RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

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( “जिन्न की शादी – भाग प्रथम” –रहस्य –रोमांच विशेष” )

Posted On: 13 Dec, 2011 मस्ती मालगाड़ी में

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                     मेरा गाँव प्रागपुर जालंधर छावनी से एक किलोमीटर की दुरी पर था और वहां से नंगलपुर गांव की दुरी आधा किलोमीटर थी …. मेरे गाँव और नंगलपुर के बीच की इस दूरी के बारे में मशहूर था कि रास्ते में कम से कम तीन जगहों पर चुड़ैलो का बसेरा था …. अगर कोई रात के समय सफर करे तो पीछे से चुड़ैलें आवाजें देकर उसे बुलाती थी और जब कोई शख्स मुड़कर देख लेता था तो फिर उनके जादू से बच नहीं सकता था …..

                         अब पता नहीं वह मेरा वहम था या हकीकत थी कि मेरा  वास्ता दो-तीन बार रात को सफर के दौरान उन आवाजों से पड़ा मगर मैंने वालिदैन कि हिदायत के मुताबिक पीछे मुड़कर नहीं देखा ….. शायद यही वजह थी कि जिन्नों, भूतों और प्रेतों के मामले में मेरा खौफ किसी हद तक कम हो गया था ….

                                     चुड़ैलो के बसेरों के अतिरिक्त भी मेरे गांव के पीछे की तरफ एक और जगह थी जो की प्रेतग्रस्त कहलाती थी …. वहां पर खेतों के बीच बेरी का एक पेड़ था जिसके पास ही हम गांव के लड़के कबड्डी- कबड्डी   खेला करते थे …. लोगों को उस पेड़ से दूर रखने के लिए मिटटी की एक दिवार सी बना दी गई थी …. फिर भी हम बच्चों ने उसके एक कोने से दिवार को तोड़कर रास्ता  बना लिया था ….

                                     एक बार कबड्डी खेलने के दौरान मेरी नजर अचानक ही उस मिटटी में एक सुराख पर पड़ी जिसमे से की भिड़े (ततैया ) अंदर –बाहर आ और जा रही थी …. मैंने  अपनी उस कम उम्र की कमअक्ली के वश में होकर एक ढेला उठाकर उस सुराख के उपर दे मारा …. ढेला लगने से चार –पांच भिड़े ‘मौका- ए- वारदात’ पर तुरंत ही अल्लाताला  को प्यारी ही गई जबकि  कुछेक ‘भाग्यशाली’ जख्मी भी हो गई थी …. उस शरारत को करने के बाद इस हैरतअंगेज मंजर को मैं बड़ी ही हैरानी और उत्सुकता से देख ही रहा था की मुझको ऐसा महसूस हुआ की जैसे किसी ने मेरे श्री मुख पर एक जोरदार चांटा (शरद पवार कि तरह ) रसीद कर  दिया हो और मैं उसी जगह पर गिर कर बेहोश हो गया …..

                    वहां पर मौजूद सभी कबड्डी खेलने वाले लड़के मुझको बेहोश देख कर परेशान हो गए और तुरन्त ही उन्होंने मुझको उठा कर घर पर पहुंचा दिया  …. वालिदा और दीदी मुझको बेहोश देख कर घबरा गई और रौना पीटना शुरू कर दिया …. जब उन्होंने मुझको लाने वाले लड़को से  सारा माजरा सुना तो तुरंत गांव के एक ओझा को बुलवाया ….. उसके इलाज रूपी कोशिशों से काफी देर के बाद मुझको होश आया ….. उसने मेरे घरवालो को बतलाया की वोह भिड़े दरअसल में जिन्न थे जोकि उस समय शादी के जलसे में भाग ले रहे थे …. इस बच्चे ने जो ढेला मारा था उससे लगने से एक ही खानदान का प्रमुख जिन्न + उसकी दो बेटियां और एक जवान बेटा मारे गए थे ….. उसकी बीवी इस हमले के दौरान जख्मी हो गई थी जबकि उसकी एक बेटी जोकि अंदर प्रवेश कर चुकी थी , वोह बच गई थी …. उसी ने इस बच्चे को मारने की कोशिश की थी लेकिन अच्छी किस्मत के बलबूते यह बच गया …..

                                      उस ओझा ने लगातार सात  दिन तक आकर के मेरा इलाज किया और फिर मेरे बाजू पर एक काला  धागा इस चेतावनी के साथ बाँध दिया की यह टूटने न पाए …. इसी दौरान मुल्क का बंटवारा हो गया तो हम लोग पकिस्तान में  सक्खर चले गए …. सक्खर में दो साल के बाद पांचवी कक्षा में दाखिले के बाद पढ़ाई से मन बेजार होने के कारण वालिद साहिब ने मुझको  एक ओवरसियर के साथ हैल्पर लगा दिया था ….. एक दिन घर से निकलते समय दरवाजे में लगी हुई कील से बाजू जख्मी होने के साथ -२ वोह पवित्र धागा भी टूट गया …. मुझको इसका पता तब चला जब किसी ने आकर मेरे गाल पर एक जोरदार झन्नाटेदार थप्पड़ मारा और मेरा गला दबाया  …. मैं चीख मारकर बेहोश हो गया ….. यह मेरी खुशकिस्मती थी कि हमारी मस्जिद के मौलवी साहिब नजदीक ही रहते थे …. लिहाजा , मेरे बेहोश होने के बाद मेरा जख्मी बाजू तथा “टूटा हुआ धागा” देखने के बाद मेरी दादी अम्मा अस्मा ने  मौलवी साहिब को बुला भेजा …. मौलवी साहिब ने आकर एक तावीज पहनने के लिए दिया और ताकीद की कि “उसे हमेशा पहने रहना , वर्ना वह जिन्नी तुम्हे जिंदा नहीं छोड़ेगी ….. इसके इलावा उन्होंने यह भी कहा कि मेरा इल्म सिर्फ इतना ही है ….. मैंने तुम्हे उससे महफूज कर दिया है …. मगर तुम किसी बड़े आमिल (तांत्रिक ) के पास जरूर चले जाना” ….

