको उस घर में उनके साथ रहना है तो …. बार्डर पर एक सैनिक देश के दुश्मनों से लड़ाई लड़ता है लेकिन मैंने तो अपने खुद के घर में अपने परिवार से जंग लड़ी है ….. इसलिए मैं खुद को एक क्रांतिकारी + देशभक्त और जाबांज सैनिक मानता हूँ …..

क्योंकि लेखन में मैं खुशवन्त सिंह को अपना गुरु मानता हूँ ….. लेकिन जब से उनके पिता जी के गददार वाले किरदार का पता चला है मुझसे अक्सर ही यह सवाल किया गया है की क्या अब भी मैं उनको अपना गुरु मानता हूँ ?….. ऐसे साथियों से मैं खुद पूछना चाहता हूँ की कल को अगर मेरा सगा भाई देश द्रोही बन जाए (वैसे कल को अगर वोह बन जाए तो मुझको कोई हैरानी नहीं होगी – बस उसको एक अवसर मिलने भर की देर है ) तो क्या आप मुझको भी एक देशद्रोही ही मानेंगे ?….. मैंने तो अपने उन पूज्य पिता जी तक पर वयंग्य किया था जिनके बारे में अगर असल बाते बयाँ करूँ तो आप सभी अपनी आँखे पोंछते रह जायेंगे , लेकिन खुशवन्त सिंह जी की अपने देशद्रोही पिता के बारे में चुप्पी वाकई में ही अखरती है ….

अन्त में यही कहना चाहूँगा की लोग  मेरे कांग्रेसी होने की इस कड़वी सच्चाई को जानने के बाद मुझसे अपना सम्बन्ध तोड़ना चाहते है + अपनी लिस्ट से निकलना चाहते है उनको मैं ह्रदय से अग्रिम धन्यवाद देना चाहूँगा ….. क्योंकि अब दूध का दूध और पानी का पानी हो ही जाना चाहिए ….. जो झूठे नाते है उनका परित्याग करके सिर्फ सच्चे दोस्तों की पहचान भी अब हो ही जानी चाहिए ….. मैं अपनी उस बहिन का दिल से आभारी हूँ जिसने सबसे पहले इस सच्चाई को जानने के बाद भी अपने व्यवहार में किसी तरह का परिवर्तन ना लाते हुए अपना स्नेह पूर्ववत की भांति ही दिया , जिनकी सलाह पर अमल करते हुए मैं इस लेख को लिखने का हौंसला कर सका …..

एक कांग्रेसी

राजकमल शर्मा

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97 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pritish1 के द्वारा
July 25, 2012

मुझे दुःख इतना हुआ की आज इतना बुद्धिजीवी व्यक्ति भी उसी पार्टी का गुलाम है…….जिसके कारण आज भी देश के 80 % लोग भूखे सो जाते है……उनके दर्द को महसूस कीजिये निश्चित ही आपमें कोई परिवर्तन आ जाये…..! प्रीतीश

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 26, 2012

    पप्रीतिश जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! सबसे पहले तो आपके इस भ्रम को दूर करना चाहूँगा की मैं कोई बुद्दिजीवी हूँ …. कुछेक लेख लिखने मात्र से कोई बुद्धिजीवी नहीं हो जाता ….. अगर आपको असल में ही किसी बुद्धिजीवी के दर्शन करने है तो मेरे गुरुदेव पूज्यनीय श्री आर.एन.शाही जी + डाक्टर अदिति कैलाश +आदरणीय निशा जी के दर्शन और दीदार कीजिये आपकी मंशा पूरी होगी …. अगर आपको मेरे कांग्रेसी होने से कोई दुःख पहुंचा है तो उसमे मैं कुछ भी नहीं कर सकता हूँ क्योंकि यह दुःख आपको तब तक रहेगा जब तक किसी क्रांतिकारी नयी पार्टी का अभ्युदय नहीं हो जाएगा …. जिस दिन से वोटों की राजनीति बंद हो जायेगी देश की जनसंख्या में भी कमी आ जायेगी और देश की समस्याओं में भी भरी कमी आ जायेगी क्योंकि आज की डेट में देश हित में सोचने वाला एक भी नेता नही बचा है ….. हार्दिक आभार

yamunapathak के द्वारा
July 14, 2012

राजकमल जी,नमस्कार यह प्रतिक्रिया मैं आपके द्वारा दिए अपने पोस्ट पर की प्रतिक्रिया स्वरुप लिख रही हूँ .(जीवन है सरल) इस मंच पर अपने सभी ब्लॉगर साथियों से मैंने प्रत्येक दिन कुछ ना कुछ अच्छा अवश्य सीखा है.आप मेरे प्रतिक्रिया देने के तरीके को परिमार्जित देख हर्षित हुए थे.आपका हर्षित होना स्वाभाविक है कोई भी गुरु अपने शिष्य को परिष्कृत देखकर सदा आनंदित होता है मुझ में यह परिष्करण आप सबों के वैचारिक सामीप्य से ही संभव हो पाया. आप कृपया मंच पर बने रहे.ना जाने कब किस ब्लॉग पर मुझे एक नयी राह मिल जाए. शुक्रिया

    rajkamal के द्वारा
    July 16, 2012

    आदरणीय यमुना जी …. सादर अभिवादन ! आप तो खुद दूसरों को राह दिखाने वाली एक काबिल शिक्षिका और ब्लागिंग जगत में अपने शुरूआती दौर में ही अपनी लेखनी का लोहा मनवाने वाली है ….. यहाँ पर कोई भी किसी से भी कुछ ना कुछ सीख सकता है …. हम सभी अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से एक दूसरे के लिए प्रेरणा के कारक बनते है ….. इसीलिए मैं कहता हूँ की यहाँ पर सभी लेखक एक समान है ….. आभार सहित

narayanimaya के द्वारा
July 14, 2012

नमस्कार राज कमल जी बहुत सटीक लेख.विचार धारा या पार्टी से जो भी हो,मुख्य बात तो हमारा देश प्रेम और मानव धर्म होना चाहिए . धन्यवाद नारायणी

    rajkamal के द्वारा
    July 16, 2012

    आदरणीय नारायणी जी ….. सादर अभिवादन ! मैं आपका आभार किन शब्दों में प्रकट करूँ ! बिरला के गुरु लेख में मैं जिस सहयोग की अपेक्षा सभी से कर रहा था वोह सिर्फ आपसे ही मिल पाया ….. ******************************************************************************************************************* आपकी इसी बाबत एक बार पहले भी प्रतिकिर्या मिल चुकी है जिसमे आपने देश और समाज के बारे में सोचने के लिए कहा था , इससे साबित होता है की आप देश के प्रति चिंता और मनन का भाव अपने मन में रखती है ….. I SALUTE YOU हार्दिक आभार सहित

jagojagobharat के द्वारा
July 14, 2012

एक कांग्रेसी होने के से पहले आप अच्छे लेखक है क्योकि कांग्रेसी बड़े ही सतिर होते है अब देखिये ना राष्ट्रपति चुनाव को ही ले ले बिहार में जहा २ केंद्रीय विश्विद्यालय को दर्जा दे दिया गया वही उत्तर प्रदेश को ४ हजार करोड़ का पकेज ये तो कांग्रेसी ही कर सकते है और तो और महंगाई डायन खाए जा रही है और उसपर सर्कार का व्यंग ये क्या कोई और कर सकता है .सुन्दर आलेख लेकिन कांग्रेस छोड़ कर भारतीय बने .यह निवेदन

    rajkamal के द्वारा
    July 16, 2012

    प्रिय अनाम महोदय ….. नमस्कारम ! शायद आपको इस बात का इल्म नहीं है की मैं तीसरी आँख भी रखता हूँ थोड़ी बहुत ….. अपनी प्रतिकिर्या में अपने कौशल का परिचय आपने बखूबी दिया है लेकिन जो आप कहते कहते रुक गए वोह मैंने समझ लिया है जो आप बिना अपनी मर्जी और स्वभाव के लिख गए है उसको भी मैं समझता हूँ …. इस लेख को लिखने का असली मकसद ही यही था वर्ना किसी लेखक को किसी दूसरे लेखक के धर्म और राजनीति के प्रति झुकाव से कोई लेना देना नहीं है , सिवाय उन चंदेक लेखकों के जो सिर्फ इसी विषय पर लिखना पसंद करते है ….. आपक आना अच्छा लगा हार्दिक आभार

Rohit Mudgal के द्वारा
July 13, 2012

प्रिय राज जी, मुझे लगता है की आपको कांग्रेस ने नियुक्त किया है ऑनलाइन अपना प्रोमोतिओं करने के लिए तभी आप ये लिख रहे हैं की आप कांग्रेसी हैं.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 13, 2012

    कांग्रेसी होना कोई गुनाह और अपराध नहीं है ….. लेकिन आप की तरह बेसिर पैर का इलज़ाम लगाना जरूर गुनाह और अपराध की श्रेणी में आता है ….. आपके ब्लॉग का पता नहीं चल रहा ….. अपने घर का पता देने का कष्ट करेंगे ताकि आपका शुक्रिया अदा किया जा सके धन्यवाद

satish3840 के द्वारा
July 13, 2012

कमल शर्मा जी जय श्री राधे / जय श्री राम में आपको एक कांग्रेसी होने के नाते कहने से परहेज करूंगा / कल आप मुझे आम आदमी न समझ भाजपा का आदमी न समझने की भूल न कर लें / आप पोस्ट पर टिप्पणी देते हें पर जब उस लिक पर क्लिक करते हें तो आपका ब्लॉग खाली अता हें / सो हाल चाल जान्ने के लिए बड़ी ही मुशिकिल हें / आप यूं पी ए-२ के पार्ट हें अतः बड़ी खुशी हुई आपने अपनी सच्ची बात कह दी पर शर्मा जी कोई भी व्यक्ति किसी भी विचार धारा को मान सकता हें इसमें टकराव की क्या बात / विचार बदलते रहते हें कभी कोई कांग्रेसी हें तो सता परिवर्तन के लिए वो भाजपा या सपा या बसपा या सवतंत्र विचारधारा वाला हो सकता हें / आप कोई भी हो पर मंच पर हम आपको एक सम्मानित ब्लोगर ही मानते हें / आपके विचार अच्छे लगे

