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RAJ KAMAL – कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज

सोचो ज़रा हट के

185 Posts

5,501 comments

Rajkamal Sharma


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“पराये मुंह मियाँ मिटठू’ – बधाई” !!!

Posted On: 24 Jan, 2012  
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हास्य - व्यंग में

54 Comments

“सन्नी लियोन – बस नाम ही काफी है”

Posted On: 28 Nov, 2011  
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हास्य - व्यंग में

90 Comments

“महिला – पायलट” !!! ( राजकमल प्रोडक्शन )

Posted On: 21 Nov, 2011  
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हास्य - व्यंग में

80 Comments

“भ्राता राजकमल की शादी”

Posted On: 5 Nov, 2011  
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हास्य - व्यंग में

33 Comments

“खुदा का खत”

Posted On: 17 Oct, 2011  
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जनरल डब्बा में

82 Comments

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आदरणीय भ्राता श्री राजकमल जी अभिवादन जिन्न की शादी से लेकर अपने जन्मदिन की बर्बादी तक आपने हम ब्लोग्गरों का काफी मनोरंजन किया है किन्तु यह अनोखी खबर हम पुराने बदनाम प्रेमियों तक पंहुचा कर आपने बेहद बड़ी गलती कर दी :D जागरण पर आशिकी से प्रेरित कवितायेँ लिख-लिख कर हमारा मन बोर हो चूका था .... अब शायद हम इस स्कूल में बतौर शिक्षक अपनी गोटी सेट कर लें ..... फिर तो आप अपने चहेतों को और उस पुराणी नदी के रेतों को खोज-खोज कर थक जायेंगे और एक के बाद एक हर ब्लॉगर को एक नए रूप में हीं पायेंगे .....:) :) .... लाजयेंगे शर्मायेंगे और किसी से कुछ कह नहीं पाएंगे . अंततः हम आपको वसंत पंचमी की शुभकामना सन्देश सुनायेंगे जय हो माता विना वादिनी की ...... जय हो माँ भारती की !!!!

के द्वारा: baijnathpandey

प्रिय वाहिद भाई ...... सप्रेम नमस्कारम ! आपकी और बाकि सभी की बधाइयां केवल पढ़ी थी और खुश हो लिया था लेकिन चाह कर भी उनका जवाब नहीं दे पाया था ..... आज भी वही हालात है कमेन्ट लिखता हूँ लेकिन अगले दिन नजर नहीं आता है ...... बस लाइक करके सब्र कर लेता हूँ ..... आपकी पीढ़ी के गैप वाली बात ने मेरे परेशान चेहरे पर भी उस समय मुस्कराहट ला दी थी .... पता नहीं क्यों उन दिनों मन बहुत ही परेशान था लेकिन आप सभी के संदेशो ने और प्रयासों ने एक नई चेतना और आशा का संचार किया था इसलिए इस लिहाज से मैं आप सभी का बेहद शुक्रगुजार हूँ उन अनमोल हँसी +सकूं और शांति तथा आनंद के पल प्रदान करने के लिए ...... हार्दिक आभार सहित (आपका कोई ब्लॉग इन दिनों दिखाई नहीं आ रहा है ) हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय प्रवीण जी ...... सादर अभिवादन ! अपनी सीमाए मैं जानता हूँ और यह भी जानता हूँ की आप किसी का इंटरव्यू नहीं ले सकती ...... लेकिन जिस इमानदारी और बेबाकी से आप अपनी बात कहने का हौंसला रखती है वोह किसी दूसरे के बस की बात हो भी नहीं सकती ...... वोह कहते है ना की समझदार को तो सिर्फ इशारा ही काफी होता है और आपको तो कहा ही सिर्फ इसलिए था की आप सचिन भाई तक यह बात पहुंचा दे ...... अब इसे भगवान की मर्जी कहियेगा की उन तक मेरी सोच + इच्छा और आपकी प्रार्थना तथा कामना पहुँच ही गई ..... इस लिहाज से आप दोनों का ही हार्दिक शुक्रिया और आभार हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय सचिन भाई ..... सप्रेम नमस्कारम ! एक दिन संडे को आफिस में एक काल आई की अपनी गर्लफ्रेंड या बीवी को साथ लेकर हमारे आफिस में आइये आपका इनाम निकला है ..... पहले तो खुश हुआ लेकिन फिर गोविन्दा की तरह “कंट्रोल” किया और किसी शुभचिन्तक की सलाह ली तो खुलासा हुआ की वोह बीमे वाले है ....आदमी साथ ले जाई गई औरत के सामने कुछ बोल नहीं पाता इसलिए उनके जाल में आसानी से फंस जाया करता है ..... आप गौर करे की मैंने अपनी प्रतिकिर्या में यह लिखा है की “सिर्फ लड़कों के” इंटरव्यू नहीं लिए जाते ..... और मेरा इंटरव्यू आप बगैर किसी हसीना के साथ लेते तो बिलकुल भी अच्छे नहीं लगेंगे ..... आपको याद होगा की पंचकोटी महामणि में कितनी सारी लड़किया थी मेरे साथ ..... बस कभी भी जोड़ी के रूप में आमंत्रित कीजिये और ........ आप पर आरोप लगाने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता ..... बस कुछ हल्का फुल्का करने की कोशिश रहती है जिससे की सामने वाला भी कुछ मुझ धरती धकेल सिंह की बातो को हलके में ही ले ...... जब प्रवीण जी से यह बात कह रहा था तो मन में यही विचार थे की आप तक बात कैसे पहुंचेगी ..... इसीलिए दुबारा वाली प्रतिकिर्या में “जिहड़ा बोले ओही कुंडा खौले” वाली बात कही थी ..... मुझे खुशी है की आपके बारे में जो बात हुई वोह आप तक पहुँच गई ..... आपका कम्प्लीटली फ़ालतू (टोटली फालतू ) चैनल दिन दोगुणी और रात आठ गुणी तरक्की करता रहे इसी कामना के साथ

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय भ्रमर जी .... सादर प्रणाम ! आपकी सबसे विलक्षण प्रतिकिर्या मिली ट्रिपल इफेक्ट वाली ...... वैसे यह असल कविता प्रिय जवाहर लाल जी ने लिखी और उसमे हमारे संतोष भाई और अशोक जी ने कुछेक लाइने जोड़ दी थी ..... मैंने उसमे छेड़छाड़ की तो आपने उस छेड़छाड़ मे भी कुछ और छेड़छाड़ कर दी ..... आपका प्यार फेसबुक पर तो मिलता ही रहा है ..... http://jlsingh.jagranjunction.com/2011/12/21/%e0%a4%ac%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%88/ आप ने जिन्नी से भी शादी नहीं होने दी और अब आदमजात से भी शादी (अनेको शादियों ) में अड़ंगा डाल रहे है – यह वैसे तो अच्छी बात नहीं है लेकिन आपकी सदभावना और शुभचिंतक वाली सोच के कारण आपकी बात तो माननी ही पड़ेगी हा हा हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: newrajkamal

गुजर रहे इस जीवन पर स्म्रतियों का है चन्दन ( फैन बने हैं कितने इनके कितने करते वंदन ) नित नई शादिया करने के लिए जवाँ रहें खुशहाल रहे, (पल पल गबरू जवान बनें ) होती शादियाँ आप के दुश्मनों की हर साल रहे,( आप तो एक को ही प्यार दो दो लो लो ) जन्मदिन तुम्हे मुबारक राजकमल, ( मेरी और से सब और से छोरे और छोरियों से ) मिलती बधाईयाँ तुमको हर साल रहे. ( साथ साथ किसी लिफ़ाफ़े में मेरा भी नाम रहे ) अजब सी बोली है रहस्यमय सी शैली है, ( व्यंग्य का तीर है दिल मगर वीर है ) प्रतिक्रियाओं का हरदम , मिलता तुम्हे उपहार रहे,( घर में जगह न हो इतना भरा भण्डार रहे ) जब भी इस मरदूद की याद आती है ,. चेहरे पे हँसी आ जाती है ( कभी अकेले कभी जुड़वाँ बन जाता है -अबोध बालक ये फिर भी अजब गजब धमाल कर जाता है - ) प्रिय राज भाई देर से पहुंचे हम नहीं तो मेरा नाम भी ऊपर इतिहास में तो लिखा ही जाता ..तो दुनिया कहती हैप्पी बर्थ डे टू यू.... जय श्री राधे ... भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5

आदरणीय परवीन जी ...... सादर अभिवादन ! आपका कहना उचित है लेकिन मैं उनदिनो इस मंच पर नहीं था और इसलिए ब्लागरों (साथियों) द्वारा मेरा जन्मदिन कविता लिख कर मनाने से अनजान था .... उन सभी से क्षमायाचना मांगने + उनका आभार प्रकट करने + उनके प्रयास को आप सभी के सामने ले आने तथा उन खास पलो को (इस मंच वाले ) जीने और महसूस करने के लिए उसी कविता को अपने ब्लॉग में थोड़ी सी तबदीली के साथ दुबारा पोस्ट कर दिया है ..... इसलिए इसमें बात अच्छा लगने की नहीं बल्कि हाथ से रेट के समान फिसल गए अवसर रूपी समय को फिर से संजोने तथा अपना आभार प्रकट करने की है ..... अगर कोई आपके लिए कुछ अलग हटके प्यार और स्नेह से करता है तो यह आपका भी तो फ़र्ज़ बन जाता है की आप भी उसके बदले में कुछ अलग हटके ऐसा करे की उसको यह ना लगे की उसका उस समय किया गया प्रयास आपके उस समय मंच से गैर हाजिर होने के कार्न व्यर्थ गया तथा उसकी सारी मेहनत पानी में बह गई ..... उम्मीद है की आप मेरी मजबूरी तथा मेरे मनोभावों को समझेंगी ...... आपकी शुभकामनाओं के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया (jo aapka pasandida channel hai woh mera bhi hai clekin wahan par sirf ladko ke interview nahi pesh kiye jaate - ha ha ha ha ha ha ha ha ) http://jlsingh.jagranjunction.com/2011/12/21/%e0%a4%ac%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%88/

के द्वारा: newrajkamal

आदरणीय जवाहर लाल जी ...... सादर अभिवादन ! आपका शुक्रिया अदा करने के लिए मेरे पास शब्दों की बेहद कमी हो गई है ..... कम ब्याज की दर पर लोन के शब्दों द्वारा कुछ कहना चाहता हूँ ...... वापसी पर जब आपके ब्लॉग पर आपके द्वारा मुझ को संबोधित करते हुए कविता लिख कर पोस्ट करने के बारे में पता चला तो उस समय इतनी ज्यादा देर हो चुकी थी की मैं चाह कर भी ब्लागरों का शुक्रिया अदा नहीं कर सकता था क्योंकि तब किसी को भी आपके प्रयास तथा आपके ब्लॉग पर मेरे आभार के बारे में पता नहीं चल पाता ..... मैं आपसे भी क्षमा चाहता हूँ की आपकी कविता के भावो से छेड़छाड़ करने की जुर्रत की .... उम्मीद करता हूँ की आपने इसका बुरा नहीं माना होगा क्योंकि आप सह्रदय है ..... आज मुझको हमारे मोहल्ले की एक लड़की किट्टी की बहिन बिट्टी की याद आ रही है जोकि अपना जन्मदिन साल में दो बार अपने मां बाप की हाजिरी में पूरी शानोशोकत से मनाती थी..... आज मैं भी उसकी कैटिगिरी में शामिल हो गया हूँ ..... हा हा हा हा हा हा हा हा दिल की सभी गहराइयों युक्त आभार सहित आपका राजकमल शर्मा

के द्वारा: newrajkamal

आदरणीय सिन्सेरा जी ...... सादर अभिवादन ! उन दिनों इस मंच पर से गैरहाजिर रहने के कारण मैं खुद पर प्रिय जवाहर भाई द्वारा लिखी हुई कविता से अनजान रहा ..... लेकिन इस मंच पर दुबारा आने पर जब इस कविता की बाबत पता चला तो अगर मैं उनके प्रति और संतोष जी तथा अशोक रक्ताले जी के प्रति अपना आभार ना प्रकट करता तो मेरी आत्मा पर एक बोझ चढ़ा रहता ..... अपनी तस्वीर मैंने पिछले दिनों ही बदली है ..... मेरी अपनी तस्वीर छह महीने से ज्यादा समय तक मेरे ब्लॉग पर टंगी रही है ..... आप खुद जब इतनी समझदार है तो सोच कर बताइयेगा की अपनी खुद की तारीफ करना क्या उचित कहलायेगा भले ही उसको दूसरों ने प्यार और स्नेह से ही क्यों ना किया हो ..... नीचे जो लिंक दिया है उस पर असल कविता को आप पढ़ सकती है ..... उसमे कमाल शब्द का प्रयोग हुआ है जिसको की मैंने अपनी तरफ से बदल कर “कमला” –मतलब - पगला + दीवाना + मूर्ख कर दिया है ...... बस इतनी सी बात है ... आप की ढ़ेरो शुभकामनाओं के जवाब में ना चुकाए जाने वाले कर्ज सहित अनगनित आभार http://jlsingh.jagranjunction.com/2011/12/21/%e0%a4%ac%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%88/

के द्वारा: newrajkamal

आदरणीय डाक्टर साहिब ...... सादर अभिवादन ! प्रिय जवाहर भाई जी की कविता रूपी असीम स्नेह से भरी हुई रचना पर आपका भी काव्यात्मक स्नेह मिला है प्रिय संतोष भाई जी के साथ .... लेकिन मैं क्षमा प्रार्थी हूँ की आपकी लाइनों को उलटपुलटा कर दिया है उम्मीद करता हूँ की आप बुरा ना मानते हुए इनका आनंद लेने की कोशिश करेंगे और मुझ नासमझ और अबोध बालक को इस गुस्ताखी के लिए क्षमा करेंगे ...... भाई साहिब मेरे जीवन का एक साल बढ़ गया है और उससे भी बढ़कर खुशी की बात मेरे लिए यह है की आपका स्नेह दुसरी बार बरसा है और इस ब्लॉग पर भी दो – दो बार बरसा है .... आपकी शुभकामनाओ के लिए हार्दिक स्नेह सहित ट्रिपल आभार http://jlsingh.jagranjunction.com/2011/12/21/%e0%a4%ac%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%88/

के द्वारा: newrajkamal

प्रिय आनंद प्रवीण भाई जान जी ...... सप्रेम नमस्कारम आपकी मुश्किल को आसान करने के लिए अपने पुराने तरीके से कमेन्ट लिखा करूँगा सच में ही आपकी तरह से मुझको भी अपने कमेन्ट पढ़ने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है आपका अपने प्रति यह स्नेह देख कर अभिभूत हूँ और मन गार्डन -२ गार्डन हुई गवा है ...... आपको हुई असुविधा के लिए क्षमा चाहता हूँ ...... आप भी मेरे एक साथी है- बल्कि हम सभी एक दूसरे के यहाँ पर साथी है .... जब हम एक ही मंच पर है तो यह मुलाकात कभी ना कभी तो होनी ही थी सभी साथियों के प्यार और उत्साह ने मुझको आप सभी के बीच सर उठा कर खड़ा होने के काबिल बनाए रखा है ..... और अब तो आप का भी सहारा इस टीम इण्डिया को मिल गया है इसलिए अब दिल्ली दूर नहीं मेरे भाई ! पंजाब में एक गाना बड़ा ही मशहूर हुआ था जहाँ पर चाहे कानो की बालिया सुनियार से बनवा लेना –मित्रों का है नाम चलता ..... अब अब आप कह रहे हो की जहाँ पर चाहे किसी भी हलवाई से मिठाई खा लूँ और पैसे ....... देखना भाई साहिब कहीं वोह यह ना कह दे की पहले तो सिर्फ लड़किया ही आती थी आनंद प्रवीण जी का नाम लेकर मिठाईयां खाने – और अब तो लड़के भी आने लग गए है ...... भाई साहिब अप पहले लड़कियों वाला बिल चुकता कर दीजियेगा उसके बाद ही आपके नाम पर कुछ खाने के बारे में सोचूंगा – हा हा हा हा हा हा हा हा हा कल संडे को आपके नाम पर मेरा मन पसन्द गर्मागर्म गुलाब जामुन का एक जोड़ा अपनी जान से जाएगा उसका पाप /पुन्य आपके खाते में जाएगा ...... आपकी शुभकामनाओ के लिए दिल की पहली गहराई से लेकर आखिरी गहराई तक धन्यवाद http://jlsingh.jagranjunction.com/2011/12/21/%e0%a4%ac%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%88/

के द्वारा: newrajkamal

प्रिय संतोष भाई ...... सप्रेम नमस्कारम ! मैं मानता हूँ और इस रचना के आखिर में भी माना है की मैंने आप सभी के दिली भावों से छेड़छाड़ की है ..... इसी रचना को श्रधान्जली के नाम से पोस्ट किया था लेकिन जब तकनीकी समस्या पैदा हो गई तो यही मानना पड़ा की शायद उपर वाले की ऐसी मर्जी ही नहीं है इसलिए इसको फिर से बधाई के शीर्षक से ही छापना पड़ा लेकिन भाईसहिब मैं अपने मुंह से अपनी तारीफ लिखता अच्छा लगता हूँ फिर भले ही वोह शब्द किसी प्राण प्रिय प्रेमी के ही क्यों ना हो ..... इसलिए नैतिकता के तकाजे तथा असहज सिथति से बचने के लिए तथा अपना भी कुछ योगदान आप सभी के सम्मिलित प्रयासों के साथ जोड़ने के लिए इस हिमाकत कको करना पद गया मजबूरी में .... उम्मीद करता हूँ की आप अवमानना का अपना नोटिस सहर्ष वापिस ले लेंगे .... आपकी डबल बधाई और काव्यमय प्रतिकिर्या के लिए हार्दिक आभार आपकी लाइनों में छेड़छाड़ के लिए क्षमायाचना सहित हा हा हा हा हा हा हा हा http://jlsingh.jagranjunction.com/2011/12/21/%e0%a4%ac%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%88/

के द्वारा: newrajkamal

आदरणीय प्रवीण जी ..... सादर अभिवादन ! बात जिन्दगी की रवानगी की है एक परेशान आदमी किसी दूसरे को क्या हंसा पायेगा ? मैं सहज रूप में आप सभी के सामने आप सभी की सेवा में हाजिर हूँ ..... शांत मन से ही खुल कर स्वाभाविक तौर पर अपनी बात कही जा सकती है ..... आपकी बातो ने उत्साह और संबल प्रदान किया है ..... आजकल खुद पर अविश्वाश हावी हुआ पड़ा है ...... अगर आप सभी भाई बहनों की दुआए इसी प्रकार से साथ में रही तो इस मंच पर आना (जाना ) लगा ही रहेगा ...... हा हा हा हा हा हा हा हा मैंने इस खबर को एक हफ्ता पहले अखबार में पढ़ा था और नेट पर खोजा तो नवभारतटाइम्स ने दिसंबर की घटना बतलाया ...... खैर मेरा अज्ञातवास दूर करने में इसने बहुत सहायता दी ..... आप सभी का हार्दिक आभार

के द्वारा: rajkamal

राजकमल जी नमस्कार, काफी लम्बे समय बाद आपने लिखा हम सोच ही रहे थे की कुछ नया पढने को मिलेगा क्यूंकि इतने दिन कोई रेस्ट कैसे कर सकता है . और हमारा इन्तजार ख़तम हुआ आपकी नयी पोस्ट के साथ . इस आर्टिकल को मैंने भी पढ़ा था याहू पर और तभी मैंने सोचा था की ऐसे स्कूलों की क्या सच में जरुरत है . इस पर लिखने का मन भी किया पर साहस ही नहीं हुआ लिखने का . चलो कोई बात नहीं आपने हमारी इच्छा पूरी कर दी वो भी तर्क वितर्क के साथ . बहुत ख़ुशी हुई आपका लेख पढ़कर और रेस्ट्वास से आपको वापस देखकर !!! हा हा हा हा !!!! बिलकुल सही कहा आपने अगर स्कूल खोलना ही था तो ऐसा खोलते जहाँ पर सिखाया जाता की मानव को इस समाज में शांतिप्रिय तरीके से + प्रेमपूर्वक + आपसी सदभाव से रहते हुए जन्मजात और समाजिक रिश्ते निभाने तथा सबसे बढ़कर उनका मान सन्मान करना सिखाना चाहिए जिसको की वोह आगे बढ़ने की चाह में दिनोदिन भूलता जा रहा है ….. बहुत खूब !! हमेशा की तरह kabile tareef !!!!!

के द्वारा: mparveen

आदरणीय शाही जी (पूज्यनीय गुरुदेव - मेरे नोनिहालो के दादा गुरु जी ) ...... सादर प्रणाम यह बात तो "करिश्मा कुदरत का" लेख में ही साफ़ हो गई थी की वोह दूसरे वाला अपनी माँ के प्रेमी का बेटा है इसलिए वोह ख़ाक अपनी सही जगह पर विराजमान हो चुकी है ..... हाँ फेसबुक पर इसके सौतेले मगर जुड़वाँ भाई को साथ में जरूर रखा है क्योंकि कोर्ट ने इनको फेसबुक पर ही मिलने की इजाजत दी है और वैसे भी ना तो जंक्शन पर डेशबोर्ड में इतनी जगह है और ना ही मुझ कलयुगी बाप के दिल में ..... आपकी अनुपस्थिति में बहुत से ब्लागरो से ऐसे संबंध बन गए है की उनका ध्यान रखते हुए लिखते समय कलम को कुछ मोड़ कर कोणीय लिखना पड़ता है ..... मेरे लिए भी यह किसी हद तक अच्चा ही है नहीं तो सारे जहाँ का नम्बर वन गुंडा मवाली टपोरी लुच्चा लफंगा सिर्फ और सिर्फ मैं ही समझा जाता था और इसका खामिआजा भी भुगतना पड़ता था आप तो मुझ भुक्तभोगी की असहनीय पीड़ा के एकमात्र चश्मदीद और हमदर्द तथा मेहरबान गवाह रहे है इसलिए मैं उम्मीद करता हूँ की सारे हालात के मद्देनजर आप इन तब्दीलियो को मजे से हजम (अनदेखा ) कर जायेंगे .... आखिरकार आप गाडफादर बड़े दिल वाले जो ठहरे इसी तरह स्नेह से सरोबार होते रहने की आशा में दिल की सभी गहराईयों से आधा आभार (पूरा आभार आपके किसी नए लेख पर )

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय भ्रमर जी ...... सादर प्रणाम ! कई लोग तो होते है जोकि अपना और दुनिया का अंत नजदीक देख कर गुनाहों से तौबा कर लेते है लेकिन कुछेक मेरे जैसे बेशर्म लोग अंत से पहले कुछ भी कर गुजरने की हद पार करने चले जाते है ऐसे ही वाहियात लोगो के लिए यह स्कुल खोला गया होगा शायद दुनिया भूख से मरती रहे इनकी बला से लेकिन यह जनाब तो खा पि कर ही मरेंगे मेरे दोस्त के माता पिता थे वोह कहते थी की औलाद की तो सारी उम्र है खाने पिने की हमे औलाद की बजाय अपना खुद का ध्यान रखना चाहिए वैसे भी क्या पता कल को औलाद पूछेगी भी की नहीं इसलिए अपनी औलाद के सामने ही बढ़िया खाने वाली चीजे अकेले खुद ही खाते थे ...... इस दुनिया में तरह तरह के नमूने है कोई क्या कर जाए कुछ कहा नहीं जा सकता आपकी मजेदार प्रतिकिर्या के लिए आभार सहित जय श्री राधा कृष्ण

के द्वारा: Rajkamal Sharma

उन्होंने बताया है कि यह दुनिया का पहला व्यवहारिक सेक्स स्कूल है , जहां सब कुछ “प्रैक्टिकल” होगा …… इस स्कूल के पाठ्यक्रम में ...जय श्री राधे बहुत अच्छा रहा ..प्यार लो लो प्यार दो दो .....भगवन ही बचाए दुनिया को वैसे भी २०१२ प्रलय के नाम से प्रख्यात है .....जिस काम को जानवर तक भी करना जानते है उसको करना सिखाने की आखिरकार क्या तुक है...बहुत गजब की बात कही लेकिन आदमी अब जानवर से हर जगह पिछड़ रहा है न इस लिए .... अब जबकि एड्स जैसी बिमारी किसी हद तक कंट्रोल में होती दिख रही है तो ऐसे में कुदरत के कानून के अनुसार एक नई लाइलाज बिमारी हमारे समाजिक जीवन में प्रवेश करने के लिए तैयार .. अभी ऊपर का टिकट कटते कटते न जाने क्या क्या दिन देखने पड़ेंगे जनाब ..आप तो अध्यापन अब मत बनना भाई जी जय श्री राधे भ्रमर ५

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

भाई साहब, आपने आने वाले दिनों में उस इंस्टीच्यूट की फ़ीस के पैसे बचाने के लिये अभी से अपने एक बच्चे से किनारा कर लिया, यह देखकर बड़ा दुख हुआ । शायद आपको बजरंग बली की तरह अपनी ताक़त की याद दिलानी होगी, कि वह स्कूल जिसमें विदेशी अभी प्यार और सेक्स का प्रशिक्षण देने जा रहे हैं, भारतखंड में उससे बड़ी पाठशाला के आप पहले से ही लाइफ़टाइम स्वयम्भू प्रिंसिपल बने हुए हैं । आपके साथ शिक्षार्थियों ने दर्जनाधिक स्थानों की ट्रेन यात्राएं करते हुए रास्ते की अंधेरी सुरंगों सहित अनेक हिल स्टेशनों तक आपकी प्रैक्टिकल क्लासेज का साक्षात्कार किया है, और विद्यार्जन से लाभान्वित हुए हैं । ये आपको क्या हो गया है भाई साहब, आप ऐसे तो न थे !

के द्वारा: आर.एन. शाही

हालाँकि राजकमल भाई को पढना किसी के लिए भी एक अच्छी दावत हो सकती और उनकी अपनी तरह की विधा का कोई भी प्रशंशक हो सकता है पर जिस वरिष्ठ को केंद्र रखकर राज्कमलिया अंदाज़ में लिखा गया है उनका कोई कमेन्ट नहीं आया जबकि वे उन ब्लोगर में से जो मेरे जैसे अनजान लेखकों को भी कमेन्ट करती हैं जो वस्तुतय ज्यादा कुछ पढने लायक नहीं होता | में कुछ निर्णय नहीं कर पा रहा यहाँ एक से एक विद्वान और इस ब्लॉग पर पकड़ ही नहीं अधिपत्य रखने वाले लोग है इसका क्या कारण है | यदि सब उन्हें भी आनंदित कर गया तो सब मिलकर ख़ुशी में शामिल या उन्हें पसंद नहीं आया तो किसी ब्लोगर को केंद्र करके कितना लिखा जाये यह सोचना होगा this is with malice towards none

के द्वारा: RaJ

के द्वारा: राजीव कुमार झा

आदरणीय श्री अशोक जी ..... सादर अभिवादन ! इसके अनूठे प्रेम से लबालब विषय ने ही तो मुझको भी तकरीबन चार साल पहले अपने मोहपाश में बाँधा था ..... इसके लेखक ने जिस प्रकार से इसकी सत्यता का दावा किया है ..... इस रचना में वर्णित स्थान + पात्रो के नाम + तथा सही -२ समय काल का वर्णन उसके दावे को पुख्ता करता है ..... आपकी सराहना के लिए आपका बहुत -२ आभार कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय डाक्टर साहिब ...... सादर प्रणाम ! आपने ठीक फरमाया है कि यह एक मनुष्य और जिन्न के बीच के असीम प्रेम कि गजब कहानी है ..... इसकी इसी गजबता ने तो मुझको मजबूर कर दिया कि आप सभी के साथ इसको सांझा करने के लिए .... आपके इस स्नेह के लिए आपका दिल कि सभी गहराईयों से शुक्रिया कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

प्रिय सचिन भाई ..... सप्रेम नमस्कारम ! इसको किताब में मैंने जिस प्रकार से पढ़ा और पाया बिलकुल उसी तरह से आप सभी के समक्ष पेश कर दिया ..... लेकिन अगर आपको यह प्रयास पसन्द आया है तो मैं इस शैली में लिखने का भी प्रयास करूँगा ..... आपकी उत्साहवर्धक और प्रेरणादायी प्रतिकिर्या के लिए आपका बहुत -२ आभार कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय भ्रमर जी ..... सादर प्रणाम ! काश आप गर्व से कह सकते कि “हाँ मैं जिन्नी का देवर हूँ” .... क्या अजब नजारा होता आप उसके हाथप से बना हुआ ठण्डा और गर्म पीते हुए मुझको अपनी आवभगत का मौका प्रदान करते ..... अपने -२ घर में बैठे हुए ही हम उसके माध्यम से एक दूसरे के दिल का हाल जाना करते ..... लेकिन अफ़सोस कि फिलहाल वक्त तक तो ऐसा संभव नहीं है .... शायद भविष्य में कभी –जब तलक सांस तब तलक आस ..... हा हा हा हा हा हा हा जय श्री राधे कृष्ण (होने वाली भाभी श्री के प्रणा कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था .... म सहित मेरा भी )

के द्वारा: rajkamal

प्रिय जवाहर लाल जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! एक जिन्नी के अद्भुत और समर्पित प्रेम कि पराकाष्ठा ही मन को मोह लेती है .... बेशक हमारे लिए यह रोंगटे खड़ी कर देने वाली हो लेकिन एक बार शादी हो जाने के बाद हर बार जिन्नी से मिलना खालिद के लिए तो कम से कम इस तरह के एहसासों से भ्रौर नहीं होगा ..... इस मंच पर अपने मन पसन्द विषय पर मैंने पहले भी कुछेक कहानिया रखी है ...... उनके लिंक ढूंड कर आपकी सेवा में रखूँगा ..... आपका दिली शुक्रिया कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय अमिता जी ..... सादर अभिवादन ! यह बेहद अच्छी कहानी है इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती है ..... यह तो भला हो कि जिस किताब में मैंने पढ़ा था वोह चार साल बीत जाने के बावजूद मेरे पास महफूज रखी हुई है ..... इसी कारण इतनी बारीकी से हरेक एह्सास को परदे पर उकेरा जा सकने में सफलता हांसिल हो सकी ..... बाकि आप सभी स्नेही भाई बहनी का अनमोल साथ और स्नेह अपनी जगह पर तो है ही ..... दिल से आभार सहित कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय साधना बहिन जी .....सादर अभिवादन ! ना तो यह कहानी काल्पनिक है और ना ही मैं इसका लेखक हूँ , इसकी बजाय मैं तो सिर्फ प्रस्तुतकर्ता हूँ ..... इस रचना ने आपको इतना आनंद प्रदान किया जान कर मैं भी भाव विभोर हो गया हूँ ..... हार्दिक आभार सहित कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

टिम्सी जी ..... नमस्कारम ! कहानी का जो भी परिणाम आपने सोचा था वोह नहीं बताया यह तो ज्यादती है – अगर नहीं बताना तो एक नयी कहानी कि रचना तो आप कर ही सकती है .... आपको भी इस कहानी ने रोमांचित किया जान +सुन कर अति प्रसन्नता हुई ..... शुभकामनाओं सहित आभार कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

प्रिय शशिभूषण जी ..... सादर अभिवादन ! प्रकर्ति के नियमों में देव दानव मनुष्य और गन्धर्व सभी बंधे हुए है लेकिन सभी में भावनाएं भी कूट -२ कर भरी होती है खास करके महिलायों में .... आपका तहेदिल से शुक्रिया कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

प्रिय अब्दुल रशीद भाईजान ...... सप्रेम आदाब ! आप से दोनों हाथ जोड़ कर यह गुजारिश है कि इनके बारे में जितनी भी आपको जानकारी है , आप हम सभी से जरूर सांझा कीजिये ..... हम सभी आपके बहुत बहुत शुक्रगुजार होंगे कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय भ्रमर जी ..... सादर प्रणाम ! आपको हमारे अबोध जी कि बाल लीला मन को भायी और आपको परम आनंद आया तो आपके साथ साथ हम भी इस बाललीला पर मंत्रमुग्ध हुए ..... श्री भगवान से यही प्रार्थना है कि इस मंच पर यह अपनी बाल क्रीड़ाए इसी प्रकार सम्पन्न करते हुए हमारे तन और मन को इसी तरह से आनंदित करते रहे ..... जय श्री राधे कृष्ण ! आप दोनों का तहे दिल से शुक्रिया कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

प्रिय जुबली कुमार जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! आपको मेरा यह प्रयास पसन्द आया जान कर मन को परम संतोष प्राप्त हुआ .... और आपकी बात का ध्यान रखूँगा कि आगे से बीच -२ में ऐसी कहानिया इस मंच पर आप सभी के साथ सांझा करता रहूँ ...... आपका हार्दिक शुक्रिया कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

प्रिय अबोध बालक जी ..... मायावी नमस्कारम ! भाईसाहब बात तो आपने लाख टके कि सोची है ..... अगर मेरे पास खुले होते तो आपके खाते में जरूर जमा करवा देता ..... हा हा हा हा हा ऐसे बच्चे ‘कैमरे में पूरे दिखाई देंगे’ तभी तो उनकी फिल्म बन सकेगी .... वोह तो प्रभुदेवा कि तरह हवा में हाथ + पैर और गर्दन तथा धड़ अलग -२ हिलाते हुए यही गाना गा सकेंगे :- “मुंह काला – मुकाबला होगा ओ मेरी लैला” आपकी इस अति मजेदार और मनोरंजक कल्पनाशीलता को सलाम ! गदगद मन से आपका आभारी हूँ कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय वकील साहिब ..... सादर अभिवादन ! इस कहानी को पढ़ने के बाद जो असर आप पर हुआ मैं महसूस कर रहा हूँ उससे कहीं कई लाख गुणा मुझ पर हुआ था +है और हमेशा ही रहेगा ..... जिन्नी के असाधाराण प्रेम ने ही उसको आम +औसत मनुष्यों से अलग थलग करते हुए उन सभी से कहीं उपर के दर्जे में पहुंचा दिया है ..... आपकी सराहना के लिए तहेदिल से आभार कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था .... ********************************************************

के द्वारा: rajkamal

प्रिय भरोदिया भाई ...... सप्रेम नमस्कारम ! आपने बिलकुल ठीक कहा ..... जिन्न जिस रूप में होते है उनकी खुबिया और खामिया भी उनके साथ साथ चलती है –यही है आपकी जिज्ञासा का उत्तर ..... आपका तहेदिल से शुक्रिया कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय मीनू जी ..... सादर अभिवादन ! आपकी यह प्रतिकिर्या आपका मेरे प्रति स्नेह दर्शाती है और यह बताती है कि आप भी मेरी शुभचिंतक है ..... आपका आभार प्रकट करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है ..... फिर भी आपका आत्मीय आभार कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

प्रिय संतोष भाई ...... सप्रेम नमस्कारम ! पोस्ट सिर्फ आपकी ही नहीं गायब हो रही बल्कि मेरे साथ भी भेदभाव किया जा रहा है ..... अभी -२ परसों ही शामिल मेरी रचना को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए आखिरी पायदान के करीब धकेल दिया गया है जबकि कई हफ्ते पहले प्रकाशित रचनाये उससे पहले लिस्ट में दिखाई दे रही है .....जब सन्नी लियीं वाली रचना के साथ भी यही बर्ताव हुआ था तब मैंने यह सोच कर सब्र कर लिया था कि शायद उस विवादित के उपर लिखे लेख को लिस्ट में से जल्दी निकालना चाहते है ..... लेकिन जिन्न कि शादी वाले लेख को आखिर में पहुंचा देना मेरी समझ से बाहर है ..... आपने इस जैसी या अलग हट करके कोई रचना पढ़ी है तो उसको हमारे सामने जरूर रखे ..... आपका भी हार्दिक आभार कुछेक बाते लेख के लम्बा हो जाने के कारण छोड़ दी थी :- उसने मुझे गाड़ी में बिठा लिया और हम दोबारा उसी बंगले में जाकर रुके जहाँ हम झूला झूला करते थे ..... “तुम तो फिर से उसी बंगले में आ गई हो ..... मैंने पूछा क्या अपने घर नहीं चलोगी ?” ..... “बात दरअसल यह है की मेरे मम्मी पापा का इंतकाल हो गया है और अब मैं इन्ही राबर्ट साहब के साथ रहती हूँ “.... उसने मुझको आश्वस्त कर दिया .... मैं काफी देर तक उससे बातें करता रहा और फिर वापिस लौट आया ..... चंद दिनों में वह मेरे होशो हवास पर कुछ इस कद्र से छा गई कि मैं दुनिया –जहान से बेगाना हो गया ..... मेरा वहां पर जाना हर रोज का नियम हो गया .... हम दरिया के किनारे पर तफरीह करते या घर में बैठकर बाते करते .... जब थक जाते तो एक -दूसरे को खामोशी से निहारा करते .... उन दिनों मेरे दिमाग में कभी यह पूछने का ख्याल तक नहीं आया कि जब वह घर में होती है तो बाकि लोग कहाँ पर चले जाते है ....कुछ सवाल मेरे दिमाग में कुलबुलाते भी थे मगर उसको अपने सामने पाकर मैं सब कुछ भूल जाता था ....

के द्वारा: rajkamal

“हम ऐनी है ऐनी” वह बोली “हम और तुम उस बंगले में झूला झूलता था” ..हाय रे हर जगह आप का हाल यही न हो ...वह मछली की तरह से तड़पकर बोली , “मैं तुम्हारी मुहब्बत में इतना आगे बढ़ चुकी हूँ कि अब मेरे पास वापसी की कोई भी राह नहीं रही”....उस दिन के बाद वोह मेरी शादी के मौके पर सुहागरात को मेरे पास आई , यानि कि जैसे ही मैंने अपनी बीवी का घूंघट उठाया तो यह देखकर हैरान रह गया कि ऐनी दुल्हन बनी बैठी है...अगर मधु भाभी को भनक तो ?.... लेकिन ये निम्न बात तो हमारे हजम ही नहीं हो रही ...... आखिरी बार वह मेरी बीवी के इंतकाल के बाद आई ….. अच्छा हुआ ये जिन्नी गयी नहीं तो कहीं हमें भी आप का दोस्त समझ ...वहीं आस पास ......ह हा ...सुन्दर /// जय श्री राधे भ्रमर ५

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

टिम्सी जी ...... नमस्कारम ! आपकी भी अगर इस तरह के लेखों में रूचि है तो मैं अपने पूर्व प्रकाशित लेखों के लिंक बता सकता हूँ जो कि इसी तरह के लेखों के है ...... अब आप एक काम करियेगा कि मेरे मेल एड्रेस पर अपना अनुमान लिख कर पोस्ट कर दीजियेगा .... लेकिन मैं उसको पढूंगा इस रचना के दूसरे भाग के प्रकाशित होने के बाद ही ..... और वैसे भी इस में किसी भी तरह के बदलाव का कोई चांस ही नहीं है क्योंकि यह सच्ची घटना पर आधारित है ...... लाखों +करोड़ो शुभकामनाओं सहित राजकमल भ्राताश्री – हा हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय भ्रमर जी ..... सादर प्रणाम ! आपको मेरी कितनी चिंता है जोकि अजीब सी भी है ..... एक तरफ तो आप मेरा उस जिन्नी से पीछा छुड़ाना चाहते है दूसरी तरफ आप ढ़ेरो शादियों के लिए ढ़ेरो आशीर्वाद भी प्रदान कर रहे है ..... हे मायापति +मायाधारी अजब ही है आपकी यह मायावी बाते और माया –हा हा हा हा यह बिलकुल एक सच्ची घटना पर आधारित ही है ..... अगर आप जालंधर में ही रहते है तो उस गांव के किसी बजुर्ग से इस बात कि तस्दीक भी कर सकते है .....वैसे इसका असली प्रमाण तो पाकिस्तान से ही मिल सकता है क्योंकि बाद वाली सारी कि सारी घटनाएं सक्खर में हुई थी ...... आपकी इस मजेदार प्रतिकिर्या के लिए आपका दिल कि सभी तहों से शुक्रिया जय श्री राधे कृष्ण :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-)

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय दिव्या बहिन जी ...... सादर अभिवादन !! नीचे कोमल बहिन ने भी आप जैसी ही बात कही है और सिर्फ आप दोनों बहनों ने ही कही है ..... मैंने इस कहानी को चार साल के करीब एक किताब में पढ़ा था ..... पढ़ने के बाद से आज तक यह मेरे होशो हवास पर काबिज है ..... अगर मैंने भी इसको आपकी तरह बचपन में पढ़ा या फिर सुना होता तो मैं तो जानबूझ कर ततैया को पत्थर मारा करता क्योंकि असल में ही मुझको इस कहानी के सच होने का यकीन है और खुद के साथ इसके दोहराव कि इच्छा भी .... सोमवार को जब इसके अगले भाग पर मुलाक़ात होगी तभी पता चल पायेगा कि वोह आपकी अपेक्षाओं पर कितना पूरा उतरेगा ..... आपकी इस स्नेहिल प्रतिकिर्या के लिए हार्दिक आभार :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-)

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय प्रवीन जी ...... सादर अभिवादन !! आपने बिलकुल ठीक पहचाना कि यह शत प्रतिशत एक सत्य घटना पर ही आधारित है और इसमें दिए गए पात्रो के नाम और जगह का उल्लेख भी अक्षरश बिलकुल सही ही है ..... अगर आपको इस तरह कि कहानिया पसन्द आती है तो मैं पूर्व में हमारे इसी मंच पोस्ट किये गए अपने सभी लेखों के लिंक आपके ब्लॉग पेज पर भेजने कि कोशिश करूँगा ..... रचना के प्रति अपना उत्साह दर्शा कर मेरा खून बढाने के लिए आपका बहुत -२ आभार (अगले भाग का समय सोमवार को तय है ही – इससे पहले इसको चाह कर भी पोस्ट नहीं कर सकता क्योंकि जो पहले शार्टकट में लिखा था उसकी जगह सिरे से दुबारा लिखना पड़ रहा है क्योंकि जो बाते जानबूझ कर छोड़ दी थी निरंतरता बिखर जाने के कारण उनको दुबारा शामिल करके दुबारा लिखना पड़ेगा –फिर भी कोशिश रहेगी पहले आप सभी के दरबार में हाजिर होने कि .....)

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय अबोध जी ...... सप्रेम नमस्कारम ! आपने मुझे अपना कहा है यह सुन कर मन बहुत ही गुदगुदात है ..... और इस तरह कि जितनी भी कहानिया आपने पढ़ी है उनमे मेरा कुछ न कुछ योगदान अवश्य था ...... लेकिन इसमें मात्र एक प्रतिशत ही अपना योगदान दे सका हूँ मैं ..... बाकी कि बाते आप नीचे मेरी कोमल बहिन कि प्रतिकिर्या के दिए गए जवाब में पढ़ सकते है ..... आप से स्नेहिल रिश्ता पुराना है बाकि मेरी कुछेक मजबूरिया है जब यह दूर हो जाएंगी तो मेरी तरफ से न केवल आपको बल्कि और किसी को भी किसी किस्म कि शिकायत नहीं रहेगी ...... वैसे मैंने आज तक आपको कभी धर्म संकट + किसी भी दूसरे संकट में नहीं डाला है और न ही चाहता हूँ ..... सदैव ही आपका शुभचिंतक और भला चाहने वाला आपका ही एक साथी दिली शुक्रिये सहित :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-)

के द्वारा: Rajkamal Sharma

रोमांचित कर देने वाली कहानी ..आप इतने पहले के हैं ...या ..जिन्न तो नहीं कह सकते ...अभी तक तो राज भ्राता की कितनी बारात-चुड़ैलों के जादू से बचना सच में बड़ा मुश्किल - भीड़ों से भीड़ के भी बच निकले ,,श्री मुख पर तो हंसा ही दिया बेचारे शरद इतिहास में ...खानदान का प्रमुख जिन्न + उसकी दो बेटियां और एक जवान बेटा मारे गए ..ह हां पाप तो किया बड़ा भारी .. जोर का काँटा लगा ...हाय रे .. “एक जिन्नी मेरे पीछे पड़ी हुई है , तावीज को उतारने पर वोह मुझको खत्म कर देगी” ,....हे भगवान् कुएं में जाते जाते भी अभी वो बची है और ...हमका इसक हुयी गवा वाले आप .. अब तो हम रातों को और नहीं सो पायेंगे आप की चिंता में ...........खुदा खैर करे ...वो जिन्नी दूर चली जाए हैरत तो हुयी जब जालंधर छावनी का नाम लिया वहीं पी यी पी चौक के पास एक पेड़ पर तो हम भी ..इतने दिन रहे-- सपने में भी आप नहीं दिखे .... जय श्री राधे भ्रमर ५

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

आदरणीय कोमल बहिन .....नमस्कारम ! शुक्र है कि किसी ने तो इस मंच पर इस कहानी के बारे में यह कहा कि इसको उसने पहले पढ़ा हुआ है ..... सच में ही बहुत ही अच्छा लग रहा है आपसे यह सुन कर कि आपको भी मेरी तरह से इस तरह कि कहानियों में गहरी रूचि है और आप इनकी बहुत ही चाव से पढ़ा करती है ..... आपके लिए मेरे पहले प्रकाशित कुछ लेखों के लिंक आपके ब्लॉग पर भेजूंगा शायद वोह भी आपको इसी तरह से पसन्द आये ..... मैंने इसको सिर्फ चार साल पहले ही एक किताब में पढ़ा था और तब से ही इसका नशा और असर मुझ पर हुआ पड़ा है ..... सोचा कि अगर इसने मुझको इतना प्रभावित किया तो दूसरे लोग किसी हद तक तो इससे प्रभावित होंगे ही होंगे ..... लेकिन इसमें एक मुख्य समस्या थी कि मैं जिस शैली में लिखता हूँ यह उससे बिलकुल अलग है .... और अगर मैंने इसको शार्टकट में लिखने कि कोशिश कि तो जो भाग छोड़ दिए उनकी जरूरत बाद में कन्तिन्युटी के लिए पड़ी ..... इसलिए इसको लिखने में दो बार मेहनत करनी पड़ी ..... आपके प्रोत्साहित करने वाले विचारों के लिए आपका तहेदिल से आभार (वैसे तो आपको इसका अन्त पता ही है – लेकिन फिर भी आपने इसका दूसरा भाग जल्द प्रकाशित करने कि बात कही है तो अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूँगा –तब ही पता चल पायेगा कि यह हमारी सांझी कहानी है या नहीं –या फिर कोई दूसरी ही कथा है सच्ची ) पुन: हार्दिक आभार सहित आपका भाई

के द्वारा: Rajkamal Sharma

(आदरणीय ) प्रिय शशिभूषण जी ...... सप्रेम नमस्कारम ! आप नाहक ही यहाँ वहां भटकते रहे ..... हमारे आदरणीय भ्रमर जी आखिर किस मर्ज की दवा है – वोह किस दिन और कब काम आएंगे ? पता नहीं आपने उनकी मदद को किस दिन के लिए बचा कर रख छोड़ा है ?..... इस मंच के शुरूआती दिनों के थोड़ी देर बाद ही मैं इससे जुड़ा था ..... लेकिन आजतक मेरे इलावा और किसी ने भी रहस्य रोमांच पर कोई भी लेख नहीं लिखा ..... मैं भी पांच –छह वही सच्चे लेख यहाँ पर लिख सका हूँ जोकि आम घटनाओं से कुछ अलग तथा हटकर थे .... लेकिन जागरण ने हमारी इसी कमी की वजह से रहस्य –रोमांच नाम की कोई कैटेगिरी ही नहीं बनाई है ..... मेरा बस चले तो मैं सिर्फ और सिर्फ इसी विषय पर लिखता रहू ..... लेकिन समस्या यह है की कुछ अलग तथा हटके कहानिया मिलती ही नहीं ..... हा हा हा हा हु हा हा ही ही ही हु हा हा हा हे हे हो हो हो आदर सहित आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

Priy विश्वनाथ जी ..... नमस्कारम ! मेरे पास आने वाले सभी ब्लागर खुद को सहज महसूस करते हुए अपनेपन के भावों से खुले मन से हंसी मजाक करते है –अपना जी किसी हद तक हल्का कर लेते है .... इसलिए मेरे ब्लॉग पर (सिर्फ ) हम एक दूसरे को इतना सीरिअसली नहीं लेते है ..... क्योंकि यहाँ पर जो कहा जाता है वोह असल में होता है नहीं ..... अगर आपको इनके असली विचार ही देखने है तो दूसरे किसी भी ब्लॉग पर +इनके खुद के ब्लागों भी पर इनकी जिम्मेदराना रचनाये तथा प्रतिकित्याये देख और पढ़ सकते है ... आभार सहित हा हा हा हा हा हा हा :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

माननीय भ्राता श्री राजकमल जी, नमस्कार एवं आदाब यद्यपि इस बात मे जरूर कोई हास्य छुपा होगा परंतु फिर भी आप अनुज से माफी मांगने की खता कैसे कर सकते हैं ? ...... और रही बात पाठकों की तो स्वयं आप भी हमारे लिए एहसान से कम नहीं | आपके आलेखों से हजारों लोंगो का मन हल्का हो जाता है फिर धन्यवाद के काबिल तो आप हुए | गुरु पूर्णिमा वाली बात बेशक मुझे अथवा किसी भी व्यक्ति को गलत नहीं लग सकती ...... चाहे संयोग से ही सही :D इस मंच पर अनेकों ऐसे लोग हैं जिनहे हम नहीं जानते + कुछ लोग ऐसे भी है जो मंच पर लिखते ही नहीं ...... किन्तु उन सब का योगदान हमारे सफलता मे होता है ......... आपने उन्हे धन्यवाद देकर अपने लेखक धर्म का निर्वाह किया है | आपके एवं JJ की ओर से मै भी उन्हे नमन करता हूँ ..... जिनकी वजह से हमे सदैव लिखते रहने की प्रेरणा एवं हौसला नसीब होता है |

के द्वारा: बैजनाथ पाण्डेय

प्रिय भरोदिया जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! वैसे कभी -२ थोड़ा हंस लेना अच्छा होता है –लेकिन अगर आप संजीदा ही रहना चाहते है तो हम तो अपने प्रयास में लगे ही रहेंगे –आपको हंसाने +गुदगुदाने की कोशिशे करते हुए ..... मेरी जानकारी में एक लड़का है ..... पहले वोह दोनों इकटठे खाते पीते +सोते रहते थे ..... लेकिन एक की म्रत्यु के बाद जब उसकी बेवा बीवी ने अपने मरहम पति की दोस्ती की याद दिलाकर कुछ मदद चाही तो उस कमीने और गिरे हुए लानत योग्य जानवर ने एक सौदे के तहत उस बेचारी की मदद की ..... यानि की मदद सिर्फ सशर्त –वरना नहीं ..... इसलिए असल दोस्ती आजकल बची ही कहाँ है ?..... औरत को सिर्फ और सिर्फ एक ही नजर से देखा जाता है खासकर अगर वोह बेसहारा +मजबूर तथा गरजमंद हो ..... वैसे आपको बतान चाहता हूँ की उसका एक ब्वायफ्रैंड है जोकि उसी से शादी भी करेगा ..... इसलिए और किसी को उस नर्क की आग में कूद कर अपनी इज्जत स्वाहा नहीं करनी पड़ेगी ..... आपका जायज गुस्सा देख कर बहुत ही अच्छा लगा ..... धन्यवाद सहित आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय पार्थ जी .....सस्नेह नमस्कारम ! जब भी मौसम बदलता है तो उह अपना रंग +असर दिखलाता ही है .... हफ्ते में एक बार crocin +chloroquinine + oraflox -200 का काम्बिनेशन दूध के साथ अगर ले लिया जाए तो फिर ऐसी संभावना नगण्य हो जाती है ..... सबसे पहले खुद की संभाल - बाद में बाकि सभी काम ..... आजकल की फिल्मो में हीरोइन बेचारी का रोल ही कितना होता है –और उसका असली काम क्या होता है ?..... इसलिए सुंदरता के साथ अगर टैलेंट भी हो तो फिर सफलता कदम चूमेगी ही ..... सिमटा पाटिल और शबाना आज़मी साधारण चेहरा मोहरा होते हुए भी अपने अभिनय के कारण हमारे दिलो पर राज करती है ..... जबकि सुंदरता और टेलेंट के बल पर भाषा के अल्पज्ञान के होते हुए भी कैटरिना सफलतम है ..... साथ में लेडी लक भी होना चाहिए .... आज के इस माहौल +समय में अच्छी पिक्चरें कहाँ आती है ..... जिनको की परिवार के साथ देखा जा सके + जिनके सभी गाने कर्णप्रिय तथा हिट हो ...... अगर ऐसी कोई स्क्रिप्ट और हीरोइन आपके पास हो तो मुझको एक मौका जरूर देना – हा हा हा हा हा हा खुश रहिये + आबाद रहिये +तंदरुस्त रहिये +खुशहाल रहिये + सुखी रहिये इसी कामना के साथ आभार सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय बाजपेयी जी आभार आप का ..भैया जी से आप ने आखिर वचन ले ही लिया ..भ्रमर खुश हुआ ..अब विश्वनाथ जी की तीर चले हैं ...जय श्री राधे इस मंहगाई की पतंग से भैया आप तो उड़ते जाओगे कभी शशि से कभी सूर्य से अग्नि से टकराओगे उस ऊँचाई बाग़ लगाना कलियाँ बहुत खिलाना खुशबू पराग ला ला के भरना शायर का काम पुराना तब ये भौंरा भी उड़ आये तुमसे फिर टकराए राज की बातें वहीँ करे हम रहेंगे कमल खिलाये गुरु वशिष्ठ से करे मंत्रणा इस जमीन पर आयें व्यंग्य बाण से भेदे कुछ को दर्पण खूब दिखाएँ आभार आप का --हमें पता है गुरुदेव --लेख सामग्री व्यंग्य हास्य ..हम आज तक किसी को हंसा ही नहीं पा रहे दर्द ही दर्द देख वही भरे जा रहे ..शायद नीचे जवाहर जी की प्रतिक्रिया में कुछ नीचे पढ़े हों ? भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5

आदरणीय बाजपेयी जी आभार आप का ..भैया जी से आप ने आखिर वचन ले ही लिया ..भ्रमर खुश हुआ ..अब विश्वनाथ जी की तीर चले हैं ...जय श्री राधे इस मंहगाई की पतंग से भैया आप तो उड़ते जाओगे कभी शशि से कभी सूर्य से अग्नि से टकराओगे उस ऊँचाई बाग़ लगाना कलियाँ बहुत खिलाना खुशबू पराग ला ला के भरना शायर का काम पुराना तब ये भौंरा भी उड़ आये तुमसे फिर टकराए राज की बातें वहीँ करे हम रहेंगे कमल खिलाये गुरु वशिष्ठ से करे मंत्रणा इस जमीन पर आयें व्यंग्य बाण से भेदे कुछ को दर्पण खूब दिखाएँ आभार आप का --हमें पता है गुरुदेव --लेख सामग्री व्यंग्य हास्य ..हम आज तक किसी को हंसा ही नहीं पा रहे दर्द ही दर्द देख वही भरे जा रहे ..शायद जवाहर जी की प्रतिक्रिया में कुछ पढ़े हों ? भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5

प्रिय भ्रोदिया जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! आपकी इस तरह की प्रतिकिर्या को मैं अपने लिए असीम प्रेम का प्रतीक मानू या फिर उस छिनाल के प्रति आपकी नफरत ?....... यहाँ पर हंसी मजाक में सभी अपनि -२ बात कहते हुए तनाव भरी जिन्दगी और किसी हद तक घुटन भरे इस मंच के लम्हों में से चंद पल हलके फुल्के चुराने में लगे है .... नहीं तो इसके समर्थन में आप कोई लेख लिख कर देख लीजिए ..... हमारे यही साथी लानते भेजने में एक पल का भी विलम्ब नहीं लगाएंगे – क्योंकि आपकी तरह वोह भी अपनी जिम्मेवारी को समझते है और संजीदा भी है ..... लेकिन यहाँ पर वोह भी जानते है की किस लहजे में किस तरीके से बात कही गई है इसलिए सभी चुटकियाँ ले रहे है ...... आपने अगर नीचे की सभी प्रतिकिर्याये पढ़ डाली है तो आपने ध्यान दिया होगा की उनमे से एक के जवाब में (उत्पल जी को ) मैंने इस सच्चाई को माना भी है .... उम्मीद है की आप भी इसको हलकेपन से लेते हुए इस हंसी की रेल में सवार होना पसन्द करेंगे ..... आपका तहेदिल से शुक्रिया :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

Vishvnath ji …… नमस्कार ! मैंने इस मंच पर अपना सफर शायरी की लाइन से शुरू करने के बाद हास्य वयंग्य वाली लाइन में काँटा बदल लिया था ..... धीरे -२ इस शैली में लिखता चला गया –जिसको की शुरू में थोड़ी झिझक दिखाते हुए ब्लागरो का धीरे -२ समर्थन मिलता चला गया ..... और जागरण जंक्शन के सम्पादक मण्डल के सम्माननीय सदस्यों को हालाँकि थोड़ी देर लगी लेकिन आखिरकार उन्होंने भी मुझको समझते हुए इस मंच पर सबके नजदीक जाने में अपना अहम योगदान दिया और अब भी दे रहे है .... इस लेख को मैंने हास्य वयंग्य की कैटेगिरी में ही रखा है .....इसका महिलाओं की किसी भी समस्या से कोई भी दूर का भी नाता नहीं है ..... क्योंकि इस लाइन में लाखों में कोई एक लड़की अधिकाँश मामलो में अपनी मर्जी से ही जाती है ..... क्योंकि वेश्यावृति के धन्धे रूपी नर्क में में एक वेश्या तो एक साधारण लड़की को भी बनाकर धकेला जा सकता है ..... लेकिन इस के फ़िल्मी व्यवसाय में फिल्मस्टार कोई भी लड़की नहीं बन सकती ..... और यहाँ पर जिस लड़की का जिक्र किया गया है –अगर आप नेट पर उसकी लाइफ हिस्ट्री देखेंगे तो पाएंगे की उसका एक पूरा परिवार है तथा एक ब्वाय फ्रैंड भी है ..... इस लाइन को उसने अपनी मर्जी से अपने लिए चुना है ..... दुनिया को दिखाने के लिए मर्जी हो या फिर असल में कोई मजबूरी – लेकिन सच तो शायद ही कभी सामने आया पायेगा ...... अच्छा लगा आपके सवालों को देख कर .... आगे भी आपकी कोई शंका या सवाल हो तो उसका खुलेदिल से स्वागत है ..... धन्यवाद सहित :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय अबोध जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! भगवान के घर में देर (नो महीने वाली ) तो है लेकिन अंधेर नहीं ..... उसके नियम हमारे बारे में भी बाकि सबके समान ही लागू होंगे ..... हाँ यह अलग बात है की आपसी प्यार में हम दोनों के लिए वोह नो महीने पलक झपकते ही बीत जायेंगे ..... लेकिन आप लोगों के लिए वोह समयावधि आपकी सोच के अनुसार अलग -२ रहेगी ...... यह जान कर बहुत ही अच्छा लगा की अब आगे से आप मेरी इच्छाओं का भी ध्यान रखेंगे .... ऐसी छिनालों से आपके गुरु ही निबट सकते है –आपको पतन से बचाने के लिए और आपके सुनहरी भविष्य तथा मान मर्यादा के लिए मुझको बिना जरूरत के भी यह प्रयास करने पड़े .... आपके लिए भ्रमर जी एक अनछुई कली को देख रहे है ..... मैंने भी उनके दरबार में अपनी एक दरख्वास्त लगाई है ..... वहां पर आपके लिए मैं त्याग कर सकता हूँ –तो हो गया न हिसाब बराबर –कर भला तो हो भला ! :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