             इस घटना के कुछ अरसे के बाद  मैंने खराद का काम सीखना शुरू कर दिया था ….   एक रोज मेरे वालिद को उनके ओवरसियर ने एक अंग्रेज साहिब की गाड़ी को ठीक करने के लिए उनके बंगले में भेजा, जोकि वहां से कुछ फासले पर कालोनी में बना हुआ था …. मेरे वालिद साहिब ने वहां जाते हुए कहा , बेटा,  छुटटी करके वहीँ पर आ जाना  ….. हम वहीं से इक्कट्ठे ही अपने घर को चलेंगे ….. मैं दोपहर के तीन बजे के करीब अपनी साइकल से वहां पर पहुँच गया ….. उस बंगले में अंग्रेज साहिब अपनी बीवी और बेटी के साथ रहते थे ….. जब मैं वहां पर पहुंचा तो वह लड़की वहां पर झूला झूल रही थी और मेरे वालिद साहिब गैराज में मोटर को ठीक कर रहे थे ….. मैं ख़ामोशी से वालिद साहिब के पास जाकर खड़ा हो गया …. जब उस लड़की ने मुझको वहां पर खड़े देखा तो इशारे से मुझे  अपने पास  बुलाया और  टूटी फूटी उर्दू में मेरा नाम पूछा ….. मैंने कहा , “मेरा  नाम खालिद है” …..

                                   “मेरा नाम ऐनी है , तुम झूला झूलेगा ?” वह बोली ….. मेरे सिर हिलाने पर वह झूले पर से उतर गई ….. फिर हम दोनों बारी –बारी से उस झूले पर झूलते रहे …. इसके बाद मेरी उस लड़की से अच्छी खासी दोस्ती हो गई ….. उसके बाद भी मैं अक्सर उसके पास खेलने के लिए जाने लगा …. लेकिन एक बात पर मैं बहुत हैरान होता था कि जब भी मैं उस बंगले पर ऐनी से मिलने गया , वह मुझको हर बार बाहर ही खेलती मिली  और मुझे उसके इलावा और कोई दूसरा नजर नहीं आया ……

               एक दिन  उससे  झूला झूलते समय मैंने कहा , “आओ ऐनी मेरे साथ बैठ कर झूला झूलों”….  वह फौरन ही राजी हो गई लेकिन जैसे ही उसने मेरे पास बैठने कि कोशिश की  एकदम चीख मारकर पीछे हट गई …. “क्या हुआ ?” मैंने पूछा …..

“लगता है किसी चीज ने काट लिया है” वह बोली ….  मैंने उसके हाथों की तरफ देखा तो  वहां पर कुछ भी नहीं था …..

                         “तुम अपने कपड़ो में देखो” वह बोली …. मैंने अपने कपड़े झाड़े , मगर मुझे कुछ नहीं मिला …. इस पर वह बोली ,”अपनी कमीज उतार कर देखो”…. मैंने अपनी कमीज उतारी और उसने मेरे गले में लटकते हुए तावीज को देखा तो बोली , “यह क्या है ?, इसे उतारो” ….. लेकिन मैंने मना कर दिया ….. उसके क्यों के जवाब में मैंने बताया कि  “एक जिन्नी मेरे पीछे पड़ी हुई है , तावीज को उतारने पर वोह मुझको खत्म कर देगी” , यह सुन कर वोह खामोश रह  गई …..

                           एक दिन नहाते समय गलती से मैं तावीज को घर में भूल गया और ऐनी के पास खेलने चला  गया  …. उस दिन वह मुझे  बहुत खुश नजर आई और मुझे देखकर उसकी  आंखों में एक अजीब सी चमक आ गई ….. वह मेरा हाथ पकड़कर  मुझको लान के एक वीरान हिस्से में  ले गई …. वहां एक पुराना कुआं था …… मैंने उसमे झांककर  देखा तो मुझे चक्कर आ गया ….  कुआँ बहुत ही गहरा था ….  मेरे बाद ऐनी उसमे झाँकने लगी तो मुंडेर की एक ईट उसके पैरों से फिसल गई ….. वह कुएं में गिरने के करीब थी कि मैंने झपटकर उसका बाजू पकड लिया ….. उस वक्त तक उसका आधे से ज्यादा धड़ कुएं में जा चूका था …. उसके वजन की  वजह से मेरे पैर भी उखड़ रहे थे …. मगर मैंने एड़ी –चोटी का जोर लगाकर बड़ी जददोजहद के बाद उसे बाहर खींच ही लिया …… इस पर वह मेरी बहुत आभारी हुई और मेरा शुक्रिया अदा किया …..

                        दूसरे दिन जब मैं उस बंगले पर गया , तो ऐनी से मेरी मुलाकात नहीं हुई …. आखिर कई रोज के बाद मैंने बंगले वाले अंग्रेज से ऐनी के बारे में पूछा , तो वह बोला , हमारी तो कोई बेटी ही नहीं है …. हम दोनों मियां –बीवी ही यहाँ पर रहते है …. यह सुनकर मुझे बहुत हैरत हुई ….. धीरे -२ मैं उसे भूल गया और फिर कभी उधर नहीं गया …….

*अगला भाग अगले हफ्ते  इसी दिन इसी समय इसी मंच पर देखेंगे और पढेंगे “हम – लोग”

*दोस्तों मेरी  मेरी यह दिली तमन्ना है कि मुझे किसी जिन्नी + परी या फिर इच्छाधारी नागिन से इश्क हो जाए …..        

( “जिन्न की शादी – भाग प्रथम” –रहस्य – रोमांच  विशेष” )                               

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68 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ANJALI के द्वारा
December 6, 2012

आगे की कहानी कब लिखोगे PLS WRITE

अजीत राय के द्वारा
December 21, 2011

ये कहानी मैंने करीब दस साल पहले एक “सत्यकथा” टीप पत्रिका के भूत प्रेत विशेषांक में पढी थी! इसी में आपने संशोधन(जैसे पवार शरद पवार कि तरह) करके यहाँ चेप दिया है!

syeds के द्वारा
December 17, 2011

राजकमल भाई का अलग अंदाज़… बहुत खूबसूरत और रोचक कहानी अब अगला भाग पढ़ते हैं…. :) http://syeds.jagranjunction.com

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 18, 2011

    आदरणीय सैयद भाईजान …… आदाब ! इस बार इस मंच पर काफी दिनों के बाद आना हुआ है आपका ….. पिछले काफी दिनों से आपकी कोई भी नई रचना भी नहीं आई है ….. आपसे मिल कर अच्छा लग रहा है मुझको ….. मेरी कोशिश रहेगी कि एक अलग सी हटके एक और कहानी आप सभी की सेवा में पेश करूँ …. आपकी सराहना के लिए हार्दिक आभार

manish kumar के द्वारा
December 16, 2011

आप ने काफी सुन्दर लिखा वास्तव में लग रहा की, जिन्नी कि अपनी दुनिया होती हे, अति सुन्दर !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 18, 2011

    प्रिय मुनीश कुमार जी ….. नमस्कारम ! काश कि मैं इस तरह से लिख पाता ! मैंने तो सिर्फ इसको आप सभी कि सेवा में पेशे खिदमत किया है …. यह केवल आपको ही नहीं बल्कि मुझको भी पूरा विश्वाश है कि जिन्नों +जिन्नात कि अपनी एक अलग ही दुनिया होती है …. जिन्न भी दो प्रकार के हुआ करते है अच्छाई करने वाले और बुराई करने वाले ….. आपकी सराहना के लिए बहुत -२ आभार

sumandubey के द्वारा
December 15, 2011

राज कमल जी नमस्कार सच में रहस्य भरी कहानी है लिखते रहे पढने के लिए सब मंच पर है .

