RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

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“महिलाओं का रिमोट कंट्रोल”

Posted On: 8 Jun, 2012 में

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“ऊ लहंगा उठावे रिमोट से” भोजपुरी गाने का यह मुखड़ा ही नहीं बल्कि पूरे का पूरा गाना और इसकी कोरिओग्राफी भी मुझको बहुत ही अच्छी लगती  है ….. यह गाना कल्पना के साथ -२ मजाक का भी पुट लिए हुए है ….. लेकिन हकीकत में भी हमारे आसपास की जिन्दगी में यही सब कुछ तो हो रहा है …..

जब से नारी जाति में शिक्षा के प्रति जागरूकता आई है और उसने अपने मुबारक कदम अपनी घर की दहलीज से बाहर  निकाले है उसके बाद से ही उसका ज्यादातर रिमोट पुरुषों ने अपने हाथ में रखने की कोशिश की है तो किन्ही विशेष परिस्थितियों में उसने खुद ही पुरुषों के हाथ में चाहे और अनचाहे , अनजाने में ही अपना रिमोट सिस्टम सौंप दिया है …..

अपने नम्बर बढ़वाने + पास करवाने की ऐवज में  कभी भूले भटके वोह खुद ही , और  ज्यादातर मामलों में जबरन उसका रिमोट कलियुगी शिक्षकों द्वारा अपने हाथ में ले लिया जाता है ….. उसके बाद नौकरी का नियुक्ति पत्र पाने + तरक्की पाने के लिए भी महिलाए अपना रिमोट पुरुषों के हाथ में स्वेच्छा से देती रही है ….. रिशेप्शनिस्ट तथा पर्सनल सेक्रटरी की पोस्ट पर कार्यरत महिलाओं से तो यह आशा हर हाल में की ही जाती है + रखी जाती है की वोह अपने बॉस के रंग में रंग कर उसकी  चहेती बन कर दिखलाये …..

महिलाएं किसी भी क्षेत्र में चली जाए बस उनसे एक ही आशा रखी जाती  है और बस एक ही अपेक्षा की जाती  है ….. महिलाए किसी भी जगह पर सुरक्षित नहीं है यहाँ तक की धार्मिक स्थलों पर भी धर्म के ठेकेदारों ने धार्मिक स्थलो की मान मर्यादा को बार बार भंग किया है तथा वहां पर भी औरतों की इज्जत को तार तार किया है ….. दुःख की बात है की किसी भी धर्म के धार्मिक स्थान इन कामो से अछूते  नहीं है , और आजकल के आधुनिक ढ़ोंगी और पाखण्डी बाबाओं के तो कहने ही क्या ?….. शिकायत मिलने पर इनके डेरों से अक्सर ही छापामारी में अश्लील सामग्री  के साथ साथ लड़किया मिल जाती  है जिनकी आत्मा तक का कंट्रोल स्वामी जी के हाथ में पकडे अद्रश्य रिमोट में समाया होता है …..

और अगर हम राजनीति की बात करे तो इसके बारे में एक बड़ी ही मशहूर कहावत है की “लुच्चा लफंगा चौधरी और बदनाम औरत प्रधान” ….. इस क्षेत्र में कोई विरली ही महिला होगी जिसका की रिमोट किसी नेता के हाथ में ना हो …. आप सोचते होंगे की सब कुछ पता होते हुए भी औरते इस क्षेत्र में अपनी किस्मत क्यों आजमाती है ….. इस फील्ड  में पैसा + शोहरत और सत्ता का आकर्षण इनको अपनी तरफ खींचता है ….. लेकिन अपने अकेली के बलबूते भी शायद ही किसी ने राजनीती में प्रवेश किया हो + पैर रख कर अपना मुकाम बनाया हो ममता दीदी की तरह ….. उनको शुरुआत में या फिर बाद में किसी ना किसी पुरुष का सहारा लेना ही पड़ता है कुमारी जयललिता और कुमारी मायावती की तरह ….. और इस फील्ड के यह घाघ नेता इनका क्या हश्र करते है यह खुद इनके इलावा कोई भी नहीं जानता …..

राजनीति के बाद बात आती है माडलिंग तथा फ़िल्मों से जुड़े हुए  क्षेत्र की ….. इसमें नारी कितनी सुरक्षित है यह किसी से कहने या बताने की जरूरत नहीं है ….. लेकिन यहाँ पर उसका रिमोट अलग अलग समय में अलग -२ पुरुषों के हाथो में बदलता रहता है ….. बड़े पर्दे पर दिखने की चाहत  की बात तो रहने दीजिए हमारे बुद्धू बक्से में प्रसारित होने वाले धारावाहिकों में भी रोल देने के नाम पर पर्दे के पीछे बहुत कुछ होता है …..

