RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

सोचो ज़रा हट के

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हमारी कुत्तिया जुलिया

Posted On: 30 Dec, 2010 में

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दोस्तों यह तो आपको बताने की कोई जरूरत नही है कि कुत्ता एक वफादार जानवर होता है …. इसकी हिलती हुई पूंछ ही इसकी स्वामिभक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण होती है ….इस जीव की  वीरता और वफादारी के अनेको सच्चे  किस्से प्रचलित है …. आज मैं आपको अपने घर में पाली  हुई एक कुत्तिया की  कहानी सुनाने जा रहा हूँ ….

                     हम दूसरों के घरों  में अंग्रेजी नस्ल के कुत्ते – कुत्तिया देख  कर सोचा करते थे कि क्या कभी हमें  भी ऐसे किसी जीव को पालने का सुअवसर मिलेगा …..हमारी बरसो कि साध तब पूरी हुई जब हमारे एक अजीज दोस्त ने अपने घर में पाली हुई कुत्तिया के बच्चों में से एक का पालक बनाकर हमारा जीवन धन्य कर दिया ……

             बस अब तो हमारे मज़े ही मज़े थे क्योंकि घर में सबके खेलने के लिए एक खिलौना जो आ गया था ……हालत हमारे चाहे पहले जैसे फटेहाल ही थे , लेकिन उस अंग्रेजी नस्ल की  कुत्तिया की  जंजीर हाथ में आते ही हम खुद को नवाब फन्ने खान से कम नहीं समझते थे … अब चाहे घर में हमको दूध तो क्या चाय के भी लाले पड़े रहते थे , लेकिन उस महारानी के लिए हमको अलग से बजट बना कर दूध की  व्यवस्था भी करनी पड़ी ….यह अलग बात है कि इस नवाबी शान- ओ शौकत को कायम रखने के लिए हमको ओवरटाइम भी करना पड़ा ….

                           लेकिन जब इतवार को उस नाचीज की  जंजीर थामे हम गली मोहल्ले या बाज़ार में सीना चौड़ा किये हुए गुजरते तो हमारी सारी थकान लोगो की  रश्क भरी निगाहें  देख कर कपूर की  तरह काफूर हो जाया करती ….. और हम उसके पीछे भागते हुए एक नई उर्जा से भर जाया करते  ….

                    अब उस नवाबजादी को एक अजीब आदत थी की  उसको रोटी के साथ सब्जी भी चाहिए होती थी …. शहरो में कभी- कभार  जब सब्जी – भाजी वाले फेरी लगाने में कोताही बरत जाते है तो चाय के साथ परौंठे बना कर काम चलाया जाता है …. लेकिन उसके लिए तब यह तरीका अपनाया जाता कि सादी रोटी पर घी मिली हल्दी मल कर खिलानी पड़ती , क्योंकि तब वोह भैंस को हरा  चश्मा लगा कर सुखा चारा भी रंगीन दिखने  वाली तर्ज़ पर रोटी का पीलापन देख कर उसको ही सब्जी समझ कर मज़े से चट  कर जाती , और हम राहत की सांस लेकर अपनी समझदारी और चालाकी पर इतराया करते …..

                पता नहीं उसको अपना पिछला ज़न्म याद था जो की  वोह हमको तरह -२ के नखरे दिखाया करती थी …. कभी -२ गुस्से में डांट देने पर वोह नवाबजादी घर के बाहर ही घुमती रहती … जब तक हमारे द्वारा  उसको अपनी गलती मान कर प्यार से पुचकार कर , मना कर नहीं लाया जाता तब तक वोह अपनी मर्ज़ी से कभी भी वापिस नहीं आती … पता नहीं वोह पिछले ज़न्म की हमारी बीवी थी जो की उस समय का बदला हमसे अब गिन -२ कर ले रही थी ……

                      अगर घर में कभी कोई मेहमान आ जाता तब तो उसकी  बेकरारी देखते ही बनती थी …. उसको पता लग जाता था कि आज तो घर में कुछ मीठा आएगा ही आएगा … इसलिए उस दिन उसको जंजीर में बांधकर रखना असंभव हो जाता … एक बार हमारे द्वारा उसको मजाक में रसगुल्ले का खाली लिफाफा थमाने पर वोह बेचारी उस को पूरे का पूरा ही निगल गई …. किस मुश्किल से अपनी इस गलती को दरुस्त कर पाए हम , यह हम ही जानते है ….