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 13, 2012

    आदरणीय सतीश जी …. सादर अभिवादन ! मैं यू.पी.ए . के सभी सिक्वेल्स का पार्ट हूँ सिर्फ पार्ट दो का ही नहीं….. मुझको भी आपके विचार अच्छे लगे और आपकी रचनाये तो अच्छी लगती ही है ….. लेकिन मैं हमेशा कांग्रेसी ही रहने वाला हूँ कम से कम इस जन्म तक तो यकीनन ही …. आपका आना दिल धड़काना प्यार आ गया है आभार सहित

manoranjanthakur के द्वारा
July 13, 2012

मेरा प्रणाम स्वीकार करे बड़े भाई

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 13, 2012

    किरपा करके प्रणाम करके शर्मिन्दा मत किया कीजिये ….. आपका नमस्कार स्वीकार है ….. आप एक्टिव हुए फिर से अच्छा लग रहा है धन्यवाद

jack के द्वारा
July 12, 2012

एक बेहतरीनलेख मजा आ गया. लाजवाब

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 13, 2012

    प्रिय जैक भाई …. आदाब ! आपको पसंद आया तो मेरी लिखने की हिम्मत और ज्यादा बढ़ गई है ….. इस मंच पर ऐसा उद्घोष करना आसान नहीं था ….. लेकिन शुकर है की ज्यादातर सुलझे हुए विचारों वाले है जिनके लिए इस तरह की बाते कोई खास महत्व नहीं रखती …. लेकिन मैंने अपना बोझ दिल और मन से उतार दिया है …. आपके स्नेह और समर्थन के लिए हार्दिक आभार

R K KHURANA के द्वारा
July 12, 2012

प्रिय राज जी, कांग्रेसी होना कोइ पाप नहीं है ! गलत काम करना पाप है ! आप किसी भी विचारदार के हो अगर मानव मात्र की सेवा होती है तो वो बहुत अच्छा काम है ! राम कृष्ण खुराना

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 13, 2012

    आदरणीय चाचा जी …. सादर प्रणाम ! सभी जानते है की आप अपने ज्ञान द्वारा समाज की सेवा का पुनीत कार्य कर रहे है ….. जो इंसानियत की सेवा में जी जान से जुटे होते है वोह सामने वाले का मजहब और विचारधारा नहीं देखते …. और इस मंच पर तो इन बातों से किसी को कोई भी फर्क वैसे भी नहीं पड़ता है …. आपके उछ कोटि के विचार जान कर और आशीर्वाद प्राप्त करके बहुत प्रसन्नता हुई ….. दिल से आभार

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
July 12, 2012

आदरणीय गुरुदेव को सादर प्रणाम.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 13, 2012

    आपसे तो अब डर लगने लगा है मुझको चूँकि अपनी शादी में मैं आप समेत किसी को भी बुलाने वाला नहीं हूँ (अगर हुई तो ) इसलिए पूरा यकीन है की आप आनन्द प्रवीण जी जैसा हाल मेरा जरूर कर देंगे- हा हा हा हा अग्रिम आभार सहित

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
July 11, 2012

मेरी इतनी अपील है की सिर्फ विरोध के लिए विरोध करने की बजाय सही को सही और गलत को गलत कहने की परम्परा का पालन किया जान चाहिए जोकि हम लेखकों का धर्म के साथ साथ फ़र्ज़ भी है …. नियम नीति तो सब यही कहती है बंधू हम भी इसी के साथ खड़े हैं लेकिन जब पार्टी व्हिप जारी करती है और ये समझाया जाता है की हमारी पार्टी से ऊपर कोई व्यक्ति या व्यक्तित्व नहीं है तो ..? हर पार्टी को नेता को दलगत भावना से उठ सच्चाई और अच्छाई से अपनी पार्टी को ऊपर ले जाना होगा लोग मूरख होते भी अब कुछ जागने लगे हैं और कांग्रेस को इस के लिए चुकाना भी पड़ रहा है समझिए की जमीनी रूप से काम करें विकास करें भ्रष्टाचार को रोकने में पुरजोर सहायता दें ,,, आभार जय श्री राधे भ्रमर ५

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 11, 2012

    आदरणीय भ्रमर जी …. सादर प्रणाम ! भ्रष्टाचार के खात्मे की तो बात ही जाने दीजिए इसमें कमी आ जाए तो भी गनीमत जानिये …… अब तो आप उस नेता को अच्छा समझिए जो खाता तो हो लेकिन साथ में कुछ काम भी करता हो ….. हरेक नेता का खाने और काम करने का प्रतिशत अलग अलग हो सकता है …. बस इसी के आधार पर हमे अपने फैसले लेने होंगे …… इससे ज्यादा की उम्मीद किसी नेता से करियेगा भी मत ….. इसीमे उनका और देश का तथा खुद हमारा भी भला है – हा हा हा हा हा हा हार्दिक आभार सहित

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    July 13, 2012

    कहीं कहीं प्रतिक्रिया में केवल राजकमल कांग्रेसी नजर आये कांग्रेसी नेता तो सब फूट फूट कर लड्डू होते नजर आये आप के बिजनेस में दुगुने का इजाफा भी करवाए हाँ भाई उनका अधिकार क्यों छीना जाए खाओ और खाने दो ……ह हा बधाई भ्रमर ५

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 13, 2012

    आदरणीय भ्रमर जी …. सादर प्रणाम ! आप जिन महाशय जी का जिक्र कर रहे है उन्होंने अपने पिछले लेख पर सिर्फ मेरी ही प्रतिकिर्या का उत्तर देना मुनासिब नहीं समझा था …. आप चेक भी कर सकते है ….. अब आप ही बतलाइये उनका असली चेहरा सामने लाने के लिए इसके इलावा मेरे पास और कौन सा तरीका होना चाहिए – हा हा हा हा हा हा आप की दुआए और आशीर्वाद मिल गया है तो अब चहुंमुखी विकास अवश्यम्भावी है ….. सादर नमन जय श्री राधे कृष्ण

div81 के द्वारा
July 11, 2012

आदरणीय राजकमल भाई, सदार प्रणाम हर इन्सान की अपनी एक सोच होती है और ये सोच को डेवलप हमारा आस पास का माहौल करता है हमारा परिवार, हमारे गुरु जन और हमारा समाज का प्रभाव हमारी सोच में झलक आता है | इस समय किसी भी पार्टी को पाक साफ़ नहीं बोल सकते है हम, जिस तरह आप कांग्रेसी है तो उसी प्रकार हम भाजपाई है वो भी कट्टर वाले :) मगर इससे फर्क क्या पड़ता है मेरे लिए सर्वोपरी अपना देश है उसके लिए मैं क्या कर सकती हूँ ये ज्यादा महत्वपूर्ण होना चाहिए एक आदर्श और सच्चा इंसान होना ज्यादा जरुरी है मेरे लिए और मुझे वो आप लगे | बाकी तो आप भी देश के हालत को लेकर परेशान हो और हम भी

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 11, 2012

    दिव्या बहिन ….. सादर अभिवादन ! आपकी प्रतिकिर्या शायद नीचे दीप्ती बहिन को मेरे हलके फुल्के प्रश्नों रूपी जवाब के असर में लिखी गई लगती है …. हमारा आपसी रिश्ता उतार चढ़ाव भरा रहा है …. इसलिए बहुत सोच समझ कर कैलकुलेटेड प्रतिकिर्या लिखी थी मैंने …. लेकिन आपकी बात कुछ दूसरी और सबसे अलग है इसलिए इस बात से वैसे तो कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए लेकिन फिर भी अगर आपने बतला ही दिया है तो मैं भी आपसे अपने बचपन की एक बात सांझा करना चाहता हूँ ….. मुझको शुरू में कांग्रेस की पकिस्तान के प्रति ढुलमुल नीति तथा अडवानी जी और अटल जी की दो टुक बाते अच्छी लगती थी ….. लेकिन फिर बाद में बहुत देर बाद समझ आया की उसमे भी एक समझदारी थी…. जब तक भारत ने दूसरा परमाणु परीक्षण नहीं किया था पकिस्तान के भी हाथ बंधे हुए थे , लेकिन भारत द्वारा बिना सोचे समझे अति उत्साह में उस कदम को उठाने के बाद पाकिस्तान को परमाणु परीक्षण का बहाना और मौका मिल गया ….. नतीजा आज उसको हमारा पहले जितना डर नहीं रह गया है …. एक पागल और सिरफिरे तथा बेलगाम और अनियंत्रित पड़ोसी के हाथ में ऐसा खतरनाक हथियार लग चूका है की जिसका इस्तेमाल उसके वहां पनप रहे आंतकवादी भी अपनी पहुँच बना कर , कर सकते है …. शायद विधि का यही विधान हो …. क्योंकि नास्त्रेदमस की किताब में यही संकेत है की दुनिया के लिए विनाशकारी युद्ध पकिस्तान से ही शुरू होगा ….. बाकी आपने जो देश के हालत के बारे में बात की है उनमे सुधार होना और कमी आना बहुत ही मुश्किल है ….. क्योंकि अब गठबंधन की राजनीति का जमाना है ….. एक सांझीदार आगे बढ़ेगा तो बाकी के उसकी टांग पकड़ कर पीछे खीचेंगे ….. ऐसे हालात में पहले जैसी तरक्की नामुमकिन है ….. फिर भी मन के किसी कोने में आशा का दीपक तो जलता ही है और रहेगा भी ….. ढेरों आभार सहित

