RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

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"यौन संबंधों की आयु सीमा में वृद्धि – एकतरफा प्रस्ताव या सामाजिक जरूरत-Jagran Junction Forum"

Posted On: 5 Jun, 2012 में

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एक शादीशुदा लड़का अपनी कुंवारी साली से बड़ी ही बेबाकी + बेशर्मी से कह रहा था की भूख दो तरह की होती है एक पेट की और दूसरी बदन की , तुमको इस समय कौन सी भूख सता रही है ? …… यह केवल एक की ही बात नहीं है बल्कि ज्यादातर युवाओं की सोच और विचार दूषित हो चुके है ….. इसी निम्न स्तर की सोच के कारण देवर भाभी तथा जीजा साली के रिश्ते की मर्यादा में सबसे ज्यादा गिरावट आई है ……

आजकल के बच्चे अपने के पूर्ववर्ती बच्चों के मुकाबले मानसिक रूप से कहीं ज्यादा और इतना जल्दी परिपक्व हो जाते है की अक्सर ही माँ बाप को उनके सवालों का जवाब देना दुष्कर कार्य लगता है ….. हमारे बदल रहे समाजिक ढ़ांचे + नेट के इस्तेमाल और उस पर उपलब्ध हर तरह की अश्लील सामग्री तक युवाओं की पहुँच + ग्लैमर वर्ल्ड का आकर्षण तथा माडल्स की चकाचोंध भरी जिंदगी और बस अड्डों पर बिकते सस्ते किस्म के सचित्र साहित्य तथा मोबाइल में डलवाई जाने वाली नीली फिल्मों की बेहद कम दामों में आसानी से उपलभ्धता के कारण बच्चों और युवाओं में शादी के बाद वाली जिन्दगी के अनुभवों को शादी से पहले अनुभव करने का रुझान तेजी से बढ़ता जा रहा है …..

के चलते ब्वायफ्रेंड तथा गर्लफ्रेंड रखना + लिव इन रिलेशनशिप में रहना + डेटिंग करना जैसे कार्य अब धड़ल्ले से सरेआम होने लग पड़े है ….. इस सब के चलते हम दुविधा में पड़ गए लगते है ….. ना तो हम इसका विरोध कर पा रहे है और ना ही समर्थन ….. इसलिए एक बीच का रास्ता तलाशने की जरूरत महसूस करते हुए सहमति से आपसी सम्बन्ध बनाने की उम्र की समय सीमा तय करने के लिए कानून बनाने जैसी बाते हो रही है ….. क्योंकि यदि ऐसी बात नहीं होती तो शादी से पहले किसी भी तरह के सम्बन्ध को अनैतिक और अमर्यादित तथा असमाजिक मानते हुए इस पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग करते हुए सिर्फ शादी के बाद पति परमेश्वर से सम्बन्धों को ही मान्यता प्रदान की जाती …… लेकिन अगर आप इसको बदलते हुए समय की आवश्यकता मान कर इसमें छूट देने ही जा रहे है तो माँ बाप को मानसिक रूप से इस बात के लिए तैयार होना पड़ेगा …. तब माँ बाप इस बात को मानेंगे की और कहेंगे की हाँ मेरे बच्चे अभी तो सिर्फ आपसी सहमति से सम्बन्ध बनाने के काबिल हुए है इनकी शादी में तो अभी देर है …..

लड़की भी अपने अठाहरवे जन्मदिन का बेसब्री से इंतज़ार करेगी और लड़के तो बैठे ही इसी ताक में होंगे की गली मोहल्ले और शहर की किस लड़की ने अपना अठाहरवा जन्मदिन मना लिया है या फिर मनाने के करीब है …..

कहाँ तो हम लोग ग्यारह साल तक की लड़कियों को माता की कंजक मान कर नवरात्रों में पूजा करते है और दूसरी तरफ नापाक इरादे तथा मंसूबो वाले नीच पुरुष पर जब शैतान की सवारी आ जाती है तो वोह कामान्ध होकर इतना नीचे गिर जाता है की उसको इस बात का भी ख्याल नहीं रहता की जिसका वोह शोषण करने जा रहा है वो छह महीने की है या फिर छह साल की ….. उम्र का ख्याल तो किसी हद तक विवेकवान और पढ़े लिखे तथा संस्कारी लोग ही रखेंगे ….. लेकिन जो लोग अनपढ़ तथा असहनशील है उनसे किसी भी तरह की समझदारी की आशा व्यर्थ है …..

