RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

सोचो ज़रा हट के

203 Posts

6518 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1662 postid : 1054

"एक ट्रेनिंग ऐसी भी"

Posted On: 5 May, 2011 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

01 मई को इतवार के दिन अखबार वाला जब मुझको दैनिक जागरण की बजाय दैनिक भास्कर अखबार दे गया तो मेरे मन में गुस्से की लहर दोड़ गई क्योंकि एक तो मेरे पास उस दिन बाज़ार जाकर अखबार लाने   का समय नहीं था , दूसरे मैं जागरण के साप्ताहिक भविष्यफल  से ही अपना पूरा हफ्ता सेट किया करता हूँ ….. खैर मेरा उस दिन का गुस्सा उतरा अखबार में छपी उस खबर पर जिसमे बताया गया था की महाराष्ट्र के कोल्हापुर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर सेक्स स्कैंडल में नया खुलासा हुआ है की वहां पर पहले वाली खबर के अनुसार  11 नहीं बल्कि नवीनतम समाचार के अनुसार 30 महिला कांस्टेबल मेडिकल जांच के दौरान प्रेगनेंट पाई गई है ……

                            इनमे से सिर्फ 9 मोहतरमाए शादी+शुदा  है जबकि बाकि की 21 लड़कियां  शादी+शुदा नहीं है ….. मैं इनको कुंवारी की बजाय ‘शादीशुदा नहीं’ क्यों लिख रहा हूँ , इस बात को आप सब सुधी पाठक भली भांति जानते ही होंगे ….. वोह बेचारियां  ट्रेनिंग से पहले तो ‘शायद’ कुंवारी  कुमारिया ही थी लेकिन उनके काबिल आला अफसरों  ने उनको कुछ ऐसी ट्रेनिंग दी की वोह अबला नारिया  कुंवारियो की बिरादरी से तो निकल गई , लेकिन अफ़सोस की बात है की वोह बेचारियां शादीशुदा की जमात में शामिल नहीं हो सकी …..

                               वोह सबला नारियां जिन्होंने की भविष्य में हमारे समाज की बहु बेटियों की रक्षा करनी थी , इत्तेफाक की बात देखिये की जब उन पर विपदा आन पड़ी तो वोह खुद अपनी ही रक्षा नहीं कर पाई …… आपने भेड़चाल तो सुनी होगी , भेड़ो में यह खासियत होती है की वोह अपने सामने ही कसाई के द्वारा अपनी बहनों को कटता हुआ देखकर भी कोई सीख नहीं लेती , कोई प्रतिरोध + बचाव करने की बजाय एक के बाद दूसरी , अपने कटने की बारी का इंतज़ार करते हुए आगे बढ़ती चली जाती है ….. यह 30 नारिया भी मुझको भेड़ो की बिरादरी से ही ताल्लुक रखती लगती है , जोकि अकेले की तो बात ही छोड़ दीजिए इकट्ठे मिल कर भी उन दो हवस के अन्धे भेडियो  का कुछ नहीं कर सकी …

                                  गृह मंत्री श्री आर .आर . पाटिल ने इन घटनाओं की जांच का जिम्मा नासिक के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मैथिली झा को सौंपा है , जोकि सोमवार तक अपनी रिपोर्ट देंगे ….  इस “प्रेग्नैन्सी सेंटर” में आज से आठ महीने पहले भी सिर्फ चार अविवाहित कलियों को फूल बनाने की खबर आई थी …..अब आप लोग ही बताइए की ट्रेनिंग का मतलब आखिर क्या होता है ? ….. अगर अफसरों ने अपनी अतिरिक्त जिम्मेदारी निभाते हुए भावी महिला अफसरों को कुछ खास किस्म की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर जाकर दे डाली तो इसमें इतना होहल्ला मचाने की कौन सी जरूरत आन पड़ी है , कौन सा आसमान टूट पड़ा है ….. एक तो मासूम कलियों को खिला कर उनको  फूल बना कर उनकी सुनी गोद को हर भरा करते हुए उनकी गोद में फूल खिलाया गया  और उपर से अपने इस कारनामे की वजह से  परमवीर चक्कर के अधिकारी बन गए उन अफसरों का यशगान गाने की बजाय उनका मानमर्दन  किया जा रहा है ….. जांच के नाम पर उनका अपमान किया जा रहा है ….अब आप ही बताइए की यह कौन सी शराफत है ? , कहाँ का इन्साफ है ? …..

                                     खबर तो यह भी है की खानापूर्ति के लिए एक पुलिस कांस्टेबल युवराज कांबले को  बली का बकरा बनाया गया है …. उन्होंने सोचा होगा की प्रेगनेंसी ट्रेनिंग सेंटर की पैदावार , देश के उन भावी युवराजों के जन्म के लिए जिम्मेवार भला किसी युवराज नाम वाले पिता से बढ़िया चुनाव और क्या हो सकता है ….