D33P के द्वारा
July 10, 2012

राजकमल जी नमस्कार …….लगता है अब जागरण जंक्शन पर भी राजनीतिक दल बनाने का विचार है !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 10, 2012

    बहिन जी …. सादर अभिवादन ! आज दो बाते पता चली है की *नारियां बहुत ही समझदार होती है ….. कितनी सफाई और खूबसूरती से आपने अपने समर्थक दल का नाम छुपा लिया है ….. अगर सभी आप ही की तरह मुझे बनाते रहे तो फिर आप ही बतलाइये की किस तरह साहित्यकारों का राजनीतिक दलों में बंटवारा हो पायेगा ?…… *जब भी आपको अपने ब्लॉग पर बुलाना हो , उसके लिए कुछ विवादास्पद लिखना अनिवार्य है हा हा हा हा हा हा शुभकामनाओ सहित आभार

    D33P के द्वारा
    July 11, 2012

    सादर अभिवादन राजकमल जी ,विदेश प्रवास के कारण जागरण जंक्शन पर कुछ सक्रियता कम थी !वैसे ,अपने ब्लॉग पर बुलाने के लिए कुछ भी विवादित लिखना जरुरी नहीं है हम तो बिन बुलाये मेहमान है!वैसे जिस दिन साहित्यकारों का बंटवारा होना शुरू हो जायेगा उस दिन वो साहित्यकार नहीं नेता बन जायेंगे जिन्हें आम जनता दिल से कम ही पसंद करती है !वैसे आप आप की पोस्ट को पढने के लिए आपको खोजना थोडा मुश्किल होता है .नाम से आपकी जीरो पोस्ट ही दिखती है !बड़ी मुश्किल से आप होम पेज पर नज़र आये और हम भी आ धमके आपके पेज पर ! वैसे नारिया समझदार होती है ये बात आपको आज ही क्यों पता चली ये तो सर्वविदित बात है !घर पर भाभी जी से भी पूछ कर देखिएगा ! अगर कुछ ज्यादा कह दिया हो तो क्षमा की हक़दार तो मै हमेशा से ही हूँ !क्षमा मांगूगी नहीं वो तो आप खुद ही दे देंगे D33P

    D33P के द्वारा
    July 11, 2012

    आपने मीनू जी लिखा ” मैं अक्सर ही सोचता की जब भी किसी ब्लागर से आमना सामना होगा तो उसको मेरी असलियत जानकार शायद धक्का लगेगा ” वैसे आपके कांग्रेसी होने में यहाँ मंच पर किसी को क्या फर्क पड़ेगा ….पड़ना तो नहीं चाहिए क्यूंकि हुम यहाँ कोई चुनावी जंग जीतने के लिए नहीं आये है !यहाँ जो भी ब्लोगर्स है उनकी एक पार्टी है और एक ही दल है वो है जागरण जंक्शन दल !……..am i right ?

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 11, 2012

    आदरणीय दीप्ती बहिन ….. सादर अभिवादन ! आप अगर नीचे आदरणीय अलका जी को मेरे द्वारा दिया गया उत्तर पढ़ेंगी तो आपकी शंका का समाधान हो जाएगा …. में जानता हूँ की आप किस बात की क्षमा मांग रही है ….. लेकिन आपसे पहले क्षमा मांगने की जरूरत मुझको थी …. यह आपकी विशाल ह्रदय की विशाल सोच है की आपने मेरे लेख को प्रतिकिर्या के लायक समझा …. आपकी पहल ने साबित कर दिया है की नारियों का ह्रदय कोमल +क्षमाशील तथा विशाल होता है ….. हार्दिक आभार सहित

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 11, 2012

    आदरणीय दीप्ती बहिन …… सादर अभिवादन ! मैं मानता हूँ और आपकी बातों से सहमति भी रखता हूँ की यहाँ पर किसी को भी किसी दूसरे की किसी भी धर्म और राजनितिक पार्टी के प्रति आस्था और झुकाव से कोई लेना देना और परेशानी नहीं होनी चाहिए …. वैसे तो इस लेख में ही अपना पक्ष पूरी तरह से मैंने रखने की कोशिश की है …… फिर भी जो कुछ रह गया था नीचे आदरणीय विनीता जी को विस्तार से इस बाबत बताने की कोशिश की है ….. इस मंच का महौल कुछ इस तरह का है की मुझको अभी भी आशा नहीं है की मुझको पूरी तरह से पहले की तरह से स्वीकार किया जाएगा ….. लेकिन इस बात की परवाह ना करते हुए जो कदम मैंने उठाया है उससे मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूँ ….. वैसे इस बात से हौंसला तो मिला है की कम से कम आपको इस तरह की बातों से कोई फर्क नही है पड़ने वाला – हा हा हा हा हा धन्यवाद सहित आभार

minujha के द्वारा
July 9, 2012

राजकमल जी नमस्कार आप कांग्रेस के समर्थक है तो इसमें झिझकने वाली क्या बात है, ये मंच हम सभी अलग अलग प्रांतोवासियों और विचारोधाराओं का प्रतिनिधित्व करता है तो भला क्या ये संभव है कि सभी की सोच और समर्थन की दिशा एक ही हो…,अब अपनी बात ही करती हुं ,मुझसे पूछा जाय तो मैं ये नही बता पाउंगी की मैं किस पार्टी की समर्थक हुं क्योंकि जिन गिने चुने नेताओं को मैं पसंद करती हुं सभी अलग अलग पार्टी से ताल्लुक रखते है..आपके सच्चे समर्थन की दाद जरूर देना चाहुंगी 

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 10, 2012

    आदरणीय मीनू जी ….. सादर प्रणाम ! इस स्वीकारोक्ति में एक सन्देश दूसरों के लिए भी है की वोह भी मेरा अनुसरण करे …. आपकी ही तरह मैं भी दूसरे नेताओं को भी पसंद करता हूँ जिनमे की ज्योति बासु सबसे उपर आते है ….. काश मार्क्सवादी पार्टी से वोह ऐतहासिक भूल ना हुई होती तो देश को आज़ादी के बाद शास्त्री जी के बाद एक और काबिल प्रधानमंत्री मिल गया होता ….. मैं अक्सर ही सोचता की जब भी किसी ब्लागर से आमना सामना होगा तो उसको मेरी असलियत जानकार शायद धक्का लगेगा ….. इसलिए इस बात को गैरजरूरी होते हुए भी बताना उचित समझा ….. बाकि देश का विकास जो भी करेगा जनता उसको ही चाहेगी ….. वैसे मैं नहीं समझता हूँ की आज की तारीख में देश के और देश की जनता के लिए सोचने वाला कोई राजनेता हमारी किस्मत में लिखा है ….. आपके समर्थन के लिए तहे दिल से आभारी हूँ

chaatak के द्वारा
July 9, 2012

स्नेही राजकमल जी, आपके ब्लॉग के माध्यम से पता चला कि आप कांग्रेसी हो चले हैं| शुभकामनाएं कहने की भी जरूरत नहीं है हिदुस्तान की एक एक लंगोटी में से अपना हिस्सा निकलने की कला आपको आती ही होगी क्योंकि इस कला से विहीन किसी भी व्यक्ति को कांग्रेस की सदस्यता मिल पाना उसी तरह असंभव है जैसे कांग्रेस के किसी पदाधिकारी का बेदाग़ होना| पोस्ट पर हार्दिक बधाई! भगवा आतंकी चातक :)

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 10, 2012

    आदरणीय चातक जी ….. सादर अभिवादन ! आज की डेट में भारतीय कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों पर ही फाइव स्टार कल्चर हावी हो चूका है …. जिसको भी मौका मिलता है वोह अपनी छाप छोड़ ही जाता है …. वोह दिन हवा हुए जब दोनों पार्टियों में जमीन आसमान का फर्क है , फिलहाल तो इनमे शायद ही उन्नीस- बीस का फर्क हो ….. मेरा यह मानना है की आप जैसा बेहद जहीन इंसान इस तरह का लेख तो क्या बल्कि उस पर आई हुई सभी प्रतिकिर्याओ तक को भी पढ़ डालता है ….. अगर आपने वाकई में ही इसको पढ़ा है तो इसमें लिखी हुई कई बाते आपने पहले भी पढ़ रखी होंगी जिनको की मैंने आपके ही कहने पर अपने लिखे लेख “दीवार” में लिखा था ….. आप क्या हैं इस बात को मेरे समेत सभी काफी पहले से ही जानते है , असल बात तो मेरे खुद से सम्बन्धित थी जिसको बताना मैंने जरूरी समझा ….. मैं सदस्यता वाला वालंटियर नहीं बल्कि मोखिक रूप से समर्थन देने वालों में से हूँ …. झूठे मान से मन भर चूका है अब तो अपनी असलियत बता कर दूसरों की सच्चाई जानने का मन हो रहा था इसलिए यह सारी कवायद की ….. जैसा मैंने सोचा था बिलकुल वैसा तो नहीं फिर भी कुछ कुछ बल्कि काफी हद तक आशानुरूप तो हो ही रहा है ….. अपने चेहरे से मुखौटा उतारे बिना यह सारी जानकारी मिलनी असंभव थी …. अभी तो शुरुआत है आगे और भी परते खुलेंगी तथाकथित बुद्धिजीवियो की …. आपका हार्दिक आभार और स्वागत

allrounder के द्वारा
July 9, 2012

नमस्कारम भाई राजकमल जी, कॉंग्रेसी होने की हार्दिक बधाई आपको, वैसे भी हमारे देश की अधिकतम पार्टियों का उदगम कॉंग्रेस से ही हुआ है, सो कहीं न कहीं कॉंग्रेस से सभी का नाता रहा है ! वो तो कॉंग्रेस की इस वर्तमान सरकार ने इतना बुरा प्रदर्शन किया है, जिसने गैर राजनीतिक और आम जन को भी कॉंग्रेस का धुर विरोधी बना दिया है, फिर भी हमारे इस मंच पर सभी को लोकतान्त्रिक हक मिला हुआ है अपनी बात कहने का इसमें पार्टी का कोई खास लेना देना होना ही नही चाहिए ! और भाई महत्वपूर्ण ये नहीं कि हम किस राजनीतिक पार्टी का समर्थन करते हैं, महत्वपूर्ण बात ये है कि देश के प्रति हमारे दिल मैं क्या जज्बा है!

