RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

सोचो ज़रा हट के

203 Posts

6518 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1662 postid : 1546

ब्लागर्स की बीमा कम्पनी का नफा और नुक्सान !!!

Posted On 18 May, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

ओम श्री गणेशाय नम:

ओम नमह शिवाये नम :

आज ऐसा पहली बार हुआ था कि सबकों हँसाने वाला तथा हर हाल में खुद खुश रहने वाला राजकमल अपनी पोस्ट को डिलीट करने के बाद पिछले काफी समय से हैरान – परेशान होकर अपने कमरे में लगातार चहलकदमी कर रहा था …… इसी कशमकश में उसके जुगाड़ीया दिमाग में थ्री नाट थ्री गोली कि तरह से अपने बीमा  एजेंट को बुलाने का धड़ाम धकेल आईडिया आया …. आप जानते ही है कि  एजेंट तो इसी ताक में हमेशा रहते ही है ….. कहाँ तो वोह खुद बिना बुलाये पहुँच जाते है लेकिन यहाँ पर तो उस  मरदूद को बुलावा भेजा गया था इसलिए ऐसे में तो उसको फ़ौरन से पहले आना ही था ….

बीमा एजेन्ट :- कहिये आज मुझ नाचीज को किस लिए याद किया आपने

राजकमल शर्मा:- हमारी एक पोस्ट हमसे डिलीट हो गई है उसी का क्लेम लेने के लिए आपको कष्ट दिया है …..

बीमा एजेन्ट :- देखिये राजकमल जी , आपकी सभी आने वाली पोस्ट का बीमा हमारी कम्पनी ने बहुत ही ऊँची दर से किया था ….. क्योंकि मैंने उनको आश्वस्त किया था कि कम से कम आपकी कोई भी पोस्ट तो डिलीट नहीं होगी …… अब इस हालात में आपको पूरा क्लेम देने पर हमारी बीमा कम्पनी का तो  दिवाला ही निकल जाएगा …..

वैसे हुआ क्या था ?

राजकमल शर्मा:- आपकी बीमा कम्पनी को मेरे कारण मुनाफा भी तो हुआ है ….. हम सभी के श्रद्धेय शाही जी के पुनरागमन पर आपको उन्होंने पहले लिए गए क्लेम कि सारी रकम मय ब्याज के वापिस लौटा दी है ….

                                   और सरिता जी कि वापसी से भी आपकी बीमा कम्पनी एक मौटे क्लेम के भुगतान से बच गई लगती है ….. आपको इन दोनों से हुए नफे में से मुझको मेरा कमीशन देना ही होगा ….

बीमा एजेन्ट :- जहाँ तक मेरी जानकारी (तहकीकात ) में तथ्य सामने आये है उनके अनुसार शाही जी कि वापसी वाहिद जी और शशिभूषण जी तथा बाकि के सभी ब्लागर्स और सबसे ज्यादा बढ़कर जागरण द्वारा उन पर लिखे गए लेख को फीचर्ड करने के कारण ही संभव हो पाई है ….. इसलिए इस दलाली में आपका हिस्सा नाममात्र ही बनता है ….. और सरिता जी कि वापसी में भी आपका योगदान मात्र दस प्रतिशत ही रहा है ….. इसलिए उसी के अनुसार ही आपको कमीशन का भुगतान किया जाएगा …..

                                 लेकिन उससे पहले बीमा कम्पनी को विक्रमजीत सिंह जी के ब्लाग को डिलीट हो जाने के कारण जो डबल नुक्सान उठाना पड़ा  है उसकी भरपाई भी आपके उसी कमीशन से कि जायेगी ….. क्योंकि उससे पहले आपने अपने  ब्लॉग पर उनके जो दस कमेन्ट डिलीट कर दिए थे उसका हर्जाना हमारी बीमा कम्पनी आपको पहले ही दे चुकी है ….. वैसे उनके जाने का कारण भी आपके द्वारा जागरण के फीडबैक पर आपके द्वारा दर्ज करवाई गई शिकायत को ही माना  जा रहा है …..

राजकमल शर्मा :- दरअसल हमको इसी मंच कि एक महिला ब्लागर कि मेल प्राप्त हुई थी ….. उसके मजमून को पढ़ते ही हमारे दिमाग का फ्यूज उड़ गया ….. हमने सोचा कि अगर वोह अपना ब्लॉग डिलीट करके इस मंच से चली गई तो गजब हो जाएगा ….. आपकी कम्पनी को नुक्सान  से बचाने के लिए हमको मजबूरन उस कदम को उठाना पड़ा …..

 

बीमा एजेन्ट :- यानि कि आपकी अपनी गाड़ी के नीचे आकर जाने देने जा रहे एक यात्री कि जान बचाने के लिए खराब  ड्राइविंग के कारण आपने जल्दबाजी में गलत कट मार कर एक कि जान बचाने के लिए दूसरे कि बलि ले ली ….. उस आत्महत्या पर तुले हुए ब्लागर कि जान बच जाने के बाद आप अगर चाहते तो अपनी उस शिकायत को वापिस भी ले सकते थे + फीडबैक से उस शिकायत को डिलीट करने के बारे में भी प्रार्थना कर सकते थे …… लेकिन आपने अपने अहंकार के कारण ऐसा नेक काम नहीं किया …….

राजकमल शर्मा :- हम मानते है कि हमसे यह गलती हुई है….. लेकिन इस बारे में हमारी सोच यह थी कि जागरण के फीडबैक पर एक बार कमान से निकला हुआ तीर वापिस नहीं आता है ….. हम खुद इसके भुक्त भोगी है – हमारी प्रार्थना पर भी हमारे कमेन्ट में हमारे फोन नम्बर को डिलीट नहीं किया गया जिसके कारण हमको अपना वोह वाला नम्बर बन्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा …..

                                 

बीमा एजेन्ट :- (आई हुई फोन काल को सुनने के बाद ) अभी -२ सूचना प्राप्त हुई है कि आपने एक सच को नंगे रूप में सभी के सामने सरेआम रखा ….. एक दवा निर्माता कम्पनी भी अगर कुनीन कि गोली बाजार में उतारती है तो उस पर चीनी कि परत चढ़ी रहती है …..

राजकमल शर्मा:- ऐसी बात है तो मैं सभी का मुंह मीठा करवाने का मौका दने के लिए जल्दी से तीन  चार शादियां करने वाला हूँ ….. फिर जी भर के कर लेना अपना -२ मुंह मीठा …..

बीमा एजेन्ट :- मुझको तो लगता है कि सरकार के विकास करने के कागजी दावों कि तरह से आपकी शादियां भी कागजी ही होंगी ….. क्योंकि अगर वास्तव में किसी करमजली से आपकी शादी हुई होती तो आपको इस तरह से सीधी बात नो  बकवास कहने कि बजाय इशारों -२ में अपनी बात कहने और रखने का हुनर होता …..

राजकमल शर्मा :- यह फ़ालतू कि बाते छोड़कर अलीन जी और फोल्ली जी के इस मंच को ना छोड़ने के कारण तुम्हारी बीमा कम्पनी को जो नफा हुआ है उसमे से हमारे हिस्से कि सैटलमेंट कर ली जाए तो कहीं ज्यादा बेहतर होगा ……

बीमा एजेन्ट :- लेकिन हमको जो ख़ुफ़िया रिपोर्टे मिली है उसमे तो यही दिखाई दिया है कि उनको यहाँ पर टिके रहने देने में आपका ना तो कोई आग्रह था और ना ही कोई रोल था …..

राजकमल शर्मा :- यहीं पर तो आप और आपकी कम्पनी मात खा गई ….. हमने खुद चाहे ऐसा कुछ ना कहा हो लेकिन उनके कुछ अन्धे भक्तों से कुछ इस तरह से बर्ताव किया कि वोह उन दोनों को वापिसी पर मना कर ही माने ….. इस से साबित होता है कि हमारी बुराई में भी अच्छाई छुपी हुई होती है …..

बीमा एजेन्ट :- मान  गए आपको राजकमल बाबू ! चित भी आपकी और पट भी आपका ….. मैं सारी दुनिया को मुरख बनाता हूँ और आपने मुझको ही मुरख बना कर अपना कमीशन यहाँ पर भी झटक ही लिया ……

                                   वैसे मैं आपको बताना चाहता हूँ कि जिस हिसाब से आजकल कमेंट्स + पोस्ट्स तथा ब्लॉग डिलीट हो रहे है उनको देखते हुए हमारी बीमा कम्पनी अब आगे से जागरण जंक्शन पर बीमे का धन्धा बन्द करने जा रही है ……

                          दोस्तों मैं चाहता हूँ कि यह बीमा कम्पनी हमेशा ही सफलतापूर्वक चलती रहे ….. आइये हम सभी इस पुरजोर कोशिश में जुट जाए कि आगे से कभी भी इस कम्पनी को क्लेम रूपी हर्जाने का भुगतान ना करना पड़े बल्कि इसकी बजाय गए हुए ब्लागर्स कि वापसी से (आदरणीय शाही जी तरह से ) इसको नफा होता रहे ……

 

(प्रिय आनंद प्रवीण जी के द्वारा अपनी पोस्ट को डिलीट करने के कारण बीमा कम्पनी को हुए नुक्सान को इसमें शामिल नहीं किया गया है क्योंकि उसकी भरपाई जागरण द्वारा और बाकि के ब्लागर्स द्वारा उनकी अगली पोस्ट पर कर दी गई थी )

 

{ ब्लागर्स की बीमा कम्पनी का नफा और नुक्सान }

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 3.83 out of 5)
Loading ... Loading ...