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 15, 2011

    आदरणीय सुमन जी ….. सादर अभिवादन ! अब जब आपने बाकि सभी की गारण्टी ले ही ली है तो मुझको इस दिशा में और कुछ भी करना ही होगा ….. एक और कहानी याद आ रही है जोकि थोड़ा सा अलग और हटकर है ….. अगर किताब मिल गई तो ठीक नहीं तो याद्दाश्त से ही काम चलाना पड़ेगा ….. आप की इस कुछ करने के लिए उत्साहित +प्रेरित करती प्रतिकिर्या के लिए थे दिल से धन्यवाद

December 15, 2011

राजकमल जी कहानी का अगला भाग जल्दी पोस्ट करें, बेचैनी बढ गई है|

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 15, 2011

    प्रिय जुबली कुमार जी …… सप्रेम नमस्कारम ! बहुत ही जल्द आपके कहे अनुसार इसका दूसरा भाग प्रकाशित होगा – शायद अब तक हो भी गया हो ….. ऐसा लग रहा है की आपको यह कहानी पसन्द आ रही है ….. मुझको मेरा प्रतिफल मिल गया ….. हार्दिक आभार सहित

akraktale के द्वारा
December 14, 2011

आदरणीय राजकमल जी सादर नमस्कार, क्या मै भी पहले किसी ओझा से जा कर ताबीज लेकर आऊं फिर आपकी कहानी पढूं?

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 15, 2011

    आदरणीय अशोक जी ….. सादर अभिवादन ! किसी रोमांचक रचना को पढ़ने के लिए शायद ही आज तक किसी को भी किसी गंडे – तावीज या ओझा तांत्रिक की जरूरत महसूस हुई हो ….. अगर आपको ऐसा लगता + महसूस हुआ है तो वाकई में ही यह बेहद हैरानीजनक है और गिनिस बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड बुक में दर्ज करने योग्य बात बन गई है ….. मुबारक वर्ल्ड फेमस हो जाने पर – हा हा हा हा हा सादर आभार सहित (आजकल आपकी कोई भी रचना दिखाई नहीं दे रही है )

December 14, 2011

आदरणीय राजकमल जी, सादर नमस्कार ! चूंकि अभी कहानी निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है….सो कोई ‘विश्लेषणात्मक प्रतिक्रिया’ तो नहीं दे सकता हूँ लेकिन इतना जरूर कह सकता हूँ कि अगली कड़ी का इंतज़ार है । :)

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 15, 2011

    प्रिय संदीप भाई ….. नमस्कारम ! बस बहुत ही जल्द वोह अगली कड़ी आपकी पकड में होगी …. शायद अब तक आ भी गई हो ……. आपके असली विचारों का मुझको भी इंतज़ार रहेगा ….. आपका बहुत -२ शुक्रिया (पढ़ाई में सफलता के लिए शुभकामनाये )

Amita Srivastava के द्वारा
December 14, 2011

राजकमल भाई कहानी मे रहस्य भी है रोमांच भी ,और एक निरंतरता के साथ एक उत्सुकता बनी रहती है कि आगे क्या होगा ?सबसे बड़ी बात तो यह है कि आपके अंदाजे बयाँ से कभी -२ ये सत्य कथा लगने लगती है | भाग -दो के इंतजार मे और ढेर साडी शुभकामनाओ के साथ ..

    Amita Srivastava के द्वारा
    December 14, 2011

    कृपया साडी को सारी पढ़े

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 15, 2011

    आदरणीय अमिता जी ….. सादर अभिवादन ! यह अंदाज़ मेरा नहीं है जैसा उस किताब में लिखा हुआ था उसको जस का तस अक्षरश आप सभी की सेवा में प्रस्तुत करने का प्रयास भर किया है …. जिस तरह से इसमें स्थान और पात्रो के नाम दिए गए है उसी से ही यह साबित हो जाता है की यह बिलकुल सच्ची घटना पर आधारित है …. इस लिहाज से आपका अनुमान बिकुल सही है ….. आपको मेरा यह तुच्छ प्रयास अच्छा लगा आपने इसको इतनी रूचि से पढ़ा और मेरा बहुत उत्साह बढ़ाया …. इसके लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया

December 14, 2011

बहुत लम्बे समय के बाद कुछ रहस्य-रोमांच से ताल्लुक हुआ. इसके लिए तो आपका धन्यवाद करना ही पड़ेगा..! वैसे,मैंने कुछ-कुछ अनुमान लगा तो लिया है, की अगले भाग में क्या होगा..! पर फिर भी प्रतीक्षा रहेगी, भाग-दो की..! आशा है, की आप उत्सुक पाठकों का अधिक समय नहीं लेंगे, और जल्द-से-जल्द रहस्य की परतें खोल देंगे…! चलते-चलते, आपको नव-संवत्सर, और उससे पहले, एवं बाद में आने वाले सभी पर्वों की बहुत-बहुत शुभ-कामनाएं देना तो मेरा कर्तव्य है ही.. इसलिए, स्वीकारें.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 14, 2011

    टिम्सी जी …… नमस्कारम ! आपकी भी अगर इस तरह के लेखों में रूचि है तो मैं अपने पूर्व प्रकाशित लेखों के लिंक बता सकता हूँ जो कि इसी तरह के लेखों के है …… अब आप एक काम करियेगा कि मेरे मेल एड्रेस पर अपना अनुमान लिख कर पोस्ट कर दीजियेगा …. लेकिन मैं उसको पढूंगा इस रचना के दूसरे भाग के प्रकाशित होने के बाद ही ….. और वैसे भी इस में किसी भी तरह के बदलाव का कोई चांस ही नहीं है क्योंकि यह सच्ची घटना पर आधारित है …… लाखों +करोड़ो शुभकामनाओं सहित राजकमल भ्राताश्री – हा हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    December 15, 2011