                         जैसे की  हम जानते है की  सभी जानवरों और पशु –पक्षियों में कुदरत द्वारा प्रदान की  गई छठी इंद्री होती है …. जिसके द्वारा ज्यादातर जानवर भविष्य में घटने वाली घटनाओं को जान जाया करते है …. हमारे परिवार में सबसे पहले मैंने यह बात नोट की , कि जब भी हमारे परिवार में किसी पर कोई आपदा आने वाली होती है ….. उसदिन वोह कुत्तिया हमारे द्वारा लाख रोकने पर भी ज़बरदस्ती  उपर की गलियों में से होते हुए हमको बाजार में मिल  जाती … और उसी दिन वोह बेचारी खुद कोई ना कोई चोट सहन करके हमारे बुरे ग्रहों का असर अपने उपर लेकर हमारे नमक का हक अदा करते हुए अपनी जात – बिरादरी की शान में इजाफा कर जाती …..

                    गर्मिया समाप्त होने लगी थी  और अब सर्दियों का मौसम शुरू हो गया था …. और असली मुसीबत से दो चार होने की  हमारी असली परीक्षा भी अब शुरू हो गई थी …. हम छुट्टी के दिन परिवार सहित आंगन में बैठ कर चाय की चुस्कियां लेते हुए  अखबार पढ़ रहे होते … कि पता नहीं किस – किस मोहल्ले के कुत्ते , झुण्ड के झुण्ड बना कर सच्चे आशिकों  की  तरह हमारे घर की चौखट पर सुबह से शाम तक नियमित अंतराल पर माथा रगड़ने , और उस हुस्न की मल्लिका  के दर्शन और  दीदार करने आ जाया  करते ….

                     अब घर में हमारी जवान हो रही बहन भी थी ….. गली के किसी शरीफ लड़के की तो छोडिये किसी मुश्टंडे की  भी इतनी हिम्मत नहीं थी की वोह  हमारे घर की  तरफ आँख उठा कर देखने की भी  जुर्रत करता ….. लेकिन अपनी पालतू कुत्तिया के उन आशिकों के आगे हम बेबस और लाचार हो गए …. हमारी सारी की सारी दबंगई धरी की धरी रह गई …. लोगों के तानों के डर से हमने  खुद को होने वाली शर्मिन्दगी से बचाने के लिए उस कुत्तिया को अपने उसी अज़ीज़ दोस्त को आभार सहित लौटा दिया …. और इस तरह इज्जत बची तो लाखों पाए , हम लौट कर बुद्धू घर को आये …..

                             वैसे देखा जाए तों उस बेचारी को अपनी कुत्तिया की जिन्दगी में मुझ गरीब  से क्या नसीब हुआ …. कितना अच्छा होता की उसको  किसी अमीर  घराने की हसीना की गोद में पलना नसीब हुआ होता ….खाने को एक से एक बढ़िया खाने मिला करते जोकि एक आम आदमी को भी नसीब नहीं होते …. उनके गोरे और नरम नाज़ुक हाथो द्वारा शैम्पू युक्त स्नान  और धुप स्नान मिलता ….  महंगी गाडियों में उनकी गोद में बैठ कर घूमना और रात को मखमली बिस्तर पर उनके संग ही शयन करना …

            उन कुत्तों के ऐसे ठाठबाट देख कर यार लोगों की तों उस परमपिता से यही कामना है कि

                “ऐ मेरे खुदा तू मुझको अगले ज़न्म में कोई कुत्ता ही बनाना ,

                 किसी गोरी -२ हसीना की बाँहों और गोद में खिलाना ,

                  मगर भूल से भी किसी मगरूर हसीना का पति मत बनाना ,

                  अपने इस बच्चे की किसी कुत्ते से भी बदतर गत मत बनवाना”

                        एक बात और कहना चाहूँगा की हमको  इंसान के रूप में जन्म तो

  मिल जाता है …. लेकिन हम अपनी सारी जिन्दगी किसी गधे की तरह अपने कर्मो और दुखो का बोझा ढोते हुए गुजार देते  है …. और अक्सर हम लोगों को कुत्ते की सी मौत ही नसीब भी हो जाया करती  है …..

