RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

सोचो ज़रा हट के

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"करिश्मा कुदरत का"

Posted On: 8 Sep, 2011 में

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"अलग -अलग पिता के जुड़वाँ बच्चे" Top of Form

जुड़वां बच्चे के पिता अलग अलग –

डीएनए परीक्षण से पता चला कि एक महिला पोलिश जुड़वा, लेकिन केवल एक बच्चा जो उसके पति का बेटा था, जबकि अन्य मानव प्रेम है.


दोस्तों इसी हफ्ते यह ताजातरीन खबर आई है की  उत्तरी पोलैंड के  एक छोटे से शहर में एक महिला ने जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया है ….. आप लोग सोचेंगे की भला इसमें इतने अचरज वाली खास बात क्या है ? ….. लेकिन आप यह जान कर चौंक उठेंगे की उन दोनों ही जुड़वाँ बच्चों के पिता अलग -२ है …..

                          दरअसल उस महिला ने 48 घन्टे के अंतराल पर अपने प्रेमी से भावनात्मक और पति से समाजिक  सम्बन्ध बनाए जिसके फलस्वरूप ही यह कुदरत का करिश्मा घटित हो सका ….. उन  जुड़वाँ बच्चों के जन्म से उनके दोनों ही पिता  बेहद खुश है ……

                 वाह री  किस्मत ! वोह कहते है न की जब उपर वाला देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है …. यहाँ पर इस मामले में ना  केवल छप्पर फाड़ के बल्कि उम्मीद से दोगुणा भी मिला जय तो माँ सहित दोनों पिता आखिरकार खुश क्यों न हो ….

                  उस महिला जैसा नसीब कहाँ हर किसी का होता है जिसको की न केवल दो- दो पुरुषों का प्यार मिला है बल्कि उन दोनों के प्यार की दो- दो अनमोल निशानिया भी मिल गई है …..खुदा मेहरबान तो गधे (पति और प्रेमी ) पहलवान !

                   लेकिन यार लोगो को तो यही बात समझ नहीं आ रही की उन जुड़वाँ बच्चों को बेचारे कहूँ की सोभाग्यशाली कहूँ …. क्योंकि बिलकुल सगे और जुड़वाँ होते हुए भी वोह आपस में सौतेले भाई जो ठहरे  …..

                       अब इसको उस कुदरत की दरियादिली ही मानना पड़ेगा की ऐसा करिश्मा उसने उस यूरोपीय देश में किया है …. वरना कहीं ऐसा करिश्मा हमारे भारतवर्ष में हुआ होता तो अब तक पता नहीं कितनी लाशें बिछ जाती और इस बात की कोई गारन्टी नहीं की सम्बंधित में से कौन स्वर्गवासी हो जाता और कौन भाग्यशाली जिन्दा बचता …..

                         हमारे देश में भी बहुत से फोजियो + प्रवासियों + एन .आर .आई की बीविया इस तरह के  करिश्मे को दोहराने की न केवल काबलियत रखती है बल्कि इसके लिए हमेशा ही प्रयासरत भी रहती है ….. लेकिन अफ़सोस की उन बेचारियों को कुदरत की मदद नहीं मिल पाती यानि की उनके जुड़वाँ की बजाय सिंगल बच्चा ही होता है …. और पति बेचारा और किसी की औलाद को अपनी समझ कर न केवल पालता पोसता है बल्कि अपना नाम भी देता है …..

                  बेचारा पति और पिता अपने उस सौतेले बच्चे के नयन नक्श देख देख कर कभी शक की आग में जलता  है तो कभी उसके चेहरे मोहरे का  खुद से असफल मगर आशिंक मिलान करते हुए खुद को तसल्ली देते हुए किसी तरह जैसे तैसे ग्रहस्थी की गाड़ी को यही सोचते हुए इस उम्मीद में खींचता रहता है की खुदा इतना बेपरवाह नहीं हो सकता ….. अगली बार होने वाली औलाद तो यकीनन ही उससे मिलती जुलती ही पैदा होगी ….