                      इस घटना के खुलासे के बाद से ही कोल्हापुर के डीएसपी ‘ज्ञान्वेश्वर मुंडे’ और एसीपी ‘विनय परकाले’ लंबी छुटटी पर चले गए है …… अगर कोई कसूर है तो वोह सरासर इन “लड़कियों कम औरतो” का ही है …. इन मासूम और अबोध बालाओं को  इतना तो पता होना ही चाहिए था की विनय परकाले जी का नाम चाहे विनय है लेकिन यह जरूरी तो नहीं न की वोह उन अबलाओं द्वारा अपनी इज्जत को दाग न लगाने की विनय को मान  ही लेते …. वोह यह भी भूल गयी थी की  आखिर जनाब के नाम के पीछे परकाला भी तो है , जिसका सीधा सा मतलब होता है “आफत का परकाला” ….  और इन ज्ञानेश्वर जी ने खुद का नाम संत ज्ञानेश्वर जी से मिलता होने के कारण आपने नाम की लाज रखने के लिए उन प्रशिक्षणार्थी लड़कियों को कुछ खास किस्म की ट्रेनिंग रूपी ज्ञान आपने परम मित्र  परकाले संग दे डाली तो इसमें इतना अचरज कैसा …..

                                      वैसे भी उन्होंने केवल 30 लड़कियों को ही तो इस ट्रेनिंग के काबिल समझ कर इस खास ट्रेनिंग को देकर तीस मार खान वाला काम ही तो किया है ….. तीस मार खान फिल्म में केवल एक शीला की जवानी ने पूरे देश के पुरुष वर्ग के होश उड़ा दिए थे तो इस ट्रेनिंग सेंटर की इतनी सारी मासूम मुन्नियाओ और शिलायो का शील अगर इन्होने हालात के और आपने दिल और मन के वशीभूत होकर भंग कर दिया तो क्या आप उनको इतनी छोटी सी बात के लिए अन्दर कर दोगे ? …..  आखिर इन  बेचारों ने शील ही तो भंग किया है , किसी अशांत एरिया की शान्ति तो नहीं न भंग की है , वोह बेचारे ऐसा कर भी कैसे सकते है , अजी साहब ! उन पर शान्ति कायम रखने की भारी भरकम जिम्मेवारी जो होती है …..

                                   यह भी बताया जा रहा है की मुंडे महाशय जब जी चाहे आपने आफिस में महिला कांस्टेबलों को बुला लेते थे ….. अब इस बात पर भी इतनी हाय तोबा क्यों मचाई जा रही है …. यह बात सिरे से ही यार लोगो की समझ से परे  है …. अरे भाई लोगो ! यह तो एक अफसर का हक बनता है की वोह अपनी किसी भी  मातहत कर्मचारी को जब जी चाहे बुलवा सकता है , कामकाज से उब चुकने के बाद अपना जी बहलाने के लिए तथा कामकाज शुरू करने से पहले खुद को तरोताजा रखने के लिए ….. और जी यानी जियरा भी तो जिगर वालो का ही करता है + मचलता है …. अब इसमें अपनी मातहत कर्मचारी की मर्जी भला क्या देखनी , अगर यह अफसर लोग उन महिला कांस्टेबलों के द्वारा उनके खुद के ‘जी करने’ का ख्याल करते या फिर इंतज़ार करते तो फिर उन बेचारों की तो सारी उम्र इंतज़ार में ही कट जाती … फिर न तो उन बालाओ  की खास ट्रेनिंग हो पाती और न ही तीस मार खान वाला रिकार्ड बन पाता  ……

                                      मेरी नज़र में तो इस सारे फसाद की जड़ उन महिलायों की जवानी तो है ही ,  इसके इलावा  उनकी लापरवाही भी इस मामले में साफ -२ द्रष्टिगोचर होती है ….. अरी अक्ल की अन्धियो , क्या तुम सब की मति  मारी गई थी …. जब तुमको यह पता चल ही गया था की उनके “आफिस कम प्रेग्नैन्सी ट्रेनिंग सेंटर” में तुमको बार बार सिर्फ एक ही काम के लिए + उस खास ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाता है जोकि सबके सामने ट्रेनिंग सेंटर में नही दी जा सकती है , तो तुमको अपनी बदनामी से बचने के लिए सुरक्षा के पूरे इंतजामात करने चाहिए थे ….. वाह  री आधुनिक नारी ! धिक्कार है तुझ पर , तुने माडर्न जमाने की होकर भी , मध्ययुगीन महिलायों जैसा असुरक्षा वाला आचरण किया है तथा घोर लापरवाही बरती है …. अब तुम  सभी की यही सजा बनती है की तुम्हारे  घर आंगन में  खिलने  वाले देश के इन फूलों की सुगन्ध को इस देश की आबोहवा में पुरे मनोयोग फैलाओ …… और अपने कुल का नाम रोशन करते हुए , इस देश के नाम में तीस चाँद लगाकर इसके नाम को और भी चमकाओ ….