ओह.. इतनी सारी बातें..! सबसे पहले, तो मुझे ये ही कहना है, की आपने ऐसा कैसे सोच लिया, की मुझे लगा की आप मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं.! एक हास्य-व्यंग्यकार के साथ बात करते हुए, इतना तो दिमाग का इस्तेमाल मुझे कर ही लेना चाहिए, की वो गंभीर कम, और मज़ाक की बात ज्यादा करेंगे..! बस, आपके लहजे से कदम मिलाने की कोशिश करते हुए, मैंने उन शुभ-कामनाओं को 'थोक' में मिली हुई कह दिया था. पर थोक में, और फ़ालतू में तो बहुत फर्क होता है! थोक माने ढेर सारी..! बिलकुल जैसे मैंने थोक में चोक्लेट्स थोक में मंगवाई हैं..! कृपया क्षमाप्रार्थी जैसे शब्दों का प्रयोग न करें..! दूसरी बात, 'ब्लागर आफ दा वीक' बनने की... यकीन कीजिये, मैं बिलकुल अयोग्य हूँ. केवल आप लेखकगण, जो यहाँ पाठक भी हैं, के अपार स्नेह की बदौलत ऐसा हो रहा है. वर्ना,उत्कृष्ट लेखन के इस मंच पर मेरी सचमुच कोई बिसात नहीं है. जब इतनी तारीफ मिलती है, तो उसे स्वीकार न करना कभी-कभी अभद्रता जैसा लगता है. इसलिए, धन्यवाद कहना पड़ता है. पर मुझे पता है, की मैं सचमुच इसके काबिल नहीं हूँ. आपकी योग्यता को आंकना तो मेरे लिए कभी संभव नहीं है. एक औपचारिकता-वश ही कहना होता है बस, की वाह...! वर्ना.. सूरज को दिया दिखाने से क्या हो जाता है भला..! अंत में, पुन:, नवसंवत्सर, एवं उससे पहले, और बाद में आने वाले सभी त्योहारों की हार्दिक बधाई स्वीकारें..!
टिम्सी जी ..... नमस्कार ! सच में ही मेरी शुभकामनाये आपके साथ ही है – वोह तो आपने कह दिया था की बहुत ज्यादा है इसलिए फ़ालतू वाली मजाक में वापिस मांग ली थी .... अगर आपको ऐसा लगा है की मेरी किसी बात का मकसद आपको जानबूझ कर शर्मिन्दा करना रहा है तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ .... क्योंकि मज़ाक की बात अलग है लेकिन किसी के भी मन को दुखी करना +ठेस पहुंचाना मेरा उद्देश्य कभी भी नहीं रहा और न ही रहेगा ..... यह जान कर खुशी हुई की आपकी बुद्धिमता को विस्तार देने वाले और असाधारण रूप से बढाने वाले चाकलेट्स अब आपके पास असीमित मात्रा में है ..... मैं उम्मीद करता हूँ की जब भी आपको समय मिलेगा आप अपनी सुविधानुसार बार बार हम सभी की खिदमत में ब्लागर आफ दा वीक के लायक बेहतरीन रचनाये पेश करती रहेंगी ..... जिस वक्त आपके कमेन्ट का जवाब दे रहा था –तब अपनी अगली रचना पोस्ट नहीं की थी .....क्योंकि उसके पहले कई रचनाये है .... लेकिन क्योंकि आपके सामने इसी का जिक्र कर दिया था तो उसी कारण इसी रचना को पोस्ट करना पड़ा .... लेकिन अब आपके अनमोल उत्साहवर्धक उदगार मिल गए है-बहुत -२ शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय अब्दुल रशीद भाईजान ..... आदाब ! “हमने तो सोचा था की करेगी हमारी सोहबत तुम पर असर जरा धीरे धीरे” मगर तो आपने तो हैरानीजनक तरक्की कर ली है ..... दिल गार्डन -२ हो गया की यह जान कर की आप मेरी शादी का प्रस्ताव लेकर उनके दरबार में गए .....शुक्र है की आपने शोले के जय जैसी कोई भी हरकत नहीं की .... वैसे वीरू से चार खासियतें मुझ में ज्यादा ही होंगी कम का तो सवाल ही पैदा नहीं होता .... रही बात भ्रष्टाचारी होने की तो भगवान ने इस लायक मुझको समझा ही नहीं शायद इसी लिए न तो फिजिकली पावर दी है और न ही ...... आपने मेरे भविष्य के लिए इतना सोचा + प्रयत्न किये उसका शुक्रिया तो मैं शब्दों में बयाँ कर ही नहीं सकता ..... (आपकी रचना पर कमेंट्स पोस्ट नहीं हो पा रहे- शायद क्लोस्ड है – इससे पिछले वाले लेख में आपको बताया भी –शायद आपने देखा नहीं –किरपा करके गलती को दुरुस्त कर लीजियेगा ) :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय वाहिद भाई ..... आदाब ! आकर पैरों को चाहे दबा दू लेकिन और कुछ दबाना मेरे बूते से बाहर की बात है ...... आप जब साथ है तो वोह शेर मुझ पर लागू नहीं हो सकता “मुझको तो अपनो ने लूटा गैरो में कहाँ दम था मेरी किश्ती वहीँ पर डूबी जहाँ पर पानी कम था” और मल्होत्रा नाम ना रख पाने के बारे में अपनी मजबूरी मैंने अपने जुबली कुमार जी को बता ही दी है ...... हमारे श्रद्धेय गुरु जी (भगवान उनके चरणों में मेरा प्रणाम पहुंचाए –वोह जहाँ कहीं भी दीया बुझाने गए हो ) मैं खुद बेशक इस बात को भूल जाऊं लेकिन उनको हमेशा याद रहता है की मेरी किस फिल्म में मेरा क्या रोल + नाम था ...... दोहराव उनकी पैनी नजरों से बच नहीं सलता है ..... इसलिए मजबूरीवश आपका कहा माँ नहीं सकता हूँ ..... एक और बात की क्षमा चाहुगा की आपकी इजाजत के बिना ही अपने लेख “राजकमल इन पञ्चकोटि...” में सचिन भाई के कहने पर काफी बाद में आपका नाम डालना पड़ गया था ..... उम्मीद करता हूँ की आप इस बात का बुरा नहीं मानेंगे ...... धन्यवाद और आभार :) :( ;) :o 8-) :| ******************************************************* :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय जुबली कुमार जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! आप मेरी शादी से पहले ही अपना ध्यान खुद ही रख सकते है लेकिन शादी के बाद ?..... फिर तो सारी उम्र मैं पहले आप पहले आप ही करता रह जाऊँगा और जब यमदूत लेने आएंगे तब पता चलेगा की यार लोगों की सारी जिंदगी नाक के नीचे से काफिले गुजरते रहे और हम बस गुबार ही देखते रह गए – हाय ! किरपा करके इस कैरेन मल्होत्रा के बारे में बताए की यह मोहतरमा कौन है और कितनी पहुंची हुई शैय है ..... हमारे सांझे गुरु जी बेशक मेरे ब्लागों से नदारद दिखाई पड़ते हो लेकिन वोह मेरे सारे ब्लॉगों को पढ़ते जरूर है क्योंकि उन्होंने मुझको आर.एस.एस. फीड में रखा हुआ है ..... मैं जानता हूँ की अगर मैंने जरा सी भी गलती की तो वोह अपने अज्ञातवास से प्रकट होकर दो छडियां झट से जमा देंगे ..... वोह सामने रहे चाहे ना रहे उनका ख्याल और ध्यान तो रखना ही पड़ता है ...... मैं अपने एक पिछले लेख में राजकमल मल्होत्रा बन चूका हूँ ..... छक्के लगा लगा कर सभी की “खिड़कियों के कांच” भी तोड़ चूका हूँ ..... इसलिए अगर इस बार भी इस लेख में खुद को दोहराता तो उनकी झिड़किया खानी पड़ती ..... अगर वोह आपको कहीं पर मिल जाए तो उनसे कहियेगा की मेरी पसंदीदा “करेले की चटनी” जरूर लेकर आये ...... हा हा हा हा हा हा आप यहाँ पर पधारे उस पर कुछ ताजातरीन अर्ज करना चाहता हूँ :- ‘सूनी राहे भी हो जाती है गुलजार जब उन पर कदम तुम्हारे पाक पड़े बुझा दो हमे, अब यहाँ क्या है हमारा काम, बड़े ही दुखी होकर मुझसे सारे चिराग कहे” आप दोनों गुरु भाइयों का हार्दिक आभार :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय संतोष जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! आप की एक और नई गुरु माता श्री जी आने वाली है इसलिए आपकी खुशी और उत्साह को मैं समझ सकता हूँ –लेकिन नासमझ अबोध बालक जी को क्या कहूँ ?...... सोच तो उन मोहतरमा के भारत आने की खबर के साथ ही शुरू हो गई थी ....लेकिन उस समय एक तो उन पर काफी लोग लिख रहे थे –दूसरे मेरी समझ में यह नहीं आया रहा था की क्या वोह कुछ लिखने के योग्य है ..... लेकिन जब कोशिश की तो आखिरकार थोड़ी बहुत सफलता मिल ही गई ..... इस मंच की महिला ब्लागरो का ध्यान रखते हुए जितना गरिमापूर्ण लिख सकता था मैंने लिखने की कोशिश की ..... लेकिन यह विषय ही कुछ ऐसा है की न चाहने पर भी इसका स्वरूप इसी तरह से सामने आने वाला था ..... आपको आपकी नई गुरु माता की तरफ से आशीर्वाद व् मेरी तरफ से शुभकामनाये :) :( ;) :o 8-) :| प्रिय संतोष भाई ..... सप्रेम नमस्कारम ! अब भला आप लोगों से भी मेरी कोई बात छुपी हुई है क्या ?...... मालपानी का सारा जुगाड़ और बंदोबस्त तो आप लोग ही करते हो .... सभी बीवियों की बिचोल्गी मेरे चेलों ने ही तो निभाई है बिना कोई फ़ीस लिए हुए ..... इसीलिए तो मैं गरीब इतनी शादिया कर पाया –नहीं तो इस महंगाई के जमाने में मेरी इतनी औकात भला कहाँ थी .... आपको भी आपकी नई गुरु माता मुबारक हो ! चिरंजीवी भव : आयुष्मान भव : :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय प्रवीन जी ...... सादर अभिवादन ! आप सच कहती है की एक मध्यमवर्गीय परिवार का शादियों के सीजन में पूरे घर का बजट ही डांवाडोल हो जाया करता है .....और अगर उपर से उनमे से कोई शादी किसी करीबी की हुई तो क्या कहने ..... लेकिन अगर प्यारी बीवी की रिश्तेदारी में किसी नजदीकी की शादी हो तो फिर जो कहना है वोह वक्त और हालात ही कहेंगे –मैं कुछ नहीं कह सकता इस बारे में ..... जब ऐसी चिंता में घर परिवार के सदस्य किसी समारोह में शिरकत करते है तो लजीज वयंजन भी असली स्वाद नहीं दे पाते ..... लेकिन शादिया तो होनी ही चाहिए –घर बार भी बसने ही चाहिए – भगवान सभी कुंवारे लोगों की शादिया कराए –अगर नहीं तो फिर मेरी सेवाएं ली जाए –अपने अगले किसी लेख अपर शायद इस बात पर कुछ लिख डालूं ..... आपकी इस उत्साहवर्धक + मजेदार प्रतिकिर्या के लिए आपका बहुत -२ आभार :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय अबोध जी ...... सादर प्रणाम ! यह जान कर दिल को बहुत ही भरी ठेस पहुंची की आप अपनी भावी गुरु माता श्री पर ही नजरे गड़ाए हुए है ..... आगे से जब भी किसी लड़की पर आपका दिल आया जाए तो मुझसे पहले पूछ लिया कीजिये की कहीं मैं उस पर लाइन तो नहीं मार रहा ..... हा हा हा हा हा हा हा “यूँ को तो इस दुनिया में सितारों की कोई कमी नहीं है ए दोस्त ! छूना चाहा था जिस आफताब को उसी पर तेरा भी दिल क्यों है आया” ? अब जब आपके गुरु ने इस ओखली में सिर दे ही दीया है तो कहानी को सिरे चढ़ा कर ही दम लेंगे ..... आप तो बस नए गुरु पुत्र के स्वागत की तैयारी शुरू कर दीजिए ...... आपको डबल बधाई सहित आभार इस दस नम्बरी को कोई भी नम्बर न देने के लिए आपका ट्रिपल आभार ...... :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

माई डियर वकील साहिब ..... नमस्कारम ! शायद और यकीनन इसी तरह की टिप्पणी मैं हमारी आदरणीय अनीता मैडम जी के ब्लॉग पर करने की जुर्रत भूलवश कर बैठा था ...... वहां पर मेरे संग क्या बीती थी आप आज भी उनके ब्लॉग पर जाकर देख सकते है ..... खैर मैं ही क्या इस मंच पर दूसरा कोई भी आपको उस तरह का जवाब तो कम से कम दे नहीं सकता है ..... “बड़े शौक से सुन रहा है यह सारा जमाना दास्तां हमारी आप ही सो गए (गायब हो गए) इसको सुनते सुनते” यह माना की मैं बहुत ही घटिया हूँ लेकिन समझ में नहीं आता की आप मुझसे ऐसे विषयों पर भी लिखने की आशा क्यों संजोये बैठे थे ...... पता नहीं आपने कितनी शिद्दत से भगवान के सामने अनजाने में इस बात को सोचा , जिसके फलस्वरूप मेरे मन में आपके पसंदीदा विषय पर लिखने की सनक सवार हुई और नतीजा आपके सामने आ गया ...... आपका तहेदिल से शुक्रिया प्रत्यक्ष और “अप्रत्यक्ष मदद” करने के लिए तथा उत्साह बढाने के लिए – हा हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

तो आ ही गयीं सन्नी लिओन ..आप का इस कदर चुप रहना लगता था मिली भगत तो नहीं ... आज कल प्रश्न पर प्रश्न लोगों की हिम्मत कितनी बढती जा रही ..कुछ सेंसर की सोचना होगा... जो अभिनेत्रियाँ बेईमान है उनको तो हमारा समाज शरीफ और अच्छी कहता है और जो विरली अभिनेत्रियाँ “ईमानदार” है उनको बुराई का प्रतीक मान कर उनसे नफरत की जाती है …… मैं समाज के ठेकेदारों से पूछता हूँ की आखिर यह कहाँ का इन्साफ है ?…… यह हेरानी की बात है की जब गोरे और काले सभी को सिर्फ और सिर्फ गोरी चमड़ी देखना ही भाता है वहां पर एक काली चमड़ी वाली कैसे धमाल मचाये हुए है – अपने भारत का परचम लहराए हुए है … इस बिगाड़ने के शुभ काम में हम अपना नाम तो अवश्य स्वर्णाक्षरों में लिखाएंगे ..अंजामें गुलिस्तान चाहे जो हो ..हम हैं ठेकेदार समाज के फिर भला क्यों न .... ह हा हा .हा हा...सुन्दर...जलूल ..जलूल ..ढपली बजाने हम सब .... “घर का भेदी लंका ढाए” की तर्ज पर मुझको आप सभी से यह डर लगा रहता है की कहीं आप में से कोई मेरी पिछली पांच शादियों का जिक्र सन्नी लियोन से करके मेरा बन रहा काम बिगाड़ के ना रख दे …… भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5

आदरणीय राजकमल जी, मैं सोच ही रहा था की सन्नी लियोन को आये तो एक हफ्ता हो गया लेकिन आपने अभी तक नजरें इनायत नहीं कीं.........! आपने सही लिखा है की एक दो लडकियां भी सन्नी लियोन को अपना रोल मोडल बना लें तो भारत का नाम रोशन रह सकता है पर देखिये आजकल की भारतीय बालाओं को जो सर से पाँव तक बिलकुल ढक कर चलतीं हैं.........! आँखों पर भी काला चश्मा लगा लेतीं हैं........ ! किसी के ठीक से दीदार भी नहीं हो पाते......... ! यकीन मानिए अब तो सड़क पर चलने में भी मन नहीं लगता....... खैर...... मैं तो यही दुआ करूंगा की आपकी मनोकामना जल्द से जल्द पूरी हो ............ आपकी भावी शादी का भावी बाराती http://munish.jagranjunction.com/2011/11/25/%e0%a4%a5%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%9c-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a5%82%e0%a4%81%e0%a4%9c/

के द्वारा: munish

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय सैयद भाईजान ...... सप्रेम आदाब ! आपने भी आलराउंडर जी की तरह से अपने विचार बड़े ही मजेदार तरीके से रखे है ..... पढ़ कर आनंद आया ..... किसी भी महिला पायलट को पुरुषों से भी कहीं जयादा कड़े टैस्ट देकर हवाई जहाज चलाने का लाइसेंस मिल पाता है ..... और वोह अकेली भी नहीं होती –कोई न कोई पुरुष तो साथ में होता ही है बल्कि एक पूरी टीम होती है ..... फिर भी उस मुरख ने वैसा बखेड़ा खड़ा किया और मुझको लेख लिखने का मौका प्रदान कर दिया ..... हा हा हा हा हा हा उस यात्री का और आपका हार्दिक आभार (आपकी भी किसी रचना का इन्तजार रहेगा –अगला लेख बाबा हजरत निजामुदीन औलिया जी और हिंद की चादर बाबा गरीब नवाज जी की यात्रा पर है –अगर आप उसमे कुछ सुधार +सुझाव दे सके तो आपके पास भेज सकता हूँ क्या ?) :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय लहर जी ..... प्रेम में सना हुआ (लिबड़ा हुआ ) नमस्कारम ! मुझको चाहे आप सभी की तरक्की को देख कर बेहद खुशी हुआ करती है ..... लेकिन मन के किसी कौने में एक छुपी आपसे आगे निकलने की चाह भी दबी हुई रहा करती है तो उस चाह को संतुष्ट करने के लिए कई बार इस फील्ड में भी पाँव धरना पड़ जाता है ..... अगर एक खलनायक को पर्दे के उपर देख कर दर्शको के मन में नफरत और गुस्से के भाव आये और कामेडी करने वाले की हरकते मन को गुदगुदाए तो उसको समझ लेना चाहिए की वोह ठीक दिशा में जा रहा है ...... उम्मीद करता हूँ की जल्द ही आप इस मंच पर एक बढ़िया रचना के साथ हमारे सामने रूबरू होंगे ..... अग्रिम शुभकामनाओं के साथ हार्दिक आभार सहित :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| (लेकिन आपको एक नेक सलाह भी देना चाहूँगा की मेरे द्वारा किये गए स्टंट्स को किसी काबिल विशेषज्ञ की देख रेख में ही दोहराए तो कहीं ज्यादा बेहतर होगा )

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय पियूष भाई ..... सप्रेम नमस्कारम ! भाई मेरे मैं तो मजाक में ही खुद को पितामाह भीष्म कहता हूँ और कह कर अगले लेख उस बात को भूल भी जाया जरता हूँ .... आपको यह जान कर बहुत ही खुशी होगी की हमारे संतोष भाई ने जागरण के फीडबैक पर एक लड़ाई जीत ली है ...... मैं उसका महत्व इसलिए ज्यादा करके देखता हूँ क्योंकि अगर वोह उस समस्या पर कोई लेख लिखते तथा जागरण जंक्शन परिवार उस पर अपना स्पष्टीकरण देता तो उसको एक बड़ी जीत माना जाता ...... गलत बात कहीं पर भी हो हमे उसके खिलाफ अपनी आवाज यथा संभव उठानी ही चाहिए ...... आपके पास समय की कमी है मैं इस बात को जानता हूँ ..... केवल आपकी ही नहीं बल्कि इस मंच पर कई बहुत ही काबिल ब्लागर है जिनके पास समय की कमी है जैसे की श्रीमती अमिता नीरव + टिम्सी मेहता + हमारे राहों से अनजान अनजाना राही भाई ..... इन सभी के ब्लॉग पर हाजरी लगा कर मुझको भी सुखद अनुभूति होती है ..... आपकी इस प्रेम रस से लबालब प्रतिकिर्या के लिए आपका दिल की सभी गहराईयों से शुक्रिया (क्योंकि प्रतिकिर्या मेरे लिए शुरू से ही आपसी संवाद का एकमात्र और सशक्त माध्यम रहा है –और इसका मैंने पूरा -२ उपयोग किया है –क्योंकि मैं इसमें व्यक्तिगत तक भी हो जाता हूँ –आभार सहित ) :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय भ्रमर जी ..... सादर प्रणाम ! सच में ही आपकी नजर की तारीफ करनी पड़ेगी ...... आपका नाम लिया नहीं किसी प्रतिकिर्या में की आपको तुरन्त ही खबर हो जाया करती है ..... पता नहीं किस प्रकार आपने इसको खोज लिया –सलाम करता हूँ आपको और आपकी पारखी नजर को ...... आपकी निश्छलता और बिना लागलपेट वाली प्रतिकित्याये देख सुन कर अक्सर ही हैरानी हो जाया करती है ..... आपके ब्लाग पर कोई केवल एक शब्द में कुछ कह कर भागना चाहता है तो आप उन्ही चंद शब्दों में उसके पूरी मानसिकता को पढ़ कर उसके शब्दों की पूरी व्याख्या बता देते है ..... इसलिए आपकी प्रतिभा से जान कर भी अनजान नहीं हूँ .... वोह तो बस केवल बात के लिए (सन्दर्भ ) के लिए (बात में वजन पैदा करने के लिए ) कहा था ...... हा हा हा हा हा हा शुक्र है की आपने बुरा नहीं माना ..... इसके लिए मैं आपका अपने छोटे से दिल की सभी गहराइयों से शुक्रिया अदा करता हूँ .... आभार सहित :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

दिव्या बहिन ..... नमस्कार ! अमिताभ जी का आइकन स्टाइल –एक हाथ कमर पे रखते हुए दूसरे हाथ को आगे की तरफ बढ़ाकर “आय” कहना हम सभी को भाता रहा है और रहेगा .... मरे कहने का भाव था की उनके बेटे को भी अपना कोई खास स्टाइल बना लेना चाहिए .....इससे टी.वी.प्रोग्राम में मिम्करी करने वालों को भी आसानी रहती है तथा दर्शक भी बिना बताए झट से समझ जाते है की फलां ऐक्टर की नकल की जा रही है ...... अगर आप इस लेख पर प्राप्त सबसे पहली टिप्पणी प्रियांका जी की और उसके बाद सबसे उपर आलराउंडर जी तथा उसके थोड़ा नीचे गोविन्द राजवंशी जी तथा आदरणीय अमिता श्रीवास्तव जी की टिप्पणियाँ देखेंगी तो सारा माजरा आपकी समझ में आ जाएगा ..... के.बी.सी. की टीम का शूट +लेख के अंत में अमित जी के प्रति उदगार + बारहवा प्रश्न +अमित जी से सभी के लिए नमस्कार तथा और भी दो तिन छोटी -२ लाइनें बाद में जोड़ी गई है ..... उम्मीद करता हूँ की आप मेरी मजबूरी को समझते हुए क्षमा करेंगी ..... आपका हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय संतोष भाई ..... नमस्कारम ! शुक्र है की आपने कुछ शब्द फाइनैंस करवा कर मुझको भेजे दिए है ..... इनकी किस्तों की चिंता आप कदापि मत करे – उनको समय समय पर मैं चुकाता रहूँगा ..... और जहाँ तक किन्नरों द्वारा राज कार्य का संचालन की बात है तो जब धर्म ग्रंथो में वर्णित बाकी की बाते अक्षरश सत्य साबित हो रही है तो फिर इस बात को भी समय आने पर सत्य सिद्ध होना ही होगा ..... यह मेरे आपके द्वारा नहीं बल्कि विधि के विधान के अनुसार स्वत: ही होता चला जाएगा ...... आपका हार्दिक आभार हा हा हा हा हा हा हा हा हा (वैसे आप आजकल कुछ परेशान से दिखाई दे रहे है उस दिन जागरण वालों को भी कह रहे थे –आपकी बात को उन्होंने अवश्य ही पढ़ा होगा और उस समस्या का निराकरण भी करेंगे –अगर नहीं तो हम अपनी आवाज यहीं पर रह कर लगातार उठाते रहेंगे ) :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय भ्रमर जी ..... सादर प्रणाम ! कल असल में ही पार्टी हुई थी हमारे चाय वाले के घर में पोता हुआ है .....लेकिन आप तो जानते ही है की मैं शादीशुदा नहीं हूँ इसलिए किसी अबोध का पिता भी नहीं हूँ और इसीलिए पीता भी नहीं हूँ इसलिए मेरे लिए मीठा मंगवाया था ..... लेकिन बर्फी में कच्चा मैदा मिला हुआ था अब मिलावट का दुष्परिणाम भोग रहा हूँ ..... और आपकी भक्ति की और मीठे वचनों की जहाँ तक बात है तो शायद ही हम सभी ब्लागरो में से इस मामले में आपके समकक्ष कोई ठहरता हो ...... अगर मुझ खुदा के बेटे की बातो पर भरौसा नहीं है तो भागवान जी से पूछ कर कन्फर्म कर लेना ...... हा हा हा हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय बैजनाथ पांडे जी .....सप्रेम नमस्कारम ! भाई मेरे जबसे आपने बताया था आत्मा पर एक बोझ सा महसूस हो रहा था की किस प्रकार इस कर्ज को किसी हद तक चुकाने का कोई प्रयास किया जाए ...... लेकिन मुझको सबसे ज्यादा खुद पर गुस्सा इस बात का है की जिस सज्जन से मेरी मुलाकात हुई थी उनसे भी कुछ गलतफहमिया हो गई थी ...... लेकिन बाद में मुझको पता लगा +महसूस हुआ की वोह आपकी उस मित्र मण्डली के एक सदस्य हो सकते है जिनका की आपने जिक्र किया था एक बार .... शायद उनका नाम प्रदीप कुमार है .....उन्होंने इस मंच पर शायद एक ही ब्लॉग लिखा है भगत सिंह जी पर (शहीद ) .....उन्होंने चातक जी +मिश्रा जी जैसे ब्लागरो का जिक्र किया था ..... सच में ही बाद में बहुत ही आत्मग्लानि और शर्मिंदगी महसूस हुई –इसलिए इस लेख को लिखने का एक कारण वोह अपराधबोध भी रहा ...... श्री भगवान जी से उन सभी के लिए सुख +सम्रद्धि और खुशहाली की कामना के साथ आपका तहेदिल से आभार (आपसे भी माफ़ी चाहूँगा की आपको जवाब देते समय मेरे दिमाग में हमारे साथी प्रिय दीपक पांडे जी का ख्याल आ गया था – वोह शिक्षक दिवस पर स्पेशल मुझ से मिलने के लिए आये थे इस मंच पर )

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय बैजनाथ भाई ...... सप्रेम नमस्कार ! भाई साहिब मेरी शादिया तो सदाबहार है हमेशा चलती ही रहती ही (आप सभी के सहयोग और स्नेह के कारण ) ..... आप कभी भी शरीक हो सकते है .... आपसे पांच करोड़ से भी बेशकीमती दुआए मिली मन प्रसन्न हुआ .... मैं वास्तव में ही अमिताभ जी का ऐसा प्रशंसक हूँ जोकि उनकी आलोचना सुन करने वाले से रुष्ट हो जाता है ..... यह तो भगवान का शुक्र है की आप सभी मेरे मिजाज को जानते है और इस मजाक को केवल मनोरंजन के तौर पर ही लेकर मेरा उत्साह बढ़ाया है ...... लेकिन दिल की बात बताऊं तो मुझे आत्मिक खुशी तब होती जब कोई मुझको यह उलाहना देता की अमिताभ बच्चन जी पर ऐसा क्यों लिखा है ..... भले ही फिर वोह भी मजाक में ही क्यों न कहता /कहती ..... हा हा हा हा हा हा हा आपके इस स्नेह के लिए आपका हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय अशोक जी .....सादर अभिवादन ! अगर आप का ऐसा मानना है तो भगवान करे की ऐसा ही हो और ऐसा ही होता रहे ..... यह नेता लोग हमे पूरी तरह से साक्षर होने नहीं देंगे और हमारी गरीब और अनपढ़ जनता इसी तरह इनके हाथों की कठपुतली बनकर इनके सरे स्वार्थ सिद्द करती ही रहेगी ...... जो बुद्दिजीवी वर्ग है वोह सिर्फ आलोचना करना और सलाह देना ही जानता है और कितने प्रतिशत संभ्रांत वर्ग के लोग वोटिंग के दिन मतदान करते है यह भी देखने वाला विषय है .... जो धार्मिक प्रमुख है वोह भी आजकल अपने अनुयाइयों को खुल कर या फिर अंदरखाते किसी खास पार्टी के पक्ष में मतदान करने को कहते है ..... और बाकि की कसर आपके द्वारा बताए गए उपाय पूरी कर देते है ...... गर्मियो में धोतिया तो सर्दियो में कम्बल फिर भले ही भगदड़ में किसी एक की जान ही क्यों न चली जाए (लखनऊ ) आपका तहेदिल से धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय भीष्म-पितामह कम गुरूजी, सादर अभिवादन, जागरण जंक्सन पर शिशुओं के विभिन्न प्रकार एवं उन सभी की अति सूक्ष्म विवेचना पढ़कर ह्रदय आह्लादित हुआ | ऐसा लगा किसी पुराण का संकलन करते-करते अचानक महर्षि व्यास चंचल हो चले हैं और जागरण जंक्सन का ब्योरा देते समय शिशुओं को देखकर भाव से विह्वाल हो उठे हैं | ;) | ठीक उसी वक्त नारद मुनि पधारकर वातावरण में स्वतः ही हास्य की सृष्टि कर देते हैं | :) :) :) मेरे साथ सभी पाठक गण इस बात से अवश्य सहमत होंगे कि रामवृक्ष बेनीपुरी अगर शब्दों के जादूगर थे तो भीष्म पितामह का नया अवतार "राजकमल" निश्चय हीं बातों का जादूगर है | शायद इसीलिए लोग उसे इतना पसंद करते हैं | Unsung Heroes के प्रति samarpit आपका यह पोस्ट संग्रहणीय बन पडा है | आपके इस घर में काफी सारे शिशुओं कि किलकारियां यूँ ही सदैव गूंजती रहे, इसी दुआ के साथ | आपका अनुज |

के द्वारा: Baijnath Pandey

प्रिय संतोष भाई ...... सप्रेम नमस्कार ! यह अच्छी बात नहीं है अनुशासन के लिहाज से ..... पिछली बार जवाहर लाल जी को शब्द नहीं मिल रहे थे और इस बार आपको ...... कल को अबोध जी यही बात कहेंगे –परसों पार्थ जी कहेंगे तो नरसो को भ्रमर जी कहेंगे ...... इस तरह तो हमारे गुरुकुल की परम्पराए डांवाडोल हो जाएंगी ...... मैं मानता हूँ की कमीशन का चेक देने में देरी हो गई थी लेकिन अब तक तो आपके खाते में पूरे पैसे जमा हो चुके होंगे ..... इसलिए गुस्सा थूक डालिए और चाहे ध्यान की कोई विधी अपनाइए + पठन –पाठन करिए +विचार मनन करिए + योग कीजिये + ध्यान कीजिये या फिर मौन व्रत रखे –लेकिन किसी भी तरीके से शब्द लेकर आये ...... आपका एहसानमंद कर्जदार धन्यवाद सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय वाजपेई जी ..... सादर प्रणाम ! सबसे पहले तो आपको इस जीत की ढेरों बधाईया ...... ओस समय जानबूझ कर बात नहीं की थी लेकिन अब कर सकता हूँ ..... एक बार एस.पी.सिंह. जी के ब्लॉग पर किसी दुर्जन ने अपने विचार रखे थे तो जागरण द्वारा उनको कहा गया था की हम लगातार दो दिनों से देख रहे है –और इन्तजार कर रहे थे की आप इसको खुद ही डिलीट कर देंगे ..... लेकिन अब हम आपको बताना चाहते है की यदि आपने अमुक प्रतिकिर्या को डिलीट नहीं किया तो मजबूरन जागरण को यह काम करना पडेगा ..... जागरण के सम्पादकीय ब्लॉग पर ओ.पी.पारिख जी ने कुछेक दिन पहले ही जागरण के सभी सम्पादकों को सरेआम पागल लिखा था ..... जब मेरी नजर पड़ी तो मेरे द्वारा बताने पर उस टिप्पणी को डिलीट कर दिया गया ...... लेकिन अब उस्जे पारीख जी के सभी ब्लॉग फीचर्ड की श्रेणी में आते है ..... आप जब फेसबुक पर कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज लिखेंगे तो जब मेरे नाम वाली डिबिया आएगी तो उसके आगे एक औए खाना भी बना होगा जिसमे (एड ऐ फ्रैंड ) लिखा रहेगा –आप उस पर क्लिक करेंगे तो मेरे पास आपकी फ्रैंड रिक्वेस्ट पहुँच जायेगी ..... हम सभी आपके आभारी है

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय भ्रमर जी ...... सादर प्रणाम ! मैं अर्जुन के पैरों की धुल के समान हूँ लेकिन लक्ष्य को किस तरह से भूल सकता हूँ ..... एक तरफ पेड़ कट रहा हो और दूसरी तरफ आपका बचाव होना हो तो हमे तो पेड़ की चिंता को छोड़ कर आपकी ही फ़िक्र करनी चाहिए की नहीं ?..... वैसे ऊपर सबका रखवाला विराजमान है अपने स्नेह का हाथ जब उसने आप सभी के सर पर रखा हुआ है तो फिर आपको कुछ कैसे हो जाता ....... अब प्रशाद चढ़ा कर मुंह मीठा कीजिये और भगवान का शुकराना अदा करते हुए (जोकि आप हमेशा से करते ही है ) उनका भी मुंह मीठा कराइए ...... मीठा खाइए –मीठे वचन बोलिए और इसी तरह से चारो तरफ प्रेम की गंगा बहाते रहिये ..... आज एक जाम आपकी सलामती और दूसरा आपकी खुशी के नाम पर पिऊंगा .....हा हा हा हा हा हा आपका हार्दिक शुक्रिया जय श्री राधेकृष्ण

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय प्रवीण जी ......सादर अभिवादन ! आपकी बेबाक राय का अब तो मुझको हमेशा ही इन्तजार रहता है ..... आपने बिलकुल ठीक कहा है ...... हमारे मोहल्ले का नगर पार्षद काफी उद्दण्ड +बेशर्म हो गया था ...... सभी ने मिलकर एक गरीब –रोटी खाने को मोहताज को अपने पास से पैसे खर्च करके चुनाव लड़वाया और शत प्रतिशत मतो से जितवाया भी ..... उसी साल हमारे बाजार की एक खली पड़ी जमीन भी बोल पड़ी –तो वहां पर उसी पार्षद तथा लोगों ने पूरी श्रद्धा से पीर बाबा जी की दरगाह का निर्माण कार्य सम्पन्न करवाया ....थ एक बहुत ही अच्छा शगुब था –सभी खुश थे ..... लेकिन वक्त बीतते -२ उसमे भी बाकि के पार्षदों वाली बुराईयों ने घर बना लिया ..... और आज उसको कोई नहीं पूछता है ..... जिसके मुकाबले में उसको जितवाया था वोह तो भविष्य में फिर कभी जीत भी जाए –लेकिन लोक शक्ति के कारण बने व्यक्ति का पतन के कारण अब पुरी जिंदगी दुबारा चुना जाना असंभव है ...... यह सच्ची घटना आपके विचारों को पुष्ट करती है ..... इतनी सुन्दर प्रतिकिर्या के लिए आपका बहुत -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

गुरुदेव की असीम अनुकम्पा से देश रूपी जहाज अच्छी तरह चले(उड़े) यह तो हम सभी कामना करते हैं, .... पर जहाँ तक मुझे पता है हवाई जहाज में दो पायलट होते हैं, ताकि एक अगर गलती करे तो दूसरा सम्हाल ले. अगर दोनों ने एक साथ पैग न चढ़ाया हो तो. कभी हमारे देश में भी दो प्रधान मंत्री हुआ करते थे एक मोरार जी भाई, तो दुसरे चौधरी चरण सिंह इस परंपरा को NDA (भाजपा गंठजोड़) ने भी कायम रक्खा अटल जी के साथ अडवाणी जी. उम्मीद है आगे भी अगर अडवाणी जी को मौका मिला तो सुषमा जी और अरुण जेटली को दायें बाएं रक्खेंगें ही! दरअसल उत्तर प्रदेश से भी बड़ा हमारा देश है जिसे सम्हालना एक प्रधान मंत्री के वश की बात नहीं है. वह भी तब जब प्रधान मंत्री विदेश यात्रा पर हों. हमारा झारखण्ड प्रदेश ने भी अच्छा उदाहरण पेश किया है एक मुख्य मंत्री के साथ दो उप मुख्य मंत्री. ऐसा ही हमारे देश के लिए हरेक क्षेत्र ( पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण) और हर भाषा का प्रधान मंत्री होना चाहिए. आखिर हमारा देश भी तो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश कहलाता है. गुस्ताखी माफ़ करेंगे गुरुदेव अगर कुछ गलत लिखा हो तो!..... जवाहर.

के द्वारा: jlsingh

के द्वारा: Gopal Tiwari

प्रिय राज भ्राता श्री –जय श्री राधे ..दिया हुआ बेकार नहीं जाता काम तो आता ही है सच में उस समय हम आप के ब्लॉग पर ही मस्त थे ..आप की शुभ कामनाएं हैं तो अभी बढ़ते रहेंगे आगे पथरीली राहों पर और कुछ दिन …. जैसे आप ने अमित जी के जैकपॉट के बारे में -उनका मन पढ़ा था मनः स्थिति भाँपी थी की लोगों के जज्बात ..उनके मन पर कैसे असर करते हैं आप की बारीकियों के हम कायल हो गए माइक्रोस्कोप सा दिमाग आपका … आज भी वही दिखाई दिया प्रतिक्रियाएं इस शनि ग्रह पर तो बहुत आयीं लेकिन जो मैंने माँगा था शुभ कामना या मुख्य मुद्दा क्या था किसी ने नहीं देखा शायद ….धन्य हैं आप खुदा सदा आप पर मेहरबान रहेंगे .. दारोगा जी सदा मस्त रहिये …. जय श्री राधे भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5

बहुत जबरदस्त तमाचा मारा है आप ने पता नही इलेक्सन तक वे जाग पाएंगे या मूर्छित ही .... यदि यह सभी अलग -२ दलों के जीते हुए प्रत्याशी (पायलट ) भी इस देश को न चला सके तो फिर धार्मिक ग्रंथो में सदियों पहले की गई भविष्यवाणी के अनुसार हमको सारे का सारा राज प्रबन्ध किन्नरों के हवाले कर देना चाहिए ....आप कौन से क्षेत्र से खड़े हो रहे हैं ..हमारा आधार कार्ड और वोटिंग लिस्ट में अभी से नाम घुसा दीजियेगा ..सुफल मनोरथ होंही तुम्हारे ... शराब पीकर तो जब जमीन वाला आदमी भी हवा में उड़ान भरने लगता है और उसको अपनी सधारण सी शक्ल सूरत वाली पत्नी कैटरिना कैफ समान नजर आती है तो पायलटों ने सोचा होगा की अगर आकाश में शराब पीकर उड़ा जाए तो फिर पता नहीं कौन से इस से भी ऊँचे आकाश में परवाज भरेंगे और फिर एयर होस्टेसे इनको स्वर्ग के राजा इंद्र के दरबार की परियों के समान दिखाई देंगी.. मजा आया .... लेकिन इन नेताओं का सारा परीक्षण-पोस्ट मार्टम यहाँ हो जाएगा वे बच के कहाँ जायेंगे .....यहीं ठिकाना लग जाए भला ... काश लोगों के दिलों में ये बातें घर कर जाएं ...बेहतरीन जय श्री राधे भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5

प्रिय गोविन्द भारतवंशी जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! शुक्रिया ! आदाब ! आदर सहित अभिनन्दन और आभार ! यह एक निरंतर चलने वाली प्रकिर्या है ..... हमारे गिरोह में शामिल होने पर आपका हार्दिक स्वागत है ...... लेकिन हम निष्क्रिय नहीं होने देते अपने किसी भी साथी को ..... उसके हाथ में जबरदस्ती से हथियार (कलम ) थमा ही देते है ...... आपने मेरा साथ करोड़पति बनने के बाद पाया है तो मैं आशा करता हूँ की जब तक मैं करोड़पति बना रहूँगा आपका प्यार और स्नेह मुझको मिलता रहेगा ..... इसलिए मेरी पुरजोर कोशिश रहेगी की मैं कभी भी लखपतियो की श्रेणी माँ ना आ जाऊं .... हां हां हां हां हा हा हा हा (आप अपने लेख का लिंक बताए टताकि आपका कर्जा इस जन्म में ही उतारा जा सके .... आपकी शुभकामनाओं खासकरके मेरे लेख को कई बार पढ़कर ,मेरे सभी चेलों को पीछे छोड़ने पर मुबारकबाद +धन्यवाद +आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

...........????????????हा हा हा हा हा हा ..????????????.........चेले भी चालू हो गए !! ,..गुरुजी को सिरिअस कर ही दिया ,....मैंने आपके अमिताभिया अभिनन्दन पर चुटकी ली ...आपतो स्माइली ही भूल गए ..... क्या करें ?..लहरा मोहब्बत बहुत दूर है ,.और वो कमल साहब आपके ही क्लोन हैं (या शायद आप उनके हों ).... बड़ों बड़ों को पीठ पर हाथ नहीं रखने देते ....तो मेरी क्या औकात है !!!..खैर आपने मुझे हिस्सा देना स्वीकार किया है ,.यही मेरे लिए अनमोल है ,...कभी इसको खर्च नहीं करूंगा .... वो रचना प्रतियोगिता में कल ही भेज दी है ,.. वापसी के बाद मंच पर आपकी सेवा में पेश करूंगा....आपका बास कैसा है ?...वैसे बॉस कभी ठीक नहीं होता ,..but बॉस इस आलवेज राईट .... हार्दिक आभार सहित ..सादर प्रणाम

के द्वारा: santosh kumar

प्रियांका जी .....नमस्कार ! पहले तो मैंने केवल मजाक में ही कहा था लेकिन अब बहुत ही ज्यादा संजीदगी से कहता हूँ ..... आपके पास गाड़ी तो पहले से है ही , उही कामना है की आपके पतिदेव करोड़पति हो जाए .... फिर आपका बेटा करोड़पति माम का बेटा .....और आप रहेंगी भी करोडपतियो की ही कलोनी में ..... तो रोज ही किट्टी पार्टीज में करोड़पति महिलायों से ही बातचीत होगी ..... तब हमे आपके हाई सोसाइटी पर लिखे हुए सुरुचिपूर्ण विचार पढ़ने को मिलेंगे ..... वोह दिन जल्दी आये ...... आपके बाद हमारे पुराने पापी साथी सचिन उर्फ आलराउंडर जी ने भी आपसे मिलती जुलती शिकायत रखी है .... उसको भी चाहे दूर कर दिया है मैंने लेकिन लेख की लम्बाई बहुत ही ज्यादा बढ़ गई है ..... कम्प्युटर पर निगाह लगा कर इतना पढ़ना काफी मुश्किल काम होता है .... मेरी आप से इल्तजा है की उस भाग को भी आप जरूर पढ़े .....आपको निराशा नहीं होगी ..... इधर काफी दिनों से आपकी कोई भी रचना नहीं मिली है पढ़ने को -लेकिन मुझे उम्मीद है की आपने समय का सदुपयोग जरूर कर लिया होगा अपनी डायरी को अपडेट रख के ..... तो अगली बार कुछ "आपकी डायरी के पन्नों से" की आशा में आपको सपरिवार शुभकामनाओं सहित आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय सचिन भाई ..... नमस्कार ! शुक्रिया ! आदाब ! आदर सहित अभिनन्दन तथा आभार ! आपका पुनः इस मंच पर पधारने पर स्वागतम ! हम लोगों को बिरादरी के लोग इस मंच पर हमेशा से ही कम रहे है ..... अभी थोड़े दिन पहले ही एक काबिल ब्लागर गोपाल तिवारी जी का आगमन हुआ है ... और आप तो फिर आप ही है – आलराउंडर ! हमे उम्मीद है कि एक बार फिर से आपकी रचनाओं को पढ़ने का मौका हम सभी को मिलेगा ...... अगर आपके मुख्य और महत्वपुर्ण कार्य निबट गए है तो फिर आपसे पहले ही कि तरह से समय देने कि अपेक्षा रहेगी ...... अगर आप इस लेख को लिखते तो आपसे हरगिज यह चूक नहीं होती ..... लेकिन मेरा ध्यान सिर्फ जोकर टाइप हरकतों पर ही था ...... और प्रोग्राम के इस भाग में कुछ हास्य हो ही नहीं सकता था ऐसी बात नहीं –लेकिन कुछ मसखरी सूझी ही नहीं तो इसलिए इस भाग को छोड़ ही दिया.... और आप यह भी जानते है कि अगर मसखरी कुछ ज्यादा हो जाए तो लिखने वाले को जो डर के माहौल का तनाव सहना पड़ता है वोह भी कुछ कम नहीं होता ..... लेकिन अगर थोडा हल्का फुल्का हो जाए तो उसके एक नहीं बल्कि दो – २ फंडे है .... जिस पर लिखा जाए उसकी नाराजगी का डर + बाकि के दूसरे साथियो द्वारा अपना नाम न देने का उलाहना ..... लेकिन अब आपकी शिकायत को दूर करते हुए आपके सुझाव पर अमल करते हुए इस भूल को भी सुधारने कि कोशिश कि है मैंने ..... आपको अमित जी से बातचीत मुबारक हो ...... अगर इस वार्तालाप के मामले में आपका कोई सुझाव हो तो उसको शामिल करके मुझको हार्दिक खुशी होगी ...... आपका हार्दिक शुक्रिया

के द्वारा: rajkamal

प्रिय राहों से अनजाने राही जी .....नमस्कारम ! मुझको नहीं मालुम की आप कौन सी परीक्षा की तैयारी कर रहे है .... लेकिन उसको जितना ध्यान दिए जाने की जरूरत है वोह उसको मिलना ही चाहिए ...... आपके कमेंट्स का खजाना मेरी धरोहर के रूप में आपके पास रहेगा .... जब वापिस आयोगे तो ब्याज समेत वसूल कर लूँगा ......आप एक सफल परीक्षार्थी बने लेकिन आशिक ?..... भाई साहिब फिर दर्द + वजन रचनाओं में कहाँ से आ पाएगा ..... लेकिन आप अगर एक सफल रचनाकार की बजाय सफल आशिक बनने की शुभकामनाए चाहते है तो फिर उसी का प्रबन्ध किया जाए ..... वैसे मैं चाहूँगा की आप एक सफल आशिक + कामयाब रचनाकार बने ..... हा हा हा हा हा हा हा आपका हार्दिक आभार सफलता की शुभ कामनाओं के साथ (शराबी फिल्म के मुंशी जी याद आ गए जिनके कारण यह सब हुआ )

के द्वारा: rajkamal

अहो भाग्य ....मेरे..... आपने मेरे लिखने से अपने लेख में सुधार किये इसी बात से पता चलता है की आप एक लेखक होने के साथ साथ एक इंसान के तौर पर किस जगह पर खड़े है ..........नहीं तो यहाँ इस मंच पर ही नही और भी कई मंचो पर मैंने देखा है की आजकल कोई भी टोका टाकी, सलाह को अपने काम में दखलंदाजी समझ लेता है और सामने वाले को स्पष्ट शब्दों में खरी खरी सुना देता है .......या फिर उसकी बात को नज़रंदाज़ कर देता है ..............मैंने तो सिर्फ इसलिए कहा क्योंकि आप के कुछ लेखो की तुलना में पहले वाला लेख कुछ कम अच्छा था लेकिन तब भी वो बुरा नही था और अब तो ये लेख गज़ब बन पड़ा है इसीलिए तो चर्चित और पठित दोनों जगहों पर उसका नाम है ...........वैसे भी मई कितने भी दिन बाद आऊं आको ढूंढने की जरुरत नही पड़ती आपके लेख पठित और चर्चित में तो रहते ही है ........एक बार फिर आभार आपका ...........

के द्वारा: priyasingh

प्रिय संतोष भाई .....सप्रेम नमस्कारं ! असल में आपका चैक “लहर-मोहब्बत” पहुँच गया था ..... अब या तो आप उसको खुद ही वहां से उन भाईसहिब के पास से कलेक्ट कर ले नहीं तो मुझको ही कुछ और इंतजाम करके वहां से आपके पास पहुंचवाने का प्रबन्ध करना पड़ेगा ..... पहले की बात कुछ और थी लेकिन अब तो मैं करोड़पति हूँ इसलिए इंतजामात करने में आसानी होगी ...... फिर भी आप उन भाईसहिब से मिलने के बहाने चैक लेने खुद जाना चाहे तो यह अब आपकी खुद की मर्जी पर निर्भर है ..... कल की रात से के.बी.सी. अगले सीजन तक बंद हो रहा है ..... लोगबाग इन लफ्जों को सुनने के लिए तरस जायेंगे ..... फिर भी अगर आपकी यही इच्छा है तो आगे से आप न टी.वी. पर और न ही इस मंच पर इन शब्दों को दुबारा नहीं सुनेंगे .... चलिए अब कुछ नयी खुराफात सोचता हूँ ..... आपका आत्मिक आभार सहित धन्यवाद

के द्वारा: rajkamal

प्रिय संतोष भाई ...... सप्रेम नमस्कार ! नमस्कार ! शुक्रिया ! स्वागत ! आदर ! अभिनन्दन ! और आभार ! ऐसा लगता है कि मेरे इस लेख को दो बार पढ़ लेने के बाद भी आपने इसको संजीदगी से नहीं लिया ..... बिग बी जी ने मुझको मनचाहा पड़ाव पार करने पर 320000/= तथा उसके बाद हरेक अगले प्रश्न का सही उत्तर देने पर 640000/= +1250000/=+ 5000000/=+ 10000000/=+ 50000000/= यानी कि कूल जमा मिलाकर छेह करोड़ बहतर लाख दस हजार रूपये दिए है अपने हाथ से चैक साइन करके ..... जबकि असली चैक पांच करोड़ का मिलेगा ..... अब आप खुद ही समझ सकते है कि चैक कि क्या अहमियत है .... इस लिए मेरी माने तो आप अपने खाते में नम्बर मुझको भेज कर ट्रांसफर ही करवा ले ..... और अगर चैक जी लेने है तो अभी तो अमिताभ जी के साइन किये हुए चैक ही पड़े है मेरे पास ..... बता दीजिए कि उनमे से कौन सा (कितनी रकम वाला ) भेज दूँ ...... आपके सुनहरे भविष्य के हार्दिक शुभकामनाओं सहित नमस्कार ! शुक्रिया ! स्वागत ! आदर ! अभिनन्दन ! और आभार ! मुबारकबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय भ्रमर जी ...... सादर प्रणाम ! नमस्कार ! शुक्रिया ! स्वागत ! आदर ! अभिनन्दन ! और आभार ! जब मैंने देखा की आप सीधे साधे से अपना वरदान रूपी आशीर्वाद नहीं प्रदान करेंगे तो यह तरीका अपनाना पड़ा ..... यह ठीक है की के.बी.सी. अब अगले साल ही आ पायेगा ..... लेकिन मैं आपकी ब्लागिंग को किसी भी प्रकार का खतरा नहीं देखता ..... पिछले साल भी यह अफवाह उड़ी थी की ब्लागिंग पर प्रतिबन्ध लग सकता है , तब भी मैं इस खबर से निराश नहीं हुआ था -और आज भी नहीं हूँ ...... जैसा उस समय प्रिय जवाहर लाल जी को कहा था आप को भी वोही ऐतहासिक शब्द कहना चाहता हूँ कि "हम है तो प्यारे क्या गम है"! मुबारकबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय वाहिद भाई ..... आदाब ! मेरे इस लेख में हरेक भारतीय कम ब्लॉगर का एक हसीन सपना साकार हुआ है ..... आज के दौर में पैसा सभी को चाहिए , लेकिन आत्म संतुष्टि अलग चीज है ..... जिसका की पैसे से कोई सरोकार हो भी सकता है और नहीं भी ...... बहुत सी प्रतिभावान सखशियते ऐसी है की जिनके यहाँ लक्ष्मी और सारस्वतो माता जी दोनों का ही सथाई निवास है ...... और अगर कोई अवसर सामने आता है तो उसको लपक कर उसका पूरा फायदा जरूर उठाना चाहिए क्योंकि यह खुशनसीबो के पास और कभी कभार ही आते है ..... आप पर वाकई में ही माता सरस्वती जी की किरपा है ...... लेकिन जब से मेरा शायरी से नाता टूटा है मैं इस मामले में खुद को ...... मानता हूँ ...... आप पर दोनों माताओं की किरपा हमेशा -२ के लिए बनी रहे इसी कामना के साथ (क्योंकि लक्ष्मी माता पूरे रूप में (प्रचुर मात्रा में) होगी तभी तो आप उसको वारेंगे ..... धन्यवाद सहित आभार और शुभकामनाये (आपने लेख की कमियों की तरफ इशारा नहीं किया था –लेकिन प्रियांका जी के कहने पर इसमें बहुत ही ज्यादा सुधार करने पड़ गए )

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय अशोक जी .....सादर अभिवादन ! अभी थोड़े दिन पहले ही प्रिय शशिभूषण जी ने कहा था की सादर अभिवादन से ऐसा लगता है की जैसे मैं जवान नहीं बल्कि बुड्ढा हो गया हूँ ..... इसलिए आपको भी (जवान अशोक जी को ) अभिवादन की बजाय नमस्कार ! आपने गलत अनुमान लगाया है ..... अमित जी सिर्फ करोडपतियो से ही दोस्ती करते है और इत्तेफाक से यह खुदा का बन्दा भी इसी श्रेणी में आता है ...... हमारे आपसी सम्बन्ध अब दिनोदिन और भी गहराते जा रहे है ...... ऐश का बेबी या फिर बेबो के आगमन के शुभ अवसर का बुलावा अग्रिम रूप से ही आ रखा है ....... अब तो जन्म जन्म का साथ हो गया है –निभाने की नियत होनी चाहिए मेरी तरह ..... आपको भी बिग बी के दादा बन्ने की अग्रिम शुभकामनाये ! आभार सहित

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय परवीन जी .... सादर अभिवादन ! भला इसमें बुरा मानने वाली बात क्या है ?..... अगर मुझको भी आपको पूछना पड़े तो लानत है मुझ पर ..... मैं अच्छी तरह से जानता हूँ क्योंकि मैंने भी वोह खबर पढ़ ली थी , जिसमें की पुलिस अफसर और नेता लोग खुद फोन करके शुशील कुमार को पुलिस की सुरक्षा और सहायता लेने के लिए कहते है ..... और मुरख सुशिल कुमार जी कह रहे थे की सुनों रे ! अपराधियों मुझको इनाम में जीता हुआ पैसा दो –तिन महीने बाद मिलने वाला है ..... लेकिन आप बिलकुल भी फिकर मत करे ..... मेरे तर्ड गिर्द जागरण के जागरूक +सतर्क +मुस्तैद भाई बहनों और बुजुर्गो का कड़ा और तंग तथा मजबूत सुरक्षा का घेरा मोजूद है जिसको की कोई भी पार करके मेरे तक नहीं पहुँच सकता है ...... इनाम में मिली रकम के ब्याज से कुछेक कमांडो भर्ती कर लूँगा ..... तब तक आप सभी की छत्रछाया में तो सुरक्षित रहूँगा ही ...... आपका बहुत बहुत आभार सावधान करने के लिए

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय भ्रमर जी .....सादर प्रणाम ! नमस्कार ! शुक्रिया ! स्वागत ! आदर ! अभिनन्दन ! और आभार ! यह याद रखने की बिमारी के कारण ही तो के.बी.सी. का पञ्च कोटि वाला जैकपॉट लगा है मेरा ..... मैडम के कारण मचे हड़कंप में तो इस ब्लॉग का फीचर्ड होना भी कहीं उड़ गया ......जागरण वालो को यह सच्चाई कुछ हजम नहीं हुई ....अमिताभ जी का फैन तो मैं बचपन से ही हूँ ..... और मरते दम तक रहूँगा ..... आप फिक्र मत करिएगा -यह लक्ष्मी जी का नशा आपसे दूर नहीं बल्कि और करीब ही लाने में सहायक होगा क्योंकि तब वर्तमान की मजबूरिया नहीं होगी ..... इसलिए दुआ कीजियेगा की सच में ही करोड़पति न सही तो लखपति ही सही ..... और अगर लखपति न सही टी किसी एक के पति तो भगवान जी हमको बना ही दे ..... जय श्री राधेकृष्ण ....आभार सहित मुबारकबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/11/राजकमल-इन-पञ्चकोटि-महामण/

के द्वारा: Rajkamal Sharma

करोडपति भाई जी बहुत ही आनंद दाई रहा ये सफ़र कल इस का आनंद ले जब प्रतिक्रिया देने चला था तो सब गड़बड़ बिजली पानी नेट ध्वस्त ...अच्छा हुआ आज सब वापस ... मुबारक हो आप पञ्च करोडपति बने .कहीं मिलने से सफ़र में फुटपाथ पर हमारा दल जाता दिखे अपनी डफली अपना राग ले तो पहचान लीजियेगा गुरुदेव ..जहां इतना सुख है वहीं दुःख भी की साथ न छूटे ...अपनी निराली अंदाज में मन मोहा आप ने अमित जी भी क्या याद करेगे और वे हसीनाएं भी जो आप के कारण वहां जगह पायीं - “राजकमल जी क्या आप हमारी एक्सपर्ट के साथ जाना चाहेंगे” ?…… राजकमल जी:- खुश होते हुए बोले की “सर ! अंधा क्या मांगे दो आँखे ! (नेकी और पूछ –पूछ ) मैं निश्चित रूप से इनके साथ ही जाना चाहूँगा – जहाँ भी यह मुझको अपने साथ में ले जाना चाहे” ….. बिग बी :- “नहीं -२ राजकमल जी आप गलत समझ बैठे है .. तेरहवें प्रहसन पर मची भगदड़ ..कितना कुछ हरदम आप को याद रहता है वहां भी नहीं भूले ?? क्योंकि इसका सही उत्तर है जीरो यानी की एक भी नहीं …… इतना सुनना था की के.बी.सी. की क्रिएटिव और तकनीकी टीम में जबरदस्त भगदड़ मच गई ... अंत में अमित जी के फैन के रूप में आप ने जो हवा दी उससे दिल ठंडा हो गया जय श्री राधे भ्रमर ५