                  और ताउम्र अपनी जिंदगी में मर्द को अपने उस सौतेले बच्चे के बारे में पता नहीं चल पाता  है …. और जब पता चलता है तो तब तक वोह बेचारा दूसरे जहान के लिए कूच कर चूका होता है ….. लेकिन कभीकभार उस बच्चे के असली बाप का पता भी चल जाता है …. जब कई बार ऐसे किसी बच्चे को बाप के द्वारा खीझकर बेरहमी से पिटने पर जब बच्चा भगवान से बहुत ही दुखी मन से और सच्चे दिल से यह फरियाद करता है की :- “हे भगवान ! मेरे पिता को उठा ले” ….. तो अगली अलसुबह को  यह देख कर बच्चा और पिता जी दोनों स्तब्ध रह जाते है की भगवान ने उस मासूम और अबोध बालक के करुण ह्रदय की पुकार को सुन कर पड़ोस में रहने वाले राजकमल को उठा लिया है …..

                         मैं भगवान का शुक्रिया अदा करता हूँ की उसने हमारे देश में दो –दो पुरुषों से प्रेम करने वाली किसी कुलटा इस्त्री को छप्पर फाड़ कर उम्मीद से दोगुणा देकर ऐसे किसी करिश्मे को अंजाम नहीं दिया है  …..

                      जय बोलो पति और प्रेमी परमेश्वर  की

(“यारो सब मिल कर यह दुआ करो और प्रयास करो की मेरे साथ भी कुदरत का कोई ऐसा करिश्मा हो जाए और अपना भी नाम सारी दुनिया में रहती दुनिया तक हो जाए”)

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39 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Daniel के द्वारा
November 30, 2013

This is way better than a brick & mortar estnslibhmeat.

jlsingh के द्वारा
September 15, 2011

“हे भगवान ! मेरे पिता को उठा ले” ….. तो अगली अलसुबह को यह देख कर बच्चा और पिता जी दोनों स्तब्ध रह जाते है की भगवान ने उस मासूम और अबोध बालक के करुण ह्रदय की पुकार को सुन कर पड़ोस में रहने वाले राजकमल को उठा लिया है ….. — यह पंक्ति पढने के बाद मैंने अपने पड़ोसियों की लिस्ट देखी —- शुक्र खुदा का! उसमे कोई राजकमल नामका पड़ोसी नहीं मिला नहीं तो मैं अपना घर बदल देता! —– हा! –हा! — हा! — अजीबोगरीब समाचार से व्यंग्य पूर्ण सार्थक लेखन सिर्फ आपके बस की बात है, महोदय! खूब हंसाया और शिक्षा भी दी!- जवाहर

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    September 16, 2011

    आदरणीय जवाहर लाल जी ….. सप्रेम नमस्कार ! इसी लाइन पर तो हमारे प्रिय अबोध जी कुछेक पल के लिए ही सही बुरा मान गए थे …. लेकिन मैं भी उनको अपना ही मानता हूँ इसलिए इतना हक तो बनता ही है इसीलिए लेख में कोई बदलाव नहीं किया ….. आपसे गुजारिश है की अगर आपको कभी कोई खबर मिल जाए तो उसको मेरे साथ जरूर सांझा करे . आपको मेरे इस तुच्छ प्रयास ने हँसने पर मजबूर किया जान कर मेरा भी खून बढ़ा है …. आपका हार्दिक आभारी हूँ :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

Abdul Rashid के द्वारा
September 11, 2011

राजकमल शर्मा ji सदर प्रणाम आपका लेख यक़ीनन हंसने पर मजबूर करता है वाकई कुदरत के लाठी में जोर है aur आवाज़ ताउम्र सुनाई देता है

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    September 11, 2011

    आदरणीय अब्दुल रशीद जी …..सादर अभिवादन ! आजकल आप कछ पोस्ट नहीं कर रहे क्या ? काफी दिनों से आपके विचारों को पढ़ने का मौका नहीं मिल पाया ….. अगर कुछ लिख डाला है तो किर्पया लिंक जरूर दे ….. आपकी बात बिलकुल सत्य है की कुदरत की लाठी ने केवल बेआवाज होती है बल्कि सदा सदा के लिए असरकारक भी होती है जिसकी मार उसका अधिकारी सारी उम्र भूल नहीं पाता …. आपको इस लेख के कारण हँसने का कोई मौका मिला यह जान कर मुझको अत्यंत खुशी हुई ….. बस आप किसी भी प्रकार से हँसते ही रहे ….. आपका तहेदिल से शुक्रिया

