RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

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दीवार !!! (अस्मिता के भीतरी लुटेरे )

Posted On: 11 Dec, 2010 में

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दोस्तों कुछेक दिन पहले हमारे प्रिय साथी श्री चातक जी ने मुझ को यह हुक्म दिया की मैं “अस्मिता के लुटेरों”  पर कुछ भी लिख डालू …. अब मैं कमअक्ल तो बस इतना ही जानता हूँ कि एक अदद नारी कि सबसे कीमती शय  को अस्मत कहते है और हम सबकी भारत माता कि इज्जत को अस्मिता कहते है ….

                               जब भी हम इस अस्मिता के बारे में कोई भी लेख लिखते है या फिर पढ़ते है तो हमारी सोच जय चन्द और मीर जाफर से ही शुरू होती है …लेकिन खत्म पता नहीं कहाँ पर  जाकर होती है …..

                                 लेकिन आज मैं इसपर बिलकुल अलग अन्दाज़ में बात  करूँगा ….. आज मैं आपको दो भाईओ कि सच्ची कहानी सुनाऊंगा … और मेरी आप से यह गुजारिश है कि इस कहानी में से ही आप “अस्मिता के लुटेरो” को खोजें ….आप कि सुविधा के लिए उनमे से एक भाई तो मैं ही बन जाता हूँ …..और मेरी आप से यह गुजारिश है की दूसरे की जगह पर आप  खुद को ही रख ले तो कहीं ज्यादा बेहतर होगा …

                        यह कहानी उन दो भाईयों की है जिनके पिता का देहान्त होने के बाद उनकी माँ ने बहुत से कष्ट सह कर उन दोनो की परवरिश  की …. जब तक उन भाईओ के पिता जी जीवित थे उनकी माँ की राजनितिक और धार्मिक आस्था उनके पिता जी से ही मिलती –जुलती थी …. लेकिन अपने पति के अचानक देहान्त हो जाने के  तुरन्त बाद मेरी माँ की धार्मिक आस्था बिना अपने  धर्म को बदले किसी दूसरे धर्म में हो गई …. हमेशा से ही जिस राजनितिक पार्टी को हम इस हद तक मानते थे की उसकी सोच के कारण गली मुहल्ले में कई बार लड़ाई झगड़ा भी हुआ ….. अब मेरी माँ और मेरा दूसरा भाई तथा मेरी बहन मेरी माँ की इस नई विचारधारा में पूरी तरह से रंग गये थे ……

              अपने स्वर्गीय ईमानदार पिता के असूलों और सिद्धान्तों पर दृढ़तापूर्वक डटे रहने के कारण मैं अपने ही घर में इस हद तक अलग थलग पड़ गया कि कल तक जो अपने थे , उनके लिए मैं एकदम से बेगाना हो गया …..हमारी विचारधारा में उन्नीस और बीस का नहीं बल्कि जमीन और आसमान तक का अंतर था …. इस खाई को पाटना और हमारे बीच की  “दिवार” को गिराना किसी के भी बस में नहीं है …..

             जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच में क्रिकेट का कोई मैच होता है …मैं उन पाकिस्तानी खिलाड़ियों को जानबूझ कर मुस्ले + कुत्ते कहता हूँ ….यह बात  मेरे परिवार को इतनी नागवार गुजरती है कि इसके बाद मेरे  साथ मेरे ही घर में मेरा बायकाट जोरशोर से शुरू हो जाता है …और कोई भी घर में मुझ से कम से कम 15 – 20   दिनों तक कोई भी बातचीत नहीं करता …..

       यह तो सभी जानते है कि भारत और पकिस्तान के समय के बीच में लगभग आधे घन्टे का अंतर है …. शायद और यकीनन इसी कारण हमारे घर की  दिवार घड़ी के समय में पन्द्रह मिनट का अंतर हमेशा होता है …. और मेरी अपने ही घर में इतनी हिम्मत नहीं थी  कि मैं उस दिवार घड़ी के समय को सही कर सकूँ …..

                   मेरे भाई और मेरी विचारधारा में इतना ही अंतर है जितना कि दीवार  फिल्म के अमिताभ और शशि कपूर के बीच में था ….. अब मेरा  भाई मेरी माँ और मेरी बहन के संग  अलग रहता है और मैं उन सबसे अलग , किसी दूसरी जगह पर इतनी दूर कि भूले से भी कभी हमारा आमना सामना ना हो जाए ….