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 10, 2012

    प्रिय सचिन भाई ….. सप्रेम नमस्कारम ! मेरा नैट का जीवन उधार की जिन्दगी जीते हुए एक्सटेंशन पर लम्बी लम्बी साँसे ले रहा है ….. सोचा की पता नहीं कितने दिन और बाकी बचे है , लगे हाथ अपने बारे में साथियों को कुछ बताता ही चलूँ ….. अब जनता का मोह कुछ भंग हो जाएगा तो कल को इतना दुःख नहीं होगा किसी को …. मैं खुद हैरान होता हूँ की किस जमीर के लोग है जोकि इस भारत माता की पावन मिटटी में जन्म लेकर , यहाँ का खाते – पीते हुए और सांस लेते हुए इस देश के खिलाफ देशद्रोही कार्यों में लिप्त रहते है …. दसवी क्लास में एक पैराग्राफ आज तलक याद है जिसमे लिखा हुआ था की “हमे भारत की एकता और अखंडता में यकीन रखना चाहिए ….. हमे यह नहीं देखना चाहिए की भारत ने हमारे लिए क्या किया है , बल्कि उसकी बजाय हमे यह सोचना होगा की हम भारतवर्ष के लिए क्या कर सकते है”….. इस मंच पर तो इस बात की इतनी महत्ता होनी ही नहीं चाहिए की कौन किस पार्टी से सम्बंधित है ….. यहाँ पर तो हम सभी कलम के लिखारी है यही हमारी जाति है और यही हमारी पहचान है ….. हार्दिक आभार सहित

munish के द्वारा
July 9, 2012

आदरणीय गुरुदेव, मैंने सोचा था की बड़े दिनों बाद कुछ हास्य पढने को मिलेगा परन्तु आप तो पक्के कोंग्रेसी निकले ……… ऐसा लेख लिखा की हंसी गायब……. चेहरे के रंग गायब………. कुल मिलाकर जैसे कांग्रेस ने आमजन की हंसी छीन ली ऐसे ही आपने मेरी………! :) आप ऐसे तो न थे ……….. :)

    jlsingh के द्वारा
    July 10, 2012

    आप तो ऐसे न थे! अब हम सबको भी नया अभियान चलाना होगा …..आप तो ऐसे न थे! गुरुदेव को ब्लॉग लिखना होगा … लिखना होगा ..लिखना होगा … हास्य ब्यंग्य ही लिखना होगा … ऐसे ही सबके चेरे से हंसी नहीं छीन सकते .. चाहे स्विस बैंक से ही लोन क्यों न लेना पड़े !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 10, 2012

    प्रिय मुनीश जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! आपने बिलकुल ठीक कहा है की मैं कच्चा नहीं बल्कि बिलकुल पक्का हूँ …. मुझको तो हैरत होती है की किस प्रकार से लोग और नेता दल बदल लिया करते है ….. मैंने इस लेख में सारी बाते स्पष्ट कर दी है और पाठकों के सामने सभी “विकल्प” खुले रख छोड़े है ….. मुझको इस बात की शंका हो रही है की हमारे वकील बाबू अब क्या राजकमल कांग्रेसी के किसी लेख पर हंस भी पाएंगे ?….. खैर आने वाला वक्त सब बता ही देगा ….. तब तक के लिए और उसके बाद के लिए भी हार्दिक शुभकामनाओ सहित शुक्रिया

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 10, 2012

    आदरणीय जवाहर लाल जी ….. सादर अभिवादन ! बाते भी तभी मन में आती है जब जीवन की गाड़ी सही तरह से उचित रफ़्तार पर पटड़ी पर दौड़ रही हो …. नेट के कनेक्शन का एक महीने का एक्सटेंशन मिला है लेकिन कम्प्यूटर के बारे में अभी भी सिथति पूरी तरह से साफ़ नहीं है ….. किसी पुराने लेख को ही लेकर हाज़िर होना पड़ेगा आप सभी के दरबार में …. शायद “बेरोजगारों को आशिकी भत्ता” का नम्बर दुबारा से लग जाए आभार

    Santosh Kumar के द्वारा
    July 11, 2012

    आदरणीय गुरुदेव ,..सादर प्रणाम पुराना वाली प्रतिक्रिया नहीं दिख रही है ,..आपका आभार व्यक्त कर पाना इस मंच के मुझ जैसों के लिए संभव नहीं है ,..यह किसी कर्जे पानी से नहीं उतारा जा सकता है ,..पहले रट्टा पढकर लगा कि आपने कांग्रसी होने के अपराधबोध में यह पोस्ट लिखी है ,..अब लगता है कि आपको कांग्रेसी होने का गर्व है ,..हम तो आप पर ही गर्व कर सकते हैं ,… कांग्रेस के पास आप जैसा समर्थक है तो उनके कुछ छुपे सद्कर्म ही होंगे ,…आपके समर्पण को सादर नमन है ..आभार सहित

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 11, 2012

    प्रिय संतोष जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! आपने इस मंच पर आज तक ऐसी एक भी बात नहीं कही है जिसको की मेरे समेत किसी को भी डिलीट + छुपाने की जरूरत महसूस हुई हो …. इसलिए आपकी प्रतिकिर्या को छुपाने का प्रश्न ही नहीं पैदा होता ….. वैसे मैं भी नहीं समझता हूँ की किसी को मेरे बारे में पता चलने से कोई फर्क पड़ने वाला है …. लेकिब असल बात तो मेरे खुद के बारे में संतुष्टि से है की मैं किसी को और खुद को धोखा नहीं दे रहा हूँ ….. हार्दिक आभार सहित

yogi sarswat के द्वारा
July 9, 2012

अगर कोई पार्टी बदनाम होती है तो उसके उच्च पदों पर बैठे लोगों के व्यवहार से होती है इसलिए उसके कार्यकर्ताओं या झंडा उठाने वालों पर कोई तंज नहीं होना चाहिए क्योंकि वो कल किसी और का भी झंडा उठा सकते हैं ! इसलिए आपको ये हक है की आप खुद को किसी भी पार्टी से सम्बंधित रखें !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 10, 2012

    प्रिय योगी जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! मैं भीड़ भड़क्के से सदैव दूर ही रहना पसंद करता हूँ ….. मेरे पास कांग्रेस पार्टी की सदस्यता नहीं है ….. बस मेरा मन शुरुआत से ही इसको अपना मोखिक समर्थन देता आया है ….. आपने ठीक कहा है की जिनको सत्ता मिली हुई होती है वोही इसका दुरूपयोग करते है और नाजायज तरीके से अपनी आने वाली पुश्तों का घर भरते रहते है और देश की जनता भूखों मरती रहती है …. दुःख तो इसी बात का है की किसी हद तक कम्युनिस्ट पार्टिया ही इसका अपवाद है , वरना तो सभी एक ही थैली के चट्ठे – बट्ठे है ….. मैंने आज तक सिवाय तिरंगे के और किसी को मान नहीं दिया …. विश्व विजयी तिरंगा हमारा प्राणों से भी है यह हमको प्यारा आयो मिल कर इसके चरणों में अपने शीश को झुकाए पता नहीं कहाँ पर इस कविता को पढ़ा था कभी ….. आपकी सुलझी हुई प्रतिकिर्या पढ़ कर बहुत ही अच्छा लगा ढेरों धन्यवाद सहित

mparveen के द्वारा
July 9, 2012

इंसान किसी भी पार्टी से हो पर दिल से सच्चा हिन्दुस्तानी होना चाहिए … उसमे देशभक्ति का जज्बा कूट कूट के भरा होना चाहिए वही सच्चा देशभक्त है …..