                                    मैं तो इस बात में विश्वाश रखता हूँ की खुदा जो भी करता है वोह हमेशा ही अच्छे के लिए ही करता है …. क्या पता उन तीस फूलो में से कल को कोई बड़ा होकर देश का नाम रोशन करते हुए ‘इतिहास पुरुष’ ही बन जाए ….. क्योंकि अगर वोह नारियां आपने वर्तमान पतियों के और भावी पतियों के भरौसे रहती तो इस बात की क्या गारन्टी है की उनके आंगन में काबिल फूल ही खिलते …. अब कम से कम इतना भरौसा तो है की उन काबिल अफसरों के द्वारा खिलाए गए वोह फूल इस समाज और देश का नाम तो रोशन करेगे ही करेंगे …..

                                        काश की  उन (30 – 9 = 21  )    में से कोई एक शीला मुझ से शादी कर ले तो मैं घर बैठे –बिठाए बिना कुछ किये धरे किसी होनहार बच्चे का बाप तो बन जाऊँ …. बाकि की बीस शीला और मुन्नियो तथा उनके होनहार फूलों समेत के लिए  आप अपना-२  दावा ठोक सकते है ….. लेकिन  इस बात का खास ध्यान रखे कि :-

*यह आफर केवल सिमित अवधि के लिए ही है ….

*माल-असबाब (कन्या + फूल ) का भुगतान ‘पहले आओ और पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा ….

*किसी किस्म का जाति  बंधन नहीं है ….

*सिर्फ बिना दहेज शादी करने के इच्छुक प्रतियोगी ही आवेदन करे , क्योंकि लड़कियां कमाऊ होने के कारण उनको दहेज में कुछ नहीं दिया जाएगा , और वैसे भी वोह दहेज में अपना -२ बच्चा तो लेकर आएँगी ही …..                                               शुभस्य शीघ्रम !  

                         खुद का तथा सभी दावेदारों का शुभचिंतक और परम हितेशी

                                       राजकमल शर्मा

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 2.67 out of 5)
Loading ... Loading ...

61 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mahalia के द्वारा
May 29, 2011

This forum needed shaknig up and you’ve just done that. Great post!

Anuradha Chaudhary के द्वारा
May 13, 2011

Raj Kamal ji there is repetetion of the same thing.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 13, 2011

    anuraadha जी …सादर अभिवादन ! अगर वास्तव में ऐसा कुछ अभी भी हो रहा है तो यह शर्मनाक तो है ही घोर चिंता का विषय भी है जोकि त्वरित दण्डात्मक और सुधार वाले कदम उठाने की जरूरत दर्शाता है ….. कहाँ जा कर कुम्भकर्णी नींद सो गया है हमारा मीडिया ? वैसे अगर आप इस विषय पर विस्तार से कुछ बताती या फिर अपने विचारों को ब्लॉग के सामने सबके सामने रख पाती तो कितना अच्छा होता ….. आपका आभार

    Ellen के द्वारा
    May 29, 2011

    Walking in the preesnce of giants here. Cool thinking all around!

वाहिद काशीवासी के द्वारा
May 7, 2011

हो..तूने लूट लिया..लूट लिया..लूट लिया. भ्राता श्री, व्यंगात्मक लहज़े में समाज को आइना दिखाने का जो बीड़ा उठाया है (बनारस वाला बीड़ा है लगता है) वह क़ाबिले तारीफ़ है| इस तरह के समाचार आना जहाँ एक तरफ़ जागरूकता का द्योतक है वहीं दूसरी ओर सफ़ेदपोशों की कुत्सित कारगुज़ारियों का कच्चा चिटठा  भी और तीसरी तरफ़ जागरूक होते हुए भी हमारी उदासीनता का परिचायक| आभार इस लेख के लिए,

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 7, 2011

    प्रिय वाहिद भाई ….आदाब ! आप तो अन्तर्यामी हो , सच में ही आज मेरा मन बनारसी पान का बीड़ा खाने को कर रहा था ….. आपकी इस टिप्पणी ने सच में ही कई बनारसी पानो का मजा दे दिया है ….. जिस केस की जांच गृहमंत्री के दखल देने पर हो रही हो , उसकी गंभीरता का अंदाज़ा आप सहज ही लगा सकते है ….. बाकि असल बात तो यह देखने वाली होगी की दोषियों को क्लीन चिट् मिलती है या फिर सजा …. आपका बहुत -२ आभार

    Adele के द्वारा
    May 28, 2011

    Hey, you’re the goto expert. Tahnks for hanging out here.

supriyo के द्वारा
May 7, 2011

आदरणीया राजकमल अंकल बहुत ही उत्क्रिस्ट हास्य रचना सचमुच मजा आ गया आपको धन्यबाद आज एक चीज समझ नहीं आता चारो तरफ ये हो क्या रहा है आज चरित्र निर्माण क्यों नहीं हो रहा समझ नहीं आता खैर जो ऐसा कार्य करते है उनका कुछ भला तो हो नहीं सकता आपितु उनके बच्चो में भी ये गुण आ जायेंगे जेनेटिकली धन्यवाद सुप्रिय