77 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 27, 2013

बहुत दिनों के बाद अनायास आज आप से टक्कर हो गई वो भी होली के पावन मौके पर सोचा चलूँ और आप दुआ ले लूं ! सादर !!

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
May 21, 2012

राजकमल जी,एक बीमा मेरा भी करवा दीजिये,आगे काम आएगा.आपकी अगली फिल्म कब लगेगी.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 21, 2012

    आदरणीय राजीव जी ….. सादर अभिवादन ! आप सभी का बीमा तो पहले ही हो चूका है ….. यह शर्त तो नए ब्लागर्स पर है ….. आप जब सयंमित है + मर्यादित है तो समझिए की आप सुरक्षित है और आपको तो वैसे भी किसी बीमे की जरूरत नहीं है …… अगली रचना तो अब आपकी तरफ ड्यू बन गई है ….. मैं भी जल्द ही आपके सामने फिर से हाजिर हुआ जाता हूँ कुछ ना कुछ लेकर – शायद कल ही ….. याद दिलाने के लिए हार्दिक आभार :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

ajaydubeydeoria के द्वारा
May 20, 2012

आदरणीय गुरुदेव सादर प्रणाम. इस गली आया तो जरूर था, भीड़ में न जाने कहाँ खो गया. खैर………गुरुजनों ने अपने विचार प्रस्तुत कर दिए है. अब मैं क्या कहूँ ???

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 20, 2012

    प्रिय अजय भाई ….. सप्रेम नमस्कारम ! इससे पिछली वाली पोस्ट पर सबसे पहला कमेन्ट आपका ही प्राप्त हुआ था …. आप गम नहीं हुए है और ना ही हो सकते है कभी ….. क्योंकि इन्ही गलियों में रास्ते मिलते है रास्ते भूले नहीं जाते ….. आपका हार्दिक आभार जय श्री राधे कृष्ण !!!

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 20, 2012

    आदरणीय गुरुदेव, सादर प्रणाम. ऐसी भी क्या खुन्नस है, एक निवेदन, अब छोडिये भी…… जाने भी दीजिये.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 20, 2012

    प्रिय अजय जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! तथाकथित नेता जनता से और तथाकथित गुरु अपने शिष्यों से बड़ा नहीं हो सकता आपकी बात मानते हुए इस अध्याय को समाप्त कर दिया गया है

Piyush Kumar Pant के द्वारा
May 20, 2012

भाई राजकमल जी…… इस लेख पर प्रथम प्रतिक्रिया देने का प्रयास किया था…… पर जाने कैसे मेरी प्रतिक्रिया किसी भी लेख पर नहीं जा रही थी…… फिर जेजे को शिकायत की तो हर जगह दिखने लगी पर आपतक नहीं पहुंची है…….. फिलहाल जितना याद है उतना ही पुनः लिखने का प्रयास कर रहा हूँ………. राजकमल भाई ……… आप सबकुछ जानते है और किस स्तर का विवेक रखते हैं ये आपकी इस एक पंक्ती से पता चल जाता है…….. “एक दवा निर्माता कम्पनी भी अगर कुनीन कि गोली बाजार में उतारती है तो उस पर चीनी कि परत चढ़ी रहती है …..” शायद इसी लिए हमें आपके इससे पूर्व के लेख से कुछ शिकायत रही क्योंकि आप किसी को भी अपने शब्दों से बिना नाम लिए सटीक इशारा कर सकते हैं…. और साधारण शब्दों मे असाधारण बात कह सकते हैं……. आप पूर्व की तरह ही अपनी लेखन शैली के कायल लोगों को अपने लेखों से आनंदित करेंगे ऐसी आशा के साथ…… बार बार इंवेलिड कमेंट या तो हम कोड सही से नहीं पढ़ पा रहे हैं या जेजे कमेन्ट पास नहीं कर रहा है…. शायद अब हो ही जाए नहीं तो फिर ………. एक और प्रयास क्योकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती…….

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 20, 2012

    प्रिय पियूष भाई ….. सप्रेम नमस्कारम ! आपकी तरह से मेरी भी ज्यादातर ब्लागर्स की पोस्ट्स पर कमेन्ट ना कर पाने की समस्या रही है ….. जागरण का तकनीकी विभाग भी कई बार शिकायते दर्ज करवाने के बाद भी इस परेशानी से कोई राहत नहीं दिलवा सका है ….. बहुत ही अजीब सा लगता है जब ऐसे किसी साथी का कमेन्ट मिलता है और मैं चाहकर भी कर्ज नहीं उतार सकता ….. आपका कमेन्ट चाहे अब भी सेव किया हुआ है लेकिन उसको दुबारा से पेस्ट नहीं करूँगा क्योंकि आप अपने उत्तर पढ़ चुके है …. मुझको विश्वाश है की हम सभी की सांझी मुसीबत का निदान जरूर होगा ….. फिर भले ही उसमे देर क्यों ना लगे ….. आपका हार्दिक आभार जय श्री राधे कृष्ण !!!

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
May 19, 2012

मान गए आपको राजकमल बाबू ! चित भी आपकी और पट भी आपका ….. मैं सारी दुनिया को मुरख बनाता हूँ और आपने मुझको ही मुरख बना कर अपना कमीशन यहाँ पर भी झटक ही लिया …… वैसे मैं आपको बताना चाहता हूँ कि जिस हिसाब से आजकल कमेंट्स + पोस्ट्स तथा ब्लॉग डिलीट हो रहे है उनको देखते हुए हमारी बीमा कम्पनी अब आगे से जागरण जंक्शन पर बीमे का धन्धा बन्द करने जा रही है …… आज कल बड़े बड़े जलवे सच में दिख रहे हैं कभी तीन तीन प्रतिक्रियाएं ब्लैक होल में जाती है तो माडरेशन किये हुए का पता ही नहीं चलता कभी जो प्रतिक्रिया दिखाई दी वो भी गायब हो जा रही है ये जे जे के कैप्चा का जादू है या आप का मंतर जो ये तंतर बिगाड़ रहा है कोई भाग रहा है कोई कुछ बोल रहा है कहीं कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाजों से लोग त्रस्त हैं अनेकों कुत्ते गलियों में भरे जा रहे ये हो क्या रहा है ?? आइये हम सभी इस पुरजोर कोशिश में जुट जाए कि आगे से कभी भी इस कम्पनी को क्लेम रूपी हर्जाने का भुगतान ना करना पड़े बल्कि इसकी बजाय गए हुए ब्लागर्स कि वापसी से (आदरणीय शाही जी तरह से ) इसको नफा होता रहे ……सच कहा आपने ..मजेदार लेख …वो बेचारा एजेंट …अच्छा हुआ शादियाँ और होती तो सब बच्चे भी उसे घेर लेते …. जय श्री राधे भ्रमर ५

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 20, 2012

    आदरणीय भ्रमर जी ….. सादर प्रणाम ! आपको तथा बाकि के ब्लागर्स को जो भी दिक्कते पेश आ रही है मैं भी उन्ही से त्रस्त हूँ …. आदरणीय कुशवाहा जी + मीनू जी + रेखा जी +प्रवीण जी + चाकलेट खाकर दिमाग तरोताजा रखने वाली टिम्सी जी + प्रिय आनंद जी तथा इनके इलावा भी और भी बहुत से ब्लागर्स है जिनकी पोस्ट पर कमेन्ट पोस्ट करने में सफलता नहीं मिल पाती है …. कई बार तो दुखी होकर मन में यहाँ तक विचार आता है की फिर से पुराने वर्शन की विंडो 98 ही डलवा लूँ ….. आज आपके मन में हम सभी को घेरने वाले बीमा एजेन्ट को ही घेरने का झक्कास आईडिया आ रहा है ….. लेकिन मुझको अच्छी तरह से पता है की आप मेरे लिए एक से ज्यादा लुड़कीया तो देखेंगे नहीं फिर इतने सारे बच्चे क्या आसमान से टपकेंगे ?….. इसीलिए तो कहता हूँ की अभी भी वक्त है समय रहते अपना एक पत्नी भक्त वाला सिद्धान्त कम से कम मुझ पर तो लागू मत कीजिये ….. और दूसरी तथा तीसरी वाली तो बाद की बात है पहले पहले वाली को तो आने दीजिए मेरी जिंदगानी में ….. जय श्री राधे कृष्ण !!!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 19, 2012

हो सकता है इस पोस्ट पर कमेन्ट देने का भ्रम हो. कोई बात nahi. बात vapas. वैसे मुझे सदेव aapka इन्तजार रहता है किसी भी roop में. प्रणाम महोदय ji.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 20, 2012

    आदरणीय कुशवाहा सर जी ….. सादर प्रणाम ! जहाँ पर मैं आपके द्वारा दिए गए स्नेह से अभिभूत हूँ वहीँ पर भोलू के लिए आपका कर्ज़दार भी बन गया हूँ और उसी के साथ इस बात की शर्मिन्दगी भी है की आपकी पिछली कई पोस्ट्स पर चाहकर भी कमेन्ट नहीं दे पा रहा हूँ ….. क्षमायाचना सहित आभार

minujha के द्वारा
May 18, 2012

राजकमल जी नमस्कार  आपने क्या लिखा और क्या डिलीट   किया  ये तो नही जानती ,पर क्षमा कीजिएगा मैं इस  आलेख के असल  आशय  को भी नही समझ  पाई,वैसे आपने  अच्छा लिखा है..