                         लेकिन यह कुत्ते ऐसे बदकिस्मत होते है कि इनका जन्म तो कुत्ते के रूप में  ही होता   है , लेकिन कभी -२ यह जानवर अपने कर्मो और कारनामो से आदमी को भी मात दे जाया करते  है और आदमी की  शख्शियत इन के सामने बौनी पड़ जाती है , लेकिन  यह नामुराद मरते हमेशा कुत्ते की  ही मौत है …

                         हम सभी जानते है की जीवों की कुल चौरासी लाख योनियाँ हुआ करती है , मैं नही कहता किताबो  में लिखा है यारो …. हरेक योनी में से हमको गुजरना पड़ता है फिर चाहे वोह किसी जानवर + पशु + पक्षी + पेड़ + वनस्पतियां तथा कोई वाहन वगैरह की ही क्यों ना हो …. अब मेरा तों यही सोचना है की कुत्ते की योनी के बाद उस जीवात्मा को स्कूटर की योनि मिला करती है …क्योंकि इनमे और उनमे  एक बेहद अहम समानता देखने को मिलती है …. स्कूटर को जहां हम खुद टेढ़ा किया करते है , वहीं कुत्ते खुद को खुदबखुद ही टेढ़ा कर लिया करते है ….

                                     एक महा कुत्ती चीज

                                       राजकमल शर्मा         

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49 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sivamohan के द्वारा
July 5, 2013

कदत

sivamohan के द्वारा
July 5, 2013

SIVAMOHAN

Fleta के द्वारा
May 29, 2011

Wow, that’s a really clever way of thninkig about it!

Ramesh bajpai के द्वारा
January 3, 2011

प्रिय राज कमल जी नव वर्ष परइस जूलियट पुराण का क्या करू ? हा बधाई दिए दे रहा हु | बाकि तो जब हमारी बहु आएगी तब बात करुगा | मै शादी का योग देख रहा हु | सो अभी से आत्मीय श्री शाही जी को आमंत्रण दे दे |

    rajkamal के द्वारा
    January 3, 2011

    आदरणीय श्री वाजपाई जी … सादर प्रणाम ! आपको और आपके मत कों तो मैं तहेदिल से मानता और स्वीकार करता हूँ …. मैंने जूली कों जुलिया बना दिया तो आपने उसको जूलियट बना कर चार चाँद लगा दिए … जवाब नही है आपका ….. काश की मैं आप सभी की अपेक्षायो पर खरा उतर सकू नया वर्ष आपके लिए खुशहाली + सेहत और तंदरुस्ती भरा तथा सारे परिवार के लिए कल्याणकारी और शुभ हो …. इसी कामना के साथ आपका आभारी

    Ramesh bajpai के द्वारा
    January 4, 2011

    प्रिय राज कमल जी आप हमारी नजरो में आपेक्षाओ में , २४ कैरेट है | सोने से भी सोणा पुत्तर है कोई नहीं राज कमल है

    rajkamal के द्वारा
    January 4, 2011

    आदरणीय श्री वाजपाई जी ..सादर प्रणाम ! मैं आपका तहेदिल से शुक्रगुजार हूँ की आपने मेरी मजबूरियों कों समझते हुए मुझ पर अपना स्नेह और प्यार बनाये रखा है …. आपका आभारी आपका बेटा राजकमल

Aakash Tiwaari के द्वारा
January 3, 2011

श्री राजकमल जी, बहुत ही खूबसूरत बहुत ही बढ़िया गम्भीर व्यंग … आकाश तिवारी

    rajkamal के द्वारा
    January 3, 2011

    प्रिय श्री आकाश भाई …. नमस्कार ! आपको हमारी जूली की खानी पसंद आई ….. यह जान कर बहुत अच्छा लगा हमे और हमारी जूली कों भी यकीनन अच्छा ही लगेगा … आपके प्रोत्साहन के लिए आपका आभार

HIMANSHU BHATT के द्वारा
January 1, 2011

राजकमल जी यह हास्य रचना अंत में इतनी संजीदा हो जाएगी सोचा न था….. आपकी लेखन शैली का तो मै कायल हों ही…. यह लेख पढ़ कर….. तो आपके फैन हो गए हैं….