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 7, 2011

    PRIY सुप्रिय भाई ….नमस्कार ! आपने बहुत ही बढ़िया बात कह दी है , दिल खुश कर दित्ता है …. सच में ही ‘यह खून कुछ न कुछ रंग जरूर लाएगा’ ….. इसके साथ -२ इस बात का भी दुःख है की यह दूषित खून इस समाज को और भी गन्दा कर जाएगा ….. आपकी इस चिंता में मैं भी शामिल हूँ ….. आपका आभारी

    David के द्वारा
    November 28, 2013

    I was really confused, and this answered all my quseoitns.

संदीप कौशिक के द्वारा
May 7, 2011

आदरणीय राजकमल जी, आपने इस सामयिक खबर को जिस व्यंग्यात्मक अंदाज़ में इस मंच पर रखा है, उसके लिए हार्दिक बधाई !! आपका हर आलेख पढ़ने से पहले ये उम्मीद करता हूँ कि आज बहुत कुछ अच्छा ही पढ़ने को मिलेगा लेकिन अंत तक आते आते यह भूल जाता हूँ कि मेरी वो उम्मीद की लक्ष्मण-रेखा कहाँ छूट गयी और आपने उसके स्तर से न जाने कितना ही ऊपर पहुंचा दिया | एक लाजवाब भाषा शैली के साथ आपका खास ‘राजकमलीय अंदाज़’ चटखारे लेने के साथ-साथ हमेशा ही कुछ न कुछ सोचने को मजबूर करता है | भगवान करे आपकी लेखनी की ताकत दिन चौगुनी-रात आठगुनी तरक्की करे !! http://sandeepkaushik.jagranjunction.com/ :)

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 7, 2011

    प्रिय संदीप जी ….. नमस्कार ! मैं तो हर बार कुछ न्य करने की कोशिश ही किया करता हूँ , उसके साथ -२ किसी हद तक मनोरंजन करना भी मुख्य उद्देश्य रहता है ….. मैं तो अपनी फिल्म रिलीज कर देता हूँ , बाकी तो आप जैसे स्नेही दर्शको की प्रतिकिर्या ही बताती है की मैं कितना सफल रहा हूँ ….. भविष्य में भी आप सबकी उम्मीदों पर पूरा उतरने की कोशिश रहेगी , बाकि आदमी के खुद के हाथ में कुछ नही रहता है , सब कुछ उस उपर वाले की किरपा से ही होता है …. आपके द्वारा दिए टानिक के लिए आपका हार्दिक आभार

    Deacon के द्वारा
    May 29, 2011

    Snuods great to me BWTHDIK

Aakash Tiwaari के द्वारा
May 6, 2011

श्री राजकमल जी, आपकी खबरों का अंदाज ही निराला होता है..बहुत ही गम्भीर विषय को व्यंगात्मक अंदाज में कह डाला..मेरा तो बस इतना मानना है की आज के इस आधुनिक दौर में जो लडकियां अपनी रक्षा नहीं कर सकती वो समाज की क्या करेगी…… आकाश तिवारी

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 6, 2011

    प्रिय आकाश भाई ….. आदाब ! आपने बिलकुल; सही सवाल उठाया है , वाकई में यह चिंता का विषय है ….. और किसी विभाग में तो फिर भी किसी हद तक सब्र हो जाता है लेकिन भविष्य के महिला पुलिसकर्मी , उनके साथ भी यह अमानवीय व्यवहार और व्यभाचार , सचमुच ही निंदनीय है ….. आपने इस विषय पर समर्थन देकर जागरूकता का परिचय दिया है …. आभार सहित (स्वस्थ जीवन की शुभकामनाओं सहित -आपकी अगली रचना के इंतज़ार में )

allrounder के द्वारा
May 6, 2011

राजकमल भाई, आपकी नजर भी बस मार्के की ख़बरों पर ही पड़ती है, इस बहाने आपने समाज मैं फैली गंदगी पर भी प्रहार कर डाला और अपने और कई कुंवारों के लिए संभावनाएं भी खोज लीं ! एक बार फिर से मजेदार आलेख पर हार्दिक बधाई !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 6, 2011

    priy sachin bhaai …. namaskaar ! एक बार एक खबर में पढ़ा था की शायद युगांडा में यह रीती है की वहां पर शादी से पहले हरेक औरत के बच्चे होने जरूरी है …जितने ज्यादा उसके बच्चे उतनी ही वोह काबिल और गुणी मानी जाती है …. यहाँ तक उस देश के राजा की भी बीवी के शादी से पहले बच्चे थे , उसके नहीं बल्कि किसी और के ….. ऐसा लगता है की हमारे उन पुलिस अफसरों ने शायद उस देश से प्रेरणा लेते हुए वहां की उस रीती रिवाज को यहाँ भी लागु करने की सोची है …. मैं इस बात को इस लेख में शामिल करता , लेकिन यह पहले ही जरूरत से ज्यादा लम्बा हो गया था इसलिए इस विचार को त्यागना पड़ गया ….. आपकी उत्साह बढ़ाने वाली प्रतिकिर्या के लिए हार्दिक आभार