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

प्रिय संतोष जी .... सप्रेम नमस्कार ! टैक्स काट कर शायद एक करोड़ पिचहतर लाख आप सभी के हिस्से में आयेंगे .... मेरे ख्याल से इतने काफी होंगे मेरे प्रति आप सभी का स्नेह हमेशा ही बनाए रखने के लिए ....हा हा हा हा हा हा आपका हमेशा के लिए बना रहूँगा कर्जदार जय हिंद ! ************************************************************************* आप जब डैशबोर्ड में एड निऊ पोस्ट में अपनी पोस्ट लिखते है या फिर कापी पेस्ट करते है तो उसके उपर इमोशन वाला एक स्माइली है ..... उसके साथ बड़े अक्षर में A यानी की एड टेक्स्ट कलर वाला खाना है ..... अब आप अपनी पोस्ट का कोई भी हिस्सा सलेक्ट करके ऐ पर क्लिक कीजिये ..... रंगों की लिस्ट में से अपनी पसंदीदा रंग वाली डिबिया रूपी खाने पर क्लिक करने के बाद फिर से सलेक्ट किये हुए लेख के हिस्से पर क्लिक करेंगे तो लेख का वोह हिस्सा आपके चुने हुए मनचाहे रंग में रंग जाएगा ..... अब तो आपको यकीन आ गया होगा की सिर्फ रंगीन मिजाज ही नहीं बल्कि हर कोई ब्लागर अपनी पोस्ट को ईस्टमैन कलर में रिलीज कर सकता है ..... शुभकामनाओं सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरर्णीय राज जी .....सादर अभिवादन ! अजी साहिब ! बकरे की जान चली गई बिना बकरीद के ही और आपको लुत्फ ही नहीं आया पूरा .... ल्व्किन मेरे लिए इतनी तसल्ली ही है की आपकी नजरो ने समझा प्यार के काबिल मुझे ...... दरअसल पिछले कुछेक दिनों से मन में कुछ विचार उमड़ घुमड़ रहे थे इस बारे में अस्पष्ट से ..... लेकिन खुद ही इस बारे में आश्वश्त नहीं था की एक लेख इस विषय पर लिख पाऊंगा ..... कुछ टुटा फूटा सा जल्दबाजी में ही लिख कर पोस्ट कर दिया था ..... लेकिन सबसे पहले वाली प्रतिकिर्या ने ही इस पोस्ट की पोल खोल कर रख दी ..... फिर से दिमाग के घोड़े दोड़ाए तो अपने वर्तमान स्वरूप में यह ठीक ठाक लेख बन सका .... अब आप खुद ही सोच सकते है की पहले यह किस हाल में होगा ..... आपका तहेदिल से शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय पार्थ जी ..... नमस्कार ! अभी एक और बात आपकी तेज निगाहों में नहीं आ पाई है ..... फोन ऐ फ्रैंड वाले सज्जन +सज्ज्नी को इस बात का इल्म नहीं होता की इस समय के.बी.सी. का प्रसारण हो रहा है ..... इसलिए उनको यह पता नहीं होता की उस अचानक आये हुए सवाल का जवाब देना है ..... वरना अगर लिव टेलीकास्ट में फोन काल आये तो कोई जवाब देने वाला सवाल पहले से ही अपनी टी.वी. स्क्रीन पर पढ़ने के बाद उसका सही उत्तर दे सकता है .....बिग बी का मैं बहुत बड़ा प्रशसंक हूँ ..... एक जगह काम करने के पूरे समय तक मैं एक कुलीग का यह कह कर बेवकूफ बनाता रहा की मैं इनको पसंद नहीं करता ..... सच में बड़ा मजा आता था जब वोह इनकी तारीफ करता था और मैं उसकी हरेक बात काटता चला जाता था ..... एक करोड़पति का आपको शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय पियूष भाई .....नमस्कार ! भला आपने कभी किसी हलवाई को अपनी ही मिठाई को खाने की इच्छा जताते हुए देखा है .....वैसे आपका आईडिया बढ़िया है नारियों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने का .... लेकिन केवल नारिया ही क्यों उनके साथ साथ निर्धन लेकिन प्रतिभावान छात्रों को भी पढ़ाई का मौका मिलना चाहिए –हरेक इच्छुक पर माता सरस्वती की किरपा बरसनी चाहिए .....यह इत्तेफाक ही है की इस लेख में प्रियांका जी के कहने पर अनेको सुधार करने पर आप पहले ब्लागर साथी है जिन्होंने इसको पढ़ा है इसीलिए आपको यह लेख किसी हद तक सही लगा है ..... यदि सभी नहीं तो ज्यादातर लोग ही आपकी तरह से सोचने लग जाए तो यह समाज स्वर्ग बन जाए ..... आपका तहेदिल से शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रियांका जी ....नमस्कार ! सबसे पहले तो आपका धन्यवाद देना चाहूँगा जो की आपने मेरे इस लेख की कमिया बतलाई ..... लेख के ज्यादा बड़ा हो जाने के खतरे के कारण इसको छोटा रखा था .... लेकिन अब इसमें जरूरी सुधार कर दिए गए है जिनका श्रेय पूरी तरह से सिर्फ आपको जाता है .... जहाँ तक मैं समझता हूँ इस मंच पर अबोध जी के इलावा आप भी कम से कम मेरे लेखों को पूरा पढ़ा करती है ..... यहाँ पर ज्यादातर ब्लागर मेरी तरह बिना पढ़े ही कमेन्ट करने वाले है इसलिए उनको ज्यादा कष्ट न देने के लिए इसको छोटा रखा था ..... वैसे तो मैंने गेम शो के दोरान ही इलाहाबाद में जमीन खरीद कर एक घर बनाने की बात की है ..... लेकिन मेरा असली मकसद होगा अपने दादा जी की बिक गई हवेली को दोगुने दामो पर फिर से वापिस खरीदना .... उसके इलावा एक नया मंच “नव जागरण मंच” भी बनाने का इरादा है जहाँ पर ब्लागरो को मेहनताना मिलेगा लेकिन ब्लॉग फीचर्ड करने के लिए रकम ली जायेगी -*स्तर पर बिना कोई समझौता किये हुए ...... आप बताइयेगा की एक करोड़पति से बाते करके आपको कैसा लगा ?..... आपका बहुत -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय अबोध जी .....सप्रेम नमस्कार ! आपकी शिकायत को मैंने इस लेख में दूर करने का प्रयास किया है ..... इस सारी फ्लैशबैक वाली फिल्म के आप मुख्य सूत्रधार बने है ..... एक और फिल्म "बिरला के गुरु" में भी आपका छोटा सा मगर बड़ा ही अहम रोल है .... मैंने देखा और सोचा तो पाया की मेरे कारण ब्लागरो को महत्त्वपूर्ण जानकारिया तो नहीं मिल पाती तो क्यों न अपने अनुभूत प्रयोग आप सभी के साथ सांझे कर लिए जाए तो इसमें हर्ज ही क्या है ..... शायद किसी का काम बन जाए .... वैसे ठंडा तेल आँखों की पुतलियो पर हलके से मसाज करने वाला प्रयोग तो अभी तक नहीं भूले होंगे ?... हार्दिक आभार सहित मुबार्कबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/05/“भ्राता-राजकमल-की-शादी”/

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय राहुल भाई ....नमस्कार ! आपकी इस मजेदार प्रतिकिर्या से मुझको अपना पहले लिखा हुआ लेख “बिजली –रानी” याद आ गया जिसमे मैंने गोरी बीवी वाले पति के घर का बिजली का खर्चा कम होने की बात कही थी ..... बात चली है तो आपको बताना चाहूँगा की मेरे ब्लॉग पर जिस बालक की फोटो लगी है –फेसबुक पर इसका दूसरा भाई भी है .....यह दोनों जुड़वाँ होते हुए भी सौतेले है क्योंकि इनकी माता तो एक है लेकिन इनके बाप अलग अलग है –जिस पर की मैंने थोड़े दिन पहले ही लेख “करिश्मा कुदरत का” लिखा था ..... आपकी शुभकामनाये पूर्ण रूप से असर करते हुए रंग ले आये इसी आशा में आपका आत्मिक आभार :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/05/“भ्राता-राजकमल-की-शादी”/

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय भ्रोदिया जी ....नमस्कार ! वोह दूरदर्शन के बोलबाले का जमाना था ..... मैं खुद भी हैरान होता था की अपनी सिर्फ एक अदद पत्नी पर ही वोह कलाकार किस प्रकार नित नई हास्य वयंग्य से सरोबार नित नई मजेदार रचनाये लेकर हाजिर हुआ करता है .... यही कह सकते है की “गाड गिवन गिफ्ट” ..... और आजकल किसी और पर कुछ कहने का जमाना ही नहीं रहा है ..... आपका निकटतम मित्र भी आपकी कौन सी बात का बुरा मान कर नाराज हो जाए , आप इसका अपने सपने में भी पहले से कुछ अनुमान नहीं लगा सकते है ..... और जहाँ तक मेरी खुद की बात है –मेरे से तो हर समय कोई न कोई हमेशा नाराज रहता ही है ..... अब तो इस सब की आदत सी हो गई है ..... उम्मीद है की अपनी बारी आने पर आप कभी बुरा नहीं मानेंगे ? हा हा हा हा हा हा आपका तहेदिल से शुक्रिया :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/05/“भ्राता-राजकमल-की-शादी”/

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय  पियूष भाई .....सप्रेम नमस्कार ! आप अब जब आ ही गए है तो हम सभो को यह उम्मीद करनी चाहिए की अब आपकी हलकी फुलकी लेकिन गुढ़ और गहन अर्थ लिए हुए सीधी और सरल तथा हलकी फूलको और मनोरंजक लेख निरंतर ही पहले की तरह से पढ़ने को मिलते रहेंगे ..... मैंने अपनी नई पोस्ट में खुद को मज़ाकिया तौर पर ही डाक्टर लिखा है ....आपने तो सच में ही बहुत अच्छा मजाक किया है .... आत्मा प्रसन्न हुई ..... जो बभी जितनी इज्जत का हकदार है उसको उतनी यहाँ पर जे.जे. और ब्लागरो द्वारा मिलती ही है .... और जहाँ तक हमारी खुद की बात है आप जानते ही है की अपने हक के लिए हम लड़ना भी जानते है .... आपने भी तो अपना चुराई गई रचना को वापिस पाकर अपना सन्मान पहले से कहीं ज्यादा पाया है ..... मुबार्कबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/05/“भ्राता-राजकमल-की-शादी”/

के द्वारा: Rajkamal Sharma

माई डीयर .... लहर जी ..... नमस्कार ! बबम बम बम –बम लहरी –लहर लहर लहर लहरी !!! इसमें कुछेक सच्ची बातो के साथ कई चुटकुलों का समावेश भी किया गया है .... लेकिन मेरा मुख्य मकसद तो दुल्हे राजाओं को यह बताना और जतलाना था की उस नव ब्याहता का एक नए घर में बिलकुल नए लोगों के बीच सभी जरूरी जरूरतों का ख्याल प्राथमिकता से रखना चाहिए ..... आपको मेरा प्रयास पसंद आया यह जान कर बहुत ही अच्छा लगा +मन बाग -२ हो गया .... हार्दिक आभार सहित मुबार्कबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/05/“भ्राता-राजकमल-की-शादी”/

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय जवाहर लाल जी ..... सादर अभिवादन ! आपको मेरी इस शादी की भी प्रसन्नता हुई यह जान कर मन को बहुत ही सकूं पहुंचा है .... अगर भगवान ने चाहा तो छठी भी हो ही जायेगी -बस आप सभी का आशीर्वाद इसी प्रकार मिलता रहना चाहिए .... वैसे जब तलक कोई छठी का दूध पिलाने वाली न मिल जाए यह सिलसिला चलता ही रहना चाहिए .... और अगर साथ में रोज मोहन जी का खालिस दूध भी मिल जाया करे तो फिर यह सिलसिला अंतहीन भी हो सकता है ..... आपका हार्दिक शुक्रिया मुबार्कबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/05/“भ्राता-राजकमल-की-शादी”/

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय शाही जी ..... सादर प्रणाम ! आपका आशीर्वाद सर +माथे पर ! शायद अब आप यही चाहते है की मैं शादिया करनी छोड़ डालूं .... ऐसा लगता है की अब आप आशीर्वाद देते -२ थक गए है .... हा हा हा हा लेकिन मुझको तो ऐसा लग रहा है की मेरे लिए तो आपके पास सिर्फ शिकायते ही बच गई है .... सरे के सारे आशीष और आशीर्वाद आपने अपनी होने वाली बहु के लिए ही बचा कर रख रखे है यकीनन ... कोई बात नहीं आने दो उस हूर परी को देखता हूँ की उसमे कौन से सुरखाब के पर लगे होंगे जिसके कारण वोह आपके मीठे वचनों की अधिकारी बनेगी .... वैसे मेरा दिल ही जानता है की कितने दुखी दिल से मैंने इस लेख को पोस्ट किया है मजबूरी में .... इसको किसी खास वक्त के लिए बचा कर रखा हुआ था -इसको करीब छह महीने पहले लिखा था .... खैर तब इसीको ही दुबारा पोस्ट कर दूँगा -लेकिन तब आप यकीनन नाराज नहीं होंगे ..... हा हा हा हा (आपके घर -(ब्लॉग ) पर आने का सोभाग्य ह्म्क्प आप कब प्रदान करेंगे ) इस शुभ कारज की आप सभी को ढ़ेरो मुबार्कबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/05/“भ्राता-राजकमल-की-शादी”/

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय पियूष भाई .....सप्रेम नमस्कार ! मेरे लिए जल्दी से कुछ भी बदलता नहीं है ....मेरी नजर में पहले जितनी आपकी इज्जत थी आज भी उतनी ही है और रहेगी भी ... हमारे प्रिय अबोध जी की तो हो ही जायेगी क्योंकि वोह एन.आर .आई . के तो आगे पीछे लड़की वाले लाइन लगा कर घूमते है .... आप अबोध जी की होने वाली पत्नी की रिश्तेदारी में मेरी ही शादी (असली वाली ) करवा दे तो सारी उम्र हम दोनों और हमारे होने वाले बच्चे आपके एहसानमंद रहेंगे ..... आपको इस मंच पर दुबारा पाकर हार्दिक खुशी हुई ..... अबोध जी की तरह आप अकेले जी है जिनको की सभी मानते है आदर देते है ..... स्वागतम सहित हार्दिक आभार न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/05/“भ्राता-राजकमल-की-शादी”/

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय अशोक जी ..... सादर अभिवादन ! अब जब हम हरेक मामले में पश्चिम की नकल करने ही लग पड़े है तो इस बात से क्या फर्क पड़ता है की दुल्हन “अपने खुद के बच्चे” दहेज में लेकर आई बजाय “हमारे- बच्चो” के..... आप बिलकुल फिकर मत करे इस मामले में नारिया पूरी उस्तादनी होती है –फिर चाहे वोह शहर की छोरी हो या फिर गाँव की गोरी.... इस राज की बात को आप अपनी काबिल भाभी के श्री मुख से खुद ही सुन लीजियेगा –लेकिन पहले आवश्यकता तो पैदा कीजिये –हमारा पेटेंट आविष्कार भी आपके पास बिना किसी फ़ीस के पहुँच ही जाएगा ..... और रही बात निमंत्रण की तो अब यह अनोखा काम कोई पहली बार तो मैंने किया नहीं .... आप हमारे प्रिय वाहिद भाई जी की प्रतिकिर्या को पढ़ने पर जान लेंगे की यह दुस्साहस मैंने पांचवी बार किया है .... मुसलमानों से भी एक कदम आगे ..... भगवान कभी तो मौका देगा ही की मुझसे किसी को भी कोई शिकवा और शिकायत न रहे ..... आपका बहुत -२ आभार :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरर्णीय भ्रमर जी ..... सादर प्रणाम ! आपने हमेशा की तरह से न केवल मेरे पूरे लेख को ही पढ़ा है बल्कि उस पर अपनी सार गर्भित प्रतिकिर्या देकर अपनी अमूल्य प्रतिकिर्या से लेख का महत्व बढाते हुए लिखने को सार्थक कर दिया है ..... आप उपर हमारे वाहिद भाई की प्रतिकिर्या के पढ़ने पर पाएंगे की मैं इस मंच पर बहुत बार शादी रचा चूका हूँ –लेकिन अफ़सोस की हनीमून सिर्फ दो बार ही मना सका ....(इस मंच पर हनीमून पर सिर्फ दो ही लेख लिख कर पोस्ट कर सका हूँ )..... मैं सभी का भला ही चाहता हूँ इसलिए ही तो कल एक नुस्खा आपके ब्लाग पर और तिन आज अपने इस ब्लॉग पर सांझे कर लिए है ..... बाकि हँसने हंसाने के लिए कुछ तो छूट आप मुझको देंगे ही ..... आपका हार्दिक आभार जय श्री राधेकृष्ण :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

लाजबाब दवाई है आप की जैसे पहले तीर छोड़े और मार कर लौट आया ..फीस नहीं चुकाई तो आराम ही नहीं ...धन्य हैं गुरुवार ...मुबारक हो शादी रहे आबाद ..फ्री में मिले जुड़वाँ क्या बात है सच में और क्या चाहिए न मेहनत न ..और बड़े होते तो कम कर खिलाते भी बुढ़ापे की लाठी बन जाते ...लेकिन ससुरे ने ये क्यों कहा की चूहा भी पैदा ..जो राज जादुई राज से हाथी तक पैदा ...ह हां ...ऐसे ही कई जगह हंसाया आपने अब बताने पर उसकी भी फीस मत मांग लेना ..... आखिर आपको इसमें दिक्कत क्या है? ….. राजकमल जी बोले की “लगानी चाहे इसने है तो क्या ? , लेकिन उसको चट तो मैंने ही करना है इसलिए लिपस्टिक मेरी पसंद की ही होनी चाहिए” ….. इसलिए आज से मैं तुम्हारे संग अँधेरे में ही मुकेश और लता जी का यह यह युगल गीत गाऊंगा “हम दोनों मिल के कागज के दिल पे चिट्ठी लिखेंगे जवाब आएगा” ज्यादा जबाब के चक्कर में मत पड़ियेगा....हम दो हमारे दो से अब तो एक पढ़े नहीं क्या ?? मस्त ...दिल बाग़ बाग़ हुआ जय श्री राधे भ्रमर ५

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

आदरणीय सज्जू चोधरी जी .....सादर अभिवादन ! यह एक आम आदमी का अज्ञानता भरा दावा है (हास्य वयंग्य में ).... पुत्र अपने परम पिता को सिर्फ अपना मान सकता है और उसके सम्पूर्ण प्यार पर अपना दावा करते हुए हक जमाने की कोशिश कर सकता है ..... जब कोई भगवान को प् लेता है तो फिर वोह सम्पूर्ण रूप से उसका ही हो जाता है ....... भगवान भक्त का और भगवान तो भक्तो के हमेशा से होते ही है –शायद वोह यह कभी नहीं कहते की तेरा प्यार और समर्पण मेरे लिए कम है –तेरे से ज्यादा तो सज्जू चोधरी जी का है ...... जिसने उनको एक बार प् लिए फिर उसका प्रेम जैसा भी है जितना भी है –प्रभु को पूर्ण रूप में स्वीकार होता है शायद ..... भगवान कभी यह नहीं कहते की मुझको सारा संसार (बाकि का ) भी देखना है –मुझको और भी काम है –वोह जब आपके होंगे तो पूर्ण रूप से सिर्फ और सिर्फ आपके ही होंगे ...... वोह एक ही वक्त में पुरे ब्रहमांड के सभी प्राणियो को पूर्ण रूप से उपलब्ध हो सकते है अलग अलग से ...... आप किरपा करके आदरणीय वाजपाई जी को दिया गया मेरा जवाब अवश्य पढे ..... वैसे मेरे विचारों और दावों से हर किसी का सहमत होना जरूरी भी नहीं है ..... मैं अपने विचार कभी भी लादता नहीं हूँ –अगर आपको कोई बात पसंद नहीं है तो आपके दृष्टिकोण और विचारों का भी मैं आदर करते हुए स्वागत करता हूँ ..... एक बात का दुःख है की भगवान तो हमारा होना चाहता है –शायद हम ही उसके नहीं हो पाते है –मैं खुद भी इसी श्रेणी में आता हूँ ..... आभार सहित आपको सपरिवार नए साल तक आने वाले सभी त्योहारों की हार्दिक बधाई

के द्वारा: rajkamal

प्रिय रवि भाई ..... सप्रेम नमस्कार ! मैं भी आपकी बात से पुरु तरह से इत्तेफाक रखता हूँ ..... एक ब्राह्मण को अपने तप की शक्ति के कारण नजरों द्वारा उड़ती हुई चिड़िया को भस्म कर देने पर जब घमण्ड हो गया तो एक पतिव्रता नारी जोकि अपने पति की सेवा कर रही थी –ने उसी ब्राह्मण को शाप देने से पहले ही चेताते हुए काशी में जाकर ज्ञान प्राप्त करने के लिए कहने पर उसको वाहन पर एक कसाई द्वारा ज्ञान की प्राप्ति हुई जोकि अपना कसाई वाला करम करते हुए भी अपना धर्म कर्म कर रहा था ..... मैं बचपन की इस सुनी हुई कथा से बहुत प्रभावित हूँ ..... इसलिए आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूँ ..... आपके अमूल्य विचारों के लिए आपका हार्दिक आभार नए साल तक आने वाले सभी त्योहारों को सपरिवार हार्दिक बधाइयाँ आपके ब्लाग का लिंक ....?

के द्वारा: rajkamal

प्रिय भरोदिया जी .....नमस्कार ! आप भी इस बात को जानते है की ना तो मैं कोई साधू सन्यासी ही हूँ और न ही ब्लागर साथी मेरे भक्त ......वैसे भी आजकल के बदलते हुए जमाने के संग लोगों की रूचि के अनुसार ही सत्संग में धार्मिक बातों के इलावा आर्थिक +समाजिक तथा कभी कभार किसी हद तक राजनैतिक बातों का भी समावेश हो जाता है .....जब हम लोग सत्संग की बातों को अपने घर पर वापिस आकर के भूल जाते है .....तो फिर इन ब्लागों की तो बिसात ही भला क्या होगी ..... और बातका उसकी असर होता है जोकि खुद भी ....... जब मैं खुद ही अधूरा हूँ तो मेरी बातों और ब्लॉग का असर भी तो वैसा ही होगा न ..... आपकी प्रसादिया भक्तो वाली मजेदार बात मैं हमेशा के लिए याद रखूँगा ..... आपको भी सपरिवार दीपावली पर्व की ढेरों मुबारकबाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय वाजपाई जी ..... सादर प्रणाम ! धर्म पर आपकी मजबूत पकड़ के बारे भला कौन नहीं जानता होगा यहाँ ?..... इसलिए आपको कुछ कहना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है ..... लेकिन अपनी तुच्छ बुद्धि के अनुसार इतना जरूर कहना चाहूँगा की "एक साधक को अगर नंगा रहने से ज्ञान मिल जाता है तो इसका मतलब यह कतई नहीं लगाया जाना चाहिए की हमको भी सिर्फ नग्न रहने से ज्ञान मिल जाएगा .... दरअसल उसको तो ज्ञान प्राप्त होने के बाद ही कपड़े अनावश्यक लगे लेकिन दूसरे ज्ञान प्राप्ति से पहले ही यह सब कवायद करने लग जाते है ..... लेकिन यहाँ पर उलटी बात सिर्फ मजाक में कही गई है -वैसे वास्तव में यह एक तरह से सच भी है -इन अर्थो में की हम सब उस परमपिता की ही संताने है .... लेकिन भगवान यीशु असल में ही भगवान के बेटे थे (है )..... आप जैसे विद्वान की सराहना से मुझको नैतिक बल मिला है .... आपका हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

:) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o माई डियर - राही अंजान अनजाना जी ...... नमस्कार ! अब जबकि आपने अपना नाम ही ऐसा रख लिया है तो इसको सार्थक भी तो करना ही है ..... आप राह से अंजान है तो ऐसा होना स्वाभाविक ही है .... हा हा हा हा हा हा अरे भाई !अगर मैं आप से नाराज हो गया तो फिर भला आप में और उस भगवान में भला क्या फर्क रह जाएगा ?..... वोह भी देर से देता है और आप भी ! इसलिए माफ़ी मांग कर शर्मिन्दा मत करे ....... आपने उचित बात कही है की पर निन्दा रस में पूरी तरह भीगते हुए +सरोबार होते हुए हम भगवान को भूल ही बैठते है ..... इससे बचने के लिए बहुत ही सतर्कता और जागरूकता की जरूरत होती है ..... मेरे लिए भगवान से दुआ कीजियेगा की मेरे मन के विकार धीरे -२ कम होते हुए दूर हो सके .... आपका दिल की गहराइयों से अभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय संतोष भाईजान ..... आदाब ! यह बात मैंने अपने अनुभव से नहीं बल्कि आँखों देखी हुई कही थी ..... हमारे दूर के रिश्तेदार की शादी के वक्त दुल्हे मियां पंडित जी द्वारा फेरों के समय यह कहने पर की तुम्हारे द्वारा अर्जित पुण्य में से आधा हिस्सा तुम्हारी अर्धांगिनी को मिलेगा लेकिन उसके पुण्य सिर्फ उसके ही रहेंगे ..... यह बात सुनकर वोह भड़क कर फेरों से इनकार करके उठ खड़ा हुआ ..... सभी रिश्तेदारों और पंडित जी द्वारा समझाने पर की यह रीति है और इस शपथ को केवल तुम्हारे लिए बदला नहीं जा सकता , बहुत देर के बाद वोह शादी के लिए राजी हुआ ..... हम सभी समझते थे की ऐसे विद्रोही तेवर वाले योगेश की अपनी पत्नी तोशी पर हकुमत चलेगी ..... लेकिन उस एक दिन के शहनशाह ने बाकि की अवधी के लिए गुलामी करना ही बेहतर समझा ..... उन बजुर्गवार को थोड़ी देर तो नशा रहता ही है लेकिन उसके उतरने से पहले ही अगली खुराक वाली डोज देना जरूरी होगा ......हा हा हा हा हा आपके जनहित में किये गए इस परिश्रम को सलाम करता हूँ हार्दिक आभार सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय भ्रमर जी ,.सादर प्रणाम आदरणीय गुरुदेव ,सादर प्रणाम गुरुदेव की नीयत पर शक तो हो ही नहीं सकता,...लेकिन बदलते अंदाज चेलों को कभी कभी हैरान जरूर कर देते हैं ,..ईमानदार इंसान को इस हिन्दुस्तान में अभाव +तकलीफें+बेकदरी ही मिलती है,..पूज्य पिताजी को मेरा नमन .. गुरु का दर्जा पिता समान होता है ,..तो पिता की कमाई पर बच्चों का स्वाभाविक हक़ तो है ही ,..हाँ शिष्य के भजन/सुमिरन का कुछ प्रतिफल गुरुदेव को अर्पित होना ही चाहिए ,..मैंने सुना था की पत्नी के पुण्य का हिस्सा पति को मिलता है,..अब उल्टा हो गया ,...चलो रहेगा तो घर में ही न .. वो बाबा जी की पोस्टों पर मैंने थोडा प्रयास किया है ,.पता नहीं वो पढेंगे भी या ...और पढ़कर समझेंगे भी या नहीं ...हार्दिक आभार जय श्री कृष्णा

के द्वारा: Santosh Kumar

आदरणीय तमन्ना जी .....सादर अभिवादन ! अब हर कोई माता कुंती जी कि तरह तो भाग्यशाली नहीं न होता कि जिसके हरेक दुःख में भगवान खुद सशरीर अंग संग रहे और हरेक तरह कि मदद करे .....जिसके कारण कि उन्होंने भगवान से सिर्फ दुखो कि ही कामना कि थी ..... हम आम जनों कि जिंदगी में तो लम्बी दुखो कि काली रात के बाद छोटा सा सुबह कि रौशनी का एक टुकड़ा नसीब होता है अब हम उस समय में भगवान को याद करे चाहे न करे दुःख कि काली स्याह रात फिर से अपने विकराल जबड़े फेलाए हमारे स्वागत के लिए खड़ी होती है ..... भगवान को याद कर लेने से सुबह के उजाले के टुकड़े कि लम्बाई नहीं बड़ पाती लेकिन रात कि कालिमा कम जरूर हो जाती है ..... आपकी प्रतिकिर्या के लिए तहेदिल से शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय परवीन जी .... सादर अभिवादन ! वाकई आपने बाकि सभी ब्लागरों से हटके इस बार भी एक ताजगी भरी जुदा बात कही है इसके लिए आपको ढेरों धन्यवाद ..... लेकिन मेरे साथ तो यह समस्या हूँ कि लाइन ही ऐसी चुनी है कि सभी मेरी सीधी बात का भी उल्टा मतलब निकाला करते है ...... एक बार वयंग्य लिख कर पता नहीं कितने समय के लिए नराजगी झेलनी पड़ जाए , पता नहीं .... अब तो आदत सी ही चली है ऐसे पाप कमाने कि क्योंकि घोड़ा घास से यारी करेगा तो आखिर खायेगा क्या ? अभी इस के बाद लगातार दो पोस्ट ऐसी डाल दू मेरे सभी स्नेही सज्जन मुझ से नाराज होकर शिकायत करने लग जायेंगे ..... इसलिए वयंग्य रूपी शेर कि सवारी तो अब करनी ही पड़ेगी ..... हा हा हा हा हा आपका तहेदिल से शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय डाक्टर साहिब ! सादर प्रणाम ! एक डाक्टर का दूसरा रूप वोह भी होता है जिसमे कि वोह भगवान का दूसरा रूप कहलाता है ..... खुद मुझे अनेको बार इसका एह्सास हुआ है जब किसी ज़ख्म पर खुद का और घर के किसी सदस्य का छूना असहनीय होता है तब डाक्टर का स्पर्श उसी ज़ख्म पर सहने योग्य बन जाता है ..... उस बालो में चांदी जैसी सफेदी लिए सठियाये हुए को अगर हम अनेको ब्लागर हर बार शर्मशार करेंगे तो यकीनन सफलता जरूर मिलेगी ही ही ..... और इस लाठी पकड़ +धरती धकेल वाली उम्र में उन्होंने मर्दानगी का क्या अचार डालना है ?..... इसलिए बेधड़क होकर ओवरडोज दे ही दी जाए उनको आपकी नीम वाली दवा कि ..... खुदा खैर करे ..... आपका अग्रिम समर्थन पाकर मुझको बेहद आत्मिक और नैतिक बल मिला है ..... आपका आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय संतोष भाई .....नमस्कार ! मेरे यहाँ पर नेट कि स्पीड बहुत ही धीमी है .....कई बार तो दुखी होकर मन करता है कि सब कुछ छोड़ ही दिया जाए ..... आपने मेरा हिस्सा देने कि बात कही है तो मैं इतना अर्ज करना चाहता हूँ कि पति के पुण्य कार्यों में अर्धांगिनी का आधा हिस्सा होता है ..... आपके पास बाकि बच गए आधे में से भी अगर मैं कुछ लेता हूँ तो स्वार्थी कहलाऊंगा ..... यह तो मजाकिया बात थी असल में गुरु कि कमाई ही शिष्यों को मिलती है और मिलनी भी चाहिए ..... जिंदगी के गोरखधन्धे और उलझनों तथा दुश्वारियो + जिम्मेवारियो में हम सभी कुछ इस तरह से उलझ कर रह गए है कि हम वास्तव में ही एक सिमित गोल दायरे में ही घूम रहे है ..... हम अपनी -२ उलझनों में से बाहर निकले और जहाँ तक संभव हो उसको याद कर सके ..... यहाँ पर सभी बुद्धिजीवियो के संग का मोह हमेशा बना ही रहता है और उस पर आपके स्नेह का बन्धन सुभानल्लाह ! आप हमेशा सफल हो जीवन के हरेक क्षेत्र में इसी कामना के साथ आपका आभारी

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय गुरुदेव ,.सादर प्रणाम हास्य व्यंग्य लिखने से पाप बढ़ ही नहीं सकते ,..आप खलनायक भी नहीं हो सकते ,..यदि हैं तो नायकों से ज्यादा अच्छे खलनायक होते होंगे ,..मुझे भगवान् को याद करने के लिए शायद इस ख़त की तो जरूरत नहीं है ,.लेकिन इबादत में गुरु को हिस्सा मिलता ही है ,..तो आपको निश्चित ही मिलेगा ,..मुझे इस बात की ख़ुशी ही होगी ,..और प्रार्थना जीवन का हिस्सा होता है ,..इसे छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं पैदा हो सकता है ..जीवन डोर कोई छोड़ सकता है क्या ??... मैं जानता हूँ की सभी सवालों के जबाब जरूरी नहीं होते हैं ,..सुविधानुसार ही जबाब देने चाहिए ,..लेकिन मूरख यही तो होता है ,..खैर,..मैं एक अलग स्वभाव का मूरख हूँ ,.जिसे ज्यादा किसी से कोई मतलब तो नहीं है ,..और ना इस बात की परवाह है कि कोई क्या सोचता होगा? ,..परवाह इतनी जरूर होती है कि मैं क्या सोचता हूँ ,..कहीं मैं गलत तो नहीं ?...हो भी जाता हूँ ,..फिर से सुधरता हूँ ,...यही मेरा चक्र है ,..गोल-गोल खुद के चारों तरफ ही घूमता हूँ ,.और इसी में दुनिया दिख जाती है ,..एक मूरख यात्री हूँ ,...जो भाग्य के सहारे यात्रा कर रहा है ,..पूरी होने पर ही पूर्ण ख़ुशी मिलेगी ,...साथिओं की खुशिओं में जरूरती खुराक मिल ही जाती है ,..इसी मंच पर प्रकाशित एक कथन याद आ रहा है ,.. भजन का तार ना टूटै-तेरा दरबार ना छूटे .......

के द्वारा: Santosh Kumar

आदरणीय गुरुदेव, सादर प्रणाम ! गुरुदेव अब यह अधिकार हमसे मत छीनिए, आप को झटका देने का हमारा मकसद नहीं था, इसीलिए अंत में क्षमा मांग ली थी | "सेरोगेट मदर" पर आपकी प्रतिक्रिया के सम्बन्ध में निवेदन है - बच्चे का नाम.....????? अब यह मत कह देना कि ....कहीं यह बच्चा .....??? हा.. हा.. हा.. | कहानी का कहानी का पार्ट -टू बनाने का प्रयत्न कर रहा हूँ आप सब का आशीर्वाद रहा तो जल्द ही प्रस्तुत होगा |सफेद बालो वाला सठिया गया है .......... उसकी समझ में ज्यादा देर कोई बात नहीं टिकती |.......नीम वाली दवाई का हैवी डोज से नपुंसकता का खतरा रहता है ........अब इतनी भी कड़ी सजा कम से कम आप जैसा नरम दिल व्यक्ति नहीं दे सकता |.......... संतोष भाई की बात ही कुछ और है वे आल राउंडर हैं शायद कोई हल निकाल लें |.....सैयद भाईजान भी प्रयासरत हैं मुझे यह जानकर तसल्ली है कि मैं अकेला सताया हुआ नहीं हूँ |..........आखरी उपाय की परिणिति .......राजकमल हजारे......के रूप में ......चिंता मत करना गुरुदेव एक प्राकृतिक चिकित्सक होने के नाते मुझे भी लम्बे उपवास का अभ्यास है , आपका पूरा साथ दूंगा | आप सभी को भी सपरिवार दीपावली कि हार्दिक शुभकामनाये | आभार !

के द्वारा: Dr.KAILASH DWIVEDI

आदरणीय प्रिया जी ....सादर अभिवादन ! जिस प्रकार किसी बड़े व्यक्तित्व को हम उनके द्वारा किये गए कार्यों से जानते है ठीक उसी प्रकार आपको जब भी याद किया जाएगा “प्रैस वाले कि बच्ची” नामक लेख रूपी आपकी पहचान से तब तक याद किया जाएगा जब तक आप उससे बेहतर कोई और रचना सामने लेकर नहीं आती ..... लेकिन फिर भी उस लेख का अलग महत्त्व हमेशा बना ही रहेगा .... आजकल के इस भागदौड़ वाले समय में दो पल चैन +शांति और सकूं के कहीं से भी मिले सहेज लेने चाहिए ..... आजके बाद आप जब भी मेरे खुदा के इस खत का ख्याल करने के बाद भगवान को याद करेंगी/करेंगे तो उसका (पुण्य का ) कुछेक हिस्सा मुझको भी मिल जाएगा .... अब यह आपको फैसला करना है कि भगवान को याद करना है कि नहीं ..... देखिये कहीं मेरे हिस्से के चक्कर में याद करना मत छोड़ दीजियेगा ..... मुझे पूरा यकीन है कि मुझको मेरा हिस्सा मिलता रहेगा .... आपका आभार सहित अभिनंदन

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय विनीता जी ....सादर अभिवादन ! आपने एक कड़वी सच्चाई ब्यान कि है , लेकिन मुझको आठवी कक्षा के हमारे पंजाबी के टीचर ने जो एक बात कही थी वोह मुझे आज भी याद है :- आज का इंसान इतना जल्दबाज हो गया है कि चलते -२ धार्मिक स्थान के आगे दो घड़ी रुकने कि बजाय फ़्लाइंग प्रणाम फैंक कर मारता है ..... तुम बच्चे भी स्कुल पूरे समय पर ही आते हो , अगर समय से पहले आ जाओ तो तुम रास्ते में रुक कर भली भांति पूरे मन से माथा टेक कर उस परमपिता का आशीर्वाद ले सकते हो जोकि तुम विधार्थियो के लिए बेहद जरूरी है .... आजके बाद आप जब भी मेरे खुदा के इस खत का ख्याल करने के बाद भगवान को याद करेंगी/करेंगे तो उसका (पुण्य का ) कुछेक हिस्सा मुझको भी मिल जाएगा .... अब यह आपको फैसला करना है कि भगवान को याद करना है कि नहीं ..... देखिये कहीं मेरे हिस्से के चक्कर में याद करना मत छोड़ दीजियेगा ..... मुझे पूरा यकीन है कि मुझको मेरा हिस्सा मिलता रहेगा .... आपका ढेरों शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय अलका जी ..... सादर प्रणाम ! आपने हमेशा ही गरिमामय और शिक्षाप्रद बाते ही कि है और बताई है ..... लेकिन जब मैं यह लाइन लिख रहा था तो मेरा अभिप्राय हास्य वयंग्य द्वारा अर्जित किये गए पाप कर्मो से था .... अब अगर आपके आशीष और शुभकामनाओं से यह और वोह वाले दोनों ही पाप कट जाए तो मुझको भला और क्या चाहिए, अंधा क्या चाहे बस दो आँखे ! आजके बाद आप जब भी मेरे खुदा के इस खत का ख्याल करने के बाद भगवान को याद करेंगी/करेंगे तो उसका (पुण्य का ) कुछेक हिस्सा मुझको भी मिल जाएगा .... अब यह आपको फैसला करना है कि भगवान को याद करना है कि नहीं ..... देखिये कहीं मेरे हिस्से के चक्कर में याद करना मत छोड़ दीजियेगा ..... मुझे पूरा यकीन है कि मुझको मेरा हिस्सा मिलता रहेगा .... आपका हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय वाहिद भाई ..... आदाब ! जिस दिन यह नामुराद पाप न होंगे उस दिन हम भी न होंगे जब तलक जीवन कि साँसों रूपी डोर चलती रहेगी कम +ज्यादा और नगण्य रूप और मात्रा में इनका भी साथ किसी न किसी तरह से बना ही रहेगा ..... वैसे यहाँ पर पापों से मेरा मतलब हास्य वयंग्य द्वारा कमाए गए पापों से था ..... आजके बाद आप जब भी मेरे खुदा के इस खत का ख्याल करने के बाद भगवान को याद करेंगी/करेंगे तो उसका (पुण्य का ) कुछेक हिस्सा मुझको भी मिल जाएगा .... अब यह आपको फैसला करना है कि भगवान को याद करना है कि नहीं ..... देखिये कहीं मेरे हिस्से के चक्कर में याद करना मत छोड़ दीजियेगा ..... मुझे पूरा यकीन है कि मुझको मेरा हिस्सा मिलता रहेगा .... आपका बेहद शुक्रिया मिलेंगे कभी तो उनसे यह पूछेंगे हम क्या खता थी हमारी जिसकी हमको यह सजा है मिली दर्द अपना औरों को तो बताया मगर हमसे है छुपाया (यह अलग बात है कि “और” भी आपकी तरह ही अपने से ही है – हा हा हा हा हा) ********************************************************************

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय राशिद भाईजान ..... आदाब ! यह खुदा का खत मेरा नहीं बल्कि ब्रह्म कुमारियो के गुरुजनों का लिखा हुआ है ..... मैंने तो बस इसमें आज के माडर्न समय के अनुसार इसमें टी.वी. के साथ पी.सी. को भी जोड़ दिया है –मेरा योगदान बस इतना भर ही है .... उन महापुरुषों को शत –शत नमन ..... आजके बाद आप जब भी मेरे खुदा के इस खत का ख्याल करने के बाद भगवान को याद करेंगी/करेंगे तो उसका (पुण्य का ) कुछेक हिस्सा मुझको भी मिल जाएगा .... अब यह आपको फैसला करना है कि भगवान को याद करना है कि नहीं ..... देखिये कहीं मेरे हिस्से के चक्कर में याद करना मत छोड़ दीजियेगा ..... मुझे पूरा यकीन है कि मुझको मेरा हिस्सा मिलता रहेगा .... आपका तहेदिल से शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय साधना बहिन जी ...... सादर अभिवादन ! आपने ठीक कहा है कि स्वार्थवश और पैसे के लोभ में हम अन्धे होकर सभी कुछ भूल चुके है ..... मानवीय सम्वेदनाएँ + रिश्ते नाते सभी कुछ तो इनकी भेंट चढ़कर स्वाहा हो चुका है ..... इसलिए जो बचा है उसको संभालने और सहेजने कि जरूरत है .... मैं माफ़ी चाहूँगा कि मैं समय पर आपकी मदद नहीं कर सका इस वजह से शर्मिंदा हूँ .... *आप कभी भी भूलकर अपने मोबाइल कि सैटिंग में मत जाए *कम्प्यूटर के सी ड्राइव में भूल कर भी कोई छेड़छाड़ मत करे ..... अपना कीमती डाटा कभी भी सी ड्राइव में मत रखे *जब कभी हम अपनी पोस्ट हो चुकी रचना में कोई सुधार करते है तो अक्सर तो नहीं लेकिन कभीकभार ही ALLOW COMMENT ON THIS POST पर अनजाने में ही लगी टिक हट जाती है .... लेकिन आपकी समस्या चूँकि स्वत ही ठीक हो गई है इसलिए इसको तकनीकी समस्या मानना पड़ेगा ..... *आप डैशबोर्ड पर जाकर पोस्ट खोले – एडिट पोस्ट खुल जाएगा ....फिर पोस्ट के नाम के नीचे एडिट पर क्लिक करे ..... काफी नीचे जाकर discussion के नीचे Allow comments on this post के आगे वाले कोष्ठक पर टिक लगा दे ....अब अपडेट पोस्ट करके बाहर आ जाए ....लीजिए गर्मागर्म और ताजे कमेन्ट आपकी सेवा में हाजिर होने शुरू हो जायेंगे (भविष्य में समस्या होने पर इस तरीके का इस्तेमाल करे ) आजके बाद आप जब भी मेरे खुदा के इस खत का ख्याल करने के बाद भगवान को याद करेंगी/करेंगे तो उसका (पुण्य का ) कुछेक हिस्सा मुझको भी मिल जाएगा .... अब यह आपको फैसला करना है कि भगवान को याद करना है कि नहीं ..... देखिये कहीं मेरे हिस्से के चक्कर में याद करना मत छोड़ दीजियेगा ..... मुझे पूरा यकीन है कि मुझको मेरा हिस्सा मिलता रहेगा .... आपका हार्दिक शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय अशोक जी ..... सादर अभिवादन ! गुरवाणी में गुरु महाराज ने फरमाया है कि “सो क्यूँ बिसरे जिनी सभु कछु दिया” दूर क्यों जाए यह ब्लागिंग भी तो हमसे अनजाने में +जान बूझकर कुछ इसी प्रकार के कर्म ही तो करवाती है ..... भगवान आप पर और समस्त मानव जाति पर हमेशा ही खुश रहे .... लेकिन आपका यह ससुर और दामाद वाला किस्सा कुछ समझ नहीं आया ?..... आजके बाद आप जब भी मेरे खुदा के इस खत का ख्याल करने के बाद भगवान को याद करेंगी/करेंगे तो उसका (पुण्य का ) कुछेक हिस्सा मुझको भी मिल जाएगा .... अब यह आपको फैसला करना है कि भगवान को याद करना है कि नहीं ..... देखिये कहीं मेरे हिस्से के चक्कर में याद करना मत छोड़ दीजियेगा ..... मुझे पूरा यकीन है कि मुझको मेरा हिस्सा मिलता रहेगा .... आपका बहुत -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय डाक्टर साहिब .... सादर अभिवादन ! मुझको जोर का झटका जोर से देने के लिए समझ में नहीं आ रहा कि क्या कहूँ ?..... कम से कम आप तो मुझ को पाप का भागी मत बनाए इस तरह गुरुदेव कह कर .... अब तो ऐसा लग रहा है कि मैं अपना नाम राजकमल से बदल कर गुरुदेव ही रख लूँ .... लेकिन तब तक तो मुझे मेरे इसी नाम राजकमल से ही बुलाये मुझे अच्छा लगेगा .... हमारे भीतर का अहम और मैं ही इस सब का जनक है-शायद इसी के कारण ही हम उस खुदा से भी दूर है .... आजके बाद आप जब भी मेरे खुदा के इस खत का ख्याल करने के बाद भगवान को याद करेंगी/करेंगे तो उसका (पुण्य का ) कुछेक हिस्सा मुझको भी मिल जाएगा .... अब यह आपको फैसला करना है कि भगवान को याद करना है कि नहीं ..... देखिये कहीं मेरे हिस्से के चक्कर में याद करना मत छोड़ दीजियेगा ..... मुझे पूरा यकीन है कि मुझको मेरा हिस्सा मिलता रहेगा .... आपका हार्दिक शुक्रगुजार हूँ

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय संतोष भाई ....सप्रेम नमस्कार ! यह आप कैसे कह सकते है ? जब अगली बार हास्य वयंग्य लिखूंगा तो पाप फिर से बढ़ जायेंगे ना ..... हम सभी यहाँ पर एक समान है ..... अपने बारे में तो बस मैं यही कह सकता हूँ कि :- नायक नहीं खलनायक हूँ मैं –जुल्मी बड़ा दुखदायक हूँ मैं .... है प्यार क्या मुझको क्या पता –बस यार नफरत के लायक हूँ मैं ..... आजके बाद आप जब भी मेरे खुदा के इस खत का ख्याल करने के बाद भगवान को याद करेंगी/करेंगे तो उसका (पुण्य का ) कुछेक हिस्सा मुझको भी मिल जाएगा .... अब यह आपको फैसला करना है कि भगवान को याद करना है कि नहीं ..... देखिये कहीं मेरे हिस्से के चक्कर में याद करना मत छोड़ दीजियेगा ..... मुझे पूरा यकीन है कि मुझको मेरा हिस्सा मिलता रहेगा .... आपका ढेरों शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय भ्रमर जी ....सादर प्रणाम ! राम तेरी गंगा मैली फिल्म में फिल्म के नायक के पीछे कुछेक लड़किया पड़ जाति है वोह बेचारा मूर्ख उनसे पीछा छुड़ाने के लिए भागते समय कीचड़ के गढ्ढे में गिर जाता है ..... किसी के यह कहने पर कि तुम तो गढ्ढे में गिर गए हो वोह कहता है कि गढ्ढे में गिरा नहीं बल्कि गिरने से बच गया हूँ .... काश कि मुझमे भी इतनी सी समझ आ जाए ..... आपका आशीर्वाद रहा तो यकीनन सफलता मिलेगी ही मिलेगी ..... आजके बाद आप जब भी मेरे खुदा के इस खत का ख्याल करने के बाद भगवान को याद करेंगी/करेंगे तो उसका (पुण्य का ) कुछेक हिस्सा मुझको भी मिल जाएगा .... अब यह आपको फैसला करना है कि भगवान को याद करना है कि नहीं ..... देखिये कहीं मेरे हिस्से के चक्कर में याद करना मत छोड़ दीजियेगा ..... मुझे पूरा यकीन है कि मुझको मेरा हिस्सा मिलता रहेगा .... आभार सहित -जय श्री राधे कृष्ण

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय अमिता जी ....सादर अभिवादन ! आपकी बात बिलकुल सही है जोकि एक अलग अंदाज में कही गई है ..... लेकिन मैं माफ़ी सहित कहना चाहूँगा कि अगर इस खत कि सही भावना देखी जाए तो भगवान गुलाबी आसमान से नहीं बल्कि हमारे आसपास से ही यह बात कहते है ..... कहने को तो यह भी कहा जा सकता है कि भगवान हमारे भीतर ही कहीं है ..... लेकिन तब उस हालत में इस खत कि रचना नहीं हो पाती .... आजके बाद आप जब भी मेरे खुदा के इस खत का ख्याल करने के बाद भगवान को याद करेंगी/करेंगे तो उसका (पुण्य का ) कुछेक हिस्सा मुझको भी मिल जाएगा .... अब यह आपको फैसला करना है कि भगवान को याद करना है कि नहीं ..... देखिये कहीं मेरे हिस्से के चक्कर में याद करना मत छोड़ दीजियेगा ..... मुझे पूरा यकीन है कि मुझको मेरा हिस्सा मिलता रहेगा .... आपका बहुत बहुत आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय भरोदिया भाई जी ,.नमस्कार आदरणीय गुरुदेव,सादर प्रणाम ,.. आपके बीच संवाद में बहुत सच्चाई है ,..बहुत ही अच्छा लगा ,. एक बात कहना चाहता हूँ ,..भरोदिया भाई जी ने जो नम्बरिंग की है उसमें मुझे एक नंबर और चार नंबर में गहरा सम्बन्ध लगता है ,...शुरुआत एक से होती है ,..बंदा कुछ दिन बाद चार नंबर की सोचने लगता है ...कापी पेस्ट तो लोग करते ही हैं ,.अभी एक महाशय उदयपाल पर श्री अरुण दवे जी ने अपनी रचना कापी पेस्ट करने का आरोप लगाया ,..आपने भी उनको पूछा ही था ,. मेरी आप दोनों से विनती है ,.. रक्षा करते रहना ,..कही कोई दूसरी साईट पर अपना भी पेस्ट न लगा रहा हो ,.. बहुत आभार और प्रणाम (भरोदिया भाई जी,. मैंने आपके ट्रिपल कमेन्ट डिलीट नहीं किये हैं ,..वहां पर पढ़ना और जरूर बताना ) http://santo1979.jagranjunction.com/

के द्वारा: Santosh Kumar

प्रिय सैयद भाई ...... आदाब ! अब आपके बारे में क्या कहूँ , जबकि मैं खुद किस श्रेणी में आता हूँ यह बात ही सबको नहीं बताई है ...... वैसे भी यह लेख सिर्फ नए ब्लागरो से ही रिलेटिड है ...... अपने खुद के बारे में कहना चाहूँगा :- "जिस प्रकार बच्चों के मुंडन संस्कार (उपनयन ) के समय बच्चों का नामकरण किया जाता है ठीक उसी प्रकार कुछ चुनिन्दा ब्लागर अपनी पहचान आंशिक रूप से छुपाने के लिए या फिर खुद की ही आत्म संतुष्टि के लिए अपना नाम बदल लिया करते है .... बस फर्क इतना है की वहां पर "नई लुक" मिल जाने पर एक नया नाम दुसरा नाम "टकलू" भी मिलता है जबकि यहाँ पर सिर्फ नया नाम ही साथ में रहता है ...... आपकी सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय भरोदिया जी ..... नमस्कार ! आपने पुरानी दान फिल्म तो देखि ही होगी यकीनन ...... जेल में गुंडों के बीच में फंसा, प्लान्ट किये गए नकली डान की हालत तो आपने देखी ही होगी ...... जिसको की उसके मातहत साथी समझते है की यह पुलिस का भेदिया है , जबकि पुलिस समझती है की यह ही असली डान है ... आपके यह विचार मुझ कुते को ना घर (आप सभी के बीच ) में चैन से रहने देंगे ना ही सपनों में घाट पर (जागरण में ) जाने देंगे .... मेरा इतिहास गवाह रहा है की मैंने हमेशा ही जागरण में सुधार के लिए आलोचनात्मक ही लिखा है ..... यह तो जागरण वालो ने तंग आकर मुझको ब्लैक लिस्ट करते हुए पूरे चालीस दिन से ज्यादा मेरा कोई भी लेख फीचर्ड नहीं किया तो मुझको लगने लगा की अब मुझमे वोह बात नहीं रही ..... खुद पर से विश्वाश कम होने लगा की मैं अच्छा नहीं लिखता हूँ शायद दूसरे मेरे बारे में सही ही कहते थे ..... एक बार तो सोच लिया की इसको छोड़ ही दूँ .... लेकिन मैंने हार कर मैदान छोड़ना नहीं बल्कि संघर्ष करते हुए जीतना सिखा है ..... इसलिए आखिरी कोशिश में दो लेख लिखे जागरण पर ...... नतीजा सकारात्मक रहा हमारे बीच संवाद हुआ उसके बाद फिर से गाड़ी पहले वाली पटरी पर आ गई ..... और मैं आज तक आप सभी के बीच में हूँ ..... इसलिए मेरे भाई यह मंच मेरा नहीं बल्कि हम सभी से मिलकर बना हुआ +हम सभी से ही आबाद + हम सभी के लिए ही है ..... आपकी स्नेहिल प्रतिकिर्या के लिए आपका आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

राजकमकभाई नमस्कार पेहले मुझे आप पर शक था, अब ईस लेख से शक पुख्ता हो गया की कहीं न कहीं आप जागरण जंकशन की टीम के सदस्य हो । जन्म दर सुधरने के अनेक कारण है । (१) भडास --- वातवरण ईतना विषम हो गया है की आदमी मे भडास बढ गई है । ब्लोग या कोमेंट से अच्छा जरिया और कौन हो सकता है भडास निकालने का । (२) गूगल महाराज --- जागरण जंकशन क्या चीज है वो ४ महिने पेहले मुझे ही नही मालुम था । मुझे और मुझ जैसे कई लोगों को गूगल महाराज जागरण जंकशन खिंच के लाते है । (३) कोपी पेस्ट --- ईस के द्वारा लेखक बनना आसान हो जाता है । किसी दुसरी साईट से लेख ले के तीसरी साईट मे चीपका दो । बस, कोई भांडा फोडी नही करते सब को सब की ईज्जत रखनी पडती है । (४) महत्वकांक्षा -- अगर लेखक बन गये, नाम हो गया तो क्या बुराई है । ये सब का मिलाजुला असर है । एक नंबर वालों को क्या मतलब है कोमेंट मिले या ना मिले, ईस की फिकर तो चार नंबरवालों को ही है । आपने जातीवाद का कार्ड खेल दिया है तो मैं ईतना ही कहुंगा आपसे पेहले खूद कुदरतने ये खेला है तुंडे तुंडे मतिर्भिना कर के । वरना न आप होते न हम, न कोंपुटर होता ना ब्लोग, सब एक गुरु के तुंडे से तुंडा मिलाकर निकल पडते मोक्ष के मार्ग । दुनिया ही खतम । टुंडे की विविधता ही आप के फोरुम को पुख्ता कतेगी , फिकर मत करो । धन्यवाद ईस लेख के लिए ।

के द्वारा: bharodiya

के द्वारा: syeds

प्रिय संतोष भाई .....सप्रेम नमस्कार ! प्रिय अबोध भाई ..... सस्नेह नमस्कार ! यह माना की आदरणीय चातक जी ने किसी दुर्भावना के तहत जानबूझ कर हम दोनों में दरार डालने के मकसद से नहीं बल्कि अनजाने में किसी गलतफहमी के कारण ही अपने कमेन्ट में ऐसी बाते लिखी थी ..... लेकिन आप और मैं तो इस बात को भली भांति जानते थे की ऐसा –वैसा कुछ भी नहीं हुआ था ..... और लेख के जिस पैरे में आपके नाम से मिलता जुलता नाम था उसमे वर्णित कोई भी अवगुण +आदते और हरकते आपने कभी सपने में भी नहीं की होंगी .... खैर जो हुआ सो हुआ .... मैं इस फ़ाइल को बंद करता हूँ और इस केस को दाखिल दफ्तर करता हूँ ..... आप सभी का इस अतुलनीय स्नेह के लिए मैं खुद को अभिभूत महसूस करते हुए अपना हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय गुरुदेव ,.आदरणीय अबोध जी ,..सादर प्रणाम पहले तो मैं बीच में टपकने के लिए करबद्ध होकर क्षमा मांगता हूँ ,..ज्ञानवर्धक कामेडी में गंभीर द्रश्य प्रोडक्शन हॉउस के लिए ठीक नहीं ,..मुझे यही नहीं समझ आया कि जब कहीं भूल हुई ही नहीं तो अनंत माफीनामा क्यों ?...सिर्फ थोडा सा सामान्य इन्द्रिय (common सेन्स) की बात है ,.. सुपर हिट स्टार अभी वास्तव में अबोध है ,....लेकिन बालक नहीं रहा ,...मैंने पहले भी कहा है .......हा हा हा हा हा हा हा ................मुझे लगता है कि इस वार्ता में टपक कर मैंने गलती तो नहीं की,...तो मेरे गुरुजनों ,...सबकुछ छोड़कर सिर्फ मुझे माफ़ करो ,माफ़ करो ,..माफ़ करो ....न कर सको तो जब कभी मिलूंगा(यदि भाग्य में हुआ ) तो पीट लेना और क्या ??????

के द्वारा: Santosh Kumar

राज जी आपने शायद ध्यान दिया हो की मैंने अपने कमेन्ट में लिखा था की आपकी रचनाओं का अक्सर मै हिस्सा होता हूँ और इसका कारण मै अपने आपको, आपके समीप होना, और आपका अपनापन होना मानता हूँ, और इस लिए इस बार भी पूरे लेख को पढ़ कर मुझे ऐसा कुछ नहीं लगा, पर जब चातक जी का कमेन्ट पढ़ा तो फिर मन में "शंका" जाग उठी की कहीं ऐसा तो कुछ नहीं है? आपकी रचना से मै आहात या दुखी नहीं हुआ, पर चातक जी के कमेन्ट से मन में भय और शंका पैदा हो गयी. अपने मेरे लिए जीवन में सब कुछ है, रिश्ते मेरे लिए सब कुछ हैं और इस लिए लगा की कहीं राज भाई मेरे से .................... मन में डर और शंका ने घर कर लिया और इसी लिए आपको मेल और sms और काल............... आपके इस उत्तर ने मन से वो सारी शंकाएं दूर कर दी हैं, और आपसे विनम्र अनुरोध है की आपने जो प्यार आज तक दिया, उसे कायम रखें, अगर आपने आगे भी अपने प्रोडक्शन में मेरा रोल नहीं रखा तो लगेगा की आप अभी भी मेरे से नाराज़ हैं और फिर ......................, मैने जो कुछ लिखा आपकी नाराज़गी के डर से, और इस लए की कहीं वो राज जी जिनको मैंने अपने पिछले कमेन्ट में अपने लिए एक शक्ति का, स्रोत्र बताया था मेरे से ............ क्षमा चाहता हूँ अपने इस पूरे प्रकरण ......... और फिर से आपसे एक बार अनुरोध है की अपने प्यार को, स्नेह को जो आपने सदा मुझ पर ........., उसे बनाए रखेंगे...