MrityunjaY के द्वारा
September 10, 2011

kya baat hai……. ye karishma aapke sath na ho

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    September 10, 2011

    नमस्कार भाई साहिब ….अब मैं समझ गया की आप क्या कहना चाहते है …. हंसना सख्त मना है ? फिर भी आपकी शुभकामनाओं के लिए आपका हार्दिक शुक्रिया ….. आपके ब्लॉग का लिक क्या है अगर पता चल जाता तो बहुत ही अच्छा होता धन्यवाद :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

Lahar के द्वारा
September 9, 2011

सच के बीच में आपका ये व्यंग बहुत अच्छा है | खुदा करे आपके भी दो – दो जुड़वाँ बच्चे हो |

    rajkamal के द्वारा
    September 9, 2011

    प्रिय लहर जी ….नमस्कार ! चलिए आपने मेरे बारे में तो सोचा लेकिन आपकी भाभी जान का क्या होगा उसकी वेदना पीड़ा भी तो दोगुणी हो जायेगी यह अलग बात है कि फिर चाहे जन्म के बाद दोनों का मुख देख दोगुणी खुशी से अपनी सारी पीड़ा को भूल जाए ….. लेकिन मैं चाहूँगा कि अगर आपकी शुभकामनाये रंग लाये तो उनमे एक लड़की और दूसरा लड़का हो …… अब आप उन दोनों के लिए अच्छे और प्यारे से नाम सोचने के काम में लग जाइए …… *************************************************************************************************************** यह आपने बिलकुल सही कहा है कि यह सच के बिच में वयंग्य है लेकिन वयंग्य के बिच में सच्चाई और कल्पना दोनों ही हो सकती है …… आपके प्रोत्साहन के लिए आपका हार्दिक आभार :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

Ramesh Bajpai के द्वारा
September 9, 2011

प्रिय अबोध जी आप ही समझाईये न मेरा कहना तो मानने से रहे ये नाम कमाने के बहुत नुस्खे है |{ “हे भगवान ! मेरे पिता को उठा ले”} lambi umar hogi tab न करिश्मे होगे पुत्तर

    rajkamal के द्वारा
    September 9, 2011

    आदरणीय वाजपेई जी …..सादर प्रणाम ! मेरे मन को बहुत ही ठेस पहुंची जब आपने मुझको तुम कि बजाय आपने कहा ….. यह ठीक है कि आपने जिस बात पर अपना स्नेहयुक्त ऐतराज जताया है उसका इस फिल्म में होना निहायत ही जरूरी है ….. लेकिन माफ़ी चाहूँगा कि अपना नाम मैं अपने हरेक लेख में जबरदस्ती घुसेड़ने कि कोशिश केवल इसलिए कियाकरता हूँ ताकि रचना + लेखक तथा पाठक के बिच में एक त्रिकोणीय बन्धन बन जाए ….. आपकी बिटिया (मुंहबोली ) रानी मेरे पास अपनी शिकायत लेकर आई थी मैंने अपनी तरफ से उनके उपर लिखे हुए ब्लॉग पर ही उत्तर दे दिया था ….. आप किरपा करके अपनी किरपा दृष्टि उधर भी डाल दीजियेगा …… जी जितनी उपर से जिंदगी लिखवा कर लाया है उतनी उसको भोगनी ही है …. इस प्रकार लिखने से अगर कूच अनर्थ होता हो तो मैं आगे से इस प्रकार नहीं लिखूंगा ….. आपका आत्मिक आभारी आपका नालायक पुत्तर

chaatak के द्वारा
September 8, 2011

आमीन!