rahulpriyadarshi के द्वारा
May 6, 2011

राजकमल जी नमस्कार,लेख है तो व्यंगात्मक शैली में किन्तु पढ़कर मन उद्वेलित हो जाता है,इन्हें हम कैसे अपना रखवाला मान लें,पता नहीं इन कमीनों की इंसानियत भी कही मर चुकी है या फिर ऐसे लोग खुद ही वेश्यालयों की ट्रेडमार्क पैदाइश हैं…..मुझे तो सोचकर ही तरस आता है की कहीं कल को इन लोगों की बेटियां जवान हुयीं तब ये कैसे खुद पर नियंत्रण रख सकेंगे.मुझे शंका है कि ऐसे लोग आगे चलकर नारायण दत्त तिवारी जी को भारी चुनौती दे सकते हैं.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 6, 2011

    प्रिय राहुल भाई ….नमस्कार ! अब यह तो जांच का विषय है की उन हरामी अफसरों के असली पिता कौन -२ है …. लेकिन इतना तो तय है की उनकी रगों में गन्दा खून तो है ही ….. अब आगे चल कर भविष्य में यह उनको और कितना गिराता है यह तो वक्त ही बताएगा …. लेकिन एक बात और भी साफ़ हो गई है की हम लोग बिलकुल निष्किय और सवेंदनशीलता विहीन हो गए है …. अपनी इंसानियत को खो चुके है और उससे भी बढ़कर अपने आसपास कुछ भी गलत होता हुआ देखकर कुछ भी न करने की आदत अपना ली है …. हमारा जागरूक मीडिया भी ऐसे मामलो में सोया रहता है …. सब के सब मिले हुए है , सभी बिकाऊ है …… अब और कितना विष उगलूं , अपनी शुभ वाणी को विराम देते हुए आपका आभार प्रकट करता हूँ की आपने अपनी जुम्मेवारी समझते हुए इस विषय पर मेरी आवाज में अपनी आवाज मिलाना जरूरी समझा … धन्यवाद

vivekvinay के द्वारा
May 5, 2011

इस उच्च कोटि के पुलिस ट्रेनिंग की संदर्भ सहित सपूर्ण व्याख्या की इस उच्च प्रस्तुती हेतु बधाई

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 5, 2011

    प्रिय विवेक विनय जी ….नमस्कार ! यह जान कर मन बहुत ही हर्षित हुआ की आपने इस उच्च कोटि की ट्रेनिंग के स्तर को पहचान लिया है …… आप से गुजारिश है की इस तरह की ट्रेनिंग के लिए कुछेक और प्रतियोगी जल्द से जल्द उस सैंटर में भेज दे …. खास करके उनको जिनको की औलाद का सुख नसीब नहीं हुआ है , यह स्वर्णिम मौका उन बालाओ के लिए छूटना नहीं चाहिए ….. आपके समर्थन के लिए आपका हार्दिक आभार

K M Mishra के द्वारा
May 5, 2011

राजू जी नमस्कार, ये है पुलिस का समाजवाद, चाहे हवालात में कैद किसी महिला को गुप्त ट्रेनिंग देनी हो चाहे अपने ही महकमे की किसी महिला को. अब पुलिस पर कोई पक्षपात का आरोप नहीं लगायेगा.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 5, 2011

    आदरणीय मिश्रा जी ….सादर अभिवादन ! भला आप से ज्यादा इस तथ्य को और कौन जान सकता है ….. एक पाकिस्तान की महिला कैदी थी . आई तो वोह मनहूस जेल में अकेली थी लेकिन गई अपनी गोद में एक खुशनसीब बच्ची को साथ में लेकर ….. पुलिस तो वैसे भी सभी को एक नज़र से देखती है , शायद इसीलिए कहा जाता है की यह किसी के भी मित्र नहीं होते …. आपका आभार

