RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

सोचो ज़रा हट के

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"नामाकूल-नामुराद-पाजी ब्लागर 'india-321' द्वारा 'दिव्या बहन' की रचना की चोरी"

Posted On: 27 Apr, 2011 में

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यह तो आप जानते ही है की मैं इस मंच का वन मैंन पुलिस थाने का बिना वर्दी वाला गुंडा यानी की पुलिस वाला हूँ ….. मेरे ड्यूटी पर रहते इस मंच पर जितनी भी चोरी – चकारी की घटनाएं घटी उन सभी के गुनहगारों को मैंने आप सभी स्नेही सज्जनों के अतुलनीय सहयोग से उपयुक्त सजा दिलवाकर केस को दाखिल दफ्तर कर दिया है …..  मुझको एक  बात का गर्व है और रहेगा और इसी खासियत के कारण मैंने अपना यह तकिया कलाम भी रख लिया है कि :- “जुर्म यहाँ पर केवल इसलिए ही नहीं कम है क्योंकि जागरण जंक्शन पर हम है , बल्कि इसलिए भी कम है  कि हममे दस का दम है” …..

                     जिस प्रकार हरेक दुकानदार की तरह एक डाक्टर भी आपने भगवान जी के सामने धुप दीप और अगरबत्ती जलाता है और प्रार्थना करता है की ,  हे भगवन ! मेरे क्लीनिक में ग्राहक निरंतर आते रहे …. ठीक उसी प्रकार एक पुलिस वाला भी मेरी तरह अपने प्यारे प्रभु से यही दुआ करता है की ,  हे अल्लाह ! मेरे पाक परवरदिगार ! मेरे थाने का रोजनामचा हमेशा ही हर भरा रहे ….. अब यह तो जग जाहिर सी बात है की अगर लोग किसी न किसी बिमारी से ग्रसित होंगे तभी तो डाक्टर के पास अपने -२ इलाज के लिए जायेंगे …. कुछ इसी प्रकार अगर मेरे इलाके में कोई न कोई घटना घटित होती रहेगी तभी तो उसकी रपट मेरे थाणे में दर्ज होगी …… और अगर कोई अपराध ही नहीं होगा तो फिर हमारा थाना खोल कर बैठने का क्या काम ? …..

                   मैं जोकि  भगवान जी से किसी घटना के घटित होने की दिन रात  दुआ माँगा करता था , लेकिन कुदरत का अजब खेल देखिये की जब घटना घटी तो उसकी खुशी होने की  बजाय मुझको बहुत ही दुःख हुआ ….. किस्सा कुछ इस तरह है कि मैं वैसे तो हर रोज अपनी रूटीन गश्त पर निकला करता हूँ , लेकिन 22  अप्रैल के दिन अपनी अंतरात्मा कि आवाज पर मैंने गश्त करने की  बजाय नाका लगा कर बैठने की  ठानी …… अभी मुझको थोड़ी देर ही हुई थी की  तभी सामने से एक नई नवेली शोरूम से निकली गाड़ी  ‘INDIA – 321’  आती हुई दिखाई दी ….. शक पड़ने के कारण जब  मैंने उसको तलाशी के लिए रोका तो उसकी डिग्गी में से एक बला की  हसीन और मासूम सी लड़की दिखाई दी …. उसके हाथ और पैर बंधे हुए थे , तथा वोह बेचारी डरी  और सहमी हुई धीरे -२ सिसकियां ले रही थी ….. मैंने तुरन्त उसके मुहं में ठुसा हुआ कपड़ा हटाया तथा उसके हाथो और पैरों के बन्धन वाहिद काशीवासी जी से खुलवा कर उसको आज़ाद करवाया ….. वैसे तो हमारे साथ प्रिय अबोध बालक जी भी थे , लेकिन वोह डिग्गी की  चैकिंग से पहले ही हमारे आई .जी. साहिब का फोन आने पर किसी जरूरी काम से  दूसरे इलाके में चले गए थे , इसलिए अबोध जी को उस पाजी की करतूत का  बिलकुल भी ज्ञान  नहीं है तथा वोह उसको अभी तलक हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की तरह पाक और साफ़ समझते है …..