    हाहा.. दूसरा भाग पढ़ लेने के बाद अब आपका ये उत्तर पढ़ा. इसलिए, अब मेरे अनुमान के लिए कोई स्थान ही नह है. वैसे बता दूं, की मेरा अनुमान गलत साबित हो चुका है. और शुभकामनाओं का एक बड़ा भण्डार आपके लिए भी..! :)

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
December 14, 2011

रोमांचित कर देने वाली कहानी ..आप इतने पहले के हैं …या ..जिन्न तो नहीं कह सकते …अभी तक तो राज भ्राता की कितनी बारात-चुड़ैलों के जादू से बचना सच में बड़ा मुश्किल – भीड़ों से भीड़ के भी बच निकले ,,श्री मुख पर तो हंसा ही दिया बेचारे शरद इतिहास में …खानदान का प्रमुख जिन्न + उसकी दो बेटियां और एक जवान बेटा मारे गए ..ह हां पाप तो किया बड़ा भारी .. जोर का काँटा लगा …हाय रे .. “एक जिन्नी मेरे पीछे पड़ी हुई है , तावीज को उतारने पर वोह मुझको खत्म कर देगी” ,….हे भगवान् कुएं में जाते जाते भी अभी वो बची है और …हमका इसक हुयी गवा वाले आप .. अब तो हम रातों को और नहीं सो पायेंगे आप की चिंता में ………..खुदा खैर करे …वो जिन्नी दूर चली जाए हैरत तो हुयी जब जालंधर छावनी का नाम लिया वहीं पी यी पी चौक के पास एक पेड़ पर तो हम भी ..इतने दिन रहे– सपने में भी आप नहीं दिखे …. जय श्री राधे भ्रमर ५

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    December 14, 2011

    पी.ये पी चौक-जी टी रोड बायीं पास पढ़ें गुरुवार …और थोड़ी दूर दुसरे पेड़ में हमारे प्रिय संतोष जी लटके थे ,लुधियाना में ,,ह हा भ्रमर 5

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 14, 2011

    आदरणीय भ्रमर जी ….. सादर प्रणाम ! आपको मेरी कितनी चिंता है जोकि अजीब सी भी है ….. एक तरफ तो आप मेरा उस जिन्नी से पीछा छुड़ाना चाहते है दूसरी तरफ आप ढ़ेरो शादियों के लिए ढ़ेरो आशीर्वाद भी प्रदान कर रहे है ….. हे मायापति +मायाधारी अजब ही है आपकी यह मायावी बाते और माया –हा हा हा हा यह बिलकुल एक सच्ची घटना पर आधारित ही है ….. अगर आप जालंधर में ही रहते है तो उस गांव के किसी बजुर्ग से इस बात कि तस्दीक भी कर सकते है …..वैसे इसका असली प्रमाण तो पाकिस्तान से ही मिल सकता है क्योंकि बाद वाली सारी कि सारी घटनाएं सक्खर में हुई थी …… आपकी इस मजेदार प्रतिकिर्या के लिए आपका दिल कि सभी तहों से शुक्रिया जय श्री राधे कृष्ण :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-)

    Santosh Kumar के द्वारा
    December 15, 2011

    आदरणीय भ्रमर जी ,.सादर नमन पी ए पी चौक से लुधिआना मेरा घर ६२ किलोमीटर है ,..और मैं अभी जिन्न नहीं बना …हा हा हा गुरूवार आ गया जिन्नी की पूरी कहानी भी आ गयी …हार्दिक आभार

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    December 15, 2011

    जय श्री राधे संतोष जी अभी जिन्न नहीं बने पहले तो थे न ….हम और राज जी के साथ …ह हां .. अब तो पंजाब से दूर हूँ .. क्यों धक्का मारते हो भाई पाकिस्तान सक्खर में ? कुछ दिन तो अभी लिख पढ़ लेने दो यहाँ पर …. आप की प्रतिक्रिया भी मजेदार है लेख से कम कहाँ ? जय श्री राधे .. भ्रमर ५

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 15, 2011

    आदरणीय भ्रमर जी ….. सादर प्रणाम ! अपने द्वारा प्रस्तुत इस कहानी की सत्यता के लिए ही आपसे इस तरह की गुजारिश की थी ….. वैसे इसके लिए नामुराद पकिस्तान देश में जाना जरूरी तो नहीं …. अपने या किसी के जानकार पकिस्तान में बैठे हुए से भी पता किया जा सकता है ….. आपको हम और कहीं भला कहाँ जाने दे सकते है ….. अब तो जीना यहाँ मौज मस्ती यहाँ – हा हा हा हा हा शुभकामनाओं सहित आभार

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 15, 2011

    प्रिय संतोष भाई ….. सप्रेम नमस्कारम ! आप सभी के प्यार भरे दबाव के आगे इस फिल्म की शूटिंग रात दिन में पूरी करके इसको वक्त से पहले रिलीज करना पड़ा …. भला मेरी इतनी मजाल कहाँ की साथियो की बात को टाल दूँ …. और मैं तो खुद दूसरे साथियो को अगला भाग जल्दी पोस्ट करने के लिए कहता रहा हूँ ….इसलिए नैतिक रूप से भी देरी उचित नहीं थी …. आप सभी की सही सलाह के लिए मैं दिल से शुक्रगुजार हूँ –और आपका तो हूँ ही ….. हा हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    Vioryca के द्वारा
    November 28, 2013

    An ineeillgtnt point of view, well expressed! Thanks!

December 14, 2011

राजकमल जी नमस्कार ! इस कहानी को पढ़ने के बाद तो कन्फ़्युजन हो गया है।कि आपको भाई जान कहना जारी रखू या दादा जी कहूँ……अगर सच्चाई है तो फिर तो आपको दादा जी ही कहना पड़ेगा क्यूंकी किस्सा अंग्रेजों के जमाने का है….अगर नहीं तो फिर राज भाई के कथन से सहमत हूँ कि “दूसरी किश्त के साथ जरा सा likh देना कि सत्य घटना नहीं नहीं तो samaj faila andhvishwas बढेगा”….बहुत सनसनी है कहानी में….अंत तक बांधे रहती है और आगे के रोमांच के लिए बेचैनी बढ़ती है……बहुत बहुत बधाई इस प्रश्तुति के लिए !!!