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय मीनू मौसी जी …. सादर प्रणाम ! परसों एक पोस्ट डाली थी जिसको की ज्यादातर ब्लागर्स ने गलत समझा था हालाँकि मेरी तरफ से वोह अब भी ठीक है ….. लेकिन सभी के आग्रह रूपी आदेश को मानते हुए अपनी उस पोस्ट को वापिस ले लिया था ….. लेकिन उस पोस्ट पर आये हुए सभी साथियों के कमेन्ट मेरी आज की इस पोस्ट पर खुद मेरे नाम से हरेक ब्लागर की पोस्ट के नीचे दुबारा से पोस्ट कर दिए गए है ताकि किसी के मन में इस बात का मलाल ना रह जाए की अपनी पोस्ट को डिलीट करने के बहाने से मैंने उन सभी के विचारों को भी नष्ट कर दिया है ….. इससे सभी के मन से यह वहां भी निकालने में सहायता मिलेगी की मैंने उनको जवाब देने से बचने की कोशिश में यह सब किया था ….. आपका आशीर्वाद पाकर धन्य हुआ हार्दिक आभार सहित

चन्दन राय के द्वारा
May 18, 2012

राजकमल साहब , आपक कमाल के व्यंगकार है , उसका परिचय आपने इस आलेख से दे दिया , आपका स्तर उम्दा है , बीमा कम्पनी का नुक्सान न भर पाने और इक पोस्ट के घाटे और इस ब्लॉग व्यवस्था में फैली अर्थव्यवस्था मंदी के वावजूद आपने आत्महत्या का सुन्दर प्रयास ना कर , निश्चित ही इस कलयुग में सतयुगी बाबा का नया अवतार लिया . और इक बात कोई मने या न माने आप इस मंच की शोभा है

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    राजकमल जी , श्री मान , आपका आलेख पढ़ा , पर सत्यवचन कह रहा हूँ की यह आलेख व्यंग की सीमा को लांघ गया है , किसी भी व्यक्ति के चरित्र पर इस तरह सार्वजानिक रूप से आक्षेप मुझे नहीं भाया, पर में जज की तरह इसे सही गलत नहीं ठहराउंगा , हम सबके जीवन का छोटा सा हिस्सा है ये मंच , कई बार हमारे पास समय नहीं होता , इसलिए हम अपने विचार नहीं रख पाते, आप तो सायद इन दोनों सज्जनों से अनुभवी और अग्राज है , तो आपसे विनम्र निवेदन है इक अनुज की तरह इन्हें प्रोत्साहन दे , इन्हें होसला दे , पर कमजोर ना करे , और हो सकेव तो यह पोस्ट हटा ले

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    प्रिय खुशबूदार चन्दन जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! आप सभी ने इस पोस्ट को गलती से हास्य वयंग्य वाले डिब्बे में डाले जाने के कारण किसी और ही नजरिये से देखा और उसी के अनुसार ही इसको समझा भी …… लेकिन एक बार इसको जनरल बोगी में सवार वाले नजरिये से देखते तो शायद ऐसी नौबत नहीं आती ….. बहरहाल आपके कीमती मशविरे पर अमल करते हुए इस पोस्ट को समय रहते हटा लिया गया था आभार

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    प्रिय खुशबूदार चन्दन जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! आपका कहना बिलकुल सही है एक नए अवतार की तरफ ही यह बढ़ता हुआ एक सकारात्मक कदम है क्योंकि इसके बाद मेरी पोस्ट *यात्रा माता ज्वाला जी और चिंतपूर्णी जी की *ब्लॉगर तो ऐसे नहीं होते *महेश भट्ट साइनिंग सन्नी लियोन इन बिग बॉस फोर जिस्म टू *राजकमलिया मच्छर *बिरला के गुरु आने वाली है हार्दिक आभार सहित

div81 के द्वारा
May 18, 2012

राजकमल भाई सादर प्रणाम, लोग ज़ालिम हैं हर एक बात का ताना देंगे उनकी बातों का ज़रा सा भी असर मत लेना वरना चेहरे की तासुर से समझ जायेंगे चाहे कुछ भी हो सवालात ना करना उनसे बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी…………………….कुछ लाइन हटा दी है बाकी तो सब समझदार है यहाँ ……….अर्थ का …………….. निकलना अच्छे से आता है

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय दिव्या बहिन….. सादर अभिवादन ! आपका कहना अक्षरश बिलकुल सही है इस सब झमेले के कारण किसी ब्लागर भाई बहिन बन्धु बान्धवो की किसी भी पोस्ट पर कमेन्ट नहीं दे सका हूँ ….. सिर्फ लेते ही रहना मेरी फितरत नहीं है ….. बदले में कुछ ना कर पाने का आत्मा पर बोझ है ….. लेकिन अब इस रूटीन को बदलते हुए आप सभी के सामने इसके बाद मेरी पोस्ट *यात्रा माता ज्वाला जी और चिंतपूर्णी जी की *ब्लॉगर तो ऐसे नहीं होते *महेश भट्ट साइनिंग सन्नी लियोन इन बिग बॉस फोर जिस्म टू *राजकमलिया मच्छर *बिरला के गुरु आने वाली है (फ्लैश बैक – संजोई हुई यादो के सहारे लिखना – लाईव तलिकास्ट – डायरी को पढ़ते हुए लिखना – आपकी पोस्ट पर कम से कम चार –पांच कमेन्ट आपकी राह देख रहे है ) इस सकारात्मक सोच से ओतप्रोत मशविरे के लिए आपका हार्दिक आभार

nishamittal के द्वारा
May 18, 2012

राजकमल जी मैं तो बस इतना ही कह सकती हूँ सबको सद्बुद्धि दे भगवन

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय निशा जी ….. सादर प्रणाम ! आपका सन्मान तो यहाँ के सभी ब्लागर्स के इलावा जागरण जंक्शन की पूरी टीम भी करती है …… मैं उम्मीद करता हूँ की भगवान आपकी प्रार्थना को जरूर काबुल करेंगे और इस मंच के माहौल में फिर से पहले जैसी ताजगी और रवानी आएगी ….. (उस रहस्यमय प्रतिकिर्या का राज खोलते हुए यही कहना चाहता हूँ की आपके उसी विषय पर पहले आये हुए किसी लेख पर मैनी आपसे उस जानकारी को सांझा किया था ….. यह देख कर मन को बहुत ही खुशी हुई की आप हरेक जानकारी को अपने कम्प्यूटरीकृत दिमाग में इस तरह से सेव रखती है की वक्त आने पर कभी भी उसका उचित और बेहतरीन इस्तेमाल कर सकती है – आपकी उर्जा और क्षमता को मेरा सलाम ) हार्दिक आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 18, 2012

आदरणीय दरोगा जी, सादर अभिवादन. मेरा इस पोस्ट से कमेन्ट गायब हो गया. पिछली पोस्ट पर कुछ पूछा था पोस्ट नदारद. नामें तो आप हर हाल में आप अच्छे लगते हैं. आपकी प्रतीक्षा रहती है,

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय खुदाय फोजदार जी ,दरोगा जी , राज कमल जी, ismen मुझे तो कुछ नहीं कहना या कुछ कहना है या चुप रहना है. या kone में खड़े खड़े सहना है

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी ….. सादर प्रणाम ! आपने बेशक कुछ भी ना कहा हो लेकिन मैं सब कुछ समझ गया हूँ आखिरकार हममे इतनी आपसी समझ तो है ही फिर भले ही वोह भोलू के कारण कुछ ज्यादा ही क्यों ना हो आपका हार्दिक आभार