इसके बाद बारी आती है जबरन वैश्याव्रती के धन्धे में धकेल दी  गई महिलायों की …. अपने पिछले जन्म के पापों की सज़ा भुगत रही उन बेचारियों के एक ही समय में अनेको हाथों में रिमोट कंट्रोल रहते है जैसे की कोठे वाली बाई और दलाल वगैरह तथा इस पेशे से जुड़े हुए गुंडों के हाथों में …. लेकिन आजकल की  आधुनिक हाई फाई सोसाइटी की देन  कालगर्ल देखने में चाहे अपनी मर्जी से इस धन्धे में आई हुई दिखती हो लेकिन असल में उसका रिमोट भी किसी ना किसी रूप में किसी पुरुष के हाथ में ही होता है ……

और मुझको सबसे ज्यादा दुःख तो तब होता है जब मै इस प्रकार की खबरों को पढ़ता हूँ की शादी / नौकरी  का झांसा देकर शारीरिक शोषण / बलात्कार  करता रहा” ….. मै नौकरी वाले केसों में कुछ करने में तो खुद को लाचार पाता हूँ लेकिन शादी के नाम पर अपने जिस्म और रूह का रिमोट कंट्रोल पराये पुरुष को देने वाले केसों के बारे में मेरी ऐसी सभी महिलाओं को यह नेक सलाह है की आप अपने घर बैठे हुए ही मेरे नाम की चुनरिया ओढ़ कर मेरे नाम का सिंदूर अपनी मांग में सजा सकती है और अपने नाम के साथ मिसिज राजकमल शर्मा लगा सकती है , मुझको इस बात में ऐतराज़ की बजाय खुशी ही होगी …. उसके बाद अगर आपको मुझसे ज्यादा कोई योग्य वर मिल जाता है तो आप स्वेच्छा से उस के गले में वर माला डाल  कर मुझसे अलग हो सकती है , मेरा आशीर्वाद हमेशा ही आपके साथ रहेगा ….. लेकिन आज के बाद मुझको  अखबार में शादी के नाम पर शारीरिक शोषण की खबर नहीं मिलनी चाहिए …..

शादी के नाम पर शोषित सभी महिलायों का बिना वरमाला के रिमोट कंट्रोल धारी

राजकमल शर्मा

( आजकल के समय में अपने घर परिवार में पूरी इज्जत से अपने पति परमेश्वर के हाथों में अपनी इज्जत रूपी  गहने का रिमोट कंट्रोल थमाने वाली  औरत सबसे ज्यादा भाग्यशाली तथा खुशकिस्मत है – ऐसी सभी पतिव्रता नारियों को मेरा नमन )

“महिलाओं  का  रिमोट  कंट्रोल”

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42 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sinsera के द्वारा
June 13, 2012

आदरणीय राजकमल जी, नमस्कार, बात बिलकुल सच्ची है…. दुखद है…. शर्मनाक है… हद है….

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 20, 2012

    बात ती वाकई ही चिंताजनक + लज्जाजनक और विचारणीय है आपके समर्थन के लिए हार्दिक आभार बहिन जी

minujha के द्वारा
June 12, 2012

राजकमल जी नमस्कार हमेशा की तरह आपने एक  विचारणीय मुद्दा उठाया है,आज  आर्थिक संपन्नता हासिल करना हर  किसी के लिए  इतना अहम  हो गया है कि नैतिकता की सीमा लांघना छोटी बात है, पर ये पतन का सिलसिला कब और कहां रुकेगा …….,ये गहन सोच का विषय है..बढिया लेखन

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय मीनू जी …… सादर प्रणाम ! हमारे समाज का बदलता हुआ ढांचा और सोच में तथा रहन सहन में आ रहा बदलाव तथा इसके इलावा और भी बहुत से कारण है जोकि इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेवार होते है ….. जो शोषित है जब उसको ही परवाह नहीं है खुद की तो शोषणकारी का तो काम ही है इस तरह के कुक्र्त्यो को अंजाम देना ….. लिव इन रिलेशनशिप वाली बात भी इसी श्रेणी में आती है ….. आपका समर्थन पाकर धन्य हुआ हार्दिक आभारी हूँ आपका