इसी के साथ -२ यह भी कहना चाहूँगा की जहां पर आग दोनों तरफ ही बराबर लगी हुई हो वहां पर भी उम्र का ख्याल कौन माई का लाल रखना चाहेगा ….. फिर भी अगर कम उम्र की लड़कियों की सुरक्षा के मद्देनजर कोई कानून बनता है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए ….. केवल कानून बना देने भर से जिम्मेवारी खत्म नहीं हो जाती …. उसको सख्ती से लागू करना तथा दोषियों को सख्त से सख्त सज़ा देना जिससे की इसी तरह की मंशा पाले हुए दूसरे पुरुषों की इस तरह के कुक्र्त्य करने की हिम्मत ही ना हो सके…..

अब फिर से घूम फिर कर भूख पर आते है ….. जिसको बदन की भूख लगी है वोह यह नहीं देखेगा की मैंने कच्चे फल का स्वाद चखना है या फिर पके हुए का क्योंकि उसको तो सिर्फ अपने पेट को भरने से मतलब होता है …. कई बार तो मझको समाजसेवियो के बेतुके तर्क पढ़ कर हंसी आ जाती है जब वोह कहते है की आज तो अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है कम से कम आज तो पुरुषों को महिलाओं से बलात्कार और जोर जबरदस्ती जैसी घिनौनी हरकते नहीं करनी चाहिए थी …. अरे भाई लोगों जिनको अपना काम करना है वोह आपके किसी खास दिन से बंधे हुए नहीं है…. और ऐसे काम में ना तो छुट्टी का तो कोई मतलब है और ना ही व्रत रखने की कोई तुक ……

महिलाए हमेशा ही कहती रहती है की हम पुरुषों से किसी भी मामले में कम नहीं है + पीछे नहीं है + उनसे कमतर नहीं है इसलिए उनसे बराबरी का हक तथा समान अवसर चाहती है ….. लो भाई आपकी इस मांग को मद्देनज़र रखते हुए अब पुरुषों द्वारा उम्र की एक तय समय सीमा से कम उम्र महिलाओं से आपसी सम्बन्ध बनाने के सफल और असफल प्रयासों को बलात्कार की श्रेणी में रखा और माना जाएगा फिर भले ही वोह मर्जीकार ही क्यों ना हो .….

हमे फख्र करना चाहिए की अब हम पिछड़ेपन की श्रेणी से निकल कर अति आधुनिक की श्रेणी में प्रवेश करने की तरफ एक और कदम बढ़ाने जा रहे है …..

बाइसवी सदी के आधुनिक भारत का एक नागरिक

राजकमल शर्मा

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33 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jyotsnasingh के द्वारा
June 18, 2012

प्रिय राजकमल जी , आपके इस आलेख पर मैंने भी कमेंट्स भेजे थे पर वो दिखाई नहीं दिए,ये कंप्यूटर मियां मेरे साथ बहुत हेरा फेरी करते रहते हैं.खेर उम्र की तो क्या कहें आपको पता ही होगा की विश्व की सब से छोटी माँ केवल ५ वर्ष की थी,सोचिये तो ज़रा उस मासूम बछि पर क्या गुजरी होगी जो स्वयं ही गोद में उठाने लायक थी.और जो आजकल बछो को दिखाया जाता है मीडिया में वो तो बच्चों को समय से पहले ही परिक्व बना रहा है,पर केवल दैहिक स्टार पर ही मानसिक परिपक्वता तो अभी आई नहीं होती.khair मेरे vichar में ladke लडकिय और परिवार जब मानसिक और शारीरिक,एवं सामाजिक तौर पर तैयार हों.सर्कार कुछ भी नहीं कर पाती जब उस की नाक के नीचे बाल विवाह होते हैं .ताले चोर डाकुओं के लिए नहीं होते.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 20, 2012

    आदरणीय ज्योत्सना जी ….. सादर अभिवादन ! जहाँ तक मेरी जानकारी में है एक अट्ठारह या उन्नीस साल की लड़की दादी भी बनी थी ….. इससे बड़ा ज़ुल्म कोई नहीं हो सकता ….. वोह लड़की शायद किसी अफ्रीकन देश की थी …. आजकल तो मिडिया के कारण बाल विवाह के प्रति लड़कियों में इतनी जागरूकता आ रही है की वोह रिश्तेदारों + पुलिस का सहारा ले रही है और खुद ही सभी के सामने बरात को लौटा रही है ….. यह विरोध की प्रवृति अपने पाँव दसो दिशाओं में फेलाए यही कामना है मेरी ….. हार्दिक आभार सहित