                                    अब आज़ाद होने के बाद मैंने उस मासूम सी लड़की को जरा ध्यान से देखा तो पाया तो खुद पर लानत डाली कि अरे घोंचू राम ! तू पहले क्यों नहीं समझ पाया की  यह तो हमारी ब्लोगर  बहन   “DIVYA – 81”   की   (“तू कितनी प्यारी है – तू कितनी भोली है –माँ”)  कविता नामक बिटिया है ….. खैर मैं तो उस कविता को दिव्या बहन को ससम्मान उनकी बिछड़ी हुई बेटी से मिलाने  के लिए ले गया , और मेरे पीछे वाहिद काशीवासी जी ने जम कर उस पाजी कि ऐसी खबर ली कि उस मनहूस को अपनी पड़नानी याद आ गई होगी , तथा अगर उसको जरा सी भी शर्मो हया होगी तो भविष्य में खुद तो क्या उसकी आने वाली सात पीढ़िया भी चोरी जैसा घटिया और नीच कर्म नहीं करेगी …..    

          

नोट :- हमारी अब तक की उपल्बधिया निम्नलिखित है :-

*अदिति जी की रचना को जोनपुर वाले मुकेश के कब्ज़े से छुड़वाना    ( मुद्दई चुस्त और गवाह भी चुस्त )

*सचिन भाई की रचना को उसी चोर मुकेश से छुड़वाना              ( मुद्दई सुप्त   और गवाह चुस्त  )

*आदरणीय खुराना चाचा जी की रचना लाल किताब के सिद्ध टोटके      (मुद्दई जागरूक तथा गवाह चुस्त )

 जोकि उस रचना पर लाल किताब का टोटका न होने की वजह से

चोरी चली गई थी को छुडवाना

*इस मंच के आदरणीय राजीव तनेजा के वयंग्य को चोर से छुड़वाना    (  मुद्दई जागरूक तथा गवाह चुस्त)

*दिव्या बहन की कविता को इस पाजी से छुड़वाना                    (मुद्दई सुप्त   और गवाह चुस्त   )

            हमारे उपरलिखित कारनामों की रौशनी में आप सभी का यह फ़र्ज़ बनता है की हमारा नाम भारत रत्न के लिए तजवीज करे …… वैसे भी यह सरकार का फ़र्ज़ बनता है की वोह हमको इस पुरस्कार से नवाजकर अपनी आत्मा पर पड़े हुए असंख्य पापों के बोझों को किसी हद तक  तो कम कर ही सकती है …….

                               अगर आपको भविष्य में किसी भी किस्म की कोई मदद की जरूरत आन  पड़े तो आप हमारे 24 * 7  टोल फ्री नम्बर 9876543210पर हमसे सिर्फ रात के बारह  बजे तक ही बात कर सकते है ….. क्योंकि हम सारा दिन मटरगश्ती करके बेइंतहा थक जाते है इसलिए हमारी थानेदारनी मधु हमे नींद की गोली खिला कर सुला देती है …… उसके बाद आप उसको अपनी शिकायत लिखवा सकते है लेकिन तब वोह नम्बर टोल फ्री नही होता और उस पर अंतर्राष्ट्रीय दरे लागू होती है ….