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    September 8, 2011

    आदरणीय चातक जी …..सादर अभिवादन ! एक वोह भी दिन थे कि मैं आपके आने के वक्त आठ बजे के करीब ही अपनी रचना पोस्ट करने का प्रयास किया करता था ….. लेकिन आजकल कुछ और ही जोड़ तोड़ और हिसाब लगाना पड़ता है …. यह बादल सभी जगह पर बरसो से बरस बरस कर मुझ तलक पहुंचे है तो पानी कि कमी कि शिकायत नहीं करूँगा ….. आपकी शुभकामनाओं के लिए तहेदिल से हार्दिक शुक्रिया बहुत -२ आभार सहित :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

    s.s. yadav के द्वारा
    September 9, 2011

    esvar Aap ki har mano kamna puri kare.

    rajkamal के द्वारा
    September 9, 2011

    प्रिय यादव जी ….. नमस्कार ! इस मंच कि रवायत है कि पहली बार कमेन्ट देने वाले को यह कह कर शर्मिंदा करने कि कोशिश कि जाती है कि आपका यह मेरे लेख पर पहला कमेन्ट है -आपका स्वागत है -इत्यादि -२ ….. मुझको यह सब बहुत ही अखरता है …… कोई भी काम कि शुरुआत एक बार तो करनी ही पड़ती है ….. और पहली बार आने वाले का ही स्वागत क्यों ?…. बार बार और हर बार आने वाले का क्यों नहीं ?…… आपने मेरे लिए दुआ मांगी तो मैं भी आपके लिए और सभी के लिए उस पाक परवरदिगार से शुभ ही शुभ मांगता हूँ …. :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

RAJ के द्वारा
September 8, 2011

Rajkamal ji aurton ke bare mai aisa kehna kya shobha deta hai aapko.In mai se koi aapki ma,behan,beti ya biwi bhi ho sakti hai.aur vaise bhi aurton ko pata hota hai ki unke bache ka baap kaun hai per kya aadmiyon ko maloom hota hai ki voh apna beez kahan kahan chod aaye hai.Aapke kuch blogs pade hai per yeh padkar acha nahi laga.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    September 8, 2011

    प्रिय राज जी ….. सादर अभिवादन ! मैं लोगो के विचार और आचरण तथा इस समाज का ढांचा तो बदलने से रहा ….. एक लेखक को जैसा दिखेगा वोह वैसा ही तो लिखेगा ….. वैसे तो यह घटना यूरोपीय देश पोलैंड की है और जहाँ तक रिश्तों की बात है अगर हमारी कोई नजदीकी महिला गुमराह होकर गलत रास्ते पर चल पड़े तो उससे रिश्ता भले ही खत्म नहीं हो जाता लेकिन वैसी इस्त्री से रिश्ता रखना कौन चाहता है ….. हमारे समाज में ऐसी बाते आम तौर पर बर्दाश्त नहीं की जाती इसीलिए अंत किलिंग के केस हमारे देश में ही ज्यादा होते है …. और अगर मेरी सगी कोई महिला ऐसा आचरण करती है तो मुझे उससे अपना रिश्ता तोड़ने में एक सैकेण्ड से ज्यादा नहीं लगेगा ….. यह तो करने वाले को खुद सोचना है ….. जो जिस तरह का है जमाना तो उसको वैसा ही कहेगा ना ….. और यहाँ तो आपको सही तरह से रहने पर अनेको दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है …. आप खुद ही सोचिये की गलत चलने वालो को यह समाज कब छोडेगा ….. आपके कीमती विचारों के लिए आपका बहुत -२ अभार ************************************************

    RAJ के द्वारा
    September 9, 2011

    Respected Rajkamal ji, Mere kehne aa arath shyad aapne galat liya.Maine yeh janne ki koshish ki hai ki aurton ki galti per aapne jo yeh vichar vyakt kiya hai, yahi kam hamare desh mai shyad 100 mai se 60 purush to karte hi hai aur phir bhi aap ka purush samaj use sweekar kar maaf kar deta hai ,unke bare mai bhi kuch vichar hone chahiye aapke.Aapki lekhni per meri taraf se koi parshanchinh nahi hai parantu aap jaise shrestha logo ke mukh se yeh sab acah nahi lagta. Raj