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 14, 2011

    आदरणीय डाक्टर साहिब ….. सादर अभिवादन ! मुझ नाचीज कि आपके श्री चरणों में बस इतनी सी ही गुजारिश है कि आप आप मेरे लिखे हुए पर न जाकर मेरी तस्वीर पर जाए तो कहीं ज्यादा बेहतर होगा – हा हा हा हा और वैसे भी अपने पड़दादा और पड़नाना का नाम आजकल किसको पता है और किसको याद है ….. और लकड़ दादा जी नाम पता होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता ….. आपको यह बाँधने योग्य (आपकी नजर से ) प्रस्तुति अच्छी लगी जान कर मन गार्डन -२ हुई गवा ….. मेरा सेर खून बढाने के लिए आपको भी हरियाली वाला (हरे -२ नोटों कि) आभार :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-)

div81 के द्वारा
December 14, 2011

राजकमल भाई नमस्कार, ये कहानी मैंने बचपन में पढ़ी थी | किसी कहानी से कोई शिक्षा ग्रहण की हो या न की हो मगर इसका इतना असर हुआ की मैंने ततैया के छत्ते में पत्थर मारना छोड़ दिया था ;-) | बचपन में पढ़ते वक़्त जो रोमांच हुआ था एक बार फिर से पढने पर उसी रोमांच को महसूस किया | बचपन के उस पल में फिर से ले जाने के लिए आप का बहुत बहुत शुक्रिया राजकमल भाई अगले भाग का इंतजार है |

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 14, 2011

    आदरणीय दिव्या बहिन जी …… सादर अभिवादन !! नीचे कोमल बहिन ने भी आप जैसी ही बात कही है और सिर्फ आप दोनों बहनों ने ही कही है ….. मैंने इस कहानी को चार साल के करीब एक किताब में पढ़ा था ….. पढ़ने के बाद से आज तक यह मेरे होशो हवास पर काबिज है ….. अगर मैंने भी इसको आपकी तरह बचपन में पढ़ा या फिर सुना होता तो मैं तो जानबूझ कर ततैया को पत्थर मारा करता क्योंकि असल में ही मुझको इस कहानी के सच होने का यकीन है और खुद के साथ इसके दोहराव कि इच्छा भी …. सोमवार को जब इसके अगले भाग पर मुलाक़ात होगी तभी पता चल पायेगा कि वोह आपकी अपेक्षाओं पर कितना पूरा उतरेगा ….. आपकी इस स्नेहिल प्रतिकिर्या के लिए हार्दिक आभार :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-)

mparveen के द्वारा
December 14, 2011

राजकमल जी नमस्कार, आपकी रहस्यमयी कहानी पढ़ते -पढ़ते मुझे ऐसा महसूस हुआ की जैसे ये कोई सत्य घटना है . वैसे तो बचपन में बहुत पढ़ी हैं ऐसी कहानियां और टीवी में भी देखी हैं (विक्रम बेताल ) के किस्से … अछा लगा बहुत समय बाद ऐसी कोई कहानी पढके … अब अपने कहा है की ये प्रथम भाग है तो जल्दी से अगला भाग भी पोस्ट कर दीजिये क्यूंकि उत्सुकता बढ़ गई है ..

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 14, 2011

    आदरणीय प्रवीन जी …… सादर अभिवादन !! आपने बिलकुल ठीक पहचाना कि यह शत प्रतिशत एक सत्य घटना पर ही आधारित है और इसमें दिए गए पात्रो के नाम और जगह का उल्लेख भी अक्षरश बिलकुल सही ही है ….. अगर आपको इस तरह कि कहानिया पसन्द आती है तो मैं पूर्व में हमारे इसी मंच पोस्ट किये गए अपने सभी लेखों के लिंक आपके ब्लॉग पेज पर भेजने कि कोशिश करूँगा ….. रचना के प्रति अपना उत्साह दर्शा कर मेरा खून बढाने के लिए आपका बहुत -२ आभार (अगले भाग का समय सोमवार को तय है ही – इससे पहले इसको चाह कर भी पोस्ट नहीं कर सकता क्योंकि जो पहले शार्टकट में लिखा था उसकी जगह सिरे से दुबारा लिखना पड़ रहा है क्योंकि जो बाते जानबूझ कर छोड़ दी थी निरंतरता बिखर जाने के कारण उनको दुबारा शामिल करके दुबारा लिखना पड़ेगा –फिर भी कोशिश रहेगी पहले आप सभी के दरबार में हाजिर होने कि …..)

abodhbaalak के द्वारा
December 14, 2011

प्यारे गुरु जी,/ भाई / मित्र / मार्गदर्शक ……………… एक समय था जब हमारे नानी / दादी इस तरह की कहानी सुनाया करती थी और हम सब उनके चारो और बैठ कर ……………. एक अलग ही चार्म है इस तरह की कहानियों का और अक्सर हम कल्पना के रथ पर सवार होकर कहीं जिन्न / जिन्नी को दोस्त बना लेते हैं तो कहीं …………. आपकी रहस्य और रोमांच पर लिखी और भी पोस्ट पढ़ी है और पर जब भी आपकी कोई भी/ किसी भी तरह की पोस्ट आती है तो वो अपने में नयी और अनूठी होती है क्योंकि मेरे राज जी के लेखनी कुछ और ही है. अब जल्दी से अगला भाग भी पोस्ट कर दें, :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 14, 2011

    प्रिय अबोध जी …… सप्रेम नमस्कारम ! आपने मुझे अपना कहा है यह सुन कर मन बहुत ही गुदगुदात है ….. और इस तरह कि जितनी भी कहानिया आपने पढ़ी है उनमे मेरा कुछ न कुछ योगदान अवश्य था …… लेकिन इसमें मात्र एक प्रतिशत ही अपना योगदान दे सका हूँ मैं ….. बाकी कि बाते आप नीचे मेरी कोमल बहिन कि प्रतिकिर्या के दिए गए जवाब में पढ़ सकते है ….. आप से स्नेहिल रिश्ता पुराना है बाकि मेरी कुछेक मजबूरिया है जब यह दूर हो जाएंगी तो मेरी तरफ से न केवल आपको बल्कि और किसी को भी किसी किस्म कि शिकायत नहीं रहेगी …… वैसे मैंने आज तक आपको कभी धर्म संकट + किसी भी दूसरे संकट में नहीं डाला है और न ही चाहता हूँ ….. सदैव ही आपका शुभचिंतक और भला चाहने वाला आपका ही एक साथी दिली शुक्रिये सहित :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-)

bharodiya के द्वारा
December 14, 2011

जीनी तो गई राजकमभाई । हालां की जीनी में जान नही थी । पर लडके ने उस की जान बचाने की कोशीश की । ईसी बात जीनी को भा गई । ईसी कारण जीनी की दुश्मनी खतम हो गई और उस की आत्मा को सद्गति मिल गई ।