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी ….. सादर प्रणाम ! माफ़ी चाहूँगा की आपका मेरी इस पोस्ट पर से कमेन्ट गायब हो गया है ….. वैसे उस पर तो मेरी भी नज़र नहीं पढ़ी थी – आप ज़रा रुकिए अभी भोलू से पूछ कर बतलाता हूँ – क्षमा कीजियेगा वोह भी आपके उन बेशकीमती विचारों को नहीं देख पाया ….. आपकी दूसरी शिकायत की पिछली पोस्ट पर आपके द्वारा किये गए कमेन्ट को मैंने डिलीट कर दिया है के सम्बन्ध में हाथ जोड़ कर अर्ज करना चाहता हूँ की आपका तो मैं हद से ज्यादा सन्मान करता हूँ …… आप अगर गौर से देखेंगे तो पायेंगे की मेरी पिछली पोस्ट वाली तकरीबन सारी की सारी प्रतिकिर्याये मेरी इस पोस्ट पर मौजूद है , फिर वोह भले ही कितनी भी तल्ख क्यों ना रही हो और आपकी तो टिप्पणी भी सकारात्मक दृष्टिकोण वाली थी …… आपके किसी भी सवाल देने के लिए मैं आपको हरदम तैयार मिलूँगा ….. आपके द्वारा दिखलाये और जतलाए गए भरौसे से मन गदगद है ….. आपका बहुत -२ आभार

sinsera के द्वारा
May 17, 2012

आदरणीय राजकमल जी , नमस्कार, जितनी बार पढ़ रही हूँ..बढ़ बढ़ कर तारीफ कर रही हूँ..आप की जगह इस अफसाने को इतना ख़ूबसूरत मोड़ कोई और दे ही नहीं सकता था…. लेकिन आप हैं कहाँ…??? सामने आइये और ख़ूबसूरत अंदाज़ की बधाई लीजिये…

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    आदरणीय राजकमल जी , ससम्मान नमस्कार , हंसी मजाक व्यंग्य सब अच्छा है लेकिन मेरे ख्याल से किसी लड़की का नाम ले कर कुछ कहना अनुचित होगा…वो किसको पढ़ती या कमेन्ट देती हैं ये उनकी मर्ज़ी, लेकिन उन्हों ने कहीं “आई लव यू” कहा हो ऐसा मेरी नज़र से तो नहीं गुज़रा…..वार्ड वाइड वेब पर ऐसे आरोप लगा देना किसी लड़की के भविष्य के लिए घातक हो सकता है.. सभी यहाँ मेच्योर हैं , इशारे से ही समझ सकते हैं…मेरे विचार से , खासकर के लड़की का नाम नहीं लेना चाहिए….

    आर.एन. शाही के द्वारा
    May 18, 2012

    ये क्या हो रहा है, सबकुछ उल्टा-पुल्टा ? राजकमल खुद राजकमल के ऊपर आलोचनात्मक वक्तव्य दे रहा है । क्या 21 दिसम्बर आने को है ?

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय शाही जी …… सादर प्रणाम ! आपको धर्म संकट में कतई नहीं डालूँगा इस शानदार इमारत को तो नेस्तनाबूद कर ही दूँगा लेकिन इसके शीर्षक तथा कमेन्ट रूपी खण्डहर आने वाली नस्लों को इसकी भव्यता की गवाही देते रहेंगे …… आप अच्छी तरह से जानते है की मैंने आज तक किसी की भी परवाह नहीं की लिखते समय किसी का भी लिहाज नहीं किया डायन की तरह से कभी भी सात घरों को भी नहीं छोड़ा ना तो मेरी दोस्ती भली ना ही दुश्मनी आपका सन्मान करते हुए आपकी आज्ञा पर श्रद्धा के फुल चढ़ा दिए है हार्दिक आभारी हूँ (आपसे पहले किये हुए वायदे के अनुसार “ब्लागर तो ऐसे नहीं होते” लेकर हाज़िर होता हूँ )

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय सरिता बहिन जी ….. सादर अभिवादन ! मेरा मन इस बात से बेहद ही खुश है की मेरी बहिन ने अपने भाई के लेख को एक नहीं बल्कि अनेको बार पढ़ा …… एक लेखक के लिए इससे ज्यादा खुशी कोई नहीं हो सकती की उसकी रचना की सराहना की जाए ….. क्षमा कीजियेगा इस मामले में हरेक लेखक का नारियों की तरह खुद की प्रशंसा को सुनने की कमजोरी वाला नजरिया कायम रहता है ….. यहाँ पर कम से कम इस मामले में पुरुषों और नारियो में अंतर समाप्त हो जाता है …… आपकी मुबारकबाद कबूलते हुए आपका आभार दिल की गहराइयों से अदा करता हूँ शुभकामनाओं सहित

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय सरिता बहिन जी ….. सादर अभिवादन ! इसी लेख पर आदरणीय दिनेश आस्तिक जी और खुशबूदार चन्दन जी को दिए गए जवाबों को पढ़ने के बाद शायद आपक किसी हद तक मुझको समझ सके …… वैसे आपके समेत दूसरे ब्लागर्स का आग्रह मानते हुए उस पोस्ट को तो मैंने हटा ही लिया था हार्दिक आभार सहित

Santosh Kumar के द्वारा
May 17, 2012

आदरणीय गुरुदेव ,..सादर प्रणाम हर मामले में आपका अंदाज निराला है ,..बहुत बधाई .. सभी गिले शिकवे भुलाकर सभी को सार्थक ब्लोगिंग का आनंद लेना चाहिए ,.विक्रम भाई को मैं यहाँ आमंत्रित करता हूँ ताकि मंच का माहौल सकारात्मक ,सुखद और बेहतर हो और हम सभी सार्थक काम करें …सादर आभार सहित

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    आदरणीय गुरुदेव ,.सादर परनाम दरोगा जी को सलाम ,..साधना बहन और फोल्ली (संदीप) भाई को शुभकामनाएं ,…शेष नो कमेन्ट सादर

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    प्रिय संतोष जी …. सप्रेम नमस्कारम ! आपके द्वारा प्रेषित शुभकामनाये देख अच्छा लगा ….. क्योंकि मैं यहाँ पर अक्सर ही ब्लागर्स को किसी भी पर्व दिवस और त्यौहार तथा महत्वपूर्ण मौको पर सिर्फ अपने ब्लॉग पर आने वाले लोगो को ही बधाई देते हुए देखता हूँ और सोचता हूँ की क्या हमारी बधाई के हकदार सिर्फ हमारे ब्लॉग पर आने वाले ही है क्यों नहीं हमारी मुबारकबाद सभी के लिए नहीं होती है ….. आपकी तरह से मैं भी इनको शुभकामनाये देता हूँ

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    प्रिय संतोष भाई ….. सप्रेम नमस्कारम ! यह मंच हम सभी का सांझा है जोकि एक समान रूप से हम सभी समान अवसर प्रदान करता है ….. आइये इसकी सुविधाओं का सदुपयोग करते हुए इसका नाम रोशन करे फिर इस मुहीम में हमे चाहे किसी का भी साथ क्यों न मिले ….. जहाँ तक विक्रम जी की बात है उन्होंने इस मंच को जो भी योगदान दिया था उसको वोह अपना ब्लॉग डिलीट करके खत्म कर चुके है ….. अब तो उनको दुबारा से दोगुणी – चोगुनी मेहनत तथा जोश खरोश से घाटे को पूरा करना होगा ….. वोह जब भी आये स्वागत सहित उनका इंतज़ार है ….. हार्दिक आभार सहित

jlsingh के द्वारा
May 17, 2012

आदरणीय गुरुदेव, सादर अभिवादन! यह जागरण जंक्सन बुद्धिजीवियों का मंच है और यहाँ विचारों का आदान प्रदान होता है. अगर हम किसी के विचार से सहमत नहीं हैं तो असहमति ब्यक्त किया जाना चाहिए. पर शब्दों का इस्तेमाल कुछ इस तरह से हो कि किसी की भावना आहत न हो! ब्यक्तिगत हमले तो होने ही नहीं चाहिए! …..ब्यंग्यात्मक शैली जो आपकी है, वह अनूठी है इसमें अगर लोग समझ जाएँ तो ठीक, नहीं तो फिर वे स्वतंत्र हैं. इसके पहले भी आपने अनेक ब्यंग्यात्मक लेख लिखे है जिनसे बहुत सारे ब्लोग्गर आपकी बात को समझे हैं और सुधरे भी हैं इसीलिये तो काफी लोग आपको गुरुदेव मानते हैं. मंच पर समरसता बनी रहे तो हम बहुत कुछ एक दुसरे से सीख सकते है और सीख रहे हैं, ऐसा मेरा मानना है…. अगर गलत चीजों का विरोध हो रहा है, और उसमे सामूहिकता है, तो यही तो लोकतंत्र का तगादा है. …. बड़े वृक्ष जब फलदार होते हैं तो झुक जाते हैं और नए वृक्ष सीना तान कर खड़े रहते हैं यह प्रकृति का नियम है…. और विशेष मैं क्या कहूं .. सभी प्रबुद्ध जनों का आदर करता हूँ. ..आभार!

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय जवाहर लाल जी ….. सादर अभिवादन ! आपने जो विचार प्रकट किये है उनसे तो कोई भी असहमत नहीं हो सकता है ….. मुझसे इस बार यह गलती हुई की इस लेख को जनरल डिब्बे की बजाय हास्य वयंग्य में दाल दिया अपनी पूर्व की आदतानुसार जिससे की गंभीर गलतफहमिया पैदा हुई …. यहाँ इस मंच के सभी विद्वान ब्लागर्स की यही तो एक विशेषता है की यहाँ पर गलत को गलत और सही को सही कहा जाता है ….. अपने इसी गुण के कारण यह मंच गरिमामय है तथा अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए है ….. आपके जैसे साथी पाकर मैं धन्य हूँ हार्दिक आभार सहित

Rajesh Dubey के द्वारा
May 17, 2012

धारदार और वजनदार रचना के लिए बधाई. बीमा कंपनी को सफलता पूर्वक चलते रहने में मदद करते रहना है. बीमा कंपनी दिवालिया न हो इसका ध्यान रखना जरुरी है.