anoop pandey के द्वारा
June 12, 2012

आदरणीय राज कमल जी, सादर नमन……….. आपने ये नहीं बताया की “ऊ लहंगा उठावे रिमोट से” में बाला का नृत्य था की नहीं. शोषण होता है या फिर कभी कभी जान बूझ कर इसे बढ़ावा दिया जाता है? हमारे साथ की एक सुश्री जी अपने अन्य अधिक योग्य साथियो के साथ नौकरी पर आने के बाद भी उनसे दो प्रमोशन ज्यादा पा चुकी हैं…..फिल्मो की बात न ही की जाये तो अच्छा………..और अब कालगर्ल से ऊपर भी एक श्रेणी है एस्कोर्ट , जिसका ताज़ा तरीन आई पी एल काण्ड हम देख चुके हैं………..क्या वो भी शोषित हैं?

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    प्रिय अनूप जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! यह भोजपुरी गाना नगमा और रविकिशन पर फिल्माया गया है और इसके शुरूआती बोल है “नवगा जुग का हई जमाना का करी कोर्ट कचहरी थाना” जब इस गाने में “इतना फैशन ई स्टाइल” वाली लाइन आती है तब डांस वाकई में देखने के काबिल होता है ….. किसी अफसर की पी.ऐ. मेरे सामने ही कोड वर्ड में किसी दूसरी महिला से बाते कर रही थी “आप एक बार सत्संग में आकर तो देखिये , वहां पर हमारे विभाग के बड़े -२ आफिसर भी आते है , इसी तरह से तो जान पहचान बढ़ती है ….. उन मोहतरमा की खुद की असलियत मुझ पर कई साल के बाद खुली और तब कहीं जाकर इन बातों का मतलब मेरी तुच्छ बुद्दी में आ सका ….. हार्दिक आभार

chaatak के द्वारा
June 11, 2012

प्रिय राजकमल जी, आपकी पोस्ट पढ़कर स्त्रियों के प्रति जो आपकी संवेदनशीलता है बहुत ही स्पस्ट रूप में नज़र आई| लेकिन कुछ पंक्तियों ने जैसे “मेरी ऐसी सभी महिलाओं को यह नेक सलाह है की आप अपने घर बैठे हुए ही मेरे नाम की चुनरिया ओढ़ कर मेरे नाम का सिंदूर अपनी मांग में सजा सकती है और अपने नाम के साथ मिसिज राजकमल शर्मा लगा सकती है” ने नारी शक्ति में आपके अल्प विश्वास को जाहिर किया है| मेरे ख्याल से आपने व्यंगात्मक अंदाज़ में नारियों को बड़ी अच्छी सलाह दी है कि आप रिमोट कंट्रोल किसी के हाथ में ना दें भले ही वह राजकमल शर्मा ही क्यों न हो! अच्छी पोस्ट पर बधाई !

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय चातक जी ….. सादर अभिवादन ! बेशक मेरी असली मंशा बिलकुल इसी तरह की ही है …. और लिखते समय मेरे खुद के मन में इस बात का डर था की कही मेरी सिर्फ और सिर्फ शोषित नारियों + अपना शोषण करवाने को आतुर + उत्सुक और तैयार बर तैयार नारियो के बारे में कही हुई बातों को सभी महिलाओं के सन्दर्भ में ना देख लिया जाए + समझ लिया जाए ….. इसीलिए लेख के अंत में पतिव्रता नारियो वाले पैरे को बाद में जोड़ना पड़ा था ….. और जिन लाइनों की तरफ आपने इशारा किया है केवल उसी डिब्बे के बलबूते पूरी गाड़ी जनरल से हास्य व्यंग्य में शामिल+ तब्दील हो सकी है ….. दिल की सभी तहों से आभार सहित

vasudev tripathi के द्वारा
June 11, 2012

राजकमल जी, आज के सच को बड़ी ही सफाई से लिखा है आपने.! किसी भी रूप में सच तो यही है.. फिल्मो में बड़ी सफलता के पीछे का तो यही राज कई बार सामने आ चूका है.! इसका समाधान भी कठिन है क्योंकि भौतिकता की अंधी दौड़ ने नैतिक अपराधबोध को नष्ट ही कर दिया है||