ashvinikumar के द्वारा
May 4, 2011

राजकमल भाई यह सरकारी अमलदारी है यहाँ जो न हो जाए वह कम है ,,अभी जो जांच बैठी है उसमे भी महिला हीं हैं और वही महिला सबको निर्दोष होने का प्रमाण दे देंगी ,,अब यह जांच आयोग आयोग वाली महिला ”आंटी” जी हैं या कुछ और यह शोध का विषय है ,,वैसे भारत में आंटी टाईप महिलाएं ही ऐसे कृत्यों को बढ़ावा दे रही हैं ,,पुलिस ट्रेनिंग सेंटर सेक्स स्कैंडल में एक ट्रेनर को जहां गिरफ्तार किया गया है वहीं,अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या एक कांस्टेबल सेक्स स्कैंडल का किंगपिन हो सकता है?कोल्हापुर सेक्स स्कैंडल मामले में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में महिला कॉन्सटेबल्स के साथ बलात्कार की मेडिकल रिपोर्ट से छेड़छाड़ की कोशिश की गई है,युवतियों से बलात्कार की वारदात में कई आला अफसर भी शामिल हैं हिरासत में लिये गए प्रशिक्षक युवराज कांबले और उसका परिवार आला अधिकारियों पर संगीन आरोप लगा रहा है, प्रशिक्षक कांबले के मुताबिक सेक्स स्कैंडल के असल आरोपी ट्रेनिंग स्कूल के बड़े अधिकारी हैं, अधिकारी खुद को बचाने के लिए उसे बलि का बकरा बना रहे हैं, यही नहीं, अधिकारियों के डर से ज्यादातर पीड़ित लड़कियां सामने नहीं आ रही हैं,इस खुलासे से घबराई सरकार ने कई प्रशिक्षु युवतियों को छुट्टी पर भेज दिया है, तो कई को आनन-फानन में नागपुर स्थानांतरित कर दिया गया है, फिर रिपोर्ट खान से आयेगी सबको क्लीन चिट दे दी जायेगी ….जय भारत

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 5, 2011

    प्रिय अश्वनी भाई …वंदे मातरम ! आपका जानकारी वाला स्त्रोत वाकई में कबीले तारीफ है …. इस महान देश के महान लोकतंत्र में जहाँ पर की ज्यादातर लोग भ्रष्ट है वहां पर आपके सभी जाहिर किये गए शक और शुबह वाजिब है ….. एक कहावत है की लुच्चा लफंगा चौधरी ते गुंडी रन (जनानी ) प्रधान ऐसे में यही आशा बंधती है की वोह अपना सदियों पुराना औरत की दुश्मन औरत वाला पुराना चरित्र ही निभाएगी …… आपके द्वारा मेहने से जुताई गई इन महत्वपूर्ण जानकारियों को हमसे बांटने के लिया आपका दिल से आभारी हूँ …. जय भारत

    Xaria के द्वारा
    May 29, 2011

    That’s raelly shrewd! Good to see the logic set out so well.

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
May 4, 2011

अग्रज राजकमल जी, आपने व्यंग की बहुत ही रोचक तीखी, प्रभावी और संतुलित शैली विकसित कर ली है | आपके इस विशेष शैली में लिखे व्यंग पढ़ना बहुत अच्छा लगता है… जो विषय विशेष की विसंगति और आलोचनीय कुरूपता पर से परदा हटा देता है | बधाई

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 4, 2011

    प्रिय शैलेश भाई …आदाब ! इसमें आपका बहुत बड़ा योगदान रहा है अतीत में , जिसको की मैं आज भी भुला नहीं हूँ …. मुझे याद है की किस तरह से आप मुझको मधुपान करने से रोका करते थे …. आपके स्नेह के लिए आपका हार्दिक आभार

    Mimosa के द्वारा
    May 29, 2011

    THX that’s a great asnewr!

    Jim के द्वारा
    November 28, 2013

    I watend to spend a minute to thank you for this.

abodhbaalak के द्वारा
May 4, 2011

Raj ji kya kahen is post par?aapke ek sentence ne sochne par …………… \"jin par hamaari bahut betiyon ko raksha ……………\" sach me, wo kya ………? aapne apne rang se bhale hi is haasy rang dia ho par ye badi kadvi ………………. is tarah ka lekh keval aapke bas ki hi baat hai . http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 4, 2011

    प्रिय अबोध भ्राता जी ….. आदाब ! इस पुरे लेख में से आपने अपने मतलब की बात निकाल ही ली , बहुत ही तेज है आप अपनी पसंद की बात ढूंडने में माहिर …. मैंने अपने हिसाब से इसमें सभी मसाले डाल दिए , लेकिन पता नहीं की लोगो का टेस्ट कैसा हो गया है ….. खैर दिल राज़ी तो रब्ब राज़ी रब्ब राजी टी यह राजकमल भी है हर रंग में राज़ी :) आपका बहुत -२ आभार

    abodhbaalak के द्वारा
    May 5, 2011

    राज जी आप्को याद होगा की कुछ समय पह्ले मैने कुछ ऐसी हि बात कहि थि, कि पत नही पोस्ट फ़ीचर होने के लिये क्या ……, तब आप ने मुझे समझाया था कि असल चीज़ है आप्को मिल्ने वाले कमेन्त और पढ़्ने वालो का प्यार्, आज मै आप्से वहि कह रहा हू, कि असल चीज़ …., आप इस मन्च के उन लेख्को मे से है जिने हम ढ़्न्ढ़ कर पढ्ते है, रहि बात कमेन्द और फ़ीचर होने कि तो वो उत्न मह्त्व नहि रख्ते, बस आप ऐसे हि लिख्ते रहे…. aapka apna abodh