             अंत में यही कहूँगा कि

                                  “किसी भी चोर का जिंदा कभी भी जमीर नहीं होता

                                  चाहे कर ले कितनी ही चोरियां कभी भी वोह आमिर नहीं होता”    

मैं यही उम्मीद करता हूँ कि हमारी इस कारवाई से भविष्य के चोर कोई सबक लेंगे और  इस मंच कि मर्यादा को कायम रखेंगे तथा मेरे थाने का रिकार्ड साफ़ सुथरा रखने में मेरी मदद करेंगे …… वर्ना न तो मैं कहीं गया हूँ और न ही मेरा डंडा ‘आन मिलो सजना’ कही गया है …… पढ़ाई में अंडा खाने  वाले बेशर्म चोर महाशय मेरा डंडा खाने से परहेज ही करे तो ही उनकी सेहत के लिए अच्छा होगा ……

                          बिना वर्दी वाला पुलिस वाला गुंडा –  चलता है जिसका अपराधियों पर डंडा

                          राजकमल शर्मा (एनकाउंटर स्पेशलिस्ट )

                          ‘दया नायक’ नहीं बल्कि “बेरहम खलनायक”      

(बेशक उस नामाकूल ने वोह चोरी वाली पोस्ट खत्म कर दी है – लेकिन चूँकि अभी तक उसने माफ़ी नहीं मांगी है इसलिए उस बेशर्म के लिए हमको यह कदम उठाना पड़ा )          

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58 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lynsey के द्वारा
May 29, 2011

You’re on top of the game. Thanks for shanirg.

syeds के द्वारा
April 30, 2011

दरोगा राजकमल जी, चोरों को सबक सिखाने का खूबसूरत राजकमलीय अंदाज़…सभी चोर जान लें कि इस पुलिस वाले से बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है….आप इसी तरह से गश्त और नाकाबंदी करते रहिये.. हम जैसे नागरिक भी आपके साथ हैं…. दिव्या जी रचना का अपहरण शर्मनाक है…अपहरणकरता को माफ़ी मांगनी चाहिए…

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 30, 2011

    प्रिय सैयद जी ….आदाब ! हमेशा की तरह आज भी आपका प्यार और स्नेह मुझ नाचीज पर बरसा है …. आप सभी स्नेही साथियो के सहयोग से ही मुझको पहले भी सफलता मिली है तथा आगे भी मिलेगी ऐसा मेरा विश्वाश है …. वैसे रब्ब करे की कभी भी किसी की भी रचना की चोरी चकारी जैसी निंदनीय घटना कम से कम इस मंच पर न ही घटे तो ही बेहतर होगा ….. और रहू बात माफ़ी की तो अब तो सभी उस नीच कर्म वाले ब्लागर को सभी जान गए है तथा उसकी फितरत को भी …. लेकिन चोर में इतनी ही नैतिकता तथा शर्म हो तो वोह ऐसा घटिया काम करे ही क्यों …. फिर भी यह उसका फ़र्ज़ बनता है की वोह दिव्या बहन के ब्लाग पर जाकर माफ़ी मांगे …. आपका हार्दिक शुक्रिया

    Jasemin के द्वारा
    May 29, 2011

    I’m not wrohty to be in the same forum. ROTFL

    Thomas के द्वारा
    November 28, 2013

    I’m out of league here. Too much brain power on diylpas!

priyasingh के द्वारा
April 28, 2011

आपकी ये पोस्ट पढ़कर तो बड़ा अचरज हुआ ………लोग यहाँ ऐसा कुछ भी करते है और करने से पहले सोचते भी नहीं, ऐसी चोरी की हुई रचना पर तारीफे पाकर क्या वो सुकून पा लेगा ………खैर आपने बहुत सराहनीय काम किया है इसके लिए आप प्रशंशा के हकदार है …………