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    प्रिय वासुदेव त्रिपाठी जी ….. वंदे मातरम ! किसी जमाने में इस तरह के रास्ते को फ़िल्मी लाइन में शार्टकट कहा जाता था ….. लेकिन आजकल तो सभी रास्ते इसी मोड़ से होकर ही जाते है बल्कि इसके इलावा और कोई दूसरा रास्ता बचा ही नहीं है ….. लेकिन कई बार दिमाग यह सोच कर चकरा भी जाता है तो दूसरी तरफ सकूँ भी मिलता है की पांचो उंगलिया बराबर भी नहीं है ….. क्योंकि अगर ऐसा होता तो फिर फिल्म स्टार अपनी बेटियों को इस लाइन में कदापि नहीं डालते …. खैर यह सभी हमारे अंदाज़े है असली राज तो इस फ़िल्मी नगरी के वासी ही जानते है जोकि इस सब को झेलते है …. आपके अमूल्य विचारों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद

yogi sarswat के द्वारा
June 11, 2012

राजकमल जी नमस्कार ! अगर आपके लेख को पढ़कर आपकी बातों से सहमति दिखता हूँ तो conservative हो जाने का डर है , नहीं दिखता हूँ तो आपकी दबंगई का डर ! फंस गया ! लेकिन आपकी दबंगई झेल पाना ज्यादा आसान लगता है ! मैं ऐसे सोचता हूँ की हर महिला इस तरह से बर्ताव नहीं करती , बहुत हैं जो अपना काम बनाने और आगे बढ़ने के लिए कुछ भी करने को तैयार बैठी हैं ( विशेष रूप से मोडलिंग और फिल्मों के सन्दर्भ में ) किन्तु एनी क्षेत्र में महिलाओं ने अपने आप को प्रूव किया है बिना किसी सहारे और रिमोट के ! कहीं कहीं आपकी बातों से सहमति सी लगाती है ! बेहतरीन लेख !

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    प्रिय योगी सारस्वत जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! आपके बाद आदरणीय चातक जी ने भी इसी तरह की आशंका प्रकट की है तो इससे यह जाहिर हो रहा है की जरूर मैं अपनी बात कहने + पक्ष रखने में पूरी तरह से सफल नहीं रहा हूँ ….. मैं इस बारे में आपसे सिर्फ इतनी ही इल्तजा करनी चाहता हूँ की जिन नारियों का शोषण हुआ है फिर भले ही उसके लिए वोह खुद या फिर कोई पुरुष ही क्यों ना जिम्मेवार रहा हो , सिर्फ उन्ही के बारे में इस लेख में जिक्र किया गया है …. जो एक आम+खास भारतीय पतिव्रता नारी की तरह अपनी जिन्दगी गुजार देती है , उन सभी नारियो से इस लेख का कोई भी लेना देना नहीं है ….. और सबसे बड़ी बात तो यही है की औरत की सफलता और असफलता की बजाय उसके शारीरिक शोषण पर ही पूरा ध्यान दिया गया है …… आपका तहे दिल से शुक्रिया राजकमल शर्मा सारस्वत ब्राह्मण

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 11, 2012

आदरणीय राज कमल जी, सादर अभिवादन सर जी आप कितने नंबर का चश्मा लगाते हैं. जो सब कुछ साफ़ दीखता है लगता है आप वो ही लिखते हैं जो बाजार में बिकता है . विवाह के सन्दर्भ आपका त्याग देख कर हसीनाओं का दिल धडकता है. बधाई. आपने भी क्या किस्मत पायी.

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    पूज्यनीय कुशवाहा जी ….. सादर प्रणाम ! यकीनन आज की तारीख में मुझको भी चश्मे का सहारा लेना ही पड़ जाता , लेकिन पिछले छह महीने से जबसे मैंने आँखों में नवरत्न + डाबर तेल की दो बुँदे उंगलियों के पौर से सुबह शाम लगानी शुरू की है मुझको बहुत ही आराम और सकूँ प्राप्त हुआ है ….. अगर आप पिछले सप्ताह का जागरण सम्पादकीय विभाग का सर्वश्रेष्ठ ब्लागर (पांचो में एक ) देखंगे और जागरण जंक्शन के फॉर्म के इस सप्ताह के विषय को देखेंगे तो पायेंगे की दोनों ही सन्नी लियोन पर आधारित है ….. लेकिन मैंने तो सन्नी लियोन पर आधारित लेख काफी महीने पहले लिखा था , इसलिए मैं बाज़ार के हिसाब से नहीं बल्कि वक्त से पहले का लिखता हूँ – हा हा हा हा हा हा आपका आशीर्वाद रूपी स्नेह पाकर मन हर्षित हुआ हार्दिक आभार

R K KHURANA के द्वारा
June 11, 2012

प्रिय राज कमल जी, जब जब नारी ने लक्षमन रेखा लांघी है उसका रिमोट किसी और के हाथ में चला गया है ! बहुत अच्छा लेख ! राम कृष्ण खुराना