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 5, 2011

    प्रिय अबोध जी ….सस्नेह नमस्कार ! आपकी सभी बाते मुझको समझ में आती है और भाई मेरे मैं नार्मल रूटीन की बात नहीं करता हूँ , मैं बदले की भावना से दुर्भावनापूर्ण किसी को भी अघोषित ब्लैकलिस्ट करने की बात कह रहा हूँ ….. उम्मीद है की आप मेरी बात समझेंगे , इस बात को तो आप भी मानेंगे की अब मैंने कोई घटिया तो लिखना शुरू नहीं कर दिया है ? आपका आभारी हूँ और रहूँगा

    surendrashuklabhramar5 के द्वारा
    May 6, 2011

    राज भाई हम भी अबोध जी की इस उपर्युक्त बात से सहमत हैं — असल चीज़ है आपको मिलने वाले कमेंट और पढ़्ने वालो का प्यार्, आज मै आप से वही कह रहा हू, कि असल चीज़ …., आप इस मन्च के उन लेख्को मे से है जिने हम ढ़्न्ढ़ कर पढ्ते है, रही बात कमेंट और फ़ीचर हाँ विशिष्ट ब्लाग में लाने से अपना मतलब इन चीजों को अधिक लोगों तक पहुंचा देना मात्र बस -आलोचना प्यार मस्ती हास्य पुट ये तो होता रहता है -जिन्दगी है चलती रहेगी ये गाडी …

surendrashuklabhramar5 के द्वारा
May 4, 2011

वाह री आधुनिक नारी ! धिक्कार है तुझ पर , तुने माडर्न जमाने की होकर भी , मध्ययुगीन महिलायों जैसा असुरक्षा वाला आचरण किया है तथा घोर लापरवाही बरती है …. प्रिय भ्राता राज+कमल जी बहुत ही सार्थक और बेबाक लेख आप का हम तो भौंचक्के हैं परमवीर की सिफारिश करने की जगह इनके हर नाम के आगे एक एक जूता चप्पल उसकी माला लगानी चाहिए थी इन्हें खुद अपना चेहरा किसी गन्दी नाली में जा कर देखना चाहिए जो की इनके चेहरे से कहीं ज्यादा साफ़ सुथरा दिखेगा मथुरा के कंस वाले मेरे लेख में आप ने ठीक ही इन माडर्न नारियों को मादा कंस लिखा था ये हैं हमारी सुरक्षा की ट्रेनिंग लेने वाली और कंधे से कंधे मिला पुरुषों को गाली देने वाली नारियां हो सकता है सब भूखी रही हो और पेट भरने के लिए दो रोटी की लालच में अपना सब कुछ … ऐसे ही कितने प्यारे फूल यहाँ वहां बंजर में आप को खिले मिल जायेंगे भ्राता श्री -कली कब फूल बन जाती है माली को सींचने वाले को पता तक नहीं होता जो जी जान से इस वाटिका की रखवाली मर मर के करता रहता है अफ़सोस -शर्म —– हम जागरण जंक्सन से चाहेंगे इस पोस्ट को विशेष दर्जा दे कुछ दिन सब का चेहरा दिखाएँ …..नारियां भी कृपया आ के पढ़ें भ्रमर ५

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 4, 2011

    प्रिय भर्मर जी ….जय श्री राधे कृष्ण ! आपका स्नेह और समर्थन अभूतपूर्व है मेरे लिए …. भगवान ने जो आदमजात को पापी पेट दिया है सब उसी के बखेड़े खड़े किये हुए है ….. पेट भरने के लालच में उन बेचारियों के पेट ही बढ़ गए , घोर अनर्थ -घोर कलयुग …. और रही बात जागरण जंक्शन की तो वोह पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाता है ….अगर यही पोस्ट किसी और उनके चहेते ब्लागर ने लिखी होती तो पोस्ट होते ही विशेष दर्जा पा जाती ….. एक बार मैंने खुद अपनी आँखों से देखा है की उनके एक चेहते ब्लागर की पोस्ट आई और आने के पांच मिनट बाद ही वोह फीचर्ड की लिस्ट में थी …. जबकि मेरी पोस्ट उसी दिन पांच घंटे के बाद फीचर्ड हुई थी जोकि मैंने उनसे पांच घंटे पहले पोस्ट की थी …. जब से मैंने अलविदा जागरण जंक्शन ….. लेख लिखा था + तथा इनामों के वितरण पर जागरण की आलोचनात्मक सुझाव दिए थे तब से मेरा एक भी लेख फीचर्ड नहीं हुआ है …..इनको भी खुशामद करने वाले ब्लागर चाहिए यहाँ पर …. कभी -२ तो मन बहुत ही दुखी हो जाता है , मुझे यही पता नहीं की मैं यहाँ पर अभी तक क्यों हूँ ? :) धन्यवाद