                हम दोनों भाईओ के बीच में यह इकरारनामा हुआ था कि ठीक पन्द्रह साल के अन्तराल के बाद हम दोनों रात के बारह  बजे पीपल वाली गली के चौंक में मिलेंगे …. अब ज्यों -२ वोह समय नजदीक आता  जा रहा है , मेरी रातो कि नींद और दिन का चैन कहीं खो सा गया है …बस यही एक चिंता हरदम खाये जा रही है कि जब मेरा भाई मुझसे यह कहेगा कि “आज मेरे पास बंगला है + गाड़ी है + जिन्दगी जीने के लिए  हर ऐशोआराम का सामान है” ….तब मैं उसके जवाब में क्या कहूँगा ? ….क्योंकि तब मैं तो यह भी नहीं कह सकूंगा की “मेरे भाई मेरे पास माँ है” , क्योंकि मेरी माँ भी तो अब उसी के साथ ही रहती है ….

                              मैं यह भली भांति जानता हूँ की मेरे भाई की चाल और चरित्र बिलकुल कट्टर मुसलमानों की तरह है …. कल को अगर वोह कहीं पुलिस या फौज में भारती हो गया तो वोह देशद्रोहियों वाले ही काम करेगा … उसका ईमान सिर्फ और सिर्फ पैसा ही है … अगर वोह कल को कोई नेता बन गया तो हमारे देश का ही अन्दरखाते सौदा करके उसको  भी बेचने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा ….

                   हम दोनों ही भाईओ की परवरिश एक ही जैसे माहौल में हुई … एक जैसे ही हमको संस्कार देने की कोशिश की गई …. फिर क्या कारण रहा की हम दोनों के बीच की दीवार  इतनी बड़ी हो गई … और  हमारी  राहे और सोच बिलकुल जुदा हो गई है ..

                         मेरे भाई के बाजू पर किसी ने भी नहीं लिखा है की “मेरा बाप चोर है”  …… लेकिन उसके कुत्सित इरादे और नीच करम ही इतने ज्यादा है की अब सब जान गए है की यह सबसे बड़ा चोर है ….मैं भगवान से दिन – रात यही प्रार्थना करता हूँ की मेरे भाई का कभी इतिहास में नाम ना आ जाए , अपने किसी कारनामे की वजह से …. और वोह अगर  इतिहास पुरुष ना ही बने , तब ही इस देश और  समाज का भला होगा ….

 

                       उसमे एक और कट्टर मुसलमानों वाली खासियत है कि जब तक उस का तशरीफ़ का टोकरा गर्म तवे पर रहेगा तब तक तो वोह आपकी हर बात  मानेगा …हर तरह के इकरार करेगा , लेकिन मज़बूरी के दूर होते ही वोह गिरगिट अपने असली रंग में फिर से आ जाता है ….. अगर मेरा बस चले तो मैं उसको गोली मारकर खुद फांसी पर चढ़ जाऊँ , देश का कुछ तो भला होगा  …..

                        लेकिन सवाल तो यह है कि क्या यही इसका असली हल है ? ….मैं तो अपने एक भाई को मार कर खुद फांसी  पर चढ़ जाऊँगा , क्योंकि मेरे लिए मेरे वतन पहले है और बाकि के रिश्ते नाते बाद में ….उस जैसे अनगनित भाई जो कि हमारे इस समाज में हमारा ही एक हिस्सा बन कर रह रहे है … हमारी + हमारे समाज की + हमारी अर्थव्यवस्था की जड़े दिन रात अपने पूरे तन और मन से खोखली कर रहे है  ,  उनको उनके असली मुकाम तक कौन पहुंचायेगा ….

                    आज मैंने अपने इस समाज के जटिल ताने बाने को इस सच्ची कहानी के द्वारा समझाने कि कोशिश की  है …. और मुझको फिल्म दिवार के निर्माता की सोच पर रश्क होता है कि उसने हमारे सामने इतनी बड़ी हकीकत इतने रोचक ढंग से रक्खी …. सच में यह हमारे समाज में ऐसी दीवारे है कि जिनकी गहराई पाताल तक है और इनकी ऊँचाई सातवें आसमान से भी ऊँची है ….

                  आज मैं इस देश और समाज के सभी सुधारको और विचारकों को यह खुला चैलेंज करता हूँ कि अगर आप में हिम्मत है तो हमारे इस समाज को बदल कर दिखाओं ….मेरा दावा है कि यह नहीं बदल सकेगा अगर खुद खुदा भी ज़मीन पर आ जाये ….            