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय चाचा जी …… सादर प्रणाम ! इधर काफी अरसे से आपकी कोई रचना देखने को नहीं मिली ….. यह पुराने समय की बात थी की नारी को लक्ष्मण रेखा को लाघने पर बहुत ही भरी कीमत चुकानी पड़ती थी …. लेकिन आजकल तो बिना किसी कसूर के भी सिर्फ नारी होने के अभिशाप को भी उसको झेलना पड़ जाता है …. इसका करान सिर्फ यही है बाजारवाद जिसके कारण हर कोई तो नहीं लेकिन ज्यादातर सिर्फ उसको एक उपभोग की वस्तु ही समझता और मानता है कोई भी उसकी पीड़ा और उसके ज़ज्बातो के बारे नहीं सोचता और ना ही विचार करता है ….. आपसे स्नेह और आशीर्वाद पाकर मन गदगद हुआ हार्दिक आभार

आर.एन. शाही के द्वारा
June 11, 2012

वैसे तो आज की आधुनिकाएं स्वयं बाहुबली हैं, और कोई पुरुष उन्हें क्या सुरक्षा प्रदान करेगा, कोई चाहे तो अपनी सुरक्षा के लिये खुद इनकी सेवाएं हायर कर सकता है । बशर्ते कि वे सेवा बेचने के लिये इच्छुक हों । आप शायद पुराने समय की जीवित महिलाओं की चर्चा कर रहे हैं, या फ़िर उनकी, जिन्हें अपने रूढ़िवादी संस्कारों की जकड़न में क़ैदकर आत्मविश्वास के मामले में खुद हमने ही कमज़ोर बना कर रखा है । कम से कम आधुनिकाएं तो हमारे बारे में कुछ ऐसे ही विचार रखती प्रतीत होती हैं । आगे आप सक्षम हैं भाई साहब, चाहें तो जींस ब्रांड की किसी महिला के समक्ष सुरक्षा का प्रस्ताव रखकर मेरी बात के सत्यापन की जाँच कर सकते हैं । धन्यवाद ।

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    पूज्यनीय गुरुदेव शाही जी ….. सादर प्रणाम ! जिन अबलाओं का शोषण हो चूका है और जो सबलाये अपना शोषण खुद ही करवा चुकी है या फिर करवाने को आतुर है , यहाँ पर मैंने सिर्फ उन्ही महान नारियों के बारे में ही कहना चाहा है ….. सरेआम तो ऐसी बाते फिल्मों में ही होती है लेकिन असल जिन्दगी में आपसी सहमति + जोर ज़बरदस्ती पर्दे के पीछे ही होती है ….. इसलिए किसी को कोई सलाह देना + सुरक्षा की बात करना बेहद ही रिस्की काम है ….. शोषण का शिकार होने जा रही सभी ऐसी नारियो को भगवान मेरे जैसा पति दे यदि वोह भी संभव नहीं तो फिर उनको सद्बुद्धि दे तथा उनकी छठी इंद्री को इतना बलशाली कर दे की वोह पुरुषों की नापाक निगाह और इरादों को जान सके + पहचान सके , लेकिन मेरे बारे में हमेशा ही धोखा खा जाए…… इस मंच पर आपकी क़र्ज़ की दूसरी किस्त मिल गई है उसके लिए भी आपका डबल आभार लेकिन पहली किस्त पर प्राप्त प्रतिकिर्याओ का जवाब ना दे पाने का आपने संगीन जुर्म कर लिया है किरपा करके उसका प्रायश्चित समय रहते जरूर कर लीजियेगा …. आपका बहुत -२ धन्यवाद और आभार

akraktale के द्वारा
June 10, 2012

आदरणीय राजकमल जी सादर नमस्कार, अच्छा है आदमियों का रिमोट औरतों के हाथ में और औरतों का रिमोट आदमियों के हाथ में. टीवी कभी नहीं कहता की मेरा रिमोट लो और मुझे संचालित करो, वह तो जिसके पल्ले पड़ गया उसी पर निर्भर हो जाता है, फिर उसकी मर्जी कहाँ चलती है. आपकी मनोकामना पूर्ण करने के लिए खोली गयी “राजकमल की चुनरी” और “राजकमल के सिंदूर” वाली मेरी दूकान खूब चल निकलेगी. गंभीर मुद्दे पर आपका व्यंगात्मक लेखन अच्छा लगा. जय श्री राधे.