    rajkamal के द्वारा
    September 9, 2011

    प्रिय राज जी सादर अभिवादन ! मैं मानता हूँ कि आप न केवल स्त्री लिखते है बल्कि स्तरीय पढ़ते भी है …. लेकिन मैं समाजिक लेखक कि बजाय हास्य वयंग्य में अपनी टांग घुसेड़ने वाला हूँ ….. इस लेख के उपर में जो दो लाइने नेट से ली गई है उनको ही आधार बना कर सारी माथापच्ची और मगजमारी करनी पड़ी …… मेरे सामने मेरा विषय बिलकुल स्पष्ट और सीमाए पूर्वनिर्धारित थी ….. जहाँ एक समाजिक लेखक और दूसरा लेखक विषय के दोनों ही पहलुओ पर लिख सकता है -इस मामले में मेरी अपनी सीमाए होती है जिनको कि चाह कर भी तोडा नहीं जा सकता ….. आपके सामने मैं अपना एक पुराने लेख का लिंक रखना चाहूँगा जबकि उसके द्वारा कारनामा करने पर मुझ ko likhna pd gya tha (likhne ka mouka mil gya tha ) :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/03/06/जब-एक-पुरुष-ने-की-औरतों-की-ब/ र लिखने का भूत सवार हुआ था ….. http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/03/06/जब-एक-पुरुष-ने-की-औरतों-की-ब/ आपसे गुजारिश है कि अगर आपकी जानकारी में भी कभी कोई अजीबोगरीब खबर आये तो उसको मेरे साथ जरूर सांझा करे ,आपका हार्दिक आभारी रहूँगा और हूँ भी

ashvinikumar के द्वारा
September 8, 2011

भाई मेरे मैने शीर्षक देखकर सोचा की कोइ खुशखबरी दोगे और में कहूंगा वाह वाह दो दो क्या करिश्मा किया राजकमल भाई ने ,,,,लेकिन नीचे के मजमून वही ढ़ाक के तीन पात :) फिर भी मुबारक हो दो न सही एक ही सही आखिर दूसरे वाला बच्चा आपको ही देख रहा है :) …………………जय भारत

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    September 8, 2011

    प्रिय अश्वनी भाई …. वंदे मातरम ! जब हमारे मन में खुशी पाने की चाह है तो हमको खुशी (लड़की नहीं ) ढूंडने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी बल्कि वोह खुद चल कर हमारे जीवन द्वार पे आ जायेगी ….. आदरणीय भाई साहिब अब आप इतना भी जुल्म मत कीजिये ….आप मुझसे इतनी आशाये और अपेक्षाए मत रखिये की पूरी दुनिया के किसी भी कोने में कोई भी करिश्मा घटित हो उसमे मेरी शमूलियत और जिम्मेवारी जरूरी होनी ही चाहिए , क्योंकि मैं इतना भी काबिल नहीं हूँ जितन की आप समझते है ….. आपकी बात मान कर आपकी आधी मुबारकबाद ही कबूल करता हूँ …. लेकिन आपने एक बात का ध्यान नहीं दिया की ‘दूसरे- वाला” हरेक ब्लागर में अपने खोये + छुपे हुए पिता को खोज रहा है….. आइये सब मिलकर उसके लिए भी दुआ करे की उसकी खोज पूरी हो …. अब तो कुछ मीठा हो ही जाए इस अधूरी खुशी पर ! जय भारत !

manoranjan thakur के द्वारा
September 8, 2011

इसे कहते है श्री राज कमल भाई छा जाना बधाई

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    September 8, 2011

    आदरणीय मनोरंजन जी …..सादर अभिवादन ! भाई साहिब इस तरह के रिस्की लेखों को लिख कर छा जाना सम्पूर्ण रूप से जागरण के फीचर विभाग की मेहरबानी पर निर्भर करता है ….. उनकी नजरे इनायत के बिना तो बहुत से लोग अपनी राय प्रकट करने की हिम्मत भी नहीं कर पाते ….. पहले भी कई इसी प्रकार के लेख कूड़ेदान में पड़े धूल फांक रहे है ….. आपने इसको अपनी प्रतिकिर्या के लायक समझा उसके लिए आपका सिर्फ तन और मन से (धन से नहीं ) शुक्रगुजार हूँ

Dharmesh Tiwari के द्वारा
September 8, 2011

आदरणीय राजकमल जी सादर प्रणाम,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कुदरत का करिश्मा है गजब,,,,,,,,,,,,और इस करिश्मे पर क्या जबरदस्त आपने अपने हशाने की कला का जादू विखेरा है ,धन्यवाद!!