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 14, 2011

    प्रिय भरोदिया भाई ….. नमस्कारम ! आपने अपनी इस छोटी सी प्रतिकिर्या में ही अगले भाग का निचोड़ पेश करके रख दिया है ….. जो बात आपके दिमाग में खलबली मचा रही है उसका उत्तर अगले भाग में आपको मिल ही जाएगा ….. मैं अध्यात्मिक और आलोकिक प्यार कि तलाश में हूँ –देखते है कि मेरी यह तलाश कब पूरी हो पाती है ….. लेख को पसन्द करने के लिए आपका हार्दिक आभार :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-)

jlsingh के द्वारा
December 14, 2011

परम भाग्यशाली मेरे गुरुदेव, कब होगी सगाई! और हमलोग मुंह मीठा कर पाएंगे! उसी जिन्न की मदद से भ्रष्टाचारियों से छुटकारा भी पाएंगे! आप बीच बीच में ऐसे ही रहस्य रोमांच का तड़का लगाया करें. ताकि हमलोग गंभीर चिंतन छोड़, चेहरे पर थोड़ी हंसी तो लाया करें. सादर साभार – जवाहर

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 14, 2011

    प्रिय जवाहर लाल जी …… सादर अभिवादन आप नहीं जानते कि आपके मुख पर हंसी वाली बात को सुन कर मेरे मन को कितना सकूं पहुंचा है ….. मेरी कोशिश तो बीच -२ में इस तरह कि पोस्ट लाने कि रहती है …. लेकिन साधारण लेख को सामने रखने का कोई फायदा नहीं ….. जब तक किसी कहानी में कुछ नयापन +अजीब और अनोखापन न हो तब तक आप जैसे स्नेही साथियो का समय खराब करने का क्या फायदा ….. जब भी कोई ऐसी कहानी मिलती है थोड़ा सा जुदा और थोड़ा हटके मैं आप सभी के दरबार में हाजिर हो जाया करता हूँ ….. आपका तहेदिल से शुक्रिया :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-)

naturecure के द्वारा
December 13, 2011

आदरणीय गुरुदेव सादर प्रणाम ! रहस्य रोमांच के साथ सस्पेंस! पता नहीं अगले भाग में क्या होगा ? अगले भाग के इंतजार में ……………………………………………….|

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 14, 2011

    आदरणीय डाक्टर साहिब …… सादर अभिवादन ! अगले भाग में तो बस वही होगा जो कि होना चाहिए, या इसको यूँ कह लीजिए कि वही हुआ था जो कि पूर्व निर्धारित था ….. बस थोड़ी देर के बाद इसका दूसरा भाग हम सभी कि आंखों के सामने रूबरू होगा …. यह कहानी मेरे दिल के बहुत ही करीब है – आप को भी यह अच्छी लगी जान कर खुशी हुई ….. सादर नमन सहित आपका आभारी :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-)

komal के द्वारा
December 13, 2011

नमस्ते भैया….मुझे भी भूत-प्रेतों की कहानियाँ बहुत आकर्षित करती हैं….वैसे आपने ये बहुत अच्छा किया जो ये स्टोरी लिखी…काफी पहले बचपन में मैंने ये स्टोरी पढ़ी थी…अगले भाग का इंतज़ार रहेगा…अपना ख्याल रखियेगा. komal

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 13, 2011

    आदरणीय कोमल बहिन …..नमस्कारम ! शुक्र है कि किसी ने तो इस मंच पर इस कहानी के बारे में यह कहा कि इसको उसने पहले पढ़ा हुआ है ….. सच में ही बहुत ही अच्छा लग रहा है आपसे यह सुन कर कि आपको भी मेरी तरह से इस तरह कि कहानियों में गहरी रूचि है और आप इनकी बहुत ही चाव से पढ़ा करती है ….. आपके लिए मेरे पहले प्रकाशित कुछ लेखों के लिंक आपके ब्लॉग पर भेजूंगा शायद वोह भी आपको इसी तरह से पसन्द आये ….. मैंने इसको सिर्फ चार साल पहले ही एक किताब में पढ़ा था और तब से ही इसका नशा और असर मुझ पर हुआ पड़ा है ….. सोचा कि अगर इसने मुझको इतना प्रभावित किया तो दूसरे लोग किसी हद तक तो इससे प्रभावित होंगे ही होंगे ….. लेकिन इसमें एक मुख्य समस्या थी कि मैं जिस शैली में लिखता हूँ यह उससे बिलकुल अलग है …. और अगर मैंने इसको शार्टकट में लिखने कि कोशिश कि तो जो भाग छोड़ दिए उनकी जरूरत बाद में कन्तिन्युटी के लिए पड़ी ….. इसलिए इसको लिखने में दो बार मेहनत करनी पड़ी ….. आपके प्रोत्साहित करने वाले विचारों के लिए आपका तहेदिल से आभार (वैसे तो आपको इसका अन्त पता ही है – लेकिन फिर भी आपने इसका दूसरा भाग जल्द प्रकाशित करने कि बात कही है तो अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूँगा –तब ही पता चल पायेगा कि यह हमारी सांझी कहानी है या नहीं –या फिर कोई दूसरी ही कथा है सच्ची ) पुन: हार्दिक आभार सहित आपका भाई

shashibhushan1959 के द्वारा
December 13, 2011

आदरणीय बॉस, जयहिंद. जिन्न, भूत और प्रेतों का जिक्र आते ही न जाने क्यों मेरे की-बोर्ड ने काम करना ही बंद कर दिया. बगल वाले पंडीजी से मांगकर माला चढ़ाई, तो थोड़ा बहुत कामयाबी मिली और प्रतिक्रया लिख रहा हूँ. दुसरे भाग का इन्तजार……. !!!!!!