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय अशोक जी ….. सादर अभिवादन ! कम से कम इस मामले में तो मैं आपका हितैषी बिलकुल भी नहीं हूँ ….. मैं कभी भी नहीं चाहूँगा की आपकी इस तरह की दुकानदारी सफल हो – हा हा हा हा हा हा टी.वी. और बीवी में अक्सर ही बहुत सी समानताये बतलाई जाती रही है ….. लेकिन इनमे एक निर्जीव है तो दूसरी सजीव , इसी कारण महिलाओं से यह अपेक्षा रखी जाती है की वोह अपना खुद का रिमोट या तो खुद के हाथ में रखे या फिर अपने भाई + पिता और पति के हाथ में ही रहने दे …. भूल कर भी किसी पराये पुरुष के हाथों में कठपुतली की तरह ना खेले और ना ही अपना इस्तेमाल होने दे ….. आपसे गुजारिश है की किसी दूसरे धन्धे के बारे में सोचिये….. दिली आभार सहित

satish3840 के द्वारा
June 10, 2012

जय श्री श्याम राजकमल जी / बहुत ही अच्छे से लिखा हें आपने / बात सही कि जिस प्रकार एक पुरुष का रिमोट कंट्रोल एक स्त्री के हाथ होता हें उसी प्रकार हर सफल औरत के पीछे एक पुरुष का हाथ होता हें चाहे वो मायावती हों या जयललिता या कोई और / आपका -”शादी के नाम पर शोषित सभी महिलायों का बिना वरमाला के रिमोट कंट्रोल धारण करना आपके लिए कोई घाटे का सौदा नहीं हें / आपने एक व्यापरी की तरह एक खुली ऑफर देकर अपनी सेल बढाने का सही इंतजाम आकर लिया हें /

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय सतीश जी …… सादर प्रणाम ! आजकल सलाह तो हर कोई बिन मांगे दे देता है लेकिन पति के रूप में अपना नाम देना बहुत ही रिस्की काम है ….. यह कितनी बड़ी विडंबना है की मैं दिल से चाहता हूँ की पूरे भारतवर्ष में एक भी नारी (इस प्रकार की ) अपनी मांग में मेरे नाम का सिंदूर और तन पे ओढ़नी ना पहने …… लेकिन मेरे चाहने या ना चाहने से क्या होता है ….. “होश आता है उनको सब कुछ लुट जाने के बाद जुड़ता नहीं है कांच एक बार टूटने के बाद गर खुद का ही रख ले बहकने वाली नारिया ध्यान फिर काहे को करने पड़े मुझ को ऐसे उलटे सीधे काम” मेरी सेल चाहे ज्यादा हो लेकिन स्वीकार्यता कम है – और उसके लिए तो बालो में सफ़ेद लटो के आने तक इंतज़ार करना ही होगा मुझको -हा हा हा हा हा आपका तहेदिल से शुक्रिया

mparveen के द्वारा
June 10, 2012

राजकमल जी नमस्कार, अब क्या कहें ?? आपकी तो जितनी तारीफ की जाये कम है … आपके विशाल हृदय के तो क्या कहने … मुबारक हो ……

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय परवीन जी ….. सादर अभिवादन ! आपके तो ब्लॉग की ही टैग लाइन है “हम भी कुछ कहे” और उस पर आप ही ऐसी बात करेंगी की हम क्या कहे ? हम क्यों कुछ कहे …. तो फिर मेरे जैसो का तो भगवान ही मालिक है – हा हा हा हा हा हा हा मेरे ह्रदय की विशालता का असली फायदा मेरी बजाय शादी के बहकावे में आकर अपना सर्वस्व लम्पट +कपटी +मक्कार + धोखेबाज़ पुरुषों के हवाले करने वाली नारियो को होगा ….. हार्दिक आभारी हूँ आपका

चन्दन राय के द्वारा
June 10, 2012

राजकमल जी , आपका ये परोपकारी रिमोट कंट्रोल रूप , गर किसी अबला नारी का भला करता है तो , अपने जैसे और रिमोट कंट्रोल का आविष्कार कर दीजिये , “महिलाओं का रिमोट कंट्रोल” के अविष्कारक महान हास्य व्यंग वैज्ञानिक “राजकमल शर्मा ” २२ वी सदी के पुरोधा !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 13, 2012