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 28, 2011

    प्रियाजी ….नमस्कार ! जब पहली बार मुझको इस बाबत पता चला था तो मेरी हालत भी आपके जैसी ही हुई थी शायद …. लेकिन उससे भी ज्यादा हम सभी को इस बात का दुःख है की उस चोरी के कारण सभी की चहेती + इस मंच की आन +बाण +शान अदिति जी इस मंच को छोड़ कर चली गई …. इसलिए हरेक ऐसे वाकये के समय मुझको सक्रिय होना पड़ता है ताकि कोई दूसरा काम से कम इस कारण से इस मंच को छोड़ कर न जाए ….. आपके सार्थं के लिए आपका आभार

abodhbaalak के द्वारा
April 28, 2011

गुरु जी गलती हो गयी, पर शायद मै चूंकि पुलिस में नहीं हूँ, और इन साथ में अबोध भी हूँ, ऐसे बातों पर ध्यान नहीं दे पाता, वैसे मै चोरी के सख्त खिलाफ हूँ, अब पाता ही नहीं था की ये हमारी दिव्या जी …… खैर आपने और वाहिद जी ने उनकी खबर ले ही ली है, तो अब और क्या कहना …. अपने रचनाओं में मुझे भी जगह देने से ये तो स्पष्ट हो जाता है की आप मुझे अपनों में समझते हैं और मेरे लिए ये ही बड़ी बात है, अपनी कृपादृष्टि बनाए रखियेगा…. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 28, 2011

    प्रिय अबोध भ्राता जी ….नमस्कार ! आपके बिना तो उह लेख अधूरा ही था …. मुझको खुशी है की जिनका मैंने आपने लेख में जिक्र किया उन सभी साथियों ने अपनी हाजरी लगवाई है , अगर आप लोग नहीं आते तो मैं लाइनहाजिर हो जाता , लेकिन अब चिंता की कोई बात नहीं है …. आप पहले भी आपने थे और आगे भी रहेंगे , इसमें कोई शक नहीं है ….लेकिन इस बात का मलाल मरने के बाद भी रहेगा की आप कितने अबोध है और कितने सुबोध यह मैं जीते जी नहीं जान पाऊंगा ….आपका आभारी

nishamittal के द्वारा
April 28, 2011

सेवा करिए मेवा तो मिलेगी ही.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 28, 2011

    आदरणीय निशा जी ….सादर अभिवादन ! आप किरपा करके इतना बता दीजिए की मेवा कहाँ पर मिलता है और मिल रहा है …. सेवा तो भगवान ने मेरी किस्मत में लिखी ही नहीं है …. न करना और न ही करवाना ….. आपका आभारी

aksaditya के द्वारा
April 27, 2011

देश के पोलिस वालों को आपसे ट्रेनिंग लेनी चाहिए | चोर की धज्जियां उड़ाने का तरीका और लेख दोनों सुंदर हैं | बधाई |

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 28, 2011

    आदरणीय अकसदित्या जी …सादर प्रणाम ! हमारे पटियाला में पुलिस के तशदद रूम में जो पटा रखा है उस पर लिखा हुआ है आन मिलो सजना …. इसलिए यह लाइन वास्तिक जिंदगी पर आधारित है …. लेख की सराहना करने के लिए आपका तहेदिल से आभारी हूँ

allrounder के द्वारा
April 27, 2011

नमस्कार राजकमल भाई, सबसे पहले तो आपकी प्रशंशा करूँगा की आपने एक और अपहृत ( कविता ) को नामुराद अपहरणकर्ता के चंगुल से छुड़ाया, और हमें इतना मजेदार लेख भी पढने को दिया ! *अदिति जी की रचना को जोनपुर वाले मुकेश के कब्ज़े से छुड़वाना ( मुद्दई चुस्त और गवाह भी चुस्त ) *सचिन भाई की रचना को उसी चोर मुकेश से छुड़वाना ( मुद्दई सुप्त और गवाह चुस्त ) ये पंक्तियाँ पढ़ – पढ़कर मुझे न चाहते हुए भी हंसी आ रही है, क्योंकि ये कितनी सटीक और सही हैं ये मैं अच्छी तरह समझता हूँ, मुझे आज भी याद है जब मेरी और अदितिजी की रचनाओं का अपहरण हुआ था, तब मेरी बदकिस्मती से मुझे 2 दिन बाद पता चला था, और आप सब लोगों ने किस प्रकार से मोर्चा बंदी करके उस अपहरण कर्ता की बैंड बजाई थी, ये मुझे अदिति जी के पोस्ट के कमेन्ट से पता चला था ! वैसे भाई मैंने उसके तुरंत बाद ” ब्रेकिंग न्यूज़ …… ” नाम से एक व्यंग लिखा था और उसमे अपनी लापरवाही मान ली थी, किन्तु आज आपकी मुद्दई सुप्त और गवाह चुस्त पढ़कर अपनी लापरवाही पर मुझे बहुत हंसी आ रही है ! और भाई उस युद्ध के सेनानायक को मेरा बहुत – बहुत धन्यबाद एक बार फिर से !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 28, 2011