के द्वारा: abodhbaalak

आदरणीय चातक जी ...... सादर अभिवादन ! इस अनच पर जो भी अपने सामने होता हुआ मैं देखता हूँ +पढ़ता हूँ +महसूस करता हूँ , कमोबेश उसको ही अपने लेखोंमें आप सभी स्नेही साथियो की सेवा में प्रस्तुत करता हूँ ..... अपनी प्रतिकिर्या के आखिर में आपने जिस बात का जिक्र किया है –उसका तार हमारे प्रिय अबोध भाई से तो नहीं लेकिन किसी हद तक आप से जरूर जुड़े हुए है ..... आपको COOL BABY नामक बच्चा तो याद होगा जिसके बारे में आपने जागरण वालो से भी शिकायत की थी की यह यहाँ –वहां –जहाँ भी इसका जी चाहता है – वहीँ पर मल त्याग करके इस मंच को तथा ब्लागों को गन्दा कर रहा है ...... और दुसरा नवीनतम उदाहरण आपके ब्लॉग पर ही “बीप –बीप” वाला रहा है ..... हमारे अबोध भाई पर तो “कुछेक शिशु बहुत ही हंसमुख स्वभाव के और खिले -२ चेहरे वाले होते है ….. उनको देख कर आपके मन को बहुत ही खुशी होती है और आपको देख कर बदले में वोह शिशु भी खुश होते है ….. ऐसे हंसमुख बच्चों को बार -२ “गोद” में उठाने और दुलारने का मन करता है – और मैं ऐसा करता भी हूँ ….. वास्तव में केवल ऐसे शिशु ही उस मापदण्ड पर सही बैठते है जिसमे कहा जाता है की हरेक बच्चे में “भगवान का नूर” होता है” …. लेख का यह वाला पैर लागू होता है ...... और जहाँ तक नाम में समानता वाली बात है तो यह केवल प्रतीकात्मक भी नहीं है शायद, क्योंकि इस जागरण जंक्शन रूपी दुनिया में मैंने सभी नवजातो को अबोध (बालक) ही माना है ....... जिस तरह से “जमाने” में पूरी मानव जाति आ जाती है ठीक उसी प्रकार मैंने इस जागरण दुनिया के नवजातो के लिए इस शब्द का चुनाव करके इसको इस्तेमाल किया .... अब भी यदि कोई शंका हो तो जरूर बताए आपका स्वागत है ..... आभार सहित

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय प्रवीन बहन जी ..... सादर अभिवादन ! आपने बिलकुल ठीक कहा है की एक हिचकिचाहट होती ही है जोकि स्वाभाविक भी है ...... लेकिन मैंने उसको तथा डर को दूर करने के लिए ही तो यह सब कवायद की है ......और आपका अंदाज तो मुझको भी पसंद आया की जोभी दिल में आया कह डाला ...... आप जरूर अपनी बेबाकी से दबंगई के नए मापदंड स्त्थापित करेंगी क्योंकि इससे आपकी लेखनी में जो आजादी देखने को मिलेगी उसके कारण जो भी भाव निकल कर आयेंगे वोह कुछ हटके तथा निराले और नवीनता लिए हुए होंगे , जोकि बंधी बंधाई लीको से हटकर पुरानी सड़ांध को दूर करके इस मंच को ताजगी तथा नवीनता से सरोबार करने में अपना अमूल्य योगदान देंगे ........ शुभकामनाओं सहित आपका आभारी

के द्वारा: rajkamal

प्रिय लहर जी ...... बबम बम बम बम लहरी –लहर –लहर लहरी लहरी ! अभी पिछले कुछेक दिन पहले ही मैं अपने ब्लॉग पर प्रिय शक्ति सिंह जी से बात कर रहा था तो ,आइने उनसे अपनी टीस रूपी अधूरी हसरत का जिक्र किया था ..... बस उसके बाद से ही यह अच्छा दिनोदिन और भी बलवती होती गई और उन पर्दे के पीछे के नायको को सपर्पित करने योग्य इस ब्लॉग का जन्म हुआ ..... मैं श्री भगवान जी से यह दिली दुआ करता हूँ की उन सभी की जिंदगी में तमाम अभाव तथा कमिया दूर होकर वोह एक सुखी तथा खुशहाल जीवन जीते हुए जब भी अपने कम्प्यूटर पर ब्लागिंग करे तो मेरे सुझावों पर अमल करते हुए अपने ब्लागिंग के जीवन को सुखद रंगों से सरोबार कर सके ...... फिर मैं चाहे इस मंच पर रहूँ चाहे या ना रहू मेरे वोह भविष्य के साथी तो यहाँ पर आप सभी के बीच में रहते हुए कभी तो मन में मुझको नाम से याद कर ही लिया करेंगे – लेकिन मैं चूँकि उन सभी का नाम नहीं जानता हूँ इस लिए सभी की सफलता की सामूहिक प्रार्थना करता हूँ ..... आपका तहेदिल से शुक्रिया

के द्वारा: rajkamal

पूज्यनीय चर्चित चित्रांश जी ...... सादर प्रणाम ! आप इस लेख की किसी भी श्रेणी में नहीं आते है क्योंकि आप नए नहीं बल्कि पुराने ब्लागर है , और यह लेख सिर्फ नए ब्लागरो पर और उनके लाभार्थ ही लिखा गया है की वोह बिना किसी भरम के + बिना किसी हिचकिचाहट के + पूरे समर्पण तथा साहस से अपने ब्लागिंग धर्म का पालन करते हुए मजे से यहाँ के माहौल को खुशगवार और आनंददायक बनाने में अपना बनता सहयोग यथासंभव जरूर दे ...... मैं जानता हूँ की आपके नाम से एक मंदिर भी स्थापित है इसलिए भी और अपनी उम्र के कारण भी आप हम सभी के पूज्यनीय है ...... आपकी बाते हमेशा ही प्रेरणादायक + बहुत सी सीख देने वाली + विचारणीय तथा अनुकरणीय होती है ..... आपके अनुभव से हम लाभ उठाते हुए आपकी छत्रछाया में फले फुले तथा आपके ह्रदय को जीत कर आपके आशीर्वाद के काबिल बने इसी कामना के साथ ...... आपका आत्मिक आभार

के द्वारा: rajkamal

बहुत से ऐसे साधनहीन छात्र है जोकि अपना खुद का कम्प्युटर न होने के बावजूद भी साइबर कैफों में जाकर जागरण जंक्शन पर प्रकाशित ब्लाग्स को बड़े ही चाव से पढ़ते है …. उनमे से एक से मेरी मुलाकात भी हो चुकी है .. प्रिय राज भाई ये ख़ास बात बहुत प्यारी लगी हम सब की तरफ से दुवाएं उन्हें उनको शीघ्र एक मुकाम और साधन दें प्रभु ..हमारे देश में इतने धनि मानी व्यक्ति हैं जो करोड़ों और अरबों पर सोते हैं खाते है पीते हैं लेकिन विडम्बना यही है वहीं कहीं कहीं ये सुनने देखने को मिलता है की एक कवी और साहित्यकार भूखे मरने की कगार पर रहने को घर नहीं ....इस तरह के सज्जन विषधर को कोई पालना नहीं चाहता ... बहुत अच्छा लगा आप का लेख बहुत हंसाया आप ने हर तरह की नस्ल देख के .....पता नहीं मेरी गिनती किस में कर डाले होंगे ....ह हां ... जय श्री राधे भ्रमर ५

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

के द्वारा: rajkamal

rप्रिय रशीद भाई जान ...... आदाब ! आप भी मुझको गलत समझ बैठे , यह लेख सिर्फ नए ब्लागरो पर ही लिखा गया है लेकिन फिर भी बीच में कहीं किसी जगह पुराने लेखक आ ही गए है – वोह भी वहां पर जिस जगह हमशक्ल और जुड़वाँ बच्चों का जिक्र है ..... मैं खुद को चाहे कुछ भी मानू –लेकिन ब्लागिंग को मैं वनडे की तरह से ही मानता हूँ – हर दिन आपको नए तरीके से परफार्म करना होता है – हरेक मैच में एक नई चुनोती सामने होती है- आपकी उस खास दिन की वर्तमान वाली परफार्मेंस ही आंकी जाती है ..... आपने यह सही कहा है की कमेन्ट के कारण लेखन प्रभावित होता है + लेकिन मैं इसमें जोड़ना चाहूँगा की ना केवल कमेन्ट के कारण बल्कि फीचर के कारण भी होता है –और कई बार तो लेख के साथ साथ लेख का शीर्षक भी प्रभावित होता है .... यह इसी बात से साबित हो जाता है की कई बार “जागरण शब्द” का अनावश्यक रूप से और निरर्थक रूप से प्रयोग किया जाता है ..... बाकी अब मैं पहले की तरह से नए ब्लागरो को कुछ नहीं कहता –क्योंकि उनको पुरानो के मुकाबले कुछ ज्यादा ही प्रोत्साहन की जरूरत होती है ..... इसलिए कभी कभी कमियो के देख कर भी इस उम्मीद से अनदेखा कर दिया करता हूँ की जिस प्रकार मैं प्रोत्साहन से यहाँ तक पहुंचा हूँ शायद दूसरे भी ...... आपके कीमती विचारों के लिए आपका हार्दिक आभार

के द्वारा: rajkamal

प्रिय अबोध भाई ..... सस्नेह नमस्कार ! मुझे आपका मेल मिला ...... आपकी ही तरह से मुझको भी कल से ही आपके कमेन्ट रूपी विचारों का बेसब्री से इन्तजार था ..... लेकिन कमेन्ट तो मिला ही साथ में मेल और मिस्ड काल्ज भी ..... आप जानते ही है कि उस नम्बर पर सिर्फ मैसेज ही भेजा जा सकता है ..... आपके मेल का जवाब देना मैंने इसलिए उचित नहीं समझा कि आप्पकी और आदरणीय चातक जी कि शंका का सबके सामने ही निवारण किया जाए तो ही बेहतर होगा ...... आप अगर इस समूचे प्रकरण से दुखी और आहत हुए है तो मुझको आपसे दोगुणा ज्यादा दुःख पहुंचा है ..... पहला कारण तो आपके दुखी होने से स्वभाविक रूप से मेरा दुखी होना , और दुसरा इस कारण से की आपकी बातो से लगा की जैसे हम पहली बार मिले हो + आपका मुझ पर अविश्वाश की मैं आपके बारे में कुछ भी ऐसा –वैसा सोच +लिख सकता हूँ ...... मैंने अपने इस लेख को जिस नजरिये से लिखा था मुझको उम्मीद थी की ज्यादातर नहीं तो कम से कम पुराने साथी तो मेरे चश्मे से ही इसको सही रूप में लेंगे ...... मैंने इस जागरण जंक्शन को हरेक नए ब्लागर (फिर चाहे वोह कोई भी +किसी भी उम्र का हो ) के लिए एक नई दुनिया माना है जिसमे जन्म लेने वाला हरेक अबोध बालक के समान माना गया है ...... यह शब्द सारे नए ब्लागरो के उपर और मुझ पर भी किसी मायने में लागू होता है क्योंकि मैं भी कभी इस मंच पर नया ही था ..... आपका और राजकमल प्रोडक्शन का अटूट नाता रहा है ..... हमारी हरेक फिल्म आपके नाम से ही बिक जाया करती थी और आपके स्टारडम के कारण हमारा प्रोडक्शन हाउस भी इतना सफल था ..... आज तक आपने हमारी ज्यादातर फिल्म में मुख्य और सहायक रोल किये लेकिन इस फिल्म में आपका सिर्फ प्रतीकात्मक (सिर्फ नाम से ही सम्बन्धित ) + परछाई वाला रोल था –इसलिए इस फिल्म में आप होकर भी नहीं थे , बस आभास भर होता है ...... आप पर तो लेख का वोह पैरा लागू होता है जिसमे खिले चेहरे वाले ब्लागर –खुदाई नूर से भरपूर का जिक्र किया गया है ...... बड़े ही दुःख के साथ कहना पड़ता है की अब राजकमल प्रोडक्शन में अबोध बालक जैसा सुपर स्टार नहीं होगा- इसलिए इसका भविष्य आगे क्या होगा –राम जाने ! आपको जो भी दुःख और मानसिक कष्ट पहुंचा है शब्दों से किसी भी तरह से उसकी भरपाई नहीं की जा सकती ...... फिर भी शब्दों द्वारा ही मैं आपसे क्षमा मांगता हूँ .... आपका आभारी

के द्वारा: rajkamal

प्रिय राजकमल जी, सादर अभिवादन, जागरण जंक्शन के मंच पर इतने सारे प्रबुद्ध ब्लागरों को चर्चा करते और अलग अलग तरह से अपनी बात कहते हुए देखना और पढना काफी सुखद होता है| मेरा तो अधिकतम समय पढने और कमेन्ट करने में ही निकलता है लिखने का मौका काफी कम मिलता है| आपके द्वारा किये गए श्रेणीगत विश्लेषण को पढने में भी काफी आनंद आया| एक से अधिक नामों से उपस्थित लोगों के बारे में जानकर भी अच्छा लगा उनके अन्दर इतनी क्षमताये हैं कि वे एक ही साथ दो नामों से दो तरह के लेखन के साथ न्याय कर सकते हैं तो करना भी चाहिए| पुराने ब्लोगरों में से शायद एक दो ही इस मंच पर दिखाई देते हैं सचिन भाई तो यदा कदा ही दर्शन देते हैं वह भी सिर्फ कमेन्ट करने में दूसरे आप हैं जिनसे ये मंच सदा गुलजार रहा है और आपने भी मंच को अपना सर्वोत्तम ही दिया है आशा है आप इसी तरह ब्लागरों का उत्साहवर्धन करते रहेंगे| अबोध जी के बारे में आपके द्वारा कही गई बातें अटपटी लगीं खासकर शब्दावली को लेकर, पूरे प्रकरण की जानकारी मुझे नहीं है फिर भी यदि आप इस तरह के छींटाकशी वाली भाषा का प्रयोग करेंगे तो इससे मंच की और आपकी दोनों की गरिमा पर ठेस पहुंचेगी| यहाँ पर किसी को शत्रु या उपहास का पात्र न माना जाए तो अच्छा होगा| मंच को और बेहतर लेखन से अभिसिंचित करने के लिए ढेरों शुभकामनाएं!

के द्वारा: chaatak

मित्र; अति उच्च कोटि की समीक्षा प्रस्तुत की है आपने ! साधुवाद ! वैसे मैं भी निकासी रहित ब्लोगरों की श्रेणी के करीब हूँ और जल्द ही आपके समर्पण के हकदारों की श्रेणी में सम्मिलित होने जा रहा हूँ ! कारण जिंदगी की जद्दोजहद में समय की अनुपलब्धता निकासी का मार्ग कठिन और आहार का ठीक से रसास्वादन करने नहीं देती ! इसी कारण शायद मेरे लेपटोप से भी जल्दी ही अलगाव हो , मैं भी कैफे का मोहताज हो जाऊं ..... शायद .. भाई रशीद जी के पहले कमेन्ट और आपके निशा जी पर लिखे ब्लॉग से पूरी सहमती है किन्तु क्या कमेन्ट ही मानदंड होने चाहिए ? विशेषकर अधिमूल्यित श्रेणी के लिए ? कई बार कुछ ऐसे ब्लॉग पढ़ने में आये हैं जो मंच पर उपलब्ध ब्लोगरों के साथ साथ 'जाज ' की ओर से भी अनदेखे किये गए ! मित्र मेरे निकासी तंत्र में भले त्रुटी हो किन्तु मुझे जो सन्देश सबको देने की आत्म्प्रेरना मिलती है वो देता हूँ और देता रहूँगा ! जय हिंद !

के द्वारा: Charchit Chittransh

गुरुदेव को साष्टांग दंडवत! हमेशा की तरह अर्थपूर्ण पर व्यंग्यात्मक विश्लेषण! जिसे समझनेवाले आराम से समझ जांय और नासमझ "रोनी सूरत" बनाकर दूसरों को भी रुलाते रहें. मैं तो अपने आपको रोनी सूरत वाला नहीं मानता और आपके साथ अन्य सभी बंधुओं एवं बहनों का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ, जिनके मार्गदर्शन से मैं आगे कुछ लिखने को प्रेरित होता हूँ. निस्संदेह सभी बंधुओं के विचार अपने होते हैं, जो दूसरों से बंटाना चाहते है. आपकी प्रतिक्रिया और खासकर यह लेख एक धार करनेवाले (Grinding machine ) उपकरण की तरह है जिसे अगर सही ढंग से उपयोग किया जाय तो कलम की धार तेज बन सकती है वरना गलत उपयोग से धार कुंद भी हो सकती है. पितामह भीष्म (राजकमल साहब) को सादर नमन! आपका शिष्य -- जवाहर.

के द्वारा: jlsingh

बड़े भाई जान सादर प्रणाम आपने तो सभी को लपेट लिया बस एक तरह के विशेष प्रकार कि समस्या को आपने नजर अंदाज कर दिया वह के इस मंच पर आलोचक की कमी है अगर किसी ने आलोचना किया तो ना केवल वह लेखक नाराज होता है बल्कि और लोग भी उस बलागर से किनारा कर लेते है. यहाँ कमेंट का मतलब बन गाया के जो सबसे ज्यादा कमेन्ट पायेगा वह बेहतर लेखक है और कमेन्ट पाने के लिए कमेंट के हिसाब का लिखने से थोडा लेखनी प्रभावित होता है. कुछ ऐसे बलागर है जो ख़ुद को अव्वल दर्जे का लेखक मान बैठे है भले हि उनसे बेहतर लेख लिखने वालो कि कमी नही मेरा उद्देश्य किसी को ठेस पहुंचाना नही बस इतना कहना है कि जब आप इस मंच पर है तो बेहतर को बेहतर और ग़लत को ग़लत कहकर मार्गदर्शन जरुर दे ताकी अच्छा लेख बलागर लिख सके. मै आपकी तारिफ नही कर रहा भाई जान लेकिन जबसे मैँ इस मंच पर आया हूँ एक आपको हि देखा है जो सबसे ज्यादा कमेंट पाने के बाद भी किसी को निराश नही किया साथ हि हौस्ला भी बढाया शायद एक परिवार के सिनियर होने का यही मतलब होता है. हाँ परिवार में कुछ ऐसे भी होते है जो जरा सा कामयाब हुए नही की अपना रन्ग दिखाना शुरू कर देते है. बहुत अच्छा मुद्दा उठाया है आपने इसके लिए आपको तहेदिल से मुबारकबाद सप्रेम अब्दुल रशीद

के द्वारा: Abdul Rashid

प्रिय संतोष भाई .....सप्रेम नमस्कार ! माफ़ी चाहूँगा कि मेरा इस प्रकार कहने का अभिप्राय आपसे नहीं था , बस एक कामन बात कही थी ..... आपके बारे में ना सोच सकता हूँ और ना ही किसी और के बारे में ही , क्योंकि कर बुरा हो बुरा और मुस्लिम धर्म में तो कहा गया है कि सोच बुरा तो हो बुरा .... यह जान कर खुशी है कि आप का ग्रहस्थ जीवन सुखी और खुशहाल है और हमेशा ही रहे और भी बेहतर यही कामना और प्रार्थना है ..... ************************************************************ और जहाँ तक बात पकड़ने वाली बात है तो मैं तुच्छ प्राणी इस नतीजे पर पहुंचा हूँ कि द्रोण ने चाहे अपना फर्ज नहीं निभाया है लेकिन एकलव्य ने अपना त्याग दिखला दिया है और जो दिल में ठाना था वोह आज कर के दिखला दिया है .... इसी प्रकार आप अपने निजी जीवन के लक्ष्य भी आसानी से प्राप्त करते रहे हमेशा ही मैं आपकी इस भेंट को हमेशा याद रखूँगा सप्रेम ! आपका पोरे दिल कि गहराईयों से कोटि -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय संतोष भाई ..... सप्रेम नमस्कार ! मेरी कुछेक मजबूरिय है जिनके चलते मैं किसी के साथ भी संपर्क नहीं रख पाता .... इसलिए मेरी प्रतिकिर्या लेख के इलावा व्यक्तिगत भी हुआ करती है .... क्योंकि मेरे लिए यही एक माध्यम है सबसे जुड़ने का - पूछने का और बताने का .... आप लगातार गैप डालने की बजाय बीच -२ में कुछेक दिनों का गैप अपनी सुविधानुसार रख सकते है ..... जिससे की न तो आपके काम का हर्जा हो और न ही आपके बोद्धिक विकास में कोई बाधा या रुकावट आये ..... इस मंच पर सभी लेखक है -समझदार है -रचनाकार है -ज्यादातर विद्वान है -अनुभवी है -बांटने वाले और सिखाने वाले भी है ..... इसलिए मेरा मानना है की जितना भी लाभ उठाया जा सकता है उठा लेना चाहिए .... फिर भी हमारा काम +परिवार +कैरियर हमारी पहली प्राथमिकता होनी ही चाहिए ..... हम तो हमेशा एक दूसरे के साथ है ही ..... धन्यवाद व् आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय गुरुदेव ,.सादर प्रणाम मैं वास्तव में सौभाग्यशाली हूँ,.. मुझे इस मंच पर शुरू से ही लगातार आपका भरपूर स्नेह मिल रहा है ,..सही मायनों में उर्जा मुझे आप से ही मिलती रही,..बीच में जब आपने मंच से कुछ दिनों का अवकाश लिया था तो मुझे आपकी कमी बेहद महसूस हुई थी . शक्ति भाई कि प्रतिक्रिया पर आपके विचार मेरे लिए एक पाठ की तरह है ,..मैंने अब गंभीर ब्लागिंग से निश्चित रूप से दूर होने का मन बना लिया है ,...लेकिन मंच से और आपसे दूर नहीं रह सकता हूँ ,.तथासंभव जरूर जुड़े रहने का प्रयास करूंगा ,...आपसभी की प्रतिक्रियाओं का सदैव पूरा स्वागत और सम्मान करूंगा ...मुझे पूरा यकीन है... आपका स्नेह मुझे लगातार मिलता रहेगा ..आपकी शुभकामनाओं का आभार प्रकट कर पाना असंभव है ... आपको ह्रदय से प्रणाम जय माता दी

के द्वारा: Santosh Kumar

प्रिय वाहिद भाई ..... आदाब ! मैंने लेख में सभी बाते माहौल को हल्का फुल्का बनाके के मकसद से कही थी ..... आप तो जानते ही है की अपने मुंह मिया मिट्ठू बनना मेरे लिए कितना घातक हो सकता है .... और मैं तो असल में नारी जाति को चुनोती देते हुए उनके परम्परागत क्षेत्र में घुसपैठ करते हुए उनको टक्कर देने की कोशिश कर रहा हूँ की शायद कभी जमाने को यह समझाने में सफल हो पाऊं की मर्द लोग भी तड़का लगा सकते है .... और कोई भी औरत जब तड़का लगाती है तो अक्सर आँखों में आंसू आ जाया करते है लेकिन मेरे इस तड़के से हंसी चाहे ना आये लेकिन इतनी गारंटी जरूर है की एक भी आंसू नहीं निकल सकता है ..... आपकी सराहना और शुभकामनाओं के लिए आपका शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय वाजपाई जी .....सादर प्रणाम ! यह आपकी सरासर ज्यादती ही कही जायेगी छोटे हमेशा छोटे ही रहने चाहिए , मैंने कोई तीस मार खान वाला काम नहीं किया है .... और अगर कभी आपके आशीर्वाद से किया भी तो आपके श्री मुख से पहले जैसा संबोधन सुनना ही मन और दिल को भाएगा ..... सच में ही निशा जी इस मंच की शान है उनकी विचारधारा की बराबरी शायद ही कोई कर पाए ..... मैं भी उनको नमन करता हूँ .... और उनके लिए तथा आपके लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाये देते हुए लम्बे जीवन - खुशी +तथा खुशहाली युक्त भविष्य की कामना करता हूँ ..... आपका आशीर्वाद बना रहे उपर वाले से यही दुआ और प्रार्थना करता हूँ .... (अगर आपको अब भी कमेन्ट देने में कोई समस्या है तो आप मेरे पुराना लेख कमेन्ट के कोड का पोस्टमार्टम दुबारा पढ़े यकीनन आपको कुछ न कुछ फायदा जरूर होगा )

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय शक्ति सिंह जी .....सप्रेम नमस्कार ! आपने मेरी बात को आधा गलत समझा है और आधा सही ...... यह सच है की मेरी आपसे नाराजगी है ना केवल आपसे बल्कि इन सभी ब्लागरो से जोकि अपने ब्लॉग पर इतनी मेहनत से किए गए कमेन्ट का जवाब नहीं देते है ..... मैं आपसे दूसरों के ब्लॉग पढ़ने के लिए नहीं कह रहा हूँ ...... अगर मैं यह सोचू की जितना समय में ब्लागिंग को दे पाता हूँ दूसरे भी इसको इतना ही दे तो इसको मूर्खतापूर्ण कहना ही उचित होगा ..... आपको यह जानकर हेरानी होगी की बहुत से ऐसे पाठक है जोकि साइबर कैफे में जाकर इस जंक्शन के ब्लागरो की रचनाये पढ़ते है और वोह आज तक किसी को कमेन्ट भी नहीं दे पाए ..... मैं जब लिखता हूँ तो कभीकभार उनको भी ध्यान में रख लेता हूँ ..... काश की अपना कोई एक लेख मैं उन साधनहीन पाठकों को समर्पित कर पाता लेकिन अपने स्वार्थो को भूल कर कभी ऐसा कर पाऊं तो उनके द्वारा पर्दे के पीछे दिए गए स्नेह को शायद किसी हद तक लौटा पाऊं ..... इसलिए हरेक की अपनी -२ सीमाए और बाध्यताए है अपने खुद के हिसाब से हरेक आदमी अपने चौबीस घंटो को खर्च करता है ..... इसलिए हरेक को आजादी है और हक है की वोह बिना किसी दबाव के अपने कैरियर और भविष्य को बनाते हुए यथा सम्भव समय अपने शौक के लिए अगर दे सकता है तो जरूर दे ..... बाकी ब्लागिंग को मैं फ़ालतू का काम मानता हूँ .....हमको सबसे पहले अपने निजी कार्य देखने चाहिए ,उसके बाद अगर समय बचता है तो ठीक है और अगर नहीं बचता है तो और भी ठीक ...... लेकिन अपना भविष्य हमारी सबसे पहली प्राथमिकता होनी ही चाहिए ...... धन्यवाद सहित आपका आभारी

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय राहुल भाई ..... नमस्कार ! अपने मेरी तारीफ कुछ ज्यादा ही कर दी है , यह आप सभी भाई बहनों +बजुर्गो का प्यार ही है की जो मेरी बातों का मान रखते हुए अपने प्यार और स्नेह को बनाए रखते हो ...... आपसे प्रार्थना है की आप देवराहा वाले बाबा जी की कोई भी रचना हमसे जरूर सांझा करे .... बाकी यह भगवान की मर्जी पर निर्भर है की वोह हम सभी से क्या काम लेते है ..... हमारी उन्होंने क्या भूमिका निर्धारित की है और हम उसको निभाते हुए उसके साथ कितना न्याय कर पाते है ..... आप के नाम का अपने लेख "– “जब जागरण गांव की सभी शादीशुदा महिलाओं ने की प्यार की हड़ताल” में उल्लेख किया है .... आप किरपा करके उसको एक बार जरूर पढ़े ...... पहले आपसे इसलिए नहीं कहा क्योंकि मैं किसी भी स्नेही ब्लागर से अपना लेख पढ़ने के लिए नहीं कहता हूँ ..... मेरी खुद की जिंदगी कैसी भी रही हो लेकिन मैं सब निजी परेशानियो को दरकिनार करते हुए इस मंच पर हमेशा ही हंसी और खुशियो के दो पल सर्जित करने की कोशिश में लगा रहता हूँ ..... आप सभी के सहयोग से इसमें किसी हद तक सफलता भी मिलती है मुझको ..... आपके इस प्यार के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: वाहिद काशीवासी

आदरणीय चातक जी ..... सादर अभिवादन ! आपके और मेरे बीच में एक समझ ने हमेशा ही बढ़िया सेतु का काम किया है फिर चाहे वोह आदरणीय सोनी गर्ग जी के बारे में कोई गलतफहमी हो या कोई और बात रही हो या फिर अपने आलराउंडर भाई से गलतफहमी रही हो या फिर किसी सिरफिरे ब्लागर पर बारी -२ से हम दोनों द्वारा ही लेख लिख कर उसके होश ठिकाने लगाने की बात रही हो ..... हमने हमेशा एक दूसरे को समझा है और बातों तथा सलाह को अहमियत दी है और सुझावों पर अमल भी किया है ..... मेरे शुरूआती विकास में आपका अहम योगदान रहा है ..... अगर आज आपने मेरी बात का मान रखते हुए मेरे तड़के को पसंद किया है तो आपके लिए मेरे दिल में आपकी इज्जत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है ...... आदरणीय निशा जी के बारे में हर कोई सकारात्मक बाते ही करेगा और करना तथा सुनना भी चाहेगा ..... लेकिन इस मस्त -२ कुत्ती चीज को थोड़ी सी खुजली हुई तो शांत कर लिया -और आपकी सराहना से तो हमेशा ही आत्मिक और नैतिक बल मिलता ही है ..... आपका तहेदिल से हार्दिक शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय जवाहर लाल जी .....सादर अभिवादन । मेरी कलम तो आपके कम्प्यूटर के साथ जुड़े हुए कीबोर्ड तथा माउस में छुपा कर रखी हुई है ..... आप जब भी जी चाहे उसको अपना समझ कर इस्तेमाल कर सकते है और वापिस करने का भो कोई झंझट ही नहीं ..... आपने मेरी तीसरी आँख की बाबत पूछा है तो बस उसके बारे में तो मैं उस अद्रश्य शक्ति और सत्ता का जितना भी धन्यवाद कर सकता हूँ वोह सारे का सारा कम ही होगा ..... कुच्छेक हाथ इस जिज्ञासा का भी रहता है की कब - क्यों -कहाँ तथा कैसे ..... आप भी जासूसी तथा अपराध कथाये पढ़िए तथा सीरियल देखिये फिर आपकी सोच भी धीरे -२ उसी दिशा में कार्य करना शुरू कर देगी ..... हालाँकि शुरुआत में मुझको भी इस मंच पर बहुत सी दिक्कते आई थी ..... लेकिन अब ज्यादातर ब्लागर समझने लग गए है इसलिए अपना स्नेह - प्यार - सहयोग - समर्थन देकर उत्साहवर्धन करते है जिसके लिए मैं अप सभी का एहसानमंद तथा कर्जदार हूँ ..... आपका दिल से आभारी

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय विनीता जी ..... सादर अभिवादन ! आज तो आपने भी रिकार्ड़तोड़ प्रतिकिर्या दी है ...... आपकी इतनी विस्तार से प्रतिकिर्या पहली बार पढ़ने को मिली है इस लिए मैं और इसको पढ़ने वाले दूसरे ब्लागर सोभाग्यशाली है .... वैसे हास्य वयंग्य की बात और है लेकिन असल बात तो यह है की मैं खुद पूरे लेख का निचोड़ एक लाइन में कहने वालो का पूरे मन से कायल हूँ और उनकी प्रतिभा को सलाम करता हूँ ..... क्योंकि देखने में यह कार्य जितना सरल दीखता है उतना होता नहीं है ..... आजकल हर किसी के पास समय की कमी है ..... अपने समय का सदुपयोग करते हुए हम ज्यादा से ज्यादा लोगो के संपर्क में आने की कोशिश करते है ..... और हर किसी को तो खुश कोई भी नहीं रख सकता है ..... हम कितनी भी कोशिश क्यों न कर ले कोई न कोई नाराज हो ही जाता है .... मेरे लिए एक पैरा -एक लाइन और सिर्फ दो शब्द एक समान महत्त्व रखते है ..... इतना संतोष तो रहता है की पाठक पढकर चुपचाप पतली गली से निकल भी सकते थे अगर कुछ कहा है तो यह मेरे पर उनका एहसान ही है ..... आपका बहुत -२ आभार haapy birthday to respected nisha ji

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय साधना बहिन जी .....सादर अभिवादन ! मैं आपकी बात से शत प्रतिशत सहमत हूँ ..... एक बार बड़ा ही मजेदार वाकया हुआ ....हमारे एक ब्लागर भाई कहने लगे की तुम्हारा लेख पढ़ तो सुबह ही लिया था लेकिन कमेन्ट करने से डरता था .... लेकिन अब देख रहा हूँ की यह फीचर्ड की श्रेणी में पहुँच चूका है- और दूसरे ब्लागर इस पर कमेन्ट भी कर रहे है तो मैंने सोचा की मुझको भी अपनी राय दे ही देनी चाहिए ..... इस बात से आप अंदाजा लगा सकती है की मेरी राह कितनी मुश्किल होती है और उसके लिए समर्थन जुटाना तथा दूसरों को कायल करना कम से कम मेरे लिए बहुत ही मुश्किल और पेचीदा कार्य रहता है ..... मैं माफ़ी चाहूँगा की आपके ब्लॉग पर दो लेखों का कमेन्ट एक साथ करना पड़ा था ..... दरअसल पहले दिन तो नेट ही नहीं काम कर रहा था -जो भी लेख खुले उनको पढ़ कर उनके कमेन्ट सेव करके रख लिए थे ..... अगले दिन उनको ही कापी पेस्ट कर दिया था ..... चूँकि आपकी अगले ही दिन सोभाग्य से दूसरी रचना भी आ गई थी तो इसलिए दोनों को इकट्ठा ही आदर दे दिया .... वैसे भी कई बार बहुत निराशा होती है जब देखता हूँ की किसी पिछले ब्लॉग पर किए गए कमेन्ट का उत्तर नहीं मिलता है ..... आपकी सराहना और साथ के लिए बहुत -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय अशोक जी ..... सादर अभिवादन ! इस लेख में हमारे पूरे ब्लागिंग जीवन के आपसी रिश्तों का जिक्र है -मौटे तौर पर ..... आदरणीय निशा जी आजकल इस मंच का एक चमकता हुआ सितारा है जो अपनी आभा चारों और बिखेरते हुए दिनोदिन और भी चमकता जा रहा है ..... न जाने कितनो ने उनसे फायदा उठाया है और अनगनित लोग उनसे फायदा उठाएंगे ..... और आजकल के बच्चों के बारे में क्या कहा जाए , वोह तो जैसे एक सदी आगे की सोच लेकर आते है और सभी कुछ पहले से ही सीख कर आते है ..... ऐसा लगता है की भगवान का हम माता पिताओ पर से विश्वाश उठ गया है इसीलिए वोह उनको पहले से ही ट्रेंड करके भेज रहा है ..... ऐसे होशियार बच्चे और बच्चियां अपने माँ बाप और देश का नाम रोशन करे इसी कामना के साथ .... आपके साथ और स्नेह के लिए आपका हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय लहर जी ....सप्रेम नमस्कार ! भाई आपने तो मुझको धर्मसंकट में डाल दिया है ..... अगर जागरण वालो को मुझमे कोई काबलियत दिखती तो वोह मुझको चुनते .....अब जब उन्होंने चातक जी को चुन लिया है तो एक साल के लिए तो उनको अपनी डयूटी निभा लेने दीजिए ...... अगले साल जो भी चुना जाएगा वही भटकी हुई युवा पीढ़ी को सही राह दिखायेगा ..... आप अगर किसी से प्यार करते है तो वोह अपने मुकाम तक पहुंचे ..... लेकिन पहले आप खुद का एक लक्ष्य बना कर किसी मुकाम तक पहुंचे .... जब आप पूरी जिन्दगी साथ निभाने का वायदा करेंगे तो हर कोई आपकी मदद करेगा ..... मेरी तो यही कामना रहती है की हर प्यार करने वाले को उसका सच्चा प्यार जरूर मिले . आपको भी ..... और यह तो सिर्फ कहने की और हँसने -हंसाने की बाते है .... सभी जानते है की आजकल के बच्चे कितने तेजतर्रार और होशियार पैदा हो रहे है , इतने की मां बाप को उनके सवालों का जवाब देना भी मुश्किल हो जाता है ..... आपकी भी चाँद सी महबूबा हो और प्यारे -२ बच्चे हो जो आजकल की जरूरत के

के द्वारा: Rajkamal Sharma

गुरुदेव, साष्टांग दंडवत! आप मुझे सिर्फ इतना बता दीजिये कि आप अपनी कलम को रखते कहाँ हैं? आपका 'शिष्य' होने के बावजूद भी आपके कलम को चुराने की इच्छा हो रही है. यह सब कुत्सित विचार क्यों मन में आते हैं? आप ने बहुतों का ( मुझे भी ) सही मार्गदर्शन किया, शून्य से एक सोपान तक सफ़र कराया! आपके ख्याल कितने नेक और पारखी हैं? लगभग सभी ब्लोग्स को पढ़कर उसपर यथार्थ प्रतिक्रिया देना बिलकुल ही सरल नहीं है! ब्लोग्स के माध्यम से ब्यक्ति के मनोभाव को पढ़ लेना यह आपके बस की ही बात है.----------- रही बात अपने बच्चों को भोंदू या होशियार बनाने की; तो भला भोंदू क्यों? --- आजकल होशियारी का जमाना है और बच्चे होशियार रहे तभी तो माँ-बाप का नाम रोशन करेंगे. आपका किसी बात को कहने का अंदाज ऐसा है कि कोई भी सच को आप इस ढंग से रखते है कि समझदार ब्यक्ति बिना बुरा माने समझ जाता है. एक बार और सादर अभिवादन!-- जवाहर.

के द्वारा: jlsingh

प्रिय राजकमल जी, इस ब्लॉग के शीर्षक को देखकर इस लेख के भावों का कुछ अंदाजा तो हुआ था लेकिन जब मैं ब्लॉग के एपिलाग पर (राज्कमलीयन फ्राई) तक पहुंचा तो पता चला कि थोडा सा फ्राई मुझे भी किया गया है| आपके स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद! निशा जी वास्तव में एक गंभीर और बहुत ही सोच समझ कर लिखने वाले कुछ चुनिन्दा ब्लोगरों में से है और मैं स्वयं भी उनके लेखों से बहुत अधिक प्रभावित हूँ उनकी सबसे अच्छी बात है कि वे हमलोगों से बहुत अच्छी समझ रखने के बावजूद हमारी राय को सम्मान देती हैं| उनका हमारे बीच होना मुझे बहुत ही सुखदाई लगता है| इस लेख को पढ़कर बहुत ही प्रसन्नता हुई! हार्दिक बधाई और स्नेह के लिए धन्यवाद!

के द्वारा: chaatak

प्रिय संतोष भाई ....सप्रेम नमस्कार ! आपका आदरणीय निशा जी के प्रति प्रेम और उनका आपके लिए किया गया योगदान तथा प्रेरणा को मैं अगर पूरा नहीं तो किसी हद तक जानता हूँ ...... सच में ही किसी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना और जमीन प्रदान करना बहुत ही बड़ा काम माना जाएगा और इस काम के लिए उनकी सराहना की ही जानी चाहिए ..... उनकी योग्यता के बारे में सभी जानते है तथा वोह उन कुछेक चुनिन्दा ब्लागरो में से एक है जिनका की किसी से भी बैर +द्वेष नहीं है और सभी उनका समान रूप से आदर मान करते है जिसके की वोह काबिल +अधिकारी भी है ..... आपके साथ -२ मैं भी उनको नमन करता हूँ HAPPY BIRTHDAY TO HER आपकी आदरणीय निशा जी के प्रति श्रद्धा भावना को सलाम ! आभार सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma

जय हो गुरुदेव ..आप की लेखनी भी कमाल की है चाँद तारे आकाश गंगा से पातळ सब का का दर्शन करा दिया आप ने ...बहुत कुछ उतार चढाव देखने को मिले ...ढेर सारी जानकारियां निशा जी पर पढने को मिली ..कुछ अपवाद तो हर जगह पनपता ही है ...हास्य व्यंग्य के जादूगर तो आप हैं ही ..आप को एक समीक्षक के रूप में कार्य करना था यहाँ वहां विद्वानों की पुस्तकों पर .... देवी की कृपा से आनंद आ गया कुछ निम्न बातों को ..... लेकिन धीरे – २ ज्यों – २ इनकी सिथति मजबूत होती चली गई यह बहुत ही सोचसमझ कर बेहद नपे तुले शब्दों में अपनी राय देने लगी इस डर से की कहीं जागरण वाले उस टिप्पणी को पढ़ कर इनसे खफा न हो जाए मेरा आज भी मानना है की पुरस्कार के लिए कोई नहीं लिखता है बेशक मन के किसी कोने में इसको पाने की चाह भी छुपी हुई होती है …. पुरस्कार सिर्फ पुरस्कार ही होता है , उसको कीमत से नहीं आँका जा सकता बल्कि वोह लेने और देने वाले की भावना से जुड़ा हुआ होता है …. भगवान इनको इसी तरह किर्याशील और सक्रिय बनाए रखे इसी कामना के साथ इनके लम्बे सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करता हूँ और यह भी आशा करता हूँ की इनके लेखों से समाज को एक नई और सही दिशा मिलेगी तथा दुष्टों का ह्रदय परिवर्तन होगा तथा एक नए भारत का निर्माण होगा ….. आभार और बधाई आप को भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukl bhramar5

आदरणीय अब्दुल राशिद जी ..... सादर अभिवादन ! आपने बात तो विद्वान जन सी ही की है ..... सच में ही संसार में बहुत से प्रतिभाशाली हस्तिया हुई है जिनका की आज तलक सही मूल्यांकन ही नहीं हो सका है ..... हमारे प्रिय नेता जी को आज तक भारत रत्न नहीं मिल सका है लेकिन हमारी आजादी में अप्रत्यक्ष रूप से आजाद हिन्द फौज का बहुत बड़ा योगदान है ...... यह मानता हूँ की पुरूस्कार प्रोत्साहन देता है हुनर को लेकिन हुनर किसी की मोहताज़ नहीं..... लेकिन किसी प्रतियोगिता में भाग लेना और हजारों विद्वान लोगो में से अपनी काबलियत द्वारा खुद को कुछ साबित करना तथा अपना लोहा मनवाना एक अलग ही मजा देता है कुछ अलग ही मायने रखता है ...... और जहाँ पर एक अनार और हजारों बीमार हो तो वहां पर जीत का नशा अवर्णनीय होता है ...... और अगर चयन में कोई गडबड होती है तो जागरूक जनता सब जानती ही है ..... आपकी इस जागरूकता भरी साहसिक प्रतिकिर्या के लिए आपका थे दिल से शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय गुरुदेव ,.सादर प्रणाम सच कहूं तो मुझे आपसे ऐसे धमाकेदार+ज्ञानवर्धक +मजेदार आलेख की आशा पिछले कई दिनों से थी ,...पता नहीं क्यों?...मेरा मन कहता था आप ऐसा कुछ जरूर लिखेंगे ,....मेरा अंदाजा सार्थक करने के लिए आपको पुनः दंडवत प्रणाम ,.. मुझ जैसे नए+अनाड़ी ब्लागर को आदरणीय निशाजी और आपका जो स्नेह +मार्गदर्शन मिलता है ,.उसका आभार प्रकट करने की क्षमता मुझ में नहीं है ,...महामाई से यही प्रार्थना है की यह आशीर्वाद सदैव मिलता रहे .. निशाजी ३-४ दिनों से मंच पर से अनुपस्थित हैं ,..शायद नवरात्रि में कहीं दर्शन करने गयी होंगी ,..मैं उनके वापस आने की बड़ी बेसब्री से प्रतीक्षा करूंगा ,.. आदरणीय निशाजी ज्ञान का भण्डार हैं ,..उनके बारे में कुछ लिखना मेरे लिए बेवकूफी ही होगी,...नाती -पोतों को होशियार बनाने के लिए आपकी सेवाएँ उनको लेना ही चाहिए ,..मेरी उनसे विनती है वो जरूर ..... आपको ,.आदरणीय निशा जी को और हम सबको मेरी तरफ से हार्दिक बधाइयाँ .. आदरणीय निशा जी को सादर प्रणाम और नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं आपको फिर से लम्बवत प्रणाम,.... http://santo1979.jagranjunction.com/

के द्वारा: Santosh Kumar

प्रिय राजकमल भाई, सादर वन्देमातरम| माया महा ठगिनी हम जानी या फिर कामो बलो न बलो च बुद्धि: अथवा विनाशकाले विपरीत बुद्धि:|का करेंगे भैया...एक होई तो कही समुझाऔं, कुपही में ईंहा भांग पड़ी बा...अथवा...बस एक ही उल्लू काफी है बर्बाद गुलिस्तां करने को, हर शाख पे उल्लू बैठे हैं अंजामे गुलिस्तां क्या होगा? जब से शीला जवान होने लगी इस देश की हर मुन्नी को बदनाम करने का दौर ही चल पड़ा और अब यह और चौचक नंगई पर ही जाकर ख़तम होगा|वेश्यालयों को कानूनी मान्यता देने से एड्स का टीका ढूंढने में सहायता मिलेगी और वेद का लवेद होगा सो अलग|कुल मिला कर नारी मुए घर सम्पति नासी, मूंड मुड़ाय भये सन्यासी|अन्ना की चांदी होगी, रामदेव का सोना...सुझाव अच्छा है...काला धन देश में ही rahega और गोरा धन उपवास करने के काम आएगा....जय हो बाबा राजकमलदेव जी की|

के द्वारा: atharvavedamanoj

आदरणीय डाक्टर साहिब .....सादर अभिवादन ! आपसे मेरी इल्तजा है की आप हर समय धीर -गंभीर मत रहा कीजिये ..... जब अपनी टिप्पणी लिख रहा था तो तब भी मेरे मन में घास फूस की बात थी .... लेकिन दिल्लगी भी कोई चीज होती है ...... एक और शंका थी मेरे मन में जोकि आपके उत्तर से साफ़ हो गई है पता नहीं मुझको क्यों लग रहा है की ऐसी टिप्पणी मैंने पहले भी की थी और बिलकुल वैसा (ऐसा ) जवाब भी इस बार भी मिला है ...... इस राज को तो अब आप ही सुलझा सकते है ..... लेकिन इससे एक बात तो साबित हो ही गई है की मैं वाकई में हल्के फुल्के मूड में ही था ..... और जहाँ तक आपके आदर +इज्जत मान +दर्जे और सत्कार की बात है वोह तो अपनी जगह है और रहेगा भी हमेशा ही - लेकिन मेरी होली सिर्फ एक दिन की ही नहीं होती बल्कि सारा साल चलती रहती है ..... होली मुबारक जय माता जगत जननी जी की

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय भाई साहब सादर अभिवादन ! आपने प्रतिक्रिया के जबाब स्वरुप मेरी बहुत प्रसंशा कर दी , धन्यवाद ! कुछ शब्द अपनी रचना -"पुतला दहन शमशान में करें " के सन्दर्भ में बताना चाहूँगा - मेरा यह आशय कदापि नहीं है की किसी पुतले को लकड़ियों से जलाया जाये,बल्कि पुतला तो स्वयं लकड़ी,घास-फूस, कपडा आदि से बनाते हैं , उसमें आग लगाने भर को देर है वह धू-धू कर जल उठेगा | दूसरे लोग+प्रशाशन +पत्रकार [ मीडिया के लिए नया अनुभव "मसाला" मिलेगा ] मेरे विचार से यह अधिक चर्चित होगा जिससे हमारी आवाज अधिक बुलंदी से उन भ्रष्ट लोगों तक पहुँच सकेगी और बेचारे हम [ जनता ] अनावश्यक ट्रैफिक जाम जैसी आपत्तियों से बच जायेंगे |

के द्वारा: Dr.KAILASH DWIVEDI

आदरणीय अशोक जी ......सादर अभिवादन ! आपकी बात से पुराने चावल याद आ गए जोकि अब शायद नहीं मिलते है ..... क्योंकि बासमती चावल अब एक आम आदमी की पहुँच से बहुत ही दूर हो गए है ..... कभी उसके इलावा घर में कोई दूसरी किस्म का चावल बनता ही नहीं था ...... पकने के बाद बेहद लम्बे +खुशबूदार और हवा के रुख के बहाव की और फैलती + तैरती उनकी खुशबू जोकि अपने दायरे में आने वाले सभी जनों का मन ललचा देती थी ..... आप समझदार है जो बिना कहे ही सारी बात को इशारे से ही समझ गए थे ...... मैं और दूसरे ब्लागर आपकी इस बुद्धिमत्ता के कायल है ..... ढेरो शुभकामनाओं के साथ आपका हार्दिक आभार आदरणीय सैयद जी ......सादर अभिवादन + आदाब ! अगर इसमें किसी हद तक मिठास आ पाई है तो यह सब आप सभी स्नेही भाई बहनों का प्यार तथा बजुर्गो के आशीर्वाद के फलस्वरूप ही हो पाता है ...... बिना आप सभ की शुभकामनाओं तथा दुआओं के यह असंभव है इसलिए मैं इस सब के लिए खुद को कर्जदार मानते हुए आप सभी का आभार प्रकट करता हूँ :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय भ्रमर जी .....सादर प्रणाम ! दरअसल एक बात तो कहनी रह ही गई थी की हरेक घर में वसीयत के रूप में एक खानदानी रिकार्ड रखा जाएगा जिसमे बताया जाएगा की परिवार के पुरुष सदस्य अपनी मानव योनि में किस किस कोठे वाली के पास पधारे थे ताकि उनकी आने वाली नस्ल गलतफहमी में गुमराह होकर रिश्तों की मर्यादा न भुला बैठे .... सोचिये की अगर एक ही वैश्या के पास चोरी से बाप और बेटा दोनों ही चले जाए बारी -२ से तो रिश्तों की क्या परिभाषा होगी .... वाकई में इससे समाज का नैतिक रूप से पतन होना निश्चित है ही ....... आपकी प्यारी -२ चुटकियो के लिए हार्दिक आभार जिन्होंने लेख लिखने से भी ज्यादा आत्म संतुष्टि और आनंद प्रदान किया :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय अमिता जी .....सादर अभिवादन ! अब लोगों को भी अपना विरोध दर्शाने के लिए किसी अन्ना जी सरीखी महान हस्ती की जरूरत पड़ती है नहीं तो सभी घुट -२ कर सहते रहते है चुपचाप ..... इसलिए या तो लोगों की लोक लहर चले + उनमे जाग्रति पैदा होया फिर भगवान और भाग्य भरोसे बैठ कर किनारे से मंजर देखे ..... लेकिन विडम्बना तो यह है की खुद के जुड़े होने के कारण देखते भी नहीं रह सकते क्योंकि प्रभावित तो सभी होते है...... देखे की क्या छिपा है भविष्य के गर्भ में ..... किस रूप में कानून बन कर सामने आता है और किस तरह से लागू होता है और इसके क्या -२ नकारात्मक प्रभाव इस समाज पर पड़ते है ?...... देखते है की इस समाज को सुधारने का बीड़ा कौन उठाता है ?...... भगवान सभी को सदबुधि दे इसी कामना के साथ सभी के कल्याण हेतु दुआ करते हुए आपका तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूँ .......

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय आकाश भाई .....सप्रेम नमस्कार ! आपको मेरा मजाक पसंद आया यह जान कर मन हर्षित हुआ ..... मेरा भी मन ठहाके ;गाने का हो रहा है ..... हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा .... तड़का लगा रहा था तो ध्यान आपकी तरफ चला गया बस तेरह नम्बर वाली का नम्बर लगा दिया .... शुक्र है की आपने इस बात का बुरा नहीं माना .... जहाँ पर सब जगह सरकार की चलती है वहीँ आजकल जनता की आवाज भी बहुत ज्यादा मायने रखती है .... अब इन्तजार है तो इस बात का की जनता का इस मामले में क्या रिऐक्शन होता है .....वैसे सभी वेश्याओं की अगर सभी अधेड़ + कुंवारे +तलाकशुदा +जरूरतमंद पुरुषों से शादी करवा कर अगर इस कोढ़ को जड़ से खत्म कर भी दिया जाए तो भी इस रक्तबीज के खात्मे की गारन्टी नहीं दी जा सकती ..... इसके लिए इसकी जरूरत और इसको पैड करने वाले हालातो तथा समाजिक ढांचे तथा सोच को नए सिरे से बदलने की जरूरत होगी ..... जिसके लिए किसी लोक लहर + जन जाग्रति की जरूरत पड़ेगी ...... आपके अमूल्य विचारों के लिए आपका दिल की गहराइयों से शुक्रिया :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय भरोदिया जी ...... सप्रेम नमस्कार ! पूरी दुनिया में मंदी छाई रही थी लेकिन भारत ही सीना ताने इस बुरे समय का सामना कर सका –बिना कोई नुक्सान सहे ..... यह वोह समय था जब आदरणीय ठाकरे जी को निजी दखल से हवाई सेवा के कर्मचारियो को बहाल करवाना पड़ा था ..... कोई भी नहीं चाहेगा की फिर से दुबारा वोह समय आये ..... अगर हमारे लुटेरे नेता कम से कम इस मामले में अपनी कोई काबलियत दिखाते हुए देश की अर्थव्यवस्था को मंदी की मार से साफ़ -२ निकाल कर ले जाते है तो कुछ हद तक तो शायद इनके पापो की गठरी हल्की हो जायेगी ..... बाकि वक्त बतलायेगा ..... मैं यही चाहूँगा की हमारा देश इस मंदी के दौर में इतनी तरक्की करे की उसके बल पर हम बिना ज्यादा प्रभावित हुए इस मुश्किल दौर से निकल सके ...... सर्वे सुखिना भवन्तु सर्वे सन्तु निरामया विश्व का कल्याण हो और सभी प्राणियो में सदभावना हो आपका तहे दिल से शुक्रिया :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

के द्वारा: Rajkamal Sharma

जय हो गुरुदेव ..ये तड़का अगर कोई अच्छा सा होटल खोले होते तो पञ्च कोटि महामणि से ज्यादा धमाका करता ..क्या आप को न कमाने की लत पड़ गयी है ..अरे इमानदारों की अब कोई बिसात नहीं जहाँ पैसा उपजे उधर चल दो उनकी पूंछ पकड लो ...कल्याण ... न जाने क्यों हम कुछ दो चार ठेका ले यों ही मरने की ठान बैठे ...जो बेचारियाँ फंसा दी गयी हैं उनके बारे में क्या ख्याल है >>>> बहुत ही अच्छा रहा ये लेख ..चुटकी लेते हंसाया भी आप ने ....मुजरा वाले तो खुश हो गए होंगे ..ये धमाका देख ...जय श्री राधे ...भ्रमर ५ मैं उम्मीद करता हूँ की इस ऐतहासिक और क्रांतिकारी कानून से हम अपने पुराने नगरवधुओं और देवदासियों वाले गौरव को फिर से प्राप्त कर सकेंगे तथा विश्व में हम फिर से अपना सर ऊँचा कर के चल सकेंगे ….. तो फिर बोलो मेरे संग जय हिन्द ! जय हिन्द !! जय हिन्द !!!

के द्वारा: surendra shukl bhramar5

प्रिय सैयद भाईजान .....आदाब ! मैं बातो ही बातो में दूर निकल गया इसलिए जो बात करनी चाहता था वोह तो रह ही गई ..... यह तांगे का ख्याल मेरा अतीत में पीछे जाने का नतीजा है ..... मेरी माता जी और हम घर के लोग घर के नजदीक के तांगा चौंक से तांगा लेकर बस स्टैंड के लिए निकला करते थे .... मात्र एक रुपया उसका (बाद में दो और फिर तीन ) किराया होता था ...... मैं भी आपकी ही तरह सोच रहा था तो उस पुरानी याद को इस लेख में इस्तेमाल कर लिया ..... चूँकि आपने मेरे अंदर तक उतरे हुए इस घटना की तरफ इशारा किया और आप पहले शख्स है जिन्होंने की मेरी इस बात को पसंद किया है -इसलिए आपसे पुरानी कोई याद सांझा करने का मन किया था ..... वाकई में कभी -२ तरक्की के दौर में पुराने समय में लौट जाने का मन करता है ..... आपने देखा होगा की धार्मिक स्थलों पर अब मार्बल पत्थर लगाने का रिवाज हो चला है .... लेकिन यह कितना ज्यादा ठण्डा और गर्म होता है -इसकी तरफ कोई भी ध्यान नहीं देता ..... आपकी बात को मैंने गलत नहीं समझा था -बस कुछेक बाते करने का मन हो आया था तो पुरानी याद सांझा करने बैठ गया था .....अगर इतनी देर के बाद हम एक दूसरे को इतना तो जान ही गए है की इस तरह की छोटी -२ बाते और गलतफहमियो के लिए हमारे बीच में कोई भी स्थान नहीं बचता है .....

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय राजकमल जी, शायद हम अपनी बात आपको समझा नहीं पाए...मेरा मतलब यह था की मुझे अच्छी तरह से पता है की आप सभी धर्मों का आदर करते हैं...और हम भी ऐसा ही करते हैं...मेरा कहने का तात्पर्य यह था...'कि उस पंक्ति में कोई ऐसी बात नहीं है' इस वजह से कमेन्ट नहीं करता... हमने आपके लेख और दुसरे ब्लोग्गर्स के ब्लॉग पर कमेन्ट भी पढ़ें हैं...और आपके विचारों से अच्छी तरह से अवगत हैं...काफी दिन पहले आपने किसी के ब्लॉग पर कमेन्ट किया था...कि '१००० कमेंट्स पूरे होने से ज्यादा ख़ुशी '७८६' पूरे होने पर होती है'... बाकि लोग कुछ भी कहें हम आपके उच्च विचारों कि कद्र करते हैं...मेरे कमेन्ट से अगर कोई गलत फहमी हुयी हो तो उसके लिए क्षमा चाहेंगे...

के द्वारा: syeds

आदरणीय गुरुदेव, नमस्कार! हमारा भारत महान है और महान हैं यहाँ के लोग सबकुछ लुटाकर भी जश्न मनाने से नहीं चूकते. अब ३२ रुपये में स्वदेशी तो बनना ही पड़ेगा. और भारतीय मुद्राकोष में इस ३२ रुपये की महत्तम राशि अगर चुकाने से पत्नी प्रतारित पतियों को थोड़ी देर की ही सही -- चैन मिल जाय इसका इंतजाम तो सरकार ने कर दिया है. और बड़े बड़े महापुरुष तो अब अपना काला धन शायद विदेश में न छुपाये यही पर उनका उपयोग कर भारतीय परंपरा का निर्वाह करें तो हमारा देश फिर से सोने का चिरिया बन जायेगा.------! बाबा रामदेव हो सकता है अपनी यात्रा बीच में ही समाप्त कर किसी आम्रपाली के बाँहों में घिर जाय और पुलिस के डंडे भी अब न पड़ेगे क्योंकि कानूनन अब वे ऐसा नहीं कर सकेंगे. गुरुदेव को भ्रातासाहित नमन! --जवाहर.