    rajkamal के द्वारा
    January 2, 2011

    प्रिय श्री हिमांशु जी ..नमस्कार ! यह मेरी ही कमिया है की मैं आपको शुरूआत से अन्त तक हंसा नही पाया …. फिर भी मेरी यह कामना है की आप सारा साल हँसते और मुस्कराते रहे आपका आभार

abodhbaalak के द्वारा
January 1, 2011

raj ji sach baat kahoon, kuchh blog par kament dekh kar(bina padhe) hi कमेन्ट कर देता हूँ पर आपका blog…. bhayya hame to aap is roop me hi bahut pasand hain, kisi aur roop me ham nahi chahenge ki aap … waise aapko jo kutta/kutia ban ke paane ki chah hai ( ….) wo aapko aise hi mil jayen

    rajkamal के द्वारा
    January 1, 2011

    प्रिय अबोध जी …सस्नेह नमस्कार आपने मुझको हर रूप में पसन्द किया है ….. अब अगले जन्म में हम क्या होंगे यह तो कोई भी नही जानता है …. फिर  भी रब्ब करे की वहां भी आपका साथ हो … इसी कामना के साथ आपका आभारी

atharvavedamanoj के द्वारा
December 31, 2010

लाली छाये दशों दिशा में, जगमग जगमग हो जग सारा | नवल वर्ष के नव प्रभात को विनत हमारी, नमन हमारा || शीतल, मलय सुवासित नंदन वन सा मह मह महके भारत | कोकिल सा कूके इस जग में खग सा चह चह चहके भारत | फटे शत्रुओं पर बन घातक ज्वाला भक् भक् भभके भारत | शौर्य, तेज का तीक्ष्ण हुताशन बनकर दह दह दहके भारत | तड तड टूटे सारे बंधन जीर्ण शीर्ण हो सारी कारा | नवल वर्ष के नव प्रभात को विनत हमारी नमन हमारा || शेष फिर कभी वंदे भारत मातरम मनोज कुमार सिंह मयंक एक हिंदू आतंकवादी

    rajkamal के द्वारा
    December 31, 2010

    priy shri manoj ji …vande matrm ! नया वर्ष की आपको परिवार सहित शुभकामनाये मुझे भी अपने संगठन में शामिल कर लो

Deepak Sahu के द्वारा
December 31, 2010

राज जी आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें बहुत   ही अच्चा ब्लॉग आपका धन्यवाद दीपक http://deepakkumarsahu.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    December 31, 2010

    प्रिय श्री दीपक जी …नमस्कार ! अरे भईआ बस हमारा ब्लाग ही अच्छा है … हम अच्छे नही है बस इतनी सी बात जान लो …. भेड़ कि खाल में भेड़ीआ हू तुम हमको पहचान लो … आपको भी नया साल मुबारक हो

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
December 31, 2010

प्रिय श्री राजकमल जी, किसी की खता (यहां जुलिया) बताते बताते पते की बात कह जाना आपकी बेहतरीन अदाओं में से एक है। पढ़ते-पढ़ते सोच रहा था कि आपने भी आदरणीय खुराना जी की तरह जानवरों पर कोई विशेष बात लिखी होगी लेकिन उसे दोस्‍त को लौटानें के बाद की बात ठीक राजकमल स्‍टाईल की बेहतरीन बाते हैं। कोई भी कामना करने से पहले सोच लिया कीजिए की प्रतिदिन एक पल ऐसा होता है जब आपकी सोच में आई बात को ईश्‍वर हर तरह से पूरा करना चाहता है। मेरी दुआ तो केवल यह है कि आपकी कामना की पूर्ति ना हो- क्‍यों भला फिर ऐसे मसाले पढ़नें व चखनें को कहां से मिलेंगें। नव वर्ष की शुभकामनाएं । आगामी वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्‍पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। अरविन्‍द पारीक

    rajkamal के द्वारा
    December 31, 2010

    आदरणीय श्री अरविन्द पारीक जी …सादर अभिवादन ! मैं यह बात भली भांति जानता था कि अगर लेख का नाम ‘हमारी जूली’ और सबसे नीचे वाला पैरा नही होता तो इस लेख के फीचर्ड होने कि संभावना थी …. लेकिन मैंने कोई भी समझौता करना गवारा नही किया …. आपकी अनुभवी नजरों ने यह तुरन्त ताड़ लिया …. नया वर्ष आपको भी परिवार सहित शुभ व मंगलमय हो

Syeds के द्वारा
December 31, 2010

राजकमल भाई,एक बार फिर वही अंदाज़, जिसके हम लोग फैन हैं,बेशक बहुत सारे लोग(ख़ास तौर से खातून) अपने कुत्ते को इतना महत्व देती हैं जितना इंसानों को भी नहीं…दुर्भाग्य से वह इंसान अगर बेचारा शौहर है तो फिर … http://syeds.jagranjunction.com

    rajkamal के द्वारा
    December 31, 2010

    प्रिय श्री सैयद जी …. आदाब ! कुत्तों की खुशनसीबी और बदनसीबी कों आप और मैं बखूभी समझते है …. इसलिए आपके और मेरे विचार इस मामले में मिलते है …. परिवार सहित नए वर्ष की मंगलकामनाये