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    आदरणीय राजेश जी ….. सादर प्रणाम ! हम सभी का असल मकसद तो अब यही होना चाहिए ….. वैसे देखने में चाहे यह बात बहुत ही छोटी सी लगती है लेकिन इसको अमलीजामा पहनाने में पसीने छूट जायेंगे ….. अपनी भाषा सन्तुलित रखनी होगी + आचरण मर्यादित रखना होगा + उकसावे में ना आकर खुद पर नियंत्रण रखना होगा …… इसके इलावा भी और अनेको बाते है जिनका की वक्ती तौर पर पालन करने से इस मंच के माहौल को सोहार्दपूर्ण बनाया जा सकता है …… आपका दिल की गहराईयों से शुक्रिया

satish3840 के द्वारा
May 17, 2012

बहुत खूब राजकमल दरोगा जी उर्फ़ गुरुदेव जी / आप की दात देनी होगी आपकी हर बात निराली हें सन्नी लियोन का रानी पदमावती की तरह महाकवि मलिक मोहम्मद जायसी जैसा गुणगान भला कौन ब्लोगर भुला सकता हें /

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    ह़े कमलों के कमल ,कमलों के राजा , ह़े कमल हंस , कमल नयन, ऊपर से सख्त व अन्दर से नर्म दबंग दरोगा जी , हें शर्मा जी आप की छवी से चाँद सूरज भी शर्मा जाएँ /.साधना जी ( बेटी ) और फोल्ली (संदीप) बेटे को को मेरी ओर से शुभकामनाएं / ये हम सबका अहोभाग्य ह़े कि आप जेसे महा पुरुष व युग पुरुष का हमें सानिध्य मिला / अब हम क्या कहें हमारी तो दरोगा जी के नाम से ही सिट्टी पिट्टी गम हो जाती हें / अतः हम कर वध प्रार्थना करते हें कि हमें कुछ नहीं बोलना / बोलेगें तो बोलेंगे कि बोलता हें

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    आदरणीय सतीश जी ….. सादर प्रणाम ! आप तो सुनने वाली बात भी सयंम से नहीं सुनते है ….. मैंने आपसे (अपने स्वर्गीय पूज्य पिता जी को) दहेज में मिले समान का जिक्र करते हुए आपसे जानबुझकर एक साधारण सा प्रश्न पूछा था जिसका जवाब आप नहीं दे सके ….. हालाँकि इस बात को मैं भी जानता हूँ की नए जोड़े को अपनी गृहस्थी की गाड़ी रूपी जिंदगी की शुरुआत करने के लिए कुछेक समान की जरूरत होती ही है जिसको की स्त्रीधन कहा जाता था …… खैर आप मुझे मेरी लिस्ट वाला समान ही दिलवा दीजियेगा लड़की वालो की तरफ से बस एक ही तबदीली है (साइकल की जगह पर स्कूटर ) हार्दिक आभार

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    आदरणीय सतीश जी ….. सादर प्रणाम ! मैं आपका दिल से शुक्रगुजार हूँ की आपने मुझको परम आदरणीय सूफी +धार्मिक कवी और लेखक मलिक मोहम्मद जायसी जी की लेखनी से रूबरू करवाया ….. नेट पर उनके बारे में सारी जानकारी ली तो पाया की पद्मावत उनकी महान रचना है ….. उनके अवधि भाषा में लिखे गए दोहे तो कमाल के है ….. आपसे निवेदन करना चाहता हूँ की उन पर अपनी अनुभवी कलम चला कर हम सभी को आपके ब्लॉग पर उनको नमन करने का एक अवसर जरूर प्रदान कीजियेगा ….. पहले जब आपने हास्य की कमी वाली सच्चाई से अवगत करवाया था तो हिम्मत नहीं हुई थी लेकिन अब जरूर उस लिखे हुए लेख को पोस्ट करने बारे में गंभीरता से सोचूंगा “महेश भट्ट साइनिंग सन्नी लियोनी इन बिग बॉस फॉर जिस्म टू” आपका ह्रदय से आभार

akraktale के द्वारा
May 17, 2012

आदरणीय राजकमल जी नमस्कार, सुना है कई बार चंद मक्खियों का झुण्ड राहगीर की जान भी ले लेता है. करता कोई है और भरता कोई है. कोई अन्य होता तो मै कहता राह बदलने को मगर दरोगा राह तो नहीं बदल सकता किन्तु सतर्क तो रह ही सकता है.

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय अशोक जी ….. सादर अभिवादन ! हमारी पहली मुलाकात में ही हमारे बीच पहली और आखिरी गलतफहमी पैदा हो गई थी जिसका की बाद में बहुत ही जल्द ही निपटारा भी हो गया था …… आपकी यह टिप्पणी मेरे लिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि इससे यह साबित होता है की हमारे बीच की आपसी समझ हर हाल में कायम रहेगी ….. बाकि आपसे एक और अर्ज करना चाहता हूँ की कुशल वैध वही होता है जोकि मर्ज़ के हिसाब से अलग अलग तरीके से उसका इलाज करे बजाय की हरेक मर्ज़ तथा मरीज को एक ही तरीके से ट्रीट करे ….. एक ही तरीके से ट्रीट करने वाले हकीम खुदाई रहमतों और बरकतों से मालामाल हुआ करते है लेकिन इन सबसे महरूम हूँ ….. लेकिन अब तो जख्मों को उनके खुद के हाल पर छोड़ देने का मन बना लिया है ….. बनने दीजिए इनको नासूर और देखते जाइए की आगे क्या होता है ….. हार्दिक आभार सहित

आर.एन. शाही के द्वारा
May 17, 2012

प्रतिक्रिया पोस्ट नहीं हो रही है, जबकि मुखपृष्ठ पर दिख रही है । फ़िर से पेस्ट करता हूँ — चलिये, निकट भविष्य में कुछ और हृष्टपुष्ट छौनों का अवतरण होने वाला है, हमें तो बस इसी बात की खुशी है । लेकिन अपनी फ़ेहरिश्त को गलने नष्ट होने से बचाकर रखियेगा, क्योंकि चित्रगुप्त जी के बाद आपकी बही ही है, जो कलियुग के गिनीज बुक आँफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में जाने वाली है । यह बही गुम हो गई, तो आपको भी अमिताभ बच्चन की तरह पिछली वालियों के पीछे वह गाना गाना पड़ेगा- ‘आगे तुम लोगों का मैं हिसाब रखूँगा, यादों और वादों की एक किताब रखूँगा, सबसे पहले इसमें तुम, अपना नाम लिखाना… तेरा क्या नाम है …’ । समझ गए न… ?

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    आदरणीय शाही जी ….. सादर प्रणाम ! अगर भावी शिशुओं की माता श्री पहलवान होगी तो यकीनन ऐसा ही कुछ होने वाला है ….. वैसे मैं खुद तो सिंगल हड्डी हूँ इसलिए कामना करूँगा की उनमे उनकी माता जी का अंश (रूप और डील डौल ) मुख्य रूप से उभर कर आये ….. आपको अपनी कीमती प्रतिकिर्या के लिए जो कष्ट उठाना पड़ा उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ ….. वैसे आजकल मैं खुद इस समस्या से हद दर्जे तक परेशान हुआ हूँ ….. जागरण को समस्या नोट करवाने पर भी उन्होंने इसका कोई हल नहीं निकाला ….. आपका तहे दिल से आभारी हूँ

आर.एन. शाही के द्वारा
May 17, 2012

चलिये, निकट भविष्य में कुछ और हृष्टपुष्ट छौनों का अवतरण होने वाला है, हमें तो बस इसी बात की खुशी है । लेकिन अपनी फ़ेहरिश्त को गलने नष्ट होने से बचाकर रखियेगा, क्योंकि चित्रगुप्त जी के बाद आपकी बही ही है, जो कलियुग के गिनीज बुक आँफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में जाने वाली है । यह बही गुम हो गई, तो आपको भी अमिताभ बच्चन की तरह पिछली वालियों के पीछे वह गाना गाना पड़ेगा- ‘आगे तुम लोगों का मैं हिसाब रखूँगा, यादों और वादों की एक किताब रखूँगा, सबसे पहले इसमें तुम, अपना नाम लिखाना… तेरा क्या नाम है …’ । समझ गए न… ?