के द्वारा: J L SINGH

आदरणीय सैयद जी ..... सादर अभिवादन ! आपने जिस बात को उठाया है उसी बात के बारे में हमारे राशिद भाई ने और संतोष भाई ने भी अपने विचार रखे थे ..... लेकिन उन्होंने यह बात तब कही थी जब की गलती से मैंने (सिर्फ कट्टर मुसलमान ) भी नहीं लिखा था .... इसीलिए उनसे मैंने अपनी इस गलती की माफ़ी मांगी थी ..... ऐसा कोई भी धर्म नहीं जिसमे की सिर्फ शांत लोग ही हो ..... लेकिन फिर भी हंसाने के लिए धर्म + मजहब का इस्तेमाल करने के मैं खिलाफ हूँ .... मुझको याद आता है की बचपन में किस तरह से मेरे स्वर्गीय पिता जी दरगाहों पर कवालिया सुनने के लिए मुझे अपने साथ लेकर सारी -२ रात बैठे रहते थे ..... उह उन्ही के दिए हुए संस्कार है की न केवल हिन्दू + मुस्लिम बल्कि सभी धर्मो का समान आदर करना सीखा है ..... आज बात चली है तो आपसे एक बात सांझा करता हूँ ..... पकिस्तान के हजूर महाराज जी की सवारी मेरे दूर के रिश्ते के मामा जी पर आती थी ....एक बार रात के दो बजे उन्होंने आकर कहा की जाओ बेटा हमारे लिए गुलाबजामुन लेकर आओ ..... अब मास्टर जी साइकल लेकर हुक्म की तामिल करने निकल तो पड़े लेकिन रास्ते में सोचते जा रहे है की इनको क्या हो गया है जो आधी रात को मेरे को दौड़ा दिया है .... अब इस समय कौन इनके लिए दूकान खोले बैठा होगा ..... साइकल पर ही सारे आधे शहर का चक्कर लगा लिया और जब निराश होकर वापिस आये तो देखा की गली के मोड़ पर ही एक हलवाई गर्मागर्म गुलाबजामुन निकाल रहा था .... उससे पांच रोये की लेकर जब घर पर आये तो देखते ही हजूर महाराज बोले की क्यों ?, क्या कहता था तू की बूढ़े का दिमाग खराब हो गया है , आधी रात को कौन दूकान खोल कर बैठा है इनके लिए .... देखा इसी बूढ़े ने सारे शहर का चक्कर लगवा दिया ना .... वोह आज भी आपस में जिगरी दोस्तों की ही तरह से बर्ताव करते है-हालाँकि हमारे वोह मामा जी पर देहात का काफी असर होने के कारण उनकी बोलचाल की भाषा बहुत ही सीधी है .... .... अब हमारा उनके यहाँ अब आना जाना नहीं होता लेकिन पीर साहिब द्वारा पकिस्तान से अपने शागिर्द से किसी पिछले जन्म के रिश्ते के कारण सम्बन्ध बनाना और आना इस बात को साबित करता है की दो देशों के बीच की दूरिया कुछ भी मायने नहीं रखती और एक ना एक दिन भारत और पकिस्तान फिर से एक जरूर होंगे ..... धन्यवाद (मुसलमानों में सैयद सबसे ऊँची जाति होती है+हालाँकि मैं जाति पाती में विश्वाश नहीं रखता हूँ )

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय चातक जी ..... सादर अभिवादन ! ऐसा लगता है की आप की पारखी नजरे इस बार धोखा खा गई है ..... अगर मैं इस लेख में आपको बेहद रसिक नजर आया हूँ तो फिर इससे पिछली पोस्ट “कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंज” का तो अल्लाह ही मालिक है ..... और रही बात इस मंच के दुर्जनों की तो चाहे फिर वोह कोई प्रत्यक्ष रूप में अकेला डैनियल हो या फिर अप्रत्यक्ष रूप में उसका पूरा समूह – हमारी आपसी शक्ति और एकता से हमने अतीत में न केवल उनका सामना किया है बल्कि उनके कुत्सित इरादों को पूरी द्रढता से नाकाम भी किया है ..... हमारी यही एकता ही ऐसे असमाजिक तत्त्वों को इस मंच से दूर रखे हुए है ..... उम्मीद है की आगे भी आपका इसी प्रकार सहयोग मिलता रहेगा ...... आपका तहेदिल से शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय हरीश जी .....सादर प्रणाम ! आप सदैव हमारे आदरणीय है और रहेंगे इसलिए माफ़ी जैसे शब्दों द्वारा शर्मिंदा मत किया करे .... आपने लेख को पढ़ लिया इतना ही काफी होता है और अगर आपने उस पर दो शब्द भी कह दिए तो फिर सोने पर सुहागा भी हो जाता है .... आप सभी के पास समयाभाव रहता है इसलिए आपके समय की कद्र करते है और इसीलिए आप से यह प्रार्थना है की अगर सभी को संभव न हो तो सभी का नाम लेकर एक ही टिप्पणी में हे ही सबको धन्यवाद वाला उत्तर दे दिया करे तो उतने भर से ही हम खुद को धन्य मानेंगे और परम संतोष का अनुभव करेंगे .... उम्मीद करता हूँ की इस मंच पर हम सभी को आपका स्नेह और आशीर्वाद इसी प्रकार मिलता रहेगा ..... आपका हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय तमन्ना जी ..... सादर अभिवादन ! दरअसल मुझको अपना लेख किसी को भी पढ़ने के लिए कहना कुछ अपवर्ड सा लगता है ....इसलिए आपको और इस फिल्म के सभी कलाकारों को न्योता नहीं भेजा था ..... आपसे और हमारे प्रिय अबोध भाई जी से प्रेरणा लेकर ही मैं भी अपने कमेन्ट के साथ अपना पता लिए घूमता हूँ ताकि दूसरे लोगों की मुझ तक पहुँच आसानी से बनी रहे -नहीं तो बेचारे जीरो पोस्ट और जीरो कमेन्ट वाले ब्लॉग पर पहुँच कर चकरा जाते है ..... मन में एक डर भी था की पता नहीं आपको अपना रोल पसंद आया भी है की नहीं क्योंकि यहाँ पर कमेन्ट ना करने से यही अर्थ निकाला जाता है फिर चाहे बेचारा ब्लागर अनजान ही क्यों न रहा हो ..... मैं हर बार सभी की उम्मीदों पर खरा नही उतरता इस सच्चाई को मैं जानता हूँ फिर भी कोशिश जारी रहेगी अपने रोल को पसंद करके उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय आकाश भाई ..... नमस्कार ! आपको दुबारा यहाँ पर देख कर हार्दिक प्रसन्नता हुई है ..... शायद आजकल आप कुछ ज्यादा ही व्यस्त है ....पिछले दसेक दिन पहले आपके बारे में सोचा था की आपने अपनी आखिरी रचना के सभी कमेन्ट का उत्तर नहीं दे पाने का कारण भी आपकी अति व्यस्तता ही होगा ..... कितना भी बिजी क्यों न हो बीच में कभीकभार समय निकाल कर अपनी रचना पोस्ट कर ही दिया करे ..... हालाँकि यहाँ के लोगों का स्वभाव मैं जानता हूँ की कई बार इससे पूरी तरह से उत्साहवर्धन नहीं हो पाता है .... भाइसाहिब अपनी पत्नी से धर्म और समाजिक मर्यादाओ के अनुसार आचरण रंगीनियत की श्रेणी में कब से आने लगा ? हा हा हा हा हा ..... वैसे आपने यह बिलकुल सही कहा है की मैं रंगीन मिजाज हूँ और मरने के बाद भी कहलाया जाना पसंद करूँगा ..... आपका पधारने का इस मंच पर आधा शुक्रिया पूरा आपके द्वारा कोई रचना पोस्ट करने पर :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय संतोष भाई .....सप्रेम नमस्कार ! अगर मै आपकी बात को टाल रहा हूँ तो यह इस बात का सबूत है की अब गुरु गुड़ और चेले शक्कर हो गए है ..... आज मैं आपके सामने इस बात को मानने में गर्व महसूस कर रहा हूँ की मेरे इस लेख की शैली आपकी गाँव की चौपाल चर्चा पर न केवल आधारित है बल्कि उससे प्रेरित भी है .... इसलिए आप भी मेरे गुरु हुए , क्योंकि सीखा तो किसी से भी जा सकता है ..... आप इसका दूसरा भाग बना कर रिलीज करने वाले है यह जान कर बहुत हर्ष हुआ है – वह सफलता के मामले में पहले भाग को भी दूर कहीं पीछे छोड़ दे , इसी कामना के साथ अपने लिए एक छोटे से रोल की भी उसमे आशा रखता हूँ ..... हरेक आदमी की अपनी अलग खासियते होती है + गुण होते है जिनको की अपनाया जा सकता है ..... आपको ढेरो धन्यवाद :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

के द्वारा: rajkamal

दिव्या बहिन ..... नमस्कार ! आपने जब अपनी पवित्र जिव्हा से यह शुभ वचन निकाल दिए तो अब इस फिल्म को हिट होने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती है ..... और यह मेरी नाकामी और मजबूरी कही जायेगी की इस मल्टीस्टारर फिल्म में आपको बहुत छोटे से रोल से ही गुजारा करना पड़ा ..... वैसे एक सूरतेहाल में यह संभव था अगर तमन्ना जी वाला रोल आपको मिल जाता लेकिन तब उनके लिए स्कोप खत्म था क्योंकि जागरण परिवार में निभाई गई उनकी भूमिका के कारण उनको और कोई रोल दिया ही नहीं जा सकता था .... मैं उम्मीद करता हूँ की आप मेरी मजबूरी को समझते हुए क्षमा करेंगी ..... अगर यह फिल्म हिट होती है तो इसमें काम करने वाले सभी कलाकारों का बराबर का योगदान होगा , फिर रोल भले ही किसी को कम मिला हो या ज्यादा ..... हमारे सभी के दुलारे अबोध जी की खुशी में सभी शामिल होना चाहेंगे – और यह हम सभी का मुंह मीठा जरूर करवाएंगे ..... वैसे मैं तो इनके नाम से एडवांस में ही आज ही अपना मुंह मीठा कर चूका हूँ .... यह तो आप भी जानती है की यहाँ पर जन शक्ति के साथ (महिलाओं और पुरुषों –सभी भाई बहिनों की सम्मिलित ) से ही कोई भी बड़ा नाम हो सकता है और होता है ..... लेकिन मैं सभी को खुश रखने की नीति + सिर्फ अच्छे लगने वाले कमेन्ट ही नहीं करता – अगर कभी मजबूरी में कर भी दिया तो अगली बार सूद समेत उसकी भरपाई कर लेता हूँ – इसलिए फिर भी अगर मुझको स्नेह मिलता है तो मैं खुद को खुशकिस्मत ही समझना चाहूँगा ..... बाकि यह लेखनी अगर मेरी है तो यह सोच उस उपर वाले+वाली की देन है , लेकिन फिर भी चाह कर भी हर बार ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि अभी मैं इस विधा में इतना पारंगत नहीं हुआ हूँ ..... लेकिन एक कविता या गजल की रचना करने वाले हमेशा ही कमाल करने और उसको दोहराने की कुव्वत रखते है ..... आपकी शुभकामनाओ के लिए आभार सहित आपके सदा ही सुखी और खुश रहने की कामना करता हूँ .... आपका भाई राजकमल शर्मा :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय अब्दुल राशिद जी ..... आदाब ! मैं तो इस मंच पर आने के बाद से ही अपने इस प्रयास में लगा हुआ हूँ .....यानि की जब से अच्छी भली शायरी की दूकान बन्द करके यह वयंग्य का नया शोरूम खोल लिया है , तब से ही ..... कमेन्ट का कितना महत्व है यह भला मेरे से बेहतर कौन जान सकता है जिसने की कुछेक शुभचिंतक ब्लागरो के द्वारा मुझमे किस तरह की ऐसी संभावना देख कर कुछ अलग लिखने के लिए बार बार कहने पर जब वयंग्य लिखना शुरू तो कर दिया लेकिन सपने में भी नहीं सोचा था की सभी स्नेही सज्ज्नी द्वारा इतना स्वीकार किया जाऊंगा .... आप सभी का स्नेह और आशीर्वाद बना रहे और यह कदम आगे बढते रहे , इस सब के पीछे सीधे रूप में आप सभी का योगदान है .... आपका हार्दिक शुक्रिया :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय भ्रमर जी ....सादर प्रणाम ! देर लगी आने में तुमको शुक्र है फिर भी आये तो , उम्मीद करता हूँ की आप सपरिवार कुशल मंगल से होंगे .+सभी काम सिद्द करके ही आये होंगे .... मुझको सबसे ज्यादा आशंका आपके द्वारा नाराज हो जाने की ही थी की कहीं आप इस बार भी अपना नाम शामिल किये जाने से नहीं बल्कि अपनी भूमिका को लेकर इस फिल्म की पब्लिसिटी में हिस्सा न ले ..... खैर आपके आने से खुशी हुई और उससे भी बढ़कर खुशी आपके द्वारा अपनी भूमिका (रोल ) पर किसी सवाल का न उठाया जाना मन को परम संतोष प्रदान कर गया ..... आपने जो बात कही है मेरी भी बचपन से यही कामना रही है की भगवान मेरी सारी समझ+ होशिआरी को वापिस ले ले- बदले में मुझको बालको सी अबोधता दे दे ..... कभी तो भगवान सुनेगा ही मेरी नहीं तो आपकी ही सही ...... आपकी इस अदभुत शुभकामनाओं के लिए मेरा यह पूरा जीवन ही आपका कर्जदार है .....और मस्ती तथा उलास के सभी रंग खुशियो के संग सभी के जीवन में घुले रहे इसी कामना के साथ .....आभार सहित आपका एक और अबोध जय श्री राधे कृष्ण

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय प्रवीन जी ....सादरप्रणाम +आदाब + अभिवादन ! मेरा यह मानना है की पहले तो खुद को खुश रखने की कोशिश और बाद में दूसरों को खुश करने की कोशिश करनी चाहिए ..... क्योंकि जब तलक आप खुद ही खुशी से सरोबार नहीं हैं आप बुझे मन से दूसरों को खुशी नहीं बाँट पायेंगे ..... आपकी इस टिप्पणी के हरेक शब्द में मुझको हर्ष नजर आया है जिसकी की मैं हरेक ब्लागर भाई बहन की टिप्पणी में अपेक्षा करता हूँ ..... आपने बिलकुल सही कहा है की नारी शक्ति की जय – जय जयकार ...... सच में ही भगवान शिव भी जब शक्ति (ई ) के बिना शव हो जाते है तो फिर हम साधारण मनुष्यों की क्या औकात और बिसात ..... विद्या की देवी मान सरस्वती जी + धन की देवी मां सरस्वती जी तथा शक्ति की प्रदायक मां दुर्गा – यह सभी इस्त्रिया (देवी मां) ही तो है .... इसलिए भी नारी शक्ति की जय जयकार आपका बहुत – आभार

के द्वारा: rajkamal

गजब का लपेटा सब को गुरुदेव जी आप ने ..ये पुरुषों के पीछे पड़ने वाले अभी भी शांत नहीं हो रहे क्या ..पंडित जी को पोथी पत्र खोल कुछ मन्त्र पढना होगा लगता है आप की रंगे महफ़िल कुल्लू मनाली की जमी रहे चार चाँद लगे ..दिनों दिन मेंहदी निखर लाये .... ढेर सारी शुभ कामनाये ...व्यंग्य और हास्य भरा सब को मंच पर बांधता हुआ ..बहुत सुन्दर आभार आप का इस लाजबाब प्रस्तुति पर ..... तो दोस्तों इस प्रकार इतनी “जद्दोजहद और त्याग” की वजह से बनी उस नयी सड़क पर से होते हुए राजकमल जी ने कुल्लू मनाली में अपनी सुहागरात + हनीमून की तैयारी की ….. और पुरे गाँव भर में हरेक घर आंगन में प्रेम का सागर फिर से हिलोरे लेने लग गया था ….. फिजा में मस्ती का एक अलग ही रंग घुल गया था जय श्री राधे भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5

प्रिय वाहिद भाई ...... नमस्कार ! अगर सच में कहूँ तो मुझको आपकी वोह बात नहीं जमी थी जिसमे की आपने कहा था की मेरा आपके ब्लॉग पर दो बार आना ज्यादा प्यार को दर्शाता है ..... मैं नहीं समझता की कम से कम हमारे बीच के सम्बन्ध किसी कमेन्ट की बैसाखी के मोहताज है ...... हाँ यह अलग बात है की इस मंच पर कमेन्ट की कसौटी पर ही सभी को देखा और परखा तथा जांचा जाता है ...... आपने मेरे इमेल पते पर अगर मेल की थी तो वोह मुझको नहीं मिली है ..... हर रोज मुझको पन्द्रह से पच्चीस मेल डिलीट करनी पड़ती है ..... लेकिन मुझको पूरा ध्यान है की उन सभी में आपकी वोह मेल नहीं थी ...... आपके पास अभी भी भेजे हुए सन्देश में वोह सेव पड़ी होगी , किरपा करके उसको दुबारा से भेज दे तांकि मैं आपके जज्बातों से वाकिफ तो हो सकूँ ..... मैं भी ट्रैश फोल्डर को चेक करता हूँ ..... आपने खुद अपना ही नहीं बाकि सभी ब्लागरो के द्वारा भी सह्रदयता प्रकट की है वोह आपके दिल के विस्तार को दर्शाता है ..... इस भागीरथी प्रयास के लिए आपका आत्मिक शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय जैक भाई .....आदाब ! हाँ यह बात अपनी जगह पर ठीक है की आप मेरी सबसे पहली पत्नी रचना के हरेक मामले में हमारे समर्थक रहे है .....आपसे परस्पर स्नेह शब्दों का मोहताज नहीं है .....लेकिन एक बात आप भी जानते ही है की मल्टीस्टारर फिल्म में सभी सूत्रों को एकसार रखना कितना जोखिमपूर्ण कार्य होता है ..... आपने जालिम ठाकुर दुर्जन सिंह के खिलाफ धरने में बोर हो रहे शोर्ताओ का अपने हलके फुल्के इंटरनैटी मसालों से भरपूर हँसाया .....इस बात को इस लेख में भी शामिल करने वाला हूँ ..... मैं उम्मीद करता हूँ की न केवल आप बल्कि वोह सभी ब्लागर भी मुझको क्षमा करेंगे जिनका की नाम इस लेख में नहीं आ पाया है क्योंकि यह किसी भी हाल में संभव ही नहीं था ..... आपका तहेदिल से आभारी

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय जवाहर लाल जी .....सादर अभिवादन ! मैं माफ़ी चाहूँगा की आपके प्रिय पात्र को आपकी इजाजत के बिना अपने लेख में इस्तेमाल कर लिया ..... और प्रिय अबोध जी से उनका कोई और रिश्ता शायद बन भी नहीं सकता था ..... मैंने उनको इतना आदर मान तथा महत्व दिया है की अबोध जी की शादी करने का फैसला लेने का हक उनको देकर उनका दबदबा अबोध जी के पिता जी से भी ज्यादा दिखाने की कोशिश की है ..... आपको यह प्रयास पसंद आया उसके लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया (अन्ना जी तो चमन के दीदावर है – उनके जैसी हस्तिया रोज रोज भगवान इस जमीं पर नहीं है भेजता .... गुणों में और आचरण में हम उनके चरणों की धूल के भी बराबर भी नहीं है – आखिर कुछ बात है उनमे की उनके पीछे चलती है सारी की सारी जनता हमारी )

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय विनीता जी .....सादर अभिवादन ! आप इस मंच से क्चुनकी पिछले काफी समय से जुडी हुई है इस लिए इस लेख को ज्यादा बेहतर ढंग से समझ सकी ..... नहीं तो इस फिल्म को बनाने में सबसे बड़ा रिस्क इसके कलाकारों को लेकर ही था :- *बहुत से हमारे साथी आजकल इस मंच पर सक्रिय नहीं है इसलिए नए आये हुए ब्लागर शायद उनके बारे में कुछ जज्यादा जानते नहीं है ...... *जो हमारे सामने मैदान में नहीं है उसके बारे में कुछ भी अच्छा या बुरा कहना नैतिक रूप से चाहे उचित नहीं कहा जा सकता लेकिन इस फिल्म की कहानी ही ऐसे मोड़ लेती गई की उन सभी की उप्सिथ्ती अनिवार्य हो गई थी .....आपका नाम भी इस लिस्ट में जोड़ दिया गया है उम्मीद है की आप इसको पसंद करेंगी ..... आपका बहुत -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय अबोध जी ....सस्नेह नमस्कार ! मेरे लिए यह परम संतोष की बात है की आप इस बार नाराज होने की बजाय खुश है .... शायद यह आपकी शादी फिक्स हो जाने की खबर का ही असर है ..... आपकी उत्सुकता ने मेरी उस बात को सही साबित कर दिया है की अब आप अपनी शादी के नाम पर शर्माते नहीं बल्कि ..... आप उसके बारे में मुझसे नहीं बल्कि मेरी पत्नी से पूछिए वोही आपको अपनी बहन के बारे में विस्तारपूर्वक बतलाएगी ..... और आप अपना दिल + जिगर + नजर और निगाह वगैरह उसकी अमानत के रूप में संभाल कर उसके लिए ही बचा कर रखे ..... आपको सही सलामत पूरे रूप में उसके हवाले करना अब हमारी पहली प्राथमिकता है ..... आप जैसे पारखी ने मेरी छुपी हुई मेहनत को पहचान कर सबके सामने लाने का जो भागीरथी प्रयास किया है उसके लिए मैं तहेदिल से आपका शुक्रिया अदा करता हूँ विद इंट्रस्ट .....

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय अशोक जी ..... नमस्कार ! यह तो सभी जानते है की आंसू औरतो का सबसे कारगर हथियार होते है –माता कैकई जी के ही समय से .... लेकिन इस प्यार रूपी हथियार का आविष्कार नए जमाने की देन है जोकि औरतो की सामूहिक इच्छाशक्ति और सामूहिक शक्ति तथा उनकी बढ़ रही शक्तियो तथा समाजिक रुतबे में बदलाव को दर्शाता है .... और कोई हड़ताल चाहे जितनी भी लंबी चल जाए + असफल हो जाए लेकिन इस प्रकार की हड़ताल न तो ज्यादा लंबी खीच सकती है और न ही इसके असफल होने का कोई डर है ..... बल्कि मैं तो कहता हूँ की दो दिन भी बहुत ज्यादा चली , लेकिन क्या खूब चली ..... यहाँ गोर करने वाली बात यह है की यह सफल हड़ताल हमारे भारत में नहीं बल्कि एक यूरोपीय देश में हुई है .... इसलिए इसका महत्व और मायने खास अर्थ रखते है ..... आपके विचारों के लिए बहुत -२ शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय संतोष जी ....नमस्कार ! जिस तरह से आजकल आप स्तरीय लिख रहे है मुझको पूरा यकीन है की आप एक बहुत ही बढ़िया लेख इस विषय पर लिख कर हं सभी का मार्गदर्शन कर सकते है ..... और मैं तो महा कुत्ती चीज हूँ आप सभी जानते ही है ..... इसलिए बिना कांटछांट के मोलिक रूप में बिना फीचर का विचार किए +समझौता किए छाप दिया करता हूँ ..... इस तरह की खुले मन से प्रतिकिर्या आप ही दे सकते थे ..... और जहाँ तक इस तरह की नोकरी की बात है मैं आपको बता देना चाहता हूँ की कम्पनिया समय से आगे और व्यंग्यकार कम्पनियों से भी आगे की सोचता है ..... आपने एक टूथपेस्ट की मशहूरी में देखा होगा की घर से रास्ते पर जा रही लड़की को रोक कर एक्सपर्ट लड़की के दांतों की जांच करता है ..... इसकी ही तर्ज पर सोचिये की कल को कोई ऐसी मशीन बन जाए की जो लोगों को बताए की उनको प्यार कितना और किस स्तर का मिल रहा है ..... आपने मुझको समझ कर सराहा उसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद करता हूँ ...... :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय अब्दुल रशीद जी ....आदाब ! जहाँ पर मैं गलत हूँ वहां पर अपनी गलती को जरूर मानूंगा ..... आप मुझसे माफ़ी मांग कर बड़े नहीं हो सकते – बल्कि आपसे माफ़ी मांग कर मैं ही बड़ा बना रहना चाहता हूँ .... अब मैंने अपने शब्दों को सुधार लिया है , मैं उम्मीद करता हूँ की अब आपको मुझसे इस बारे में कोई शिकायत नहीं होगी ..... वैसे मैं मुस्लिम देशों के सभी सख्त कानूनों के पक्ष में हूँ –अपने यह विचार मैंने अभी परसों ही आदरणीय चर्चित चित्रांश जी के लेख पर भी प्रकट किए थे ...... आपकी भावनायो को चोट पहुंचाने के लिए एक बार फिर आपसे माफ़ी मांगता हूँ ....क्योंकि एक आम और औसत मुसलमान सच्चा +अपने ईमान का पक्का +अपने धर्म का पूरा तथा दूसरे सभी धर्मो का आदर करने वाला + ईमानदार तथा सीधा साधा +नेताओं के वायदों का मारा तथा शोषण की चक्की में पिसा हुआ होता है ...... आपका हार्दिक आभार :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: abodhbaalak

के द्वारा: MrityunjaY

प्रिय राज जी सादर अभिवादन ! मैं मानता हूँ कि आप न केवल स्त्री लिखते है बल्कि स्तरीय पढ़ते भी है .... लेकिन मैं समाजिक लेखक कि बजाय हास्य वयंग्य में अपनी टांग घुसेड़ने वाला हूँ ..... इस लेख के उपर में जो दो लाइने नेट से ली गई है उनको ही आधार बना कर सारी माथापच्ची और मगजमारी करनी पड़ी ...... मेरे सामने मेरा विषय बिलकुल स्पष्ट और सीमाए पूर्वनिर्धारित थी ..... जहाँ एक समाजिक लेखक और दूसरा लेखक विषय के दोनों ही पहलुओ पर लिख सकता है -इस मामले में मेरी अपनी सीमाए होती है जिनको कि चाह कर भी तोडा नहीं जा सकता ..... आपके सामने मैं अपना एक पुराने लेख का लिंक रखना चाहूँगा जबकि उसके द्वारा कारनामा करने पर मुझ ko likhna pd gya tha (likhne ka mouka mil gya tha ) :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/03/06/जब-एक-पुरुष-ने-की-औरतों-की-ब/ र लिखने का भूत सवार हुआ था ..... http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/03/06/जब-एक-पुरुष-ने-की-औरतों-की-ब/ आपसे गुजारिश है कि अगर आपकी जानकारी में भी कभी कोई अजीबोगरीब खबर आये तो उसको मेरे साथ जरूर सांझा करे ,आपका हार्दिक आभारी रहूँगा और हूँ भी

के द्वारा: rajkamal

प्रिय वाहिद भाई ..... नमस्कारम ! पहली बात तो यह है कि कम से कम इस बार तो मैं आपका आशय समझ ही गया था -लेकिन जवाब फिर भी सीधा न देकर अपने स्टाइल में ही देना पड़ता है -और वोह कितना भ्रामक है आप जानते ही है ..... जुड़वाँ बच्चे तो अक्सर ही किसी २ विरले जोड़े के होते ही रहते है -लेकिन इस खासमखास करिश्मे के लिए अपने खुद के इलावा किसी और मेहरबान कि भी जरूरत पड़ती है ..... मेरा तो शुरू से ही यह विचार रहा है कि बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा ..... फिर भी आपने सही तरीके से प्रख्यात होने कि बात कि है तो मैं बताना चाहता हूँ कि जब मैंने इस मंच पर लिखना शुरू किया था तो मन में एक डर था और आशंका थी कि क्या मुझको सबके सामने आकर इस प्रकार लिखने कि इजाजत भी है कि नहीं ..... खैर अब तलक तो सब ठीक ही चल रहा है अब आगे देखते है कि क्या होता है ..... आपका हार्दिक अभिनंदन तथा आभार

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय वाजपेई जी .....सादर प्रणाम ! मेरे मन को बहुत ही ठेस पहुंची जब आपने मुझको तुम कि बजाय आपने कहा ..... यह ठीक है कि आपने जिस बात पर अपना स्नेहयुक्त ऐतराज जताया है उसका इस फिल्म में होना निहायत ही जरूरी है ..... लेकिन माफ़ी चाहूँगा कि अपना नाम मैं अपने हरेक लेख में जबरदस्ती घुसेड़ने कि कोशिश केवल इसलिए कियाकरता हूँ ताकि रचना + लेखक तथा पाठक के बिच में एक त्रिकोणीय बन्धन बन जाए ..... आपकी बिटिया (मुंहबोली ) रानी मेरे पास अपनी शिकायत लेकर आई थी मैंने अपनी तरफ से उनके उपर लिखे हुए ब्लॉग पर ही उत्तर दे दिया था ..... आप किरपा करके अपनी किरपा दृष्टि उधर भी डाल दीजियेगा ...... जी जितनी उपर से जिंदगी लिखवा कर लाया है उतनी उसको भोगनी ही है .... इस प्रकार लिखने से अगर कूच अनर्थ होता हो तो मैं आगे से इस प्रकार नहीं लिखूंगा ..... आपका आत्मिक आभारी आपका नालायक पुत्तर

के द्वारा: rajkamal

प्रिय लहर जी ....नमस्कार ! चलिए आपने मेरे बारे में तो सोचा लेकिन आपकी भाभी जान का क्या होगा उसकी वेदना पीड़ा भी तो दोगुणी हो जायेगी यह अलग बात है कि फिर चाहे जन्म के बाद दोनों का मुख देख दोगुणी खुशी से अपनी सारी पीड़ा को भूल जाए ..... लेकिन मैं चाहूँगा कि अगर आपकी शुभकामनाये रंग लाये तो उनमे एक लड़की और दूसरा लड़का हो ...... अब आप उन दोनों के लिए अच्छे और प्यारे से नाम सोचने के काम में लग जाइए ...... *************************************************************************************************************** यह आपने बिलकुल सही कहा है कि यह सच के बिच में वयंग्य है लेकिन वयंग्य के बिच में सच्चाई और कल्पना दोनों ही हो सकती है ...... आपके प्रोत्साहन के लिए आपका हार्दिक आभार :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

के द्वारा: rajkamal

के द्वारा: s.s. yadav

के द्वारा: chaatak

प्रिय राज जी ..... सादर अभिवादन ! मैं लोगो के विचार और आचरण तथा इस समाज का ढांचा तो बदलने से रहा ..... एक लेखक को जैसा दिखेगा वोह वैसा ही तो लिखेगा ..... वैसे तो यह घटना यूरोपीय देश पोलैंड की है और जहाँ तक रिश्तों की बात है अगर हमारी कोई नजदीकी महिला गुमराह होकर गलत रास्ते पर चल पड़े तो उससे रिश्ता भले ही खत्म नहीं हो जाता लेकिन वैसी इस्त्री से रिश्ता रखना कौन चाहता है ..... हमारे समाज में ऐसी बाते आम तौर पर बर्दाश्त नहीं की जाती इसीलिए अंत किलिंग के केस हमारे देश में ही ज्यादा होते है .... और अगर मेरी सगी कोई महिला ऐसा आचरण करती है तो मुझे उससे अपना रिश्ता तोड़ने में एक सैकेण्ड से ज्यादा नहीं लगेगा ..... यह तो करने वाले को खुद सोचना है ..... जो जिस तरह का है जमाना तो उसको वैसा ही कहेगा ना ..... और यहाँ तो आपको सही तरह से रहने पर अनेको दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है .... आप खुद ही सोचिये की गलत चलने वालो को यह समाज कब छोडेगा ..... आपके कीमती विचारों के लिए आपका बहुत -२ अभार ************************************************

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय अश्वनी भाई .... वंदे मातरम ! जब हमारे मन में खुशी पाने की चाह है तो हमको खुशी (लड़की नहीं ) ढूंडने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी बल्कि वोह खुद चल कर हमारे जीवन द्वार पे आ जायेगी ..... आदरणीय भाई साहिब अब आप इतना भी जुल्म मत कीजिये ....आप मुझसे इतनी आशाये और अपेक्षाए मत रखिये की पूरी दुनिया के किसी भी कोने में कोई भी करिश्मा घटित हो उसमे मेरी शमूलियत और जिम्मेवारी जरूरी होनी ही चाहिए , क्योंकि मैं इतना भी काबिल नहीं हूँ जितन की आप समझते है ..... आपकी बात मान कर आपकी आधी मुबारकबाद ही कबूल करता हूँ .... लेकिन आपने एक बात का ध्यान नहीं दिया की ‘दूसरे- वाला” हरेक ब्लागर में अपने खोये + छुपे हुए पिता को खोज रहा है..... आइये सब मिलकर उसके लिए भी दुआ करे की उसकी खोज पूरी हो .... अब तो कुछ मीठा हो ही जाए इस अधूरी खुशी पर ! जय भारत !

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय वाहिद भाई .... नमस्कार ! उस कोष्ठक में लिखी हुई इच्छा को तो दोस्त कम दुश्मन ही पूरा कर सकते है , जिनके एहसान का चाह कर भी शुक्रिया नहीं किया जा सकता .... आप तो जानते ही है की यहाँ पर इज्जत के नाम पर कितना खून खराबा हो जाता है ...... ऐसे बेगैरत का जीना मुश्किल हो जाता है हमारे समाज में और उस बेचारे के लिए कत्ल करना ही “आखिरी- रास्ता” बचता है..... इस खबर पर बहुत मेहनत करनी पड़ी .... खबर वाला अखबार का पन्ना गम हो गया .... नेट पर यह खबर पोलिश भाषा में मिल रही थी ..... वोह तो भला हो गुग्गल ट्रांसलेट का जिसके कारण इसको इंग्लिश में ट्रांसलेट करके आप सभी की सेवा में पहुंचा पाया ..... आपके सहयोग के लिए हार्दिक शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय अबोध भाई ....सस्नेह नमस्कार ! आपको इस लेख में हुई मेरी मौत का कोई गम नहीं , बस ध्यान रहा तो अपने नाम का ..... क्या मैं अपने बच्चे का नाम “अबोध बालक” नहीं रख सकता ?...... और उस मासूम से आपको कोई हमदर्दी नहीं हुई जिस बेचारे को अपने असली बाप का ही पता नहीं है .... मेरी तो यही कामना है की जब तक बच्चा होश नहीं संभालता हरेक बच्चे को अबोध बालक ही कहना चाहिए .... और गुणों में आप जैसा कौन नहीं होना चाहेगा ..... ऐसा लगता है की भगवान भी हरेक देश की संस्कृति और समाजिक मर्यादाओं तथा कद्रो कीमतों के अनुसार ही अपनी रहमत बरसाता है .... वैसे एक बात और भी है की क्या पता हमारे देश में ऐसे अनगनित करिश्मे हुए ही पड़े हो ..... लेकिन सुचना और तकनीक के अभाव में उन तक हमारी पहुँच न हो पाई हो .... आपका हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय भ्रमर जी .... सादर प्रणाम ! मैं जब इस खबर को नेट पर खोज रहा था तो कई जगह पर आपके द्वारा बताई गई तमाम बाते भी लिखी हुई थी ..... लेकिन मेरे ख्याल से इस सुविधा का लाभ ज्यादातर समलिंगी + बेऔलाद ही उठाएंगे ...... मैं नहीं समझता की इस्त्री की भूमिका + दर्जा इस तरह खतरे में पड़ सकता है ..... यह सच है की औरत अगर अपनी आई पर आ जाए तो फिर उसकी सब निगरानी धरी की धरी रह जाती है ..... बाकि यह समाज है इस में हर रंग के लोग रहते है ..... हमारे चाहने से कुछ नहीं है होने वाला .... जिसने जो करना है वोह तो करेगा ही ..... और जब खबर बनेगी तो राजकमल उस पर लिखेगा भी ..... आपको इस विचित्र खबर ने हँसाया यह जान कर प्रसन्नता हुई ...... रे मन रख तू आस – खुश होने के मौके मिलेंगे लाख ..... जय श्री राधे कृष्ण

के द्वारा: Rajkamal Sharma

अनीता जी ....नमस्कारम + आदाब ...... आखिरकार आप हमारे घर (ब्लॉग) पर पधार ही गए भले ही एक जमाने के बाद ही क्यों न सही .... आज मैं आपको आदरणीय रमेश वाजपेई जी की बेटी समझ कर ही बात करूँगा और अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूँगा की मेरे द्वारा आपको दिए गए जवाब से मुझको उनके सामने नीचा न देखना पड़े ...... मैं इस लेख की बात नहीं करता लेकिन इस लेख पर आई हुई प्रतिकिर्याओ पर मेरे उत्तर देखेंगी तो आपको अलग ही तस्वीर नजर आएगी और इस लेख को लिखने का कारण भी समझ में आ जाएगा-खासकर आदरणीय शाही जी को दिए गए मेरे जवाब से ..... आप अक्सर ही सार्थक संवाद स्थापित करने की बात किया करती है ..... कभी आपने सोचा की क्यों आजतक किसी एक भी ब्लागर से आपका सार्थक संवाद स्थापित नहीं हो सका ? ...... माना की यह दुनिया बहुत ही बुरी है , क्या सभी ब्लागर भी उतने ही बुरे है ? जहाँ तक मैं समझता हूँ सभी ब्लागर पढ़े –लिखे + सभ्य –सुसंस्कृत + उच्च विचारों युक्त छोटे और बड़े साहित्यकार है ..... सभी का अपना -२ मान +सम्मान +आशाये + और अपेक्षाए है .... जिस नजर से हम दुनिया को देखते है हमको वोह वैसी ही नजर आती है ..... अगर हम सही है+ सकारात्मक है + आशावादी है तो वोह हमको अच्छी लगती है और नजर आती है , लेकिन इसके विपरीत होने पर सब कुछ सिरे से ही उल्टा पुल्टा हो जाता है ...... हम इस समाज और दुनिया को नहीं बदल सकते है ..... हमे खुद को ही अपना “बचाव” रखते हुए इसके अनुसार किसी हद तक बदलना पड़ता है .... जब नजर बदलती है तो नजरिया भी आटोमैटिक रूप से बदलता है ..... भगवान के बनाए हुए इस समाज को और दुनिया को अगर हम बुरा कहते है तो हम अप्रत्यक्ष रूप से उसकी ही बुराई करते है ..... अगर हम दुनिया के मुताबिक खुद को नहीं बदल सकते + इसमें रहने लायक खुद को नहीं बना सकते तो निश्चित रूप से फिर हमको सुसाइड कर लेना चाहिए ...... पुरुष और नारी इस सृष्टि के दो अभिन्न अंग है ..... भगवान का भी अर्धनारीश्वर वाला रूप है ..... लगभग भगवान के सभी रूपों ने शादी की है और इस संस्था को मान्यता दी है तथा इसकी उपयोगिता को इस दुनिया को बतलाया है .... नारी को शक्ति का रूप बतलाया है जिसके बिना भगवान का अस्तित्व हो ही नहीं सकता ..... शिव भी (इ ) शक्ति के बिना शव हो जाते है ..... अगर कुछ प्रतिशत गुमराह लोग आज के आधुनिक कुप्रचार+ कुप्रसार के कारण गलत आचरण करते है तो सभी को एक कटघरे में खड़ा कर देना अमानवीयता और घोर अत्याचार तो है ही साथ ही खुद को सजा देने लायक हालात और एक ऐसे चक्करविउ का निर्माण कर लेना है जिसमे से निकलना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन हो जाता है जब तक की कोई जबर्दस्त सार्थक प्रयास न किया जाए ..... मैं आपको आस्था चैनल पर मुनिश्री तरुणसागर जी के रात के साढ़े –नो बजे आने वाले प्रवचन सुनने की सलाह जरूर दूँगा ..... अगर आपको मेरे विचार कुंठित लगते है तो शायद इसका कारण मेरा अभी तक कुंवारा रह जाना रहा हो , हो सकता है की मेरी शादी के बाद किसी को भी मुझसे ऐसी कोई शिकायत न रहे ..... वैसे अपनी तरफ से मैं अपनी निजी जिंदगी और उससे जुडी तमाम परेशानियों को सिरे से ही दरकिनार करते हुए अपनी तरफ से इस मंच पर हल्का फुल्का माहौल बनाने की भरकस कोशिश किया करता हूँ , फिर वोह चाहे मेरे लेख हो चाहे या फिर मेरे द्वारा किये गए कमेन्ट या फिर आये हुए कमेंट्स पर मेरे द्वारा दिए गए जवाब ही क्यों न हो .....वैसे मुझको एक प्रतिशत भी उम्मीद नहीं है की मैं अपनी शादी के बाद इस मंच से किसी प्रकार भी जुड़ा रह पाऊंगा .....इसलिए जब तलक यह बेफिक्री वाला समय है क्यों न हंस बोल कर सभी के साथ कुछ मधुर यादे संजोते हुए कुछ अमूल्य मेमोरेबल मूमेंट्स जमा कर लिए जाए जोकि यहाँ से जाने के बाद भी अकेले फुर्सत के पलों में दिल +दिमाग और आत्मा को कुछ सकूं प्रदान कर सके ...... और वैसे भी यह मानव जीवन बहुत ही दुर्लभ है ...पता नहीं फिर दुबारा कब मिलेगा ..... इसलिए रोने और रुलाने की बजाय खुद + मुस्कराने ओर दूसरों को हंसाने का नेक काम कर लिया जाए ..... अपने आस पास कुछ पेड़ पौधे लगा कर + किसी की यथा संभव करके किसी के होठों पर अपने काम और बर्ताव से हंसी लाकर कुछ सार्टक कर जाए किसी की दुआए पा जाए ..... जब आपका लगाया हुआ पोधा बढ़ेगा तो आपके मन के भीतर भी “कुछ” जरूर बढ़ेगा...... अंत मैं मैं उम्मीद करता हूँ की आप अपने ब्लॉग पर पधारे हुए सभी ब्लागरो के विचारों को उचित सम्मान देते हुए सभी को सार्थक उत्तर देकर संतुष्ट करते हुए अपने बारे में फैली हुई सभी भ्रान्तियो को निरर्थक साबित कर देंगी ..... आपका शुभचिंतक राजकमल शर्मा *(जिस तरह एक नारी को जरूरत से ज्यादा सम्मान देना मर्दों को शक के घेरे में ले आता है उसी प्रकार पुरुष भी किसी खास सम्मान के हकदार नहीं होते ) *आज आपको एक राज की बात बताने लगा हूँ की आप मेरे लिए इतनी लक्की है की आपका एक ब्लॉग हर समय मेरी प्राथमिकता की सूची में रहता है *मैंने यह उत्तर पुरे खुले मन से दिया है – किसी भी और से वाहीवाही बटोरने की बजाय सिर्फ आपका ही ध्यान रखते हुए लिखा है ..... अगर उत्तर दिया है तो उसका कारण आदरणीय वाजपेई जी द्वारा आपको अपनी बेटी समान मानना भी एक कारण रहा है ....

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय दीपक भाई .....सस्नेह नमस्कारम ! आप जब आये है तो यकीनन आपके पीछे -२ बहारे भी आती ही होंगी ..... आपकी यह लाइनें मेरे लिए अनमोल है इनका मूल्य कभी भी लगाया नहीं जा सकता ..... आपके एक से एक बढ़कर बेहतरीन चुटकुले मैंने देखे है ..... मै उम्मीद करता हूँ की आप इस मंच पर खली हाथ नहीं आये होंगे और सभी ब्लागर साथियों के लिए अपने चुटकुलों का एक गुलदस्ता जरूर पेश करके इस मंच पर उन फूलो की महक को बिखेरेंगे ...... आपकी इन लाइनों से सच में ही मैं अभिभूत हुआ हूँ इसके लिए आपका जितना भी शुक्रिया करूं वोह कम ही होगा ..... आपकी विघ्नरहित तरक्की + उन्नति + खुशहाली के लिए दिली कामना करते हुए फिर से मैं आपका आभार प्रकट करता हूँ ...... आपसे यह गुजारिश है की अपना कमेन्ट लिख कर सबमिट करने से पहले उसको सलेक्ट करके कापी कर लिया करे ताकि अगर आपको सफलता न मिले तो उसको माइक्रोसाफ्ट आफिस फ़ाइल में सेव करके फिर से दुबारा इस्तेमाल किया जा सके ...... आपका आभारी :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) :o ;) :(

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय वाहिद भाई ....आदाब ! यह किसी हद तक ठीक है की आपसे एक आत्मीयता से भरपूर रिश्ता है लेकिन इसके बावजूद आपके मन में क्या है यह नाचीज नहीं जान सकता ..... लेकिन आपके मन की शंकाओं का समाधान जरूर कर सकता हूँ -कुछेक लेने आपको समर्पित करके :- "हमने पूछा खुदा से की 'हमे देख आने दो कि वोह कौन है जोकि हमारी कब्र पे रो रहा है अपने आंसुओ से हमारी कब्र को भिगों रहा है .... कहा 'खुदा' ने कि "हमी कह देंगे कि चुप हो जाओ यहाँ पर मेरा बच्चा सो रहा है शोर मत करो मेरे बच्चे कि नींद में खलल हो रहा है" मैं उम्मीद करता हूँ कि आपको आपके सारे प्रश्नों का उत्तर मिल गया होगा..... वैसे यह मैं भी जानता हूँ कि इस सांकेतिक उत्तर को आप भी जानते थे ... आपका हार्दिक आभारी राजकमल शर्मा

के द्वारा: Rajkamal Sharma

दिव्या बहन .....नमस्कार ! मेरी यह रचना आपके ही कारण जल्दी आई है .... मैं इस विषय का नियमित लेखक नहीं हूँ ..... कभीकभार ही कुछ ऐसा लिख पाता हूँ .... मेरा ऐसा करने का मकसद असल में यह होता है की इस कारण रचना + पाठक तथा लेखक में एक रिश्ता बन जाता है ..... पाठक रचना को न केवल पूरी पढ़ता है बल्कि अपनी रूचि भी बतलाता है ..... आपका कमेन्ट मेरे लिए सबसे खासमखास है और बहुत ही महत्त्वपूर्ण है ...... मैं जानता हूँ की इसमें बहुत सी कमिया भी है जिनका की मैं अपनी सीमित क्षमता के कारण चाह कर भी सुधार नहीं कर सकता ..... आप एक जानकार और कुशल लेखिका है अगर संदीप भाई की बजाय मैंने इसको आपके पास भेजा होता तो आप निश्चित ही अपेक्षित सुधार + सलाह दे पाती ..... आपका हार्दिक आभारी आपका भाई राजकमल शर्मा

के द्वारा: rajkamal

परम आदरणीय राजकमल जी, आपके विचारों से हार्दिक खुशी मिली. मुझे तो यकीन ही नहीं था कि आप स्त्री विरोध की सारी सीमाएं लांघ जाएंगे. आपके मन में नारियों के लिए कितना असम्मान भरा हुआ है ये आपके ब्लॉग से साफ जाहिर हो रहा है. लेकिन मैं धन्यवाद देती हूं आपको कि आप अपने मन की कटुता छुपा नहीं सके और साफ -साफ व्यक्त कर दिया. आप जैसे लोग मर्दवादी समाज के उस अहंकारी व्यक्तित्व की तरह हैं जिनको स्त्री की प्रगति किसी भी हालत में नहीं सुहाती. आप जैसे लोग ही स्त्री को पर्दे में रख उसके व्यक्तित्व को कुचल देना चाहते हैं ताकि वो कभी भी आजादी की श्वास ना ले सके. आपने तमाम आरोप मेरे ऊपर लगाए हैं लेकिन वे बेबुनियाद और बेतुके हैं. मैं उन स्त्रियों के हितों के लिए आवाज उठाती हूं जिन्हें पुरुष प्रधान समाज में यथोचित स्थान नहीं मिल पाया और जिनके अधिकारों को कुचला गया है. आप लोगों का ये मर्दवादी रवैया ही इसके लिए जिम्मेदार है. आप जैसे लोग तमाम मर्यादाओं और संस्कारों के नाम पर स्त्री जाति को गुलाम बनाए रखना चाहते हैं और जो स्त्री इसका विरोध करे उसे कुलटा, चरित्रहीन और पागल तक बना डालते हैं. फिर भी आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहुंगी कि आपने अपने दमित और कुंठित विचारों को स्पष्ट किया.

के द्वारा: Anita Paul

प्रिय जवाहर लाल जी .....  सप्रेम नमस्कार ! आपकी किसी भी बात का बुरा माना ही नहीं जा सकता ..... यह आपने ठीक कहा है की मैं भी वहां पर गया था और उससे पहले भी दो बार गया था ...... और अगर उनकी विचारधारा में आये हुए अस्थाई रूप से आये हुए आभासी परिवर्तन में बाद में बदलाव नहीं होता तो मैं आज भी वहीँ पर अपना पक्का डेरा जमाए हुए ही मिलता आपको ...... इस्व लिए मुझको वहां पर पधारे किसी भी ब्लागर से ना तो कोई दुश्मनी है और ना ही कोई इर्ष्या और जलन ...... अब भी अगर उनके विचारों में कोई सकारात्मक बदलाव आता है तो वहां पर जाकर उनका हौसलाअफजाई करना हमारा एक ब्लागर होने के कारण फर्ज तो बनता ही है ...... उम्मीद करता हूँ की आपने मेरी सफाई का बुरा नहीं माना होगा ...... धन्यवाद सहित आपका आभारी

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय महाशय, सादर अभिवादन! आपने काफी शोध के बाद व्यंग्यात्मक शैली में अनीता के साथ - साथ लोलुप पुरुषों पर प्रहार किया है. पर आपने भी चरण वंदना करने की जहमत उठाई थी ( वो अलग बात है, आपका साधा हुआ व्यंग्य ही था!) फिर भी आपसे निवेदन है कि अगर कोई पुरुष ( बेशर्म ब्लॉगर) अगर क्रिपाद्रिश्ती की इच्छा रखता था तो आपको जलन क्यों होने लगी! बाजपेयी जी ममता के माँ के पास शिकायत लेकर गए थे तो यह कोशिश आप भी तो कर सकते थे ताकि हमलोगों की नजर में आप और महान बन जाते!-- क्षमा करियेगा मैंने भी व्यंग्यात्मक लहजे में ही गुस्ताखी करने की कोशिश की है-- इस उम्मीद से अपना शिष्य समझ कर कृपा दृष्टि बनाये रखेंगे!-- जवाहर!

के द्वारा: jlsingh

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय अबोध जी ..... सस्नेह नमस्कार ! यह आप सभी की उदारता है की मेरे इस मजाक को हल्के फुल्के ढंग से ले लिया है ...... मेरे इस लेख से उनको मिलने वाले कमेन्ट कम नहीं होंगे बल्कि बढ़ेंगे ही .... सोचिये की अगर वोह पुरुष होती क्या हम सभी इस उल जलूल बकवास को बर्दाश्त करते + कोई अहमियत देते ...... ऐसा लगता है की मानो वोह कोई इस्त्री ना होकर कोई ऐसा साधू हो जो की अपने पास आने वालो पर पत्थर बरसाता है लेकिन फिर भी भक्तजन उनकी किरपा + दया दृष्टि को पाने के लिए तमाम तरह के अपमान और रूकावटो को पार करके भी उनका सामीप्य पाना चाहते है ..... और आजकल की लड़कियो की एक बानगी तो आप मेरे भेजे गए मेल में भी देख सकते है .... भगवान करे की उनको भी उनका मिस्टर राईट मिल जाए कोई आप जैसा ही .... आपका आभारी

के द्वारा: rajkamal

के द्वारा: Ramkumar bhil

प्रिय वाहिद भाई ..... आदाब ! एक बार राजकमल से के.बी.सी. में बिग बी जी ने पांच करोड़ का आखिरी सवाल पूछा की बतलाओ की जागरण जंक्शन पर अनीता मैडम के कितने ब्लॉग है जो की फीचर्ड नहीं है हुए अब तक ...... उस महामुर्ख राजकमल ने फरमाया की सिर्फ एक सर तब उसको बतलाया गया की इसका सही जवाब है शून्य यानी की एक भी नहीं ...... आपकी तेज निगाह की दाद देना चाहूँगा की जिसने इतना सब कुछ देख लिया + समझ लिया ...... फिर भी हमको उम्मीद + आशा करनी चाहिए की जनता जनार्दन के जागरूक रहते भविष्य में इस तरह की घटनाओं में कमी आएगी ...... आपके द्वारा दिए गए सहयोग तथा समर्थन के लिए आपका बहुत -२ शुक्रिया (ईद तथा भगवान श्री गणेश जी की चतुर्थी की आपको बहुत -२ शुभकामनाये –इस मंच का माहौल हल्का फुल्का तथा सुखद बना रहे )

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय चातक जी ..... सादर अभिवादन ! मैंने आपके ब्लॉग पर तथा उनके खुद के ब्लॉग पर आपकी उनके साथ बहसबाजी + उनके ब्लॉग पर तथा आपके लेखो में आपके विद्वतापूर्ण विचारों का एक -२ शब्द पुरे ध्यान से पढ़ा है ...... सच में ही यह एक अनोखी कला ही तो कही जायेगी अपनी गलत बात को भी कुछ इस तरह से प्रस्तुत करना की लोग बाग न केवल भ्रम में पड़ कर सिरे से ही गच्चा खा जाए बल्कि अपना विवेक खो कर न केवल उन विचारों को अपना समर्थन दे बल्कि लेखक के बहाव में बह कर उसकी सोची समझी योजना को किर्यान्वित करने में किसी मोहरे की तरह से खुद का इस्तेमाल होने दे ...... आपका नजरिया अपनी जगह पर किसी हद तक सही हो सकता है .... क्योंकि अगर यह पूर्ण नहीं तो आंशिक सच तो है ही ...... मैं शुरू से ही खुद का इस्तेमाल न होने देने के प्रयास में लगा रहता हूँ , लेकिन इसके बावजूद कई बार सतर्कता के बावजूद धोखा खाना पड़ ही जाता है ...... आपने आकर अपने कीमती और ताजगी से भरपूर नवीन विचारों से अवगत कराकर ज्यादातर ब्लागर्स की आँखों पर पड़े हुए पर्दे को हटाने का पावन और पुनीत कार्य किया है इसके लिए हम सभी आपके शुक्रगुजार है ..... आभार सहित (ईद तथा भगवान श्री गणेश जी की चतुर्थी की आपको बहुत -२ शुभकामनाये –इस मंच का माहौल हल्का फुल्का तथा सुखद बना रहे )

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय शाही जी .... सादर प्रणाम !अब तो मुझको आपसे सच में ही शिकायत हो गई है की इतनी अहम बात आपने मुझको पहले क्यों नहीं बताई ? ..... लेकिन फिर भी इस लेख को तो आना ही था हर हाल में ..... इसकी नीव तो उसी दिन पड़ गई थी जब उन्होंने ब्लागिंग के सारे नियम + कायदे और कानून तोड़ कर + समाजिक मर्यादा को ताक  पर रख कर अपने ब्लॉग पर मुझको नपुंसक कह कर एवार्ड दिया था ...... अब कोई इनसे पूछे की क्या  यह इनका व्यक्तिगत अनुभव है या फिर किसी और ने इनसे यह अनुभव सांझा किया था .....                      खैर मुझको न तो इनसे कोई बैर है और न ही कोई शिकायत इस लिए इनके अच्छे भविष्य के लिए मैं इनको अपनी शुभकामनाये देता हूँ .....उम्मीद करता हूँ की मेरे इस खुलासे से अब आपको मुझसे हमदर्दी हो रही होगी ..... अगर अब भी नहीं उपजी आपके दिल में मेरे लिए दया तो मैं समझ लूँगा की आपके दिल में मेरे लिए हार्ड कार्नर है .... हा हा हा हा हा हा हा हा हा आपका तहेदिल से हार्दिक आभारी (ईद तथा भगवान श्री गणेश जी की चतुर्थी की आपको बहुत -२ शुभकामनाये –इस मंच का माहौल हल्का फुल्का तथा सुखद बना रहे )

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय संतोष जी .... नमस्कार ! भाई जान वोह कहावत है न की कोयले की खदान में खुद का चाहे लाख बचाव कर लिया जाए , न चाहते हुए भी थोड़ी बहुत कालिख तो लग ही जाती है .... सबसे पहले तो आपकी हिम्मत को सलाम की आपने इस लेख पर अपनी प्रतिकिर्या देने की जुर्रत की .... मैंने सिर्फ आपके ही नहीं बल्कि सभी सज्जनों के एक -२ शब्द पढ़ा है ...... आप वहां पर अपने दिए गए ब्यान का बचाव करने की चाह में मेरे अतीत को खंगालते हुए मुझको भी अपने संग घसीट ले आये है ...... आप चाहे मुझको न भी घसीटते अगर मेरे किसी शिष्य पर कोई बात बने तो मुझको बिन बुलाये कहीं भी जाने में कोई हर्ज नहीं है ..... अपना मान टले टल जाए ......... और रहा सवाल मेरे उस समय के कमेन्ट का तो वोह सारी बात हास्य वयंग्य में कही गई थी जिसका जवाब देने में उनको कई हफ्ते लग गए थे .... उस समय न केवल मेरा बल्कि ज्यादातर ब्लागर्स का यह मानना और सोचना था की शायद उनके पिछले विचारों में कोई बड़ा परिवर्तन आ चुका है .... उनका हौंसला बढाने + मुख्यधारा में उनकी स्वीकार्यता बनाने का नेक उद्देश्य लेकर ही यकीनन हम सभी उस समय उनके ब्लॉग पर हाजिर हुए थे ..... इस लेख के प्रकाशित होने के असली कारण आप ही है ..... आपके द्वारा मेरे स्वप्न में दिए गए सहयोग + समर्थन + हौंसले के बिना यह इस मंच पर नहीं आ सकता था .... आपका हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ (ईद तथा भगवान श्री गणेश जी की चतुर्थी की आपको बहुत -२ शुभकामनाये –इस मंच का माहौल हल्का फुल्का तथा सुखद बना रहे इसी कामना के साथ )

के द्वारा: Rajkamal Sharma

******************************************************************** प्रिय अजय सिंह जी .....नमस्कार व् स्वागतम ! देखिये आपने यह बात निरोल हास्य में कही है मैं इस बात को जानता हूँ तथा आपके सैंस आफ हयूमर की तारीफ़ करता हूँ ..... मैं तो बस इतना ही कह सकता हूँ की अगर शादी के बाद भी इनमे कोई बड़ा बदलाव नहीं आया तो फिर हमको उस दुश्मन से भी हमदर्दी ही करनी पड़ेगी ..... लेकिन हम यह कामना करते है की इनकी जिंदगी तथा विचारों में आमूलचूल सकारात्मक और सार्थक परिवर्तन हो जिसके कारण की इनका भविष्य सुखद बने ...... आपका बहुत -२ आभार इस विनोदपूर्ण टिप्पणी के लिए (ईद तथा भगवान श्री गणेश जी की चतुर्थी की आपको बहुत -२ शुभकामनाये –इस मंच का माहौल हल्का फुल्का तथा सुखद बना रहे )

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय दीपक जी .....प्यार भरी नमस्कार ! मेरे भाई यह भी तो एक सच्चाई से लबालब वयंग्य ही तो है .... हाँ यह अलग बात है की इसमें कटुता ज्यादा है और हास्य बहुत ही कम , आपकी शिकायत को भी जल्द ही दूर करने का अपनी तरफ से पूरा -२ प्रयास करूँगा ..... आपसे तो बस मुझको केवल एक ही बात पूछनी है की है ज्योत्षाचार्य महाराज किरपा करके बताने की किरपा करे की मेरी नमाज खत्म होने का समय कब आएगा ? + मेरी भी दुआ कब कबूल होगी खान भाई जान ! .... मुझ हरिराम उर्फ मियां मिट्ठू के पिंजरे में भी कोई तोती डाल कर मुझको भी इस भव बन्दन के पिंजरे से आजाद कर दो ..... आपकी किरपा दृष्टि का अभिलाषी आपका एक अदना सा मुरीद आभार सहित (ईद तथा भगवान श्री गणेश जी की चतुर्थी की आपको बहुत -२ शुभकामनाये –इस मंच का माहौल हल्का फुल्का तथा सुखद बना रहे )

के द्वारा: Rajkamal Sharma

भ्राता श्री, जिन मोहतरमा को आपने यह लेख समर्पित किया है, उनके लेख मुझे चर्चित होने के नुस्खे लगते हैं। विवाद का चर्चा से हमेशा से ही चोली दामन का साथ रहा है। और इनके लेखों पर मुझे मंच के सम्पादकीय मण्डल की विशेष कृपा भी प्रतीत होती है जिससे इनके सभी लेख फीचर भी होते हैं, ज्यादा चर्चित, पठित और अधिमूल्यित भी होते हैं और विशेष अनुग्रह के तहत टॉप ब्लॉग के स्थानों में भी सुशोभित होते हैं। हालांकि इनका नवीनतम लेख इनके पारंपरिक प्रिय विषय से पूरी तरह भिन्न है मगर विवादों के मसालों का भरपूर तड़का इस लेख में भी मारा गया है। इससे अधिक कुछ कहने की स्थिति में मैं नहीं हूँ। कुछ हद तक चातक जी की बातों से भी मैं सहमत हूँ।

के द्वारा: वाहिद काशीवासी

के द्वारा: manoranjan thakur

के द्वारा: chaatak

गुरुदेव ,.जय हो ऐसे ही नहीं हम चम्मच लोग आपको गुरुदेव मानते हैं ,..हिम्मत है ....पू ....री हिम्मत है ,...,..सब कुछ तो आपने लिख ही दिया ,...वैसे आपने भी कभी समर्थन किया था ,...भले ही अपने फायदे के लिए किया हो,. लगता है छुट्टियो में पूरा शोध किया है ...वैसे मैं आप का दर्द समझ सकता हूँ ,... खैर टीम अन्ना के बारे में उन्होंने जो लिखा था,..उसको सिरे से ख़ारिज नहीं किया जा सकता ( दल्ला अग्निवेश सुबूत है ) ,...खैर जो भी हो ,...मैडम जी को कमेन्ट खूब मिल जाते हैं ,...जबकि वो अपने ब्लॉग के सिवा शायद ही कभी किसी और का ब्लॉग पढ़ती हों ,.. ... बहुत .मजा आएगा जब उनका कमेन्ट यहाँ आये ,..वैसे चांस कम लगते हैं ,........एक बात और इलाज से ज्यादा शादी का फायदा हो सकता है ,...जोड़ी मिलाने का काम आप ही कर सकते हो ,....सादर धन्यवाद् ,.....जय हो ,..जय हो ,..जय हो ...भगवान् बचाए हमें http://santo1979.jagranjunction.com/

के द्वारा: Santosh Kumar

प्रिय वाहिद भाई ....आदाब । सच में ही आपकी तरक्की से मुझको खुशी है .... आप सभी के कहने पर मैं तो यहाँ पर रुक गया था लेकिन मुझको रोकने वाले खुद ही मुझको अकेला छोड़ कर चले गए थे कोई आंशिक रूप से तो कोई पूर्ण रूप से ...... एकदम बिलकुल नए ज्यादातर ब्लागरो से किसी ना किसी तरह से तालमेल बिठा कर एन केन प्रकारेण ृ आपके द्वारा दिए गए सहयोग के कारण मैं किसी तरह खुद को टिकाए रख सका ..... लेकिन यह भी सच है की जाने वाले गए अपनी मर्जी से थे तो आये भी अपनी मर्जी से ही है ..... हर किसी के अपने हालात तथा सुविधा और असुविधा के अनुसार उसको चलना होता है ..... इसलिए मेरा किसी पर कोई जोर नहीं है ...... मैं खुद को किसी को भी बुलाने में अपनी अक्षमता ना केवल जाहिर करता हूँ बल्कि खुलेमन से इसको स्वीकार भी करता हूँ ..... आपके द्वारा दिए गए सहयोग के लुए आपका आत्मिक आभार

के द्वारा: rajkamal

प्रिय अबोध भाई ...... नमस्कार । आपके इस स्नेह के लिए ढेरों शुक्रिया ..... आपकी शिकायत वाजिब है और नहीं भी ..... दरअसल आपने जिस नम्बर पर मैसेज किये थे उस नम्बर को मेरे बॉस की बिटिया अपने होमवर्क के लिए इस्तेमाल कर रही है आजकल ..... मैं किसी वैकलिपक व्यवस्था के तहत थोडा बहुत नेट चला पा रहा हूँ ..... इसमें भी कापी पेस्ट करने पर एक बार में सिर्फ एक कमेन्ट ही दे सकते है ..... दुबारा रिस्टार्ट करने पर कोई भरौसा अनहि की कनेक्शन दुबारा से जुडेगा की नहीं ...... इसलिए मैं उम्मीद करता हूँ की आप मेरी मजबूरियों को समझ कर मुझको क्षमा कर देंगे ..... अभी भी नए कनेक्शन को लेने में कुछेक दिन लग ही जायेंगे ....... आपका हार्दिक आभारी

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय निशा जी ....सादर प्रणाम ! दरअसल समझ तो मुझको भी कोई ज्यादा नहीं है , लेकिन फिर भी कुछ प्रयास करने की कोशिश करता हूँ ..... कालेज के जमाने में आस पास के माहौल का असर था की मन में कुछ शायरी रूपी विचार आए तो उनको समय -२ लिख डाला , यह भी उसी समय के है ..... जिस प्रकार एक गीत लिखा हुआ साधारण दीखता है , लेकिन जब उसको गायक अपनी आवाज देता है तो वोह सुर +ताल + संगीत के मेल से किसी और ही रंग में रंग जाता है ..... इसी प्रकार जब कोई टूटे हुए दिल वाला + चोट खाया हुआ + कोई जवान + खुदा द्वारा प्रदत्त विचारों को कुछ इस प्रकार लिखता है की एक आम बात भी पढ़ने वाले को एक अलग मजा देती है अपनी रवानी + लयबद्धता के कारण ..... जैसे की मेरे दो शेयर देखिये :- "करिये गुनाह शौंक से डरिये मगर खुदा के खौफ से" "मालिक तेरे जहाँ ने बदनाम करके छोड़ा हम सीधे साधे लोगो का जीना हराम करके छोड़ा" कविता की तरह कई बार इनमे तुकबन्दी शामिल होती है लेकिन हर बार ही हो यह जरूरी नहीं जैसे की :- "पत्थरों की चोट क्या होती है यह हम नहीं जानते हमने तो फूलों (लड़कियो) से ज़ख्म खाए है" वैसे एक भाव ऐसा है की जिसको मेरे ख्याल से नब्बे प्रतिशत शायरों ने अपने -२ शब्दों में अपने तरीके से कहा है :- जिस तरफ भी मेरी नजर जाती है हर तरफ तेरी ही सूरत नजर आती है" (यह मेरा नहीं है ) मेरे उपर के हरेक शेयर में नजर + निगाह और देखना शब्द का इस्तेमाल हुआ है ....और जहाँ -२ पर इसका इस्तेमाल हुआ है वहां पर इसको अंडरलाइन किया है ..... आपने अपनी स्नेहमयी प्रतिकिर्या दी उसके लिए आपका दिल की गहराईयों से शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय राजकमल साहब, बहुत अच्छा+सम्माननीय पोस्ट(पद) प्राप्त करने पर बधाई स्वीकारें. विलम्ब से आपके इस पोस्ट को पढ़ने और प्रतिक्रिया देने के लिए माफी चाहूँगा. चूँकि काफी विलम्ब हो गया है और स्थितियां बदल गयी है इसीलिये थोड़ा जोड़ना चाहूँगा -- अभी आपलोग भ्रष्टाचार और महंगाई का रोना छोड़कर देश की रक्षा के बारे में सोंचिये. आपको तो मालूम ही होगा कि इंडो चाइना वार के समय भारतीय महिलाओं ने अपने गहने देश की रक्षा में कुर्बान कर दिए थे. अभी आपलोग आन्दोलन करते हैं और देश की संपत्ति को बर्बाद करते हैं, पेट्रोल का नाहक इस्तेमाल आग लगाने में करते हैं मैं इसीलिये पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत बार बार बढ़ाता रहता हूँ ताकि आपलोग इसका नाहक इस्तेमाल न करें और हमें देश विदेश की यात्रा करने के लिए पेट्रोल को सुरक्षित रहने दें आखिर सम्माननीय और पूजनीय महिला का खर्चा भी तो उसी में से अडजस्ट करना पड़ता है. खैर, इस बयान को मीडियावालों तक मत जाने दीजिएगा नहीं तो वे लोग नाहक हो हल्ला मचायेंगें और हमारे मौसेरे भाई को तो आप जानते ही हैं! बस आज इतना ही अभी हमें आतंकवादी को पकड़ना है और उसे भी कसाब की तरह सम्मान देना है. धन्यवाद!