    Geraldine के द्वारा
    May 29, 2011

    You’re the getreast! JMHO

आर.एन. शाही के द्वारा
December 30, 2010

आपका परम हितैषी होने के नाते यही चाहूंगा कि अल्लाह आपकी तमन्ना पूरी करते हुए अगले जन्म में आपको वही बना दे जो आप चाहते हैं, यानि श्वान (मुझे कुत्ता लिखते हुए थोड़ी शर्म महसूस हो रही है) । साथ ही आपकी हसरतें पूरी करते हुए आगे ऐसी व्यवस्था भी करे कि आपको चौरासी लाख बार कुतिया की योनि से ग़ुज़रना भी नसीब होवे । क्या-क्या बनना चाहा था, शैतान बन गया हूं जाना …

    Amit Dehati के द्वारा
    December 30, 2010

    वाह शाही जी आपने मेरी मन की बात कह दी ! इसके लिए आपको तहे दिल से शुक्रिया ! http://amitdehati.jagranjunction.com

    आर.एन. शाही के द्वारा
    December 31, 2010

    भाई साहब, अभी तक यहां आपका एक भी शब्द मेरे खिलाफ़ लिखा हुआ नहीं दिखा, यह थोड़ा आश्चर्यजनक है । मैंने बहुत सोचसमझ कर आपके लिये कड़ी बात लिखी थी, ताक़ि आप भी कुछ कड़वाहट उगलें । मैं आपकी नहीं, खुद अपनी परीक्षा लेना चाहता था, कि जहां तहां किसी के खिलाफ़ भी ज़हर उगलता रहता हूं, ऐसा करने पर किसी को कैसा लगता होगा, जबतक कोई मेरे खिलाफ़ कुछ न लिखे, कैसे पता चलेगा? मैं तीखी प्रतिक्रिया अथवा आलोचना के दो शब्द आपसे पाना चाहता था । आगे आपकी मर्ज़ी । नए वर्ष की ढेर सारी बधाइयां ।

    rajkamal के द्वारा
    December 31, 2010

    आदरणीय श्री शाही जी ….. सादर प्रणाम ! हमारे यहाँ पर बारिश + आंधी + तूफ़ान के कारण बिजली रानी पूरे दो दिन से गायब रही थी …. इसलिए मुझको भी मजबूरी में इस मंच से दूर रहना पड़ा …. आपकी किसी बात के बुरे लग जाने का तो कोई भी कारण नही था इसमें …. हमको उम्मीद है कि वोह हमारी मजबूरियों कों समझेंगे …. बन गई दूरियों के असल कारण कों भी समझेंगे …. आभार सहित ( नया साल आपको भी परिवार सहित मुबारक व मंगलमय हो )

    rajkamal के द्वारा
    December 31, 2010

    आदरणीय श्री शाही जी …सादर प्रणाम ! गर इंसान खुदा से जो भी मांगता वोह उसको मिल गया होता तो आज इंसान खुदा होता और खुदा ‘खुदा’ ना होकर ना जाने क्या होता…. फिर भी आप प्रार्थना करते रहिये इस डागी के लिए …. कभी तो कबूल होगी इसी कामना के साथ (नया वर्ष आपके लिए कल्याणकारी हो )

    rajkamal के द्वारा
    December 31, 2010

    priy shri amit ji …. namaskaar ! आपको अपने परिवार व सिर्फ सुन्दर पड़ोसिनो के साथ नया वर्ष सफलतापूर्वक आनंददायक हो

Amit Dehati के द्वारा
December 30, 2010

राजकमल जी, पहली बात की ये पोस्ट अगर शादी हो गई होगी तो अपनी पत्नी को मत दिखाइएगा. दूसरी बात की यदि आपकी कुत्ती पिछली जन्म में आपकी बीवी थी यानि इन्शान , और इस जन्म में कुत्ती . तो इस जन्म में आपको भी…………… क्षमा चाहूँगा! आपका ब्यंगात्मक भाव अच्छा लगा !

    rajkamal के द्वारा
    December 30, 2010

    प्रिय श्री अमित जी …. नमस्कार ! इस बात कि प्रेरणा मुझको मेरे पिछले लेख “कबरी नागिन” से मिली … आपको यह बात भी अच्छी लगी लेख में , इसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद (वैसे मेरी शादी (बर्बादी) अभी तक नहीं हुई है …. )