                       फिल्म दिवार का बिन माँ का

                              अमिताभ बच्चन   

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

kaish tiwar के द्वारा
June 23, 2013

ARTICLE BADIYA HAI… RASTRAWAADEE VICHAR DHARA PAR MAINE BEBEAK WEBSITE BAnYEE HAI,,, JO BINDAAS LIKHA HAI, OWN WEBSITE,OWN VICHAR, OWN MONEY NOT INSPIRED BY ANY PARTY http://www.meradeshdoooba.com domin name booked about 2 yrs ago and started , since sept 2012

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
December 18, 2010

बस यही एक चिंता हरदम खाये जा रही है कि जब मेरा भाई मुझसे यह कहेगा कि “आज मेरे पास बंगला है + गाड़ी है + जिन्दगी जीने के लिए हर ऐशोआराम का सामान है” ….तब मैं उसके जवाब में क्या कहूँगा ? ….क्योंकि तब मैं तो यह भी नहीं कह सकूंगा की “मेरे भाई मेरे पास माँ है” , क्योंकि मेरी माँ भी तो अब उसी के साथ ही रहती है …  एक ओर दीवार फिल्म से मिलती जुलती पर उससे अधिक हिट फिल्म की पटकथा के लिए बधाई…………

    rajkamal के द्वारा
    December 18, 2010

    प्रिय पियूष भाई …नमस्कार ! आज तों ऐसा लगता है कि आप अपनी इस मंच पर कि गैर मोजूदगी का हिसाब बराबर करने पर तुले हुए है …. मुझ नाचीज के लेखो को पढ़ने + अपना कीमती समय देने के लिए और अमनी बहुमूल्य राय और प्यार बरसाने के लिए आपका हार्दिक आभारी हूँ ….बल्कि यूँ कहे कि मेरे पास शब्द नही है …

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    December 18, 2010

    राजकमल भाई……… आप जैसे कुछ चुनिन्दा लेखकों के लेख मिस करने का रिस्क मैं ले नहीं सकता………. तो आप लोगों के सारे लेख पढ़ लिए………. कुछ मे प्रतिकृया नहीं भी दे पाया हूँ………. आपके के लेखन कौशल ओर स्नेह का ही परिणाम है की बार बार हम आते हैं आपकी चौखट पर ……….

    rajkamal के द्वारा
    December 19, 2010

    प्रिय पियूष भाई ….नमस्कार यह तों आपकी जरानवाजी है ….वर्ना आप और मैं किस गिनती में है …. जब यहाँ पर बड़ी मछलियां नहीं होती तब हम भी यहाँ के सिरमौर होते है … उस खास समय पर आपका दिया गया स्नेह और समर्थन था कि जिसने मुझे जागरण कि ईसाईयों से आजादी के समय लड़ने के काबिल बनाया …. हमारे इस प्रयास का मजाक भी उड़ाया गया था  यह भी आपको याद ही होगा … लेकिन वोह आप अकेले का कन्धे से कंधा मिलाकर दिया गया साथ था जिसने मुझको अडिग रखा … आज हमारे लेख मुख्य पेज पर आराम और चैन से कुछ घन्टे बिता सकते है …. अभी भी एक नासमझ ब्लोगर अजय कुमार मोहाली वाले नाम के है …उनको समझाया तों  था, पर कुछ असर नहीं दिख रहा उन पर …. और आपका यह स्नेह आगे भी बना रहे … आपका आभार आपके इसी स्नेह ने ना केवल मुझको बल्कि बाकी के ब्लोगरो को भी आपका दीवाना बना रखा है

kmmishra के द्वारा
December 15, 2010

हुम्म । देश कठिन दौर से गुजर रहा है और यह बिन मॉं का अमिताभ भी । आभार ।

    rajkamal के द्वारा
    December 15, 2010

    आदरणीय श्री मिश्रा जी …अभिवादन ! अगली बार जब मेरा भाई मुझको मिलेगा तो मैं उसको बता दूँगा की मेरे पास इस मंच द्वारा प्रदान किये हुए दोस्त है जो की मेरे लिए अमूल्य सम्पदा है …. और आप से एक बात की क्षमा मांगता हूँ कि मैने खुद के मरने पर एक वयंग्य लिखा था नीचे श्रदांजली अर्पितकर्ता के रूप में आपका नाम दिया था …. उसका दूसरा भाग भी उचित अवसे देख कर पोस्ट करूँगा …. उम्मीद करता हूँ कि आप का सहयोग मिलता रहेगा पहले ही कि तरह …. आपका आभारी

आर.एन. शाही के द्वारा
December 14, 2010

कुछ पल्ले ही नहीं पड़ा, तो लिखूं क्या?

    rajkamal के द्वारा
    December 14, 2010

    आदरणीय शाही जी …. सादर प्रणाम ! यह मेरी नेरे एक दोस्त की मरने के बाद छपने वाली आत्मकथा का ही एक अहम हिस्सा है … उम्मीद करता हूँ की शायद अब तो आप समझ ही जायेंगे …. धन्यवाद

    rajkamal के द्वारा
    December 14, 2010

    आदरणीय शाही जी …. सादर प्रणाम ! यह मेरे एक दोस्त की मरने के बाद छापने वाली आत्मकथा का ही एक अहम हिस्सा है … उम्मीद करता हूँ की शायद अब तो आप समझ ही जायेंगे …. धन्यवाद