के द्वारा: J L SINGH

प्रिय मनोज भाई ....वंदे मातरम ! आगर आपको यह साफसफाई पसंद आ गई है तो इसका सीधा सा मतलब है की वोह अब मजबूर नहीं बल्कि मजबूत है ..... और स्विसबैंक से किसी भी बहाने से धन वापिस आए उसका स्वागत ही करना चाहिए , क्या पता फिर हमारा जीवनस्तर शायद इतना ऊँचा उठ जाएगा की हमको ब्लॉग लिख कर अपनी आजीविका नही कमानी पड़ेगी .... यह इस कार्यकाल की शायद आखरी सफाई हो क्योंकि अब मेरी भी कुछेक सीमाए है ..... दिमाग के घोड़े आखिर कब तक और कितना दौड़ेंगे इस एक ही मामले पर ..... बस अब तो यही कामना है की देश को किसी भी विपदा + आपदा का सामना न करना पड़े ..... सारा समय शान्ति और भाईचारे से गुजर जाए , फिर चाहे उसके लिए कोई कड़ा कानून +सख्त कदम +सपष्ट सन्देश ही क्यों न देना पड़े घर के और बाहर के दुर्जनों को ..... काश हमारे भारत की छवि मजबूत इरादे वाले भारत की छवि बन पाती ..... वोह दिन जरूर आएगा इसी विश्वाश और कामना के साथ आभार सहित जय भारत

के द्वारा: rajkamal

प्रिय पी.ये. जी आप ने महामहिम महोदय के विषय में जो सफाई दी संक्षेप में हम सब यों समझे परमेश्वर ने यह पूछ लिया की-“सरदार जी तुम्हारे दिमाग का बाकी का हिस्सा कहाँ है” ….. तो उनको हम क्या जवाब देंगे की प्रभु हमने अपने दिमाग का बाकी हिस्सा तो इस्तेमाल करके खर्च कर लिया है” यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते ...यह वक्त भी आखिरकार गुजर ही जाएगा”..“इंतज़ार करो और बस देखते ही रहो”..गर्मागर्म बयान दागा करते है आने वाले पचास सालों में हम इस देश से भ्रष्टाचार का ना केवल नामोनिशान मिटा देंगे .बल्कि उसका जड़ से समूल नाश कर देंगे … दागना है तो गोला दागो जो उस पार तक जाये -बचाना है तो दिमाग बचाओ जो भ्रष्टाचार सोच सोच ख़त्म हो रहा है -पूजा करनी है तो गुणवान पूजनीय ममतामयी जो जनता से मोह माया रखे ऐसी नारी रखो साथ में सब के सामने पीछे नहीं -देखते इंतजार से क्या मतलब ..अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत ..हमें तो ५० वर्ष जीना ही नहीं औसत उम्र ५५ है तो आप के रहने और न रहने से महामहिम देश को क्या हम ५० साल इंतजार हरगिज नहीं जन समर्थन कराने जा रहे - जय श्री राधे जय हिंद -सुन्दर हास्य व्यंग्य बधाई हो भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5

आदरणीय राजकमल जी, देख कबिरा रोया - ओपीपारीक43 के ब्‍लॉग विनाश काले विपरीत बुद्धि पर आपके कमेन्‍ट ने मुझे कमेन्‍ट डालनें के लिए विवश किया था। इसलिए मैंनें वहां आपके कमेन्‍ट पर कुछ तल्‍ख कमेन्‍ट दे दिया है शायद। क्‍योंकि जो व्‍यक्ति इस तरह के लेख लिखता है उसे तो उस साधारण से कमेन्‍ट से विचलित ही नहीं होना चाहिए था। मैं जागरण पर आपके, आदरणीय मिश्रा जी और चातक जी के लेख ही पढ़ता रहा हूँ। यदि किसी अन्‍य ब्‍लॉग लेखक के लेख पढ़ें है तो केवल इस कारण की वहॉं आपकी या आदरणीय मिश्रा जी और चातक जी के कमेन्‍ट कुछ ऐसे थे कि उन्‍हें पढ़ना पड़ा। मैंनें कभी कमेन्‍ट भी नहीं लिखें हैं। क्‍योंकि मैं कम्‍प्‍यूटर पर हिन्‍दी में लिख नहीं पाता। आज इस कैफे में उपस्थित एक साथी का सहयोग मिला तो सोचा आपसे पूछ ही लूँ कि सभी ब्‍लॉगों पर सही-सही व रोचक कमेन्‍ट करने वालें व स्‍वयं स्‍त्री-पूरूष संबंधों पर बेबाक लिखने वाले आदरणीय राजकमल जी क्‍यों कर आखिर देख कबिरा रोया - ओपीपारीक43 के ब्‍लॉग पर बेसिरपैर की टिप्‍पणी लिख रहे हैं। आज आदरणीय चातक जी ने भी आपके इस लेख को ए प्रमाणपत्र दिया है। लेकिन यहां तो आपका कमेन्‍ट बहूत ही संयत है। फिर एक बुजूर्ग लेखक के ब्‍लॉग पर ऐसा क्‍यों। जहां तक मेरा यह लिखने की बात है कि आप पी-पिलाकर लिख रहे होंगें। तो मेरे बड़ें भाई आपके अनेक लेख व कमेन्‍ट सभी को यह कहनें के लिए विवश करते हैं लेकिन जब उसमें छुपे संदेश को देखते हैं तो कोई कुछ कहता नहीं हैं। इसीलिए मैंनें आज तक कोई कमेन्‍ट नहीं दिया था। लेकिन वहां क्‍योंकि आपका कमेन्‍ट मुझे नहीं जमा इसलिए मुफ्त में एक कमेन्‍ट उस बुजूर्गवार के खाते में मुझे भी देना पड़ गया। खैर मैं आपसे आशा करता हूँ कि आप जो स्‍वयं इस मंच पर गंदगी के विरूद्ध आवाज उठाते रहें हैं किसी भी बात को गलत अर्थ में नहीं लेंगें। और सदैव ही पहले से बेहतर लिखनें का प्रयास करते रहेगें।

के द्वारा: Pradeep Kumar

आदरणीय चातक जी ..... सादर अभिवादन ! सबसे पहले तो आपका हार्दिक शुक्रिया की आपने अपनी प्रतिकिर्या दी .... अब मैं खुद से शिकायत करूं ? और खुद में सुधार आखिर लाऊं तो क्या लाऊं ..... वैसे जैसा की आपने अपनी पारखी से बताया की लेख में सुधार होना चाहिए लेकिन इसे मेरी सिमित क्षमता ही कहियेगा की मैं इसमें कुछ बदलाव लाकर इसको और बढ़िया बनाने में खुद को असमर्थ समझता हूँ , लेकिन आपकी बात तो अपनी जगह अपनी सच्चाई के साथ विद्धमान है ही .... आज आपने फिर से एक बार अपनी इमेज के अनुरूप कार्य किया है ..... ऐसा ही आपने मेरे लेख "वोह बूढी अम्मा" पर टिप्पणियों के मेरे जवाबों को पढ़ने के बाद ही कुछ कहने की कोशिश की थी .... आपकी वोह सूरज का सातवा घोड़ा वाली बात मुझको ताउम्र याद रहेगी हालांकि अभी तक मुझको उसको पढ़ने का सोभाग्य प्राप्त नहीं हुआ है , लेकिन पढ़ने की इच्छा जरूर है .....और जहाँ तक इस फिल्म की सफलता की बात है तो मैं इतना ही अर्ज करना चाहता हूँ की चूँकि यह लेख फीचर्ड नहीं हो पाया इसलिए इसकी सफलता का ग्राफ भी यकीनन नीचे ही रहेगा .... आपका बहुत -२ आभार :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

तमन्ना जी ....सादर अभिवादन ! आप जैसी बात ही जागरण के सम्पादकीय विभाग में कार्यरत मेरी बहन समान आदरणीय कोमल जी कहा करती है ..... इस विषय पर एक फिल्म भी आई थी -उसका नाम तो मुझको याद नहीं है -उसमे रेखा तथा विनोद मेहरा ने बहुत ही उम्दा काम किया था -उस फिल्म में एक बलात्कार से पीड़ित औरत की शादीशुदा जिंदगी की परेशानिओ को विस्तार से बताया गया था ...... मर्द खुद को कितना ही खुले दिल का क्यों न कह ले +कितना ही सुधारवादी क्यों न माने खुद को -लेकिन उसकी आत्मा अंदर से उसके मन का साथ कभी भी नहीं दे पाती है -इसलिए किसी मामले में कम तो किसी मामले में शादी के बाद बहुत ज्यादा दुश्वारियो का सामना नारी को करना पड़ता है ..... आपका तहेदिल से शुक्रिया :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय भ्रमर जी ....सादर प्रणाम ! माफ़ी चाहता हूँ की आपको मेरे इस लेख को पढ़ने के लिया शीर्षासन करना पड़ गया ..... लेकिन संतोष इस बात का भी है की आखिरकार आप इसको समझ ही गए -देर से ही सही .... आपने समर्थन न देने की बात की है , आपकी इस बात से सच में ही मुझको आत्मिक खुशी हुई है ... ******************************************************************************************************************** और जहाँ तक टिप्स की बात है तो मैं इस बात को स्पष्ट करना चाहता हूँ की मेरा आशय सिर्फ चूहा पकड़ने वाले बाजु से था क्योंकि मेरे तो सिर्फ उसी बाजू में ही दर्द होता है ....चूँकि मैंने यह अपने खुद के आजमाए हुए प्रयोग लिखे है-नाकि कहीं से उठाये है - इसलिए ऐसी बात कही थी ..... जय श्री राधेकृष्ण :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय राज भाई जय श्री राधे -बहुत सी चीजे जो आप ने लिखी सार्थक सटीक सत्य पर उल्टा कर कर समझना पड़ा मेहनत लगी -सुन्दर व्यंग्य - ऐसा होता भी है बहुत जगह - जब कोई तीसरा उन दोनों के “दर्शन और दीदार” उस खास हालत में कर लेता है तो लड़की अपनी इज्जत को बचाने के लिए लड़के पर जबरदस्ती का आरोप लगा देती है- हमारी पुलिस ..स्कार्टलैंड यार्ड की पुलिस की तरह समय से पहले पहुँच...जब कभी माल बराबर नहीं मिला तो आप के कथन .. मैंने सोचा है की मैं भी किसी योग्य और काबिल नारी का ....राम राम हम तो कतई इस की इजाजत और समर्थन नहीं ...कुछ और लिखे होते तो ठीक था .. आप के टिप्स शानदार रहे बाजू में दर्द की समस्या आती है बीच बीच में aaram dena uski disha badalna उल्टा करना -लिखने के समय hardam बाजू tika नहीं rakh paate ek rakho तो दूसरा तो उठ जाता है न -वैसे सुझाव सत्य है भ्रमर ५

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

महा पुरुष आपका उटपटान्ग लेख की दो लाईन भी मै नही पढ सका था । मेरी ये प्रतिक्रिया उपर दी गई प्रतिक्रीया का जवाब मात्र है । आपने अपने उपर ओढ लिया जैसे आप को खूद को खजाना लूटना है । ( भोली भली जनता को मुरख बना कर लुटते हुए अकूत संपदा जो इन तथाकथित बाबाओ तथा संस्थाओं और ट्रस्टो ने इकट्ठी कर ली है )-------- मेहन्गाई बढाने के समय केसी को भोली भली जनता नजर नही आती । बडी सफाई से यही भोली भाली जनता को मुरख बनाया जाता है । आपके हिसाब से तो धर्म स्थल पर जाना ही नही चाहिए । क्योकी वहा लूटा जाता है । सयाने लोग वहा नही जाते अगर जाते है तो दान नही करते, जो दान करते है वो भोलेभाले है और अपने आप को मुरख बनाते है । अगर ये मुरख है तब तो टेक्स भरनेवाले भी सब मुरख है । ए जानते हुए की उनका पैसा भ्रष्टाचारी लोग हजम कर जाते है फीर भी ये मुरख टेक्स भेरे जा रहा है । धर्म भी एक व्यवसाय हो सकता है वो आप हजम नही कर पा रहे हो । दान श्रद्धा की बात है । कम श्रद्धावाले चवन्नी डालते है ज्यादा श्रद्धावान लाख रुपया डालती है । कोई मर्यादा लगा सकते है कितना दान देना है । फीर संस्थाओं और ट्रस्टो के पास कितना धन होना चाहिए उसकी फिकर क्यो । - ( इस सबका पर्दाफाश हर हाल में होना ही चाहिए ) ----- क्यो, आप इन्कमटेक्स से जुडे हो । इन्कमटेक्स या उस के खबरी ही ये काम करते है । आम आदमी को क्या लेना देना । अगर आप ईन्कमटेक्स मे हो तो अपना काम करोना कौन रोकता है । जो कोइ मामला हो तो आप , सरकार और संस्थाओं और ट्रस्टो के बीच का मामला हे । दुसरो को क्या मतलब । अगर आप इन्कमटेक्स के खबरी हो तो अपना कमिशन लो और घर जाओ । यदी भक्त हो और बडा दान दे दिया है, अब पस्तावा हो रहा है, वापस चाहिए लेकिन मिलता नही तो पोलिस केस बनता है । कर दो केस । ---- ( सिर्फ काले धन की वापसी से ही काम नहीं चलेगा …..) मतलब ये की आपको धार्मिक धन भी चाहिये । सडके बनाने का ठेका धर्मो ने लिया है ? उस के लिये टेक्स भरा जाता है । टेक्सवाला धन तो डकार गये मन्दिर का धन भी चाहिए । और वो भी सिर्फ हिन्दु का । ताजमहेल के निचे कितना कितना धन छुपा हो सकता है वो जानने की कोशीश भी कोइ कर सकता है ? वक्फ बोर्ड को कोइ कह सकता है आपके पास रही हजारो एकर जमिन बेच कर से हमे सडके बनानी है ? --( आपको अपनी भाषा सयंमित तथा मर्यादित रखनी चाहिए …..) चोर को चोर ही कहा जाता है ना ? आप तो चोर नही फीर ----

के द्वारा: bharodiya

rallityu covered प्रिय अनूप जी ....नमस्कार ! मैं कोई इतना जानकार तो नहीं लेकिन जितनी भी मुझको थोड़ी बहुत समझ है उसके अनुसार बताता हूँ ....... *आप अपने डैशबोर्ड के निचे कमेंट्स पर क्लिक करेंगे तो आपको कमेन्ट दिखलाई देंगे ..... हरेक कमेन्ट के नीचे एडिट का भी आप्शन है , जहाँ पर कलिल करके आप उसको बदल सकते है ... आप इसको अपनी फेवरिट की सूचि में रख ले , इसकी के साथ #EDIT commentS #edit post #add new post #dashboard को भी अपनी फेवरिट की लिस्ट में सम्भाल कर रख ले ..... *आप अपनी नई रचना को आफलाइन माइक्रोसाफ्ट आफिस में लिख कर सेव कर लिया करे ....फिर उसको कापी पेस्ट करके aad new post में पेस्ट कर दिया करे .... *फोटो अपलोड करने में तो हर किसी को अनेक दिक्कते आती है , बस आप भी हमारी तरह लगे रहिये धैर्यपूर्वक - देर सबेर कामयाबी आपके भी कदम जरूर चूमेगी ..... yddresi police *आप अपनी फेवरिट की लिस्ट में से जब भी EDIT - COMMENTS को खोलेंगे तो आपको आपकी रचनायो पर आये हुए सभी नवीनतम कमेन्ट सिलसिलेवार दिखलाई पड़ेगे ...... कम्प्युटर पर हिंदी में लिखना अपने इस लेख का लिंक मैं आपके किसी ब्लॉग पर जल्द ही भेज दूँगा ..... आपका आभारी

के द्वारा: Rajkamal Sharma

rallityu covered प्रिय अनूप जी ....नमस्कार ! मैं कोई इतना जानकार तो नहीं लेकिन जितनी भी मुझको थोड़ी बहुत समझ है उसके अनुसार बताता हूँ ....... *आप अपने डैशबोर्ड के निचे कमेंट्स पर क्लिक करेंगे तो आपको कमेन्ट दिखलाई देंगे ..... हरेक कमेन्ट के नीचे एडिट का भी आप्शन है , जहाँ पर कलिल करके आप उसको बदल सकते है ... आप इसको अपनी फेवरिट की सूचि में रख ले , इसकी के साथ #comment #edit post #add new post #dashboard को भी अपनी फेवरिट की लिस्ट में सम्भाल कर रख ले ..... *आप अपनी नई रचना को आफलाइन माइक्रोसाफ्ट आफिस में लिख कर सेव कर लिया करे ....फिर उसको कापी पेस्ट करके aad new post में पेस्ट कर दिया करे .... *फोटो अपलोड करने में तो हर किसी को अनेक दिक्कते आती है , बस आप भी हमारी तरह लगे रहिये धैर्यपूर्वक - देर सबेर कामयाबी आपके भी कदम जरूर चूमेगी ..... *आप अपनी फेवरिट की लिस्ट में से जब भी EDIT - COMMENTS को खोलेंगे तो आपको आपकी रचनायो पर आये हुए सभी नवीनतम कमेन्ट सिलसिलेवार दिखलाई पड़ेगे ...... कम्प्युटर पर हिंदी में लिखना अपने इस लेख का लिंक मैं आपके किसी ब्लॉग पर जल्द ही भेज दूँगा ..... आपका आभारी

के द्वारा: Rajkamal Sharma

राजकमल जी नमस्कार ! कमेन्ट कोड का पोस्टमार्टम करके अपने इसका हल निकल दिया हैं. बधाई. किन्तु एक और समस्या है प्रभु, कृपया इसे भी हल करवा दीजिये, कि एक ब्लोगर एक दिन में एक ही ब्लॉग लिख पाए. अक्सर हम देखते हैं कि जागरण जंक्शन पर कुछ ब्लोगर्स एक दिन में कई-कई ब्लॉग अपलोड कर देते हैं. इस कारण कई अपेक्षाकृत उपयोगी ब्लॉग जल्दी ही दूसरे पेज पर चले जाते हैं. और ये तो सर्व विदित है की पहले पेज पर पाठकों की दृष्टि सर्वाधिक पड़ती है. इसी प्रकार दो ही दिन में ब्लॉग कई पेज पीछे चला जाता है. मैं इस बारे में ऐसे ब्लोगर्स के ब्लॉग पर व्यक्तिगत रूप से प्रतिक्रिया व्यक्त करके इस प्रकार का निवेदन कर चुका हूँ, किन्तु कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. कृपया कुछ इस प्रकार किया जाये, की एक ब्लोगर का केवल एक पोस्ट ही एक दिन में पब्लिश हो, जिससे सभी को मौका मिलेगा. आपका आदित्य www.aditya.jagranjunction.com

के द्वारा: aditya

के द्वारा: anoop pandey

आदरणीय भर्मर जी ....जय श्री राधे कृष्ण ! हरेक मालिक को अपने -२ कुत्ते की आदते तथा औकात पता होती है की यह कब काटेगा तथा कब भोंकेगा और कितना भोंकेगा +काटेगा ..... अब जागरण वाले भी मेरी रग -२ से वाकिफ हो चुके है , इसलिए आपसी समझबूझ से हम आगे बढ़ रहे है ...... ऐसा सिर्फ मेरे साथ नहीं बल्कि ज्यादातर के साथ यही हो रहा है समान रूप से ..... लेकिन जिस दिन कोई असमानता दिखी तो फिर आपको पता ही है ..... अगर मेरे जीवन में आप सभी की दुआओं से जीवन के किसी भी क्षेत्र में कोई अच्छा समय आता है तो मैं नहीं समझता हूँ की मुझमे कोई ज्यादा बड़ा बदलाव आ पाएगा ...... आपने लावारिस फिल्म देखी ही होगी जिसमे की नायक अपने पुराने कपड़े अपनी औकात के रूप में संभाल कर रखता है ..... बस कुछ इसी तरह की ही सोच मेरी भी है ..... आपका हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

प्रिय भर्मर जी ....जय श्री राधे कृष्ण ! सबसे पहले तो मैं आपसे माफ़ी माँगना चाहता हूँ की आपके लिए अपने इस लेख में कुछेक अपशब्द इस्तेमाल किये , उन पर मुझे दिल से खेद है ..... मैं अपने रोल में इतना डूब गया था की आपको सिर्फ नाम से ही सम्बोधित किया था .... लेकिन आपसे इजाजत लेते वक्त जब आपने बाबा भर्मर देव का सुझाव रखा तो सारे लेख में आपका नाम एडिट करना पड़ा ..... यह आप का ही चमत्कारी नाम है की फिल्म बेहद सफल रही और उसमे आपका प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष योगदान भुलाया नहीं जा सकता उसके लिए मैं आपका तहेदिल से आभारी हूँ .... रही बात हार्ड कैश का राज़दार बनाने की तो अगर मैं उसको रखने का + छुपाने का कोई कारण जानता या ढूंड लेता तो फिर अपनी अज्ञानता को आपके सिर कहे को मढ़ता ...... आपकी सेवाओ से खुश होते हुए अं आपका लिया हुआ प्लाट आपको वापिस करता हूँ तथा उसके बिना भी स्वर्ग में आपके लिए स्थान आरक्षित करता + करवाता हूँ .... जय श्री राधे कृष्ण !

के द्वारा: rajkamal

वत्स अश्वनी जी ....नमस्कार ! आपके मन में इन तथाकथित साधुओ + ट्रस्टो के पर्टो रोष उपजता होगा .... लेकिन मेरे मन को तो खुशी मिलती है .... मेरी जात बिरादरी के लोग दिन दोगुणा + रात चोगुना तरक्की कर रहे है यह देख कर मेरी छाती कई गुणा चौड़ी हो जाती है ..... क्योंकि अगर इनका नम्बर लगेगा तो फिर मेरा भी नम्बर लगना तय ही है .... लेकिन मैं अपने व्यक्तिगत स्वार्थो से उपर उठ कर अपनी जात बिरादरी के बंधू बान्धवो से बैर लेते हुए यह मांग करता हूँ की सभी धार्मिक धर्मगुरूओ +संस्थाओं की सम्पति की जांच होनी चाहिए .... और जितनी भी सम्पति जब्त हो उसमे भारत देश का नागरिक होने के नाते मेरा बनता हिस्सा मुझको अविलम्ब प्रदान किया जाए .... जय भारत आयुष्मान भव :

के द्वारा: rajkamal

भाई आश्विन जी बहुत ही गंभीर मुद्दे हैं और हम सब आशा करेंगे की इन सब का निराकरण कहीं न कहीं से हो वैसे दान देना कोई अपराध नहीं है लोग बाबा मंदिर स्वामी बड़े बड़े ट्रांसपोर्टर और अन्य धंधा चलने वालों को ऐसे ही दान देते रहते हैं और कंही न कहीं गुप्त रूप में उनका नाम दर्ज रहता है उसका लाभ कभी न कभी तो मिलेगा ही उन्हें चाहे अगले जनम में ही सही -अब अगर धर्म और मंदिर से ये जोड़ दिए गए तो केरल के मुख्य मंत्री से बहुत लोग उस पर हाथ भी नहीं धरने देंगे - कहाँ कहाँ हमारे उच्च लोग जांच में जाएँ क्या वे अपना सब काम छोड़ दें ये सब आंकड़े अपने मुख्य पोस्ट पर ले जाएँ -कुछ लोग नजर तो रखें इन पर - अच्छा हुआ आप इस प्रश्न को स्वामी जी की सभा में उठाये -स्वामी जी तंत्र मन्त्र मन मस्तिष्क से अपने भक्तों तक इसे पहुंचा ही देंगे और फिर कभी न कभी - धन्यवाद आप का और अब स्वामी जी की प्रतिक्रिया का ....

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

भाई स्वामी राजकमल जी राम राम ,,बाबा रामदेव के ट्रस्ट की संपत्ति है करीब ११०० करोड़ रुपये, जिसकी सरकार को बार बार जांच करनी है,, श्री रविशंकर जी महाराज के आर्ट ऑफ लिविंग की संपत्ति है करीब २५०० करोड़ रुपये| बाबा रामदेव का समर्थन करने के कारण इनका भी नंबर लगने वाला है,,माता अमृतान्दमयी की संपत्ति है करीब ६००० करोड़ रुपये,, इनकी भी बारी लग रही है,,पुट्टपर्थी के सत्य साईं बाबा की संपत्ति को लेकर अभी कुछ दिन पहले बवाल मच चूका है,,,, परन्तु ब्रदर दिनाकरण जो कि एक (Self Styled Christian एवंगेलिस्ट) हैं की संपत्ति ५००० करोड़ से ज्यादा है,,बिशप के.पी.योहन्नान जिन्होंने २० वर्षों में एक ( Christian सेक्टर) बना दिया, की संपत्ति १७००० करोड़ है,,Brother Thanku (Kottayam, Kerela) एक और Christian Evangelist, की संपत्ति ६००० हज़ार करोड़ से अधिक है,,ऐसे ही बहुत से नाम हैं ,,,,,,, इनकी सम्पत्तियों की जांच कब होगी और इन्हें यह फंड कहां से आया और क्या इन्होने भारतीय वैदेशिक मुद्रा कानून का पालन किया या नही ? .................जय भारत

के द्वारा: ashvinikumar

जय हो स्वामी जी की -बाबा ने वही किया जितना उसका दिमाग चला-इंतजाम तो सब कराया -फूल पत्ती का -लेकिन अब मीडिया इतना सशक्त हो चूका है राम ही बचाए गुप्त खजाने भी नहीं बच रहे -सरकार बौरा गयी है तो जागरण जंक्सन क्या सोचे क्या करे -गुरु तो आखिर गुरु ही होता है -अब अपने हार्ड कैश तक को चेले से छुपाओगे तो होगा क्या ? एक तरफ तो हर चीज में राजदार -हैकर भी हैं -मीडिया भी है सब गुप्त रहस्य उजागर करना था क्या स्वामी जी ? जो कुछ भी हुआ स्वर्ग में मेरी जमीन तो तय करा दीजियेगा बाजपेयी जी के बयान पर बोलना ही पड़ा था नहीं तो हम तो मूक दर्शक अंत तक रहना चाहते थे लेकिन स्वामी का प्यार चेले के नहीं आने पर छलक गया -गुरु और चेला होते ही ऐसे ही हैं -है न ?आखिर मालिश सब का इंतजाम .... जय श्री राधे ......

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

वत्स चातक .....नमस्कार ! हमारे इलावा कोई और कलाकार सन्यासी भी है यह जान कर अचरज हुआ .... लेकिन हम तो विशुद धार्मिक बाबा है ..... राजनीति और चमत्कार ना बाबा ना इनसे तो हमारा दूर -२ का भी नाता नहीं है.... हमे भक्तजनों से ही इतना स्नेह और सम्पदा प्राप्त हो जाती है की हमको सरकार द्वारा किसी इनाम की कोई ना तो इच्छा है और ना ही कामना ..... वैसे हमारे पास आने का दिखावा करने की जरूरत नहीं है उनको या किसी को भी .... अगर साधक के मन में सच्ची श्रधा होगी तो हम यहाँ पर बैठे -२ ही उनके काम सवांर देंगे ...... वैसे एक काम हम अपने एक लेख "प्रधानमंत्री की सफाई" द्वारा उनका पहले ही सवांर चुके है ..... अगर आगे भी उनको हमारी जरूरत होगी तो हम जरूर उनका कल्याण करेंगे ..... यशश्वी भव:

के द्वारा: Rajkamal Sharma

honest yearess प्रिय भक्त वाहिद जी ...... आदाब ! आपको शायद पता नहो होगा की हमारे फेसबुक वाले खाते पर किसी और का भी कब्ज़ा था ..... जब हमने अपना इमेल आई डी बदलना चाहा तो वहां पर दूसरी आप्शन के रूप में किसी और का मेल आई डी पहले से ही मोजूद था ...... जब हमने अपना मेल आई डी बदलना चाहा तो हमारा खाता सस्पैंड हो गया ..... जब हमने अपने मेल खाते पर नया पासवर्ड मंगवाया तो उसने काम नहीं किया क्योंकि वोह पासवर्ड उस हैकर के द्वारा दिए गए फोन नम्बर पर भी जा रहा था .... अब वोह खाता सिर्फ उस फोन पर भेजे गए पासवर्ड द्वारा ही खुलेगा , जोकि मेरा फोन नहीं है ..... इसलिए बाबा रामकमल देव को मज़बूरी में नया खाता बनाना पड़ गया .... अगर आप इस मामले में बाबा जी की कोई सहायता कर सके तो बाबा जी आपके अनुग्रहित होंगे ..... चिरायु भव: सुखी भव:

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय रशीद जी .... आदाब ! केवल आप ही नहीं हर कोई यहाँ पर अपने विचार रखने के लिए सवतंत्र है यह जरूरी भी नहीं की पाठक हमेशा ही लेखक की हर बात से सहमत हो ..... इसलिए जहाँ नापसंदगी हो या फिर सहमती न हो बता देना चाहिए ताकि लेखाप खुद में सुधार कर सके , मैं यह मानता हूँ की यह सब लेखक के भले तथा उन्नति के लिए अतिआवश्यक होता है ..... वैसे आपसे मुझको भी एक शिकायत है ..... आपको कितने प्रतिशत लेख ठीक लगा -आप रेटिंग देकर बता सकते थे -और आपने कमिय तथा हो सकने वाले सुधार भी नहीं बतलाये ..... वैसे उह लेख मैंने नव दम्पतियो पर ही खासकर लिखा था , इसलिए मुझको और कोई गुंजाइश नजर नहीं आई ..... अपने कीमती विचार तथा सुझाव रखने के लिए आपका हार्दिक आभार आप

के द्वारा: rajkamal

क्या हमारे माँ बाप ने हमारे इस दुनिया में आने से पहले हमारे बारे में कुछ सोचा + विचार किया + कुछ प्लान किया ? नहीं ना ! …. हम एक्सीडैंटली किसी हादसे की तरह से इस दुनिया में और उनकी जिंदगी में अनचाहे रूप में आ जाते है ... आज बहुत से बेटे ये प्रश्न बीमा कम्पनी से खड़े हो जाते हैं -. मेरी कोख में महान नहीं तो कम से कम एक औसत दर्जे की उन्नत आत्मा का प्रवेश करवाना , जिस पर आने वाले कल को देश और समाज को हो चाहे ना हो .. काश आप की ये मंशा पूरी हो हम तो प्रभु से प्रार्थना करेंगे की हर बीबी ऐसी बने -अपने लाल व् लाली को सच लाल बनाये - क्योंकि मेरी कथनी और करनी कभी भी एक नहीं रहती , इसलिए मैं खुद भी दिल से नहीं चाहता की इस देश में अच्छे और गुणी नागरिक पैदा हो- भगवन सब को सद्बुद्धि दे आप के साथ जो बोले सो करें -देश को अच्छे नागरिक दें फिर बाबा और अन्ना की कमी या उनकी जरुरत न पड़े - सुन्दर व्यंग्य -बधाई हो शुक्ल भ्रमर ५

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

insinder McNeil आदरणीय सुधा जी .....सादर अभिवादन ! इसे खुशकिस्मती कहिये या फिर कुछ और की किस्मत ने मुझको इक शायर से हास्य वयंग्य का लेखक बना दिया है ..... जो कुछ भी मैं लिखता हूँ उसको कोई भी इतनी सीरिअसली नहीं लेता और लेना भी नहीं चाहिए क्योंकि वोह मेरे शब्द होते हुए भी असल में मेरे असली विचार नहीं होते उसका कारण यह है की मेरा असल मकसद हास्यजनक हालात का सृजन करना होता है ..... आपकी इस टिप्पणी से मुझको मेरी जिंदगी के सबसे पहला मजाक याद आ गया है :- हमारे मकान बनाने के समय पर जब लक्कड़ का मिस्त्री बहुत ही तंग करने लगा तो मेरे द्वारा उसके घर में गुस्से में उताहना दिए जाने पर उसकी माताजी सफाई देने + लीपापोती करने जब आई हुई थी तो बातों ही बातों में मैंने कह दिया की "रब्ब करे की आपके लड़के को कभी भी टाइम ही ना मिले" पहले तो वोह मेरी तरफ अचरज से देखती रही लेकिन कुछेक पलों के बाद उनको खुद ही मेरी बात समझ में आ गई तथा वोह खुद ही यह कहते हुए तथा मुझको आशीषे देती हुई चली गई की "बेटा ! तुम ठीक कहते हो , उसको कभी ना ही टाइम मिले तो ही ठीक है ..... आपकी आज की इस टिप्पणी में भी कुछ छुपे हुए आशीषो को मैं देख तो पा रहा हूँ लेकिन अभी समझ नहीं पा रहा हूँ ..... आपका बहुत -२ आभार

के द्वारा: newrajkamal

आदरणीय बाजपेयी जी, ब्लॉग में लॉग इन करने के पूर्व आप निम्नलिखित क्रियाओं को अपनाएं: 1. टूल ऑप्शन में जाकर क्लीयर रिसेंट हिस्ट्री सलेक्ट करके सारे पूर्व सर्च किए साइट्स और पृष्ठ डिलीट कर दें. 2. कुकीज डिलीट करें. 3. अब कंप्य़ूटर रिस्टार्ट करके जागरण जंक्शन में लॉग इन करें. ध्यान दें कि लॉग इन करते वक्त अपना यूजर नेम और भेजा गया पासवर्ड टाइप करके डालें. आशा है कि उपरोक्त को करने के पश्चात आपकी समस्या हल हो जाएगी. आप किसी परेशानी की स्थिति में पुनः संपर्क कर सकते हैं. धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार आदरणीय वाजपाई जी ....सादर परनाम ! जागरण ने फीडबैक पर आपको जो उत्तर दिया है उसको मैंने यहाँ पर भी पेस्ट कर दिया है .... उन्होंने आपको नया पासवर्ड भेज दिया है ..... आप अपने मेल खाते में जागरण द्वारा दिए गए लिंक पर जाकर उसको एक्टिविट कर सकते है .... एक्टिवेट करने के बाद आपके पास नया पासवर्ड आ जाएगा .... मैं उम्मीद करता हूँ की जागरण द्वारा बताए गए उपाय करने पर आपकी समस्या दूर हो जायेगी .... आपका बेटापुराना राजकमल ************************************************************************ आदरणीय वाजपाई जी ...सादर परनाम ! मेरी अगली पोस्ट को पढ़ने के बाद तो शायद आप यही कहना चाहेंगे की बेटा तू गधा ही ठीक था आदमी कहे को बन गया ? आभार

के द्वारा: newrajkamal

“या रब्ब ! मुझको तू अगले जन्म में गधा ही बनाना लेकिन जन्म नेपाल में ही देना आदमी की जून में होते हुए भी हमको गधों से भी ज्यादा काम करना पड़ता है ……. जो गलियों में डोले वो कच्चा गधा है , जो कोठे पे बोले वो सच्चा गधा है जो खेतों में दीखे वो फसली गधा है , जो माइक पे चीखे वो असली गधा है वाह रे गधे मुबारक हो तुम्हे लोग चुन चुन तुम्हे कोठे पे भेजते रहें और तू ऐश कर ईर्ष्या होना तो लाजिमी है -हम सब को -करे मरे कोई माल खाए छुट्टी मनाये गधा -न जाने इस गधे को बुद्धि कब आएगी की...कुटिया में आये खेतों में जाये -धोबी घाट पर सारी मेल छुडाये - सवारी अच्छी थी नए राज कमल को यहाँ ला खड़ा किया -शुभ कामनाये -ये नशा न उतरे ये दौर चलता रहे राज जी जय श्री राधे - कशिवाशी और राजिंदर जी को भी बधाई -हरियाली लाये

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

priy wahid bhaai ....आदाब ! मैंने कोई वायदाखिलाफी नहीं की है ..... मेरी वापसी इक्कीस तारीख को उस लेख के द्वारा होनी थी ....लेकिन जब मै ही पहले आ गया तो मेरे उस लेख को भी तो समय से पहले आना ही था ..... मैंने पहले ही कह दिया था की अगर फिल्म की हीरोइन ने सहयोग दिया तो समय से पहले भी फिल्म आ सकती है ...... बाकी अगर वक्त आया तो शायद असल कारण भी बता पाऊं कभी .... वैसे इसमें ज्यादा तो नहीं लेकिन थोडा बहुत बदलाव किया है ..... पहले सोचा की अपने जो और लेख तैयार है बीमे का फंडा और बिरला के गुरु उनको रिलीज कर के जागरण वालो और ब्लागरो पर अपनी साख जमा लूँ लेकिन फिर सोचा की पहले रिस्की काम ही करता हूँ सकारात्मक लेख बाद में पोस्ट करूँगा ...... aapka धन्यवाद आभार सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma

राजकमल जी वैसे तो मेरी कोई औकात नहीं की मै आपके इस महान मेजवानी के बारे में कोई टिप्पणी करूँ लेकिन शायद इसमें अगर थोडा सा तड़का आर एस एस से संबंधों का लग जाता तो आनंद ही कुछ और आ जाता और मुझे लगता है की आप से जयादा अच्छा कोई और शायद लिख भी न सके क्योंकि मेरे हिसाब से स्वामी जी का सम्बन्ध आर एस एस से जोड़ना मुझे काफी हद तक आर एस एस को भी एक आदर्श संस्था जैसा ही साबित करता है जिसे अपनी सत्ता के लिए खतरा समझ कर शायद कुछ इसी सोच के आधार पर ही उस समय बदनाम किया गया होगा व् साथ ही यह भी कहूँगा की वैसे तो कांग्रेस ने अपनी खाओ पीओ निति के तहत ही स्वामी जी से बातचीत करने और डराने की कोशिश तो बहुत की होगी जैसे की कोई अफसर किसी को दरकार रिश्वत मांगता है लेकिन न मानने पर खुन्दस निकालने के लिए बदनाम करता है और खुद को महान साबित करने की कोशिश करता है जो फ़िलहाल कांग्रेस कर अपनी असली औकात दिखा रही है में कोई लेखक नहीं हूँ इसीलिए मेरे शब्दों पर न जाकर भावनाओं को समझ अगर कुछ लिखना चाहो तो मुझे जयादती तोर पर बड़ी ख़ुशी होगी शुभकामनाएँ

के द्वारा: Shiv Prakash

प्रिय राज भाई जय श्री राधे -मान गए उस्ताद -लाठी मरी इधर और सांप मरा उधर -क्या जबरदस्त लेख है -बधाई हो - रही बात प्रतिक्रिया और ब्लागिंग की तो ये तो गजब का नशा है जो छलकता ही चला जाता है- समय कम- काम कम - धर्मपत्नियाँ करें तो क्या करें वो चाहे ब्लागिंग करे तो भी परेशानी - गृह की शोभा बढ़ाएं तो भी परेशानी -परेशानी ही परेशानी हर और परेशानी -सैलाब है ये तो हमने कहा कि जब वोह इतना खराब लिखता है तो तुम लोग उसकी शिकायत जागरण वालों से क्यों नहीं करते हो …… श्रीमती जी बोली कि वोह बेचारे तो खुद उससे परेशान है , हरामी उनसे ऐसे -२ अजीब + बेतुके + बिना सिर पैर के सवाल पूछता रहता है कि उनकी तो खुद की हालत सांप के मुंह में छछूंदर वाली बनी रहती आप का व्यंग्य और हंसी अनूठा ही रहता है - शुक्ल भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5

के द्वारा: anil9gupta

आदरणीय अलका जी ....सादर अभिवादन ! जो निडर होते है वोह लाठिया तथा गोलियां खाते है लेकिन जो कायर होते है वोह निश्यच ही गालियों के हकदार होते है ..... लेकिन मैं फिर जोड़ना चाहूँगा की मैं आज भी एक आम आदमी ही हूँ , चंद ब्लॉग लिखने से खास नहीं हो गया हूँ ..... इसलिए एक आम आदमी की हालत मेरी भी है ..... मेरी कोई भी राय या योगदान किसी इतिहास की किताब में या फिर किसी की जुबान पर कल तो क्या आज भी नहीं आएगा ...... क्योंकि हम दूसरों की आँख से देखते है तथा दूसरों के दिमाग से सोचते है इसलिए हमारी कोई अपनी खुद की राय होकर भी शायद हमारी खुद की नहीं होती ...... इसलिए मैं खुद को आने वाले वक्त पर छोड़ता हूँ तब शायद हम आज के हालात को कुछ बेहतर ढंग से देख और समझ सकेंगे .... आपका बहुत -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय मिश्रा जी .....सादर अभिवादन ! सबसे पहले तो आपसे उस गुस्ताखी की माफ़ी मांगता हूँ की मेरी जिद्द के कारण आपको यहाँ भीतर तक आने का कष्ट करना पड़ गया ..... बाकि के देशवासियो की तरह से आप भी एक मजबूर शख्स का मजाक उड़ाने लग गए है , अपनी पत्नी के सामने वाली उनकी इज्जत और इस नई इमेज का कुछ तो ख्याल कीजिये .... वक्त सबसे बड़ा मरहम होता है , समय पाकर जख्मियो के घाव भी भर ही जायेंगे .... हमे उम्मीद करनी चाहिए की उनके दिल के ज़ख्मों का कोई कारगर इलाज भी जरूर हो ..... आपका हार्दिक शुक्रिया उपर्लिखित चार नारियों में *पहली वोह है जिसने की मुझसे प्यार किया लेकिन उसकी शादी किसी दूसरी जगह पर हो गई *दूसरी वोह है जिससे मैंने प्यार किया लेकिन उसकी शादी किसी दूसरी जगह पर हो जायेगी *तीसरी मुझको सिर्फ बिना बैंगन के आलू बना कर खिलाने वाली मेरी होने वाली बीवी है *चौथी मेरी होने वाली बीवी का बैकअप है (धन्यवाद )

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय शाही जी .....सादर प्रणाम ! ऐसा लगता है की उस कन्फेशन बाक्स के दूसरी तरफ आप भी मेरी तरह कान लगाए छुप के खड़े थे ...... इसलिए मेरे और भगवान के इलावा सिर्फ आप ही जानते है की असल में सच्चाई है क्या ?...... आप मुझ पर यकीन रखिये मैनी पार्टी लाइन का पूरा -२ ध्यान रखा है इसलिए मुझ दस का ताज़ा -२ दम रखने वाले तीसमारखां को दस जनपथ का कोई डर नहीं है ..... और फिर आप भी तो मेरे साथ है ही , इसलिए मेरी त्रिशंकु सरकार निर्विघ्न चलती ही चली जायेगी ...... आपका अपने खुद के और अपनी प्रेमिका दोनों के ही दिल की अथाह गहराइयों से सादर प्रणाम और आभार उपर्लिखित चार नारियों में *पहली वोह है जिसने की मुझसे प्यार किया लेकिन उसकी शादी किसी दूसरी जगह पर हो गई *दूसरी वोह है जिससे मैंने प्यार किया लेकिन उसकी शादी किसी दूसरी जगह पर हो जायेगी *तीसरी मुझको सिर्फ बिना बैंगन के आलू बना कर खिलाने वाली मेरी होने वाली बीवी है *चौथी मेरी होने वाली बीवी का बैकअप है (धन्यवाद )

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय आदित्य जी .... सादर अभिवादन ! उस दिन आपसे बात अधूरी रह गई थी , आज पूरी करने की कोशिश करता हूँ ..... मेरी वोह दोस्त मुम्बई की रहने वाली है , लेकिन आपके वाली जेना को भी मैं जानता हूँ और उनकी प्रतिभा का भी कायल हूँ ...... अगर मेरे पास उनकी फ़ीस देने की सामर्थ्य होती तो मैं उनका पॅकेज जरूर ले लेता ..... सच में ही उनकी गणनाएं और आंकलन कमाल के है ,एकदम सटीक ...... आप अपना अनुभव उनके बारे में जरूर बताना ..... जब मैंने यह कहानी लिख ली (अनुवाद कर ली ) तो मेरे मन में भी ऐसी किसी महिला से वैसा ही प्यार करने की आत्मिक इच्छा जागी ...... लेकिन हर किसी के भाग्य में ऐसा विरले किस्म का प्यार उपर वाला कहाँ लिख कर भेजता है ..... और आपके बारे में अपनी पिछली टिप्पणी मैंने कुछ हलके फुल्के मूड में की थी किरपा करके उसको गंभीरता से मत लेना ...... गुस्ताखी माफ आपका तहेदिल से शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: aksaditya

के द्वारा: nishamittal

प्रिय वाहिद भाई ....नमस्कार ! यह हास्य वयंग्य तो सच में ही मेरे लिए शेर की सवारी करने जैसा बन गया है ..... अगर कुछ हट के लिखता हूँ तो पहले वालो को नाराजगी रहती है और अगर अपनी पुराणी वाली लाइन पर दुबारा लौट कर आता हूँ तो फिर दूसरे वाले नाराज हो कर दूर चले जाते है ...... क्योंकि अब मैं अघोषित ब्लैकलिस्टेड हूँ ...... मेरी इस रचना से भी यह साबित हो गया है अब तो किसी सबूत की भी जरूरत नहीं रह गई है ..... आप ही बताइये की इस बार मेरे प्रयास + मेहनत में क्या और कहाँ कमी थी ? अब ऐसे मनोबल के साथ इतनी जल्दी वोह दूसरी कहानी लिखने की हिम्मत कहाँ से लाऊं ..... कुछेक और रचनाये है ......कल या परसों तक आपकी निगाहें करम के काबिल हो जायेंगी ..... उनमे कुछ सुधार जरूर बताइयेगा ..... आपका हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

राजकमल भाई नमस्कार, आपने सही लिखा जैसे ही मैंने मेरे ब्लोग्स पर बिन मौसम बरसात देखी मैंने JJ फीडबेक पर अपनी समस्या रखी जिसका त्वरित जवाव पाकर अच्छा लगा और इस बात का भरोसा मिला की हमारे ब्लॉग को किसी भी प्रकार का नुक्सान इससे नहीं होने वाला ! साथ ही JJ ने इस बात का भी भरोसा दिया था की जल्द ही उनकी तकनीकी टीम इसका कोई समाधान निकाल लेगी और मेरे विचार से ये नई कोडिंग प्रणाली ऐसे ही अवांछित तत्वों से निबटने के लिए विकसित की जा रही जो की अभी अपने प्राथमिक चरण मैं है इसलिए सारे साथियों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, मगर ये समझी जा सकती है, और हमें धैर्य रखकर कुछ दिन इस कोडिंग प्रणाली के और विकसित होने का इन्तजार करना चाहिए ! और एक ब्लोग्गेर्स मैं धैर्य की तो कोई कमी होती नहीं है

के द्वारा: allrounder

भाईसाहब, जो त्रुटियाँ आपने गिनाई हैं वो सच में काफ़ी परेशां कर रही हैं| एक ही कमेन्ट के लिए ३-४ या कभी कभी तो ८-९ बार प्रयास करना पड़ रहा है| कुछ पोस्ट सिर्फ इसी कारण क्षुब्ध हो कर छोड़ दीं| अंको और वर्णों के आकलन में आप से भले ही भूल हो गई हो पर इतना तय है कि इस कोडिंग सिस्टम को और भी अनुकूल बनाया जाना चाहिए|  कोड का बैकग्राउंड हल्का हो और कोड गहरे रंग में हो| उसका आकार भी कुछ बड़ा होना चाहिए ताकि स्पष्ट दिखाई दे और साथ ही कोड के लिए बेहतर ढंग से दृश्य फॉण्ट का चुनाव किये जाने की आवश्यकता है जिससे कि किसी वर्ण या अंक को देखने पर भ्रमित न हुआ जाये| यह कमेन्ट करते हुए भी संशयग्रस्त हूँ कि इसके लिए कितने प्रयास करने होंगे| ये तीसरा प्रयास है|

के द्वारा: वाहिद काशीवासी

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के द्वारा: Vivekinay

श्री राजकमल जी, अगर आपको अपना मानता हूँ तो सत्य बोलने से मै नहीं डरता मुझे पता है आप मेरी बातों का बुरा नहीं मानेंगे बल्कि मेरी बातों का अनुशरण करेंगे.... आपका आज ये लेख एक बहुत ही गम्भीर मुद्दे पर था और आपने अपने चिर परिचित अंदाज में ही इस लेख को लिखा....मगर क्या आप वो लिख सके जो लिखना चाहते थे..मै न कोई लेखक हूँ और न ही बहुत बड़ा ज्ञानी...बस इतना कहूँगा आप अपने इस लेख को पुनः दो बार पढ़े और फिर देखिये की क्या यह लेख राजकमल रिक्शावाला के कद के अनुरूप है..मुझे इसमें कुछ शब्द जो की आपने अंत में व्यंगात्मक अंदाज में लिखे वो कुछ नए और नौशिखिया लेखकों का था.....मै आपके लेख को किसी भी हालात में किसी से कमतर नहीं देखना चाहता इसलिए आपने इस जे.जे. पर जो अपना मुकाम बनाया है उसको और ऊंचाई पर ले जाए और छा जाए..... लेख बहुत अच्छा था.... आपका ************************************ एक अकेला आकाश तिवारी ************************************

के द्वारा: Aakash Tiwaari

प्रिय राज कमल भाई बेबाक +हास्य +गंभीर +चिंतनीय +विचार करने को प्रेरित करता हुआ आप का यह सार्थक लेख भी अन्य की भांति न्यारा बन पड़ा है जैसा की आप ने निम्न लिखा है ये अक्सर देखा जाता है - उस अदना सी नोकरानी की इतनी हिम्मत की इस देश के अभिनेता को इनकार कर दे …..इस देश में तो क्या नेता और क्या अभिनेता इनको कोई भी इस प्रकार के पावन कार्य के लिए इनकार करने.. पहले पुचकार के +फिर अपना बड़प्पन दिखा के की तेरा तो भाग्य जागा मै कहाँ तू कहाँ --नहीं मानी तो अंतिम अश्त्र तो फिर है ही बलात + शस्त्र जब तक हाथ में सत्ता रहती , कोई उफ़ तक नही करता अपुन को शोले की बसंती की माफिक ज्यादा बोलने की आदत तो नहीं है इसलिए चलता हूँ जाएगी कहाँ बच के --बधाई हो आप को

के द्वारा: shuklabhramar5

आदरणीय राजकमल जी, आपकी फिल्म हिट है उसके बहुत से कारण हैं. एक तो पूर्ण मनोरंजन करती है. दूसरा एक विचार भी देती है की बच्चों के जन्म स्थान अस्पताल से हटकर और भी हो सकते हैं जो ज्यादा लाभदायक हैं..... अस्पताल का बिल भी नहीं देना पड़ेगा...... इसमें टूटी सड़कों का फायदा भी नजर आता है की जो काम डॉक्टर महँगी दवाइयां देकर करते हैं वो महज सड़क पर चलने से हो गया........ अतः सब लोगों को अपने आस-पास की सड़कों को खोद देना चाहिए...... ज्यादा बच्चे हों और इतने तो हों ही की एक क्रिकेट टीम बन सके..... जैसे आपकी टीम "रोयल रिक्शा चलेंजेर्स" क्रिकेट से इतना कमाएगी की आपको रिक्शा की जरूरत भी नहीं रहेगी..... आपकी फिल्म दिखाए गए रिक्शेवाले के बौद्धिक ज्ञान को देखकर लगता है की अब समाज में वैचारिक स्तर बढ़ गया है............. पर हाँ कुछ दुखद प्रसंग भी थे जैसे आप झूलन को केवल रिक्शा ही दे पाए...... जिस के कारण शायद झूलन को मन मसोसकर रह जाना पड़े.......... कुल मिलाकर तात्पर्य ये है की फिल्म की जुबली तो हो ही जायेगी

के द्वारा: munish

प्रिय राज कमल भाई -एक बदले हुए रूप में बहुत ही गंभीर मुद्दा ले हाजिर हुए आप -इस घृणित अपराध के लगभग हर एक पहलू आप ने इसमें शामिल भी किये -हाँ और जैसा आप ने माना इस पुन्य काम में सब नारियां शामिल नहीं अपवाद तो है ही -लेकिन अक्सर देखा जाता है वे ही पुरुषों को उकसाती हैं -कहीं तो पुरुष भी मजबूर करते हैं नारियों को भ्रूण हत्या के लिए तो दोषी तो वे भी है -अगर बेटी है तो -नर्सिंग होम और बूचड़ खानों पर निगरानी रखनी चाहिए ताकि इसे बचाया जा सके -सुन्दर लेख बधाई हो सदियो से ही नारी की दुश्मन नारी ही होती आई है ….. फिर चाहे वोह सास + ननद+ देवरानी + जेठानी के या फिर वोह खुद ही अपनी होने वाली औलाद की दुश्मन कम कातिल के रूप में ही क्यों ना हो …

के द्वारा: surendrashuklabhramar5

प्रिय निखिल भाई साहिब ..... नमस्कार ! आपकी भाषा देख कर तो यही लग रहा है की कल को अगर आप तू तड़ाक पर उतर जाए तो मुझे कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए ..... ऐसा लग रहा है की आपको राजकमल फोबिया हो गया है .... मैंने ना तो आपको और ना ही किसी को रोका है की कोई कितने भी ब्लॉग लिखे ..... एक बार आदरणीय चातक जी और मैंने एक ब्लागर के खिलाफ मिल कर मोर्चा खोला था , लेकिन जब वोह महानुभाव अपनी बेसिर पैर की उल जलूल बातों पर ही बल देते रहे तब चातक जी ने उनसे लाख टके की एक ही बात की थी की “आप जैसे कट्टरपंथी के सामने चाहे कितनी भी दलीले दी जाए + तर्क रखे जाए , आप जैसे लोग उन हजारों तर्कों को भी अपने कुतर्को से काटने की असफल कोशिश करेंगे ..... अभी तक मैं यही समझ नहीं पाया हूँ की आपने अपना मानसिक सन्तुलन इस हद तक क्यों खो दिया है .... आप का यह कहना सही है की मैंने आपकी बातों को ही पिरोया है .... अब उसका कारण भी जान लीजिए , मैं नहीं चाहता था आरोप प्रत्याओप लगाते हुए मैं भी आप ही की तरह अपने स्तर से गिर जाऊ .... अगर मैं ऐसा करता तो फिर आपमें और मुझमे क्या फर्क रह जाता ..... माना की मैं बुरा हूँ और उससे भी बढ़कर लिखता भी बेकार हूँ लेकिन जिस लेखिका की आपने खुद तारीफ की है अभी तक उनके ब्लॉग पर आपकी प्रतिकिर्या मुझको दिखाई नहीं दी , क्यों ? धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय सिंह साहिब .....सादर अभिवादन ! आपका मेरे ब्लाग पर दूसरी बार स्वागत है ..... एक बार आप पियूष भाई के भरम में दिवाली के आसपास मेरे पास गलती से आ गए थे , और अब दूसरी बार आज आये है .... मुझको तो इस बात की हैरानी है की कोई भी भगवान परशुराम जी की तुलना राक्षस ओसामा बिन लादेन से कैसे कर सकता है , फिर चाहे वोह आप ही क्यों ना हो ....और उससे भी बढ़कर हैरानी इस बात की है की आप अपनी गलती मानने की बजाय खुद को सही सिद्द करने में लगे है ..... अगर आपको कोई डर नहीं तो आपने मेरी वोह टिप्पणी डिलीट क्यों की ..... और आप आदरणीय पारिक जी का पक्ष ले रहे है , अगर आप इनका इतना ही साथ देना चाहते है तो इनके वोह लेख पहले इनसे मेल द्वारा प्राप्त करके अपने घर की आदरणीय और पूज्यनीय महिलाओं को पढ़वाए ..... अगर इस मंच पर कोई कामसूत्र की व्याख्या करेगा तो मैं तो उसका विरोध करूँगा हू करूँगा , जो परिभाषा इस मंच की महिलायों के पढ़ने के योग्य है क्या उनको आपके घर की महिलाए नहीं पढ़ सकती ? धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय चन्दन जी ..... सादर अभिवादन ! आज मेरा सपना साकार हुआ है , क्योंकि एक अरसे से मेरी यह इच्छा थी की आप मेरे किसी भी ब्लॉग को पढ़ कर अपनी कीमती राय व्यक्त करे ..... क्योंकि मैं किसी को भी अपने ब्लाग पढ़ने के लिए नहीं कहता हूँ इसलिएमुझको यह आशा थी की कभी तो मेरा आदर्श खुद ही आकर मेरा ब्लॉग पढ़ कर मुझको कृतार्थ करेगा ....आप शुरू से ही मेरे पसंदीदा लेखक रहे है ..... मेरे बचपन की बात है की हमारे घर आये हुए दो मेहमानों के साथ मैं रिक्शा पर फिल्म देखने जा रहा था , तो उन्होंने रास्ते की बेहद खराब हालत को देख कर आपसी बातचीत में इस प्रकार की टिप्पणी की थी ..... उनकी उस मजाकिया टिप्पणी जिसको की उस समय मै आधा अधूरा ही समझ पाया था , अपने इस लेख में इस्तेमाल कर लिया ..... और आप सभी ने मेरे खुद से जुड़े हुए उस एहसास को हद से भी ज्यादा पसंद भी किया ..... मैं आपका पधारने और आमने अमूल्य विचार रखने के लिए अपने दिल की गहराइयों से आपका आभार व्यक्त करता हूँ

के द्वारा: Rajkamal Sharma

सबसे पहले तो मैं इस बात को साफ़ कर दूँ की अपने शब्दों में मेरे शब्दों को न पिरोयें तो बेहतर होगा. जहाँ तक टूटे-फूटे और आपको जो भी आता है लिखने की बात है तो आप बेख़ौफ़ लिखें. और हाँ, साहित्य की कुटिया का एक आम विद्यार्थी हूँ मैं. मेरे मन में आपके लिए कोई मेल नहीं है. आपको अगर लगता है की मेरे जैसी नाराजगी आपसे किसी ने नहीं राखी तो कहीं से गलत नहीं लगता. हो सकता है की मैं यहाँ अल्पमत में हूँ, वैसे भी दोहरे चरित्र और मानसिकता के व्यक्तियों की ही पूछ होती है हिंदुस्तान में, और आप कोई अपवाद नहीं और आपको तो इस मंच पर मैं pichhale एक varsh से jaanta हूँ. और आप में aaye har parivartan को मैंने padha है. आप ही नहीं मंच के sabhi purane blogaron से bhali-bhanti parichit हूँ मैं. kuchh achchhe mitra भी हैं और kuchh margdarshak भी. जहाँ तक मेरे saahityakar hone का sawal है तो मैं sirf और sirf एक prabuddhh paathak हूँ. और मैंने जो भी likha है, maha-rachnakaron की prerna से. mujhe saahitya की samajh नहीं. lekin achchha साहित्य kaun नहीं padhna chahta. और हाँ, mujhe भी इस मंच से jude hue एक arsa हो gaya. और siway kuchh logon को chhodkar baaki के kai saahityakaron ने मंच से duri आप jaise logon के kaaran ही badha lee है. aaj jagran के मंच पर sahityik hras के jimmedaron में आप भी हैं. 150 blog लिखने के baad aapki samajh jitni achchhi हो jaani chahiye thi wo bilkul नहीं hua. आप abhi भी wahin के wahin हैं. एक alp-aatmvishwasi vyakti जो auron के sahare पर apni बात की tushti karta है. आप अपने आप को raja-harishchandra samajhane lage और sabki pol kholne lage. are dusre पर kuchh भी shabdik prahar karne से पहले अपने gireban में jhaank कर dekhiye. charitrik और naitik prishthbhumi पर आप kahan theharte हैं iska aaklan kijiye. और हाँ badaliye ya नहीं badliye aapki apni zindagi है. mujhe जो laga मैंने bola. और aage भी bolunga. kyunki मैं apni बात rakhane में vishwas karta हूँ. आप achchha लिखें और aapki lekhani में और dhaar aaye pratikriya के bas yahi kaaran the. chunki आप purane blogaron में से एक the, मैं hamesha saath tha. lekin आपके irshya और आपके मानसिकता में कोई badlav नहीं aaya. jaise हैं वैसे rahiye. और हाँ अपना झंडा अपने पास रखिये. मुझमे अभी भी पुरुषार्थ है और जब तक जीवित रहूँगा स्वावलंबी रहूँगा. मुझे एकला चलो में विश्वास है. jai bharat!