Dharmesh Tiwari के द्वारा
December 30, 2010

आदरनीय राज कमल जी प्रणाम,हकीकत में कुत्ते इतने वफादार होते है की इसे मिशल के रूप में कहा जाता है……………………….इस पर आपका यह ब्यंग…………वाक्य्यी काफी बेहतरीन सजाया है,धन्यवाद!

    rajkamal के द्वारा
    December 30, 2010

    प्रिय श्री धर्मेश तिवारी जी … नमस्कार ! आपने ठीक कहा है कि यह कुत्ता नमक प्राणी इंसान का सबसे अच्छा+ विश्वाश्पात्र और नमकहलाल मित्र है और रहेगा उसके पास रहती दुनिया तक भगवान का एक अनमोल तोहफा बन कर …. लेख कों पसन्द करने और हिम्मत बढ़ाने के लिए आपका शुक्रगुज़ार हूँ

    Peggy के द्वारा
    May 28, 2011

    YMMD with that asnewr! TX

ashutoshda के द्वारा
December 30, 2010

राजकमल जी प्रणाम क्या कहे आपके लिए शब्द ही नहीं बचे अब किसी टिपण्णी में एक शब्द पढ़ा था अनिल कपूर का झकास आशुतोष दा

    rajkamal के द्वारा
    December 30, 2010

    प्रिय आशुतोष जी …नमस्कार ! ऐसा ज़ुल्म मत करे , अगर शब्द ही खत्म हो गए तो ब्लागिंग कैसे करेंगे …. अभी तो हम लोगों कों आपकी कालम से ना जाने कितनी रचनाये और टिप्पणियाँ देखनी और पढ़नी है …. आपका धन्यवाद

Rashid के द्वारा
December 30, 2010

राज भाई , यह व्यंग है या हकीकत, या हकीकत को व्यंग में कह दिया है ! सच है की अमीरों के घरो के कुत्ते भी आम आदमियों से ज्यादा सुकून में रहते है ,, जहाँ एक आम आदमी को खाने के लाले है वहां जानवरों के लिए सब कुछ है ,, जहाँ तक मेरी जानकारी है की अमीरों के नौकरों की हालत ही इनके जानवरों से बुरी ही होती है ,, बहरहाल दुनिया ऐसे ही चलती है हो सकता है ऊपर कुछ इन्साफ हो यहाँ तो बस “अमीरों की शाम ग़रीबो के नाम” वाला मामला है कहीं खाना नहीं है तो कोई खाना ना खा कर वज़न घटा रहा है, किसी के पास पहनने को कपडा नहीं है किसी तो तन ढकने का शौक नहीं है ! बहरहाल आप की पोस्ट ने मुझे हसाया कम और दुखी ज्यादा कर दिया, लेकिन हकीकत यही है !! राशिद http://rashid.jagranjunction.com

    rajkamal के द्वारा
    December 30, 2010

    राशिद भाई … आदाब ! आप की यह टिप्पणी आप के स्वभाव की गंभीरता और सवेदनशीलता कों प्रकट करती है …. दरअसल यह किसी हद तक हकीकत ही है …. बस उसको थोड़ा सा तड़का भर लगाया है ….. आगे से मेरी उम्मीद और कोशिश रहेगी की आप कों दुःख और निराशा ना हो …. आपके मुख पर भी मुस्कान रहे …. अपने एक लेख में मैं मारने वाला हूँ …. किरपा करके उसमे दुखी मत हो जाना …. उम्मीद करता हूँ की आप मुझको हंसी खुशी श्रदांजली देंगे … आपका तहेदिल से हार्दिक आभार

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
December 30, 2010

कुत्तों के जीवन पर बेहतरीन लेख के लिए एक महा कुत्ती चीज राजकमल शर्मा हार्दिक बधाई के पात्र हैं…………. भाई राजकमल ये जिस तरह अंत मे आप अपने लिए इतने सुंदर उपमाएँ लिखने का साहस करते हैं …….. वो अदभूद है…………. आपके साहस को सलाम……….

    rajkamal के द्वारा
    December 30, 2010

    प्रिय पियूष भाई ….नमस्कार ! भाई मेरे यह सब साहस आप जैसे दोस्तों मित्रों द्वारा प्रदत प्रोत्साहन का ही नतीजा है …और कुछ नही ….. बस मैंने तो यही कहना चाहा है की कुछेक मायनो में कुत्ते इंसान कम आदमी से बेहतर होते है …. लेख कों पसन्द करने के लिए आपका आभार


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