    प्रिय खुशबूदार चन्दन जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! यह बहुत ही दुखद हालत है की नारिया शादी करवाने का झांसा देने वाले पुरुषों को शादी से पहले ही अपना तन और इज्जत रूपी गहना सौंप देती है ….. कम से कम इसके लिए तो वोह खुद ही जिम्मेवार है इसलिए इस मामले में उन पर हमदर्दी की बजाय वयंग्य ही तो किया जाना चाहिए ….. आपकी सराहना के लिए आपका दिल से आभार (भगवान ना करे की किसी को भी मेरी तरह से कदम उठाना पड़े )

jlsingh के द्वारा
June 10, 2012

आदरणीय महोदय, नमस्कार! चाकू तरबूजे पर गिरे या तरबूजा चाकू पर नुक्सान हमेशा तरबूजे का ही होता है … इससे ज्यादा मैं क्या कहूं . बहुत बड़े परिवर्तन की आवश्यकता है ….. आपकी तर्कसंगत रचना को समझने की जरूरत है …..आपका आभार !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय जवाहर लाल जी ….. सादर अभिवादन ! जब मैं शायरी किया करता था उस समय की दो लाइनें पेश करता हूँ :- “वोह खुद को छुरी और दूसरों को खरबूजा ऐसे ही नहीं कहते है वहां पर कटने वाले तो कटते ही है काटने वाले भी कट जाते है” आपका बहुत -२ शुक्रिया

allrounder के द्वारा
June 9, 2012

नमस्कार भाई राजकमल जी, थोडा सा हटके मगर सच्चाई से काफी सटके है आपका ये रिमोट कण्ट्रोल :) इसके लिए बधाई के पात्र हैं आप ! आभार सहित !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 13, 2012

    प्रिय सचिन भाई …… सादर अभिवादन ! कुछ हटके लिखने के चक्कर में कितने ही साथी थोड़ा दूर हट गए है तो ज्यादातर को प्रतिकिर्या देने में संकोच होता है ….. यह तो भला हो फीचर्ड विभाग वालों का की कभी कभार अपनी किरपा दृष्टि मुझ गरीब पर भी डाल देते है जिसके कारण थोड़ा बहुत भाव ऐसे लेखों को मिल जाता है और साथियो का समर्थन ….. आपने स्नेह देने के लिए आपका दिल की गहराईयों से आभार

vinitashukla के द्वारा
June 9, 2012

यदि स्त्री न चाहे, तो उसके साथ; यूँ ही कोई बदसलूकी नहीं कर सकता. किन्तु अपवाद भी हैं; औरत को अकेली पाकर उसे अपना शिकार बनाना, विकृत मानसिकता वाले पुरुषों के लिए आम बात है. अब तो नैतिकता का इतना पतन हो चला है, कि लोग अपने ही घर की स्त्री का सौदा करने लगे हैं. व्यंग्य का पुट लिए हुए एक विचारणीय प्रश्न.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय विनीता जी ….. सादर अभिवादन ! आपने नैतिकता की बात कही है तो मुझे अपने लेख की एक कमी पता चली है जिसकी तरफ इसको लिखते समय भी ध्यान जरूर गया था लेकिन मैंने उन बातों को शामिल करना उचित नहीं समझा ….. कई बार सगे भाई और चचेरे + मौसेरे +फुफेरे + ममेरे भाईओ तथा कई बार सगे और सौतेले बाप द्वारा भी रिश्तों की मर्यादा को तार तार करके कलयुग की प्रबलता का एहसास करवाया जाता है ….. आपका तहे दिल से शुक्रिया

nishamittal के द्वारा
June 9, 2012

नारी का शोषण सभी क्षेत्रों में है कहीं आवश्यकता के कारण वो शोषित है,तो कहीं अपनी ऊंची महत्वाकांक्षाओं के कारण .

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय निशा जी …. सादर प्रणाम ! आपने बिलकुल सही कहा है लेकिन इसके इलावा उसकी मजबूरी के फायदा भी उठाया जाता है तो अनेको बार इसमें उसका कोई भी कसूर नहीं होता सिर्फ हालात का शिकार बनना पड़ जाता है उसको ….. हार्दिक आभार सहित

Punita Jain के द्वारा
June 8, 2012

सही कहा आज भी महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पूरी तरह सुरक्षित नही हैं | अच्छा और गंभीर लेख |