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 10, 2012

    आदरणीय परवीन जी ….. सादर अभिवादन ! मैं आपकी बातों से पूरी तरह से सहमत हूँ और मेरा यह मानना है की बाकी सभी भी सहमत ही होंगे …. लेकिन एक समस्या भी है देशभक्ति के ज़ज्बे को मैं “कूट- पीस” कर नहीं बल्कि पूरे का पूरा साबुत रूप में ही आत्मसात करना चाहता हूँ …. मैं उम्मीद करता हूँ की आपको इस तरीके पर कोई आपत्ति नहीं होगी आपका तहेदिल से आभारी हूँ

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 8, 2012

badi mushkil men daal diya aapne. kyon na main faisla surakshit rakhoon. aadarniya shashibhushan ji, adarniya javahar singh jii ka vote mera bhi vote hae.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 10, 2012

    पूज्यनीय कुशवाहा जी ….. साक्षात दण्डवत बारम्बार प्रणाम ! देख कर हैरानी होती है की किस तरह से आप अपना अमूल्य समय इतने कष्टों को सहते हुए इस मंच को तथा साहित्य संगम को प्रदान कर रहे है ….. आज फेसबुक पर पिछले दिनों प्राप्त आपका एक सन्देश पढ़ा सच में ही आत्मग्लानि हो रही है की एक तरफ तो आप इतनी ज्यादा बीमारियों का सामना हौंसले से करते हुए आप हमको अपना स्नेह देने में किसी प्रकार की चूक नहीं करते है और दूसरी तरफ हम है की …. भगवान से यही प्रार्थना है की वोह आपको शीघ्रतम उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे और पहले की भांति फिर से सेहतमंद कर दे और तंदरुस्ती प्रदान करे ….. अपना ख्याल रखियेगा और दवा तथा खाना समय पर लेते रहिएगा …. आपका आभार प्रकट करने के काबिल नहीं हूँ शुभकामनाओं सहित

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
July 7, 2012

sharaddheya rajkamal sharmaa jee , saadar vande !…..aajkal yah dekhaa jaa rahaa hai ki pita kaangrs me hai to putra veejepee men to potaa vaspaa men , ab aap hee bataiye kyaa pitaa-putra aur potaa kaa naataa khatm ho jayegaa ? meraa to maananaa hai ki sahityakaar partee nirpeksha hotaa hai | shesh phir kabhee ! saadar !!

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    वोह आये घर में हमारे यह खुदा का करिश्मा है ….. यह ना थी हमारी किस्मत की विसाले यार होता गर जिंदा रहते तब भी तेरा इन्तजार होता आपने बहुत पते की बल्कि लाख टेक की बात की है ….. उनको हम अवसरवादी नेता कहते है जोकि किसी भी कीमत पर किसी भी हालात में किसी भी पार्टी की सत्ता रहने पर सत्तासुख भोगते रहते है सीधे और असिधे रूप में …… लेकिन आम जनता उनको अलग अलग समर्थन देकर खुद ही बंट जाया करती है …. लेकिन नेता लोग भीतर से एक जान रहते है …. यही फर्क है हममे और उनमे ….. शुक्रिया दिल से

Punita Jain के द्वारा
July 6, 2012

आदरणीय राजकमल जी, आप जैसे सच्चे, निष्कपट, साहसी और स्पष्टवादी लोग यदि कांग्रेस में अधिक संख्या में होते तो शायद आज देश की यह हालत न होती | आप जैसे लोगों की तो सभी राजनीतिक दलों को जरुरत है | विचार अलग हो सकते हैं, सभी के विचारों का सम्मान जरुरी है | व्यक्ति की सच्चाई, ईमानदारी और देशभक्ति महत्वपूर्ण है, भले ही विचारधारा अलग हो |

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    आदरणीय पुनीता जी …… सादर अभिवादन ! विचारों में भिन्नता भी गौण हो जाती है जब देश पर मर मिटने और कुछ कर गुजरने की बात होती है ….. कारगिल युद्ध के समय इस बात को बड़ी ही शिद्दत से हम सभी ने महसूस भी किया था ….. आखिरकार कुछ तो कामन बात होनी ही चाहिए जोकि पूरे देश के नागरिको को एक सूत्र में पिरो सके ….. स्कूल में जब हमको एक टापिक दिया जाता है की “अगर मैं देश का प्रधानमंत्री होता तो क्या क्या करता” उस पर लिखते समय दिल +दिमाग कल्पनाओं का जो खाका खींचते है उससे ही किसी की भी देश भक्ति और कुछ कर गुजरने का ज़ज्बा तथा आशाओं और सपनो का सुन्दर संसार उभर कर सामने आ पाता है ….. ऐसी कोई प्रतियोगिता अगर इस मंच पर भी करवाई जाये तो क्या बात हो ….. प्रतिकिर्या के लिए आपका बहुत -२ आभार

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
July 6, 2012

बार्डर पर एक सैनिक देश के दुश्मनों से लड़ाई लड़ता है लेकिन मैंने तो अपने खुद के घर में अपने परिवार से जंग लड़ी है ….. इसलिए मैं खुद को एक क्रांतिकारी + देशभक्त और जाबांज सैनिक मानता हूँ ….अरे आप ही नहीं गुरुदेव हम सब भी जांबाज मानते है आप को ..कांग्रेसी ही सही लेकिन जनता की सोचिये तो रूप मत बदलो अंतर तो बदलिए बड़ी अपेक्षाएं है हे कांग्रेसी भाई आप से ………. .क्या आप मुझको भी एक देशद्रोही ही मानेंगे ? कदापि नहीं काल चक्र तो चलता ही रहता है कौन जाने कल क्या हो जाए उस के लिए पूरा इतिहास क्या झूंठला दिया जाएगा नहीं जनाब ….जो सामने आता रहेगा निर्णय होता रहेगा खुले दिल से राज उगलने के लिए बधाई शुभ कामनाएं ..लेकिन इतने दिन कांग्रेसियों के खिलाफ पटाखे चलते रहे कैसे सुने आप यहाँ ??? जय श्री राधे भ्रमर ५

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    आदरणीय भ्रमर जी …… सादर प्रणाम ! मैं इस मंच पर गुटबाजी को बढ़ावा देने नहीं आया और लेखकों के बीच में खाई पैदा करना भी मेरा मकसद नहीं है ….. इस लेख को लिखने का मकसद दोनों दलों को मानने वाले समर्थकों को एक दूसरे के और करीब लाना रहा है ….. आप ही बतलाइये की किसी नेता ने घौटाला+ कोई गलत काम किया है तो मैं उसका समर्थन कैसे कर सकता हूँ …. मेरी इतनी अपील है की सिर्फ विरोध के लिए विरोध करने की बजाय सही को सही और गलत को गलत कहने की परम्परा का पालन किया जान चाहिए जोकि हम लेखकों का धर्म के साथ साथ फ़र्ज़ भी है …. आभार सहित जय श्री राधे कृष्ण !

akraktale के द्वारा
July 6, 2012

आदरणीय राजकमल जी नमस्कार, आप कांग्रेसी रहें कोई बात नहीं आप देशभक्त हैं ये जानकार हमारा सीना भी चौड़ा हो जाता है.मगर उस खुशवंत सिंह जो आपके गुरु भी हैं के लिए क्या कहें जो बेहूदा लेख लिखकर रुपयों के बल पर आज बड़ा लेखक बन गया है उसकी रगों का खून तो नहीं बदल सकता, रहेगा तो वह एक गद्दार का ही बेटा. अंग्रेजों की दी हुई ढेरों खैरात के बल पर अमीर बना अब मनमोहन जी के साथ मिलकर दिल्ली में विंडसर प्लेस का नाम अपने उसी गद्दार पिता के नाम करवाने की साजिश रच रहा है. क्या मनमोहन जी को नहीं पता की शोभासिंह का क्या इतिहास रहा है?

    आर.एन. शाही के द्वारा
    July 7, 2012

    तो श्रद्धेय अशोक जी, बस समझ लीजिये कि आपकी एक उम्दा सी क्लास लेने वाला ब्लाग अब छप कर रहेगा । कोई नहीं रोक सकता, मैं भी नहीं । मैं क्या रोक पाऊँगा, जबकि खुद एक बार खुशवन्त सिंह के खिलाफ़ टिप्पणी करने का फ़ल भुगत चुका हूँ । मैं आपके लिये मलहम की शीशी खोलकर गिरने वाले बज्र का इंतज़ार करता हूँ । वैसे मुझे इस बात का कोई अफ़सोस नहीं है कि मेरा भाई भी अन्तत: एक कांग्रेसी निकला । शुभेच्छा !!

    आर.एन. शाही के द्वारा
    July 7, 2012

    ( ऊपरोक्त टिप्पणी मात्र परिहास के लिये की गई है । कृपया कोई बन्धु इसे अन्यथा न लें । आजकल सर्वाधिक भय बातों को अन्यथा ले लेने का हो गया है । आप दोनों ही मेरे अन्तरंग हैं, फ़िर भी स्पष्टीकरण आवश्यक प्रतीत हुआ, क्योंकि पढ़ने वालों के नज़रिये को हम नहीं जान पाते । आभार । )

    akraktale के द्वारा
    July 7, 2012

    आदरणीय शाही जी सादर प्रणाम, यदि जाने वाला रुक जाए तो फिर ये वज्र भी मंजूर है.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    आदरणीय अशोक जी …… सादर अभिवादन ! आपको जिस बात पर आपति है और जिन बातों का जिक्र आदरणीय शाही जी ने किया है मैं चाहता हूँ की आप नीचे लिखे लिंक पर जाकर उस लेख को पढ़ ले तो काफी बाते साफ़ हो जायेंगी ….. http://rajkamal.jagranjunction.com/2010/10/02/%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B6-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%B6%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%A4-2/ जो बात आपने बतलाई है वोह भी बहुत ही दुखद है और संगीन अपराध की श्रेणी में आती है ….. मैं नहीं समझता की आजकल के हालात में इस तरह का कोई कुप्रयास सफल हो सकता है ….. हार्दिक आभार सहित