आर.एन. शाही के द्वारा
June 14, 2012

यह पोस्ट कैसे ओवरलुक होकर आउटडेटेड हो गई जान नहीं पाया । साँरी भाई साहब, क्या करूँ, एकाएक प्रोफ़ेशनल ज़िन्दगी में आए बदलावों से सबकुछ गड्डमड्ड हो जा रहा है, व्यवस्थित नहीं हो पा रहा हूँ । ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मंच के साथियों के साथ उनकी न्यायोचित ड्यूज को निभा नहीं पा रहा हूँ । देखें ऐसा कबतक चलता है । खेद सहित बधाई ।

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 20, 2012

    आदरणीय शाही जी ….. सादर प्रणाम ! सुबह का समय तो सिर के लिए रिजर्व होना चाहिए ….. किसी की भी पोस्ट किसी से भी छूट सकती है …. हर कोई हरेक की सभी पोस्ट्स पर प्रतिकिर्या नहीं दे सकता ….. आप शुरू से ही कम मगर गुणवतापूर्ण लिखते रहे है इसी लिए मेरी कोशिश रहती थी और अब भी होगी की जब भी आपकी कोई पोस्ट आये उस पर पिछली कसरे निकाल ली जाए ….. जुबली कुमार जी को कहा कुछ था और उन्होंने कर कुछ और दिया है ….. आपकी रचना को लौटाने की बजाय अपने ब्लॉग से रिपोस्ट कर दिया है ….. आपका हार्दिक आभार

satish3840 के द्वारा
June 10, 2012

नमस्कार राज कमल जी बहुत अच्छा लिखा हे आपने / बधाई

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    आदरणीय सतीश जी ….. सादर प्रणाम ! जब आप जैसे उच्च कोटि के व्यंग्यकार ने मेरी रचना को सराहा है तो मेरा फूल कर कुप्पा हो जाना स्वाभाविक ही है ….. यह लेख कुछ ऐसे विषय पर है की इस पर समर्थन मिलना एक टेढी खीर है ….. इस लिहाज से आपका डबल आभार

bharodiya के द्वारा
June 9, 2012

राज कमलभाई नमस्ते भूखे को कच्चे पक्के से क्या लेना देना—कुदरत का नियम तो ईस से भी क्रुर है । कुदरत ने नर और मादा बना के छोड दिया, ना कोइ बहन, ना भाई, ना मां, ना बाप । उसमें रिश्ते नाते, उमर या समय का कोइ बंधन नही, सिर्फ ईच्छा ही महत्व की है । आदमी ने देखा ईस का परिणाम घातक है । एक मादा के लिए नरों में लडाई होती है । आदमी ने अपनी बुध्धि के कारण कुदरत के नियम को नियंत्रित किया और लग्नप्रथा की खोज की । एक नर के लिए एक मादा, एक आदमी के लिए एक स्त्री । यही एक रास्ता बचा था आदमी के पास जीस से मानव समुदाई सुख-शान्ति से रह सके । वेस्ट तो चल पडा है कुदरत ही और और चाहता है ईस्ट भी ऐसा ही करें । लेकिन ईस्ट है जो अपने सामाजीक ढांचे को तोडना नही चाहता । ईस्ट की लालची सरकारों को खरीदा जाता है ईसे तोडने के लिए । तलाक को आसान बनाने का कानून एक द्रष्टांत है हमारे सामने । ईस्ट के बुध्धिजीवीयों को भी भरमाया जाता है । ईस का सबूत है की ईन दिनों भारत के रीवाजों को लेकर कुछ लेख भावुकता पूर्ण तरिके से जेजे में चिपकाये गये हैं । बेटी सिर्फ भारत में ही पराई होती है ? दुसरे देश घरमें ही ब्याहते हैं ? सिर्फ भारतिय रिवाजों को नीचा दिखाने की चाल है – जो कोइ समजना नही चाहता, भावना में बह जाता है । सरकार की बात करें तो उन का अलग एजेन्डा है । तरह तरह की वोट बैंक की तरह नारी समुदाय भी एक अच्छा वोट बैंक बन सकता है । ईस के लिए दिखाना पडता है की हम आप के तारणहार है । सरकार के अनुसार कहें तो १८ के अंदर की लडकी को ही संरक्षण की जरूरत है । १८ के बाद नही, चाहे जो करना हो उस के साथ करलो । १८ के अंदर के लडके से कोइ ३० साल की औरत अपना काम निकाल ले तो कोइ तकलीफ नही । लडकों को संरक्षण की जरूरत नही है । -