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 13, 2011

    (आदरणीय ) प्रिय शशिभूषण जी …… सप्रेम नमस्कारम ! आप नाहक ही यहाँ वहां भटकते रहे ….. हमारे आदरणीय भ्रमर जी आखिर किस मर्ज की दवा है – वोह किस दिन और कब काम आएंगे ? पता नहीं आपने उनकी मदद को किस दिन के लिए बचा कर रख छोड़ा है ?….. इस मंच के शुरूआती दिनों के थोड़ी देर बाद ही मैं इससे जुड़ा था ….. लेकिन आजतक मेरे इलावा और किसी ने भी रहस्य रोमांच पर कोई भी लेख नहीं लिखा ….. मैं भी पांच –छह वही सच्चे लेख यहाँ पर लिख सका हूँ जोकि आम घटनाओं से कुछ अलग तथा हटकर थे …. लेकिन जागरण ने हमारी इसी कमी की वजह से रहस्य –रोमांच नाम की कोई कैटेगिरी ही नहीं बनाई है ….. मेरा बस चले तो मैं सिर्फ और सिर्फ इसी विषय पर लिखता रहू ….. लेकिन समस्या यह है की कुछ अलग तथा हटके कहानिया मिलती ही नहीं ….. हा हा हा हा हु हा हा ही ही ही हु हा हा हा हे हे हो हो हो आदर सहित आभार

RaJ के द्वारा
December 13, 2011

एक नयी विधा से नया परिचय आपने दिया मुझ जैसे इन सभी भूत भुतानिओं से अंजान व्यक्ति के लिए यह सारे बेहोशी के दौरे मिर्गी के समझे जायेंगे पर आपकी परिकल्पना का मजा आ आ आ रहा है दूसरी किश्त के साथ जरा सा likh देना कि सत्य घटना नहीं नहीं तो samaj faila andhvishwas बढेगा राजकमल जी कुछ बुरा लगे तो क्षमा कर देना आपका lekhan अत्यंत शशक्त है और व्यंग लिखना सबसे टेढ़ा काम में व्यंग में ड्राफ्ट बनाकर छोड़ देता हूँ जनता हूँ भाषा साथ नहीं दे rahi

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 13, 2011

    आदरणीय राज जी ….. सादर अभिवादन ! यह सच है या फिर झूठ इसका पता तो कहानी के अन्त के बाद उसमे वर्णित स्थानों पर जाकर पूछताछ करने पर ही लग सकता है ….. यह जान कर मन प्रसन्न हुआ की आप हास्य वयंग्य में भी हाथ आजमाते है ….. हमारी बिरादरी में एक और मैम्बर का इजाफा हुआ है इसलिए आज तो खुशी मनाने का और मुंह मीठा करने का मूड और दिन है ….. आपको भी आपका नया रूप मुबारक हो ….. आप हम सभी के सामने अपनी इस कला का भी प्रदर्शन समय समय पर करते रहे इसी कामना और आशा के साथ की जल्द से पहले ही आपका कोई इसी रंग का नया लेख पढ़ने को हम सभी को जरूर मिलेगा ….. अग्रिम मुबारकबाद सहित

allrounder के द्वारा
December 13, 2011

नमस्कार राजकमल भाई, दूसरे को हँसाना हर किसी के वश की बात नहीं होती ये वो शक्ति है जो ईश्वर किसी किसी को प्रदान करता है, और इस मंच पर ये शक्ति आपके पास है, इसका सदुपयोग करो भाई ! और क्या और कैसे लिखूं राजकमल भाई ? बस यही कामना है किसी भी जिन्न या जिन्नी का बुरा साया मंच के किसी भी साथी पर न पड़े ! आभार सहित !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 13, 2011

    प्रिय सचिन भाई ….. नमस्कारम ! मैंने आपके ब्लॉग पर भी अपनी प्रतिकिर्या में “खास वक्त” का जिक्र किया था जिस पर की शायद आपने ध्यान नहीं दिया था ….. मुझे आपकी मेरे प्रति निरंतरता के भावों ने प्रभावित किया था ….. और मेरी खुद की क्या औकात है यह मैं भली भांति जानता हूँ …. आजकल कुछ मन अच्छा नहीं है तो कुछ न लिखने से बेहतर समझा की क्यों न उसी कहानी को पोस्ट कर दूँ जिसने मुझे अंदर तक हिलाते हुए प्रभावित किया था जिसका असर मुझ पर हमेशा ही रहेगा ….. आपके उन अनमोल विचारों पर पूरा उतरने की कोशिश रहेगी अपनी सीमाओं के भीतर रहते हुए ….. आपका हार्दिक आभार

    allrounder के द्वारा
    December 14, 2011

    बहुत – बहुत धन्यबाद राजकमल भाई, बात का मान रखने के लिए ! और एक बेहतरीन आलेख पर हार्दिक बधाई !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 14, 2011

    प्रिय सचिन भाई …… नमस्कारम ! खुद के ना काबिले बर्दाश्त वाक्यात को भी पूरी तरह से भुला कर दूसरों (अपनों को ही ) हंसाने कि एक कोशिश हम लोगों को अनचाहे और अनजाने में ही एक अभिनेता + नट बना जाती है ….. इस रचना को पसन्द करके उत्साह बढाने के लिए आपका दिली शुक्रिया :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-)

sadhana thakur के द्वारा
December 13, 2011

राजकमल भाई ,बस जल्दी से दूसरी किस्त प्रकाशित करे ……और फिलहाल कुछ नहीं लिख सकती ……………बस इन्तजार है ………..

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 13, 2011

    आदरणीय साधना बहिन जी …… सादर अभिवादन ! सच में ही इस कहानी ने मेरे दिल की गहराईयों में छुपे हुए भावों और तारो को छुआ और छेड़ा था …. इसलिए इसके ज्यादा लम्बाई के रिस्क के बावजूद मैं आप सभी से इसको सांझा करने के लोभ से खुद को बचा नहीं पाया ….. वैसे तो अगले हफ्ते को ही इस रोमांच के सफर पर आप सभी से दूसरी मुलाकात का वादा और इरादा है लेकिन फिर भी कोशिश करूँगा की आप सभी की सेवा में पहले हाजिर होने की …… आपकी इस स्नेहिल प्रतिकिर्या के लिए आपका हार्दिक आभार

rudra के द्वारा
December 13, 2011

बहोत ही शानदार.. अगले भाग की प्रतीक्षा में.. :)

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 13, 2011

    प्रिय रूद्र जी …… नमस्कारम ! आपने इसको समय निकाल कर पढ़ा + अपने विचार रखे उसके लिए आपका हार्दिक शुक्रिया अगले भाग का समय स्थान और महूर्त इस लेख के आखिर में बताया ही गया है इसलिए उम्मीद करता हूँ की अगले हफ्ते आपसे इस रोमांच के सफर पर जरूर मुलाकात होगी , आभार सहित

manoranjanthakur के द्वारा
December 13, 2011

क्या कहू और कहने को क्या रह गया आपतो दूसरी दुनिया में भी गोता लगा लिया बस यही तो दीमाग है जो आपको आपकी ख्वाहिस तक पंहुचा के रहेगा और हमें रहस्य –रोमांच की दुनिया में बहुत आभार

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 13, 2011

    आदरणीय मनोरंजन जी ….. सादर अभिवादन ! फिलहाल तो आप और मैं एक (समान ) तल पर विराजमान है – लेकिन भविष्य की बाते कोई भी नहीं जानता है ….. अपमे और मुझमे फिलहाल इतना ही अंतर है की इस सच्ची घटना रूपी कहानी को मैंने पहले पढ़ा है और आपने मेरे बाद में ….. आपका दिल की गहराईयों से शुक्रिया

minujha के द्वारा
December 13, 2011

शर्मा जी सादर नमस्कार हम  भी आपकी ख्वाहिश जल्द पूरी करने की  गुजारिश करेंगे उपरवाले से,पर कही जिन्नी मिलने के बाद हम जैसे जिन्दा लोगो को तो नही भुला देंगे……….