    surendrashuklabhramar5 के द्वारा
    May 5, 2011

    हमें बहुत आश्चर्य होता है ये जागरण और विशिस्ट श्रेणी की कहानी सुनकर फिर भी चैन इस लिए आता है की सोने का भाव कभी गिरता नहीं चाहे वह जौहरी की दुकान में हो या कहीं गरीब के घर या धूल में पड़ा हो आप के तमगे ये प्रतिक्रियाओं का लगातार बढ़ते रहना ये शाबित कर देता है कि आप एक नायाब हीरा हैं हाँ कभी कभी किसी खुशामद पसंद लोगों को व्यंग्य वाण चुभते तो हैं ही न -आप तो इस मंच की शोभा है …राज + कमल भाई खिले रहो आप का भ्रमर५

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 5, 2011

    प्रिय भर्मर जी …जय श्री राधे कृष्ण ! हरेक बल्लेबाज़ के जीवन में खराब दौर आता ही है ….लेकिन अगर किसी के साथ जानबूझकर सौरव गांगुली जैसा बर्ताव किया जाता है तो दुःख पहुंचना स्वाभाविक ही है …. धन्यवाद

    surendrashuklabhramar5 के द्वारा
    May 6, 2011

    राज भाई कहाँ मिलेगा हमें वो आप का लेख “कम्प्यूटर पर हिंदी में लिखना ” आन और आफ लाईन जरा मै भी पढूं न ?? हम तो आल्ट+शिफ्ट का बहुधा उपयोग कर जाते हैं …. सब का अपना अपना मत है सौरभ के साथ ना-इंसाफी सब कहाँ मानते हैं ?? बाद में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया क्या ?? आप का भ्रमर ५

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 7, 2011

    प्रिय भर्मर जी …जय श्री राधे कृष्ण ! मेरे द्वारा प्रस्तुत उस लेख का लिंक है :- http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/03/01/कम्पूटर-पर-हिंदी-में-लिखन-2/ मैं उम्मीद करता हूँ की आपको इससे जरूर फायदा होगा ….. इस लेख को इस मंच परर मैं तीन बार पोस्ट कर चूका हूँ …. शायद चोथी बार भी कर दूँ ….. आपका आभारी

syeds के द्वारा
May 4, 2011

राजकमल भाई,इस कड़वी सी खबर को जिस अंदाज़ में आपने पेश किया है वोह सिर्फ आप ही कर सकते हैं…. :) अच्छे राजकमलीय लेख पर धीर साडी बधाइयां…

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 4, 2011

    प्रिय सैयद भाई …. आदाब ! सच में ही आप जैसे स्नेही सज्जन मित्रों से प्रोत्साहन पाकर बहुत ही अच्छा लगता है क्योंकि इस डाक्टर राजकमल की कड़वी दवाई हर किसी को पसंद नहीं आती ….. :) मेरा तो यह मानना है की जहर की काट जहर से इसीलिए मैं इस तरह से लिखता हूँ …. आपके समर्थन के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया

baijnathpandey के द्वारा
May 4, 2011

भैया राजकमल जी आप अंततः अपने असलियत पर उतर हीं जाते हैं आप इस मंच के कोतवाल है ………इस बात को सदैव याद रखें ताकि भविष्य में कोई आपपर उंगली न ……….. मै अब ऐसी खबरों पर ध्यान नहीं देता क्योंकि आपने मुझे शादीशुदा घोषित कर रखा है साथ ही मै क्या कोई बच्चा भी जनता है कि कलयुग आ गया है तो क्या-क्या होगा कोई पकड़ में आता है तो हाय तौबा नहीं तो मजा ही मजा मेरा कहना है कि आम सहमती से कुछ भी होता है तो समाज को चुप रहना चाहिए समाज बदल चूका है इस बात को मान लेनी चाहिए तथा अपने मौके का इन्तेजार करना चाहिए

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 4, 2011

    प्रिय बैजनाथ जी …नमस्कार ! आप का कहना ठीक है मेरे भाई ….. सच में ही उस दिन मेरा राशिफल वाला मनपसंद अखबार जागरण नहीं आया था …. अब तो मिडिया भी ऐसी खबरों को कोई ज्यादा तवज्जों नहीं देता है क्योंकि पंजाब केसरी अखबार में भी इस खबर को मैंने नहीं पढ़ा …… अमिन सोचता हूँ की मैं अपने ब्लाग की टैग लाइन बदल ही डालू की खुशवंत सिंह और इस्मत चुगताई वाला अंदाज़ तथा तेवर आप शादी शुदा हो या फिर कुंवारे हमारे ब्लॉग तो हमारे लिए हमारी फिल्मे ही है , इसलिए हम उनमे कैसा भी पार्ट अदा कर सकते है .. आभार सहित


topic of the week



latest from jagran