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    प्रिय भरोदिया जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! हमारे समाज में कभी किसी समय शुरुआत में ऐसी अनैतिक व्यवस्था रही होगी अज्ञानता वश लेकिन बाद में इस भूल को सुधार लिया गया ….. लेकिन आपकी कही हुई बात अप्सराओं पर लागू होती है ….. जब अर्जुन ने अपने पूर्वजों से संसर्ग कर चुकी अप्सरा का प्रणय निवेदन ठुकरा दिया था तो उसने उसको एक साल के लिए किन्नर बन जाने का श्राप दे दिया था ….. और रही बात नाबालिग बच्चियों की तो उनके बारे में परिवार और समाज तथा सरकार सभी को ही सोचना तथा करना चाहिए ….. लेकिन जो बड़े हो गए है उनमे तो अपना भला बुरा सोचने की खुद ही क्षमता आ गई है …. लेकिन केवल इसी बात को सोच कर उनको उनके हाल पर छोड़ा नहीं जा सकता ….. बाकि सरकार कानून बनाती है तो वोह कितने लागू होते है और किस तरह से होते है इस बात को आप और मैं तथा बाकी के सभी लोग भली भांति जानते है ….. अगर इस तरह के कानून बनाने है तो फिर फारेन कंट्री की तरह से सुविधाए भी दी जाए जहाँ पर की किसी बच्चे द्वारा फोन का एक बटन दबाने पर ही पुलिस तुरंत हाजिर हो जाती है और उसके माता पिता तक को उनकी औकात में ले आती है ….. आपका हार्दिक शुक्रिया

yogi sarswat के द्वारा
June 9, 2012

राजकमल जी नमस्कार ! आपका , अपनी बात कहने का ढंग बहुत बढ़िया लगता है ! इस लेख को भी आपने पूरी ठसक के साथ स्पष्ट विचारों में लिखा है ! बिंदास , बेबाक !

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    प्रिय योगी जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! अपने इस लेख को पसंद किया जान कर अच्छा लगा मेरे शुरूआती लेखों में यह बात बहुत ही ज्यादा मात्रा में होती थी ….. लेकिन फिर बाद में फीचर्ड विभाग तथा महिला ब्रिगेड का ख्याल रखते हुए समय समय पर कई बदलाव लाने पड़े ….. अब लिखते समय बाकी की बातों का भी ध्यान रखना पड़ता है खास कर दिव्या बहिन के मिलने के बाद से ….. आपका दिल की गहराइयों से शुक्रिया

R K KHURANA के द्वारा
June 9, 2012

प्रिय राज जी बेबाक और खुले विचार ! अच्छा लेख ! आशीर्वाद राम कृष्ण खुराना

    rajkamal के द्वारा
    June 13, 2012

    पूज्यनीय चाचा जी ….. सादर प्रणाम ! मैं आपके नक़्शे कदम पे चलने की कोशिश करने वाला थोड़ा बहुत व्यंग्य करने वाला हूँ इसीलिए हमारी लाइन एक ही होने के कारण आप मुझको किसी दूसरे की बजाय कहीं जयादा बेहतर समझ सकते है ….. आपके मूल्य विचार रूपी आशीर्वाद पाकर तो रूह को सकूँ मिलता ही है अब यही उम्मीद है की आप अपनी कोई नई रचना से हमको परिचित जरूर करवाएंगे ….. दिली आभार सहित

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 8, 2012

बिंदास एवं विचारणीय आलेख.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 8, 2012

    आदरणीय राजिव जी ….. सादर अभिवादन ! यह बिंदासपन ही मेरी पहचान रहा है जिससे की मैंने कभी भी समझौता नहीं किया था शुरुआत में लेकिन अब थोड़ा बहुत सोचना पड़ता है कभी कभी इसीलिए किसी लेख में कुछ बदली -२ तस्वीर नज़र आ जाती है …. आपकी सराहना के लिए तहेदिल से शुक्रिया

June 6, 2012

सादर प्रणाम! आप कहे परेशान है …..आप तो शादी-सुदा नहीं हैं न………………..हाँ….हाँ…हाँ…..! कुछ बुरा कह दिया क्या…? ठीक है फिर शिकायत कर दीजिये या फिर डिलेट…………..!