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    पूज्यनीय गुरुदेव शाही जी …… सादर प्रणाम ! आपका स्पष्टीकरण इस बात की तरफ साफ -२ इशारा कर रहा है की अभी भी आपकी तरफ से कुछ संशय बाकि है मेरे लाख चाहने पर भी आज तक आपने नहीं बतलाया है की आपकी उस प्रतिकिर्या में आखिरकार था क्या ?….. इसे मात्र सयोंग ही कहा जाना चाहिए की मेरा वोह लेख आपकी उस प्रतिकिर्या के पोस्ट होने के आसपास ही आया …. क्लास मैं जिन दिनों में लिया करता था उन दिनों में तो पसीना भी गुलाब था – किसी का भी लिहाज और प्रवाह नहीं होती थी ….. लेकिन आज के समय में सभी कुछ बदला हुआ है ….. अब ना तो पसीने में वोह खुशबू ही रही और ना ही वोह बेफिक्री वाला आलम तथा मस्त मौला अंदाज़ ….. हार्दिक आभार सहित

dineshaastik के द्वारा
July 6, 2012

राजकमल जी कोई पार्टी बुरी या अच्छी नहीं होती उसका संचालन करने वाले लोग अच्छे या बुरे होते  हैं। वर्तमान में काँग्रेस अपराधियों, भ्रष्टाचारियों, एवं व्यापारियों का जमघट बन गई है। आपका अपराध बोध बतला रहा है कि आप भी काँग्रेस के नेतृत्व से नाखुश हैं। काँग्रेसी विचारधारा से मैं भी प्रभावित हूँ किन्तु नेतृत्व से अप्रभावित हूँ। 

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    आदरणीय दिनेश जी …. सादर अभिवादन ! इस मामले में आपके विचार मुझसे मिलते जुलते है ….. अगर मैं काग्रेस अध्यक्ष या फिर प्रधान मंत्री होता तो अन्ना हजारे जी के जन लोकपाल बिल को हुबहू लागू करता बल्कि उससे भी कहीं उपर जाकर उसमे अपनी तरफ से भी कई और बाते भी जोड़ कर उसको और भी सशक्त बनाता क्यूंकि अन्ना हजारे और उनकी टीम की बाते आखिरी नहीं है उसके बाद भी और बहुत कुछ हो सकता है – वोह तो केवल एक शुरुआत मात्र भर है ….. आपक दिल से शुक्रिया

vinitashukla के द्वारा
July 6, 2012

राजकमल जी, कौन किस दल पर आस्था रखता है, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि वह मानवीय मूल्यों पर कितनी आस्था रखता है. आपने खुद ही कहा कि देशद्रोही का भाई भी देशद्रोही हो यह जरूरी नहीं. एक स्वस्थ लोकतंत्र में हर नागरिक को, अपनी व्यक्तिगत राय रखने की स्वतन्त्रता होती है. परन्तु आपके इस रहस्योद्घाटन का कारण कुछ समझ नहीं आया; कृपया स्पष्ट करें.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    आदरणीय विनीता जी ….. सादर अभिवादन ! इस लेख को पोस्ट करने से पहले कई रातों को मैंने बहुतेरा सोचा ….. आपकी ही तरह मेरे मन में यह भी ख्याल आये थे की क्या जनता का मेरी किसी पार्टी के प्रति धर्म के समान आस्था को जानने से कोई फर्क पड़ने वाला है …. वैसे तो आपने इस लेख को पढ़ ही लिया होगा , फिर भी अपनी नज़र से इस लेख में उठाये गए कुछेक संदेशो को आपसे सांझा करना चाहूँगा :- *जागरण को इस बात की सलाह और सन्देश देने की कोशिश की गई है की इस मंच पर सिर्फ कांग्रेस के विरोध की ही बाते की जाती है , उनमे संतुलन आना चाहिए ….. *इस मंच पर मैंने साथियों को अपनी भाजपा और संघ के प्रति आस्था तथा झुकाव को गर्व से स्वीकारते हुए सुना है , लेकिन मेरे से पहले आज तक मेरे सिवाय मैंने किसी के भी मुख से ऐसी बात नहीं सुनी …. *जब हम यह कहते है तथा मानते है की सभी नेता भ्रष्ट है तो फिर किसी पार्टी से जुड़े होने में ना तो कोई गर्व होना चाहिए और ना ही कोई हीनता तथा अपराधबोध ….. क्योंकि जिनको मौका मिला है वोह लूट रहे है और बाकी के अपनी बारी के इंतज़ार में है की कब उनको मौका मिले और वोह अपनी आने वाली पुश्तों के भविष्य को सुरक्षित करे …. *जब मैं बाकी के साथियों के उनके दूसरी पार्टियो के प्रति झुकाव को जानता हूँ तथा उनसे मित्रवत व्यवहार करता हूँ तो उनको भी मेरे बारे में इस बात को जानने देने का हक + मौका मैं देना चाहता हूँ की आखिरकार मेरा किस पार्टी के प्रति झुकाव है और सबसे बड़ी बात इसके बाद उनके द्वारा अपने प्रति व्यवहार तथा भाषा शैली का भी आंकलन करके उनकी असलियत को जानना असल मकसद है इससे झूठे दोस्तों की असलियत मेरे सामने आ सकेगी और यह बात भी साफ़ हो जायेगी की जब लीडर “अन्दरखाते” एक है तो उनकी अलग -२ पार्टी को मानने वाले आपस में किस हद तक “बाहर से” एक है …… इससे सबसे महत्वपूर्ण यह जानकारी मिलेगी की जब आम जनता लीडरों से धोखा खा कर आपस में लड़ती है तो यहाँ के तथाकथित बुद्दीजीवी इस बारे में किस प्रकार का आचरण प्रदर्शित करते है …… बाकी आप खुद ही यह बताएंगी की आपने क्या जाना और समझा है इस लेख से ?….. आपके प्रश्नों को जान कर हार्दिक प्रसन्नता हुई इसीलिए उनके उत्तर देकर मुझे मानसिक संतुष्टि तथा सकूँ मिला ….. आपका तहेदिल से शुक्रिया

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 6, 2012

अलविदा साथियों ! आपका और मेरा साथ इस मंच पर बस इतना ही था शायद …… आप सभी के द्वारा दिए गए प्यार को भुलाना इस जन्म में तो कम से कम नामुमकिन ही है ….. आज जाते -२ मैं आपकी शिकायत दूर करते हुए इस मंच से भावभीनी विदाई ले रहा हूँ…. डाक्टर राजकमल शर्मा पता :- आप सभी के शहर + गाँव और कस्बों के बस अड्डों और रेलवेस्टेशन के पास के किसी भी होटल में मिलने का समय :- हर रविवार शाम 7 – 9 एक मरीज को देखने की अवधि :- ज्यादा से ज्यादा 5 मिनट 07696477464 ( अपने दो लेखों को शैड्यूल पर लगा कर जा रहा हूँ डबल सैन्चुरी पूरी करने के लिए – आपसे प्रार्थना है की उन पर कमेन्ट मत कीजियेगा )

    Punita Jain के द्वारा
    July 7, 2012

    आदरणीय राजकमल जी, आपसे अनुरोध है कि आप यह मंच छोड़ कर न जाएँ, आप जैसे उत्साह वर्धन करने वाले, अहंकार रहित और सच के लिए बोलने वाले व्यक्ति की इस मंच को बहुत जरूरत है |

    July 7, 2012

    अब यह कौन सी नौटंकी है……………………मजाक करते-करते…………जयादा गंभीर मत हुआ करिए…………..नहीं तो कष्ट आप ही को होगा……………………….क्यों? वो इसलिए की कभी मैं आपको पराया समझ कर लड़ा ही नहीं……………..! पर लड़ाई तो मेरी जारी रहेगी ……………हाँ एक बात और……………..जाइये आपकी अनुपस्थिति में आपकी इतनी बुरे करूँगा कि चाहकर भी आप वापस लौट नहीं पाओगे…………..वैसे भी आपके पास इतनी हिम्मत भी नहीं कि मेरे रहते ……इस मंच पर आप ठहर सके………..!

    jlsingh के द्वारा
    July 8, 2012

    आज जाते -२ मैं आपकी शिकायत दूर करते हुए इस मंच से भावभीनी विदाई ले रहा हूँ…. कौन दे रहा है आपको विदाई! … जरा पता तो चले कि आपका विदाई समारोह किस दिन किस घड़ी में मनाया जा रहा है … मैं बहुत ओजस्वी भाषण भी देता हूँ … जो लोग आपको माला पहनाने की कोशिश भी करेंगे उनको मैं शब्दबाण से वेध दूंगा! डबल सैन्चुरी ….. आप तो सचिन के बड़े प्रशंशक है और और अमिताभ के भी फिर यह सेंचुरी वाली बात कहाँ से आयी????? शाही जी से शिकायत करनी पड़ेगी ….. वे ही आपकी क्लास लेंगे….. भ्रमर जी को अब मधुर गुंजार छोड़ काटना भी सीखना पड़ेगा …… बाकी फिर बाद में !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 10, 2012

    आदरणीय पुनीता जी ….. सादर अभिवादन ! आदरणीय जवाहर लाल जी …. सादर अभिवादन ! प्रिय मित्र अनिल जी …. सप्रेम नमस्कारम ! अगर मैंने नौटंकी करनी होती ती इसी बात को अपने लेख के अन्त में कहता …. यहाँ पर आप सभी से उतना स्नेह और आदर मिला जिसके की मैं खुद को काबिल भी नहीं समझता हूँ …. मेरी नौकरी अब कुछ ही दिनों की मेहमान है शायद …. नेट के कनेक्शन की एक महीने के लिए एक्सटेंशन मिल पाई है लेकिन कम्प्यूटर के इस्तेमाल के बारे में अभी भी सिथति सपष्ट नहीं है ….. पिछले दिनों ही फेसबुक पर पूज्यनीय कुशवाहा जी का सन्देश पढ़ा और जाना की किस तरह इतनी तकलीफ में भी वोह ब्लागिंग कर रहे है …. बस उन्ही से प्रेरणा लेकर इस मंच पर दुबारा से लौटा हूँ ….. देखता हूँ की भगवान और कब तक आप सभी के सानिध्य में रखता है क्योंकि होई है वोही जो राम रची रखा आप सभी के स्नेह से अभिभूत हूँ और अपनी जिम्मेवारियो का एहसास भी है ….. आप सभी का दिल से आभारी हूँ

Chandan rai के द्वारा
July 6, 2012

राजकमल साहब , मित्र कभी अच्छा बुरा का अंतर नहीं करते ,न बुरा समय देख भागते है और न ही अच्छे में बदलते है , तो हम तो आपके ऐसे ही मित्रवर है , आखिर कुछ दोस्त नालायक भी होते है हम्म ! बुरा मत मानीय अपने लिए कह रहा हूँ ?