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    कहीं कुछ ऐसा है जो फ़िलहाल ठीक नहीं है, और आपकी वरीयता के साथ साथ हम सभी के लिये भी विवादास्पद बन सकता है । मुझे मजबूरन आपके साथ खड़ा होना पड़ेगा, ज़ाती कारणों से, जो खुद मुझे भी पक्षपात जैसा लगेगा । आपने यदि सही भी कहा है, तो भी तरीक़ा गलत है, इसको मान लीजिये, और ब्लाग को तुरन्त डिलीट कर कोई और अपने यूजुअल तरीक़े का व्यंग्य लिखिये ।

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    आदरणीय शाही जी ….. सादर प्रणाम ! मान गया आपके ज्ञान चक्षुओं की क्षमता को ….. इसका अर्थ तो यही निकलता है की जब मैं आदरणीय प्रवीण जी के ब्लॉग पर अपनी हाजिरी लगवा रहा था तो आपकी पैनी नज़र उस समय भी अपनी किरपा मुझ पर बरसा रही थी …… आप अगर इस लेख पर प्रतिकिर्याओ को दुबारा देखेंगे तो पायेंगे की बही सही सलामत है …… उसका कोई भी अंश कभी भी नष्ट होने वाला नहीं है ……. आपके स्नेहिल आशीर्वाद के लिए जितना भी आभार प्रकट करूँ वोह कम ही होगा ….. आत्मिक आभार सहित

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    आदरणीय शाही जी ….. सादर प्रणाम ! आपके साथ साथ और भी कई ब्लागर्स ने इस लेख के बारे में अपनी ऐसी ही राय जाहिर की थी ….. इसलिए उसको तो डिलीट करना ही था ….. आपका आदेश सर माथे पर ….. वैसे मैं इसमें अदावत की वजह से अदा को कम होना ही माँ सकता हूँ ….. लेकिन इसके भाव पूर्ण रूप से शुद्ध और पवित्र थे जिनकी तरफ देखने और सोचने का किसी ने कोई कष्ट ही नहीं किया ….. क्योंकि किसी को भी सपने में भी ऐसी आशा नहीं थी की मैं ऐसा भी सोच सकता हूँ उनके पक्ष में ….. आपका हार्दिक आभारी

dineshaastik के द्वारा
May 17, 2012

आदरणीय राजकमल जी, मेरा मानना है कि इस संसार का अस्तित्व लहू से नहीं, अपितु विचारों से है। मेरे विचार से स्थाई  रिश्ते लहू से नहीं विचारों से बनते हैं। इस  मंच  पर सभी से मेरे रिश्ते विचारों के हैं। व्यक्तिगत रूप से न तो कोई मेरा मित्र है और न ही शत्रु। मेरा विरोध या समर्थन  विचारों को है व्यक्ति को नहीं। मैं व्यक्ति पूजा का सदा विरोधी रहा हूँ। यही कारण  है कि मूर्ति पूजा में विश्वास  नहीं करता। विचारों के संबंध  में मैं हेगेल  के द्वंदात्मक  सिद्धांत  में विश्वास  करता हूँ। यदि हमने व्यक्तिवाद को बढ़ावा दिया तो कालान्तर में सृष्टि से  मानव सभ्यता विलुप्त हो जायेगी। व्यक्तिवाद से इस  मंच  पर ग्रुप  बनने का आशंका है। जो सत्य को जानने के हमारे मौलिक  अधिकार का हनन करती है। क्योंकि फिर हम  सब अपने ग्रुप की गलत  बातों का समर्थन  तथा दूसरे के ग्रुप की सही बातों का विरोध करने लगेंगे। हमें इसे अपने मन मस्तिष्क से निकालना है। मेरा एक  और  निवेदन है कि यदि आपको या अन्य  किसी को मेरी कोई बात  अनुचित लगे तो उसका तार्किक  ढ़ंग  से विरोध  करिये। मैं उस  विरोध  का खुलकर स्वागत करुँगा। एक  निवेदन और है मेरी किसी प्रतिक्रिया को व्यक्तिगत  न  हैं। मेरा विरोध या समर्थन  व्यक्ति का नहीं विचार का है। यदि मेरी यह प्रतिक्रिया भी आपको अतार्किक  लगे तो कृपया तार्किक  ढ़ग  से विरोध  कीजिये।

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    ये क्या हो रहा है, ये क्यों हो रहा है। नहीं ठीक है यह कि जो रहा है।। अपनी बहिन को अगर कोई बोले, कायर हो किन्तु लहू उसका खोले, कमल अब तो कीचड़ से बाहर निकलिये, बहिन बेटी की न इज्जत डुबोले।। अमृत की चाहत रखी जिससे हमने, वही क्यों जहर बीज को बो रहा है। ये क्या हो रहा है, ये क्यों हो रहा है।। यों व्यंग लिखना तो होती कला है, मगर ऐसा व्यंग क्या लगता भला है। मजे के लिये आग तुमने लगाई, मगर दिल यहाँ पर कई का जला है।। मगर जागरण बेखबर सो रहा है। ये क्या हो रहा है, ये क्यों हो रहा है।।

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    आदरणीय दिनेश जी …. सादर अभिवादन ! मैं नहीं समझता की इस मंच पर इन सभी बातो का जानकार आपसे बढ़कर कोई होगा ….. इसलिए अगर आपको ही कुछ नहीं पता तो फिर किसी को भी नहीं और मुझको भी कुछ नहीं पता धन्यवाद सहित जब भी अमेरिका का कोई राष्ट्रपति हमारे भारत देश में विजिट करता है तो नई दिल्ली में उसके बयानात को सुन कर हमारे देशवासी तथा मिडिया वाले पहले तो खुशी से झूम उठते थे (मिडिया वाले तो अब भी ) लेकिन चंद घंटो के बाद ही इस्लामाबाद पहुँचने के बाद उन्ही महाशय के बदले हुए सुर तथा तेवर देश की जनता को झकझोर जाते थे यह अलग बात है की अब हमको पहले से ही पता होता है की इन्होने वहां पर जाकर क्या करना है इसलिए अब हम देश भक्त जनता नई दिल्ली में सयुंक्त पत्रकार सम्मेलन में दिए गए उनके बयानों को गंभीरतापूर्वक नहीं लेते है ….. (हारे का सहारा आदरणीय दिनेश हमारा )

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    आदरणीय दिनेश जी ….. सादर अभिवादन ! हैरान हूँ की आज आपको मेरी सफेद चादर मैली करने के लिए जागरण की क्यों याद आ रही है ….. आज से पहले हुए अनेको वाक्यात के लिए आपकी यह खास पहुँच क्यों नहीं काम कर पाई सिर्फ आज ही क्यों ?…… मैंने अपनी उस पोस्ट की शुरुआत में अपने बछ्प्न की घटना की मिसाल देकर बतलाया था की आजकल लोग भाई बहिन के रिश्ते को भी गलत समझने लगे है ….. साधना जी का जब फोल्ली जी से भाई बहिन वाला रिश्ता है तो मैं उनका भाई बन कर उनके सुफिआना प्रेम का हकदार क्यों नहीं बन सकता ….. चूँकि यहाँ के बाकि के सभी ब्लागर्स भी उनके भाई समान ही है तो उन सभी का भी उनके सूफियाना प्यार (भाई बहिन वाला ) पर हक बनता है ….. और अंत में इस बात को सीना ठौक कर कहा गया था की अगर उनके इस रिश्ते के बारे में कुछ भी ऐसा कहा तो मैं उस आदमी के खिलाफ हूँगा ….. मेरा वोह लेख डिलीट हो गया है नहीं तो आप उसको पढ़कर मेरे द्वारा बतलाये सार तत्व को जान कर समझ लेते ….. मैं हेरान हूँ की एक सीधी सी बात को लोगो ने पता नहीं किस नज़र से देखा और समझा यहाँ तक की मेरे परम हितेषियो ने भी उस लेख को डिलीट करने की सलाह दी नाकि उसमे सुधार करने की …… अगर कोई एक भी मुझको गलत कहता है तो मैं खुद में सुधार करने को तैयार हूँ ….. लेकिन जहाँ पर इतने सारे लोग एक ही बात को कह रहे थे तो मुझे उन सभी का मान रखने के लिए उसको डिलीट कर देना पड़ा …… शायद सभी को इस बात का विश्वाश ही नहीं हुआ की मैं उनके पक्ष में भी कुछ लिख सकता हूँ ….. इसीलिए उसको दूसरे नजिरिये से देख कर उसका गलत मतलब निकाला गया ….. हार्दिक आभार (वैसे आपकी जानकारी के लिए एक बताना जरूरी समझता हूँ की आज तक अमेरिका के किसी भी बड़े व्यक्ति ने पाकिस्तान में रात नहीं बिताई है – अगर रात को रुके है तो सिर्फ भारत में – उनका प्रोग्राम ही कुछ इस तरह से बनाया जाता है की किसी भी राष्ट्राध्यक्ष को रात्रि को वहां पर रहना ना पड़े )

    May 18, 2012

    यहाँ तो कभी संदीप और साधना बोले ही नहीं कि उनका प्रेम भाई-बहन या राधा-कृष्ण का प्यार है तो आप जबरजस्ती उसे किसी रिश्ता का नाम क्यों दे रहे हैं…..! फिर से मसले को आगे क्यों बढ़ा रहे हैं और यदि आप समझते हैं कि मुझे आप दोनों के बीच में यहाँ नहीं बोलना चाहिए तो दो व्यक्तियों को सार्वजानिक होकर बात भी नहीं करनी चाहिए… आप यदि उन्हें बहन समझते है तो जाकर उन्हें बहन बनाना चाहिए..या फिर आप अपने पोस्टिंग में उन्हें अपनी बहन होने का जिक्र किये होते…..वो आपकी बहन है यहाँ पर सबको बनाने की बात क्यों उठा रहे हैं…!