    प्रिय सचिन भाई ….नमस्कार ! यहाँ पर इस लेख में मैं मजाक करने के मकसद से अपना बखान कुछ ज्यादा ही कर गया हूँ ,इस धोखे के लिए माफ़ी चाहता हूँ …. उस समय सारी मेहनत अदिति जी ने ही की थी ,हम लोग तो बस उनका सिर्फ साथ ही दे रहे थे …..लेकिन इस बात को मैंने अपने एक पुराने लेख \"दरोगा बाबू ! आई लव यू\" में इमानदारी से स्वीकार किया था …. यहाँ पर आपकी गैरहाजरी में जितने भी युद्ध लड़े गए उनके सभी साथियो का भरपूर सहयोग मिला , फिर चाहे वोह किन्ही निम् पागल ब्लागरो द्वारा सारी -२ रात जाग कर सैंकड़ो रचनाये पोस्ट करके हमे जानबूझ कर हाशिए पर धकेलना हो ….. अब तो आप भी आ गए है तो यकीनन अब ऐसी या फिर वैसी कोई भी किसी भी किस्म की घटना घटने की नोबत ही नहीं आएगी और अगर रब्ब न करे कुछ होता है तो हम सभी मिल जुल कर उससे निपट लेंगे …. आपका बहुत -२ आभार http://india321.jagranjunction.com/

वाहिद काशीवासी के द्वारा
April 27, 2011

भ्राता श्री, एक यथोचित विषय उठाया है आपने यहाँ| जागरण जंक्शन से आज लाखों की संख्या में ब्लॉगर जुड़े हुए हैं| रोज़ यहाँ सैकड़ों रचनाएँ प्रकाशित होती हैं| इन सब के बीच कुछेक लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों के सुखन की नक़ल उतार कर  वाहवाही लूटने की फ़िराक़ में रहते हैं| भला हो आपकी तेज़ नज़रों का जो आपने उसे पकड़ लिया| आश्चर्य का विषय यह है कि इस प्रतिष्ठित मंच पर ऐसी घटनाएँ घटती हैं और क़ुसूरवार सज़ा पाए बिना बच निकलते हैं| इतना ही नहीं उन्हें फ़ीचर्ड लिस्ट में सम्मानित स्थान भी प्राप्त होता है|  अपनी व्यस्तता के कारण मैंने इस लेख को देख कर भी अनदेखा कर दिया था पर आपके तीक्ष्ण दृष्टिपात से वह अपराधी बच नहीं सका और वायरलेस पर ये खबर मिलते ही मैंने तुरंत ही मौक़ाए वारदात का रुख कर लिया और प्राप्त सूचना को सही पाया। इसके बाद कोई सवाल ही नहीं रहा उसकी खैर-खबर न लेने का|  ऐसे दोषियों को दण्ड अवश्य मिलना चाहिए। आभार सहित,

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    April 27, 2011

    अपने स्तर से आपके लिए विशेष सम्मान की संस्तुति और घोषणा दोनों ही करता हूँ| आपने निस्संदेह एक सराहनीय कार्य किया है जिसके लिए आप इस विशेष पुरस्कार के पात्र हैं|