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 13, 2011

    आदरणीय मीनू जी ….. सादर अभिवादन ! सबसे पहले तो आपसे यह गुजारिश है कि आप मुझे शर्मा जी के सम्बोधन द्वारा शर्मिन्दा मत किया कीजिये आगे से ….. आपने मेरे लिए अपने साफ़ दिल से दुआ की है तो यकीनन वोह एक न एक दिन कबूल हो ही जाएगी ऐसा मुझको पूर्ण विश्वाश है ….. लेकिन अगर उसको पाने के बाद इस दुनिया के रिश्ते नातों को छोड़ना पड़े तो उस कीमत पर उसका साथ कतई भी गवारा नहीं करूँगा ….. क्योंकि उसके साथ से मुक्ति नहीं बल्कि धर्मपत्नी के साथ से ही मुक्ति मार्ग प्रशस्त होता है ….. बाकी की बाते कम शर्ते बाद में – लेकिन पहले वोह मिले तो ! आपकी दिली शुभकामनाओं के लिए तहेदिल से शुक्रिया

Abdul rashid के द्वारा
December 13, 2011

बड़े भाई जान नमस्कार आपकी तमन्ना जरुर पूरी हो लेकिन प्रेमिका जिन ही हो क्योंकि वह नुक्सान कम पहुंचती है आमीन नया और रोचक लेख बधाई हो सप्रेम अब्दुल रशीद

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 13, 2011

    प्रिय अब्दुल राशिद जी ….. नमस्कारम ! आपकी शुभकामनाये मेरे साथ है तो निश्चय ही एक न एक दिन सफलता (कोई जिन्नी ) जरूर मिल ही जाएगी ….. लेकिन मुझको यह नहीं मालूम कि क्या जिन्नी वास्तव में ही कम नुक्सान पहुंचाती है ….. ऐसा लग रहा है कि आप भी कोई कथा कहानी इस बार में जानते है ….. आपसे गुजारिश है कि उसको इस मंच पर जरूर सांझा कीजियेगा …… आपका हार्दिक शुक्रिया

munish के द्वारा
December 13, 2011

आदरणीय गुरुदेव, मैं आपकी इच्छा की क़द्र करता हूँ और खुदा से इल्तजा करता हूँ की आपको जल्द से जल्द कोई जिन्नी मिले….. पर उसका हश्र ऐसा न हो जैसा खालिद की जिन्नी का हुआ…… और हमें एक नई कहानी पढने को मिले……” राजकमल और जिन्नी की शादी”…. …..:) :)

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 13, 2011

    आदरणीय वकील साहिब …… आदाब ! रात अभी बाकी है – बात अभी बाकी है मेरे दोस्त ! अभी इसका दूसरा भाग आना बाकी है ….. उसमे इनका अजब और अनोखा मिलन तथा विछोड़ा सामने आएगा ….. वैसे यह मेरी इच्छा मजाक में नहीं है बल्कि इस मामले में तो मैं पूरी तरह से सीरियस हूँ ….. बस अब तो आपकी दुआओं का सम्बल भी मिल गया है तो मुझको पूरा यकीन है कि इस दुनिया से रुखसती से पहले -२ तो यह इच्छा जरूर पूरी होगी किसी न किसी रूप में ….. आपकी दुआओं + शुभकामनाओं + तथा सराहना के लिए आधा आभार आधा जिन्नी के मिल जाने पर – हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा

Santosh Kumar के द्वारा
December 13, 2011

आदरणीय गुरुदेव ,.सादर प्रणाम वाह वाह वाह वाह !!!!!….बहुत खूब …..बेहतरीन …शानदार …..एक एक शब्द जैसे बहुत गहरा अर्थ लिए हुए ,….ढाई सौ प्रतिशत मौलिक,सामयिक यथार्थ रचना …हार्दिक बधाई

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 13, 2011

    प्रिय संतोष भाई ….. नमस्कारम ! आपका अनुमान बिलकुल सही है , यह रचना एक सच्ची घटना पर ही आधारित है ….. इसलिए सही समय और सही स्थान तथा सही पात्रो को भी बताया गया है …. इसलिए यह शत प्रतिशत सच ही कही जाएगी ….. अब आपके बाकी के अनुमान कितने सही है यह तो इसका दूसरा भाग ही बताएगा ….. आपकी सराहना से आत्मिक बल मिला , मन गार्डन फार्दं हुआ वोह अलग से ….. इसलिए आपका डबल शुक्रिया

    santosh kumar के द्वारा
    December 14, 2011

    दुसरे भाग की बेसब्री से प्रतीक्षा रहेगी ,…लेकिन अगला हफ्ता अभी दूर है ,..स्पेशल शो नहीं हो सकता ,..एक सवाल है ,..इ-चिट्ठी-पत्री आप पढ़ते हैं या नहीं,.. इस पोस्ट के साथ मंच पर रहस्य रोमांच बहुत आ गया है ,..कभी कभी तो पड़ोस की रचनाये एक कमेन्ट लेकर गायब ही हो जाती हैं,..कहाँ हैं सब पंडित ओझा …शायद अगली पोस्ट में होंगे ,..

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 14, 2011

    प्रिय संतोष भाई …… सप्रेम नमस्कारम ! उपर अपनी कोमल बहिन कि प्रतिकिर्या + दिव्या बहिन कि और प्यारे अबोध बालक जी की वाली के जवाबो में अपना पक्ष रखा है और उनमे आपके प्रश्नों के उत्तर भी साफ़ नजर आते है ….. ब्लागों का गायब होना यह क्या माजरा है ? शुभकामनाओं सहित आपका राजकमल :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|


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