के द्वारा: Nikhil

प्रिय राज कमल भाई मेरा तो ये मानना है की कोई कुछ भी रचता है या लिखता है तो अर्थ हीन नहीं हम इतने ज्ञानी ध्यानी नहीं की सब की रचनाओं की बातें हम समझ ही जाएँ -जहाँ किसी को समझ न आये उस लेखक से रचयिता से स्पष्टीकरण मांग लेना चाहिए -एक ही बार में किसी की सारी रचनाओं को मिटटी में मिला देने वाला या ऐसा लिखने वाला -पहले तो खुद को आईने में देखे की अभी तक वो क्या करता रहा -हमारा ये उद्देश्य होना चाहिए की हम नए ब्लागर को प्रोत्साहन दें बच्चे को ऊँगली पकड़ा चलाना पड़ता है माँ जैसा पहले -हमारी हिंदी की दुर्दशा आज आप ने देखा ही है -हम किसी तरह से अपना समय निकाल -सारी विषम परिस्थितियों में भी इस काम को बढ़ावा देने में लगे हैं -और अन्य से भी यही उम्मीद करते हैं की सार्थक रचें -जो कुछ सन्देश दे हमारे बिगड़े हुए समाज को -  आपस में खींचतान या बिना मतलब विवाद न हो इस लिए प्यार से समझ बढ़ानी चाहिए ये जागरण जंक्सन हमारा झंडा है एक -एक परिवार है हम सब का जब तक यहाँ हैं- हम हमेशा उस के निर्णय पर भी ऊँगली न उठायें -सभी रचनाओं को प्राथमिकता देना इतने सुन्दर लेखों में एक निश्चित ही मुश्किल भरा काम है -न्यायाधीश चाहे जो भी हो -हमें उसकी प्रशंसा भी करनी चाहिए सुन्दर नीति हो तो - आप की इच्छा -आप का ये प्रयास किसी को अन्य अर्थ ले सामने आया हो तो उसका स्पष्टीकरण उसे दे दें -जैसा की आप ने दिया भी है ऊपर -मन में किसी के राग- खलल न रहे आप सब का शुक्ल भ्रमर ५

के द्वारा: surendrashuklabhramar5

श्री राजकमल जी, ये तो मेरा भाग्य है जो आप जैसा अव्वल दर्जे का लेखक मेरा फैन बन गया.... मेरा मानना है की हर इंसान अपने तरीके और अपनी सोच से लिखता है.और वो अपने लेख के माध्यम से क्या कहना छह रहा है और क्या करना चाह रहा है इसे उससे अच्छा कोई नहीं समझ सकता... यदि किसी लेख को पढने के बाद किसी के मन में कोई नकारात्मक बाते आये तो उसे लेखक के माध्यम से स्पष्ट कर लेना चाहिए.. आपने ये जो आज काम किया है इसके बारे में मै अधिकतर सोचता था..की कुछ नए ब्लोगर इतनी अच्छी रचना पोस्ट करते है मगर उन्हें कोई नहीं पढता था इसलिए ये हमारी जिम्मेदारी बनती है की हम, सब नए ब्लोगरों को नहीं तो कम से कम नए और उत्कृष्ट ब्लोगरों को प्रोसाहित करे उन्हें आगे बढाए...आज आपने ये काम करके बहुत ही बड़ा काम किया है आज के वक्त में ऐसा कौन है जो दूसरों को पैर रखने के लिए जमीन देता है... एक अकेला आकाश तिवारी

के द्वारा: Aakash Tiwaari

आदरणीय नारायणी जी ….सादर अभिवादन ! असल में सच बात तो यही है की जितनी ज्यादा दिक्कत मुझको इस खबर पर लेख लिखने में आई उतनी आजतक और किसी लेख पर नहीं आई …… क्योंकि मैं जिस खबर को चुनता हूँ उसमे लेख का स्कोप देख लेता हूँ …… लेकिन किसी दूसरे के दिए हुए लिंक पर लिखना खुद से जबरदस्ती करने के समान है …… मन पर एक बोझ रहता है की किसी की अपेक्षाओं पर पूरा उतरना है ….. इसीलिए इस विषय पर बार -२ कोशिश करने पर भी असफलता ही हाथ लग रही थी ….. अब जब यह मां सरस्वती की किरपा से , उनकी ही मर्जी से उस खास दिन पर लिखा गया तो शायद यह घटना उससे किसी रूप में अप्रत्यक्ष रूप से सम्बन्ध रखती होगी ….. लेकिन आप ने मुझ से यह जानकारी बाँट कर मुझ पर उपकार किया है क्योंकि अब मुझको आगे किसी लिंक पर लेख लिखने के लिए एक सकारात्मक दिशा और सोच मिल गई है ….. बाकि जो भी होता है उस परमपिता परमेश्वर की किरपा और मर्जी से ही होता है ….. अगर मेरे कुछ अच्छा सोचने से मेरा खुद का और इस देश का तथा समाज का भला हो जाए तो फिर मैं आपसे यह वायदा करता हूँ की आज से ज्यादा से ज्यादा सकारात्मक ही सोचने की कोशिश करूँगा ….. आपका बहुत -२ आभार इस नई दिशा को देने के लिए

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय निखिल .... भाई साहिब ! मैं आपकी इस प्रतिकिर्या को पाकर अभिभूत हुआ हूँ (स्तब्ध नहीं )........ मुझको यह जानकर बहुत ही हर्ष हुआ की आप मेरी असली फितरत को जान गए है ..... यहाँ पर मैं सिर्फ किसी एक ब्लागर के लिए नही लिखता हूँ और ना ही किसी के कहने पर खुद को बदल सकता हूँ ..... आप अपनी साहित्य रचना करते रहिये शौंक से , लेकिन मेरे भाई मुझे तो जैसा भी टूटा -फूटा लिखना आता है वैसा ही लिख पाऊंगा .....यह साहत्य रचना (नावल लिखना ) आप जैसे बड़े लेखकों को शोभा देता है मेरी इतनी औकात नहीं की आप सभी जैसा उच्च कोटि का साहित्य रच पाऊं ..... आपके मन में मेरे प्रति इतना मैल भरा हुआ था , इसके बाहर आने का श्रेय मैं अपने इस लेख को देता हूँ , और उम्मीद करता हूँ की अब आपका मन साफ़ हो गया होगा , क्योंकि पिछले काफी समय से आप अपने मन में इस विष बेल को बढ़ावा दे रहे थे ..... जब भी मैंने आपसे इस बाबत पूछा आपने हर बार ऐसी किसी बात से इनकार किया ..... शुक्र है की आज आपके असली विचार और पुराना गुब्बार सामने आ गए है ...... मुझसे इस मंच पर शुरुआत में ही कुछेक ब्लागरों को नाराजगी होती रही है लेकिन वोह सभी कुछ समय बाद ही खुद ही या फिर मेरे प्रयास से मानते भी रहे है और यह सिलसिला आज तक अनवरत चल रहा है ..... लेकिन मुझको ऐसा आभास हो रहा है की आज तक आप जैसी नाराजगी मुझसे किसी ने भी रखी ...... अगर मैं कहने का हौंसला रखता हूँ तो सुनने का माद्दा भी रखता हूँ ...... मुझको नहीं पता की इस मंच पर कौन मेरा दुश्मन है , मेरे लिए तो सभी एक बराबर है , मेरे दोस्त की तरह ...... अब आपने पता नहीं मेरे खिलाफ कौन सा गुट बना लिया है जिसका नेत्रत्व आप कर रहे है ...... मैं तो आपको यही सलाह दूँगा की अपना दल भंग करके मेरे झण्डे के नीचे आ जाओ ...... अभी आजकल गर्मी का मौसम है शायद मेरी इस सलाह पर आप सर्दियों में अमल करे ....... मैं आप जैसे निंदक मित्र को हमेशा ही अपने पास रखना चाहूँगा , सदा के लिए ...... आप के लिए एक आलिशान कुटिया अपने आंगन में मैंने बनवा दी है , आप शौंक से उसमे रहिये , वक्त बेवक्त आपको जिस भी चीज की जरूरत पड़ेगी हंसी खुशी आपको पहुंचा दी जायेगी ...... लेकिन मेरा घर आंगन छोड़ कर ना जाना ...... मैंने तो एक नई शुरुआत करनी चाही थी , मैंने जागरण से कोई नियम नहीं बनवा लिया है अपने हक में ..... अगर आप मेरे तरीके से सहमत नहीं है तो आप पर कोई बाध्यता नहीं है की आप मुझको फालो करते हुए मेरा अनुसरण करे ....... आप अपने तरीके अपनाए , अगर मुझको वोह अच्छे लगे और उन से भी मेरा स्वार्थ सिद्ध होता दिखा तो मैं आपकी लीडरशिप में , उन पर अमल करने में जरा भी नहीं हिचकिचाऊंगा ...... आपको मुझसे यह शिकायत है की मेरेएक सौ पचास में से किसी भी ब्लॉग में ढंग की कोई बात नहीं है , तो इसका मतलब अब तक आप झूठ कह कर ही मेरा हौंसला बढ़ाते रहे है या फिर खुशामद ही करते रहे है ...... अगर मेरे तीन सो ब्लॉग भी हो जाए तब भी मैं आपकी यह शिकायत तो दूर नहीं कर सकूंगा ..... आपका पुराना मित्र :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय पारिक जी ..... सादर अभिवादन ! ऐसा लगता है की आपने मेरी सलाह के उपर अभी तक अमल नहीं किया है ..... मेरे कहने का बस इतना ही मतलब था की आप अपने घर की महिलाओं को अपने वोह लेख पढ़वा दे , अगर वोह कहे की इस जागरण मंच की महिला ब्लागरों को भी आपके वोह लेख पढ़ने चाहिये , तब बाद में आप उनको बड़े ही शौक से पोस्ट कीजिये , मुझको कोई ऐतराज़ नहीं होगा ..... मेरा दिमाग जैसा भी है लेकिन आप तो स्वस्थ मानसिकता वाले है फिर आपने क्यों नहीं इस बेहतरीन नज्म की असल लेखिका के ब्लॉग पर जाकर उसका हौंसला बढ़ाया , जबकि आप खुद ही यह मां रहे है की आपके सामने ही लिंक भी है , अगर आप खुले दिल दिमाग से यह कदम उठाते तो मेरा इस लेख को लिखने का मकसद किसी हद तक पूरा हो जाता ..... इस ब्लाग पर अपने चरण कमल डालने के लिए आपका हार्दिक आभार :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय आकाश भाई ...... आदाब ! आप की यही बात मुझे सबसे अच्छी लगती है की आप बिना पूरा विषय या फिर बात जाने कुछ भी नहीं कहते है , और जो भी कहते है बिना किसी लागलपेट के सपष्ट रूप से ही कहते है , शायद यही कारण है की मैं आपका फैन बन गया हूँ ..... **************************************************************************************************************** मेरा यह ब्लॉग किसी भी मुददे को लेकर नहीं लिखा गया है ..... बल्कि, मुझको एल नई लेखिका की नज्म बेहद पसंद आई तो सोचा की आजकल लोग मेरी तरह ही सिर्फ परिचितों और पुराने ब्लागरों की रचनाओं को ही पढ़ते है , तो क्यों ना इस अजीमतरीन रचना से बाकि के ब्लागरो को भी रूबरू करवाया जाए ...... अभी कुछेक दिन पहले ही जागरण जंक्शन वालो ने कहा था की वोह नए ब्लागरों और उनकी रचनाओं को प्रोत्साहित करते है ..... इसी से प्रेरित होकर मैंने यह साहसिक कदम उठाया ..... अगर जागरण वाले इस रचना को फीचर्ड कर देते तो उनकी नीति की प्रसंगता सामने आ जाती , तथा उसके बाद मैं उनको सुझाव देने वाला था की पोस्ट के शीर्षकों में बढोतरी कर दे , जिसके तहत पुराने ब्लागर नए ब्लागरों की रचना अपने ब्लॉग के माध्यम से पोस्ट करते समय कविता या लेख के साथ -२ प्रोत्साहन वाला शीर्षक भी टिक कर दे ...... बस इतनी सी बात थी ,\'उम्मीद करता हूँ की अब आप सारी बात का मर्म समझ गए होंगे ..... धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma

राजकमल जी, मुझे लगता है की आप जागरण को गुटों में बांटने का प्रयास कर रहे हैं और आपको प्रतिनिधित्व करने की बड़ी तीव्र इक्षा है. आपके इससे पहले के भी दो लेख देखे हैं मैंने. आपसे सविनय निवेदन है की इस मंच को सह्त्यिक सृजन के लिए इस्तेमाल करें न की अपने स्वार्थपूर्ति के लिए. और कृपया कर के हमारी समस्याओं से अपना ध्यान हटा कर स्वयं की समस्या और देश की समस्या में लग्यें तो हितकर होगा. दैनिक जागरण ने जितने भी कार्य किये हैं वो सब सराहनीय हैं. हर व्यक्ति अपने-आप को सबसे बेहतर ही मानता है, भले ही वो इसका ढिंढोरा न पीटता हो. और जहाँ तक आपके ब्लोगों की बात है, तो आपके १५० ब्लोग्स में से शायद ही कोई ब्लॉग कुछ ढंग की बात कहती हो. कटु-वचन के लिए माफ़ी, लेकिन मंच के प्रति मेरे भी कुछ उत्तरदायित्व हैं. इसे चुहलबाजी की जगह न बनाएं. धन्यवाद.

के द्वारा: nikhil

आदरणीय रज़िया जी ...... सादर अभिवादन ! आप की इस गंभीर टिप्पणी ने मुझको एक विषय दे दिया है ..... अगर सरस्वती माता जी ने किरपा की तो शायद इस पर एक लेख लिखू कभी ..... मुझे यह जान कर बहुत ही खुशी हुई की * आपने मेरे परिवार के और विस्तार की आस छोड़ी नहीं है *आपने बेटे की बजाय बेटी के जन्म की शुभकामनाये दी है *आपके मन में ना तो कोई डर है बल्कि इसके बजाय आपको हम मियां बीवी पर पूरा भरौसा है की हम उसकी कोख में हत्या नहीं करेंगे , बल्कि उसको इस दुनिया में लेकर आएंगे .... आपकी बधाईयाँ और शुभकामनाये कबूलते हुए आपको विश्वाश दिलाता हूँ की चाहे कितनी भी महंगाई क्यों ना हो जाए , हम उसको उसके सारे अरमान पुरे करते हुए पालेंगे ..... आपका बहुत -२ हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

दिव्या बहन ..... नमस्कार ! बहन हो तो आप जैसी बेशक मैंने यह बात मजाक में कही थी लेकिन आपने सचमुच में ही इस फिल्म की ज्यादातर टिकटे इकट्ठी खरीद कर सभी को बाँट दी है ...... इसके लिए मैं आपका हार्दिक शुक्रिया अदा करता हूँ माफ़ी सहित ..... इस बार तो गलती ही ही गई है लेकिन अगली बार सुधार लूँगा ..... मेरी अगली फिल्म पर मनोरंजन शुल्क माफ़ होगा , क्योंकि जब उसमे मनोरंजन ही नही होगा तो फिर उस पर किसी भी मनोरंजन कर की क्या तुक ? और दूसरी खास बात की मैं उस फिल्म के आपको एडवांस में ही थोक में फ्री पास भिजवा रहा हूँ ..... मेरी उन आने वाली फिल्मों का नाम है \\"बीमे का फंडा\\" और \\"टाटा तथा डालमियां के प्रतिद्वन्धी बिरला के कुलगुरु\\" बधाई तथा शुभकामनाओं (शुभकर्मो - फिल्म की पब्लिसिटी ) के लिए आपका बहुत -२ आभार :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय अबोध भाई .... सस्नेह आदाब ! आपसे यह शिकायत है कि जब आप इस खबर के बारे में पहले से जानते थे तो आपने इसको मुझ से सांझा करने कि जहमत क्यों नहीं उठाई , सैयद भाई कि तरह ..... और भाई साहिब आप भी निरे अबोध ही है मेन्टेन पुरुष को नहीं बल्कि नारी को खुद को रखना पड़ता है ताकि उसके पति कि चिकनी नजर इधरउधर फिसलने कि बजाय सिर्फ उसी के उपर सिथर रहे .... और जहाँ तक बच्चों कि बात है तो इसमें ज्यादातर तो मेरी मरहम बीवी रचना के है जिनको कि उसकी बहन मधु हमारे बच्चों के साथ एक समान ममता लुटा कर पाल पोस रही है ..... उम्मीद है कि अब आपकी ज्यादातर शंकाओं का समाधान हो गया होगा ..... अगर फिर भी मन में कोई सवाल रह गया हो तो आपका हमेशा ही स्वागत है , शगुन देने के लिए धन्यवाद सहित आभार :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय राज भाई जय श्री राधे -देखना है कब हमारे नसीब में ये शो केस और सगुन देखने और इसमें शरीक होने का मौका मिलता है हम भी दर्शन करने वालों की लिस्ट में अपना नाम लिखा पाए तो ये जीवन धन्य हो जाये -आप की राजकमल रिक्शावाला-सिनेमा -की पूंछ पकड़ हम भी बालीवुड से हालीवुड की वैतरणी पार हो पायें - हमारी झूलन अपने जन्मस्थान के बारे में पूछेगी तो मैं उसको उसकी चलती फिरती जन्म स्थान के दर्शन तो करवा सकूंगा कम से कम …. आप जब भी हमारे गरीब खाने में , खाना खाने नहीं बल्कि झूलन के दर्शन दीदार और शगुन डालने के लिए बहुत प्यारा लेख व्यंग्य व् हास्य का अनोखा पुट लिए हुए -न जाने आप यहाँ क्यों है -हम आप के दर्शन को कहीं और आते - अच्छा हुआ रिक्शेवाला आप को समझा सका आजीवन यात्रा टिकट दे देता तो राम और केवट की कहानी सा --- बधाई हो -इसी लिए हो हम आप को चने की झाड पर चढाते हैं -

के द्वारा: shuklabhramar5

प्रिय वाहिद भाई ....आदाब ! मेरी शुरू के 120 शायरी वाले पोस्ट पर कुलमिलाकर 118 कमेन्ट थे ..... मैं बस अपना दो लाइनों का शेयर लिख कर चलता बनता था .... किसी से कोई मतलब नहीं था .... एक बार अपना ब्लॉग डिलीट करने लगा तो शुरू कि कुछेक पोस्ट को छोड़ कर बाकि कि सभी डिलीट करता चला गया ..... लेकिन जब मैं वहां पर पहुंचा जहाँ से कि मुझको अदिति जी के कमेन्ट मिलने शुरू हुए थे तो मैं रुक गया ..... क्योंकि वोह इस मंच कि जान तथा आन बाण और शान थी ....उनके कारण ही बिना किसी से मेलजोल रखे ही मेरी थोड़ी बहुत पहचान बनी थी तथा दूसरे ब्लागरो के कमेन्ट मिलने शुरू हुए थे ..... अब आपने मेरा सारा सफर देख ही लिया है अगर मैं ना भी बताता तो भी आप जान तो गए ही थे ..... यहाँ पर सिर्फ वोह ही एक ऐसी ब्लागर थी जोकि अपने निराले तरीके से सभी का समान रूप से उत्साह बढ़ाती थी + सही सलाह दिया करती थी + कमिया बताया करती थी ..... पता नहीं भगवान ने उस छोटी सी होनहार लड़की में कितने गुण भरे थे कि इस मंच के सभी बड़े बूढ़े बजुर्ग तक भी उसकी सलाह अपना अहम त्यागकर खुशी से लेते थे .... धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय वाहिद भाई ....आदाब ! मैंने यह टिप्पणी सिर्फ इसी सोच के मद्देनजर कि थी कि यहाँ पर सभी एक बराबर है ..... इन विशेष हालातों में इस के सिवाय और कुछ कह भी नहीं सकता था .... क्योंकि जिनको मैं अपने लिए खास और विशेष मानता हूँ , वोह सब भी यकीनन मेरे प्रति मेरी तरह कि ही भावनाए रखते है .... इस लिहाज से मैं अपनी जुबान से कहूँ चाहे या नहीं हमारे सभी के आपसी सम्बन्ध वैसे ही मजबूत रहेंगे .... मैं एक बार अपने बहुत से दोस्तों के साथ अपने दोस्त कि बहन कि शादी में गया .... वहां पर हमारा एक दोस्त जोकि शादी वाली लड़की के बहुत ही करीब था , बिलकुल भाई जैसा .... उसने हमारे साथ तो शगुन दिया ही लेकिन अलग से भी दुबारा शगुन दिया जोकि उसकी अपनी उस धर्म बहन के प्रति भावना और श्रद्धा थी .... अब हम लोग चाहे कालेज में पढ़ते थे लेकिन फिर भी हम को उसका यह कदम कुछ अजीब सा लगा .... इस बात को उसी दिन हमारी आपसी बातचीत में काफी देर के विचार विमर्श के बाद सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया कि उसका ऐसा करना हर लिहाज से उचित था .... आपका यह कहना भी उचित ही है कि हमारी आपसी एकता हमारे किसी भी संघर्ष के समय हमारे आपसी सम्बन्धों को मजबूत बनाते हुए अपना असरकारक और प्रभावी रोल अदा करे ..... आभार सहित प्रणाम

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: Anuradha Chaudhary

श्री राजकमल जी, मैंने आपके दोनों लेखों को पढ़ा और पाया की आपने अपने सभी नए और पुराने साथी ब्लागरों के ह्रदय में उत्पन्न होने वाले सभी छोटे बड़े प्रश्नों को बाखूबी जे.जे. से पूछा है..... आप इस मंच के एक बहुत ही जागरूक ब्लोगर है आप जैसे ही कुछ ब्लोगरों की वजह से इस ब्लॉग की कुछ गहराई है अन्यथा इस मंच पर कोई अपनी केवल एक शायरी..एक चुटकुला,एक लाइन कोई बाते लिख कर इस मंच को एक शोशल नेट्वर्किं साईट बना देता..मगर इस मंच पर इतने वरिष्ट ब्लोगर है फिर चाहे वो निशा मित्तल जी हो,मिश्रा जी हो,शाही जी हो.....अलका जी हो बहुत है जो इस मंच को और सभी साइटों से भिन्न बनाते है...अब जब हम इस मंच के लिए आज के दौर में सबसे कीमती कहे जाने वाले समय को खर्च करते है तो जे.जे. की भी जवाबदेही और अच्छा करने की कोशिश होनी चाहिए...जोकि समय समय पर जे.जे. करता भी है.... मै जे.जे. मंच के लिए कुछ व्यक्तिगत सुझाव देना चाहता हूँ.....जो इस प्रकार है... 1 -जिस प्रकार से अखबार में आज की हुई घटनाओं में कुछ विशेष घटनाओं को अगले दिन मुख्य पृष्ट पर छापते है ठीक वैसा ही यह भी होना चाहिए और एक दिन में आने वाले लेखों में से कुछ विशेष और उत्कृष्ट लेखों को बड़ी तस्वीर के साथ फीचर करना चाहिए और फीचर ब्लॉग की संख्या भी केवल 5 या 6 होनी चाहिए.. 2 -एक दिन में प्रत्येक ब्लोगर केवल 2 या 3 ब्लॉग ही पोस्ट कर सके... 3 -नए ब्लागरों को फीचर पेज पर एक अलग व्यवस्था से रखना चाहिए... 4 -किसी भी ब्लॉग को उसके लेखन,विषय के साथ-साथ उसमे लोगों के कमेन्ट के हिसाब से उसको वरीयता देनी चाहिए.....और फीचर ब्लॉग पूरे 24 घंटे तक फीचर रहने चाहिए... यदि कुछ इस तरह के बदलाव किये जाए तो जागरण पर ब्लोगिंग का मजा दुगुना हो जाएगा.... जागरण पर सक्रियता के लिए आप बधाई के पात्र है.... आकाश तिवारी

के द्वारा: Aakash Tiwaari

प्रियांका जी ....सादर अभिवादन ! बात दरअसल यह है की आज तक की आदरणीय सिद्दीकी जी की मेरे किसी भी ब्लॉग पर यह पहली टिप्पणी है ..... मैं इनका आदर करता हूँ और अपने घर पर आये हुए का तो विशेष सन्मान करना चाहिए ... इसी नीति तथा संस्कारों के तहत ही मैंने इनकी इज्जत की है .....वैसे अगर यह नहीं आते तो मैंने इनके हरेक ब्लॉग पर एक ही टिप्पणी हर बार करनी थी जब तक की यह उसका माकूल जवाब नहीं दे देते ..... लेकिन अब इनको बख्शना बनता है ..... मैं उन सभी का शुक्रगुज़ार हूँ जिन्होंने की मेरा समर्थन करके असीम साहस का परिचय दिया है ..... यहाँ पर सभी बराबर है और हम सभी अपने जरूरी कामो में से वक्त निकाल कर अपनी सामर्थ्य अनुसार इस मंच पर अपना -२ बनता योगदान देते है .... इसलिए आपका क्षमा माँगना उचित नहीं , क्योंकि इस लिहाज से तो मेरे समेत हर ब्लोगर माफ़ी मांगने का हकदार हो जाएगा ..... एक बार फिर से आपके द्वारा दिए गए नैतिक सहयोग के लिए आपका बहुत -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय महोदय \ महोदया ..... सादर अभिवादन ! मैं इस मंच से 11 मई 2010 से जुड़ा हुआ हूँ , इस मंच ने और मैंने एक दूसरे को विकास करते हुए देखा है और हम एक दूसरे के सफर के साक्षी रहे है ..... अपने इस सफर के दौरान हमने बहुत से उतार चढ़ाव भी देखे और आपसी सहयोग + तालमेल + समझदारी से अपने रास्ते में आने वाली हरेक दिक्कत का दिदादलेरी से सामना करते हुए हरेक बाधा से पार पाया ..... फिर चाहे वोह इस मंच का आंशिक तौर पर ईसाइयत वाले साहित्यक आंतकवाद द्वारा अपहरण हो या फिर किसी और प्रकार की कोई भी चोरी चकारी वाली दिक्कत ..... अपने साथियों के सहयोग तथा जागरण जंक्शन की मदद तथा रहनुमाई से हमने विपरीत हालात का भी पूरी हिम्मत तथा मनोबल से सामना किया और आज इस मुकाम पर पहुंचे है ..... क्योंकि हम उन मुश्किल हालात में भी इस मंच को छोड़ कर जाने की बजाय यही पर डटे रहे ..... अब आप इसको मेरी खासियत कहे या फिर कमी की जितनी बार भी जागरण के भगवान को अवतार लेना पड़ा है उसमे से आधी से भी ज्यादा बार उसमे मेरा सीधे और असिधे तौर पर हाथ रहा है ..... मेरा यह मानना है की जिस प्रकार यह दुनिया तेजी से बदल रही है उससे भी कहीं ज्यादा अनुपात में लोगों में जागरूकता आती जा रही है ..... कोई भी व्यक्ति + संस्था + समाज + देश बिना लोकतंत्र के विकास की राह पर आगे नही बढ़ सकता है ..... यदि हम अंधाधुन्द सिर्फ आगे ही आगे सरपट भागते रहेंगे तो इस चक्कर में कहीं ब्रेक लगाना भूल कर अपना अहित तो नहीं कर बैठेंगे क्योंकि रास्ते में मोड़ भी आएंगे और उबड़खाबड़ रास्ता भी ..... आज के दौर में जो भी जनता के प्रति अपनी जिम्मेवारी + जवाबदेही को समझते हुए और अपनाते हुए अपनी नीतियों में यथा संभव पारदर्शिता लाते हुए सबको साथ में लेते हुए अपना रास्ता तय करेगा उसको विकास के पथ पर आगे बढ़ने से दुनिया की कोई भी ताकत नहीं रोक सकती है ...... मुझको जागरण जंक्शन के स्म्मानिंत सदस्यों के द्वारा जो जवाब मेरे सवालों के जवाब में दिया गया है , उनको पूरी तरह से स्वीकार करते हुए मैं इस मुद्दे को यही खत्म करता हूँ .... क्योंकि अभी भी जो सवाल मेरे मन में अनुतरित है , जब जागरण मंच के उच्च स्तर के अधिकारी उनको अब जान ही गए है तो उनको बार -२ दोहराना धर्म संकट खड़ा करना ही कहलायेगा ..... जब जागरण जैसी इतनी बड़ी संस्था हमारे बारे में लचीला रुख अपना सकती है तो यह हमारा भी फ़र्ज़ बनता है की हम तुच्छ जीव अपनी हठधर्मिता का त्याग कर दे ..... अपने खुद के स्वार्थ को तज कर इस मंच की बेहतरी + विकास और विस्तार को ध्यान में रखते हुए अपने अल्पकालिक लाभों का त्याग कर दे .... इसी के साथ नए ब्लागरो के प्रोत्साहन की जागरण की नीति का समर्थन करते हुए उनको यथा संभव सहयोग दे तथा इस मंच के सभी नए और पुराने ब्लागर एक दूसरे से एक सुर में कदमताल करते हुए चले ..... मैं आशा और कामना करता हूँ की भविष्य में मुझ “कमल हजारे” को किसी भी प्रकार की आवाज उठाने की नौबत नहीं आने दी जायेगी .... मैं अपने साथ देने वाले साथियों का तथा उन साथियों का भी जोकि चाहते हुए भी खुलकर मेरा साथ नही दे सके तथा जागरण जंक्शन मंच का संदेहों के निवारण के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ ...... धन्यवाद सहित आप सभी का विनीत

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय राजकमल जी, जागरण जंक्शन मंच के एक सम्मानित और नियमित ब्लॉगर होने के कारण आपकी विभिन्न चिंताओं और सवालों के जवाब पूरी छानबीन के बाद जारी किए जा रहे हैं. साथ ही ये मंच आपके माध्यम से दिए जाने वाले जवाबों को सभी पाठकों के लिए भी एक मानदंड की तरह देखे जाने की अपेक्षा करता है. 1. सामान्यतया, किसी भी ब्लॉग को फीचर होने के लिए कुछ विशिष्ट मानकों को पूरा करना होता है. यदि वह ब्लॉग उन पूर्व निर्धारित मानदंडों को पूरा करता है तो उसे फीचर की श्रेणी में तुरंत स्थांतरित कर दिया जाता है. 2. यदि कोई ब्लॉग कुछ विशेष सामाजिक-राजनीतिक या व्यापक जनहित का संदेश प्रसारित करता है तो ऐसे ब्लॉग को वरीयता प्रदान की जाती है और उसे दुबारा फीचर की श्रेणी में रखा जाता है. 3. कई बार मंच नवोदित उत्साही ब्लॉगरों को विशेष प्रोत्साहन की नीति भी अख्तियार करता है इसलिएआरंभ में कड़े मानदंडों से उन्हें कुछ छूट प्रदान की जाती है. यही कारण है कि कभी-कभी लेखन में पाई गयी अशुद्धियों के बावजूद भी यदि ऐसे ब्लॉगरों का ब्लॉग कोई विशेष संदेश देता नजर आता है तो उसे भी फीचर होने का सम्मान प्रदान किया जाता है. 4. आपने समय-समय पर होने वाली प्रतियोगिताओं के लिए चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाया है तो मंच इस बारे में निश्चित की गयी रीति को जाहिर करना चाहता है. आपको विदित हो कि प्रतियोगिता में शामिल हजारों प्रविष्टियां एक दिन में नहीं बल्कि दिन-प्रतिदिन के आधार पर जांची जाती हैं. इस प्रक्रिया के बाद प्रतियोगिता समाप्त होने के तुरंत बाद से प्रत्येक प्रविष्टि को प्राप्त अंकों के आधार उन्हें स्थान दिया जाता है. इस दौरान तमाम ऐसे ब्लॉगों को बाहर किया जाता है जो गलत संदेश प्रसारित करते हैं या लेखक ने दूसरे की रचना चोरी करके अपने नाम से जारी किया हो. यही कारण है कि जागरण जंक्शन मंच निष्पक्ष रूप से निरंतर योग्यतम उम्मीदवार का चुनाव करने में सफल होता रहा है. 5. आपको ये जानकारी होनी चाहिए कि ये पहली बार नहीं है जबकि मंच अपनी नीतियों को सार्वजनिक कर रहा है बल्कि तमाम पाठकों के हितार्थ जागरण जंक्शन अपनी तमाम नीतियों से पाठकों को पहले भी अवगत कराता रहा है. इसके अतिरिक्त एक जरूरी संदेश आपके इस ब्लॉग के द्वारा सभी पाठकों को प्रेषित किया जा रहा है कि जागरण जंक्शन मंच के लिए सभी ब्लॉगर सदा-सर्वदा समान रूप से महत्वपूर्ण हैं और मंच किसी भी पाठक के साथ पक्षपातपूर्ण नीति से परहेज करता है. मंच ये उम्मीद करता है कि उपरोक्त जवाब पढ़ने के पश्चात आपकी तथा अन्य सभी पाठकों की शंका का समाधान हो चुका होगा किंतु यदि आप अब भी जागरण जंक्शन की नीतियों से नाइत्तफाकी रखते हैं तो आप अपना सवाल feedback@jagranjunction.com पर भेज सकते हैं. धन्यवाद जागरण जंक्शन टीम

के द्वारा: JJ Blog

भाई राजकमल जी; जय हिंद ! [ अति व्यस्त चल रहा हूँ इसीलिए मंच से ज्यादातर नदारद हूँ ] आपने जो मुद्दे उठाये निश्चय ही विचारणीय हैं !विगत दिनों मेरे द्वारा पोस्ट दो में से एक जिसे बहुत हलके में पोस्ट किया था और जिसे में प्रदर्शित नहीं रखना चाह रहा था, ३ दिन तक फीचर्ड रहा जबकि दूसरा स्तरीय फीचर ही नहीं हुआ ! कंप्यूटर से साहित्य का आंकलन नहीं किया जा सकता !जाज कर्ताओं के व्यस्तता या अनदेखी की स्थिति में ही ऐसी दशा होती होगी ! एक और बात मेने नोट की है ,जाज नए ब्लोगरों को प्रोत्साहन स्वरुप अधिक महत्त्व देता है ![अब में नया नहीं हूँ ] [ हिन्दी ब्लोगर मंच ] के विकास की दृष्टी से यह उचित भी लगता है ! जाज को निर्णायक मंडल की सदस्य संख्या बढ़ानी चाहिए ! ताकि प्रत्येक दिन की सभी प्रस्तुतियों का अवलोकन किया जा सके !

के द्वारा: Charchit Chittransh

मांझी जब नाव डुबोये उसे कौन बचाए भ्रष्टाचार पर बहस करा देना आसान है किन्तु उससे स्वयं बच पाना एक दुष्कर कार्य जो मंच समाज को बदल सकने वाले विचारों से डरता हो और उसे उचित स्थान न दे पाता हो वह क्या ख़ाक सामाजिक परिवर्तन लाएगा ..... priy baijnaath भाई ....नमस्कार ! आपने मेरी अधूरी बात को अपने मन के भावों से इन शब्दों द्वारा पूर्ण कर दिया है ..... आपने जो ब्लागर को दिक्कते प्रदान करने की बात बताई गई है उनको जान कर मैं स्तब्ध हूँ .... चाहे कुछ भी हो , कोई कुछ भी कहे , मैंने अपने मन की बात और खुद से पेश आ रही दिक्कते सबके सामने लोकमंच पर रख दी है .... आप अगर ब्लाग लिख कर नहीं कहना चाहते तो कम से कम फीडबैक पर लिख कर अपना विरोध तो कम से कम दर्ज करवा ही सकते है .... धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma

pप्रियजैक भाई ....आदाब ! वोह बीते दिन याद है वोह बचपन के सुनहरे दिन याद है मुझको ..... "वोह खुद को जैक और हमको जिल कहते है पहले एंग्री करके बाद में जस्ट चिल कहते है" यह वाक्यात तो मेरे साथ तब से घटने लगे है जब से मैंने अपना लेख अलविदा जागरण जंक्शन लिखा था .... ऐसा लगता है की जागरण के रिकार्ड में मेरी मौत हो चुकी है .... इसलिए खुद को "जिन्दा" साबित करने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही था मेरे भाई .... और वास्तविक जिन्दगी में अगर किसी के साथ ऐसी घटना घट जाए तो उस बेचारे प्राणी को न जाने क्या -२ पापड़ बेलने पड़ जाते है .... अगर मैंने खुद के वजूद का एह्साह करवाने के लिए यह कदम उठा लिया तो क्या गलत किया ? मेरे भाई ! आपसे ब्लागर आफ दा वीक (कमजोर) की पदवी पाना बहुत मन को भाया .... :) :( '< :p :'  8-) :D :O ;)

के द्वारा: Rajkamal Sharma

अरे राजकमल भाई यह क्या कह रहे हो..यार हम लोग तो इस मंच रुपी जहाज के सबसे पहले यात्री है फिर आपको ऐसा क्यूं लगता है कि आपके साथ भेदभाव हो रहा है. पहले जब हम और आप इस मंच पर नए थे तो मंच वालों ने हमें भी बहुत स्पोर्ट किया है,, भूलगए वह दिन जब आप सिर्फ शायरी लिखते थे और वह भी फीचर्ड की लिस्ट में आजा था वो तो आजकल आपकी लेखनी में \"व्यंग्य\" थोड़ा ज्यादा हो गया है जो लगता है जंक्शन वालों का हाजमा खराब कर रही है.. खैर एक बात और है यार हर मंच पर ऐसी दिक्कते आती है और जागरण जंक्शन के मंचपर तो फिर भी कम ही मुश्किले आती है जनाब.. मस्त रहिए.. लिखते रहिए.. आपको भी ब्लॉगर ऑफ द इयर के अवार्ड से नवाजा जाएगा..... :) :) :) 0\

के द्वारा: Jack

प्रिय राज भाई आप की निम्न बात से मै पूर्णतया सहमत हूँ और कभी कभी मै अपनी प्रतिक्रियाओं में भी इस बात का जिक्र तो करता ही हूँ -लेकिन आप ने शायद हमारे एक अनार सो बीमार को भी पढ़ा होगा -और सारी रचनाओं को एक साथ रख दिन भर की तोल मोल करना भी शायद किसी के बूते की बात नहीं किसका अच्छा है किसका बुरा लेकिन यथा शक्ति आप की निम्न बात पर गौर तो फरमाना ही होगा - लेकिन यह बात भी अपनी जगह पर सही है की एक पिता की तरह जागरण के लिए सभी बच्चे एक बराबर होने चाहिए , सभी को समान मौके +समान अवसर मिलने चाहिए ….. नाम की बजाय लेख की विषयवस्तु को देखा जाना चाहिए ….. धन्यवाद तीसरी आँख वाले दरोगा जी ---हम अधिक नहीं लिखेंगे -मन तो बहुत करता है -कल के.यम.मिश्र.जी ने एक तर्क दिया था व्यक्तिगत बातें प्रतिक्रियाओं में अधिक न हो ... आप का भ्रमर

के द्वारा: shuklabhramar5

आदरणीय श्री राजकमल जी सादर अभिवादन फीचर्ड ब्लॉग तो मात्र एक आइना है इधर जागरण ने अपने न पसंद आने वाले ब्लोगरों के लिए और भी कई पुख्ता प्रबंध कर रखे हैं मसलन, व्यक्तिगत ब्लॉग का न खुलना, उनके रीडरशिप को कम करने का प्लान......वैगेरह-वैगेरह कभी कभी मै सोंचता हूँ की हमारा भारत कभी नहीं सुधारने वाला है किशोर कुमार का गाना याद आ जाता है ...........मांझी जब नाव डुबोये उसे कौन बचाए भ्रष्टाचार पर बहस करा देना आसान है किन्तु उससे स्वयं बच पाना एक दुष्कर कार्य जो मंच समाज को बदल सकने वाले विचारों से डरता हो और उसे उचित स्थान न दे पाता हो वह क्या ख़ाक सामाजिक परिवर्तन लाएगा | मै तो बहुत दिनों से इस तिकड़म को देख-देख कर अब कुछ भी बोलने से परहेज करता हूँ कभी-कभी अपनी नादानी पर भी ग्लानी होती है जो बहुमूल्य समय लगा कर भी सार्थक निष्कर्ष नहीं निकलता दिखाई देता | हाँ कुछ अच्छे आलेख भी फीचर्ड होते हैं किन्तु बहुत सारे अच्छे पोस्ट नजर अंदाज भी किये जाते हैं | ऐसी भावना से तो न राष्ट्र का उद्देश्य पूरा होगा न हीं जागरण का | आगे जागरण की मर्जी ..........हम क्यूँ कर कुछ बोलें |

के द्वारा: baijnathpandey

राज जी ....सादर अभिवादन ! मैं आपकी ज्यादातर बातो से सहमत हूँ , मैंने कोई भी बात बेमतलब की नहीं कही है , और अपने लेख में भी मैंने यही कहा है की यह आरोप न होकर के तल्ख़ सच्चाईयां है जिनसे की किसी को भी इनकार नहीं हो सकता है .... आप ही सोचिये की मैं बिना किसी ठोस वजह के कोई बात जागरण जैसे बिग बॉस से कैसे कह सकता हूँ .... जब यह अपना जवाब मुझको देंगे तब मुझे अपना पक्ष भी तो तथ्यों समेत रखना पड़ेगा ही और उस सिथति के लिए मैं पूरी तरह से तैयार हूँ .... लेकिन मुझको नहीं लगता है की जागरण के पास मेरे सवालों का जवाब है .... लेकिन दो बाते तो पक्की है की :- मेरे इस ब्लॉग पर हर टिप्पणी और उस पर मेरे द्वारा दिए गए जवाब के प्रत्येक शब्द पर नज़र रखी जा रही है .... सारी सिथति का आंकलन करने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा , फिर चाहे वोह गुपचुप तरीके से हो या फिर सार्जनिक तौर पर .... आपके द्वारा दिए गए सुझावों पर भी जागरण को गौर करना चाहिए ..... आपके द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आपका हार्दिक शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय वाहिद भाई ....आदाब ! आपसे समर्थन पाकर सदा की भांति मुझमे एक नई आशा और उमंग का संचार हुआ है .... आपने मेरा लेख "जागरण मेरी बीवी भई सबकी सरकार" अगर पढ़ा था तो उसमे मैंने लिखा था की मेरी यह बीवी अपने बूढ़े और खूसट आशिको के आगे बिछ -२ जाती है और उन पर जरूरत से कुछ ज्यादा ही मेहरबान रहती है .... लेकिन मेरे भाई मेरे तो बाल अभी काले है इसलिए मेरी यह जागरण बीवी -सबकी सरकार मुझसे माफ़ी कैसे मांग सकती है , इसके लिए तो मुझको अपने बाल सफेद होने का इंतज़ार करना पड़ेगा ... :) इस नाजुक विषय (बिल्ली के गले में कौन घंटी बांधे ) पर मेरा साथ देने वाले और समर्थन करने वाले सभी साथियों का मैं दिल की गहराईयों से आभार व्यक्त करता हूँ , उम्मीद करता हूँ की सिथति में कुछ सुधार होगा तथा आगे भी मुझको आपका साथ मिलता रहेगा .... आपका आभारी राजकमल

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय भर्मर जी .... जय श्री राधे कृष्ण ! आपने अपनी इस विस्तृत प्रतिकिर्या में सदा की भांति हरेक मुददे को छू लिया है और अपने दृष्टिकोण से उचित समाधान भी बताए है .... आपकी यह बात मेरे मन को भी भायी है की समाज और देश के लिए उपयोगी लेखों को लीक से हटकर कुछ ज्यादा समय देना चाहिए .... लेकिन यह बात भी अपनी जगह पर सही है की एक पिता की तरह जागरण के लिए सभी बच्चे एक बराबर होने चाहिए , सभी को समान मौके +समान अवसर मिलने चाहिए ..... नाम की बजाय लेख की विषयवस्तु को देखा जाना चाहिए ..... निष्पक्षता बनाम मनमर्जी आखिर हमारी सहने की भी कोई सीमा है , बेशक हमारी जिन्दगी में अभी तक कोई सीमा रानी नहीं आई है , लेकिन इस सीमा को तो हम कदापि क्रास नहीं करने देंगे .... :) इस्मत चुगताई जी के नाम से सभी वाकिफ है सरदार खुशवंत सिंह जी आज भी हर शनिवार को सभी अखबारों में लेख लिख रहे है ..... स्वर्गीय कन्हैया लाल जी बरसो तक \"प्याज के छिलके\" शीर्षक से अपने वयंग्य लिखते रहे है .... और स्वर्गीय सरदार सिंह \'पागल\' जी तरनतारन वाले पंजाब केसरी में अपने मजेदार लेख लिखा करते थे ... आपका तहेदिल से शुक्रगुजार हूँ

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय राज + कमल भाई -बहुत ही सार्थक लेख -निंदक नियरे राखिये आँगन कुटी छवाय वाला -लोगों को -जे जे को इन सभी गंभीर मुद्दों पर गौर तो करना ही चाहिए- देखा ये गया है की जो आप ने मुद्दे उठाये सब सही हैं लेकिन राज भाई अपवाद हर जगह है न ? इसकी दवा क्या है ? कम देर तक पोस्ट को रखना शायद और सब को समय देना हो -या दूसरे लेख उससे अच्छे लगे हो -मेरे खुद के लेख कई बार आये मीटर तेजी से चला और उड़ गया -सब कुछ होता है हाँ किसी के साथ मन में कुछ रख उसके लेख शामिल ही न किये जाएँ तो उसके सारे अच्छे विचार जो की देश दुनिया के सामने लेन से लाभ होता वो गायब हो जाता है इसका मलाल तो रहता है और ये अनुचित है हमें कुछ निर्णय मंडल को कंप्यूटर महाराज के हाथ में छोड़ना भी चाहिए ये भी सच है किसी का लेख बहुत समय न रख जहाँ जरुरत हो वहां को छोड़ -अन्य को मौका दिया जाये -देश दुनिया को जिस लेख से लाभ हो -उसे अधिक प्राथमिकता और महत्त्व दिया जाये और आप ने जो निम्न कहा - आप लोग चाहे किसी मजबूरीवश यह सब कुछ अपनी आँखों के सामने होता हुआ देखते रहे , लेकिन मैं जिसके आदर्श + प्रेरणा + गुरु – परम आदरणीय... इस बारे में क्या कहें इस मंच पर तो हम नए पौधे उग रहे हैं -हमें क्या अधिक समझ -सच को सच कहने के लिए ही तो हम इस क्षेत्र से जुड़े हैं -तो सच को उभारना तो हम सब का दायित्व बनता ही है - पुरस्कार और कंटेस्ट भी ऐसा ही है राज भाई कौन अपने को कम आंकता है -सब के लेख सुन्दर होते है -उसका मन तो यही कहता होगा है न ?? एक अनार सौ बीमार ... आशा है जे जे इन सभी मुद्दों पर गौर कर अच्छाइयों और सार्थकता को आगे रख -वही करता रहेगा जो उचित हो -ताकि हम सब का मन खिला रहे और जब हम खिले रहेंगे तो ये बगिया भी खिली रहेगी और खुश्बू सब के मन के मलाल को हटा के सुगंधी पुष्टि वर्धनम ---- धन्यवाद आप सब का भ्रमर ५

के द्वारा: shuklabhramar5

राजकमल जी में तो हर तरह के पक्षपात के खिलाफ हूँ पर व्यकिगत आक्षेप न तो अपने प्रति(रचनाओ) व्यव्हार पर लगाऊंगा न ही औरों को diye विशेषाधिकार पर कुछ कहूँगा क्योंकि असली सत्य जानना कठिन होता है हरेक केवल अपने द्रष्टिकोण से किसी भी चीज को देखता है | पर सिधान्त्तः जागरण के संपादक मंडल को रचना के मौलिक व प्रभावशाली होने के साथ दिल को संवेदना पैदा करने वाले तथ्यों का सही विश्लेषण व सम्मान करना चाहिए दूसरी और मैं ब्लॉग के सम्मानीय साथिओं पुरुषों महिलाओं से कहना चाहूँगा कोमेंट्स दोस्तों की दोस्ती निभाने के काम न आये बल्कि रचना पढ़कर दिल जब बास्तव में वाह वाह करे तब ही उस रचना की प्रशंशा , और ज्यादा अच्छा हो सकारात्मक आलोचना लिखी जाए . आलोचना करने वाला कही अधिक ध्यान से आपकी रचना पड़ता है व ज्यादा समय उसके दिमाग पर आप छाये रहते है | सभी तरह की आलोचनाये आमंत्रित करता हूँ www.jrajeev.jagranjunction.com

के द्वारा: RaJ

प्रिय संदीप जी ....नमस्कार ! पता नहीं कुछेक मित्रों ने मेरे बारे में यह भरम क्यों फैला रखा है की मैं मार्गदर्शक भी हो सकता हूँ ... :) अरे भाई मैं भी अभी सीख रहा हूँ और जिंदगी की आखरी घड़ी तक सीखता ही रहूँगा , वोह आपमें से किसी भी साथी से हो सकता है ..... वैसे जब मैंने लिखना शुरू किया था तब किसी भी नए ब्लागर की पोस्ट इतनी जल्दी -२ फीचर्ड नहीं होती थी .....मेरा पहली पोस्ट जो फीचर्ड हुई थी शायद इकावन्वी थी .... लेकिन आजकल एक से एक बढ़कर नए -२ ब्लागर नए -२ विचार +उम्दा सोच के साथ सामने आ रहे है जोकि अपने शुरूआती दिनों में ही न केवल फीचर्ड ब्लॉग श्रेणी में आसानी से अपनी काबलियत के दम पर शामिल हो जाते है बल्कि कई बार तो ब्लागर आफ दा वीक भी बन जाते है .... उन सभी को मेरी शुभकामनाये .... भेदभाव + पक्षपात +अन्याय को सहना मैंने सिखा नहीं बल्कि इसका विरोध करना ही सिखा है और आगे भी करता रहूँगा फिर चाहे वोह किसी के भी साथ क्यों न हो ..... आपके द्वारा दिए गए अतुलनीय सहयोग के लिए आपका हार्दिक शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय अश्वनी भाई .....आदाब +वंदे मातरम ! आप जैसे ओजस्वी लेखक +मित्र से सहायता और समर्थन पाकर वास्तव में ही मेरा उत्साह आसमान को छूने लगा है ...... मेरे भाई बात फीचर्ड की संख्या बढ़ाने की नहीं है बल्कि नियत में खोट की और पक्षपातपूर्ण तथा भेदभावपूर्ण बर्ताव की है ..... अगर पांच ब्लॉग भी रखे जाए लेकिन इमानदारी से ही पांच सही हकदारों को न्याय मिले तो भी किसी को शिकायत नहीं होगी .....हाँ इतना जरूर होगा की तब इनको अपना दिमाग तथा उर्जा ज्यादा खर्च करनी होगी पांच उत्तम ब्लॉग चुनने के लिए ..... लेकिन इनकी क्षमता का नमूना भी हम देख ही चुके है ....किसी प्रतियोगिता में शामिल हजारों पोस्ट में से पांच पोस्ट यह विद्वान और गुणी लोग महज पांच घंटो में ही छांट लेते है ..... जैसे की उनका चुनाव पहले से ही प्रयोजित हो .....सवाल तो और भी अनेको है , लेकिन इनका जवाब कौन देगा ? आपका हार्दिक शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय राजकमल जी, सादर अभिवादन !! मैं भी आपकी इस बात का दिल से समर्थन करता हूँ कि सम्मान एक अच्छी रचना को मिलना चाहिए न कि किसी बड़े नाम को | अगर किसी सम्माननीय रचना को फीचर्ड की श्रेणी में रखा जाता है तो आत्मिक खुशी की अनुभूति होती है | इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसका रचियता कौन है ? लेकिन जब कोई रचना इतनी उच्च श्रेणी की न होकर भी फीचर्ड हो जाती है तो थोड़ा दुख तो होता ही है | तब किसी अच्छे लेखक को अपनी काबिलियत पर भी शक होने लगता है |  लेकिन इसके साथ ही मैं ये भी जोड़ना चाहूँगा कि आप बेशक एक अव्वल दर्जे के लेखक एवं विचारक हैं | आप उन हस्तियों में से एक हैं जिन्हें हर नया लेखक अपने मार्ग-दर्शक के रूप में देखता है || :)

के द्वारा: संदीप कौशिक

प्रिय मलकीत सिंह जी ...... नमस्कार ! भाई मेरे मैं बिना किसी तथ्य और सबूत के जागरण सरकार के खिलाफ ऐसी बाते कैसे कह सकता हूँ ? आग ही आग है तभी हर तरफ धुंआ उठा है ..... आप की जानकारी के लिए बता दूँ की जिस महाशय का दो लाइन का चुटकुला अभी हफ्ते दस दिन पहले ही फीचर्ड हुआ था - उनका नाम hash है ..... वैसे वोह आपको उनके ब्लाग पर नहीं मिलेगा क्योंकि वोह उस दिन भी दिखाई नहीं दे रहा था ... जब मैंने कमेन्ट के लिए किल्क किया तथा तो page not found आ रहा था उनके ब्लॉग पर भी वोह पोस्ट दिखाई नहीं दे रही थी ,सिर्फ फीचर्ड में ही थी ...... यह उनकी पहली फीचर्ड पोस्ट थी इसलिए हो सकत है की उन्होंने कुछ छेड़छाड़ कर दी हो ..... और बाकि के ब्लागरो के नाम मैं जागरण को जब भी वोह चाहे बता सकता हूँ ..... वैसे उनको भी पता ही है की उन्होंने अतीत में क्या -२ किया है ..... आपके द्वारा मेरे हक में आवाज उठाने के लिए मैं आपका शुक्रिया अदा करता हूँ क्योंकि यह बहुत ही हिम्मत का काम है

के द्वारा: Rajkamal Sharma

AADRNIY मिश्रा जी ....सादर अभिवादन ! जब भी मैं कभी आप जैसी अवस्था और पद को पा जाऊंगा तो तब शायद मैं संतोषी ही नहीं बल्कि परम संतोषी बन जाऊँगा ...... आपने एक वकील होने के नाते (जोकि अन्याय के खिलाफ लड़ता है )+ मेरे मित्र होने के नाते मेरा साथ देकर जो समर्थन किया है उसके लिए मैं आपका हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ ..... वैसे इस बात को तो आप भी जानते ही होंगे की अन्याय को सहना उसको न केवल बढ़ावा देना होता है बल्कि उसको सहने वाले के साथ -२ उसको चुपचाप देखने वाला भी बराबर का दोषी होता है , और करने वाला तो हमेशा ही कटघरे में खड़ा ही रहेगा ...... हम सरकार से क्या अपना और समाज का हक मांगेंगे जबकि हम जागरण रूपी सरकार से अपना हक नहीं ले सकते है + इसको अपनी मनमर्जी करने देते है , क्या यहाँ पर पारदर्शिता + जवाबदेही तथा लोकतंत्र नहीं चाहिए क्या ? :) आभार सहित आपका परम मित्र

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय सुप्रियो भाई ...... सस्नेह नमस्कार ! आप का स्नेह पाकर मैं अभिभूत हूँ ..... सच में ही आकाश भाई ने मेरा उम्मीद से कहीं बढ़ कर मेरी हर मुहीम में मेरा साथ दिया है ..... कई बार मेरी बात के समर्थन में उन्होंने अपना ब्लॉग निकाला है ......और हमारी सम्मिलित आवाज के कारण हर बार जागरण को जवाब भी देना पड़ा है ..... और निडर तो मैं पहले ही दिन से हूँ , हाँ श्रनिक लाभ के लिए कुछेक देर के लिए तो मैं शायद चुप कर जाऊ लेकिन ज्यादा देर तक +हमेशा के लिए चुप रहना और सहना मेरे लिए नामुमकिन है ..... आपके इस नैतिक समर्थन के लिए मैं आपका दिल से आभार व्यक्त करता हूँ ....... ****************************************************************************************************************** अब आप मुझको अंकल कह कर मत बुलाया करे , क्योंकि मैंने अपने सफेद बाल रंगवा लिए है .... :)

के द्वारा: Rajkamal Sharma

राजू जी, नमस्कार, इस परम दुःख की घडी में मैं आपका (परम) मित्र आपके साथ हूँ. हालाँकि जागरण ने मेरी २-४ पंक्तियों वाली पोस्ट कभी फीचर नहीं की इसका मुझे अफ़सोस नहीं होता है क्योंकि जे जे ने फिर भी हमें बहुत कुछ दिया है. (में थोडा संतोषी जीव हूँ और मकान मालिक के अधिकारों में ज्यादा टांग नहीं अडाता ). लेकिन आपकी तरह मुझे भी लगता है की बहुत से कई अच्छे  लेख फीचर नहीं हो पाते हैं. इसके लिए मैं जे जे से अनुरोध करता हूँ की वे फीचर्ड लिस्ट में लेखों की संख्या १० से बढ़ा कर २० कर दें. थोडा साईज घटा बढ़ा देने पर यह बड़ी आसानी से हो जायेगा. इससे कुछ और अच्छे लेख पढ्ने को मिलेंगे और जे जे की लोकप्रियता भी बढ़ेगी. 