chaatak के द्वारा
December 12, 2010

प्रिय राजकमल जी, आपके व्यंग तो दिन ब दिन तीखे और असरदार हो रहे हैं| जिस शैली का प्रयोग आप इस समय कर रहे हैं वह स्तब्ध कर देने वाली है आप स्वयं को इतनी कुशलता से प्रस्तुत करते हैं कि व्यंग में बार बार ‘मैं’ शब्द के प्रयोग के बाद भी ‘मैं’ उत्तम पुरुष में ही नज़र आता है| वैसे एक बात समझ में नहीं आई आपने मुसलमान शब्द का प्रयोग दो अर्थों में किया है जो कदाचित सही नहीं है| धर्म परिवर्तन करके किसी का मुसलमान बन जाना समझ में आता है लेकिन हर मुसलमान का पाकिस्तानी मानसिकता का होना समझ में नहीं आता| स्पष्ट शब्दों में कहूं तो मुझे कहीं ये बात कचोटती है| अच्छे व्यंग पर मुबारकबाद स्वीकार करें !

    rajkamal के द्वारा
    December 12, 2010

    प्रिय श्री चातक जी …नमस्कार ! आप के बताने पर ही मैंने अपने लिखे लेख को फिर से पूरा दुबारा पड़ा ….. आप का कहना सही है कि एक जगह तो सिर्फ कट्टर मुसलमानों को सम्बोधित किया गया है …लेकिन दूसरी जगह पर गलती से एक आम + शरीफ +धार्मिक +गरीब + ( वक्त+किस्मत ) और नेताओं तथा मुल्लायो कि राजनीती कि चक्की में पिसता हुआ साधारण मुसलमान भी लपेटे में आ गया है …इसके लिए मुझको गहरा खेद है ….और मैं क्षमाप्रार्थी हूँ …. आपकी निष्पक्ष समीक्षा वाकई तारीफ के काबिल है … आपको भो बधाईयाँ

Aakash Tiwaari के द्वारा
December 12, 2010

श्री राजकमल जी, आपकी दीवार को पढने के बाद ये साफ़ हो गया है की आप एक बहुत ही मंझे हुए और श्रेष्ठ रचनाकार है…आपके एक एक शब्द के अपने एक माइने होते है..बधाई.. आकाश तिवारी

    rajkamal के द्वारा
    December 12, 2010

    आकाश भाई …नमस्कार ! मुझको तो आप पर रश्क होता है कि आप इतनी कुशलतापूर्वक एक ही रंग को कैसे उतार कर हमारे सामने लेकर आते है बार -२ ….. बाकि आपके ब्लाग पर … धन्यवाद

nishamittal के द्वारा
December 11, 2010

देशभक्ति सबका एकसूत्री कार्यक्रम हो ऐसी मेरी मंगलकामना है.

    rajkamal के द्वारा
    December 11, 2010

    आदरणीय निशा जी …अभिवादन ! भगवान आपकी इच्छा और मंगलकामना को पूर्ण करे …. आपकी मंगलकामना सबकी मंगलकामना बन जाए , यही कामना और उस जगदीश्वर से प्रार्थना है … आपका आभार

atharvavedamanoj के द्वारा
December 11, 2010

प्रिय मित्र राजकमल जी…. मतान्तरण हमें हमारे ही देश का शत्रु बना देता है…यह बात निर्विवाद रूप से सत्य होनी चाहिए…लेकिन निर्विवाद को भी विवादित करने वाले इसको कहाँ से स्वीकार कर सकते हैं…आदरणीय नरेन्द्र कोहली जी ने रामलुभाया के माध्यम से अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय को लक्ष्य कर २००६ में एक बहुत ही सुन्दर व्यंग्य लिखा था…आप ने इसी की यादें ताजा करवा दी….आपको बधाई दूंगा तो लगेगा की यहाँ पर मुजरा हो रहा है…वैसे भी इस मंच पर अधिकांशतः मुजरा ही होता है…भाई आपने बहुत अच्छा लिखा आप वाह वाह… भाई आप ने बहुत अच्छा लिखा आप वाह वाह…कुछ ही लोग हैं जो साहस के साथ सत्य लिखने की चेष्टा करते है और सभी के आँखों की किरकिरी बन जाते है|आपकी लेखनी इसी तरह चलती रहे….जय भारत जय भारती

    rajkamal के द्वारा
    December 11, 2010

    प्रिय मनोज जी .. वन्देमातरम दरअसल मेरे कहने का मकसद इतना भर है की कुत्ते की पूंछ को हम तो क्या खुद खुदा भी सीधा नहीं कर सकता है …. ऐसे लोगो से बातचीत करना बिलकुल  निरर्थक है ….दुनिया की कोई भी शक्ति उनकी सोच को बदल नहीं सकती है …. धन्यवाद


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