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    September 8, 2011

    प्रिय धर्मेश जी …..सादर अभिवादन ! यहाँ पर हर कोई अपनी इमेज के अनुसार लिखता और आचरण करता है ….. जहाँ पर आपके सभी लेख समाज को जागरूक करने वाले + सोचने पर मजबूर कर देने वाले हुआ करते है वहीँ मुझ कुत्ती चीज को हल्का फुल्का लिखने के लिए ऐसी खबरों का मोहताज होना पड़ता है …… आप जैसे सज्जनो का जब सहयोग और समर्थन मिलता है तो आगे भी लिखने की प्रेरणा मिलती है …. आपका बहुत -२ आभार

वाहिद काशीवासी के द्वारा
September 8, 2011

प्रिय राजकमल भाई, आदाब, ख़बरों को ढूंढ निकालना और उनका पोस्टमॉर्टम करने कि कला तो सिर्फ़ और सिर्फ़ आपके पास है। आपके लेख ऐसा गुदगुदाते हैं कि बस पूछिए मत। ज़्यादा क्या कहूँ बस यही कह सकता हूँ कि आपकी अंत में कोष्ठकों में लिखी हुई इच्छा को ईश्वर शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण करे। साभार,

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    September 8, 2011

    प्रिय वाहिद भाई …. नमस्कार ! उस कोष्ठक में लिखी हुई इच्छा को तो दोस्त कम दुश्मन ही पूरा कर सकते है , जिनके एहसान का चाह कर भी शुक्रिया नहीं किया जा सकता …. आप तो जानते ही है की यहाँ पर इज्जत के नाम पर कितना खून खराबा हो जाता है …… ऐसे बेगैरत का जीना मुश्किल हो जाता है हमारे समाज में और उस बेचारे के लिए कत्ल करना ही “आखिरी- रास्ता” बचता है….. इस खबर पर बहुत मेहनत करनी पड़ी …. खबर वाला अखबार का पन्ना गम हो गया …. नेट पर यह खबर पोलिश भाषा में मिल रही थी ….. वोह तो भला हो गुग्गल ट्रांसलेट का जिसके कारण इसको इंग्लिश में ट्रांसलेट करके आप सभी की सेवा में पहुंचा पाया ….. आपके सहयोग के लिए हार्दिक शुक्रिया

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    September 8, 2011

    भाई साहब, मेरा तात्पर्य अक्षरशः उस इच्छा के पूर्ण होने से नहीं था बल्कि आपका सारी दुनिया में नाम हो जाने से था। पुनश्चः आपके नाम की ख्याति पूरी दुनिया में फैले (सही कारण से) और रहती दुनिया तक रहे। आप प्रख्यात हों कुख्यात नहीं। ;)

    rajkamal के द्वारा
    September 9, 2011

    प्रिय वाहिद भाई ….. नमस्कारम ! पहली बात तो यह है कि कम से कम इस बार तो मैं आपका आशय समझ ही गया था -लेकिन जवाब फिर भी सीधा न देकर अपने स्टाइल में ही देना पड़ता है -और वोह कितना भ्रामक है आप जानते ही है ….. जुड़वाँ बच्चे तो अक्सर ही किसी २ विरले जोड़े के होते ही रहते है -लेकिन इस खासमखास करिश्मे के लिए अपने खुद के इलावा किसी और मेहरबान कि भी जरूरत पड़ती है ….. मेरा तो शुरू से ही यह विचार रहा है कि बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा ….. फिर भी आपने सही तरीके से प्रख्यात होने कि बात कि है तो मैं बताना चाहता हूँ कि जब मैंने इस मंच पर लिखना शुरू किया था तो मन में एक डर था और आशंका थी कि क्या मुझको सबके सामने आकर इस प्रकार लिखने कि इजाजत भी है कि नहीं ….. खैर अब तलक तो सब ठीक ही चल रहा है अब आगे देखते है कि क्या होता है ….. आपका हार्दिक अभिनंदन तथा आभार