    June 6, 2012

    एक बात कहना ही भूल गया……………….क्या करार थप्पड़ मरे हैं समाज की मानसिकता पर……………….! दिल गार्डेन- गार्डेन हो गया + मजा आ गया + पूछिये मत +अब आगे आप फ्री हैं मेरी शिकायत करने के लिए+ यदि निष्कासित नहीं हुआ तो – मेरी बात रखने का यह अंदाज हमेशा इस मंच पर ऐसे ही रहेगा + राम-राम चलते हैं- गर्मी यहाँ बढ़ती ही जाएगी…………….!

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 8, 2012

    अनिल जी ….. नमस्कारम ! मुझे आपके प्रिय आनन्द प्रवीण जी के प्रति अभद्र शब्दावली वाले कमेन्ट से बहुत ही ठेस पहुंची थी जिसमे की आपने यहाँ तक कह दिया था की अगर तुम मेरे सामने होते तो चांटा रसीद कर देता ….. आपकी इस बात को इस मंच का एक भी ब्लागर अगर सही कह दे तो मैं आपको माफ करने को तैयार हूँ …. लेकिन उससे लिए आपको प्रिय आनन्द प्रवीण जी से क्षमा मांगनी होगी फिर मैं आपके उन बेहूदा कमेंट्स को भूलने की कोशिश कर सकता हूँ जोकि आप मेरे ब्लॉग पर समय समय पर करते रहे है ….. मुझे बहुत ही दुःख से कहना पड़ रहा है की अगर आप खुद में सुधार नहीं लाना चाहते तो मैं आपको भविष्य में अपने ब्लॉग पर नहीं देखना चाहूँगा धन्यवाद

akraktale के द्वारा
June 6, 2012

आदरणीय राजकमल जी नमस्कार, आपने सही कहा है की भूखे को कच्चे पक्के से क्या लेना देना.” नींद ना देखे टूटी खाट, और भूक ना देखे झूठी भात.” मगर उम्र के नियम से इन भुक्कड़ों को कठोर दंड तो दिया ही जा सकता है.दूसरा आज का सबसे ज्यादा चिंतित करने वाला चेहरा है देश भर से हजारों मासूम बच्चियों का गुम होना जो की गलत धंधे में लगा दी जाती हैं यहाँ पर भी इन लड़कियों को बचाने में यह क़ानून काफी मदत्गार साबित हो सकता है.हम इस वय वृद्धि के सभी पहलुओं को समझें तो अच्छा होगा. होहहीं वही जो राम रची राखा. नाहक उलझने से क्या है.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 8, 2012

    आदरणीय अशोक जी ….. सादर अभिवादन ! आपने जिन लड़कियों का जिक्र किया है उन बेचारियों को किडनैप करके उनको तगड़ी खुराक खिलाई जाती है और दुधारू पशुओ से ज्यादा दूध निकालने में मददगार इंजेक्शनो को लगाया जाता है ताकि कम उम्र में ही उनका ज्यादा शारीरिक विकास हो सके ….. जब एक ग्यारह साल की लड़की अठारह साल की दिखलाई देने लगती है तो फिर उसको अच्छी कीमत पर आगे बेच दिया जाता है ….. मेरा भारत महान हार्दिक आभार

Santosh Kumar के द्वारा
June 6, 2012

आदरणीय गुरुदेव ,.सादर प्रणाम आपकी सभी पोस्टों से हटकर यह पोस्ट अलग और विशेष लगती है ,..बड़ी अजीब बात हो रही है ,..मैं जवाहर जी की बात दोहराऊंगा …मुझे तो पहले का ज़माना याद आता है जब शादी बचपन में हो जाती थी किन्तु यौन सम्बन्ध उचित उम्र पर ही बनते थे ,..अब उल्टा हो रहा है ,..खैर ,.भगवान् भला करे ,..स्त्री पुरुष पर यही कहूँगा की अभी पिछले दिनों जे एन यु में एक लड़की ने अपनी सहेली और उसके मित्र के अन्तरंग द्रश्य मोबाईल में खींच लिए ,..पकडे जाने पर लड़के को तीन तथा लड़किओं को एक साल के निलंबन की सजा हुई ,..यह भी अजीब बात है ,.गुनाहगार बराबर के सजा अलग अलग ,..सादर आभार