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    प्रिय खुशबूदार चन्दन जी ….. सादर अभिवादन ! आपने एक बहुत बड़ी और तल्ख सच्चाई को बयाँ किया है ….. मैं खुद चाहता हूँ की कमेन्ट के लोभ और लालच में किसी तरह का समझौता ना किया जाए ….. बाकी आप खुद जहीन है ….. आपकी गागर में सागर रूपी प्रतिकिर्या के लिए दिली आभार

ANAND PRAVIN के द्वारा
July 5, 2012

आदरणीय गुरुदेव, सादर प्रणाम सुचना —– प्रणव दादा राष्ट्रपति की रेश में सबसे आगे चल रहें है इस सुचना के आधार पर एक और सुचना यह आई है की कांग्रेस वाले किसी योग्य + कर्मठ + दयालु + नेक + समाजसेवी जैसे दिखने वाले चरित्र की तलास में है ………….किन्तु इसके लिए कम से कम पांच सालों में दो बड़े और चार छोटे घोटाले करने का अनुभव जरुर होना चाहिए………………. गुरुदेव से पूरी उम्मीद है कि अगले वितमंत्री आप ही होंगे…………और हमें भी अपना पिए बना कुछ सेवा करने का मौक़ा देंगे…………………

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    प्रिय आनन्द प्रवीण जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! आज आपके श्री मुख से अपने गुणों और खासियतों को सुन कर मुझको अपनी छुपी हुई असाधारण प्रतिभा तथा क्षमता का ज्ञान हुआ है इसके लिए मैं ही नहीं मेरी आने वाली पुश्ते भी आपकी आभारी रहेंगी …. भविष्य के भावी वितमंत्री का आपको धन्यवाद (लेकिन मेरी नज़र हमेशा से ही मंत्रियो के प्रधान वाली कुर्सी पर रही है – राज की बात अगर समझो राज के राज को राज़ ही रहने दो )

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    July 13, 2012

    समझ सकतें है तो समझ लीजिये …………….वो कुर्सी का रास्ता इधर से ही हो कर जाता है

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 13, 2012

    पी.ए . के लिए सिर्फ लड़कियों को ही इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है ….. क्योंकि मैं चाहता हूँ की मेरी सफलता यकीनी हो जाए क्योंकि हरेक सफल आदमी के पीछे किसी औरत का हाथ जरूर होता है – हा हा हा हा हा एक बार सत्ता मिल जाए मलाई मिल बाँट कर खाने के हजारों तरीके निकल ही आते है …. हार्दिक आभार सहित

    rajkamal के द्वारा
    July 16, 2012

    priy आनन्द पर्वत जी ….. नमस्कारम ! कुर्सी के लिए मैं किसी भी हद तक जा सकता हूँ (उपर ) सिवाय पार्टी बदलने के – हा हा हा हा हा हा हार्दिक आभार

shashibhushan1959 के द्वारा
July 5, 2012

आदरणीय बॉस, जय हिंद ! आप कांग्रेसी हैं या भाजपाई / वाम पंथी हैं या दक्षिण पंथी / पूरब पंथी हैं या पश्चिम पंथी / स्वर्ग पंथी हैं या नरक पंथी / क्या फर्क पड़ता है ! आप एक नेक और भले इंसान हैं, जो हर किसी को उत्साहित करता है, उनकी कमियों को इंगित करता है ! यहाँ हम व्यक्तिगत रूप से किसीको नहीं जानते ! इस मंच पर हमारा सम्बन्ध एक वैचारिक सम्बन्ध है , न कि धार्मिक, राजनितिक या पारिवारिक ! बस आप जो हैं सो हैं, और उसी रूप में हमें स्वीकार हैं ! और उम्मीद है उसमें कोई बदलाव भी नहीं आयेगा ! जरुरत भी नहीं है ! जय हिंद !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    प्रिय शशिभूषण जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! जिस प्रकार की प्रतिकिर्या को मैं खोज रहा था + कामना कर रहा था केवल आप अकेले ही ऐसे साथी निकले जो शत प्रतिशत मेरी आशाओं पर इतना खरे उतरे है की मैं बिना किसी खटके के सभी को आपकी प्रतिकिर्या से प्रेरणा लेने की सलाह दे सकता हूँ ….. आज फिर से ना केवल आपने साबित कर दिया है बल्कि दुनिया को दिखा भी दिया है की असल में बॉस कौन है ?….. हा हा हा हा हा हा ढेरों धन्यवाद सहित

nishamittal के द्वारा
July 5, 2012

राजकमल जी कांग्रेस या कोई भी दल बस विचार और कार्य देश हित में होने चाहियें.,देश हित चिन्तक सर्वोपरि है..आपकी प्रतिक्रियाएं सदा बताती हैं कि आप कांग्रेस से प्रभावित रहे हैं,मुझको तो कोई आश्चर्य नहीं हुआ.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    आदरणीय निशा जी ….. सादर प्रणाम ! मुझको यह जानकार वाकई में ही हैरानी हुई है की आपको मेरी सच्चाई को जानने के बाद कोई आश्चर्य नहीं हुआ ….. चलिए वादा करता हूँ की कभी ना कभी आपको हैरान जरुर कर ही दूँगा ….. आप राजनीति शाश्त्र की माहिर है तो आपसे ऐसी उम्मीद तो मुझे रखनी ही चाहिए थी ….. मेरी प्रतिकिर्याये बेहद सावधानी से दी गई और नपी तुली तथा संतुलित होती है ….. फिर भी आपने उसमे कोई पक्ष या झुकाव देखा तो इसके लिए आपकी काबलियत और दूर दृष्टि का लोहा मानना ही पड़ेगा ….. सलाम सहित आभार !

alkargupta1 के द्वारा
July 5, 2012

राजकमल जी , मौके पर ही तो सच्चे दोस्त की पहचान होती है…. आप कांग्रेसी हैं तो हैं बस…..कभी कभी सच्चाई भी मधुरता का रूप ले लेती है और नयी नयी रचना करती है………

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    आदरणीय अलका जी ….. सादर प्रणाम ! एक कहावत है की बकरे की जान गई और खाने वाले को स्वाद नहीं आया ….. लेकिन आज आपको स्वाद तो मिला लेकिन मुझे उसके लिए बहुत भारी कीमत भी चुकानी पड़ी है ….. जब मेरे पक्ष वाले रिश्तेदारों और गली मोहल्ले वालों ने यह सलाह दी की मुझे अपनी शादी के बाद ही उनको छोड़ना चाहिए तो मैंने इस बात की भी परवाह नहीं की ….. जब साबित ही हो गया की अमुक व्यक्ति हमारा दुश्मन है फिर चाहे वोह कोई भी क्यों ना हो , उसका परित्याग करने में कैसी हिचकिचाहट और किस बात की देरी ?…. मुझे खुशी है की मेरी सच्चाई भी आपको लज्जत दे गई ….. अगली बार आपको कल्पना के सहारे कुछ हंसाने की कोशिश करूँगा ….. क्योंकि सच्चाई की हांडी बार बार नहीं चढ़ती , मेरे लिए काम तो आखिरकार उसी ने आना है हर बार की ही तरह – हा हा हा हा हा हा हार्दिक आभार सहित

Santosh Kumar के द्वारा
July 5, 2012

आदरणीय गुरुदेव ,..सादर प्रणाम सच्चाई हमेशा कड़वी नहीं होती है ,..आप कांग्रेसी हैं यह अच्छी बात है ,.हिन्दुस्तान में बहुत लोग कांग्रेस के समर्थक हैं ,..कांग्रेस में महान नेता भी रहे हैं,.. लेकिन इस सच्चाई से कोई इनकार नहीं कर सकता कि इस पार्टी ने बहुतेरी बुराइओं को जन्म दिया है और एक व्यक्ति/खानदान की छाया में अपने सभी उसूलों (शायद होंगे भी ) को मिटटी में मिलाया ,..अब इसका मिटना ही देश के हित में है .. कांग्रेस का समर्थक होना कोई गुनाह नहीं है ,.लेकिन सच्चाई और बुराई जानने+समझने +महसूस करने के बाद उसका साथ देना वाकई गुनाह होगा ,.. औरों के साथ ही नहीं बल्कि खुद के साथ भी,..अब समय आ गया है कि आप खुद को कांग्रेसी मानना छोडकर सच्चाई ही स्वीकार करें और सच्चाई यह है कि आप एक देशभक्त हैं ,..और हमेशा रहेंगे ,…सादर आभार सहित (इंटरनेट की रफ़्तार तेज करने का कोई उपाय हो तो कृपया bataiye )