Harish Bhatt के द्वारा
September 8, 2011

राजकमल जी सादर प्रणाम. कुदरत के इस करिश्मे को हास्य के रूप में पेश करने के लिए बहुत बहुत बधाई.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    September 8, 2011

    आदरणीय हरीश जी ….सादर प्रणाम ! जब तब मेरे कम्प्यूटर पर होम पेज न दिखने की समस्या आ जाती है ….. इसलिए आपसे काफी देर से संपर्क नहीं हो पाया ….. आज काफी दिनों के बाद आपसे मिलकर न केवल अच्छा लगा बल्कि आप जैसे सुलझे हुए विद्वान से तारीफ पाकर मन को अपार खुशी हुई …… (अब मैं अपने कम्प्यूटर पर खिड़की का आधुनिक वर्शन डलवाने जा रहा हूँ …. इसलिए उम्मीद करता हूँ की उस नई खिड़की से सभी को समान रूप से ताक (झाँक ) सकूंगा ….. WINDOWS – 2007 आपकी इस प्यारी उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए तहेदिल से शुक्रिया

Santosh Kumar के द्वारा
September 8, 2011

गुरुदेव प्रणाम करिश्मे तो होते रहते हैं ,..ये कुछ ख़ास है ,.आपकी लेखनी ने इसे विशेष बना दिया ,..घोर कलियुग में और क्या उम्मीद कर सकते हैं ,..ईश्वर सबको सद्बुद्धि दे

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    September 8, 2011

    प्रिय संतोष जी ….. नमस्कार ! इसमें सारा कसूर मुए दिल का और हालात का है …. पति की गैर मोजुदगी में पत्नी अपने पति से भी महत्वपूर्ण प्रेमी से मिलती है …. तुरंत बाद में वापिस आये हुए पतिदेव को उनके अधिकार से वंचित तो नहीं कर सकती ना ! ….. अब इसका एकमात्र हल तो यही है की प्रेम त्रिकोण बनने ही न पाए , लेकिन क्या यह संभव हो सकता है ?…… इश्वर किस किस को सदबुद्धि देता फिरेगा ….. अफ़सोस की अक्ल किसी दूकान पर नहीं मिलती और ऐसे गुमराह लोग कोई बड़ी ठोकर खा कर ही शाम को घर वापिस आ पाते है ….. प्रतिकिर्या के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया

abodhbaalak के द्वारा
September 8, 2011

गुरुवार, आपने मेरा नाम क्यों लिया इस …………. :( एक बार आपके हास्य का जादू अपने चरम पर है,….. पर दुआ है की इस तरह की घटना हमारे देश में कभी न हो, क्यों की आपने खुद ही कहा है की यहाँ खून की .. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    September 8, 2011

    प्रिय अबोध भाई ….सस्नेह नमस्कार ! आपको इस लेख में हुई मेरी मौत का कोई गम नहीं , बस ध्यान रहा तो अपने नाम का ….. क्या मैं अपने बच्चे का नाम “अबोध बालक” नहीं रख सकता ?…… और उस मासूम से आपको कोई हमदर्दी नहीं हुई जिस बेचारे को अपने असली बाप का ही पता नहीं है …. मेरी तो यही कामना है की जब तक बच्चा होश नहीं संभालता हरेक बच्चे को अबोध बालक ही कहना चाहिए …. और गुणों में आप जैसा कौन नहीं होना चाहेगा ….. ऐसा लगता है की भगवान भी हरेक देश की संस्कृति और समाजिक मर्यादाओं तथा कद्रो कीमतों के अनुसार ही अपनी रहमत बरसाता है …. वैसे एक बात और भी है की क्या पता हमारे देश में ऐसे अनगनित करिश्मे हुए ही पड़े हो ….. लेकिन सुचना और तकनीक के अभाव में उन तक हमारी पहुँच न हो पाई हो …. आपका हार्दिक आभार