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 8, 2012

    प्रिय संतोष जी ….. स्प्रेम नमस्कारम ! इस लेख की शुरुआत में जिस लड़की की बात हुई है उससे मेरी शादी की बात उसके जीजा ने चलाई थी लेकिन मैं दुविधा में पड़ गया था …. पहले सोचा की शादी के बाद उसका अपने घर पर आना बन्द कर दूँगा लेकिन फिर सोचा की कहे को इस झंझट में पड़ा जाए ….. इसलिए इनकार कर दिया था और अब वोह छह महीने के बच्चे की माँ है और अपने पति के साथ खुश है …. इसी सच्चाई तथा कुछेक और बातों के कारण आपको यह लेख कुछ अलग हटके लगा हो सकता है ….. लड़के बेशर्म तथा ढीठ होते है जबकि लड़किया शर्मीली और संकोची ….. शायद इसी कारण सजा में अंतर रहा हो …. लेडिज फर्स्ट का नियम ऐसे ही तो नहीं ना बन गया था …. लड़कियों के भावी भविष्य को ध्यान में रख कर अगर उनको कुछ छूट दी जाती है तो ऐसे फैसले लेने वाले समझदार लोगों की दाद देनी चाहिए हमको ….. बाकि आप खुद समझदार है …. आपका हार्दिक धन्यवाद

चन्दन राय के द्वारा
June 6, 2012

राजकमल साहब सरकार के ये कानूनी नियम उसी तरह है जैसे शराब बिक तो रही है ,पर उसे पीना गुनाह है , मतलब की गर आप किसी पार्टी में अल्कोहल ले रहे तो इन्तजार करिय नशा उतरे नहीं तो कटवाए चालान ! और ये तो बस फिजूल का कानून है , मुझे इसकी कोई जरुरत दिखाई नहीं देती

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 9, 2012

    प्रिय खुशबूदार चन्दन जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! सबसे पहले तो हमारे देश में शिक्षा और जागरूकता की कमी तथा उसके बाद जनता को कानून की जानकारी ना होना तथा फिर उसके बाद सरकारी मशीनरी द्वारा उन कानूनों को सख्ती से लागू ना करना एक बड़ी समस्या है …. दिनोदिन (हर पल ) बढ़ती आबादी तथा पुलिस और जजो तथा अदालतों की बेहद कमी इस प्रकार की समस्याओं को और भी विकराल बना देती है …. आपका इस तरह चिंतातुर होना वाजिब है लेकिन जब जन जन जागेगा तब ही सुधार आयेंगे आपका बहुत बहुत शुक्रिया

MAHIMA SHREE के द्वारा
June 6, 2012

आदरणीय गुरुदेव .. नमस्कार , बहुत दिनों बाद आपकी सार्थक और समसामयिक बेबाक आलेख पढने को मिला .. बहुत सही …. सहमत और वाकई में विचारणीय प्रश्न …. सभी बिन्दुओ को आपने छुआ … बधाई

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 9, 2012

    आदरणीय महिमा श्री बहिन जी ….. सादर अभिवादन ! ज्यादातर बिन्दुओ को छूने की मैंने कोशिश की होगी लेकिन सभी तक पहुँच कभी भी नहीं बना सकता हूँ …. वैसे इसी प्रयास में इसमें कुछेक गलतिया भी हो गई है जैसे की लिव इन रिलेशनशिप वाली बात जैसी …. उसका इस लेख के मूल मुद्दे से कोई ताल्लुक नहीं है …. खैर आदमी गलतियों से ही सीखता है …. अगर किसी मुद्दे को जागरण ने चर्चा के लायक समझ कर उस पर बहस तथा सभी के विचार आमंत्रित किये है तो वोह विषय तो खुदबखुद ही विचारणीय हो ही जाता है ….. इस विषय पर अगर एक महिला अगर कुछ लिखती है तो उसको ज्यादा साहसिक कदम मना जाता है और माना जाना भी चाहिए , जैसे की तमन्ना जी ने किया है …. हार्दिक आभार सहित

allrounder के द्वारा
June 6, 2012

नमस्कार भाई राजकमल जी , इस विंदास विषय पर इतना और इतना अच्छा लिखा आपने की अब इस मानवीय क्रिया और कभी – कभी अमानवीय क्रिया की प्रतिक्रिया मैं क्या लिखूं मैं ?) :) :) :) आपको हार्दिक बधाई !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 9, 2012