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 28, 2011

    प्रिय वाहिद भाई ….आदाब ! मुझे आप पर पूरा भरौसा है , लेकिन जुबली कुमार जी आजकल कुछ गैरहाजिर चल रहे है … अगर उनसे गुजारिश करता तो वोह भी आपकी तरह ही अपने फ़र्ज़ को अंजाम बखुबी दे देते …. अपराधी सजा के हकदार होकर भी निरपराध + बेखोफ घूमते है …यह वाकई चिंता का विषय है …. इस विषय पर आज तक मैंने छह लेख लिखे लेकिन जागरण वालो ने किसी एक को भी फीचर्ड नहीं किया …इसलिए मैं यही मानता हूँ की हमे ही मिलजुल कर अपनी भलाई के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे ….. *********************************************************************************************************** और वयंग्य का यह हिस्सा तो सचिन भाजी को भारत रत्न देने की मांग से जुड़ा हुआ है …. धन्यवाद

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    April 28, 2011

    भ्राता श्री, आपके जुबली कुमार जी से आज शाम को लखनऊ में मिलने का इरादा है| काश आप भी होते तो कितना अच्छा लगता कि यू पी ईस्ट-वेस्ट, उत्तराखण्ड और पंजाब वेस्ट  एक साथ ही हैं आपस में जुड़े हुए|जैसे कि ये मोबाइल के नेटवर्क जुड़े हुए हैं आपस में| उनसे मिलकर व्यक्तिगत अनुरोध करूँगा कल की तारीख में कि वे आपकी बात मान लें और आप उनकी बात मान लें| शुभस्य शीघ्रम, शीघ्रम-शीघ्रम!!!

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    April 28, 2011

    भ्राता श्री, उस भटके हुए ब्लॉगर की नई पोस्ट का लिंक दे रहा हूँ कृपया वहीं जाकर उसे देख लें|  http://india321.jagranjunction.com/2011/04/24/कौन-होगा-साईं-ट्रस्ट-की-55-हज शुक्रिया सहित, आपका अनुज श्री ,

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    April 28, 2011

    कृपया पंजाब वेस्ट की जगह पंजाब ईस्ट पढ़ें भ्राता श्री|

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 28, 2011

    PRIY WAHID BHAAI ….. आदाब ! आजकल कुछ ज्यादा ही व्यस्त हूँ , इसलिए जुबली कुमार जीको इतवार को मेल करूँगा , मेरी तरफ से आप उनको मेरी माफ़ी भेज देना तब तक ….. आपका स्नेह मेरे लिए हमेशा ही विशेष रहा है जोकि आप इतने व्यस्त समय में से भी हम लोगो के लिए इतना समय निकलते है ….. इसकी लिए आपको साधुवाद आभार सहित

    Roby के द्वारा
    May 28, 2011

    You’ve hit the ball out the park! Icnerdilbe!

div81 के द्वारा
April 27, 2011

राजकमल भाई, भाई के रहते बहन को चिंता करने की जरूरत ही नहीं है ऊपर से वो भाई थानेदार (जागरूक) हो तो सोने पे सुहागा | इन दिनों कुछ निजी कारणवश मंच से अनुपस्थित चल रही थी अब ऐसे में चोर पीछे से वार करके हमको हवा भी न लगने दे तो क्या किया जाये | मगर आप की जागरूकता के चलते वो पोस्ट गधे के सींग की तरह गायब हो गयी, आप ने और वाहिद जी सर्फ ऐक्स्सेल से उस दाग का ऐसा सफाया किया कि मैं उस ब्लॉग में अपनी पोस्ट ढुन्ढती रह गयी उसका कोई नामोनिशान तक नहीं मिला | इससे इतना तो पता चल गया कि आप ने और वाहिद जी ने उसकी अच्छी खबर ली होगी | आप का और वाहिद जी का तहे दिल से शुक्रिया वैसे मुझे लगता है मुझे शुक्रिया शब्द का इस वक्त इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्यूँ कि आप ने जो किया है उसके आगे………… :)