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    प्रिय संतोष जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! आपकी बातों और सलाह से ऐसा लग रहा है की आपने इस लेख को पूरा पढ़ा नहीं है शायद …. अगर पढ़ा होता तो आप इस तरह से नहीं कहते …… मैंने इस मंच पर लेखक के विचारों+ विषयवस्तु की बजाय उसके स्तर + प्रवाह + शैली विकास को बढ़ावा दिया है ….. मैं बाबा रामदेव की बजाय सिर्फ अन्ना हजारे जी का समर्थक हूँ ….. बाबा रामदेव ने प्रकाश सिंह बादल + मुलायम सिंह का समर्थन हांसिल किया है …. लीडर कोई भी हो भ्रष्टाचार में कोई भी किसी से कम नहीं है ….. अगर उनका उद्देश्य एक भ्रष्टाचारी को जड़ से उखाड़ कर उसकी जगह पर किसी दूसरे भ्रष्टाचारी को स्थापित करना है तो मैं नहीं समझता की उनका रास्ता ठीक है ….. कांग्रेस पार्टी के विकल्प के रूप में मेरे सामने सिर्फ और सिर्फ अन्ना हजारे जी ही है ….. लेकिन सत्ता हांसिल करने से पहले ही दोनों महानुभावों के खुद के और उनकी टीमों के अहम और महत्वाकांक्षाए उन पर हावी हो गई है ….. जब सत्ता की चाह किसी को भी नहीं है तो फिर मिल कर लड़ाई लड़ने और उसके श्रेय दूसरे को देने वाला जिगर इनके पास क्यों नहीं है ?….. http://rajkamal.jagranjunction.com/2010/12/12/%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A1-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9B/ आपका बहुत बहुत आभार

    Santosh Kumar के द्वारा
    July 13, 2012

    आदरणीय गुरुदेव ,..सादर प्रणाम आपने सही पकड़ा है ,.प्रथम बार में इस पोस्ट को उस गंभीरता से नहीं पढ़ पाया जिसकी आवश्यकता थी ,.इस गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ ,..लेखन विकास में आपका प्रोत्साहन और समर्थन हमेशा अनमोल रहा है ,.रहेगा ,…आपकी बात से पूर्णतया सहमत और कोटिशः आभारी हूँ ,..विकल्प दोनों महानुभावों को मिलकर निकालना चाहिए ,..पुनः हार्दिक आभार

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 13, 2012

    प्रिय संतोष जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! आप अपने एंटीवायरस को हमेशा अपडेट करके रखियेगा और पूरे सिस्टम को स्केन भी करते रहिएगा इसके इलावा डिस्क क्लीन अप द्वारा फ़ालतू की फैले भी साफ़ करते रहे ….. control + alt +delete तीनों बटन को एक साथ दबाने पर जब टास्क मैनेजेर नजर आएगा तो आप जान सकेंगे की कितने प्रोग्राम और फाइलें सक्रिय है ….. इनमे से गैर जरूरी को निष्क्रिय क्र दे तो भी स्पीड बढ़ाने में मदद मिलेगी …. ************************************************************************************************************* मेरे विचार एक सीमित चक्कर (दायरे ) में रहते है शायद मेरी जीवन शैली के कारण लेकिन यह देख कर खुशी होती है की मेरे बहुत से साथी खुले दिल और दिमाग से विचारों को सुन्दरतम विस्तार दे रहे है …. जब जीवन की दिशा बदलेगी + दशा बदलेगी तो सोच का नजरिया भी बदल ही जाएगा खुदबखुद ही ….. तब तक इसी तरह झेलना पड़ेगा मुझको – हा हा हा हा हा हार्दिक आभार सहित

jlsingh के द्वारा
July 5, 2012

बंदउ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास कांग्रेस अनुरागा।।

    sinsera के द्वारा
    July 6, 2012

    काहे को आप रामचरितमानस के पीछे पड़ गए हैं भाई साहब ….

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    आदरणीय जवाहर लाल जी ….. सादर अभिवादन ! मैं खुद आपसे पूछने ही वाला था की यह लाइने आखिरकार आपने उठाई कहाँ से है ….. चलिए इस समस्या को तो सरिता बहिन ने हल कर ही दिया है ….. अब तो आपसे बस इतनी सी गुजारिश है की इसका भावार्थ भी अगर बता देते तो मुझको मेरी औकात पता चल जाती – हा हा हा हा हा आभार सहित

    jlsingh के द्वारा
    July 9, 2012

    भावार्थ और पंक्ति का उद्गमस्थल आप नहीं जानते हैं, यह मैं नहीं मानता. पर मेरा भावार्थ यही है कि आप जैसे भी हैं, जिस पार्टी से भी सम्बन्ध रखते हैं, या न रखते हैं … आपका मुझसे गुरु-शिष्य का रिश्ता है और रहेगा. आप इस मंच को छोड़ने का ख्याल भी दिल में न लायें. हाँ आपके आलेख में इधर हास्य व्यंग्य में ‘हास्य’ का अभाव दिख रहा है, जिसके हम सब मुरीद हैं…… पहले बहुत सारे लोग आपको प्रतिक्रिया देने से पहले अपनी हंसी को शांत कर लेते थे, तब प्रतिक्रिया लिखते थे. गुरुवर समय का अभाव अगर है, तो कोई बात नहीं पर अलविदा … भाव भीनी विदाई … न बाबा न ! आपने अपने अथक प्रयास से शाही जी को वापस बुला लिया और अब आप अलविदा कहने लगे …. नहीं सर !…. आपकी औकात बताने लगूँ यह मुझमे सामर्थ्य कहाँ ???? आप गुरु थे,गुरु हैं और गुरु रहेंगे. बीच बीच में भूचाल या सुनामी आती है. फिर सब कुछ सामान्य हो जाता है यही तो जिन्दगी है महोदय … यह सब मुझे आपको बताना पड़ेगा? सड़क पर चलते हैं तो कहीं सड़क बहुत अच्छी मिलती है, तो कही हिच्खोले देने वाले गड्ढे भी तो रहते ही हैं न!…… इसलिए आपकी वंदना करता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि आप यथासंभव मंच से सम्बन्ध बनाये रक्खें! आभार सहित – जवाहर.

July 5, 2012

सादर प्रणाम! “ऐसे साथियों से मैं खुद पूछना चाहता हूँ की कल को अगर मेरा सगा भाई देश द्रोही बन जाए (वैसे कल को अगर वोह बन जाए तो मुझको कोई हैरानी नहीं होगी – बस उसको एक अवसर मिलने भर की देर है ) तो क्या आप मुझको भी एक देशद्रोही ही मानेंगे ?…..” अब तो लोग जान ही गए हैं कि आप का और मेरा 36 का आकड़ा हैं…………..औरों का तो पता नहीं ………पर मैं तो जरुर मानूंगा नहीं, मानता हूँ………..क्योंकि देशभक्ति के संचें में ढला जाय तो पता चलेगा कि ९९.९९९९ % भृत्य देश द्रोही हैं औइर निश्चय ही उसमे से……….. आप और मैं भी हूँ…………. आपको नहीं लगता कि इस धरती पर जाति, क्षेत्रवाद, राष्ट्रवाद और आतंकवाद जैसे वाद बहुत हो चुके…………….क्यों न कुछ नया किया जाय …..नयापन विचारों में, नयापन लड़ने और झगड़ने में, नयापन……………बस नयापन……….

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    अलीन जी ….. नमस्कारम ! आपको हमेशा लड़ाई झगड़ा और तोड़ फोड़ ही सूझती है क्या ?….. अब नयापन कहाँ से लेकर आये ?….. एक ही रास्ता है की आप अपने वाली से और मैं अपनी वाली मनमाफिक लड़की से शादी कर लूँ और आप उसके सामने मुझे हूर के साथ लंगूर और मैं आपको उसके सामने बन्दर के गले में मोतियों की माला , कहूँ …. जहाँ तक तेरी यह नजर है मेरी जान मुझको खबर है धन्यवाद

    July 9, 2012

    हाँ…..हाँ…..हाँ……! खबर हमेशा सच नहीं हुआ करती……….!

sinsera के द्वारा
July 5, 2012

राजकमल भाई साहब , नमस्कार, कभी कभी तो सीधे सीधे कुछ कह दिया करिए…पता नहीं क्यूँ ये पापी मन आप की रचनाओं में रहस्य खोजने लग जाता है. आप आत्मा की कहते हैं तो हमें परमात्मा की सुनाई देती है. लेकिन आप कांग्रेसी हैं तो अपराध-बोध से क्यूँ ग्रसित हैं..सच्चाई कहने के लिए आप को साधुवाद और आप को प्रेरित करने वाली बहन को धन्यवाद..

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 8, 2012

    सरिता बहिन ….. सादर अभिवादन ! उस बहिन का नाम खुद बताना नहीं चाहता , लेकिन उनकी सलाह मिले हुए कई महीने हो चुकने के बाद काफी सोच विचार के बाद अब यह कदम उठाया है ….. अपराध बोध वाली कोई बात नहीं है , बल्कि इस मंच का माहौल ही कुछ इस तरह का बनता चला गया है की आज तक किसी को मैंने सीना ठोक कर यह कहते नहीं सुना है की हाँ मैं कांग्रेस पार्टी का समर्थक हूँ ….. इसीलिए मैंने आज यह पहल की है ताकि बाकी के लोग भी सामने आये …. क्योंकि कांग्रेस पार्टी का समर्थक होना कोई अपराध नहीं है ….. आजके जो हालात है उनमे जो भी पार्टी सत्ता में आएगी उसके नेता गण अपने काले कारनामों से अपनी पार्टी की छवि को भारी आघात पहुंचाएंगे और अपने समर्थकों तथा पार्टी के शुभचिन्तको को शर्मशार करते रहेंगे ….. जिन रहस्यों की तलाश में आप लगी हुई है उनका खुलासा उपर आदरणीय विनीता जी को दिए गए जवाब में करने की कोशिश की है मैंने प्रतिकिर्या के लिए हार्दिक आभार


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