    rajkamal के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय मीनू मौसी जी …. सादर प्रणाम ! प्रिय मित्र अलीन जी …… नमस्कारम ! इस मंच पर हमारी मुलाकात देर से होने के कारण शायद आपने मेरा लेख “मत करना मेरी तरह से किसी महिला ब्लोगर से शादी” नहीं पढ़ा ….. जहाँ पर मैं यह कहता हूँ की जहाँ तक हो सके महिलाओं को इज्जत देनी चाहिए उनको बहन समान नजर से देखते हुए आदर और सन्मान देना चाहिए वहीँ इस बात को भी मानता हूँ की सभी के साथ बहिन भाई का रिश्ता ही नहीं हो सकता ….. अगर किसी महिला ब्लागर की इंटिमेसी किसी पुरुष ब्लागर से होती है तो वोह अपने उस प्रेम के रिश्ते को ईमेल और फोन काल द्वारा मजबूती दे नाकि इस मंच का उपयोग इस काम के लिए किया जाए ….. अगर किसी जोड़े के जीवन में इस तरह का कोई ऐतहासिक पल आता है तो मैं तो यही कहना चाहूँगा की तब हमको यही कहना होगा की रिश्ते आसमान पर ही नहीं बल्कि जागरण पर भी बनते है …… ऐसे किसी भी सोभाग्यशाली जोड़े के विवाह के शुभ अवसर पर जागरण द्वारा उपहार प्रदान करने के लिए मैं खुद लड़ाई लडूंगा ….. हार्दिक आभार सहित

    dineshaastik के द्वारा
    May 20, 2012

    आदरणीय राजकमल जी यह सब क्यों हो रहा है मेरी समझ  में नहीं आ   रहा है। इससे पूर्व  भी कुछ  हुआ    था तब बहुत से लोग  मंच  छोड़कर चले गये थे, आखिर क्यों, हमारी सोच  क्या इतनी कमजोर है, हमारा अहम  क्या इतना महत्वपूर्ण  है, हम  अपने वैचारिक  विरोध  को व्यक्तिगत  विरोध  समझकर  क्या दिखाना चाहते। सरिता जी ने सच कहा था कि आप बहुत भोले हैं। उस समय  मैं उनकी बात से सहमत नही ंहुआ   था।  क्यों न हम सब इन  व्यक्तिगत  बातों को भूलकर, अपने अपने अहमों को त्यागकर आपसी विचार  विमर्श  द्वारा वैचारिक  दोषों से समाज  को मुक्त करें। एक  दूसरे की पशुओं से तुलना करके हम  क्या साबित करना चाहते हैं कि हमारे पूर्वज  पशु थे। मैं तो बहुत व्यथित  हूँ। पीड़ा की पराकाष्ठा लिखने से वंचित  कर रही है।

    dineshaastik के द्वारा
    May 20, 2012

    एक  बात और कृपया मेरी तुलना अमेरिका से मत  कीजिये।  स्विसजरलैण्ड से करें तो उपयुक्त होगा। क्योंकि विश्व में वह ही एकमात्र  तटस्थ देश  है और  संभवतः आज  तक  किसी का  गुलाम  भी नहीं हुआ। विश्व में प्रयत्क्ष प्रजातंत्र  का एक  मात्र उदारहण  है। जहाँ कानून जनता की सहमति से बनते हैं।

May 16, 2012

सादर प्रणाम! यदि आप पहिले ही लोगो की बातें न सुनकर और सोच विचारकर काम किये होते तो आपको बिमा कंपनी का सामना नहीं करना पड़ता..आप एक अच्छे विचारक और आलोचक है. परन्तु पहली बार आपको इस स्तर तक भटके हुए देखा था. वैसे तो मैं कई बार आपके विचारों का विरोध किया हूँ और आगे भी करता रहूँगा……पर कभी नहीं सोचा था कि मैं भी इस स्तर तक जाकर आपके विचारों का विरोध करूँगा. पर आपके आलेख ने मुझे ऐसा करने को मजबूर किया…कभी-कभी जो दिखता है वैसा नहीं होता और जो होता है वो नहीं दिखता. इसे आप मुझसे बेहतर जानते हैं. एक बार फिर आपका मैं विरोध करता परन्तु आपने व्यंग्य का जो तरीका खोजा है वो काबिले तारीफ़ है और मुझे बहुत ही अच्छा लगा. आपकी इस लेखनी को सलाम करता हूँ…..मैं ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता हूँ….बस इतना ही कहना चाहूँगा कि बड़ा दुःख होता है मुझे आप जैसे बड़ों के विचारधारा के खिलाफ जाना….. देखिये एक बात तो भूल ही गया यदि मेरे प्रति आपके दिल में कोई बैर नहीं हो तो मैं चाहूँगा कि पहली शादी आप हमारी करा दे न ….’अनजानी और अनिल’ कि. मैं पहली बार किसी से इस मंच पर अपनी शादी को लेकर विनती कर रहा हूँ. बड़ी कृपा होगी……..!

    May 16, 2012

    हाँ जाते-जाते यह कहना भूल ही गया था कि यहाँ मित्र संदीप का तमाशा बनाया जा रहा था और लोग खुद तमाशा बनते गए….शायद एक बार आप उसके हरेक बात बार ध्यान से सोचते तो यह गलत फहमी पैदा नहीं होती…..वही बात फिर कहूँगा कि कभी-कभी जो दिखता है वैसा नहीं होता है….संदीप भी वही है जो कभी अच्छा बनने की कोशिश नहीं करता परन्तु वह एक ऐसा शख्श है जिसके आगे बड़े-बड़े लोग आते हैं. वह इस छोटी सी उम्र में जाने कितनो को जीवन दिया है. जाने कितनो के घरों के चिराग बुझने से बचाया है, जाने कितनी माओं के कोख सुनी होने से बचाया है. इन सबके लिए वह नहीं चाहता कि उसका कोई नाम हो. अतः वह इस दुनिया से अपना चेहरा छुपा के रखता है. यदि हम एक खुद को अच्छा कहेंगे तो दुनिया के सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ सकते. अतः हमें सच्चाई के जुबान में सच्चाई रखनी पड़ती है. सच वही है जो दिखता है, परन्तु यह हम पर निर्भर करता है कि हम उसे किस रूप में स्वीकार कर रहे हैं ……! उसकी असिलियत आप लोग जानना चाह रहे हैं न. यदि उसकी असिलियत आप जान जायेंगे तो खुद को छोटा समझने लगेंगे. परन्तु वह नहीं चाहता कि कोई उसे छोटा समझे या बड़ा बस लोग जैसे है वैसे ही रहे…..कोई मुखौटा न लगायें..!

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    आपके बचपन के इस घटना को पढ़कर, मुझे भी अपने बचपन की एक घटना याद आ गयी….! एक लड़की जो एक गाँव के चाचा जी को पिता की तरह ट्रीट करती थी और वो उसे बेटी….बड़ा प्यार था इन बाप और बेटी में….हमेशा हंसते -खेलते थे….! गाँव के लोगो को बहुत ख़ुशी मिलती थी इन बाप बेटी को प्यार देखकर और …मुझे भी…!लगभग लड़की १२-१३ की थी और चाचा जी लगभग ४५ के….उस समय मैं ९-१० वर्ष का रहा होऊंगा….!ऐसे ही समय बीतता गया…और धीरे-धीरे….४ साल बीत गए….! वो लड़की १७ वर्ष की हो चली थी…..उसे किसी लडके से प्�¤ �ार हो गया….! पर उसपे नज़र चाचा जी की थी अर्थात उसके पिता जी की, उसे पता नहीं था…..चाचा जी को यह सब देखा नहीं गया , उसे खुलेआम बदनाम कर दिए…! उस लड़की का बाहर निकलना दुर्लभ हो गया. एक दिन की बात है चाचा जी उसके प्रेमी के नाम से उस लड़की को एक पत्र लिखकर सुनसान जगह पर बुलाते हैं और उसके इज्जत से खेल जाते हैं…लड़की को शर्म के मारे किसी से नज़र मिलाने की हिम्मत नहीं हुई. अतः वह अपनी माँ को सारी असिलियत बताकर , रात को पंखे से झूल गयी……उसके बाद लड़का पागल हो गया….आज भी गलियों में चिरकुट बिटोरता, एक गाना गाता हुआ अक्सर दिख जाता है…….शरीफों की शराफत बन गयी है…..मोहब्बत अब तिजारत बन गयी है….और चाचा जी इसी प्रकार नए शिकार खोजते रहे और उसका शिकार करते रहे……