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 28, 2011

    दिव्या बहिन ….नमस्कार ! आप तो मेरी बहन समान है लेकिन इस से पहले जो चार केस साथियो के सहयोग से साल्व किये है वोह सभी भी हम सभी की समान भलाई को मुख्य रख कर अपना फ़र्ज़ समझ कर किये….. आज जो आग मेरे पड़ोस में लगी है कल को वोह मेरा आशियाना भी तो जला सकती है ….यहो सोच कर ही , स्वार्थवश ही सही , अपने मतलब के लिए ही सही हमको एक दूसरे की मदद करनी चाहिए …. और इन नीच तथा घटिया लोगो को उनकी सही जगह तथा औकात बता देनी चाहिए … आप के आने से मेरा यह ब्लाग लिखना सफल हो गया नहीं मान सकते जब तक की वोह बेशर्म माफ़ी न मांग ले ….. आपका आभार

    Wimpy के द्वारा
    May 29, 2011

    YMMD with that awnser! TX

K M Mishra के द्वारा
April 27, 2011

थानेदार राजू को मेरा नमस्कार, डंडे के आगे तो भूत भी भागते हैं. आपका यह थानेदार वाला रूप तो एक दम निराला है. सवेरे सवेरे हंसा दिया आपने, दिन अच्छा गुजरेगा. बड़े दिनों बाद किसी लेख को पढ़ कर हंसा हूँ.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 28, 2011

    आदरणीय मिश्रा जी ….सादर अभिवादन ! अगर इमानदारी से कहूँ तो आपकी यह प्रतिकिर्या सुबह ही देख ली थी …..आपसे तारीफ पाकर असल में दिन तो मेरा अच्छा गुजरा …. आपका हरेक दिन ही अच्छा गुजरे यही कामना है मेरी ….. ***************************************************************************************************** ‘परलोक’ में हमारी जल्द ही ‘इस भू लोक, में मिलने की बात हुई थी …..जब आप नहीं आये तो मैंने अपनी तीसरी आँख से ध्यान लगा कर देखा तो पाया की आप एक अधनंगे बच्चे के पीछे -२ अपना कैमरे वाला मोबाइल लेकर भाग रहे है ….. शुक्र है की अब आप को फुर्सत मिल तो गई , इसके लिए मैं आपका तहेदिल से आभारी है ….. अब जब आपने इतनी सारी फोटो खींच ली है तो अगली किसी पोस्ट में फिर से “कुछ मीठा हो जाए” आभार

    Ladainian के द्वारा
    May 28, 2011

    Good point. I hadn’t tohghut about it quite that way. :)

Harish Bhatt के द्वारा
April 27, 2011

आदरणीय राजकमल जी बहुत शानदार……..लेख के लिए हार्दिक बधाई…. और चोर को फटकार लगाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद. सच में जब लिखना ना आता हो तो क्या डॉक्टर ने कहा कि लिखना जरुरी है पता नहीं लोग दूसरो की रचना चुरा कर किया दिखाना चाहते है…….. और भी तो काम है करने के लिए.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 28, 2011

    आदरणीय हरीश जी ….सादर प्रणाम ! इस तरह के बेशर्म लोगो का कोई भी जमीर नहीं होता +मरा हुआ होता है …… इनकी इनकी सनक ऐसे उलटे सीधे काम करने के लिए उकसाती है ….. इसलिए इनका मानसिक डाक्टर से तथा पुलसिया डंडे से , दोनों ही तरीके से इलाज़ करना बहुत ही जरूरी है ….. आपसे सराहना पाकर अभिभूत हूँ आपका आभारी