    प्रिय सचिन भाई ….. सप्रेम नमस्कारम ! आप तो जानते ही है की अगर विषय बिंदास ना भी हो तो भी मेरी कोशिश उसको ऐसे रंग में ही रंगने की रहती है ….. जागरण के दिए गए विषय पर मैं नहीं लिखता हूँ , लेकिन आपकी गैरहाजरी में इस मंच का माहौल बहुत ही विषाक्त हो गया था तो सोचा की कुछ अलग कर के क्यों ना देखा जाए …. अब देखिये ना इसी विषय पर लिख कर तमन्ना जी बाज़ी मार ले गई है जोकि अनीता जी का सुधरा हुआ वर्जन है – हा हा हा हा हा हा आपका कुछ ना कहना ही बहुत कुछ अनकहा कह गया है जिसको की समझा भी जाए ना और समझे बिना रहा भी जाए ना ….. आपका हार्दिक आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 6, 2012

बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 8, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी ….. सादर प्रणाम ! बड़े ही अफ़सोस की बात है की जिस तरह की बुलन्दी हम अपने भारत की चाहते है उस प्रकार की हो नहीं पा रही बल्कि सब कुछ उससे उल्टा पुल्टा हो रहा है रक्षा करे हमारी सियाराम – सियाराम हार्दिक आभार

dineshaastik के द्वारा
June 6, 2012

शादी से पूर्व  शारीरिक  रिश्ता, मुझे तो नहीं उचित  दिखता। हमें और  कितना आधुनिक  बनाओगे, क्या आदिम काल  की स्थिति में ले जाओगे। आदरणीय  राजकमल  जी, मेरी समझ  के परे है कि शादी के पूर्व रिश्ता बनाने का क्या औचित्य है। हमारे समाज  और देश  की  ऐसी क्या मजबूरी है कि शादी से पूर्व  रिश्ते बनाने के लिये इतना गंभीर हो जाय। ठीक  है भाई जो अच्छा लगे करों, बसा दो सन्नी लेयोनों को लाकर भारत में। 

    jlsingh के द्वारा
    June 6, 2012

    बेशर्मी की हद है! …..और कुछ नहीं! ……जनता को मूल मुद्दे से ध्यान हटाना है ……

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 8, 2012

    आदरणीय दिनेश जी ….. सादर अभिवादन ! सवाल मेरे और आपके मानने या ना मानने का नहीं है बल्कि इस समाज में आ रहे बदलावों का है जिसके कारण सरकार को इस तरह के कानून बनाने की जरूरत आन पड़ी है….. आजकल चढ़ते सूर्य को ही सलाम किया जाता है ….. सन्नी बिग बॉस को लोकप्रिय करने आई थी लेकिन खुद ही अपनी पिछले अतीत के कारण हद से ज्यादा मशहूर हो गई ….. उनकी इसी मशहूरी को भुनाने के लिए ही उनको फिल्मों के आफर मिले है ….. प्रतिकिर्या के लिए आपका बहुत आभारी हूँ

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 8, 2012

    आदरणीय जवाहर लाल जी ….. सादर अभिवादन ! अब आई.पी.एल. के दिन तो रहे नहीं इसलिए किसी और का सहारा लेना बहुत ही जरूरी है महत्वपूर्ण मुद्दों से आम जनता का ध्यान हटाने के लिए ….. लेकिन हम इतने जागरूक + चिंतनशील नहीं है की ऐसे मुद्दों पर कुछ सार्थक पहल कर सके ….. हम सिर्फ चर्चा ही कर सकते है और उसमे भी मिडिया की भूमिका अति महत्वपूर्ण रहती है ….. जब तक कोई मुद्दा उसमे प्रमुखता से उठाया जाता है जनता भी कुछ सोचती है , नहीं तो फिर अपने काम धंधो और किसी नए मुद्दे में उलझ कर रह जाती है ….. हार्दिक आभार सहित


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