के द्वारा: K M Mishra

आदरणीय श्री राजकमल जी प्रणाम आज सुबह जैसे ही मैंने अपना कंप्यूटर अपने मैडम को मात्री दिवस की सुभकामनाये देने के लिए ऑन दिया आपका ये पोस्ट मुझे दिखाई दिया आप सच में बहुत ही सक्रिय और ध्यान रखने वाले है सचमुच ऐसा कुछ तो हो रहा है मई अपने बाबत तो नहीं कहुगा क्युकी मई एक नया ब्लोगर हूँ और मेरी आर्टिकल भी उतनी अच्छी नहीं होती सो मै जान नहीं पाता परन्तु आप जैसे महान रचनाकार की रचना जिसका की सबको बेसब्री से इन्तेजार रहता उनके साथ अगर ऐसा हो रहा है तो वो वाकई पक्ष पात पूर्ण है आपके साथ सायद पिछले बार भी ऐसी कोई घटना हो गयी थी (जैसा की आकाश भैया ने बताया था )और आपने तुरंत ही इसका बिरोध किया था आपको ऐसी निडर पहल के लिए धन्यवाद सुभकामना सहित सुप्रियो

के द्वारा: supriyo

प्रिय राहुल भाई ....नमस्कार ! अब यह तो जांच का विषय है की उन हरामी अफसरों के असली पिता कौन -२ है .... लेकिन इतना तो तय है की उनकी रगों में गन्दा खून तो है ही ..... अब आगे चल कर भविष्य में यह उनको और कितना गिराता है यह तो वक्त ही बताएगा .... लेकिन एक बात और भी साफ़ हो गई है की हम लोग बिलकुल निष्किय और सवेंदनशीलता विहीन हो गए है .... अपनी इंसानियत को खो चुके है और उससे भी बढ़कर अपने आसपास कुछ भी गलत होता हुआ देखकर कुछ भी न करने की आदत अपना ली है .... हमारा जागरूक मीडिया भी ऐसे मामलो में सोया रहता है .... सब के सब मिले हुए है , सभी बिकाऊ है ...... अब और कितना विष उगलूं , अपनी शुभ वाणी को विराम देते हुए आपका आभार प्रकट करता हूँ की आपने अपनी जुम्मेवारी समझते हुए इस विषय पर मेरी आवाज में अपनी आवाज मिलाना जरूरी समझा ... धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: Rajkamal Sharma

राजकमल भाई यह सरकारी अमलदारी है यहाँ जो न हो जाए वह कम है ,,अभी जो जांच बैठी है उसमे भी महिला हीं हैं और वही महिला सबको निर्दोष होने का प्रमाण दे देंगी ,,अब यह जांच आयोग आयोग वाली महिला ''आंटी'' जी हैं या कुछ और यह शोध का विषय है ,,वैसे भारत में आंटी टाईप महिलाएं ही ऐसे कृत्यों को बढ़ावा दे रही हैं ,,पुलिस ट्रेनिंग सेंटर सेक्स स्कैंडल में एक ट्रेनर को जहां गिरफ्तार किया गया है वहीं,अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या एक कांस्टेबल सेक्स स्कैंडल का किंगपिन हो सकता है?कोल्हापुर सेक्स स्कैंडल मामले में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में महिला कॉन्सटेबल्स के साथ बलात्कार की मेडिकल रिपोर्ट से छेड़छाड़ की कोशिश की गई है,युवतियों से बलात्कार की वारदात में कई आला अफसर भी शामिल हैं हिरासत में लिये गए प्रशिक्षक युवराज कांबले और उसका परिवार आला अधिकारियों पर संगीन आरोप लगा रहा है, प्रशिक्षक कांबले के मुताबिक सेक्स स्कैंडल के असल आरोपी ट्रेनिंग स्कूल के बड़े अधिकारी हैं, अधिकारी खुद को बचाने के लिए उसे बलि का बकरा बना रहे हैं, यही नहीं, अधिकारियों के डर से ज्यादातर पीड़ित लड़कियां सामने नहीं आ रही हैं,इस खुलासे से घबराई सरकार ने कई प्रशिक्षु युवतियों को छुट्टी पर भेज दिया है, तो कई को आनन-फानन में नागपुर स्थानांतरित कर दिया गया है, फिर रिपोर्ट खान से आयेगी सबको क्लीन चिट दे दी जायेगी ....जय भारत

के द्वारा: ashvinikumar

प्रिय भर्मर जी ....जय श्री राधे कृष्ण ! आपका स्नेह और समर्थन अभूतपूर्व है मेरे लिए .... भगवान ने जो आदमजात को पापी पेट दिया है सब उसी के बखेड़े खड़े किये हुए है ..... पेट भरने के लालच में उन बेचारियों के पेट ही बढ़ गए , घोर अनर्थ -घोर कलयुग .... और रही बात जागरण जंक्शन की तो वोह पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाता है ....अगर यही पोस्ट किसी और उनके चहेते ब्लागर ने लिखी होती तो पोस्ट होते ही विशेष दर्जा पा जाती ..... एक बार मैंने खुद अपनी आँखों से देखा है की उनके एक चेहते ब्लागर की पोस्ट आई और आने के पांच मिनट बाद ही वोह फीचर्ड की लिस्ट में थी .... जबकि मेरी पोस्ट उसी दिन पांच घंटे के बाद फीचर्ड हुई थी जोकि मैंने उनसे पांच घंटे पहले पोस्ट की थी .... जब से मैंने अलविदा जागरण जंक्शन ..... लेख लिखा था + तथा इनामों के वितरण पर जागरण की आलोचनात्मक सुझाव दिए थे तब से मेरा एक भी लेख फीचर्ड नहीं हुआ है .....इनको भी खुशामद करने वाले ब्लागर चाहिए यहाँ पर .... कभी -२ तो मन बहुत ही दुखी हो जाता है , मुझे यही पता नहीं की मैं यहाँ पर अभी तक क्यों हूँ ? :) धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma

वाह री आधुनिक नारी ! धिक्कार है तुझ पर , तुने माडर्न जमाने की होकर भी , मध्ययुगीन महिलायों जैसा असुरक्षा वाला आचरण किया है तथा घोर लापरवाही बरती है …. प्रिय भ्राता राज+कमल जी बहुत ही सार्थक और बेबाक लेख आप का हम तो भौंचक्के हैं परमवीर की सिफारिश करने की जगह इनके हर नाम के आगे एक एक जूता चप्पल उसकी माला लगानी चाहिए थी इन्हें खुद अपना चेहरा किसी गन्दी नाली में जा कर देखना चाहिए जो की इनके चेहरे से कहीं ज्यादा साफ़ सुथरा दिखेगा मथुरा के कंस वाले मेरे लेख में आप ने ठीक ही इन माडर्न नारियों को मादा कंस लिखा था ये हैं हमारी सुरक्षा की ट्रेनिंग लेने वाली और कंधे से कंधे मिला पुरुषों को गाली देने वाली नारियां हो सकता है सब भूखी रही हो और पेट भरने के लिए दो रोटी की लालच में अपना सब कुछ ... ऐसे ही कितने प्यारे फूल यहाँ वहां बंजर में आप को खिले मिल जायेंगे भ्राता श्री -कली कब फूल बन जाती है माली को सींचने वाले को पता तक नहीं होता जो जी जान से इस वाटिका की रखवाली मर मर के करता रहता है अफ़सोस -शर्म ----- हम जागरण जंक्सन से चाहेंगे इस पोस्ट को विशेष दर्जा दे कुछ दिन सब का चेहरा दिखाएँ .....नारियां भी कृपया आ के पढ़ें भ्रमर ५

के द्वारा: surendrashuklabhramar5

प्रिय शुक्ला भ्रमर जी ...जय श्री राधे कृष्ण ! अप ने लालू जी की हेमामालिनी के गालो जैसी चिकनी सड़के बनानी वाले ब्यान के बारे में कहा है .. उस बात का उल्लेख मैंने अपने एक पुराने लेख "लिफ्ट का लोचा" में भी किया था ..... आप की दूसरी मिसालो का अगर कभी भविष्य में उपयोग कर सकने के काबिल हुआ तो जरूर करूँगा .... और आप एक बात तो जानते ही है की जब भी हम किसी बहुत बड़े डिपार्टमैंटल स्टोर की बात करते है तो यह अक्सर कहा जाता है की वहां पर तो सुई से लेकर हवाई जहाज तक मिलता है ..... और अगर कार से उपर किसी चीज की बात करे तो हैलीकाप्टर से कम तो वोह नहीं होनी चाहिए .... बाकि आप की मर्ज़ी , आप जो भी तजवीज करे उस पर गंभीरतापूर्वक विचार करके उस प्रस्ताव को रूस की सरकार को भेज दिया जाएगा ..... आपने सन्देश भी ढूंड लिया उसके लिए आपका आभारी हूँ

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय अश्वनी भाई .....जय भारत ! आपने उचित प्रश्न उठाये है ..... भारतीय हर मामले में तेज होते है ,सभी चीजों में नम्बर वन ....फिर चाहे वोह धर्म +आबादी + भ्रष्टाचार ही क्यों न हो ..... असल मकसद टी देश की आबादी बढ़ाने का है , इससे कोई मतलब नहीं की कोई कब आया ,बस इस दुनिया में आना चाहिए .....अधिक क्षमतावान दम्पतियों को घोषित इनाम के इलावा भी कुछ विशेष मिलना चाहिए , और अब तो राष्ट्रपति ने दूसरे और तीसरे बच्चे के लिए भी इनाम की घोषणा क्र दी है ...... हमारी भी क्या जिंदगी है , कितना अच्छा होता की भगवान हमे भी रूस में पैदा करता ....जहाँ पर बच्चे पैदा करने के भी पैसे मिलते है ..... खैर खुदा अगले किसी जन्म में तो सुनेगा ही इसी आशा के साथ यह जीवन काट लेंगे .... आपका आभारी

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रियांका जी ..... नमस्कार ! आप इस लिए इस पोस्ट पर टिप्पणी कर पाई क्योंकि आपकी सोच बाकि की महिला ब्लागरो से उन्नत और अलग है ....आपकी ही तरह एक और आदरणीय महिला ब्लोगर है जोकि काफी दिने से इस मंच पर नजर नहीं आ रही है .... उनका नाम अभी मुझको याद नहीं आ रहा हूँ , अपने ब्लाग का अतीत खोज कर अगली बार उनका नाम आपको बताऊंगा ....... सबसे पहले तो मैं आप सभी विद्वान ब्लागरो का तहेदिल से आभार प्रकट करता हूँ की आपने मुझ पर अपना भरौसा दिखाते हुए मेरी इस सिरे से ही अधूरी पोस्ट को इतना मान दिया .... मैंने इससे पहले एक पोस्ट दहेज प्रथा पर लिखी थी , लेकिन नैतिकता के तकाजे ने , महिलाओं की तो बात ही छोड़ दीजिए कई पुरुषों के जमीर ने भी उनको मेरी उस पोस्ट से किनारा करने पर मजबूर क्र दिया ..... मैंने सोचा की आदरणीय निशा जी समाज सेविका है , उनसे मजाकिया अनुरोध किया तो वोह टिप्पणी करने की बजाय बोली की मैं उनके शहर में आकर उनके घर में देख् लूँ की उन्होंने बिना दहेज के अपने बेटो की शादी की है , लेकिन टिप्पणी करने की हिम्मत वोह फिर भी नहीं कर पाई .....मेरे उस लेख का लिंक है :- http://rajkamal.jagranjunction.com/wp-admin/post.php?action=edit&post=911 "इस होली को जलाओ उस होली को बुझाओ" मेरी अगली [पोस्ट } आने वाली फिल्मे है :- बीमे का फंडा + यह कैसी ट्रेनिंग ? +एक बोध कथा + पूर्वज बनाम पितृ + बिड़ला के गुरु उम्मीद है की मेरी यह आगामी फिल्मे आप न केवल देखेंगी बल्कि उनकी समीक्षा भी करेंगी .... आपका बहुत -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

वाह भाई वाह मेरे दुनिया के चिन्तक क्या आइडिया है लालू जापान को बिहार बनाने वाली बात जब भी सुनो हंसी आ ही जाती है एक बार तो बिहार की सड़कों को किसी हिरोइन के गाल बनाने की बात कहे तो गंगा के पानी को मिनरल वाटर बना एक्सपोर्ट करने को -हद तो तब हो गयी थी जब एक विदेशी डिलिगेसन को सत्तू परसवा दिए और कांटा छुरी प्रदान कर दिए वो आप के इस आह्वान को शीघ्रता से लागू करने में मदद करेंगे वैसे भी वियतनाम सी स्थिति में आये रूस को सहायता दी भी जानी चाहिए हमें वहां से रक्षा सामग्री लिए बिना चैन कहाँ कल कारखाने धकाधक चलवा दीजिये जल्दी से - हमारे सज्जन तो इतने दानी है बिना लालच के -बिना टी वी और कार दिए पकड़ पकड़ खोज खोज दान दे देते हैं एक बात से आप के हम सहमत नहीं की परिवार नियोजन के लिए हेलीकाप्टर देना होगा -शायद आप भूल गए इमरजेंसी का दौर -किसान और कुंवारे -बीच वाले लोगों को भी पकड़ पकड़ - हमारे लोग सब में आगे है ज़माने से बैलों से खेती किये सारा आइडिया है आप की चुहलबाजी और आप का सन्देश अच्छा रहा - मुबारक हो

के द्वारा: surendrashuklabhramar5

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय वाहिद भाई ....आदाब ! ऐसा लगता है की सारा बोझ आप मुझ गरीब और कमजोर के कंधो पर ही डालेंगे .... कम से कम आप तो कोई सुझाव दे देते जिससे मैं इस लेख में कुछ सुधार करके इसको कुछ रोचक बना पाता ..... और मैं आज ही आपके लिए दुआ करता हूँ , आप भी दुआ करना की मेरी दुआ कबूल हो जाए .... उपर जो वर्तमान का उदाहरण जिसमे की सभी के नाम एक जैसे ही सभी के गाँव में , तो जब उनको इस व्यवस्था से कोई परेशानी नहीं तो फिर मेरी कल्पना वाली दुनिया में भी किसी को कोई परेशानी नहीं होगी .....बल्कि आज के दौर की बहुत सी समस्याए स्वत ही खत्म हो जायेंगी ..... ************************************************************************************************************ वैसे अब आपकी शिकायत को दूर करते हुए इस खाली सफे को काला कर दिया है ..... वैसे मैं माफ़ी चाहता हूँ की मेरी भूल से आपको असुविधा हुई .... आपका बहुत -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय सचिन भाई ..... नमस्कार ! शायद मैं भी रोमिंग एरिया में चला गया था आप ही की तरह .... इसलिए सोचा की सिर्फ शीर्षक देकर ही कम खर्चे में काम चला लेता हूँ ..... अपने इलाके में वापिस आकर पूरा लेख पोस्ट कर दूँगा .... वैसे अब आपकी शिकायत दूर हो गई होगी क्योंकि इस खाली बोतल में मदिरा भर दी गई है जोकि यकीनन आपको कुछ न क्चुह सरूर जरूर देगी .... वैसे मैंने इसमें आपकी पसंद का भी ध्यान रखा है , एक बार आपने चातक जी के किसी लेख पर इस बारे में कुछ कहा था , बस तभी से मेरे दिमाग में वोह बात घूम रही थी , और उपर से सोने पर सुहागा की इससे मिलती जुलती एक खबर ने भी इस लेख को लिखने का बहाना बना दिया ...... वैसे यह लेख मैंने बहुत पहले लिख लिया था , लेकिन वोह सेव नहीं करने के कारण इसको दुबारा यादाश्त से लिखा , लेकिन पहले वाली बात फिर नहीं बन पाई ..... आपके इस स्नेह के लिए आपका हार्दिक शुक्रिया वैसे मैं माफ़ी चाहता हूँ की मेरी भूल से आपको असुविधा हुई .... आपका बहुत -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: surendrashuklabhramar5

राजू भाई नमस्कार, आपने तो यह लेख हम लोगों के आनंद के लिए लिखा पर मेरे साथ तो यह कुछ अंशों में हकीकत है. मुझे टेलीफ़ोन पर अधिकतर महिलाओं की आवाज एक सी सुनाई पड़ती है. कुछ महिलाओं को छोड़ कर जैसे उसमे  मेरी पूज्य माता जी और  मुश्किल से एकमात्र  पूज्य धर्मपत्नी की आवाज और कुछ दो-चार महिलाओं की आवाज और होगी जो रिश्ते में मौसी,चाची वगैरह है अन्यथा मुझे टेलीफ़ोन पर सभी महिलाओं की आवाज एक सी लगती है. इस लिए मैं फोन उठाते ही पहले अपना नाम बता देता हूँ ताकि कम से कम वो किसी धोखे में न रहे. बहतु बार अपनी इस कमी के कारण मुझे शर्मिंदा होना पडा है, लोग सोचते है की बड़ा अपने आप को ऊंची चीज समझता है पर यहाँ तो अपने कान ही धोखा दे देते हैं. वैसे भगवान का शुक्र है की मुझे महिलाओं के फोन ही कम आते हैं.

के द्वारा: kmmishra

आदरणीय मिश्रा जी ....सादर अभिवादन ! अगर इमानदारी से कहूँ तो आपकी यह प्रतिकिर्या सुबह ही देख ली थी .....आपसे तारीफ पाकर असल में दिन तो मेरा अच्छा गुजरा .... आपका हरेक दिन ही अच्छा गुजरे यही कामना है मेरी ..... ***************************************************************************************************** 'परलोक' में हमारी जल्द ही 'इस भू लोक, में मिलने की बात हुई थी .....जब आप नहीं आये तो मैंने अपनी तीसरी आँख से ध्यान लगा कर देखा तो पाया की आप एक अधनंगे बच्चे के पीछे -२ अपना कैमरे वाला मोबाइल लेकर भाग रहे है ..... शुक्र है की अब आप को फुर्सत मिल तो गई , इसके लिए मैं आपका तहेदिल से आभारी है ..... अब जब आपने इतनी सारी फोटो खींच ली है तो अगली किसी पोस्ट में फिर से "कुछ मीठा हो जाए" आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय सचिन भाई ....नमस्कार ! यहाँ पर इस लेख में मैं मजाक करने के मकसद से अपना बखान कुछ ज्यादा ही कर गया हूँ ,इस धोखे के लिए माफ़ी चाहता हूँ .... उस समय सारी मेहनत अदिति जी ने ही की थी ,हम लोग तो बस उनका सिर्फ साथ ही दे रहे थे .....लेकिन इस बात को मैंने अपने एक पुराने लेख \"दरोगा बाबू ! आई लव यू\" में इमानदारी से स्वीकार किया था .... यहाँ पर आपकी गैरहाजरी में जितने भी युद्ध लड़े गए उनके सभी साथियो का भरपूर सहयोग मिला , फिर चाहे वोह किन्ही निम् पागल ब्लागरो द्वारा सारी -२ रात जाग कर सैंकड़ो रचनाये पोस्ट करके हमे जानबूझ कर हाशिए पर धकेलना हो ..... अब तो आप भी आ गए है तो यकीनन अब ऐसी या फिर वैसी कोई भी किसी भी किस्म की घटना घटने की नोबत ही नहीं आएगी और अगर रब्ब न करे कुछ होता है तो हम सभी मिल जुल कर उससे निपट लेंगे .... आपका बहुत -२ आभार http://india321.jagranjunction.com/

के द्वारा: Rajkamal Sharma

नमस्कार राजकमल भाई, सबसे पहले तो आपकी प्रशंशा करूँगा की आपने एक और अपहृत ( कविता ) को नामुराद अपहरणकर्ता के चंगुल से छुड़ाया, और हमें इतना मजेदार लेख भी पढने को दिया ! *अदिति जी की रचना को जोनपुर वाले मुकेश के कब्ज़े से छुड़वाना ( मुद्दई चुस्त और गवाह भी चुस्त ) *सचिन भाई की रचना को उसी चोर मुकेश से छुड़वाना ( मुद्दई सुप्त और गवाह चुस्त ) ये पंक्तियाँ पढ़ - पढ़कर मुझे न चाहते हुए भी हंसी आ रही है, क्योंकि ये कितनी सटीक और सही हैं ये मैं अच्छी तरह समझता हूँ, मुझे आज भी याद है जब मेरी और अदितिजी की रचनाओं का अपहरण हुआ था, तब मेरी बदकिस्मती से मुझे 2 दिन बाद पता चला था, और आप सब लोगों ने किस प्रकार से मोर्चा बंदी करके उस अपहरण कर्ता की बैंड बजाई थी, ये मुझे अदिति जी के पोस्ट के कमेन्ट से पता चला था ! वैसे भाई मैंने उसके तुरंत बाद " ब्रेकिंग न्यूज़ ...... " नाम से एक व्यंग लिखा था और उसमे अपनी लापरवाही मान ली थी, किन्तु आज आपकी मुद्दई सुप्त और गवाह चुस्त पढ़कर अपनी लापरवाही पर मुझे बहुत हंसी आ रही है ! और भाई उस युद्ध के सेनानायक को मेरा बहुत - बहुत धन्यबाद एक बार फिर से !

के द्वारा: allrounder

भ्राता श्री, एक यथोचित विषय उठाया है आपने यहाँ| जागरण जंक्शन से आज लाखों की संख्या में ब्लॉगर जुड़े हुए हैं| रोज़ यहाँ सैकड़ों रचनाएँ प्रकाशित होती हैं| इन सब के बीच कुछेक लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों के सुखन की नक़ल उतार कर  वाहवाही लूटने की फ़िराक़ में रहते हैं| भला हो आपकी तेज़ नज़रों का जो आपने उसे पकड़ लिया| आश्चर्य का विषय यह है कि इस प्रतिष्ठित मंच पर ऐसी घटनाएँ घटती हैं और क़ुसूरवार सज़ा पाए बिना बच निकलते हैं| इतना ही नहीं उन्हें फ़ीचर्ड लिस्ट में सम्मानित स्थान भी प्राप्त होता है|  अपनी व्यस्तता के कारण मैंने इस लेख को देख कर भी अनदेखा कर दिया था पर आपके तीक्ष्ण दृष्टिपात से वह अपराधी बच नहीं सका और वायरलेस पर ये खबर मिलते ही मैंने तुरंत ही मौक़ाए वारदात का रुख कर लिया और प्राप्त सूचना को सही पाया। इसके बाद कोई सवाल ही नहीं रहा उसकी खैर-खबर न लेने का|  ऐसे दोषियों को दण्ड अवश्य मिलना चाहिए। आभार सहित,

के द्वारा: वाहिद काशीवासी

राजकमल भाई, भाई के रहते बहन को चिंता करने की जरूरत ही नहीं है ऊपर से वो भाई थानेदार (जागरूक) हो तो सोने पे सुहागा | इन दिनों कुछ निजी कारणवश मंच से अनुपस्थित चल रही थी अब ऐसे में चोर पीछे से वार करके हमको हवा भी न लगने दे तो क्या किया जाये | मगर आप की जागरूकता के चलते वो पोस्ट गधे के सींग की तरह गायब हो गयी, आप ने और वाहिद जी सर्फ ऐक्स्सेल से उस दाग का ऐसा सफाया किया कि मैं उस ब्लॉग में अपनी पोस्ट ढुन्ढती रह गयी उसका कोई नामोनिशान तक नहीं मिला | इससे इतना तो पता चल गया कि आप ने और वाहिद जी ने उसकी अच्छी खबर ली होगी | आप का और वाहिद जी का तहे दिल से शुक्रिया वैसे मुझे लगता है मुझे शुक्रिया शब्द का इस वक्त इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्यूँ कि आप ने जो किया है उसके आगे............ :)

के द्वारा: div81

प्रिय जैक भाई ....आदाब ! एक अरसे बाद आपसे मिल कर हार्दिक खुशी हुई ..... दरअसल जब से हमारे बीच का सेतु टूटा है (मेरी मरहूम बीवी ) , हमारा मिलना जुलना बहुत ही कम हो पाता है .... आप से गुजारिश है कि मेरा किसी और जगह पर टांका भिडवा ही दीजिए किसी को भेज करके ..... शायद उसी कारण हमारा मिलना जुलना पहले कि भांति फिर से हो पाए ..... और रही बात इन बाबाओ के बारे में लिखने कि तो भाई मेरे मेरे तो खुद के हालात पहले से बहुत नाज़ुक है , अगर कुछ ऐसा वैसा लिख कर कोई बददुआ या फिर किस्मत कि मार झेलनी पड़ी तो फिर मेरे लिए सहना बहुत ही मुश्किल होगा ...... अगर इजाजत मिल गई तो शायद कुछ लिखने कि जुर्रत कर पाऊं ..... आपके सद्भावनापूर्वक व्यक्त विचारों का मैं स्वागत करते हुए आपका हार्दिक आभार करता हूँ

के द्वारा: rajkamal

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय सचिन भाई ....नमस्कार ! आपने इस लेख में मैं एक अमेरिकी उपग्रह स्काईलैब का भी जिक्र करने वाला था , जिसके बारे में पता ही नही था की वोह आउट आफ कंट्रोल हुआ कहाँ पर गिरेगा .... सारी दुनिया के लोग उस समय सहमे से थे , सभी को अपनी मौत सामने दिखाई दे रही थी , तथा ज्यादातर तो यहाँ तक कहने लग गए थे की जितना भी खाना पीना है कहा पी लो कल का क्या भरौसा की स्काईलैब कब हमारे सर पर आकर गिर जाए .... वही पुरानी सुनी हुई याद थी जिसके कारण यह लेख लिखा गया .... ************************************************************************ आपका दिया हुआ प्यार हमेशा ही सर आँखों पर .... काश की लोग प्यार के महत्व को समझ पाते तो शायद इस दुनिया को खुद के लिए और दूसरों के लिए न जाने कितनी हसीन बना पाते .... आपका हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय चातक जी ....सादर अभिवादन ! कभी वोह भी समय भी था की मेरे लेखो पर सिर्फ आपकी और निखिल जी व् अदिति जी की ही टिप्पणियाँ ही होती थी ..... आपकी टिप्पणी मेरे लिए एक संजीवनी का काम करती थी , जिसका की बड़ी ही शिद्दत से मुझको हमेशा ही इंतज़ार रहता था .... मुझको अपना वोह पुराना वक्त याद है इसलिए आप मेरे लिए हमेशा ही विशेष रहेंगे .... आपने आने वाली नस्ल के लिए कुछेक निशानात छोड़ जाने की बात कही है , अगर उपर वाले की मर्जी में शामिल हुआ और अगर उसने हमे इस काबिल समझा तो वोह हमसे जरूर कोई न कोई काम जरूर ले ही लेगा , ऐसा मेरा मानना है क्योंकि अवसर तो उसी की किरपा से ही मिलते है .... हमेशा की ही तरह आपकी कुछेक हटकर दी गई टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: Saleem Khan

के द्वारा: जुबली कुमार

प्रिय राज भाई कमल से खिले गुदगुदाते रहो -अपना प्यारा ये तीर- ख़ुशी ख़ुशी दिल में चुभाते रहो -कन्याओं को बूढों की याद बुड्ढा मर गया राखी का स्वयम्वर दिखाते रहो-नारियों को उनका मन भाया-और बीमे की राशि दिखाते रहो -पंडित पुजारी की दुनिया की बातें की दुनिया साल दो साल में दस बार ख़तम हुयी बताते रहो -और क्या कितना नवाजूं आप के गुण -पहले हम चीन और ब्रिटेन की लड़कियों के बारे में मुह खोलते थे आठवी दसवीं की अच्छा हुआ आप हमारे यहाँ का सर्वे भी दिखाए हम माँ बाप को कुछ तो चेताये -लेकिन ये धार्मिक आजादी यहाँ भी अपने बुलंदियों पर छाये ये मत लिखियेगा मत ये दुआ देना - प्यारा लेख -एक बार फिर सब को हंसाये -और कडवी दवा पिला गए -धन्यवाद आप का भ्रमर ५ -प्यार दो दो --

के द्वारा: surendrashuklabhramar5

Aआदरणीयवाजपाई जी .....प्रणाम + जय श्री राधे कृष्ण ! आपने अपना अनुभव सांझा करके हम सभी पर बहुत बड़ा उपकार किया है , जिसके लिए मैं और बाकी के पढ़ने वाले आपके हार्दिक आभारी है ..... सच में ही हमारी निजी रोजमर्रा कि जिंदगी में अनेको हास्य के पल बिखरे पड़े रहते है अनछुए से ... जिनको कि हम अपनी परेशानियों में घिरे रह कर देखते हुए भी ध्यान नहीं दे पाते ..... आपने सही बताया है कि जिस प्रकार औलाद कितनी भी बड़ी ही क्यों ना हो जाए अपने मां बाप के लिए हमेशा बच्चे ही रहते है ....(और इश्वर के लिए भी ) आपका तहेदिल से शुक्रिया और आभार (ऐसा लगता है कि आपकी किसी नयी रचना के लिए भगवान जी से कह कर फागुन को फिर से बुलाना पड़ेगा)

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: Ramesh Bajpai

प्रिय शुक्ला भ्रमर जी ... जय श्री राधे कृष्ण ! इस मंच के नीरस माहौल को खुशगवार बनाना ही मेरा मकसद रहता आया है हमेशा ही शुरू से .... आपका मनोरंजन हुआ जान कर दिल को सकूं मिला .... और रही बात आदरणीय निशा जी की तो मैं नही समझता की उनको उस बारे में कुछ समझाया जा सकता है , वोह बहुत ही विदुषी है हद दर्जे की समझदार .... लेकिन फिर भी मैं इस विषय पर अपना एक ब्लाग लिखूंगा उसमे मेरी बात स्पष्ट हो जायेगी ... आपने मेरी उस बात का न केवल ध्यान रखा बल्कि हमारे बीच की गलतफहमी को दूर करने में अपना नेक योगदान भी दिया उसके लिए मैं खुद की तरफ से और आदरणीय निशा जी की तरफ से भी आपका आभार व्यक्त करता हूँ .... जय श्री राधे कृष्ण

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय अलका जी .....सादर अभिवादन ! आपने उदार द्रष्टिकोण अपनाते हुए मेरे इस प्रयास में अच्छाई देखने की कोशिश की है ..... अगर आपसे असल में सच्चाई बयान करूं तो इसका असली मकसद यही है की मेरे ब्लागर साथी मेरी हरकतों को भी मेरे भाई की समझ कर धोखा खा जाए , और मैं पाक साफ़ बना रह सकूं .... आपने बहुत ही मजेदार बात सांझा की है की वाकई में बचपन की बातो को यद् करके मन एक अजब और गजब से सुखद एहसास से भर जाया करता है ..... जब दो बिछड़े हुए दोस्त या फिर सहेलियां मिलती है तो अपनी कितनी ही ओउरानी यादों को याद करते हुए गुजरे दिनों को याद किया जाता है , अतीत के पन्ने पलटते हुए उन सुखद एहसासों को फिर से यादों में किसी हद तक फिर से जीने का एक प्रयास किया जाता है ..... इस बहुमूल्य प्रतिकिर्या के लिए आपका तहेदिल से आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

हाँ बिट्टू भाई आप का सारा राज -राज रखा जायेगा और न ही हम उन तरुण और पूनम को पकड़ आप से रूबरू कराएँगे जब तक की आप अगले जनम में हमसे फिर न मिल जायेंगे ये हास्य व्यंग भरा चुटीला अंदाज गजब का बन पड़ा मजा आ गया मानना पड़ेगा आप के फौलादी जिगर को बड़ी हिम्मत बख्श दी है उस ओये बाबे ने जिससे जब आप की लेखनी चल पड़ती है तो थमने का नाम नहीं लेती -आप के अठन्नी चवन्नी ने बचपन के उस दौर को हम सब को भी याद करा दिया शुक्रिया जनाब मस्त मौला जियो जी भर के उन मनहूसों को क्या मालूम था की यही वोह दीदावर है जिसके लिए ही नर्गिस हजारों साल अपनी बेनूरी पर रोती थी ….ये वाक्य बड़ा प्यारा लगा -आप का शिवाम्बु मोरारजी देशाई का कथन अब कहाँ भूलने वाला है - हैप्पी बर्थ डे टू यु बिट्टू ---

के द्वारा: surendrashuklabhramar5

प्रिय शुक्ला जी ...नमस्कार + जय श्री राधे कृष्ण ! पता नहीं क्यों मैं खुद तो यह चाहता हूँ की हर कोई मेरी तारीफ करके मेरा हौंसला बढ़ाए लेकिन जब मैं किसी दूसरे की तारीफ करने की कोशिश करता हूँ तो मुझ को ऐसा महसूस होता है की कहीं मैं खुश करने वाली लाइन पर तो नहीं चल रहा .... मैंने आजतक अपने बॉस को नमस्ते + हैपी न्यू इयर + किसी भी त्यौहार की शुभकामनायें नहीं दी है इसी कारण से .... इस मंच पर सभी तो तारीफ करने वाले ही है , क्या हुआ अगर कोई एक मेरे जैसा सिरफिरा कभी कभार कुछ कह देता है दिल्लगी से , बस बाकि लोगो की तरह आप भी इस निन्दक को अपने नियरे राखिये , मैं कोई कुतिया नहीं मांगता बस थोड़ा सा प्यार ही तो मांगता हूँ बदले में .... धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma

इसलिए मेरे लिए मेरी टिप्पणी ही एक ऐसा माध्यम है जोकि लेख + लेखक और पाठक के त्रिकोण में एक अदभुत सम्बन्ध बनाती है- उसके लेख में कमियों को दबंगता से दिखाएँ- बताने का जिगर रखें - कमल भाई कमाल के टिप्स -बहुत सुन्दर कहा आप ने - आप लोगों को बदलें न शुरुआत करें हम माला फूल ले उन्हें आगे ले जाने के लिए खड़े हैं लेकिन मानव स्वभाव और मनोविज्ञान नहीं पढ़ा आप ने ?? हमें हमारे बारे में बोलने वाले पसंद नहीं आते वही हमे भाता है जो हमें प्यारा लगे -अगर दो दिन हम आप के और आप हमारे बीच कुछ उल्टा पुल्टा समीक्षा करते रहे तो कैसा लगे ? यहीं किसी लेखक ने कहा था टिपण्णी देने वाले को की आप इतना छिद्रान्वेषण क्यों कर रहे हैं पहले बताएं आप किसके साथ हैं -अपना बेटा अपनी इज्जत क्या प्यारी नहीं होती ?? सार्थक लेख आप का मेरी चुहल बाजी पर बड़ा लेख मत लिखियेगा ...पहले तो मच्छरों और खटमलों से पानी खौला दाल निपटना जो है ..

के द्वारा: surendrashuklabhramar5

प्रिय सचिन भाई ....नमस्कार ! आपने बिलकुल ठीक कहा है की कई बार हम लोगों को कोई लेख लिख कर दबा कर रखना पड़ जाता है .... कभी -२ हिम्मत ही नहीं पड़ती तो कभी इसी बात का अंदाज़ा नहीं लग पाता की इसको पोस्ट करने का सही समय क्या होना चाहिए .... हर कोई अपना अनुभव रखता है तथा हरेक की सीखने की अपनी क्षमता होती है ..... एक बंधी बंधाई लीक पर चल कर कभी भी सभी को एक समान फायदा नहीं हो सकता है ..... वैसे इसको लिखने में शायद मेरा स्वार्थ भी है , अब शायद दूसरे साथी मुझको थोड़ा ज्यादा सकारात्मक रूप में लेंगे ..... लेकिन एक बात का रिस्क भी वयंग्य में हमेशा ही रहता है की आपको कभी भी यह अंदाजा नहीं लग पाता की कौन सी लाइन पाठक को हंसाएगी + रुलाएगी + गुदगुदाएगी ...... इसका उधाहरण है आपकी वोह लाइन "अनीता पाल का भागते हुए कहना की सभी मर्द एक से होते है" यह लाइन मुझको आज भी याद आने पर अक्सर ही गुदगुदा जाती है ..... धन्यवाद व् आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय दीपक जी ....नमस्कार ! आज से करीब एक महीना पहले बच्चों के नामों कि पूरी नामावली , यहाँ तक कि जुड़वाँ बच्चों के नाम भी दैनिक भास्कर में विस्तार से बताए गए थे ..... अब मुझसे वोह पन्ने शायद खो गए है , वरना उनको पोस्ट करने से न जाने कितने साथियो का भला होता ..... और आप कि आँखों के लिए एक मेरा आजमाया हुआ कारगर तरीका है आप डाबर का या फिर कोई भी ठंडा तेल अंगुलियो के पोरों से आँखों कि पुतलिया के आस पास जानबूझ कुछ इस अंदाज़ से लगाए कि तेल कि कुछ मात्रा आँखों में चली जाए .... या फिर नियो हर्ब्स फार्मा का लाईट आई ड्राप्स इस्तेमाल करे ...... निश्चित रूप से आपको जरूर फायदा होगा ..... लेख कि सराहना करने के लिए आपका हार्दिक शुक्रिया

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय सचिन भाई ..... नमस्कार ! आपने जो -२ बाते बताई है वोह सभी मज़ेदार है तथा पुरानी यादों को ताज़ा कर गई है .... काश आज अदिति जी यहाँ पर होती तो फिर से हमको बाउंसर और उनके जवाब देखने को मिलते .... और प्रिया जी को मैंने भी जल्दबाजी में एक बार ऐसे ही लिख दिया था तो बाद में सिथति सपष्ट करनी पड़ी थी खेद सहित ..... और जहाँ तक आपके नाम को गलत लिखने का मामला है तो वोह मेरी नजर में आ तो गया था , पहले सोचा कि सपष्टीकरण दे दूँ फिर सोचा कि काहे को एक टिप्पणी बढ़ानी है , आज आपसे उस बात के लिए क्षमा मांगता हूँ ..... मैं जागरण जंक्शन कि सुविधा का लाभ नहीं उठाता हूँ बल्कि जागरण के आदरणीय हरेन्द्र चोधरी जी के लेख कम्प्यूटर पर हिंदी में कैसे लिखे ( जिसको मैंने तिन बार पोस्ट किया है ) पर अमल करते हुए लिखता हूँ ..... आपकी बधाई के लिए आपका दिल से आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रियांका जी .... नमस्कार ! आपने बहुत ही मजेदार बात बताई है , मैं भी आपकी मज़ेदार बात बताना चाहता हूँ ..... मेरे छोटे भाई से हमारे मास्टर जी ने पूछा तो उसने खुद को मेरे चाचा जी का लड़का बताया और पिता जी का नाम पूछा तो कुछ और ही बता दिया था .... मेरी माँ सभी को मेरी शराफत कि मिसाले दिया करती थी , लेकिन एक बार गलती से मेरे मुहं से बहुत ही अभद्र बात निकल गई थी ..... तो मेरा वोह 'भाई' काफी देर तक मुझको उसी बात पर ब्लैकमेल करता रहा ....जब मैं तंग आ गया तो यह सोच कर कि इसने कौन सा बताना है , उससे कह दिया कि जाओ जाकर बता दो मैं नहीं डरता .....उस कमबख्त ने हमारे माता पिता के सामने अक्षरश वोही बात दुहरा दी ...मैं चाहे शर्मिंदा हुआ लेकिन ब्लैकमेलिंग से पिंड छूट गया .... मेरे इस लेख में एक और बात का जिक्र था लेकिन क्योंकि लेख पहले ही कुछ ज्यादा बड़ा हो गया है तो उसको निकाल दिया था .... लेख को पसंद करने और अपना अदभुत अनुभव साँझा करने के लिए आपका आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

अधिकतर लोग कहते है की नाम में क्या रखा है .............पर मुझे ऐसा कभी नहीं लगा ............नाम तो हमारी पहचान होती है ............आजकल तो लोग अपने बछो के अनोखे नाम रखने के चक्कर में कुछ अजीब सा ही नाम रख देते है की समझ न आने पर पूछना ही पड़ता है की मतलब क्या है इस नाम का .............. मेरी बहन जब छोटी थी तब वो हर किसी को अपना नाम अलग अलग बताती थी ...........इसका पता हमें तब चला जब एक अंकल ने पापा से पुछा की सदाबहार कहाँ है तो पापा ने कहा की कौन सदाबहार .....तो उन्होंने कहा की आपकी छोटी बच्ची तो पापा ने कहा की उसका नाम तो प्रसून है तो उन्होंने कहा की कल मैंने उससे जब उसका नाम पुछा तो उसने तो यही नाम बताया था ...........असल में हम उसे फूलो के नाम याद करवा रहे थे और वो पूरी कालोनी में हर फूल के नाम को अपना नाम बता रही थी ................ आज भी याद आने पर हम उसे इसी नाम से चिढाते है................... आपने लेख में ढेर सारे विषयों को समेटा है ....कुछ सामाजिक कुछ व्यक्तिगत ......पठनीय लेख ......

के द्वारा: priyasingh

priy shuklaa ji .....नमस्कार ! आप ने महान पुण्यात्मा के बारे में पूछा है उन पर मैं पहले ही एक लेख लिख चूका हूँ , उसका लिंक है :- http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/04/07/खुदा-तो-मिला-मगर-नहीं-मिल-स/ मैंने थोड़ा खुले दिल वाला हूँ लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं की मैं परिवारिक निर्माता -निर्देशक नहीं हूँ ..... मेरी फिल्मे भी लोग परिवार सहित देखने आते है ...... और रही बात मूर्ति की तो , जहाँ तक याद करने की बात है हम लोग अपने पड़दादा जी का नाम ही नहीं जानते तो फिर हमको हमारे पड़पोते क्या याद रखेंगे ? , शायद नहीं ...... इसलिए जो कुछ जैसा है ठीक है , जैसा चल रहा है उत्तम है ...... इज्जत कमाने में वर्षों लगते है तो गवाने में बस कुछेक पल , इसलिए बदनामी वाला नाम शायद ही कोई चाहेगा ....... फिर भी अगर आपकी नजर में कोई तरीका हो तो जरूर बताए ..... आपकी इस स्नेहमयी टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय श्री राजकमल जी सादर अभिवादन नाम के नाम पर आपने अच्छा पैगाम दे दिया ...........लगता है आप भी मान-अपमान से ऊपर उठकर पानी में डुबकी लगाने की सोंच रहे हैं ......खैर आपकी मर्जी वैसे, बचपन में मेरा भी इसाई मिशनरी स्कूल से पाला पड़ा था ....वो तो उन लड़कियों का शुक्र था जो मुझपर हमेशा लाइन मारा करती थी जिससे मेरे बाल मन में यह पूर्ण विस्वास था कि एक दिन मेरी शादी अपने दम पर हो जाएगी (बाद में जो पता चला वह किसी और दिन ) ...........बहरहाल मेरे बहुत सारे सहपाठी पानी में डुबकी लेकर इसाई बन गए ....वहां के पादरी खुल के कहते थे ---नौकरी मिलेगी, छोकरी मिलेगी ........जब दिल्ली आया तो मेरे मेट्रो के दोस्तों ने मेरा नाम छोटा कर बैज बना दिया .......जिसमे इसाइयत कि झलक है अतः मोडर्न लगता है | अपने नाम पर सबसे खपा मेरा छोटा भाई है जिसका मेरे हीं तर्ज पर बासुकीनाथ नामकरण हुआ | वैसे मेरा भी नाम बाबा बैजनाथ की मन्नत का परिणाम है | नामों की इस श्रृंखला में एक तीसरा नाम विश्वनाथ जुट जाता अगर बाई चांस तीसरा भाई होता | मै भी अपने बेटे का नाम सोंच रहा हूँ (बेटी का नाम मेरी पत्नी सोंच रही होगी ) यदि आपलोंगों के आशीर्वाद से किसी दिन मेरी शादी हो जाय | बाकी रब की इच्छा | धन्यवाद |

के द्वारा: baijnathpandey

मेरा आप सभी से यह विनम्र निवेदन कम अल्टीमेटम है की मुझ नाचीज के लिए एक अदद लड़की की तलाश कर दीजिए , जरा ज़ल्दी से ….. वरना कहीं ऐसा ना ही की आने वाले समय में प्रिय राज +कमल+किशोर+अलबर्ट भाई आप के दो चार और नाम और हम लोग तलाश देंगे और रही लड़की खोजने वाली ये बात तो क्या डर नहीं लगता ये लेख आप का घर पर भी तो लोग पढ़ते होंगे बच के रहना रे बाबा ..मोगाम्बो खुश हुआ सब सुन की आप भी अब अपनी पत्थर की मूर्तियाँ बना बना लोगों को और प्रेरित करने जा रहे हो हाँ काम में क्या रखा है सब नाम में ही तो है जैसे गरीब दास देखो तो करोड़ पति मुन्नी इतना प्यारा नाम आज बदनाम कर दी गयी ..नाम कमाओ -कुछ ऐसा आड़ा टेढ़ा कर जो मीडिया में छा जाये पता नहीं आप महारानी पूनम पाण्डेय की महिमा क्यों नहीं गाए बिना उनकी महिमा के विश्व कप जितने का मलाल नहीं रह गया बहुत बहुत धन्यवाद सुन्दर सार्थक लम्बे चौड़े लेख के लिए इतनी सुबह आप के जगाने पर भी लोग सोते रहें तो हम और क्या करें बताइए हम भी अपनी कुछ मूर्ति गढ़वाएं और किसी मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे चर्च के पास लगा अमर अभी से हो जाएँ ????

के द्वारा: surendrashuklabhramar5

के द्वारा: आर.एन. शाही

प्रिय सचिन भाई ..... नमस्कार ! अगर कुछ हलकी फुलकी बात करूँ तो इसकी शुरुआत शायद संजे दत्त कि फिल्मों से हो गई थी कि आज कि नोजवान पीढ़ी के लोगों ने गाँधी जी को आदर देना और उनको याद करना सिखा तथा उनके तौर त्रिको को जाना ..... जब तक कोई जन क्रांति नहीं आती या फिर कोई जन जागरण अभियान जोर शोर से चलाया नहीं जाता तब तक कुछ भी बदलाव आना नामुमकिन है ..... क्योंकि आजके समय के हमारे नेताओं से कोई भी आशा बिलकुल बेमानी है ..... अब तो हमको बस आदरणीय अन्ना हजारे जी का ही आसरा है , बाकि सब उस कुदरत कि मर्जी पर निर्भर है जिसकी मर्ज़ी के बिना एक पत्ता भी नही हिल सकता है ..... देखते है कि हमारे भविष्य में क्या शुभ छुपा हुआ है ..... आपका आभारी

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय मिश्रा जी ...... सादर अभिवादन ! मेरा यह लेख आपकी प्रेरणा का ही नतीज़ा है .... एक बार मेरे बिगबास ने मुझसे सलाह ली कि गाडियों के ड्राईवर थोड़ी बहुत हेराफेरी करते है ....इनको बदले देते है फिर सुधार होगा ..... मेरा यह कहना था कि बॉस भगवान ने आजतक कोई भी ऐसा ड्राइवर नहीं बनाया है शायद जोकि थोड़ी बहुत हेराफेरी न करता हो .... नए लोग आयेंगे थोड़े दिन के लिए ही शायद ठीक चलेंगे , लेकिन बाद में अपने असली रंग में आ ही जायेंगे ..... मेरी उसी सलाह का नतीज़ा है कि उनमे से एक ड्राइवर आज भी हमारे पास है और बॉस कि भी यह मानसिकता हो गई है कि इनको अपने नशे पानी के लिए थोड़ी बहुत छूट मिलनी ही चाहिए ..... लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि मैं बुराइओ के पक्ष में हूँ ....मेरे स्वर्गीय पिता जी का नाम आज भी एक ईमानदार सख्श के तौर पर लिया जाता है ...उनकी मौत के दो महीने के भीतर ही हमको उनका नब्बे प्रतिशत बकाया मिल गया था और उनकी जगह पर मेरी माँ कि नोकरी लग गई थी .... लोग उनके सन्मान में हमारे लिए कुर्सी से उठ कर खड़े हो जाते थे ..... धन्यवाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma

अंत में मेरा कहना यही है की हर वोह तरीका उन चोर रास्तो को बंद करने के लिए अपनाया जाना चाहिए जिन पर चल कर जाने में या फिर अनजाने में काला धन पैदा होता है + खर्च होता है + बढ़ता है ….. प्रिय राज कमल भाई बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति आइये इसी तरह हम जन लोकपाल बिल ड्राफ्ट करते रहें ताकि कुछ तो ये बातें लोगों तक पहुंचे उनका अनुपालन हो हमारे नए कानून में शायद इसमें से कुछ शामिल हो संस्कार व् प्यार अपने देश के लिए जज्बा , सच्चाई , ईमानदारी जो कुछ मूल मन्त्र हैं उनका जब तक हम पालन नहीं करेंगे उन्हें अपना एक अंग नहीं बना लेंगे तब तक ऐसे ही स्वार्थ , कदाचार, घृणा, भ्रस्टाचार रूपी असुर छाते रहेंगे और इसका दंश झेलने वाला कोई और नहीं हम सब और केवल हम सब होंगे , बहुत ही सुन्दर लेख के लिए आप को बधाई सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५

के द्वारा: surendrashuklabhramar5

आदरणीय श्री राजकमल जी, सर्वप्रथम अच्छे आलेख के लिए बधाई आपने जो सुझाव दिए हैं अगर उसपर अमल हो जाय तो क्या बात हो किन्तु मुश्किल यहीं खड़ी होती है मसलन, समाज से दहेज़ का खात्मा हो मगर कैसे ? सरकारी स्कूलों में आज भी लगभग फ्री शिक्षा मिलती है मगर वहां जाता है कौन ? जिन जिन बिमारियों के लिए अभीतक सरकार ने फ्री दवाएं उपलब्ध कराई है वो सभी ब्लैक में बिकी है | श्रीमती इंदिरा गाँधी ने जनसँख्या नियंत्रण का उपाय सोंचा था ( मगर तरीका गलत था ) उसका क्या हस्र हुआ ? जो रिश्वत लेने के लिए प्रतिबद्ध हैं उन्हें कैसे रोका जाय ? किन्तु फिर भी ये आस है कि देर-सवेर इनका समाधान निकल कर सामने आयेगा ...........शायद फिर हम सबों का स्वप्न साकार हो जाय | धन्यवाद |

के द्वारा: baijnathpandey

नीलम जी .... नमस्कार ! समय की कमी के कारण मैं इस यात्रा वर्तांत को अपने पिछले माता नैना देवी जी के उपर लिखे लेख की भांति रोचक नहीं बना पाया ..... फिर भी आपने इसको पसंद किया , उसके लिए मैं आपका आभारी हूँ ..... सच्चाई तो और भी थी जिसको की मुझको लेख के लिखने के बाद याद आई ..... वाहन पर सिर्फ अष्टमी और नौमी के दो दिनों में ही जागरण होता है , जबकि वहां पर सिर्फ नो दिनों में ही करोड़ो का चढ़ावा चढ़ता है ..... अगर उस सप्तमी के दिन भी वहां पर जागरण हो रहा होता तो मैं कदापि सौने की गलती न करता और माता रानी का भरपूर आशीर्वाद प्राप्त करता ..... आपका बहुत -२ आभार आप पर भी माता रानी का आशीर्वाद सदेव बरसता रहे बोलो माता रानी की जय

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय राजेन्द्र भाई ....नमस्कार ! वोह आये घर में हमारे यह उस खुदा की कुदरत है कभी हम अपने चिथडो को तो कभी घर की टूटी हुई दरों दीवारों को देखते है ..... वैसे खण्डहर बताते है की कभी यह (राजकमल )इमारत भी आलिशान थी ...... आपके ब्लॉग ही ढूंढे से नहीं मिलते है न नए और न ही पुराने ...... इसलिए गोल्डन जुबली से फिर से सिल्वर जुबली पर आ गए है ..... आपके साथ -२ हमारा भी हाल कुछ -२ ऐसा ही हो चला है आजकल .... और रही बात प्रेस कार्ड की तो वोह तो ब्लागर आफ दा ईअर राजिंदर रतूडी (विदाउट ऐनी फियर) न कोई पंगा न कोई भसुडी को ही मिलता है अपनी किस्मत में कहाँ .... हाँ आप अगर अपने वाला दे दे थोड़ी देर के लिए तो यार लोगो की भी शान बढ़ जाए थोड़ी बहुत .... आप पर भी माता मनसा देवी जी की किरपा और स्नेह बरसता रहे सदेव ही ..... बोलो प्रेम से बोलो जोर से जय माता रानी की

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय वाजपेई जी .... सादर प्रणाम ! आप मुझ नाचीज के साथ श्री -२ 1008 मत लगाया कीजिये , इससे तो मैं शर्म से जीते जी ही मर जाता हूँ ...... आप के श्रधा भावों से मुझको किसी राजा के उस वजीर का स्मरण हो आया जबकि शिकार के लिए चलते समय उसने कहा था की महाराज जरा रुकिए मैं अपने इष्टदेव का ध्यान कर लूँ ..... और जब राजा न बाद में देखा तो घोड़े की पीठ पर दही गिरा हुआ था ..... राजा के पूछने पर वजीर ने बताया की महाराज मैं अपने ध्यान में प्रभु को दहीं का भोग लगा रहा था ..... तो उसकी सच्ची श्रद्धा के कारण प्रभु ने उसका ख्याल करने वाला दही ही असल में न केवल कबूल किया बल्कि दुनिया को भी उसकी भक्ति की शक्ति से रूबरू करवाया ..... आज सच में ही मैं आपको भी मान गया ..... आपको ढेरो प्रणाम व् आभार आप पर भी माता रानी की किरपा और आशीर्वाद हमेशा ही बना रहे जय माता की

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: Rajkamal Sharma

मूर्ति से आँखे मिलते ही लगा की जैसे वोह मुझको अपनी तरफ बुला रही है और मैं बस एक चुम्बक की तरह उनकी तरफ खींचता चला गया ….. मैंने उस भवन में माता रानी के + उनकी जोत के जी भर के इतने नजदीक से दर्शन किये की प्यासी रूह को करार आ गया कमल भाई बड़ी देर की हुजूर आते आते आँखें तरस रही थी हम क्या जानते थे कि प्रसाद और लंगर के कारण विलम्ब जय माँ मंशा देवी- मन की मंशा पूरी करो मंशा मोरी मैया व्यग्य और भक्ति से भरा ये प्यारा लेख छवि सहित हमारी नजरों में बस गया हमें इसी तरह भारत भ्रमण कराते रहिये आप का ये प्रयास हमारे दर्द को , देश , दिल में लगी आग को बुझाने में सहायक हो इसी आकांशा व् कामना में आप का शुक्ल भ्रम्र५

के द्वारा: surendrashuklabhramar5

प्रिय सचिन भाई ....नमस्कार ! अब वोह मोहतरमा एक खासमखास सख्शियत बन चुकी है , इसलिए मेरी पहुँच से तो शायद दूर ही है अभी तक ...... इस मामले में आप फ्रीदा पिंटो का उदाहरण भी देख सकते है , आज वोह कहाँ से कहाँ पहुँच गई है .....वोह तो अपने टैलेन्ट के बल पर पहुंची है मगर इनका \'टैलेन्ट\' अभी दुनिया ने देखना है ..... लेकिन यह पश्चिम वाले भी ना बहुत ही कमाल के है , बस एक बार इनको किसी में टैलेन्ट कि भनक पड़ जाए फिर उसके हुनर को बाहर निकल कर ले ही आते है कोई भी हथकण्डा अपना कर ..... इसलिए अब उम्मीद यही बंधती है कि अब ज्यादातर यह मोहतरमा विदेशों में ही दिखाई देगी , वैसे भी हमारे भारत देश में बेशर्म लोगों के लिए जगह ही कहाँ है ..... आपका बहुत -२ आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

आदरणीय श्री राजकमल जी सादर अभिवादन ...बेहतरीन पोस्ट | होली के बहाने सामजिक सन्देश देती हुई हर बिंदु पर सफल | ..दहेज़ जैसे दानव को हमारे सामाज ने इस कदर पाला है ..कि शादी आज सुधा नहीं विष का प्याला है मम्मी को चाहिए आज बहु नहीं खजाना है गरीबों कि लड़कियों को रिजेक्ट करने को खोजती वो बहाना है पिताजी मुझे बेंचकर बराबर करेंगे खर्च मुझसे अच्छे वो जो खुद हीं कर लेते हैं सर्च मालदारों कि ओर से जब आता कोई प्रस्ताव है उत्साह से भरे मेरे बहनों के हाव-भाव है मनसा मेरी देखकर सभी शशंकित है चेहरे पर मेरे ये भाव अंकित है ....शादी हो न हो हमें गवारा है दहेज़ नहीं लेंगे ये संकल्प हमारा है ...........एक बार पुनः धन्यवाद |

के द्वारा: baijnathpandey

प्रिय अश्वनी भाई ....नमस्कार ! आपका स्नेह भरा कमेन्ट पाकर मन बहुत खुश है .... अब इस मंच पर मेरी एक बहन दिव्या भी है तो उसका भी ध्यान रखना पड़ता है ..... लेकिन फिर भी आपके लिए एक नई पोस्ट इस कांटेस्ट के बाद "प्यार दो - दो ---- प्यार लो -लो" पेश करूँगा ..... ************************************************************************************************************** पहले मेरा इस कांटेस्ट में भाग लेने का कोई इरादा नहीं था , लेकिन फिर बाद में अचानक ही मन में आया की अगर रब्ब ना करे कल को जाना ही पड़ गया तो सबके साथ होली के कुछेक रंगों भरी यादे लेकर क्यों ना रुखसत हुआ जाए ..... ********************************************************************************************************* आपने मेरी पुरानी याद पूछी है तो सिर्फ आपके लिए हाज़िर है :- एक बार होली को मैं भगवान से यह जिद्द कर के अपने घर के चौबारे में छुप कर बैठ गया की आज तुम्हारी शक्ति देखता हूँ की आप मेरे साथ होली कैसे खेलते हो ...... सारा दिन बीत गया , सभी आ करके चले गए , जब शाम को मैं निश्चिन्त होकर नीचे उतर आया तो हमारे पड़ोस की एक लड़की अपने हाथों में थोड़ा सा गुलाल लेकर के आ गई ..... उसने हमारे परिवार के सभी सदस्यों के माथे पर तिलक लगाया ..... उस दिन से पहले और ना ही उस दिन के बाद आज तक मेरी उससे कभी भी कोई बात हुई है ..... बस वोह मेरी यादगार होली है जब की भगवान ने अपनी सत्ता और मर्ज़ी का एहसास मुझको करवाया था ..... आपका आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma

श्री राजकमल जी, पहली बात तो आप ये कहना बंद कर दीजिये की मैंने आप पर कोई एहसान किया है..दूसरी बात मैंने आप का लेख पढ़ते ही तुरंत एक पोस्ट ब्लॉग पर डाली ...आप उस पोस्ट को देखेंगे तो पायेंगे की बहुत ही कम प्रतिक्रिया आई है ऐसा क्यों ...मै एक बात बहुत ही स्पष्ट कह देना चाहता हूँ यही है हिन्दुस्तान जब वक्त आता है तो साथ में कोई नहीं दिखता..ऐसे ही किसी विषय को लेकर क्रान्ति नहीं हो सकती...सिर्फ लिख देना ही बड़ा नहीं होता कुछ कर दिखाना चाहिए,..मै एक पत्रकार का बेटा हूँ मेरे पिता कभी किसी के दबाव में नहीं आये और मै खुद कभी किसी के दबाव में नहीं आना चाहता हा मगर सच्चाई के लिए....अब यहाँ मै आपको सही मानू या फिर जे.जे. को मुझे यही समझ में नहीं आ रहा.. इसलिए मै इस विषय को यही खत्म करना चाहता हूँ और आपसे भी यही निवेदन करूँगा .....आगे की देखिये...आप अगर सही है तो मुझे नहीं लगता की आपको स्पष्टीकरण देना चाहिए..मुझे कहीं-कहीं पर आपके जवाब बहुत झल्लाहट वाले दिखे.....एक हास्य/व्यंग के रचनाकार को तो इतना गुस्सा आना ही नहीं चाहिए.... इसलिए मै पुनः आपसे निवेदन करता हूँ की इस विषय पर प्रतिक्रिया का दौर खत्म कीजिये...जिसको जो कहना है कहने दीजिये... आकाश तिवारी

के द्वारा: Aakash Tiwaari

भाई राजकमल जी, ’जागरण-जंक्शन से अलविदा’ होने के संबंध में-आपका यह लेख मॆंने एक बार नहीं दो बार पढा.मित्रों की प्रतिक्रियायें भी पढी.मुझे विश्वास ही नहीं हुआ-किसी भी समस्या के सामने सीना तानकर खडे होने वाला व्यक्ति इतना कमजोर कॆसे हो सकता हॆ? मित्र ! जीवन के हर क्षेत्र में जोखिम हॆ,असुरक्षा का भाव हॆ,लेकिन इस डर से हम जीवन जीना तो नहीं छोड सकते.जीवन समस्या का निदान ढूंढने में हॆ,उससे पलायन करने में नहीं.आपने अपने लेख में लिखा-." वैसे भी मेरे द्वारा इस मंच पर लिखने को लेकर बहुतो को इतनी तकलीफ नही थी जितना की मुझको मिलने वाले कमेंट्स को लेकर है (जिनको की मैं अपने साथिओं का प्यार मानता हूँ ) ……. मुझ पर यह भी आरोप लगाए गए की मैं कमेंट्स के लिए लिखता हूँ , दूसरों की चापलूसी करता हूँ , हमारा एक संगठित ग्रुप है . वगैरह -२ ना जाने क्या -२ ख जाने लगा है आजकल ….. इन सब बातों से ना केवल मन को ठेस पहुँचती है बल्कि दिल भी दुखी होता है " इन पंक्तियों को पढकर तो मुझे भी लगा-शायद मॆंने अपने लेख ’लंगोट बाले बाबा का आशिर्वाद’ में कुछ ब्लागर मित्रों के नाम का उपयोग करके गलती की हॆ.मॆं व्यक्तिगत तॊर पर यह बात स्वीकार करता हूं कि जब मॆं खुद ऒर मित्रों के ब्लाग पर टिप्पणियां देने के लिए समय नहीं निकाल पाता तो उनसे आशा क्यों करूं कि वे मेरे ब्लाग पर आकर टिप्पणी करें?कुछ मित्रों ने सही कहा यह तो give & take का मामला हॆ.मुझे टिप्पणियों के रुप में मित्रों से जो प्रोत्साहन मिल रहा हॆ,मॆं उससे पूरी तरह संतुष्ट हूं..रहा सवाल-लेखन का-हर ब्लागर के लेखन की अपनी शॆली होती हॆ.मॆं कभी-कभी गंभीर