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 28, 2011

    आदरणीय हरीश जी …सादर प्रणाम ! इस तरह के लोगो का जमीर मरा हुआ होता है ….. इन संकी लोगो का शारीरिक तथा मानसिक रूप दोनों ही तरीके से इलाज बेहद ही जरूरी है …. आपकी तारीफ के लिए तहेदिल से शुक्रगुजार हूँ

baijnathpandey के द्वारा
April 26, 2011

आदरणीय श्री राज जी, सैंयाँ भये कोतवाल अब डर काहे का…….. आपके होते हुए किसी ऐसे वैसे पाजी की क्या मजाल कि हमारा रोम तक हिला-डुला सके आपने एवं श्री वाहिद जी ने क्या खूब खबर ली होगी बन्दे की यह सोंचकर हीं दिल मुस्कुरा उठता है …. अफ़सोस इसी बात कि है कि सही पात्र होते हुए भी वह मुझ डॉक्टर का दवा खाए बगैर हीं चला गया आदरणीया दिव्या बहन की रचना को चुराने का हौसला रखनेवाला शख्श निश्चय हीं घोर बीमारी से ग्रसित रहा होगा …….जिसके सफल ऑपरेशन से मेरी साख और बढती खैर आप अपनी उपयोगिता जानते हैं ,,,,,,फिर कभी jj छोड़ कर जाने की बात मत कीजियेगा मोर्चे पर डटे रहिये ………धन्यवाद |

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 28, 2011

    http://india321.jagranjunction.com/ प्रिय बैजनाथ जी …नमस्कार आप अपने चूर्ण की फक्की उसको उपर्लिखित लिंक पर जाकर खिला सकते है …. अब तो जीना यहाँ -मरना यहाँ इसके सिवा जाना कहाँ जी चाहे जब हमको आवाज दो लेकिन बारह बजे से पहले हम थे यही हम है यहाँ …. लेकिन मैं लोगो की फितरत को जानता हूँ वोह मुझको फ्री में फोन करने की बजाय मेरी पत्नी को पैसे खर्च करके फोन करेंगे ….. धन्यवाद

    Lilian के द्वारा
    May 28, 2011

    Kudos to you! I hadn’t tohught of that!

surendrashuklabhramar5 के द्वारा
April 26, 2011

दरोगा जी चोरी हो गयी –रूपया गया न पैसा कविता चोरी हो गयी -आना तो ११ रात के बाद -मेरे सपने में आना हो …. आप तो बड़े ही सभ्य दरोगा निकले जी -फिर दरोगाई कैसी ?? जो उसका नाम तक नहीं लिए- न डंडा बोला मूक -गवाह अबोध को भी किनारे कर दिया -जिसके ऊपर आप का पक्का भरोसा काशी वाशी को ही साथ रखा ?? केवल इनकावूनटर की फ़िराक में क्या ?? कहीं आप की जगह बाबा भ्रमर देव होते तो न… प्यारे दया नायक जी मेरे सर के ऊपर से बहुत कुछ उड़ गया -पूरा लेख व्यंग्य भरा- हवा तक नहीं लगी हमें माजरे का -कमल प्रभु की लीला वही जानें – जय श्री राम

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 28, 2011

    http://india321.jagranjunction.com/ aadrniy shuklaa जी ….जय श्री राधे कृष्ण ! उस ब्लागर का यही नाम है …… उम्मीद है की अब सारा माजरा समझ गए होंगे – वोह नया ब्लागर है इसलिए उसको शोरूम से निकली नई गाड़ी india -321 का नाम दिया …. वाहिद भाई ने मेरे कहने पर उसकी क्लास ली थी , लेकिन हमारे प्रिय अबोध जी अभी भी उस पर अपना प्यार लुटा रहे है ….. हमारी रचनाये और हमारे कमेन्ट रूपी मिला प्यार ही हमारे लिए सबसे कीमती दोलत है ,इसलिए यह रूपये पैसे से भी कीमती है …. अगर अभी भी मन में कोई शंका हो तो जरूर बताइयेगा धन्यवाद व् आभार


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