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    प्रिय अलीन जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! मैं खुद ही जब आज तक कुंवारा हूँ तो ?…… लेकिन फिर भी अगर आपकी इसी से तसल्ली होती है तो मैं श्री भगवान से प्रार्थना करता हूँ + करूँगा की वोह आपकी मनचाही मुराद जरूर पूरी कर दे ….. लेकिन अपनी मनपसंद जीवन साथिन के साथ शादी हो जाने के बाद मेरी शादी के बारे में प्रार्थना करना मत भूलिएगा ….. आभार

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    प्रिय अलीन जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! दान के बारे में आपसे अपनी तुच्छ बुद्धि अनुसार केवल एक ही बात कहनी चाहूँगा की अगर कोई करोड़पति अपनी बेशुमार और अपार सम्पदा का नाममात्र ही इस पुन्य कार्य में उपयोग करता है तो मैं उसको दान नहीं मानता हूँ ….. मेरी नजर में असल दान वोह है जोकि अगर जरूरत पड़े तो कर्ज लेकर भी किया जाए ….. फिर चाहे दान के लिए अपना पेट ही क्यों ना काटना पड़े + अच्छे कपड़ो + अच्छे पकवानों के स्वाद का त्याग किया जाए तब ही दान सार्थक कहलाता है ….. बाकी यह भगवान और भक्त के बीच की बाते है – हमे इन सबसे क्या लेना देना – क्योंकि हमको तो सिर्फ ब्लागिंग ही करनी है फिलहाल ….. धन्यवाद

    May 18, 2012

    भैया जी, यह कहानी तो मेरी लिखी है…लगता है आप दरोगा की नौकरी छोड़कर चोरी करना शुरू कर दिए हैं…कम से कम मेरा नाम भी तो पेस्ट कर दीजिये…यह अच्छी बात नहीं है…..हाँ…हाँ..हाँ..! चलिए कोई बात नहीं, एक बार फिर मेरी रपट लिखिए जरा…. अपना मान-मर्यादा अपनी तबाही का सबक होता है, यह खुदगर्जी का जमाना भी गजब होता है. एक बार फिर दिखा है, वर्दी का इन्साफ यहाँ, कोई नयी बात नहीं, एक दरोगे का जुर्माना अजब होता है. जब मुजरिम कोई गैर नहीं, अपना ही है, पर दाग अपने दामन का कहा बुरा होता है, लाख बचा लो प्रवीन को यहाँ जागरण जन्शन वालो, गुनाहगार तो बस गुनाहगार होता है. एक रावण की गलतफहमी पाले १०० रावन हो गये है, क्या इसकी भी तुम्हे खबर होता है, हमें कुबूल है हर इलज़ाम दरोगा राजकमल जी , मैं कब कहाँ कि ‘अलीन’ बेकुसूर होता है……हाँ….हाँ..हाँ.. अच्छा तो हम चलते हैं आपका दिन शुभ हो…!

    May 18, 2012

    दान और जीवन दान दोनों ही दो बाते हैं……..!

ANAND PRAVIN के द्वारा
May 16, 2012

गुरुदेव, सादर प्रणाम आपके ब्लॉग को पढने के बाद मैं दावे से कह सकता हूँ की आप एक निष्पक्ष व्यक्ति हैं और सिर्फ आपने अपने पिछले ब्लॉग में बात को ज़रा गलत ढंग से रख दिया इस कारण बात मुद्दे से ज्यादा व्यक्तिगत हो चली यदि बात सिर्फ किसी एक की ना होगी तो निश्चय ही मेरा पूर्ण समर्थन आपको रहता …………निश्चय ही आपने एक और मौक़ा दे दिया है कुछ लोगों को कट कॉपी पेस्ट कर अपनी कमेन्ट संख्या बढाने का जब ham bhi nay nay aaye the तो badaa acchaa lagtaa thaa padh कर meri post par itne coment ab inki sakhyaa से matlab nahi रहता जब उनका भी खाता भर जाएगा तो शांत हो जायेंगे ……आप बस अब मिट्टी डालिए इन बातों पर और आदरणीया पूनम पांड्य और आदरणीय सन्नी लियोने जी के बारे में ध्यान लगाय……….. मै फिर कहूँगा की जिनको बोलना ही ना आता हो उनसे क्या लड़ना……………आप छोड़ दीजिए बस देखीय अपने आप बिना पानी के सुख जायेंगे…………आपने देखा होगा जब मामला खत्म हो चला तो ये भी चल दिए थे और इनका बस यही एक समाधान है………यह मंच संचालकों का काम था की भाषा पर अंकुश कैसे लगाईं जाती……..आपने पोस्ट डिलीट किया इससे हमें बल मिला ताकि सकारात्मक तरीके से विरोध किया जा सके…………मित्र अनिल से ना उलझें ………..वास्तव में उनकी मानसिक स्तिथि थोड़ी………….आप समझ ही गएँ होंगे…….भाषा का ज्ञान ना हो जहाँ वहाँ चुप रहने में ही बहादुरी है……………..आपको इतनी बात बता दी मेरा मुफ्त बीमा करवा दीजियेगा

    sinsera के द्वारा
    May 16, 2012

    क्या आनंद जी, उधर बुढवा की मौगी पर नज़र रखते हैं और इधर राजकमल जी की सन्नी लिओन और पूनम पांडे पर………आदत सही नहीं है..

    आर.एन. शाही के द्वारा
    May 17, 2012

    आपने सही पकड़ा । बउवा इधर कुछ ढेरे बिगड़ गया लगता है ।

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    गुरुदेव, सादर प्रणाम बड़ी विकट स्तिथि है …………कुछ कहा भी न जाए चुप रहा भी न जाए मै आपके इस आलेख का मौन विरोध करता हूँ………….यह आपकी छवि पर नहीं जंचता परम आदरणीय शाही सर की बातों को समर्थन और आप से आग्रह भी की पोस्ट हटा दें

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    प्रिय आनंद पर्वत जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! मैं फोल्ली जी की तरह से अड़ियल टट्टू नहीं हूँ जिन्होंने की आजतक इतने ब्लागर्स का अपमान करने के बाद भी बेशर्मी अपनाते हुए किसी एक से भी माफ़ी नहीं मांगी है ….. अब आगे आप सभी की जिम्मेवारी है ….. आजके बाद आप नैतिक रूप से इस विषय में मुझ से कोई शिकायत करने का अधिकार खो देंगे …… जो भी होगा उसका आनंद लीजिएगा ……

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    प्रिय आनंद पर्वत जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! आपको चाहे कमेंट्स से विरक्ति और वैराग्य हो गया हो लेकिन मुझको इनसे फिलहाल वक्त तक तो प्रेम है ….. आपकी सलाह ना मानते हुए आज मैं खुद कापी पेस्ट करने का हसीं गुनाह करने जा रहा हूँ ….. क्योंकि दूसरों के विचारों का आदर करना और सन्मान करने से मैं पीछे हटने वाला नहीं हूँ ….. इसलिए किसी के कमेन्ट को डिलीट करने का साहस फिलहाल मुझमे नहीं है ….. वैसे भी बीमा कम्पनी के हर्जाने से डर लगता है आपको शायद ना लगता हो ….. आपका तहे दिल से शुक्रिया

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    आदरणीय शाही जी ….. सादर प्रणाम ! आदरणीय सरिता बहिन जी …. सादर अभिवादन ! प्रिय आनंद पर्वत जी से करीब पांच महीने पहले महीने मैंने सन्नी लियोन पर एक लेख लिख कर पोस्ट करने का वायदा किया था ….. वोह लेख तैयार है लेकिन मैं इंतज़ार कर रहा था जिस्म -2 फिल्म के रिलीज होने का ….. वैसे अगर मूड पहले बन गया तो पहले भी उस फिल्म को रिलीज किया जा सकता है ….. इसलिए आप से सविनय निवेदन है की प्रिय आनंद पर्वत जी की मंशा पर संदेह करते हुए सवालात ना ही उठाये जाए तो ही अच्छा होगा ….. आप सभी का हार्दिक आभारी हूँ

sinsera के द्वारा
May 16, 2012

धन्य हैं आप राजकमल भाई साहब, आप को शत शत नमन… आप की लेखनी के हम मुरीद हो गए… आप की कलम को सलाम …. बहुत खूब बहुत खूब…. (100 %सच है, मजाक न समझिएगा….. )

    rajkamal के द्वारा
    May 17, 2012

    आदरणीय सरिता बहिन जी …… सादर अभिवादन ! किसी को भी थोड़े से अरसे में जानना इसलिए नामुमकिन है क्योंकि आपको मैं जो भी अपने बारे में दिखाना और बताना चाहूँगा आप केवल वही देख पाएंगी और यहाँ पर कोई भी खुद को अच्छी तरह से ही पेश करता है ….. जहाँ तक लेखनी को पसंद करने की बात है तो उसके बारे में मेरा यही कहना है की ज्यादातर आंतरिक प्रेरणा से ही निकल कर बाहर आता है इसलिए आप सभी के आशीर्वाद और स्नेह तथा अपने लिखे हुए की सराहना के लिए माता सरस्वती जी का गुणगान करते हुए उनको शत शत नमन करता हूँ ….. आप सभी पर भी उनका वर बना रहे इसी कामना के साथ हार्दिक आभार सहित


topic of the week



latest from jagran