    abodhbaalak के द्वारा
    September 9, 2011

    गुरुवर आपको मौत आ ही नहीं सकती, आपतो अजर अमर हो, और मेरी दुआ है की हम (बिना पैसा लिए जैसे की आजकल के नेता लोगो के लिए किये जाते है) सदा ये नारा लगाते रहे जब तक सूरज चाँद रहेगा, राज भय्या का नाम रहेगा, :) इतनो लोगो के आप इस मंच पर मुह्न्बोले गुरु है की वो सब अगर मिल कर दुआ करे तो इश्वर को भी ….. वैसे कहीं आप सच में तो गुस्सा नहीं हो गए …………………. :(

    rajkamal के द्वारा
    September 9, 2011

    प्रिय अबोध भाई ….. सस्नेह नमस्कारम ! आपसे आपका सगा गुरु भी न नाराज हो कभी भी मेरी यही कामना है (आपके सभी “ख्वाब” पुरे हो ) और मेरी क्या औकात है मैं अच्छी तरह से जानता हूँ ….. इस दुनिया कि बात तो मैं नहीं जानता लेकिन इस मंच पर आप सभी स्नेही सज्जनों + प्यारे और निराले शिष्यों कि बदोलत ही हूँ ….. आपकी बात पर मुझको मेरा अपना एक पुराना लिखा हुआ लेख याद आ गया “मजाक ! मजाक !! मजाक” !!!….. आपके आशीर्वाद से तो यही लगता है कि उस लेख में मरे द्वार किया गया मजाक कहीं सच में ही सच न हो जाए …… आपके इस परम स्नेह का भविष्य में अकांशी …… DO NOT – BE HAPPY – FOR FOREVER

surendra shukl bhramar5 के द्वारा
September 7, 2011

प्रिय राज भाई जय श्री राधे आप के इस प्यारे अजीबो गरीब लेख से पता चलता है की सच में कलयुग आ गया है अब आदमी की भी कोई जरुरत नहीं कोई पुरुष माँ बन रहा नारी पुरुष शादी करने के लिए विपरीत लिंगी कहीं भाते ही नहीं ..न जाने क्या क्या होगा …फौजी यां आर आई करें भी तो क्या ..क्या क्या देखें बचाएं ….अद्भुत कला से आप ने हंसा भी दिया वयानी तीर भी छोड़ दिए …सुन्दर … असली बाप का पता भी चल जाता है …. जब कई बार ऐसे किसी बच्चे को बाप के द्वारा खीझकर बेरहमी से पिटने पर जब बच्चा भगवान से बहुत ही दुखी मन से और सच्चे दिल से यह फरियाद करता है की :- “हे भगवान ! मेरे पिता को उठा ले” भ्रमर ५

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    September 8, 2011

    प्रिय भ्रमर जी …. सादर प्रणाम ! मैं जब इस खबर को नेट पर खोज रहा था तो कई जगह पर आपके द्वारा बताई गई तमाम बाते भी लिखी हुई थी ….. लेकिन मेरे ख्याल से इस सुविधा का लाभ ज्यादातर समलिंगी + बेऔलाद ही उठाएंगे …… मैं नहीं समझता की इस्त्री की भूमिका + दर्जा इस तरह खतरे में पड़ सकता है ….. यह सच है की औरत अगर अपनी आई पर आ जाए तो फिर उसकी सब निगरानी धरी की धरी रह जाती है ….. बाकि यह समाज है इस में हर रंग के लोग रहते है ….. हमारे चाहने से कुछ नहीं है होने वाला …. जिसने जो करना है वोह तो करेगा ही ….. और जब खबर बनेगी तो राजकमल उस पर लिखेगा भी ….. आपको इस विचित्र खबर ने हँसाया यह जान कर प्रसन्नता हुई …… रे मन रख तू आस – खुश होने के मौके मिलेंगे लाख ….. जय श्री राधे कृष्ण


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