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय पुनीता जी ….. सादर अभिवादन ! सबसे ज्यादा दुखद और चिंताजनक बात यही है की धार्मिक जगहों पर भी यह खुद को सुरक्षित नहीं रख पाती है …. अगर हम सभी लोग इनकी दशा को सुधारने और ऐसे हालातों को बदलने की दिशा में थोड़ा बहुत भी गंभीर होकर कुछ ना कुछ प्रयास करेंगे तो निश्चित रूप से इनके शोषण में कमी आएगी …. आपका बहुत आभार

jyotsnasingh के द्वारा
June 8, 2012

प्रिय राजकमल जी, लेकिन आप कितनो का उद्धार करेंगे.सिर्फ एक ही बिचारी तो आप को वर माला पहना पायेगी ,लेकिन आप की अगर माने तो स्त्रियों को फिर से परदे में ही चला जाना चाहिए .हाँ ये बात तो आपकी सही है की तार्राकी वगैरह के चक्कर में वो खुद अपना रेमोते कण्ट्रोल दोसरे के हाथ में दे देती है,पर क्या उसके साथ छल करने वाला खुद भी नहीं छाला जाता.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय ज्योत्सना सिंह जी ….. सादर अभिवादन ! मैंने अपने इस लेख में सिर्फ महिलायों के शोषण के मुद्दे को उठाया है उसका शोषण करने वाला तो हर हाल में पुरुष होता ही है हाँ यह अलग बात है की ज्यादातर जगह पर उसकी मर्जी + मज़बूरी और लाचारी होती है तो बहुत ही कम जगह पर बिना उसकी मर्जी के उसकी + बलात उसका शोषण किया जाता है …. आज के वक्त में औरत को घर की चारदीवारी के भीतर पर्दे में कोई भी शक्ति रोक कर नहीं रख सकती है …. जिस हिसाब से परीक्षाओं में लड़को के मुकाबले लड़किया बाज़ी मार ले जाती है (कई बार तो सौ में से इक्यासी ) आने वाले वक्त में हरेक आफिस में इनका ही बोलबाला होने वाला है ….. अपनी सुरक्षा और आन बाण शान के लिए इनको खुद ही सजग रहना होगा ….. आपका तहे दिल से शुक्रिया

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 8, 2012

आदरणीय राजकमल जी,क्या खूब लिखा है,रिमोट कंट्रोल के बारे में.पितृसत्तात्मक परिवारों में परिवार का रिमोट पिता या वरिष्ठ पुरुषों के हाथों में होता है,अपने यहाँ ज्यादातर यही तरह के परिवार हैं.जनजातीय समाजों में मातृसत्तामक परिवार होते हैं.इनमें रिमोट स्त्रियों के हाथों में होता है.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय राजीव जी …… सादर अभिवादन ! ऐसा लगता है की आप इस लेख को पढ़ नहीं सके है समयाभाव के कारण …. इसमें महिलाओं के शोषण के बारे में कहा गया है फिर चाहे उसके लिए वोह खुद जिम्मेवार हो या फिर कोई दूसरा पुरुष ….. प्रतिकिर्या के लिए आपका बहुत -२ आभार

dineshaastik के द्वारा
June 8, 2012

आदरणीय  राजकमल  जी आपने वास्तविक  स्थिति का चित्रण  किया है। यह एक  नंगा सच  है। क्या इसके दोषी हम  आप भी नहीं हैं जो बदलाव  को सहजता से स्वीकार नही करते। हमारे मंदिरों में तो देवदासी प्रथा  को पुजारियों की काम  पिपासा को शांत  करने के लिये चलाया गया था। राजाओं का एक  से अधिक  शादी करना हमारे वैदिक  धर्म  के विपरीत  था। लेकिन  हम  अपनी अधार्मिक  निष्ठा के कारण  आज  भी उसे अनुचित नहीं कह पाते।

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय दिनेश जी ….. सादर अभिवादन ! (इस बार आपके ब्लॉग पर मेरी प्रतिकिर्या पोस्ट नहीं हो पाई ) मुझमे और दूसरों में क्या अंतर है यह मुझको आज तक पता नहीं चल पाया ….. मैंने तो एक बार अपने किसी परिचित से इसी देवदासी प्रथा और देवी येल्लमा के बारे में कुछ कहने की गुस्ताखी की थी , लेकिन उसके बाद मुझको जो अनुभव हुए उनके कारण मुझको नाक रगड़ कर माफ़ी मांगनी पड़ी ….. मैंने भी इस बारे में किताबों में कम और अखबारों में ज्यादा पड़ा है ….. इसलिए इस बारे में कुछ भी कहने में मैं लाचार हूँ …… हाँ आपकी इस बात से सहमति रखता हूँ की महिलाओं की वर्तमान दुर्दशा के लिए सीधे और असिधे रूप में हम सभी ही कम या फिर ज्यादा जिम्मेवार है ….. प्रतिकिर्या के लिए हार्दिक आभार


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